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पंजाब में नशे की लत के ख़िलाफ़ मेथाडोन बना नया हथियार; 6 एमएमटी क्लीनिक शुरू, जल्द ही 6 और स्थापित किए जाएँगे

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पंजाब ने गंभीर ओपिओइड एडिक्शन से जूझ रहे लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य नशा मुक्ति उपचार मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी (एमएमटी) शुरू की है। मेथाडोन की शुरुआत राज्य की नशे के ख़िलाफ़ उपचार-केंद्रित रणनीति को और मज़बूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

अब तक राज्य में उपचार मुख्य रूप से 500 से अधिक आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) केंद्रों के माध्यम से ब्यूप्रेनॉर्फिन आधारित ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी और नशामुक्ति (एब्स्टिनेंस-आधारित) रिहैबिलिटेशन पर आधारित था। ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी में हानिकारक ओपिओइड की जगह चिकित्सकीय निगरानी में नियंत्रित दवाओं का उपयोग किया जाता है ताकि नशे की लत का उपचार किया जा सके। अब मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी ऐसे मरीज़ों के लिए एक अतिरिक्त उपचार विकल्प उपलब्ध करवाएगी, जो लंबे समय से ओपिओइड पर निर्भर हैं और जिन पर मौजूदा उपचार प्रभावी साबित नहीं हुए हैं।

वर्तमान में पंजाब में छह समर्पित मेथाडोन क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। ये सरकारी मेडिकल कॉलेज, फ़रीदकोट; सिविल अस्पताल, लुधियाना; सरकारी मेडिकल कॉलेज, पटियाला; तथा गुरदासपुर, मोहाली और जालंधर के ज़िला अस्पतालों में स्थापित किए गए हैं। राज्य सरकार आने वाले महीनों में छह और एमएमटी केंद्र स्थापित करने की योजना बना रही है, जिससे ऐसे समर्पित केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 12 हो जाएगी।

इस संबंध में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मेथाडोन सुविधाओं का विस्तार राज्य सरकार के नशा विरोधी अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ का हिस्सा है, जिसमें विशेष रूप से उन लोगों के रिहैबिलिटेशन पर ज़ोर दिया जा रहा है जो ओपिओइड पर निर्भर हैं और जिनमें दोबारा नशे की ओर लौटने का ख़तरा अधिक रहता है।उन्होंने कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही मेथाडोन मेंटेनेंस थेरेपी लंबे समय से ओपिओइड पर निर्भर लोगों के लिए एक प्रभावी उपचार विकल्प प्रदान करती है। यह उपचार पद्धति मरीज़ों के बेहतर स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करेगी और उन्हें अपने परिवार तथा समाज में सफलतापूर्वक पुनः स्थापित होने में मदद करेगी।”

नए क्लीनिक विशेष आउटपेशेंट सुविधाओं के रूप में कार्य करेंगे, जहाँ मरीज़ों को चिकित्सकीय निगरानी में मेथाडोन थेरेपी के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, मनोचिकित्सकीय परामर्श, दोबारा नशे की लत से बचाव संबंधी सेवाएँ , पारिवारिक काउंसलिंग तथा नियमित फॉलो-अप की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाएगी।

मरीज़ों को निर्धारित ख़ुराक लेने के लिए प्रतिदिन क्लीनिक आना होगा, जहाँ उन्हें चिकित्सा विशेषज्ञों की निगरानी में दवा दी जाएगी। दवा की प्रत्येक ख़ुराक चिकित्सकीय निगरानी में दी जाएगी ताकि उसके दुरुपयोग को रोका जा सके और उपचार का सही ढंग से पालन सुनिश्चित हो सके।

मेथाडोन थेरेपी क्या है?

