Politics
Atishi Press Confrence : क्या अरविंद केजरीवाल के बाद अब आप के ये नेता जाएंगे जेल ? आतिशी ने किया खुलासा
Atishi Marlena: आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार में शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना ने मंगलवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर गंभीर आरोप लगाए |
उन्होंने दावा किया कि उन्हें बीजेपी से पार्टी में शामिल होने का ऑफर मिला है. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अगर वह बीजेपी में शामिल नहीं हुए तो उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईडी अब उनके साथ-साथ सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और राघव चड्ढा को भी गिरफ्तार करेगी |
आतिशी मार्लेना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया, ‘बीजेपी ने मेरे एक दोस्त के जरिए मुझसे बीजेपी में शामिल होने के लिए संपर्क किया. मुझसे कहा गया कि या तो मैं बीजेपी में शामिल हो जाऊं और अपना राजनीतिक करियर बनाऊं, नहीं तो मुझे एक महीने के भीतर ईडी द्वारा गिरफ्तार कर लिया जाएगा |
आतिशी ने आगे कहा कि ईडी ने एक बयान के आधार पर सौरभ भारद्वाज और मेरा नाम कोर्ट में लिया, जो डेढ़ साल से ईडी और सीबीआई के पास मौजूद है | ये बयान उनकी चार्जशीट में है | ये बयान सीबीआई की चार्ज में भी है तो फिर इस बयान को उछालने की वजह क्या थी ?
इसके साथ ही उन्होंने कहा, ‘बीजेपी को उम्मीद थी कि केजरीवाल जी की गिरफ्तारी के बाद ‘आप’ टूट जाएगी. AAP के सभी वरिष्ठ नेतृत्व जेल में हैं. लेकिन रामलीला मैदान की रैली के बाद अब बीजेपी को लग रहा है कि AAP के चार बड़े नेताओं को गिरफ्तार करना काफी नहीं था. अब उनके बाद चार बड़े नेता मैं, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और राघव चड्ढा जेल जाएंगे।
National
बिना डाइट मैदान में अभ्यास करने को मजबूर हरियाणा के 37000 खिलाड़ी, नायब सरकार ने एक साल से नहीं दिया डाइट भत्ता- अनुराग ढांडा
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस माध्यम से हरियाणा की बीजेपी सरकार को घेरा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की जन विरोधी नीति और नीयत ने देश को मेडल दिलाने वाले खिलाड़ियों को आज अपने हक, सम्मान और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा हमेशा से खेलों की धरती रहा है। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में देश का तिरंगा ऊंचा करने वाले अधिकतर खिलाड़ी इसी मिट्टी से निकले हैं। लेकिन आज वही खिलाड़ी पूछ रहे हैं कि क्या मेहनत और मेडल की कीमत सिर्फ चुनावी मंचों पर तालियां बटोरने तक सीमित है? क्या खिलाड़ी सिर्फ पोस्टर और भाषणों के लिए रह गए हैं
अनुराग ढांडा ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एक पोस्टर जारी करके हरियाणा के सीएम नायब सिंह को ‘जस्ट चिल सीएम’ बताया है। उन्होंने सीएम नायब सिंह को ऑन रिकॉर्ड झूठ बोलने में पीएचडी तक करार दे दिया। हरियाणा के सीएम नायब सिंह ने झूठ बोलने में पीएचडी कर ली है और नई नीति ‘आगे दौड़ पीछे छोड़’ पर काम कर रहे हैं। हरियाणा में जर्जर खेल मैदानों के कारण मारे जा रहे थे और अब नायब सिंह सरकार ने खिलाड़ियों को भूखा मारने की कोशिशों में जुटी है। अनुराग ढांडा ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल करते हुए कहा कि हरियाणा के खिलाड़ी पूरे दिन मैदान में अपना खून पसीने बहाते हैं और उनके माता पिता के खून पसीने की कमाई से ओलिंपिक मैडल जीत कर आते हैं वो खिलाड़ी हरियाणा के जर्जर मैदानों में पोल गिरने से मारे गए। ये क्या कम था जो अब आपने 37000 खिलाड़ियों की डाइट का पैसा रोक दिया?
