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Politics

भाजपा प्रत्याशी सूची: कांगड़ा से डॉ. राजीव भारद्वाज (Dr. Rajeev Bhardwaj , मंडी से कंगना रणौत (Kangna Ranuat) को उम्मीदवार बनाया गया, इनके सियासी सफर के बारे में पढ़ें।

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Kangana Ranaut is set to run for Lok Sabha elections with a BJP ticket from her hometown Mandi.

भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा और मंडी सीट पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। रविवार को जारी सूची के अनुसार, कांगड़ा सीट से डॉ. राजीव भारद्वाज को प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं, मंडी सीट पर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रणौत को टिकट दिया गया है। इसके साथ ही, भाजपा ने प्रदेश की सभी चार संसदीय सीटों पर अपने प्रत्याशियों को उतारा है। पहले ही, हमीरपुर से केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और शिमला से सुरेश कश्यप को टिकट दिया जा चुका है। विपक्ष अभी तक किसी भी सीट पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कर पाए हैं।

डॉक्टर राजीव भारद्वाज भाजपा के वर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और वे लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में विभिन्न दायित्वों का निर्वाहन किया है। राजीव भारद्वाज पूर्व सरकार में कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उनका जन्म 9 फरवरी 1963 को हुआ था। वे मूलतः कांगड़ा के रहने वाले हैं और वैद्यकीय क्षेत्र में काम करते हैं।

कंगना रणौत का जन्म 23 मार्च, 1987 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट के भांबला में एक राजपूत परिवार में हुआ था। उनकी मां आशा रणौत एक स्कूल टीचर हैं और उनके पिता अमरदीप रणौत एक व्यवसायी हैं। उनकी बड़ी बहन रंगोली चंदेल 2014 से उनके प्रबंधक के रूप में काम कर रही है और उनके छोटे भाई अक्षत हैं। उनके परदादा सरजू सिंह रणौत विधानसभा के सदस्य रहे हैं और उनके दादा एक आईएएस अधिकारी थे।

Also Read: BJP Candidate List Released: भाजपा ने हरियाणा में उम्मीदवारों की सूची जारी की, इस सीट पर नवीन जिंदल को टिकट दिया गया।

कंगना ने सोलह साल की उम्र में दिल्ली आना शुरू किया। उन्होंने थिएटर निर्देशक अरविंद गौड़ से प्रशिक्षण प्राप्त किया और फिल्मी करियर की शुरुआत 2006 में थ्रिलर गैंगस्टर के साथ की। उन्हें इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

कंगना रणौत हिंदी फिल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं। उन्होंने कुछ समय पहले ही बिलासपुर के सोशल संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया और अपना संबोधन हिमाचल प्रदेश की जनता के सामक्ष रखा था। उन्होंने चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पांच फिल्मफेयर पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों की प्राप्तकर्ता हैं और फोर्ब्स इंडिया की सेलिब्रिटी 100 सूची में छह बार शामिल हुई हैं।

#Kangnaranuat #BJP #LoksabhaElections2024 #India

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ड्रग माफिया के खिलाफ लड़ाई पर सख्त संदेश: जो नेता झिझके, वह ‘आप’ छोड़ दे — मनीष सिसोदिया

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आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने पार्टी के मंत्रियों और विधायकों को ड्रग माफिया के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का स्पष्ट निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि जो भी नेता नशे के खिलाफ इस लड़ाई में झिझकता है, उसे पार्टी में रहने का कोई अधिकार नहीं है और उसे अरविंद केजरीवाल को शर्मिंदा करने की बजाय खुद ही पार्टी छोड़ देनी चाहिए।

‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान के तहत मालवा ज़ोन की बैठक को संबोधित करते हुए सिसोदिया ने कहा कि ड्रग माफिया के खिलाफ लड़ाई ‘आप’ की राजनीति का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि वह, भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल इस मकसद से राजनीति में आए हैं कि नशे के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

सिसोदिया ने पार्टी नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी मंत्री, विधायक या हल्का इंचार्ज को तब तक चैन से नहीं बैठना चाहिए, जब तक उसके क्षेत्र के किसी भी गांव या वार्ड में नशे की बिक्री जारी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह पार्टी से ही क्यों न जुड़ा हो।

