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Punjab की मान सरकार ने बना द‍िया इतना सख्‍त कानून, बेअदबी पर अब उम्रकैद की सजा और… क्‍या है कानूनी पेचीदगियां?

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा ने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी के सत्कार के लिए आज सर्वसम्मति से ‘जागत जोत श्री गुरू ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026’ पास कर दिया, जिससे गुरू साहिब की बेअदबी के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इस निर्णायक कदम के तहत भगवंत मान सरकार ने बेअदबी के लिए उम्र कैद की सजा का प्रावधान किया है, जिससे बेअदबी से निपटने के लिए देश के सबसे सख्त कानूनों में से एक बनाया गया है।

इस कानून को पिछली सरकारों की नाकामियों में ऐतिहासिक सुधार करार देते हुए मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि नया कानून पिछली सरकारों की कमियों को दूर करने के साथ-साथ तेजी से जांच सुनिश्चित बनाता है, अपराधों को गैर-जमानती बनाता है और 5 साल से लेकर उम्र कैद तक सख्त सजाओं के साथ-साथ 20 लाख रुपए तक के जुर्माने की व्यवस्था करता है, जबकि बेअदबी में सहायता करने वालों को भी बराबर जवाबदेह बनाता है।

पिछली सरकारों से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जहां अकाली-भाजपा और कांग्रेस गुरू साहिब के नाम पर वोट मांगते थे, वहीं यह ‘आप’ सरकार है, जिसने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए हैं और यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी दोबारा ऐसे अपराध करने की हिम्मत न करे।

बहस में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैं इस अजीम सदन को भरोसा दिलाता हूं कि यह बिल भविष्य में बेअदबी के अंत को दर्शाता है क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी ऐसे घिनौने अपराध में शामिल होने की हिम्मत नहीं करेगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले समय में श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घिनौनी कार्रवाइयों राज्य में सख्त मेहनत से बनाई शांति, सद्भावना, भाईचारा और फिर्कू सद्भावना को भंग करने की गहरी साजिश थी। ऐसा ‘अमानवीय और घिनौना कार्य’ मानवता के खिलाफ पाप था, जो मुट्ठी भर समाज विरोधी तत्वों द्वारा किया गया था, जो राज्य में शांति, सद्भावना, भाईचारा और सांप्रदायिक सद्भावना को भंग करने के लिए तैयार थे। यह कानून सुनिश्चित करेगा कि इस न माफ करने योग्य अपराध में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दूसरों के लिए मिसाल बनेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पंजाबियों ने हमेशा राज्य में शांति और भाईचारे के सिद्धांतों को कायम रखा है और कोई भी राज्य के गहरे सामाजिक ताने-बाने को कभी भी तबाह नहीं कर सकेगा। हर कीमत पर शांति और भाईचारिक साझा बनाए रखने का दृढ़ इरादा रखते हुए हमारी सरकार ऐसी किसी भी कोशिश को नाकाम कर देगी, जो राज्य की भाईचारक सांझ, तरक्की और खुशहाली के लिए खतरा पैदा कर सकती है। श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी हर सिख के पिता हैं और राज्य सरकार इस पवित्र ग्रंथ की सुरक्षा सुनिश्चित बनाने के लिए वचनबद्ध है।”

कानून की महत्ता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर श्री गुरू ग्रंथ साहिब पंजाब में सुरक्षित नहीं तो फिर और कहीं नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऐक्ट बेअदबियों को रोकने के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी विश्वव्यापी भाईचारे, धर्म निरपेक्षता और समाजवादी मूल्यों का खजाना हैं, जिनसे मानवता को दिशा मिलती है। श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी का संदेश और दर्शन मानवता को आपसी सद्भावना, एकता, शांति और दया-भावना का मार्ग दिखाता है, जो दुनिया भर में प्रासंगिक है।

