Punjab
भगवंत मान सरकार की शिक्षा क्रांति से राज्य के विद्यार्थियों को अपना व्यवसाय शुरू करने में मिली बड़ी मदद ; 20,000 से अधिक छात्र उद्यमों ने पहले ही वर्ष में कमाए 90 करोड़ रुपये
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की ‘शिक्षा क्रांति’ के अंतर्गत राज्यभर के उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शुरू किए गए ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम के अत्यंत उत्साहजनक और सार्थक परिणाम सामने आए हैं। बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक., बी.वोकेशनल तथा आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य विषय के रूप में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के पहले वर्ष में लगभग 95,000 विद्यार्थियों को शामिल किया गया। इनमें से 25,693 विद्यार्थियों ने अपने स्वयं के व्यवसाय शुरू किए, जबकि 20,241 छात्र उद्यमों ने पहले ही वर्ष में लगभग 90 करोड़ रुपये का कारोबार किया।
इस उपलब्धि पर उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “पंजाब का बिजनेस क्लास कार्यक्रम शिक्षा के उद्देश्य को नई परिभाषा दे रहा है। हमारा लक्ष्य केवल डिग्रियां देना नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले, उद्यमी और रोजगार सृजित करने वाले युवाओं की नई पीढ़ी तैयार करना है। लगभग 95,000 विद्यार्थियों ने अपने व्यावसायिक विचारों पर काम किया, जिनमें से 25,000 से अधिक ने अपने स्टार्टअप शुरू किए। पहले ही वर्ष में इन उद्यमों ने सामूहिक रूप से लगभग 90 करोड़ रुपये की कमाई की। इससे स्पष्ट है कि यदि युवाओं को सही अवसर मिलें तो वे सफल व्यवसाय खड़े कर सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब की शिक्षा क्रांति हमारे युवाओं को केवल नौकरी पाने के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए रोजगार और अवसर सृजित करने के लिए तैयार कर रही है।”
इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब के युवा केवल नौकरी पाने की सोच तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं रोजगार सृजित करें और आर्थिक विकास में भागीदार बनें। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में राज्य की 20 विश्वविद्यालयों, 494 कॉलेजों, 320 आईटीआई और 91 पॉलिटेक्निक सहित कुल 925 उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थानों में बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. तथा बी.वोकेशनल के विद्यार्थियों के लिए अकादमिक सत्र 2025-26 के दौरान दो-क्रेडिट का अनिवार्य पाठ्यक्रम शुरू किया गया।
पारंपरिक शिक्षा, जो केवल पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं तक सीमित रहती है, उससे अलग यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यावसायिक अवसरों की पहचान, ग्राहक अनुसंधान, बाजार सत्यापन, व्यवसाय स्थापित करना, डिजिटल उपस्थिति, मूल्य निर्धारण रणनीति, ग्राहक प्राप्ति, वित्तीय योजना, संचार कौशल तथा समस्या समाधान जैसे व्यावहारिक उद्यमिता कौशल सिखाता है। परिणामस्वरूप लगभग 57,000 विद्यार्थी (करीब 60 प्रतिशत प्रतिभागी) पढ़ाई के दौरान ही वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल हुए।
इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को ई-कॉमर्स, बेकरी एवं फूड सर्विस, डिजिटल कंटेंट निर्माण, कोडिंग एवं प्रोफेशनल सेवाएं, ग्राफिक डिजाइनिंग, फिटनेस एवं वेलनेस, रिटेल, ब्यूटी एवं पर्सनल केयर, कृषि आधारित उद्यम, हस्तशिल्प तथा अन्य स्थानीय सेवा व्यवसायों में अपना उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया गया। इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे पंजाब में देखने को मिल रहा है।
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के छात्र सौरव ने अपने माचा पेय ब्रांड ‘मॉक, इन माचा’ के माध्यम से कॉलेज कार्यक्रमों में उत्पाद बेचकर लगभग 90,000 रुपये कमाए।इस उद्मम ने अपने विलक्षण फ्लेवरों और ताज़गी के कारण के कारण ख्याति हासिल की।
महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के शरणवीर सिंह ने ‘स्किलएक्सस’ नामक डिजिटल करियर गाइडेंस प्लेटफॉर्म विकसित किया, जिसके 2.5 लाख से अधिक उपयोगकर्ता हो चुके हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि विद्यार्थी इस कार्यक्रम के माध्यम से बड़े स्तर पर तकनीक आधारित उद्यम स्थापित कर रहे हैं।
संत बाबा भाग सिंह विश्वविद्यालय, जालंधर के पंकज ने इंस्टाग्राम और यूट्यूब के माध्यम से ‘जारिया ज्वेलरी’ नाम से ऑनलाइन आर्टिफिशियल ज्वेलरी व्यवसाय शुरू किया और लगभग 150 ग्राहकों को सेवाएं देकर 30,000 रुपये की आय अर्जित की।
सरकारी आईटीआई, पटियाला के कमलजीत सिंह ने ‘केएमएल मशरूम’ की स्थापना की, जो स्थानीय बाजारों और रेस्तरां को बटन मशरूम की आपूर्ति करता है। उन्होंने लगभग 1.5 लाख रुपये कमाए और अपने ब्रांड की पैकेजिंग भी विकसित की।
सरकारी आईटीआई (महिला), मोहाली की गगनप्रीत कौर रंगी ने ‘नेल स्टूडियो बाय गगन’ नाम से घर आधारित नेल आर्ट व्यवसाय शुरू किया, जो इंस्टाग्राम और स्थानीय सैलून के सहयोग से संचालित हो रहा है। इससे उन्होंने लगभग 55,000 रुपये की कमाई की।
सरकारी आईटीआई, मोहाली के रमनदीप सिंह ने ‘क्वालिटी इलेक्ट्रॉनिक स्टोर’ नाम से ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने अपनी वेबसाइट बनाई और सोशल मीडिया के माध्यम से बिक्री का विस्तार किया।
ये उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि ‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम राज्यभर के युवाओं के लिए उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहा है।
पहले ही वर्ष में मिली अभूतपूर्व सफलता और उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने सर्वसम्मति से शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी स्नातक (अंडरग्रेजुएट) डिग्री कार्यक्रमों में ‘बिजनेस क्लास’ का विस्तार करने की सिफारिश की है। पहले यह कार्यक्रम केवल बी.कॉम., बीबीए, बी.टेक. और बी.वोकेशनल तक सीमित था, लेकिन अब इसे बी.ए., बी.एससी. तथा अन्य सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में भी लागू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को नियमित शिक्षा के साथ व्यावहारिक उद्यमिता कौशल प्राप्त हो सके।
‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम की सफलता मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही पंजाब की शिक्षा क्रांति की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उच्च शिक्षा में उद्यमिता को शामिल कर सरकार विद्यार्थियों को ऐसे व्यावहारिक कौशल प्रदान कर रही है, जिनकी बदौलत वे पढ़ाई के साथ-साथ अपना व्यवसाय शुरू कर सकें और भविष्य में रोजगार देने वाले उद्यमी बन सकें।
महाराजा रणजीत सिंह पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, बठिंडा के बी.टेक. (कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग) के छात्र शरणवीर सिंह ने कहा, “पंजाब सरकार द्वारा उद्यमिता को दी गई प्राथमिकता ने मेरे जैसे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा किया है। ‘स्किलएक्सस’ उसी सोच को एक डिजिटल करियर गाइडेंस इकोसिस्टम में बदलने का मेरा प्रयास है, जो विद्यार्थियों को सही करियर चुनने में मदद करता है।”
सरकारी आईटीआई (महिला), मोहाली की गगनप्रीत कौर रंगी ने कहा, *“‘बिजनेस क्लास’ कार्यक्रम से पहले मुझे लगता था कि नौकरी ही एकमात्र विकल्प है। इस कार्यक्रम ने मेरी सोच बदल दी और मुझे अपने विचारों पर विश्वास करना सिखाया। आज मैं केवल नौकरी तलाशने के बजाय अपना व्यवसाय स्थापित करने और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए प्रेरित हूं।”