मेथाडोन ओपिओइड उपयोग विकार (ओपिओइड यूज़ डिसऑर्डर) से पीड़ित लोगों, जैसे हेरोइन की लत से ग्रस्त मरीज़ों, के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित एक प्रभावी उपचार है।ओपिओइड यूज़ डिसऑर्डर के उपचार के लिए मेथाडोन को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की आवश्यक दवाओं की मॉडल सूची में भी शामिल किया गया है।यह दवा प्रशिक्षित डॉक्टरों की निगरानी में समग्र उपचार कार्यक्रम के तहत दी जाती है।

मेथाडोन मस्तिष्क के उन्हीं ओपिओइड रिसेप्टर्स से जुड़कर काम करता है, जिन पर हेरोइन और अन्य ओपिओइड काम करते हैं। निर्धारित ख़ुराक के अनुसार यह नशे की तीव्र इच्छा (क्रेविंग) को नियंत्रित करता है, नशा छोड़ने पर होने वाले लक्षणों (विदड्रॉल सिम्पटम्स) से राहत देता है तथा शरीर में ओपिओइड के प्रति सहनशीलता विकसित करता है, जिससे दोबारा ओपिओइड लेने पर ‘हाई’ महसूस नहीं होता। इससे मरीज़ का स्वास्थ्य स्थिर होता है और वह उपचार, रोज़गार तथा पारिवारिक जीवन में अधिक प्रभावी ढंग से भाग ले पाता है।

समय के साथ मरीज़ की स्वास्थ्य स्थिति और उपचार में हुई प्रगति को देखते हुए मेथाडोन की ख़ुराक धीरे-धीरे कम की जा सकती है। चूँकि मरीज़ प्रतिदिन क्लीनिक में चिकित्सकीय निगरानी में दवा का सेवन करते हैं, इसलिए इसके दुरुपयोग या अवैध इस्तेमाल की संभावना बहुत कम रहती है।

मेथाडोन लंबे समय तक असर करने वाली दवा है। इसकी एक दैनिक ख़ुराक आमतौर पर लगभग 24 घंटे तक नशा छोड़ने के लक्षणों और नशे की इच्छा को नियंत्रित रखती है, जिससे मरीज़ पूरे दिन सामान्य और स्थिर जीवन जी पाते हैं।

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तीर्थ यात्रा योजना को मिले भारी जनसमर्थन से डरकर कांग्रेस ने हिंसा का सहारा लिया: बलतेज पन्नू

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने मंगलवार को  आप सरकार की मुख्यमंत्री’ तीर्थ यात्रा’ स्कीम के तहत चल रही बस पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने कहा कि इस घटना कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंजाम दिया, जो इस जनहित पहल की बढ़ती लोकप्रियता और सफलता से बौखला गए है।

आप नेता शमिंदर सिंह खिंडा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा स्कीम राज्य की सबसे सफल जन कल्याण योजनाओं के तौर उभरी है, जिससे लाखों लोगों को फ्री धार्मिक यात्रा करने का मौका मिल रहा है।

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि विपक्षी पार्टियां भगवंत मान सरकार की वेलफेयर स्कीम की सफलता बर्दाश्त नहीं हो रही हैं। जब आप सरकार सत्ता में आई थी, तो विपक्ष ने दावा किया था कि यह तीन महीने भी नहीं चलेगी। जब सरकार ने तीन महीने पूरे किए, तो उन्होंने कहा कि यह एक साल भी पूरा नहीं करेगी। आज, सरकार सफलतापूर्वक अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर रही है।

बलतेज पन्नू ने यह भी इशारा किया कि जब भी मुख्यमंत्री भगवंत मान रूटीन मेडिकल चेक-अप के लिए जाते हैं, तो विपक्ष बार-बार बेबुनियाद अफवाहें फैलाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने हमेशा लोगों को गुमराह करने के लिए बेवजह के कयास लगाने की कोशिश की है।