श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी हमारे रोजाना जीवन में प्रेरणा, मार्गदर्शन और शांति का सदीवि स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी ने हमें हमेशा धर्म और सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया है। श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी ने हमें कुर्बानी देने और दूसरों को माफ करना सिखाया है और हमारे अंदर प्यार, सहनशीलता और विश्वव्यापी भाईचारे के मूल्य पैदा की हैं। हममें से हर किसी ने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी से प्रेरणा ली है, जो हमें नितनेम के साथ समानता, हक-सच्च, धर्म और इंसाफ के मार्ग पर चलने के लिए हमेशा प्रेरित करते हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी दुनिया का एक अनोखा धार्मिक ग्रंथ है जिसमें न सिर्फ सिख गुरुओं की शिक्षाएं हैं, बल्कि हिंदू श्रद्धालुओं, मुस्लिम संतों और सूफी संतों के भजन भी समाए हुए हैं। दसवें पातशाह श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने ज्योति जोत समाने से पहले श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी को गुरगद्दी देकर हमारे शाश्वत गुरू के रूप में मान्यता दी। ‘शब्द गुरू’ की धारणा हमारे जीवन में अत्यंत महत्व रखती है क्योंकि हर सिख के जीवन में जन्म और विवाह से लेकर मौत तक श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी से दिशा और सामर्थ्य की बख्शिश मांगी जाती है।

गुरबाणी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि “पवणु गुरू, पाणी पिता, माता धरति महतु”। महान गुरुओं ने हवा को गुरू, पानी को पिता और धरती को मां का दर्जा दिया है। महान गुरुओं ने 600 साल से अधिक समय पहले हमें जीवन का रास्ता सिखाया था जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। क्योंकि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी एक जागत जोत हैं, इसलिए हर पंजाबी और खासकर हर सिख उनका सत्कार करता है और श्री गुरू ग्रंथ साहिब में दर्ज हर शब्द की पालना करता है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह बड़े अफसोस की बात है कि पहले कानूनों को व्यापक जनहित की जगह राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता था। उन्होंने साथ ही कहा कि आनंद मैरिज एक्ट तमिलनाडु, दिल्ली और यहां तक कि पाकिस्तान में भी है, लेकिन यह पंजाब में कहीं नहीं है। यह एक्ट यह सुनिश्चित करेगा कि जो भी बेअदबी के घिनौने अपराध में शामिल है, उसके साथ सख्ती से निपटा जाएगा और उनकी आने वाली पीढ़ियां भी अपने परिवार के सदस्यों को दी गई सजा को याद रखेंगी।

प्रक्रियात्मक पहलू के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि चूंकि यह बिल एक स्टेट बिल है, इसलिए इसके लिए राष्ट्रपति की सहमति की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभा द्वारा पास होने के बाद बिल को राज्य के राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। अगर राज्यपाल जी को समय लगता है तो वे खुद उनसे मिलेंगे और उन्हें तुरंत बिल को मंजूरी देने की अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अपना ज्यादातर समय राज्यपाल के पास उनके विरुद्ध शिकायतें दर्ज करवाने के लिए जाते हैं, लेकिन अगर ये पार्टियां चाहें तो वे इस नेक काम के लिए उनका साथ भी दे सकती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जिस परिवार ने 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग कत्लेआम के दोषी जनरल डायर के लिए इस घिनौनी घटना के बाद रात के खाने की मेजबानी की थी, उनसे संबंधित जनप्रतिनिधि सदन में मौजूद नहीं हैं। उन्होंने सदन से दूर रहना ही उचित समझा क्योंकि उन्हें पता था कि आज उनका पर्दाफाश होना लाजमी है। इन नेताओं के हाथ निर्दोष लोगों के खून से रंगे हुए हैं और इन्होंने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी को भी नहीं बख्शा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जो लोग बेअदबी के लिए जिम्मेदार हैं, उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होकर पूरे संगत के समक्ष अपना अपराध कबूल किया था। हालांकि, जब उन्हें लगा कि यह उनके राजनीतिक हितों के अनुकूल नहीं है, तो उन्होंने कुछ समय बाद यू-टर्न ले लिया और कहा कि कुछ लोग उन्हें बदनाम करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के हाथों में खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरा राज्य इन नेताओं का असली चेहरा जानता है, जिन्होंने हमेशा अपनी राजनीतिक चालों के माध्यम से लोगों को गुमराह किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार इन नेताओं की मर्जी और इच्छा के अनुसार चुने जाते रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित और न माफी योग्य है। इन नेताओं ने सिख विरोधी ताकतों को अपनी सरकार में उच्च पदों से नवाजा और सम्मानित किया तथा अपने कुकर्मों से सदा सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाई। जिस नेता को ‘फखर-ए-कौम’ दिया गया, उसी ने नकोदर घटना, बेअदबियों, बहबल कला और कोटकपूरा गोलीकांड के दोषियों की सरपरस्ती की और एस.जी.पी.सी. को महज कठपुतली बना कर रख दिया।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे नेता जिन्होंने अपने घिनौने कारनामों के माध्यम से हर सिख की मानसिकता को ठेस पहुंचाई है, वे भाईचारे के शीर्ष खिताब के हकदार नहीं हैं। इन नेताओं का एक भी काम सराहनीय नहीं है और ऐसा कुछ भी नहीं है जिस पर हम लोग उन्हें या उनकी विरासत पर गर्व कर सकें। इन मौकापरस्त नेताओं ने सिख पंथ को हमेशा अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया और बेअदबी के दोषियों को सजा देने के लिए कुछ नहीं किया।

उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुराने कानूनों में पिछली राज्य सरकारों द्वारा चार बार संशोधन करने के बावजूद इस गैर-मानवीय अपराध के दोषियों को सजा देने के लिए ‘गुटका साहिब’ की सौगंध खाने वालों द्वारा कई कमियां छोड़ी गईं। यह पांचवां संशोधन अंतिम होगा और हमारे शाश्वत गुरू साहिब का निरादर करने के उद्देश्य से की गई गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाएगा। बदकिस्मती से कुछ पत्थर दिल लोग ज्ञान के इस स्त्रोत का निरादर करते हैं, जो बर्दाश्त योग्य नहीं है।”

बिल के प्रावधानों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, “जागत जोत श्री गुरू ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2008 में संशोधन करके अब जागत जोत श्री गुरू ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026 बनाया गया है, ताकि साम्प्रदायिक सद्भावना और राष्ट्रीय एकता की तानों को मजबूत किया जा सके और बेअदबी की नापाक कोशिशों के लिए उम्र कैद सहित सख्त सजाएं दी जा सकें। यह देखा गया है कि बेअदबी की घटनाओं में शामिल दोषी मानसिक रूप से परेशान होने का दिखावा करते हैं, लेकिन इस एक्ट में कहा गया है कि मानसिक रूप से परेशान होने का दिखावा करने वाले व्यक्ति के परिवार के सदस्यों पर भी इस गैर-माफी योग्य अपराध के लिए मुकदमा चलाया जाएगा। इसमें ‘कस्टोडियन’ की परिभाषा दी गई है, जिसके अनुसार हर कस्टोडियन को सुरक्षित कस्टडी, सुरक्षा और दुरुपयोग या नुकसान को रोकने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा (धारा 3बी)।”

उन्होंने कहा, “बेअदबी के मामलों की समय पर और सुचारू रूप से जांच सुनिश्चित बनाने के लिए व्यवस्था की गई है (धारा 4ए) और इस कानून के अधीन अपराध गैर-जमानती होगा तथा इस संबंध में कोई समझौता नहीं किया जाएगा (धारा 4बी)। एक्ट के मुताबिक सजाओं में वृद्धि की गई है, जिसमें 20 लाख रुपए तक जुर्माना और उम्र कैद तक की सजा शामिल है (धारा 5)। अपराधों को पांच किस्मों में श्रेणीबद्ध किया गया है, क्योंकि एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की कैद और 10 लाख रुपए का जुर्माना किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पवित्र ग्रंथ की बेअदबी करने पर 7 से 20 साल की कैद और 2 से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही सामाजिक या धार्मिक सद्भावना को भंग करने के इरादे से बेअदबी करने पर 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा और 5 से 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। बेअदबी में सहायता करने वालों को भी बराबर सजा मिलेगी और बेअदबी करने की कोशिश करने पर 3 से 5 साल की कैद और 1-3 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यह प्रस्तावित कानून ऐसी अमानवीय गतिविधियों पर रोक लगाने का काम करेगा और राज्य में शांति, भाईचारक सद्भावना तथा धार्मिक भावनाओं का सत्कार बनाए रखने में मदद करेगा।”

