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Mahatma Gandhi की समाधि पर जाकर केजरीवाल और मनीष सिसोदिया हुए नतमस्तक, सत्याग्रह के मार्ग पर डटे रहने की मांगी शक्ति

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता व पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया मंगलवार को राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर नतमस्तक हुए। उनके साथ पार्टी के विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ सत्याग्रह की राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करते हुए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हम न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।

अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि आज मनीष सिसोदिया और अन्य साथियों के साथ राजघाट पहुंच कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन किया। मेरी बापू से यही प्रार्थना है कि उनके दिखाए ‘सत्याग्रह’ के मार्ग पर चलने के हमारे संकल्प को वे सदैव शक्ति दें। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से, सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।

वहीं, मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मामला अदालत का है। हम अदालत का बहुत सम्मान करते हैं। हम अपने देश की न्याय प्रणाली का बहुत सम्मान करते हैं, क्योंकि इसी न्याय प्रणाली और न्यायपालिका ने हमें बेल दिलवाई और आरोप मुक्त किया है। आज हम लोग अगर आजाद घूम रहे हैं, तो हमारी न्याय प्रणाली की वजह से ही घूम रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, जिनकी वजह से हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। वे सभी हमने जज साहिबा को लिखी चिट्ठी में बयां कर दिए हैं।

उधर, ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बापू समाधि पर नतमस्तक होने के बाद एक्स पर कहा कि मंगलवार को राजघाट जाकर पूज्य बापू की समाधि पर अरविंद केजरीवाल के साथ नतमस्तक हुआ। महात्मा गांधी जी ने हमें हमेशा सत्य के रास्ते पर अडिग रहने और सत्य के लिए आत्मबल के साथ सत्याग्रह करने की प्रेरणा दी है। आज उसी मार्ग पर चलने का संकल्प और मजबूत हुआ।

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Heatwave Alert : बढ़ती गर्मी को लेकर सरकार सख्त, स्कूलों के लिए जारी किए कड़े निर्देश

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भीषण गर्मी और हीटवेव के बढ़ते खतरे को देखते हुए दिल्ली सरकार ने राजधानी के सभी स्कूलों के लिए सख्त और विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य छात्रों की सेहत और सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

मौजूदा तापमान में लगातार वृद्धि और हीटवेव की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए यह नया प्रोटोकॉल लागू किया गया है।

“वॉटर बेल” सिस्टम अनिवार्य

नए दिशा-निर्देशों के तहत स्कूलों में “वॉटर बेल” प्रणाली लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अंतर्गत हर 45 से 60 मिनट के अंतराल पर घंटी बजाई जाएगी, ताकि छात्रों को नियमित रूप से पानी पीने की याद दिलाई जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य डिहाइड्रेशन से बचाव करना और छात्रों को हाइड्रेट रखना है।

पीने के पानी और सुविधाओं पर जोर

सरकार ने स्कूल प्रशासन को निर्देश दिया है कि छात्र पर्याप्त मात्रा में पानी साथ लाएं। साथ ही, स्कूल परिसर में साफ और ठंडे पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बाहरी गतिविधियों पर रोक

तेज धूप से बचाने के लिए बाहरी गतिविधियों और असेंबली को सीमित करने को कहा गया है। इन्हें छायादार या इनडोर स्थानों पर आयोजित करने की सलाह दी गई है। खुले में कक्षाएं लगाने पर भी रोक लगा दी गई है।

स्वास्थ्य जागरूकता पर विशेष फोकस

स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि हीटवेव से संबंधित जानकारी, शिक्षा और संचार (IEC) सामग्री को नोटिस बोर्ड, गलियारों और कक्षाओं में प्रदर्शित किया जाए। छात्रों को गर्मी से बचाव, पानी की महत्ता और हीट से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों के बारे में जागरूक किया जाए।

मेडिकल और इमरजेंसी व्यवस्था

जरूरत पड़ने पर तुरंत प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा “बड्डी सिस्टम” लागू किया जाएगा, जिसके तहत हर छात्र को एक साथी के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि वे एक-दूसरे की सेहत पर नजर रख सकें।

खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों पर नियंत्रण

भीषण गर्मी के दौरान छात्रों को भारी और बाहरी शारीरिक गतिविधियों से दूर रखने की सलाह दी गई है।

निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त

इन सभी दिशा-निर्देशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए हर स्कूल में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जो पूरे सिस्टम की निगरानी करेगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए विधायक पूरी ज़िम्मेदारी लें और हर गांव की रोज़ की जवाबदेही सुनिश्चित करें: Manish Sisodia

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आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब प्रभारी और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अमृतसर में ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम के तहत पार्टी नेताओं, विधायकों, ब्लॉक इंचार्ज और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए विधायकों को पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और हर गांव की रोजाना जवाबदेही पक्की करनी होगी। उन्होंने पूरे पंजाब में नशे के खिलाफ एक मजबूत और मिशन-मोड लड़ाई की अपील की, और इस बात पर जोर दिया कि ‘आप’ की नींव संघर्ष और कुर्बानी में है, न कि पावर या सुविधाओं में।

भारी सभा को संबोधित करते हुए, आप के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया ने कहा, “आम आदमी पार्टी जंतर-मंतर पर अरविंद केजरीवाल जी, हम सभी और आप में से कई लोगों के सहयोग से 14 दिन की भूख हड़ताल से निकली है। यह पार्टी सत्ता का आनंद लेने या विधायक मंत्री बनने के लिए ड्राइंग रूम में नहीं बनी। यह संघर्ष से पैदा हुई पार्टी है और हमने कभी हिम्मत नहीं हारी है।”

दिल्ली सरकार के सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार बनने के बाद पहला हमला केंद्र सरकार द्वारा किया। जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने, तो हमने तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक, सभी लेवल पर भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की पॉलिसी अपनाई। केंद्र को खतरा महसूस हुआ और उसने दिल्ली सरकार से एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) छीन ली। बाद में आईएएस अधिकारियों से लेकर शिक्षकों और सेवादारों तक के ट्रांसफर की पावर भी छीन ली गई। सभी पावर छीन लेने के बावजूद, हमने काम करना जारी रखा और नतीजे दिए।

उन्होंने आगे कहा कि सत्ता जाने के बाद भी, हमने ऐसे स्कूल और अस्पताल बनाए जो भारत में पहले कभी नहीं देखे गए। हमने बिजली और पानी पर ऐसी नीतियां लागू कीं जो एक मिसाल बन गईं। अरविंद केजरीवाल कह सकते थे कि वह शक्तियों के बिना काम नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने करके दिखाया। यही वजह है कि दिल्ली के लोगों ने उन्हें 2020 में 70 में से 62 सीटें दीं।”

आप नेताओं को राजनीति तौर पर निशाना बनाने के बारे में मनीष सिसोदिया ने कहा कि ईमानदारी की इस इमेज को तोड़ने के लिए नरेंद्र मोदी जी ने अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट साबित करने की कोशिश की। सत्येंद्र जैन को झूठे केस में गिरफ्तार किया गया। मुझ पर भी कथित शराब घोटाले का आरोप लगाया गया। पहले उन्होंने 10,000 करोड़ कहा, फिर 1,000 करोड़, फिर 100 करोड़ और कोर्ट में यह ज़ीरो हो गया। कोर्ट ने कहा कि कोई केस नहीं है।

हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि आपमें हिम्मत होनी चाहिए। यह एक दिन की लड़ाई नहीं है। यह एक लंबी लड़ाई है। आप गुरुओं और शहीदों की धरती पर पैदा हुए हैं। आपको वहीं से ताकत लेनी चाहिए। आज हम अपने लिए नहीं बल्कि अपने बच्चों के लिए लड़ रहे हैं। क्या आप गारंटी दे सकते हैं कि 10 साल बाद आपका बच्चा नशे में नहीं पड़ेगा? गारंटी बस यही है कि हम सब मिलकर पंजाब को नशा मुक्त बनाएं।