तीर्थ यात्रा बस पर हुए हमले का ज़िक्र करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि अमृतसर रूरल पुलिस ने जिन दो लोगों – गुरपिंदर सिंह उर्फ ​​लाली और बलजीत सिंह शीशा – को गिरफ्तार किया है, उनके कांग्रेस पार्टी से संबंध हैं। उन्होंने कहा कि बस पर बिना किसी उकसावे या वजह के हमला किया गया। उन्होंने कहा कि इस हमले के पीछे सिर्फ यही वजह है कि धार्मिक यात्राओं से लौटने के बाद लोग भगवंत मान सरकार की जो तारीफ करते हैं, वह कांग्रेस को बर्दाश्त नहीं हो रही है। इस स्कीम का फायदा उठाने वाला हर भक्त सरकार की तारीफ करता है, जो कांग्रेस के लिए बर्दाश्त से बाहर हो गया है।

बलतेज पन्नू ने दावा किया कि कांग्रेस से जुड़े दो और लोगों, सनी और हरप्रीत सिंह ने पुलिस पर आरोपियों को छोड़ने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई रोकने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आरोपियों को किसने उकसाया था और हमले के पीछे बड़ी साजिश क्या थी।

भगवंत मान सरकार ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा स्कीम’ को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी को भी ऐसे प्रोग्राम में रुकावट डालने की इजाज़त नहीं देगी जिसने लाखों पंजाबियों को रूहानी सुकून और खुशी दी है।

इस बीच, शमिंदर सिंह खिंडा ने कहा कि 3.5 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु श्री आनंदपुर साहिब, माता नैना देवी जी और श्री दरबार साहिब समेत पवित्र धार्मिक जगहों पर जाकर इस स्कीम का लाभ ले चुके हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में सरकार हरिद्वार, ऋषिकेश, मथुरा, वृंदावन, खाटू श्याम और सालासर धाम के लिए भी धार्मिक यात्रा सर्विस शुरू करेगी।

उन्होंने कहा कि पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सारी ज़िम्मेदारी पंजाब सरकार खुद उठाती है, जिसमें ट्रांसपोर्टेशन, रहने की जगह, खाना और दूसरे इंतज़ाम शामिल हैं। खिंडा ने कहा कि बहुत से लोग, खासकर आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों से, पैसे की तंगी की वजह से कभी इन धार्मिक जगहों पर नहीं जा पाए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे ही लोगों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा स्कीम शुरू की गई थी। यह स्कीम शुरू से ही बिना किसी रुकावट के लगातार चल रही है और एक दिन के लिए भी नहीं रुकी है। लाखों फ़ायदा उठाने वालों के बावजूद, इंतज़ामों को लेकर एक भी शिकायत नहीं आई है।

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भगवंत मान सरकार की शिक्षा क्रांति से राज्य के विद्यार्थियों को अपना व्यवसाय शुरू करने में मिली बड़ी मदद ; 20,000 से अधिक छात्र उद्यमों ने पहले ही वर्ष में कमाए 90 करोड़ रुपये

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की ‘शिक्षा क्रांति’ के अंतर्गत राज्यभर के उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शुरू किए गए ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम के अत्यंत उत्साहजनक और सार्थक परिणाम सामने आए हैं। बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक., बी.वोकेशनल तथा आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य विषय के रूप में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के पहले वर्ष में लगभग 95,000 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। इनमें से 25,693 विद्यार्थियों ने अपने स्वयं के व्यवसाय शुरू किए, जबकि 20,241 छात्र उद्यमों ने पहले ही वर्ष में लगभग 90 करोड़ रुपये का कारोबार किया।