इस दौरान उन्होंने कहा कि वे बेहद सौभाग्यशाली महसूस करते हैं कि सभी पवित्र धार्मिक ग्रंथों के प्रति श्रद्धा और सत्कार के रूप में उनके नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने राज्य में विभिन्न धर्मों के धार्मिक ग्रंथों के पावन स्वरूपों को ले जाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहनों को मोटर वाहन टैक्स (एमवीटी) से छूट देने की मंजूरी दे दी है।

उन्होंने बताया, “इन वाहनों के लिए छूट विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा आयोजित नगर कीर्तनों को ध्यान में रखकर दी गई है और यह कदम साम्प्रदायिक सद्भावना, शांति तथा भाईचारिक सद्भावना को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह छूट विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा उनके धार्मिक समारोहों या समागमों में इस्तेमाल होने वाले विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहनों पर दी गई है, ताकि सभी धार्मिक संस्थाओं को वित्तीय राहत मिल सके।”

लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने श्री गुरू गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि भेंट करने के मामले को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के सामने उठाने के बाद सदन ने श्री गुरू गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि भेंट की थी। पूरा राज्य उस महीने को ‘शोक के महीने’ के रूप में मनाता है क्योंकि इन दिनों के दौरान जालिम शासकों ने छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवारों में चिनवा दिया था। उनसे पहले 190 से अधिक संसद सदस्यों ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन उनमें से किसी ने भी इस मुद्दे को उठाने की जहमत नहीं की।

उन्होंने कहा कि वे बेहद सौभाग्यशाली महसूस करते हैं कि उन्हें श्री गुरू तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस और श्री गुरू रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को मनाने का मौका मिला है। हमारी सरकार श्री गुरू रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को शानदार ढंग से मनाने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि गुरू जी का संदेश दुनिया भर में फैलाना हमारा सामूहिक फर्ज है। श्री गुरू रविदास महाराज जी ने किसी भी तरह के भेदभाव से मुक्त एक समानतावादी समाज की कल्पना की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरू रविदास महाराज जी ने समूची मानवता की भलाई और समाज के सभी वर्गों की बराबरी का संदेश दिया, जिससे समानतावादी मूल्यों पर आधारित समाज की सृष्टि हुई। राज्य सरकार द्वारा श्री गुरू रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को मनाने के लिए पूरे साल के समागम आयोजित किए गए हैं। श्री गुरू रविदास महाराज जी ने एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना की जहां किसी को भी किसी तरह का दुख सहन न करना पड़े। राज्य सरकार ने विश्व भर में 650वें प्रकाश पर्व को शानदार ढंग से मनाने के लिए संत समाज से आशीर्वाद और सुझावों के लिए अपील की है।”

अंत में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह मेरे लिए बेहद गर्व और संतोष की बात थी कि ये जश्न मेरे कार्यकाल के दौरान मनाए जा रहे हैं। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि ये जश्न पूरे धार्मिक जोश और उत्साह के साथ मनाए जाएं।” उन्होंने संत समाज के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे जश्नों की रूपरेखा और कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने के लिए अपने सुझाव देकर राज्य का नेतृत्व करें।

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कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब विधानसभा में भाजपा सरकार द्वारा विद्यार्थियों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ प्रस्ताव किया पेश