विधायकों और लोकल लीडरशिप को सीधे संबोधित करते हुए पंजाब आप प्रभारी ने कहा कि अगर एक भी गांव या एक भी वार्ड में नशा बिक रहा है, तो आपको नींद नहीं आनी चाहिए। कोई विधायक अपने ब्लॉक इंचार्ज को फोन करके क्यों नहीं पूछता कि क्या हो रहा है? विधायक खुद गांव क्यों नहीं जाता? ज़िम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।

उन्होंने जवाबदेही और तालमेल की अहमियत पर जोर देते हुए कहा, “24 मार्च से 31 मार्च तक सभी ब्लॉकों में मीटिंगें की जाएंगी। हर VDC रिपोर्ट देगी कि उनका गांव नशा मुक्त है या नहीं और किस हद तक नशा अभी भी बाकी है। अगर नशा बिक रहा है तो जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए। विधायक और हलका इंचार्ज ब्लॉक इंचार्जों का पूरा साथ दें।”

इस मुहिम के सामूहिक स्वरूप के बारे में उन्होंने कहा, “पंजाब में पहली बार सरकार, पुलिस और जनता ‘नशों के खिलाफ जंग’ जैसी मुहिम में ईमानदारी से मिलकर काम कर रहे हैं। पहले ऐसा समय था जब मंत्री भी नशा तस्करी में शामिल होते थे और माफिया की बजाय ईमानदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती थी। आज अरविंद केजरीवाल जी और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की स्पष्ट हिदायत है कि नशों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।”

उन्होंने ‘आप’ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए कहा, “अगर ‘आप’ का कोई दूर का कार्यकर्ता भी नशा तस्करी से जुड़ा पाया जाता है या नशा तस्करों से उसके संबंध पाए जाते हैं, तो उसे जेल भेजा जाना चाहिए। पार्टी और शासन दोनों में जीरो टॉलरेंस लागू होनी चाहिए।”

मनीष सिसोदिया ने शिकायतों के लिए गोपनीय रिपोर्टिंग प्रणाली के बारे में बताते हुए कहा, “शिकायतों के लिए तैयार की गई ऐप पूरी तरह गोपनीयता सुनिश्चित करती है। यहां तक कि मंत्री, कमिश्नर या मुख्यमंत्री को भी यह पता नहीं चल सकता कि जानकारी किसने दी है। सिर्फ की गई कार्रवाई को ही ट्रैक किया जा सकता है। इसलिए लोग निडर होकर रिपोर्ट करें।”

भावुक अपील करते हुए उन्होंने कहा, “अगर हम पंजाब के हर गांव और शहर को नशा मुक्त नहीं कर सकते, तो हमारा राजनीति में होना बेमानी है। अरविंद केजरीवाल इस बारे में बहुत गंभीर हैं और कहते हैं कि अगर हम असफल रहे तो हमें शर्म महसूस करनी चाहिए।”

उन्होंने पंजाब की आध्यात्मिक और क्रांतिकारी विरासत का हवाला देते हुए कहा, “यह गुरु साहिबान की, सेवा और हिम्मत की धरती है। यह शहीद-ए-आजम भगत सिंह, ऊधम सिंह, करतार सिंह सराभा और मदन लाल ढींगरा की धरती है। उनसे प्रेरणा लो। अगर शहीद-ए-आजम भगत सिंह हिचकिचाते तो आज हम कहां होते? अगर जरूरत पड़े तो नशा तस्करों को 40 बार जेल भेजो, लेकिन रुको मत।”

पार्टी नेताओं को सख्त संदेश देते हुए उन्होंने कहा, “अगर आपमें नशा माफिया से टक्कर लेने की हिम्मत नहीं है, तो अरविंद केजरीवाल को शर्मिंदा मत करो। पार्टी छोड़ दो। यह पार्टी लड़ने के लिए बनी है।”

अपना निजी अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, “CBI ने मेरे घर छापा मारा, अलमारियां खंगालीं, यहां तक कि पैसों की तलाश में तकिए भी फाड़ दिए। मैंने तीन साल तक झूठे आरोपों का बोझ उठाया। मुझसे पार्टी छोड़ने और विधायकों को तोड़ने के लिए कहा गया। लेकिन अरविंद केजरीवाल को छोड़ने का मतलब है ईमानदारी और शिक्षा के जरिए राष्ट्र निर्माण के सपने को छोड़ना। मैंने नहीं छोड़ा और आपको भी नहीं छोड़ना चाहिए।”