इस उपलब्धि पर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “पंजाब का बिजनेस क्लास कार्यक्रम शिक्षा के उद्देश्य को नई परिभाषा दे रहा है। हमारा लक्ष्य केवल डिग्रियां देना नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले, उद्यमी और रोजगार सृजित करने वाले युवाओं की नई पीढ़ी तैयार करना है। लगभग 95,000 विद्यार्थियों ने अपने व्यावसायिक विचारों पर काम किया, जिनमें से 25,000 से अधिक ने अपने स्टार्टअप शुरू किए। पहले ही वर्ष में इन उद्यमों ने सामूहिक रूप से लगभग 90 करोड़ रुपये की कमाई की। इससे स्पष्ट है कि यदि युवाओं को सही अवसर मिलें तो वे सफल व्यवसाय खड़े कर सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब की शिक्षा क्रांति हमारे युवाओं को केवल नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए रोजगार और अवसर सृजित करने के लिए तैयार कर रही है।”

इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब के युवा केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं रोजगार सृजित करें और आर्थिक विकास में भागीदार बनें। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य की 20 विश्वविद्यालयों, 494 कॉलेजों, 320 आईटीआई और 91 पॉलिटेक्निक सहित कुल 925 उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. तथा बी.वोकेशनल के विद्यार्थियों के लिए अकादमिक सत्र 2025-26 के दौरान दो-क्रेडिट का अनिवार्य पाठ्यक्रम शुरू किया गया।

पारंपरिक शिक्षा, जो केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित रहती है, उससे अलग यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावसायिक अवसरों की पहचान, ग्राहक अनुसंधान, बाजार सत्यापन, व्यवसाय स्थापित करना, डिजिटल उपस्थिति, मूल्य निर्धारण रणनीति, ग्राहक प्राप्ति, वित्तीय योजना, संचार कौशल तथा समस्या समाधान जैसे व्यावहारिक उद्यमिता कौशल सिखाता है। परिणामस्वरूप लगभग 57,000 विद्यार्थी (करीब 60 प्रतिशत प्रतिभागी) पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल हुए।

इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को ई-कॉमर्स, बेकरी एवं फूड सर्विस, डिजिटल कंटेंट निर्माण, कोडिंग एवं प्रोफेशनल सेवाएं, ग्राफिक डिजाइनिंग, फिटनेस एवं वेलनेस, रिटेल, ब्यूटी एवं पर्सनल केयर, कृषि आधारित उद्यम, हस्तशिल्प तथा अन्य स्थानीय सेवा व्यवसायों में अपना उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे पंजाब में देखने को मिल रहा है।

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के छात्र सौरव ने अपने माचा पेय ब्रांड ‘मॉक, इन माचा’ के माध्यम से कॉलेज कार्यक्रमों में उत्पाद बेचकर लगभग 90,000 रुपये कमाए।इस उद्मम ने अपने विलक्षण फ्लेवरों और ताज़गी के कारण के कारण ख्याति हासिल की।

महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के शरणवीर सिंह ने ‘स्किलएक्सस’ नामक डिजिटल करियर गाइडेंस प्लेटफॉर्म विकसित किया, जिसके 2.5 लाख से अधिक उपयोगकर्ता हो चुके हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि विद्यार्थी इस कार्यक्रम के माध्यम से बड़े स्तर पर तकनीक आधारित उद्यम स्थापित कर रहे हैं।

संत बाबा भाग सिंह विश्वविद्यालय, जालंधर के पंकज ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से ‘जारिया ज्वेलरी’ नाम से ऑनलाइन आर्टिफिशियल ज्वेलरी व्यवसाय शुरू किया और लगभग 150 ग्राहकों को सेवाएं देकर 30,000 रुपये की आय अर्जित की।

सरकारी आईटीआई, पटियाला के कमलजीत सिंह ने ‘केएमएल मशरूम’ की स्थापना की, जो स्थानीय बाजारों और रेस्तरां को बटन मशरूम की आपूर्ति करता है। उन्होंने लगभग 1.5 लाख रुपये कमाए और अपने ब्रांड की पैकेजिंग भी विकसित की।

सरकारी आईटीआई (महिला), मोहाली की गगनप्रीत कौर रंगी ने ‘नेल स्टूडियो बाय गगन’ नाम से घर आधारित नेल आर्ट व्यवसाय शुरू किया, जो इंस्टाग्राम और स्थानीय सैलून के सहयोग से संचालित हो रहा है। इससे उन्होंने लगभग 55,000 रुपये की कमाई की।

