Connect with us

Punjab

Punjab की मान सरकार ने बना द‍िया इतना सख्‍त कानून, बेअदबी पर अब उम्रकैद की सजा और… क्‍या है कानूनी पेचीदगियां?

Published

on

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा ने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी के सत्कार के लिए आज सर्वसम्मति से ‘जागत जोत श्री गुरू ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026’ पास कर दिया, जिससे गुरू साहिब की बेअदबी के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। इस निर्णायक कदम के तहत भगवंत मान सरकार ने बेअदबी के लिए उम्र कैद की सजा का प्रावधान किया है, जिससे बेअदबी से निपटने के लिए देश के सबसे सख्त कानूनों में से एक बनाया गया है।

इस कानून को पिछली सरकारों की नाकामियों में ऐतिहासिक सुधार करार देते हुए मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि नया कानून पिछली सरकारों की कमियों को दूर करने के साथ-साथ तेजी से जांच सुनिश्चित बनाता है, अपराधों को गैर-जमानती बनाता है और 5 साल से लेकर उम्र कैद तक सख्त सजाओं के साथ-साथ 20 लाख रुपए तक के जुर्माने की व्यवस्था करता है, जबकि बेअदबी में सहायता करने वालों को भी बराबर जवाबदेह बनाता है।

पिछली सरकारों से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जहां अकाली-भाजपा और कांग्रेस गुरू साहिब के नाम पर वोट मांगते थे, वहीं यह ‘आप’ सरकार है, जिसने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता को बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए हैं और यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी दोबारा ऐसे अपराध करने की हिम्मत न करे।

बहस में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैं इस अजीम सदन को भरोसा दिलाता हूं कि यह बिल भविष्य में बेअदबी के अंत को दर्शाता है क्योंकि यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी ऐसे घिनौने अपराध में शामिल होने की हिम्मत नहीं करेगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले समय में श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घिनौनी कार्रवाइयों राज्य में सख्त मेहनत से बनाई शांति, सद्भावना, भाईचारा और फिर्कू सद्भावना को भंग करने की गहरी साजिश थी। ऐसा ‘अमानवीय और घिनौना कार्य’ मानवता के खिलाफ पाप था, जो मुट्ठी भर समाज विरोधी तत्वों द्वारा किया गया था, जो राज्य में शांति, सद्भावना, भाईचारा और सांप्रदायिक सद्भावना को भंग करने के लिए तैयार थे। यह कानून सुनिश्चित करेगा कि इस न माफ करने योग्य अपराध में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दूसरों के लिए मिसाल बनेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “पंजाबियों ने हमेशा राज्य में शांति और भाईचारे के सिद्धांतों को कायम रखा है और कोई भी राज्य के गहरे सामाजिक ताने-बाने को कभी भी तबाह नहीं कर सकेगा। हर कीमत पर शांति और भाईचारिक साझा बनाए रखने का दृढ़ इरादा रखते हुए हमारी सरकार ऐसी किसी भी कोशिश को नाकाम कर देगी, जो राज्य की भाईचारक सांझ, तरक्की और खुशहाली के लिए खतरा पैदा कर सकती है। श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी हर सिख के पिता हैं और राज्य सरकार इस पवित्र ग्रंथ की सुरक्षा सुनिश्चित बनाने के लिए वचनबद्ध है।”

कानून की महत्ता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर श्री गुरू ग्रंथ साहिब पंजाब में सुरक्षित नहीं तो फिर और कहीं नहीं हो सकते। उन्होंने यह भी कहा कि यह ऐक्ट बेअदबियों को रोकने के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी विश्वव्यापी भाईचारे, धर्म निरपेक्षता और समाजवादी मूल्यों का खजाना हैं, जिनसे मानवता को दिशा मिलती है। श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी का संदेश और दर्शन मानवता को आपसी सद्भावना, एकता, शांति और दया-भावना का मार्ग दिखाता है, जो दुनिया भर में प्रासंगिक है।