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज पंजाब विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सदन से अपील की कि वह देशभर में लाखों विद्यार्थियों और नौकरी के अभ्यर्थियों के भविष्य को गंभीर क्षति पहुंचाने वाले बार-बार सामने आए परीक्षा घोटालों, पेपर लीक की घटनाओं तथा संस्थागत विफलताओं के लिए केंद्र सरकार को जवाबदेह ठहराए। पंजाब विधानसभा ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

विधानसभा को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “तानाशाही भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के अहंकारी शासन में देश का हर महत्वपूर्ण क्षेत्र, विशेषकर लाखों मेहनती युवाओं का भविष्य, बिकाऊ बना दिया गया है।”

वित्त मंत्री ने कहा, “नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में प्रणालीगत भ्रष्टाचार तथा बार-बार होने वाले पेपर लीक ने युवाओं का मनोबल तोड़ दिया है। जब विद्यार्थियों को यह महसूस हुआ कि मेरिट को धन और राजनीतिक संरक्षण के बदले बेच दिया गया है, तब निराशा के कारण ढाई लाख से अधिक विद्यार्थी पुनर्परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए।”

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “जहां प्रधानमंत्री अक्सर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने का प्रदर्शन करते हैं, वहीं उनकी सरकार की मशीनरी विद्यार्थियों की शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अपीलों का जवाब पैलेट गन, आंसू गैस और ए.के.-47 राइफलों से देती है। यहां तक कि नाबालिगों, दबाव में माफी मांगने वाली स्कूली छात्राओं तथा प्रसिद्ध समाज सुधारक सोनम वांगचुक के विरुद्ध भी न्याय देने के बजाय भारतीय न्याय संहिता की कठोर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए।”

उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव पिछले एक दशक के दौरान देश में सामने आए 70 से अधिक बड़े परीक्षा घोटालों, डिजिटल रिमोट-एक्सेस हैक तथा भर्ती घोटालों की कड़ी निंदा करता है। साथ ही यह राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) जैसी परीक्षा संस्थाओं के पूर्ण पुनर्गठन एवं विकेंद्रीकरण, पेपर लीक सिंडिकेटों के विरुद्ध उदाहरणात्मक कार्रवाई तथा शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज गैर-जरूरी आपराधिक मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग करता है।”

वित्त मंत्री ने कहा, “भाजपा शासित कई राज्यों और पंजाब की स्थिति में स्पष्ट अंतर है। जहां केंद्र सरकार भ्रष्ट सिंडिकेटों की रक्षा कर विद्यार्थियों का शोषण कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पूरी तरह मेरिट के आधार पर लगभग 70,000 सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। साथ ही अनुसूचित जाति (एस.सी.) छात्रवृत्ति योजना को पुनः शुरू किया गया, जिससे 50 हजार से अधिक वंचित वर्ग के विद्यार्थी बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सके।”
अपने संबोधन के अंत में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “भारत के युवाओं की अटूट शक्ति और जागरूकता ने अंततः अहंकारी भाजपा नेतृत्व को जनदबाव के आगे झुकने के लिए मजबूर कर दिया है। इस सदन को चाहिए कि वह इस प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे, ताकि जनता की चिंताओं और देश के युवाओं की आकांक्षाओं से उन्हें औपचारिक रूप से अवगत कराया जा सके।”

कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलबीर सिंह, विधायक गुरप्रीत सिंह बनांवाली, नरेंद्र कौर भाराज, डॉ. नछत्तर पाल, गुरिंदर सिंह गैरी वड़िंग, अमृतपाल सिंह तथा सुखनंद ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सदन को संबोधित किया।