सरकारी आईटीआई, मोहाली के रमनदीप सिंह ने ‘क्वालिटी इलेक्ट्रॉनिक स्टोर’ नाम से ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने अपनी वेबसाइट बनाई और सोशल मीडिया के माध्यम से बिक्री का विस्तार किया।

ये उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम राज्यभर के युवाओं के लिए उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहा है।

पहले ही वर्ष में मिली अभूतपूर्व सफलता और उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने सर्वसम्मति से शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी स्नातक (अंडरग्रेजुएट) डिग्री कार्यक्रमों में ‘बिजनेस क्लास’ का विस्तार करने की सिफारिश की है। पहले यह कार्यक्रम केवल बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. और बी.वोकेशनल तक सीमित था, लेकिन अब इसे बी.ए., बी.एससी. तथा अन्य सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में भी लागू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को नियमित शिक्षा के साथ व्यावहारिक उद्यमिता कौशल प्राप्त हो सके।

‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम की सफलता मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही पंजाब की शिक्षा क्रांति की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उच्च शिक्षा में उद्यमिता को शामिल कर सरकार विद्यार्थियों को ऐसे व्यावहारिक कौशल प्रदान कर रही है, जिनकी बदौलत वे पढ़ाई के साथ-साथ अपना व्यवसाय शुरू कर सकें और भविष्य में रोजगार देने वाले उद्यमी बन सकें।

महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के बी.टेक. (कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग) के छात्र शरणवीर सिंह ने कहा, “पंजाब सरकार द्वारा उद्यमिता को दी गई प्राथमिकता ने मेरे जैसे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा किया है। ‘स्किलएक्सस’ उसी सोच को एक डिजिटल करियर गाइडेंस इकोसिस्टम में बदलने का मेरा प्रयास है, जो विद्यार्थियों को सही करियर चुनने में मदद करता है।”

सरकारी आईटीआई (महिला), मोहाली की गगनप्रीत कौर रंगी ने कहा, *“‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम से पहले मुझे लगता था कि नौकरी ही एकमात्र विकल्प है। इस कार्यक्रम ने मेरी सोच बदल दी और मुझे अपने विचारों पर विश्वास करना सिखाया। आज मैं केवल नौकरी तलाशने के बजाय अपना व्यवसाय स्थापित करने और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रेरित हूं।”

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का बड़ी राहत का ऐलान: पंजाब में बनाए जाएंगे 10 लाख नए राशन कार्ड

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खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने तथा बिना किसी भ्रष्टाचार या पक्षपात के प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज घोषणा की कि राज्य सरकार ‘न कैश, न सिफारिश’ के सिद्धांत पर आधारित पारदर्शी एवं तकनीक-संचालित प्रणाली के तहत 10 लाख नए राशन कार्ड जारी करेगी।

नए राशन कार्ड बनवाने तथा परिवार के नए सदस्यों के नाम जोड़ने के लिए आवेदन 22 जुलाई से शुरू होंगे। इस प्रक्रिया में समाज के कमजोर वर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी। कुल लाभार्थियों में से 7 लाख राशन कार्ड नए पात्र परिवारों को जारी किए जाएंगे, जबकि 3 लाख ई-श्रम पंजीकृत एवं प्रवासी मजदूरों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के दायरे में लाया जाएगा। राज्य में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रत्येक नए लाभार्थी को 5 किलोग्राम गेहूं के साथ ‘मेरी रसोई पौष्टिक किट’ भी प्रदान की जाएगी।