श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी के आध्यात्मिक महत्व को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी हमारे रोजाना जीवन में प्रेरणा, मार्गदर्शन और शांति का सदीवि स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी ने हमें हमेशा धर्म और सच्चाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया है। श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी ने हमें कुर्बानी देने और दूसरों को माफ करना सिखाया है और हमारे अंदर प्यार, सहनशीलता और विश्वव्यापी भाईचारे के मूल्य पैदा की हैं। हममें से हर किसी ने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी से प्रेरणा ली है, जो हमें नितनेम के साथ समानता, हक-सच्च, धर्म और इंसाफ के मार्ग पर चलने के लिए हमेशा प्रेरित करते हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी दुनिया का एक अनोखा धार्मिक ग्रंथ है जिसमें न सिर्फ सिख गुरुओं की शिक्षाएं हैं, बल्कि हिंदू श्रद्धालुओं, मुस्लिम संतों और सूफी संतों के भजन भी समाए हुए हैं। दसवें पातशाह श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने ज्योति जोत समाने से पहले श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी को गुरगद्दी देकर हमारे शाश्वत गुरू के रूप में मान्यता दी। ‘शब्द गुरू’ की धारणा हमारे जीवन में अत्यंत महत्व रखती है क्योंकि हर सिख के जीवन में जन्म और विवाह से लेकर मौत तक श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी से दिशा और सामर्थ्य की बख्शिश मांगी जाती है।

गुरबाणी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि “पवणु गुरू, पाणी पिता, माता धरति महतु”। महान गुरुओं ने हवा को गुरू, पानी को पिता और धरती को मां का दर्जा दिया है। महान गुरुओं ने 600 साल से अधिक समय पहले हमें जीवन का रास्ता सिखाया था जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है। क्योंकि श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी एक जागत जोत हैं, इसलिए हर पंजाबी और खासकर हर सिख उनका सत्कार करता है और श्री गुरू ग्रंथ साहिब में दर्ज हर शब्द की पालना करता है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह बड़े अफसोस की बात है कि पहले कानूनों को व्यापक जनहित की जगह राजनीतिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता था। उन्होंने साथ ही कहा कि आनंद मैरिज एक्ट तमिलनाडु, दिल्ली और यहां तक कि पाकिस्तान में भी है, लेकिन यह पंजाब में कहीं नहीं है। यह एक्ट यह सुनिश्चित करेगा कि जो भी बेअदबी के घिनौने अपराध में शामिल है, उसके साथ सख्ती से निपटा जाएगा और उनकी आने वाली पीढ़ियां भी अपने परिवार के सदस्यों को दी गई सजा को याद रखेंगी।