अनुराग ढांडा ने कहा कि खेल नर्सरी का मकसद था कि निचले स्तर के खिलाड़ी अच्छा प्रशिक्षण-डाइट लेकर राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सके लेकिन प्रदेश की 1500 खेल नर्सरियों में 37000 खिलाड़ियों को पिछले 10 महीने से डाइट का पैसा तक नहीं मिला। इन नर्सरियों में ट्रेनिंग देने वाले कोचों को 10 महीनों से तनख्वाह भी नहीं मिली। खिलाड़ी डाइट का इंतज़ाम करे या खेल की तैयारी करे?
ढांडा ने सवाल उठाते हुए कहा कि नायब सरकार साल में 2 महीने के लिए नर्सरियों को बंद कर रही है। सीएम नायब सिंह बताएं कि क्या कोई खिलाड़ी 2 महीने की छुट्टी काट कर इंटरनेशनल मैडल की तैयारी करता है? रोज़ सुबह जल्दी उठकर घंटों मेहनत करने वाले खिलाड़ी को सरकार 2 महीने छुट्टी लेने को कह रही है। ताकि अब 2 महीने और ना खिलाड़ियों की डाइट का पैसा देना पड़े और न कोचों को उनकी तनख्वाह। खिलाड़ियों को खेल से दूर ले जा कर नायब सरकार उन्हें नशे के चंगुल में धकेल रही है। इसके अलावा जहां पुरानी खेल नर्सरियों के खिलाड़ियों को डाइट नहीं मिल रही वहां नायब सरकार नई खेल नर्सरियां खोलने की बात कह रही है।
सरकार ने 75000 बुज़ुर्गों की पेंशन की बंद : अनुराग ढांडा
- अनुराग ढांडा ने बुढ़ापा पेंशन को लेकर भी सीएम नायब सिंह को जमकर घेरते हुए कहा कि पिछले कल मीडिया में सीएम बयान देते हैं कि किसी की पेंशन नहीं कटी जबकि हरियाणा के 75000 से अधिक बुज़ुर्गों की पेंशन काट दी गई है। और पेंशन न दिए जाने के बेतुके तर्क दिए जा रहे हैं। किसी किसान के खाते में फसल का पैसा डेढ़ या दो लाख आया तो उसे कहा जा रहा है कि 3 लाख की कमाई है तुम्हें पेंशन नहीं मिल सकती। इसका मतलब नायब सरकार 3 लाख की फसल बेचने वाले किसान को संपन्न मान रही है। ढांडा ने कहा कि किसान की खेती से कोई कमाई नहीं होती बल्कि किसान का खर्च इतना होता है कि पूरे परिवार का घर चलाना भी मुश्किल होता है। कहीं परिवार पहचान पत्र में पूरे परिवार की कमाई का हवाला देकर पेंशन बंद की जा रही है तो कहीं नाम, सरनेम, उम्र मिसमैच के नाम पर। अधिकारियों और पोर्टल की गलतियों का ठीकरा बुज़ुर्गों के सिर पर फोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कई जगहों पर पूरे परिवार की आय को जोड़कर भी देखा जा रहा है जबकि बुज़ुर्ग की आय का परिवार की आय से कोई लेना देना नहीं है।
- अनुराग ढांडा बोले कि बुज़ुर्ग को पेंशन देने का मकसद ही जीवन के अंतिम वर्षों को स्वाभिमान के साथ जीने का मौका देना है और नायब सिंह कहते हैं कि इनका परिवार बहुत कमाता है इसलिए पेंशन नहीं मिलेगी। पूरे हरियाणा में सैंकड़ों बुर्ज़ुर्गों और महिलाओं की लाइनें सरकारी दफ्तरों में लगी पड़ी है जो अपनी पेंशन कट जाने की वजह पूछते हैं। दफ्तर के अधिकारियों के पास उनकी पेंशन कट जाने का कोई वाजिब जवाब नहीं है। ढांडा ने कहा कि नायब सिंह ऑन रिकॉर्ड झूठ बोलने में पीएचडी हो गए हैं?