प्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राशन कार्ड वितरण का यह अभियान ‘न कैश, न सिफारिश’ के दोहरे सिद्धांत पर आधारित होगा। उन्होंने कहा, “पंजाब राशन कार्ड प्रणाली में 10 लाख नए पात्र लाभार्थियों को शामिल कर रहा है, जो हाल के वर्षों में खाद्य सुरक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा अभियान है। इनमें लगभग 3 लाख ई-श्रम एवं प्रवासी मजदूरों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत शामिल किया जाएगा, जबकि शेष 7 लाख पात्र परिवारों को नए आवेदन तथा मौजूदा राशन कार्डों में नए सदस्यों के नाम जोड़कर लाभ दिया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सुनिश्चित किया है कि यह पूरी प्रक्रिया भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह मुक्त रहे। उन्होंने कहा, “आज पंजाब में सरकारी नौकरियां न पैसे से मिलती हैं और न ही सिफारिश से। इसी प्रकार अब राशन कार्ड भी न सिफारिश, न बिचौलियों और न ही रिश्वत के आधार पर जारी होंगे। प्रत्येक आवेदक का मूल्यांकन एक समान पारदर्शी एवं डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, ताकि प्रत्येक पात्र परिवार को समान अवसर मिल सके।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया को सरल एवं सुविधाजनक बनाया गया है। उन्होंने कहा, “लोग ऑनलाइन, सेवा केंद्रों, कॉमन सर्विस सेंटरों अथवा जिला खाद्य कार्यालयों में आवेदन कर सकते हैं। प्रत्येक आवेदक को एसएमएस के माध्यम से रसीद प्राप्त होगी और वह अपने आवेदन की स्थिति भी ऑनलाइन देख सकेगा। आवेदन का लिंक खाद्य विभाग की वेबसाइट के होम पेज पर भी उपलब्ध रहेगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राशन कार्ड जारी करने की पूरी व्यवस्था में व्यापक सुधार किया गया है ताकि पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा, “पहले मैनुअल सत्यापन और मनमाने निर्णयों के कारण भ्रष्टाचार की शिकायतें आती थीं और वास्तविक जरूरतमंद लोग वंचित रह जाते थे। अब डिजिटल सत्यापन, ऑनलाइन ट्रैकिंग, अंक-आधारित मूल्यांकन प्रणाली तथा पूर्ण पारदर्शिता के माध्यम से केवल पात्र परिवारों को ही लाभ मिलेगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जवाबदेही सुनिश्चित करने में तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा, “प्रत्येक आवेदन का घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा, जिसमें जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प आधारित निरीक्षण के साथ सरकारी डाटाबेस के माध्यम से एपीआई आधारित सत्यापन भी होगा। प्रत्येक स्वीकृति अथवा अस्वीकृति का पूरा डिजिटल ऑडिट किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने समाज के सबसे कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देने के लिए निष्पक्ष व्यवस्था अपनाई है। उन्होंने कहा, “पात्र आवेदकों को अंक-आधारित पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से प्राथमिकता दी जाएगी। विधवाओं, दिव्यांग व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, गंभीर बीमारियों से प्रभावित परिवारों, कच्चे मकानों में रहने वाले तथा कम आय वाले परिवारों को अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से लाभार्थियों की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी। उन्होंने कहा, “प्रत्येक नए पात्र लाभार्थी को 5 किलोग्राम गेहूं के साथ ‘मेरी रसोई पौष्टिक किट’ भी मिलेगी। ‘मेरी रसोई’ योजना के तहत पहले से ही 32 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं। हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है कि प्रत्येक पात्र परिवार को बिना रिश्वत और बिना सिफारिश उसका वैध अधिकार मिले।”

पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पहले कल्याणकारी योजनाओं का लाभ राजनीतिक संरक्षण के आधार पर दिया जाता था। उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों ने केवल अपने चहेतों के ही राशन कार्ड बनाए। हमारी सरकार ने पक्षपात की जगह पारदर्शिता को अपनाया है। तकनीक यह सुनिश्चित करेगी कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक निष्पक्षता, ईमानदारी और बिना किसी भेदभाव के पहुंचे।”

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