भविष्य की रणनीति की बात करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि 31 मार्च के बाद वह गांव-गांव की प्रगति का जायजा लेने के लिए निजी तौर पर ब्लॉक इंचार्जों और विधायकों से मिलेंगे। हर हलके को यह डेटा पेश करना होगा कि कितने गांव नशा मुक्त हो गए हैं और नशों को पूरी तरह खत्म करने के लिए समय-सीमा तय करनी होगी। यह लड़ाई सिर्फ लड़नी ही नहीं, बल्कि जीतनी भी है।

उन्होंने भरोसा जताया कि पूरी टीम नए इरादे के साथ लौटेगी और सामूहिक कोशिशों तथा दृढ़ संकल्प के साथ नशा मुक्त पंजाब का निर्माण करेगी।

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अरविंद केजरीवाल-मनीष सिसोदिया ने HC के चीफ जस्टिस को लिखी चिट्ठी, कर दी ये बड़ी मांग

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और दिल्ली आबकारी नीति मामले के कई अन्य आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। उन्होंने इस मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से किसी अन्य बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है।

पत्र में उन्होंने तर्क दिया है कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए मामले की सुनवाई एक निष्पक्ष बेंच द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इसी आबकारी मामले में जज द्वारा पारित कई आदेशों को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है।

अपने पत्र में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यह अनुरोध एक गंभीर और वास्तविक चिंता के कारण किया गया है। उन्हें डर है कि इस मामले में पूरी तरह से निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाएगी। उन्होंने मांग की है कि सीबीआई बनाम कुलदीप सिंह और अन्य मामले को किसी अन्य बेंच के सामने रखा जाए। इससे न्याय प्रणाली में निष्पक्षता और जनता का विश्वास बना रहेगा।

पत्र में बताया गया है कि 17 अगस्त 2022 को दर्ज सीबीआई एफआईआर में अरविंद केजरीवाल को आरोपी नंबर 18 बनाया गया था। उन्हें 26 जून 2024 को गिरफ्तार किया गया था। निचली अदालत ने 23 आरोपियों से जुड़ी पांच चार्जशीट पर लगभग दो महीने तक आरोपों पर बहस सुनी। इसके बाद 12 फरवरी 2026 को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। 27 फरवरी 2026 को विशेष सीबीआई अदालत ने एक विस्तृत आदेश पारित किया। इसमें सभी 23 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया।

दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही का हवाला देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई ने आरोप मुक्त करने के आदेश को चुनौती देते हुए लगभग 50 पन्नों की एक रिवीजन याचिका दायर की है। हालांकि पत्र के अनुसार, इस याचिका में निचली अदालत के निष्कर्षों या सबूतों में किसी भी विशिष्ट गलती को उजागर नहीं किया गया है। ऐसा कोई कारण नहीं बताया गया है, जिससे आरोप मुक्त करने के आदेश को रद्द किया जा सके।

उन्होंने आगे कहा कि 9 मार्च 2026 को पहली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया। हाई कोर्ट ने आरोप मुक्त किए गए आरोपियों को सुने बिना ही प्रथम दृष्टया यह विचार दर्ज कर लिया कि निचली अदालत का विस्तृत आदेश गलत था। हाई कोर्ट ने जांच अधिकारी के खिलाफ निचली अदालत की टिप्पणियों और निर्देशों पर भी रोक लगा दी। इनमें संभावित विभागीय कार्रवाई से संबंधित निर्देश भी शामिल थे। जबकि सीबीआई ने केवल सीमित रोक की मांग की थी।