उन्होंने ‘आप’ की कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि यह पार्टी संघर्ष से निकली है और भ्रष्टाचार के खिलाफ इसकी लड़ाई का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। अब यही संकल्प पंजाब से नशे को जड़ से खत्म करने में काम आएगा।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने भी कहा कि भगवंत मान सरकार ड्रग्स के खिलाफ जंग को युद्ध स्तर पर लड़ रही है। उन्होंने बताया कि बड़े तस्करों की गिरफ्तारी की जा रही है और उनकी अवैध संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

सरकार ने साफ संकेत दिया है कि पंजाब में नशे के खिलाफ अब ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जा रही है और इस दिशा में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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कर्मचारियों की शिकायतें अब होंगी जल्दी हल, मान सरकार का बड़ा भरोसा: हरपाल चीमा

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा है कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार कर्मचारियों की शिकायतों को जल्द और पारदर्शी तरीके से हल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित कैबिनेट सब-कमेटी के चेयरमैन के रूप में उन्होंने आज विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठकें कीं।

इन बैठकों के दौरान वित्त मंत्री ने पंजाब भर की अलग-अलग यूनियनों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनकी लंबित मांगों और चिंताओं को सुना। जिन यूनियनों के प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया, उनमें मेरिटोरियस स्कूल टीचर्स यूनियन, अध्यापक इंसाफ कमेटी, फायर ब्रिगेड आउटसोर्स इम्प्लाइज यूनियन, फायर ब्रिगेड कॉन्ट्रैक्ट इम्प्लाइज यूनियन और फॉरेस्ट वर्कर्स यूनियन शामिल थीं।

बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। वित्त मंत्री ने सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यूनियनों द्वारा उठाई गई सभी जायज मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए और उनका जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाए।

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना और उनके कार्यस्थल से जुड़ी समस्याओं को समयबद्ध तरीके से हल करना है। उन्होंने दोहराया कि सरकार कर्मचारियों के साथ संवाद बनाए रखते हुए उनके कल्याण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की वैध मांगों को गंभीरता से ले रही है और उन्हें हल करने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि प्रशासनिक कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे और कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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वित्तीय बिल 2026 पर मलविंदर कंग का हमला: “खोखले दावे, जमीनी हकीकत चिंताजनक”

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आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद Malvinder Singh Kang ने वित्तीय बिल 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों और विकास के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।

कंग ने कहा कि जहां एक ओर सरकार देश को “टॉप 5 अर्थव्यवस्था” बताने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रति व्यक्ति आय 142वें स्थान पर पहुंच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई अपने चरम पर है, रुपया लगातार गिर रहा है और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

किसानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कंग ने कहा कि “आय दोगुनी” करने का वादा पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है—खाद, कीटनाशक और डीजल सभी महंगे हो गए हैं—जिससे किसानों की हालत और खराब हुई है।

कॉर्पोरेट नीतियों पर सवाल उठाते हुए कंग ने आरोप लगाया कि बड़े उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज एनपीए घोषित कर माफ किए गए, जबकि किसान अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि सरकार की प्राथमिकता किसके साथ है। कंग ने Agniveer Scheme की भी कड़ी आलोचना की और इसे युवाओं के भविष्य के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना बेरोजगारी और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा रही है और युवाओं को गलत रास्तों की ओर धकेल रही है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मुद्दे पर कंग ने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की डील्स से देश के किसानों—खासकर हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के उत्पादकों—की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने सीमा पार व्यापार को लेकर भी बड़ा मुद्दा उठाया। कंग ने कहा कि जहां मुंबई-कराची रूट से बड़े पैमाने पर व्यापार जारी है, वहीं अमृतसर-लाहौर (वाघा बॉर्डर) व्यापार मार्ग बंद पड़ा है। उन्होंने मांग की कि इस रूट को खोला जाए, जिससे उत्तर भारत के किसानों को सीधा लाभ मिल सके।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर बोलते हुए कंग ने कहा कि मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर करना गरीब और मजदूर वर्ग के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने में सरकार की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए। अपने संबोधन के अंत में कंग ने कहा कि “मनरेगा को कमजोर करना मजदूरों पर हमला है, अग्निवीर योजना युवाओं पर हमला है और गलत व्यापार नीतियां किसानों पर हमला हैं। देश का वास्तविक विकास तभी संभव है जब किसान, मजदूर और युवा सुरक्षित और मजबूत हों।”

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