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पंजाब से सीखे भाजपा सरकार, बिना शर्त सभी महिलाओं को लक्ष्मी योजना का लाभ दे- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली लक्ष्मी योजना मंे कड़ी शर्तें लगाने पर भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार से सीखना चाहिए। ‘‘आप’’ सरकार ने पंजाब में कोई शर्त नहीं लगाई है। अगर घर में चार महिलाएं हैं तो सभी को मावां-धीयां सत्कार योजना का लाभ मिल रहा है। जबकि दिल्ली सरकार ने 10 साल से रहने का प्रमाण और एमपी-एमएलए की मंजूरी की कड़ी शर्त लगा रखा है। इससे साफ है कि ये बहुत कम महिलाओं को योजना का लाभ देना चाहते हैं। अगर भाजपा सरकार की नीयत साफ होती तो योजना में इतनी शर्तें नहीं लगाती और सारी महिलाओं को लाभ देती।

लक्ष्मी योजना में कड़ी शर्तों और सांसद-विधायक की मंजूरी अनिवार्य होने के सवाल पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इससे साफ जाहिर है कि वे केवल भाजपा के लोगों को यह लाभ देना चाहते हैं, दूसरे लोगों को देना ही नहीं चाहते। जो यह शर्त लगाई गई है कि 10 साल रहने वाला होना चाहिए और सांसद-विधायक की मंजूरी चाहिए, इससे पता चलता है कि इन्हें यह लाभ देना ही नहीं है, केवल राजनीति करनी है। जितनी शर्तें इन्होंने लगाई हैं, उसके हिसाब से दिल्ली की 10 फीसद महिलाओं को भी इसका लाभ नहीं मिलेगा। पंजाब में हमने कोई शर्त नहीं लगाई, एक घर में अगर चार महिलाएं हैं तो चारों को मिलेगी। हमने अमीर, गरीब, जात-पात का कोई भेदभाव नहीं किया। जैसे पंजाब में साफ नीयत से सबको लाभ दे रहे हैं, वैसे ही अगर नीयत साफ है तो दिल्ली में भी दें।

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’मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 708 फेफड़ा (लंग) कैंसर मरीज़ों को ₹3.43 करोड़ का कैशलेस उपचार मिला

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विश्व फेफड़ा (लंग) कैंसर दिवस के अवसर पर भगवंत मान सरकार ने एक सरल लेकिन महत्त्वपूर्ण संदेश दिया है कि कोई भी व्यक्ति केवल इसलिए फेफड़ा कैंसर से अपनी जंग न हारे क्योंकि वह उपचार का ख़र्च वहन करने में सक्षम नहीं है। मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के माध्यम से राज्य सरकार न केवल जीवनरक्षक उपचार का ख़र्च उठा रही है, बल्कि बीमारी होने से पहले ही उसकी रोकथाम के लिए भी निवेश कर रही है।

योजना के आँकड़े इस प्रतिबद्धता को वास्तविकता में बदलते हुए दिखाई देते हैं। अब तक, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 708 फेफड़ा (लंग) कैंसर मरीज़ों को कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया गया है, जिस पर ₹3.43 करोड़ के दावे स्वीकृत किए जा चुके हैं। इससे सैकड़ों परिवारों को अस्पताल के बिलों की चिंता करने के बजाय मरीज़ के स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली है।

इस अवसर पर पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि फेफड़ा (लंग) कैंसर दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में से एक है, लेकिन यह ऐसा कैंसर भी है जिसमें रोकथाम और समय पर पहचान से उपचार के परिणाम बेहतर बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लोगों को उपचार की लागत की चिंता किए बिना समय पर इलाज मिल सके। हमारी ज़िम्मेदारी केवल उपचार उपलब्ध करवाने तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास है कि लोग समय पर अस्पताल पहुँचें और किसी भी मरीज़ तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के बीच आर्थिक तंगी कभी बाधा न बने।”

तंबाकू नियंत्रण में पंजाब की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य ने पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा, “हाल ही में, नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-6) द्वारा भारत में सबसे कम तंबाकू सेवन वाले राज्य के रूप में पंजाब की पहचान निरंतर जन-जागरूकता मुहिमों, प्रभावी तंबाकू नियंत्रण उपायों और लोगों की सक्रिय भागीदारी की सफलता का प्रमाण है। यह उपलब्धि हमारे इस विश्वास को और मज़बूत करती है कि फेफड़ा कैंसर के विरुद्ध रोकथाम ही सबसे प्रभावी हथियार है। मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि वे तंबाकू से दूर रहें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ और कैंसर-मुक्त, स्वस्थ पंजाब के निर्माण में अपना योगदान दें।”