अरविंद केजरीवाल ने यह भी बताया कि हाई कोर्ट ने संबंधित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले की सुनवाई कर रही निचली अदालत को भी कार्यवाही स्थगित करने का निर्देश दिया। यह निर्देश तब तक के लिए है जब तक हाई कोर्ट सीबीआई की रिवीजन याचिका पर विचार नहीं कर लेता। पत्र में कहा गया है कि ईडी रिवीजन कार्यवाही में कोई पक्षकार नहीं था। सीबीआई ने भी ऐसी कोई राहत नहीं मांगी थी।

पत्र में तर्क दिया गया है कि आरोप मुक्त किए गए आरोपियों को सुने बिना शुरुआती चरण में ऐसे निर्देश जारी करना चिंता पैदा करता है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या रिवीजन याचिका की जांच आवश्यक न्यायिक तटस्थता के साथ की जाएगी। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि इस मामले में कई चार्जशीट और 23 आरोपी शामिल हैं। इसके बावजूद जवाब दाखिल करने के लिए केवल एक सप्ताह का समय दिया गया। पत्र में इसे इतने बड़े मामले में असामान्य जल्दबाजी बताया गया है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि इसी बेंच ने पहले आबकारी नीति मामले से जुड़े कई केसों पर फैसला सुनाया था। इनमें संजय सिंह, अरविंद केजरीवाल, अमनदीप सिंह ढल्ल, के. कविता और मनीष सिसोदिया की जमानत याचिकाएं शामिल हैं। पत्र के अनुसार उन मामलों में अदालत ने अभियोजन पक्ष के आरोपों को स्वीकार करते हुए व्यापक प्रथम दृष्टया टिप्पणियां की थीं। इनमें सरकारी गवाहों के बयानों पर भरोसा करना, कथित नीतिगत हेरफेर, कथित रिश्वत और मनी ट्रेल की अनुपस्थिति से संबंधित मुद्दे शामिल थे।

पत्र में यह भी बताया गया है कि हालांकि इनमें से कुछ मामले ईडी की कार्यवाही से उत्पन्न हुए थे। लेकिन वे कार्यवाहियां उसी सीबीआई एफआईआर पर आधारित थीं। उनमें वही बुनियादी आरोप शामिल थे जो अब आरोप मुक्त करने के आदेश के खिलाफ सीबीआई की रिवीजन याचिका के केंद्र में हैं।

पत्र में आगे कहा गया है कि इनमें से कई फैसलों को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों को राहत दी थी। पत्र के अनुसार, इससे यह चिंता और मजबूत होती है कि इसी विवाद से जुड़े मामलों में अपनाया गया पिछला दृष्टिकोण पहले ही कानूनी रूप से कमजोर पाया जा चुका है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि ट्रांसफर का अनुरोध जज के खिलाफ किसी व्यक्तिगत आरोप पर आधारित नहीं है। यह इस कानूनी सिद्धांत पर आधारित है कि अदालतों को यह भी विचार करना चाहिए कि क्या परिस्थितियां किसी निष्पक्ष वादी को पक्षपात की संभावना महसूस करा सकती हैं।

पत्र में अरविंद केजरीवाल बनाम सीबीआई मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों का भी जिक्र किया गया है। वहां कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी की टाइमिंग पर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि सीबीआई को 22 महीने तक उन्हें गिरफ्तार करना जरूरी नहीं लगा था। जब ईडी मामले में उन्हें रिहा किया जाने वाला था, तब अचानक उन्हें गिरफ्तार करने की जल्दबाजी काफी संदिग्ध लगती है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई को न केवल निष्पक्ष होना चाहिए बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए। कानून के शासन वाले लोकतंत्र में जनता की धारणा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आवेदकों ने कहा कि ट्रांसफर के अनुरोध का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामले की सुनवाई तटस्थता के साथ हो। न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखना भी इसका उद्देश्य है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्य-सूची के प्रमुख के रूप में मुख्य न्यायाधीश के पास मामलों को आवंटित करने और उन्हें उचित बेंचों को सौंपने का अधिकार है।

अपनी प्रार्थना में अरविंद केजरीवाल ने न्याय के हित में सीबीआई बनाम कुलदीप सिंह और अन्य रिवीजन याचिका को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। उन्होंने न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता में विश्वास बनाए रखने के लिए मामले को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से किसी अन्य उचित बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है।

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