- अनुराग ढांडा ने सीएम नायब सैनी और भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि इससे पहले कि लोग सड़कों पर उतर कर उनके पुतले जलाये। बेहतर होगा कि सरकार लोगों की मूलभूत समस्याओ पर ध्यान देकर उनका काम करें। सीएम नायब सिंह खिलाड़ियों की डाइट का करीब 10 करोड़ रूपए जल्दी जारी करे। किसानों की फसल की बिक्री को आय मांनना बंद करके सभी बुज़ुर्गों की बुढ़ापा पेंशन को जल्द से जल्द बहाल की जाए।
Politics
Bihar Election के दिलचस्प आंकड़े – Yogi Bihar में भी Akhilesh पर भारी पड़े: 31 Seats में से 27 जीती
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे साफ हो चुके हैं और इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग दिखी। खास बात यह रही कि बिहार के चुनावी मैदान में उत्तर प्रदेश के बड़े नेताओं की एंट्री भी हुई और उनके प्रदर्शन ने काफी चर्चा बटोरी। आइए जानते हैं, किस नेता का कितना असर दिखा और किसकी स्ट्रैटेजी फेल रही।
योगी आदित्यनाथ का दबदबा – 31 में से 27 सीटें जीतीं
बिहार चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रही। उन्होंने कुल 31 सीटों पर रैलियां और सभाएं कीं।
इनमें से 27 सीटों पर एनडीए जीत हासिल करने में सफल रहा।
इस तरह योगी का Strike Rate 87% से ज्यादा रहा, जो बेहद शानदार माना जा रहा है।
योगी की सभाओं में बड़ी भीड़ देखने को मिली। उन्होंने एनडीए के लिए आक्रामक तरीके से प्रचार किया और विपक्ष पर सीधा हमला बोला।
अखिलेश यादव की मेहनत बेअसर – 22 में से सिर्फ 2 सीटें जीतीं
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव बिना चुनाव लड़े बिहार पहुंचे थे। उन्होंने 22 सीटों पर महागठबंधन के लिए प्रचार किया।
लेकिन नतीजे निराश करने वाले रहे—
इन 22 में से सिर्फ 2 सीटों पर ही महागठबंधन जीत सका।
इस तरह उनका Strike Rate सिर्फ 9% रहा, जो काफी कमजोर माना जा रहा है।
खास बात यह कि जहाँ उन्होंने भोजपुरी एक्टर खेसारी लाल यादव के लिए प्रचार किया, वहाँ भी खेसारी चुनाव हार गए।
हाँ, सीवान के बाहुबली शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा की रघुनाथपुर सीट पर उन्हें सफलता मिली।
मायावती की एक ही रैली, लेकिन स्ट्राइक रेट अखिलेश से बेहतर
बीएसपी प्रमुख मायावती बिहार में सिर्फ एक दिन गई थीं और उन्होंने 5 सीटों पर एक साथ प्रचार किया।
इन पाँच में से रामगढ़ सीट बीएसपी के खाते में गई।
मायावती का Strike Rate 20% रहा, जो अखिलेश यादव से ज्यादा है।
बीएसपी ने पूरे बिहार में 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और उन्हें 1.52% वोट मिले।
तीन सीटें जहाँ योगी और अखिलेश दोनों ने रैली की
बिहार में तीन सीटें ऐसी थीं जहाँ दोनों नेताओं का सीधा मुकाबला दिखा—
- रघुनाथपुर (सीवान) – जीती राजद
- बिस्फी (मधुबनी) – जीती राजद
- मोतिहारी – जीती भाजपा
इन तीन में से दो सीटों पर अखिलेश भारी, जबकि एक पर योगी आगे रहे।
योगी का “तीन बंदर” वाला बयान रहा हाइलाइट
चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा चर्चा योगी आदित्यनाथ के बयान की रही।
उन्होंने बिना नाम लिए राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव को
“पप्पू, टप्पू और अप्पू – तीन बंदर” कहा।
यह बयान पूरे बिहार चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया।
कांग्रेस और सपा ने इसे भगवान हनुमान जी का अपमान बताया और लगातार इस पर प्रतिक्रिया देती रहीं।
वहीं अखिलेश यादव ने भी इस पर पलटवार करते हुए भाजपा पर कई तंज कसे।
इस विवाद का असर ये हुआ कि महागठबंधन अपने असली मुद्दों—
रोजगार, योजनाएं, नीतीश सरकार की नाकामियां
—इन सब पर फोकस हटाकर बंदर विवाद में उलझ गया।