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बच्चों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा है, PM लीपापोती कर धर्मेंद्र प्रधान को बचा रहे – केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा को देश के बच्चों को बेवकूफ बनाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश करार दिया है। उन्होंने पीएम से पूछा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ? बच्चों ने तो फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग ही नहीं की थी, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा था। उन्होंने कहा कि देश में बहुत से फास्ट ट्रैक कोर्ट बने हैं, लेकिन कई में सुनवाई ही नहीं होती, तो कई में सामान्य कोर्ट से भी ज्यादा समय लगते हैं। ऐसा कोई एलान नहीं हुआ जिससे बच्चों में पेपर लीक नहीं होने का भरोसा बढ़े, क्या पीएम का अपना कोई विजन नहीं है? प्रधानमंत्री का ये स्टेटमेंट एक हारे हुए दिशाहीन लेकिन अहंकारी व्यक्ति का लगता है।
गुरुवार को एक्स पर “आप” के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट करके कहा है कि पेपर लीक मामलों में सजा दिलवाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। पर प्रधानमंत्री जी, यह तो बच्चों ने मांगा ही नहीं था और न ही यह उनकी मांग थी। यह तो ऐसा लग रहा है जैसे आप बच्चों को बेवकूफ बना रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट तो इस देश में बहुत बने हुए हैं। रेप मामलों के लिए बने हुए हैं, पॉक्सो के लिए बने हुए हैं और कई अन्य तरह के मुद्दों पर भी फास्ट ट्रैक कोर्ट बने हुए हैं। लेकिन उनमें तो सुनवाई होती ही नहीं है। कई फास्ट ट्रैक कोर्ट में तो नॉर्मल कोर्ट से भी ज्यादा समय लगता है। इसलिए ऐसा लग रहा है कि अभी भी आप मामले में लीपापोती करने की कोशिश कर रहे हैं और अभी भी आप धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। बच्चों ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा था, लेकिन उसकी मोदी जी ने कोई बात ही नहीं की।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बच्चों के सिर फट गए, उनकी टांगें टूट गईं, उनके ऊपर लाठीचार्ज हुआ, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और उन पर बर्बरता से हमला किया गया, जिसके कारण बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं। मैं जंतर-मंतर जाकर यह सब देखकर आया था और कई बच्चों से मिलकर आया था। मोदी जी ने उनके प्रति सहानुभूति के लिए एक शब्द भी नहीं बोला। पूरी दुनिया में कुछ भी हो जाए तो आप ट्वीट करते हैं, क्या ये बच्चे आपके बच्चे नहीं हैं? क्या आपको इन बच्चों के लिए थोड़ी सी भी दया आती है, जिन पर आपने इतनी बर्बरता से हमला करवाया था?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि बच्चे कह रहे हैं कि हर साल पेपर लीक होते हैं। मोदी जी ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया कि व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाएंगे जिससे बच्चों को यह भरोसा हो सके कि अगले साल नीट का पेपर या कोई और पेपर लीक नहीं होगा। इसका मतलब है कि सरकार का कोई विजन ही नहीं है, आपका कोई विजन ही नहीं है। अगले साल भी इसी तरह से पेपर लीक होंगे, क्योंकि आप कोई बदलाव तो कर ही नहीं रहे हैं। अगले साल भी नीट का पेपर लीक होगा और अगले साल फिर बच्चे आत्महत्या करेंगे। आज मोदी जी का यह ट्वीट एक हारे हुए, दिशाहीन और अहंकारी इंसान का ट्वीट दिखाई दे रहा है।
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विद्यार्थियों के आंदोलन से घबराई कांग्रेस-भाजपा, ‘आप’ पर लगा रही है बेबुनियाद आरोप: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने नीट पेपर लीक को लेकर देश भर में चल रहे विद्यार्थियों के आंदोलन पर कांग्रेस और भाजपा की राजनीति को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि आज लाखों स्टूडेंट अपने भविष्य और इंसाफ के लिए लड़ रहे हैं। उनका संघर्ष इस स्तर पर पहुंच गया है कि इसने कांग्रेस को भी हिला दिया है, जो कभी केंद्र में सत्ता में थी। लेकिन दुख की बात यह है कि स्टूडेंट की आवाज उठाने के बजाय, पंजाब कांग्रेस और भाजपा मिलकर आम आदमी पार्टी पंजाब सरकार पर झूठे और बेबुनियाद आरोप लगा रही हैं।