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार फेफड़ा कैंसर विश्वभर में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है और तंबाकू का सेवन इसका सबसे प्रमुख ज़ोख़िम कारक है। भारत में भी तंबाकू सेवन में वृद्धि और बीमारी की देर से पहचान के कारण इसका बोझ लगातार बढ़ रहा है; ऐसे में रोकथाम, जन-जागरूकता और समय पर जाँच पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब, से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत लाभान्वित 708 मरीज़ों में 413 पुरुष शामिल हैं, जिनके उपचार पर ₹1,89,68,865 ख़र्च किए गए, जबकि 295 महिलाओं को ₹1,53,19,215 की लागत वाला कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया गया।

आयु वर्ग के अनुसार विश्लेषण से पता चलता है कि सबसे अधिक 286 लाभार्थी 61 से 75 वर्ष आयु वर्ग के हैं, जिनके उपचार पर ₹1,34,56,310 ख़र्च किए गए। इसके बाद 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 247 मरीज़ों को ₹1,24,83,240 की लागत वाला उपचार मिला। योजना के तहत 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 100 मरीज़ों , 19 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 9 मरीज़ों तथा 13 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 2 किशोर मरीज़ों को भी सहायता मिली, जो दर्शाता है कि फेफड़ा कैंसर विभिन्न आयु वर्गों के लोगों को प्रभावित कर सकता है।

ज़िलेवार आँकड़ों के अनुसार बठिंडा में सबसे अधिक 179 मरीज़ों को ₹1,46,02,300 की लागत वाला उपचार मिला। इसके बाद संगरूर में 163 मरीज़ों को ₹56,62,600 तथा फरीदकोट में 149 मरीज़ों को ₹37,85,760 की लागत वाला उपचार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त अमृतसर (55 मरीज़), जालंधर (42), पटियाला (20), एस.ए.एस. नगर (19), लुधियाना (11), फतेहगढ़ साहिब (1) तथा पठानकोट (1) के मरीज़ों ने भी योजना का लाभ उठाया। इन ज़िलों में कुल 640 लाभार्थियों को ₹3,17,04,235 की लागत का उपचार उपलब्ध करवाया गया।

डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों से सभी प्रकार के तंबाकू से दूर रहने, लगातार खाँसी, सीने में दर्द, बिना कारण वज़न कम होना तथा साँस लेने में तकलीफ़ जैसे चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय पर रोग की पहचान होने से मरीज़ के जीवित रहने की संभावना और उपचार की सफलता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भगवंत मान सरकार कैंसर की समय पर स्क्रीनिंग को मज़बूत करने, गुणवत्तापूर्ण उपचार तक पहुँच का विस्तार करने तथा मुख्यमंत्री सेहत योजना का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “योजना के तहत स्वीकृत प्रत्येक दावे के पीछे एक ऐसा मरीज़ है, जिसे जीवन का दूसरा अवसर मिला है; और एक ऐसा परिवार है, जिसे इलाज पर होने वाले भारी-भरकम ख़र्च से सुरक्षा मिली है।”

इसके अलावा, पंजाब सरकार मरीज़ों के बेहतर स्वास्थ्य लाभ और कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समग्र (होलिस्टिक) उपायों को भी बढ़ावा दे रही है।कैंसर नर्सिंग (पबमेड) पत्रिका में वर्ष 2023 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि योग में किए जाने वाले साँस संबंधी अभ्यास फेफड़ा कैंसर की सर्जरी के बाद मरीज़ों में लक्षणों को कम करने और स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। पंजाब सरकार की ‘सीएम दी योगशाला’ (CMDY) पहल का उद्देश्य नियमित योग और ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर लोगों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है

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