मीडिया हेडलाइंस भी इसी मुद्दे पर घूमती रहीं।
इस तरह योगी का बयान चुनाव की दिशा बदलने में कामयाब रहा।
अन्य यूपी दल – सभी की जमानत जब्त
बिहार के चुनावी मैदान में यूपी के तीन अन्य दल भी उतरे थे—
1. चंद्रशेखर आज़ाद की ASP
- 25 सीटों पर लड़े
- एक भी सीट नहीं जीती
- सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त
2. स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी
- 4 सीटों पर चुनाव
- खुद प्रचार भी नहीं किया
- जमानत जब्त
3. ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा
- एनडीए से अलग होकर 64 सीटों पर लड़ा
- सभी उम्मीदवार हार गए
- किसी की जमानत नहीं बची
अब नजर यूपी 2027 चुनाव पर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ ने इस चुनाव में जिस तरह नैरेटिव सेट किया,
उसी तरह की रणनीति वे 2027 यूपी विधानसभा चुनाव में भी अपना सकते हैं।
सपा–कांग्रेस गठबंधन और एम–वाई (Muslim–Yadav) समीकरण को देखते हुए भाजपा पहले से ही नई स्ट्रैटेजी प्लान कर रही है।
बिहार मॉडल यूपी में भी दोहराया जा सकता है।
निष्कर्ष
- बिहार चुनाव में योगी आदित्यनाथ का प्रदर्शन सबसे दमदार रहा।
- अखिलेश यादव का प्रचार असरदार नहीं रहा।
- मायावती ने सीमित प्रचार के बावजूद बेहतर स्ट्राइक रेट हासिल किया।
- छोटे दल (ASP, सुभासपा, मौर्य की पार्टी) बिल्कुल असफल रहे।
बिहार के नतीजों से साफ है कि यूपी के नेताओं में सबसे ज्यादा पकड़ और प्रभाव योगी आदित्यनाथ का दिखा।
Politics
गांव भूसे में Harmeet Sandhu को जबरदस्त समर्थन, AAP की जीत का दावा और मज़बूत
तरनतारन विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवार हरमीत सिंह संधू के पक्ष में माहौल लगातार मज़बूत होता जा रहा है। गांव-गांव में हो रही बैठकों और जन सभाओं में उन्हें मिल रहा जनता का जोश और समर्थन साफ दिखा रहा है कि इस बार भी तरनतारन में ‘आप’ की लहर चल रही है।
इसी कड़ी में, गांव भूसे में एक लोक-मिलनी (जन मिलनी) कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह बैठक सरदार अमरजीत सिंह और गांव की सरपंच बीबी हरजिंदर कौर के सहयोग से उनके निवास स्थान पर रखी गई। कार्यक्रम में गांव के लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और अपने विचार ‘आप’ नेताओं के साथ साझा किए।
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपनी स्थानीय समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा की — जैसे सड़क, पानी, सफाई और विकास से जुड़ी बातें। नेताओं ने लोगों की बातें ध्यान से सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि ‘आप’ सरकार हर मुश्किल का हल प्राथमिकता से निकालेगी।
गांव वालों ने इस मौके पर खुलकर कहा कि उन्हें ‘आप’ सरकार की नीतियों और कामकाज पर भरोसा है। हरमीत सिंह संधू ने भी लोगों को आश्वासन दिया कि अगर जनता का साथ मिला तो वह हर गांव की समस्या को जमीनी स्तर पर हल करने के लिए पूरी मेहनत करेंगे।
गांव भूसे में मिले इस भरपूर समर्थन ने यह साबित कर दिया है कि तरनतारन के लोग अब भी आम आदमी पार्टी के साथ खड़े हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि गांवों में मिल रहा इतना प्यार और समर्थन यह साफ संकेत दे रहा है कि ‘आप’ इस बार भी तरनतारन से बड़ी जीत दर्ज करेगी।
गांवों में लगातार हो रही लोक-मिलनी सभाओं से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है। हरमीत सिंह संधू ने कहा कि आम आदमी पार्टी जनता के विकास और पारदर्शी शासन के लिए पूरी तरह समर्पित है और यह चुनाव जनता की उम्मीदों की जीत साबित होगा।
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