पन्नू ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा जानबूझकर फैक्ट्स को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही हैं। उन्होंने साफ किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के साढ़े पांच साल के कार्यकाल में पंजाब में एक भी भर्ती परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ। फरीदकोट में जो मामला सामने आया, वह पेपर लीक का नहीं, बल्कि गैजेट्स के जरिए नकल का था। संबंधित उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र पर ही रंगे हाथों पकड़ा गया था और पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए थे। इसके बावजूद, कांग्रेस जानबूझकर इस घटना को पेपर लीक बताकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
बलतेज पन्नू ने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। अपने राज में हुए पेपर लीक के मामलों पर जवाब देने के बजाय, वह अब झूठे बयानों के सहारे जनता का ध्यान भटकाना चाहती है। दूसरी तरफ, केंद्र की भाजपा सरकार के समय में 90 से ज़्यादा पेपर लीक हुए, जिससे करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लग गया। इन घटनाओं से निराश होकर 20 से ज़्यादा विद्यार्थियों ने सुसाइड तक कर लिया, लेकिन भाजपा सरकार ने न तो समय रहते दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया और न ही युवाओं का भरोसा जीतने की कोशिश की।
पन्नू ने कहा कि आज देश का युवा इंसाफ मांग रहा है, लेकिन भाजपा सरकार उनकी आवाज सुनने के बजाय विपक्ष पर इल्जाम लगाकर अपनी नाकामी छिपाने में लगी है। कांग्रेस भी भाजपा की इस नाकामी पर सवाल उठाने के बजाय, पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के साथ मिलकर उसे बदनाम करने की नाकाम कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता और देश के युवा पूरी सच्चाई जानते हैं। भाजपा और कांग्रेस झूठे आरोपों और राजनीतिक हथकंडों से अपनी नाकामी नहीं छिपा सकतीं। आम आदमी पार्टी युवाओं के साथ मजबूती से खड़ी है और हर मंच पर उनकी आवाज उठाती रहेगी।
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मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत छह महीनों में 2,300 डायबिटीज़ रोगियों का कैशलेस इलाज,₹6.5 करोड़ का उपचार कवर
डायबिटीज़ शायद ही कभी किसी चिकित्सीय आपात स्थिति के रूप में शुरू होता है। इसकी शुरुआत अक्सर बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के होती है—बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखाई देना, बिना कारण अत्यधिक थकान महसूस होना, पैरों में सुन्नपन या ऐसा घाव जो लंबे समय तक ठीक न हो। इन शुरुआती संकेतों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, जब तक कि स्थिति गंभीर होकर अस्पताल में भर्ती होने, गहन चिकित्सा (आईसीयू), सर्जरी या डायलिसिस की आवश्यकता तक न पहुँच जाए।
मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के नवीनतम स्वास्थ्य आँकड़े बताते हैं कि डायबिटीज़ अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। यह तेज़ी से कामकाजी आयु वर्ग के लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, जिससे परिवारों, रोज़गार देने वालों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार बोझ बढ़ रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, असंतुलित खान-पान, जंक और प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा, तंबाकू और शराब के सेवन के कारण दुनिया भर में डायबिटीज़ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लंबे कार्य घंटे, पर्याप्त नींद का अभाव और लगातार तनाव ने भी इस बीमारी के ज़ोख़िम को और बढ़ा दिया है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चल रही स्वास्थ्य योजना मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब, द्वारा 21 जुलाई 2026 तक साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, डायबिटीज़ से संबंधित 2,300 उपचार प्रकरणों पर लगभग ₹6.5 करोड़ (₹6,49,99,151.6) ख़र्च किए गए। इनमें 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों के 1,123 मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए, इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 तथा 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि डायबिटीज़ तेज़ी से पंजाब की आर्थिक रूप से उत्पादक आबादी को अपनी चपेट में ले रही है, जबकि इसका प्रभाव कम आयु वर्ग के लोगों पर भी दिखाई दे रहा है।
उपचार संबंधी आँकड़े यह भी दर्शाते हैं कि अस्पताल पहुँचने वाले कई मरीज़ गंभीर अवस्था में थे। खून में शुगर का स्तर बेहद अनियंत्रित होने से होने वाली जानलेवा स्थिति ‘डायबिटिक कीटोएसिडोसिस’ के इलाज के सबसे अधिक दावे दर्ज किए गए।
लंबे समय तक डायबिटीज़ के कारण नसों और रक्त वाहिकाओं को होने वाले नुकसान से उत्पन्न डायबिटिक फुट उपचार की दूसरी सबसे प्रमुख स्थिति के रूप में सामने आया। कई मरीज़ों को डायलिसिस, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, सीटी एवं एमआरआई जाँच, गहन चिकित्सा (आईसीयू) तथा डायबिटिक फुट सर्जरी की आवश्यकता पड़ी, जो अस्पताल में भर्ती होने के समय बीमारी की गंभीर अवस्था को दर्शाता है।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि ये आँकड़े हर परिवार के लिए एक चेतावनी हैं। उन्होंने कहा, “ये ऐसे लोग नहीं हैं जिन्होंने जीवन की अंतिम अवस्था में प्रवेश कर लिया है। ये राज्य की कार्यशील आबादी है—वे लोग जो परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं, व्यवसाय चला रहे हैं, ऋण (लोन) चुका रहे हैं और अपने बुज़ुर्ग माता-पिता का सहारा बने हुए हैं। जब डायबिटीज़ इस आयु वर्ग के लोगों को अस्पताल तक पहुँचा देता है, तो इसका प्रभाव केवल मरीज़ तक सीमित नहीं रहता।”
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे डायबिटीज़ के शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें और नियमित रूप से ब्लड शुगर की जाँच करवाएँ। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “डायबिटीज़ की जटिलताओं का इलाज करवाने से कहीं आसान है इसकी रोकथाम। जटिलताएँ होने का इंतज़ार न करें। अस्पताल लोगों की जान बचा सकते हैं, लेकिन लापरवाही के कारण खोए हुए साल वापस नहीं लौटा सकते।”
जहाँ एक ओर पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना उपचार का ख़र्च वहन कर मरीज़ों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है। समय पर जाँच, नियमित स्क्रीनिंग, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वज़न बनाए रखना तथा तंबाकू और हानिकारक स्तर पर शराब के सेवन से बचना डायबिटीज़ और उससे होने वाली गंभीर एवं अपंगता पैदा करने वाली जटिलताओं के ज़ोख़िम को काफ़ी हद तक कम कर सकता है।
डायबिटीज़ संबंधी आँकड़े क्या बताते हैं:
•36 से 60 वर्ष आयु वर्ग के वयस्कों में डायबिटीज़ से संबंधित सबसे अधिक 1,123 मामले दर्ज किए गए। इसके बाद 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के 809, 17 से 35 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के 243 तथा 0 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के 125 मामले दर्ज किए गए।
•21 जुलाई 2026 तक पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत डायबिटीज़ से संबंधित 2,300 उपचार प्रकरणों पर लगभग ₹6.5 करोड़ (₹6,49,99,151.6) ख़र्च किए गए।
•अत्यधिक अनियंत्रित डायबिटीज़ की गंभीर स्थिति को दर्शाने वाला डायबिटिक कीटोएसिडोसिस सबसे अधिक दावा किया गया उपचार पैकेज रहा।
•लंबे समय से नसों और रक्त वाहिकाओं को हुए नुकसान का संकेत देने वाला डायबिटिक फुट दूसरी सबसे बड़ी जटिलता के रूप में सामने आया।
•अनेक मरीज़ों को डायलिसिस, आईसीयू उपचार, ब्लड ट्रांसफ्यूजन , सीटी/एमआरआई जाँच तथा डायबिटिक फुट सर्जरी जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाओं की आवश्यकता पड़ी।
•समय पर स्क्रीनिंग, स्वस्थ जीवनशैली और उचित प्रबंधन ही डायबिटीज़ की गंभीर जटिलताओं से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं।
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