प्रक्रियात्मक पहलू के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि चूंकि यह बिल एक स्टेट बिल है, इसलिए इसके लिए राष्ट्रपति की सहमति की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि राज्य विधानसभा द्वारा पास होने के बाद बिल को राज्य के राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। अगर राज्यपाल जी को समय लगता है तो वे खुद उनसे मिलेंगे और उन्हें तुरंत बिल को मंजूरी देने की अपील करेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अपना ज्यादातर समय राज्यपाल के पास उनके विरुद्ध शिकायतें दर्ज करवाने के लिए जाते हैं, लेकिन अगर ये पार्टियां चाहें तो वे इस नेक काम के लिए उनका साथ भी दे सकती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जिस परिवार ने 13 अप्रैल, 1919 को जलियांवाला बाग कत्लेआम के दोषी जनरल डायर के लिए इस घिनौनी घटना के बाद रात के खाने की मेजबानी की थी, उनसे संबंधित जनप्रतिनिधि सदन में मौजूद नहीं हैं। उन्होंने सदन से दूर रहना ही उचित समझा क्योंकि उन्हें पता था कि आज उनका पर्दाफाश होना लाजमी है। इन नेताओं के हाथ निर्दोष लोगों के खून से रंगे हुए हैं और इन्होंने श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी को भी नहीं बख्शा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जो लोग बेअदबी के लिए जिम्मेदार हैं, उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होकर पूरे संगत के समक्ष अपना अपराध कबूल किया था। हालांकि, जब उन्हें लगा कि यह उनके राजनीतिक हितों के अनुकूल नहीं है, तो उन्होंने कुछ समय बाद यू-टर्न ले लिया और कहा कि कुछ लोग उन्हें बदनाम करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के हाथों में खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरा राज्य इन नेताओं का असली चेहरा जानता है, जिन्होंने हमेशा अपनी राजनीतिक चालों के माध्यम से लोगों को गुमराह किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार इन नेताओं की मर्जी और इच्छा के अनुसार चुने जाते रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित और न माफी योग्य है। इन नेताओं ने सिख विरोधी ताकतों को अपनी सरकार में उच्च पदों से नवाजा और सम्मानित किया तथा अपने कुकर्मों से सदा सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाई। जिस नेता को ‘फखर-ए-कौम’ दिया गया, उसी ने नकोदर घटना, बेअदबियों, बहबल कला और कोटकपूरा गोलीकांड के दोषियों की सरपरस्ती की और एस.जी.पी.सी. को महज कठपुतली बना कर रख दिया।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे नेता जिन्होंने अपने घिनौने कारनामों के माध्यम से हर सिख की मानसिकता को ठेस पहुंचाई है, वे भाईचारे के शीर्ष खिताब के हकदार नहीं हैं। इन नेताओं का एक भी काम सराहनीय नहीं है और ऐसा कुछ भी नहीं है जिस पर हम लोग उन्हें या उनकी विरासत पर गर्व कर सकें। इन मौकापरस्त नेताओं ने सिख पंथ को हमेशा अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए इस्तेमाल किया और बेअदबी के दोषियों को सजा देने के लिए कुछ नहीं किया।

उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पुराने कानूनों में पिछली राज्य सरकारों द्वारा चार बार संशोधन करने के बावजूद इस गैर-मानवीय अपराध के दोषियों को सजा देने के लिए ‘गुटका साहिब’ की सौगंध खाने वालों द्वारा कई कमियां छोड़ी गईं। यह पांचवां संशोधन अंतिम होगा और हमारे शाश्वत गुरू साहिब का निरादर करने के उद्देश्य से की गई गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाएगा। बदकिस्मती से कुछ पत्थर दिल लोग ज्ञान के इस स्त्रोत का निरादर करते हैं, जो बर्दाश्त योग्य नहीं है।”

बिल के प्रावधानों के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, “जागत जोत श्री गुरू ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2008 में संशोधन करके अब जागत जोत श्री गुरू ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026 बनाया गया है, ताकि साम्प्रदायिक सद्भावना और राष्ट्रीय एकता की तानों को मजबूत किया जा सके और बेअदबी की नापाक कोशिशों के लिए उम्र कैद सहित सख्त सजाएं दी जा सकें। यह देखा गया है कि बेअदबी की घटनाओं में शामिल दोषी मानसिक रूप से परेशान होने का दिखावा करते हैं, लेकिन इस एक्ट में कहा गया है कि मानसिक रूप से परेशान होने का दिखावा करने वाले व्यक्ति के परिवार के सदस्यों पर भी इस गैर-माफी योग्य अपराध के लिए मुकदमा चलाया जाएगा। इसमें ‘कस्टोडियन’ की परिभाषा दी गई है, जिसके अनुसार हर कस्टोडियन को सुरक्षित कस्टडी, सुरक्षा और दुरुपयोग या नुकसान को रोकने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाएगा (धारा 3बी)।”

उन्होंने कहा, “बेअदबी के मामलों की समय पर और सुचारू रूप से जांच सुनिश्चित बनाने के लिए व्यवस्था की गई है (धारा 4ए) और इस कानून के अधीन अपराध गैर-जमानती होगा तथा इस संबंध में कोई समझौता नहीं किया जाएगा (धारा 4बी)। एक्ट के मुताबिक सजाओं में वृद्धि की गई है, जिसमें 20 लाख रुपए तक जुर्माना और उम्र कैद तक की सजा शामिल है (धारा 5)। अपराधों को पांच किस्मों में श्रेणीबद्ध किया गया है, क्योंकि एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 5 साल तक की कैद और 10 लाख रुपए का जुर्माना किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पवित्र ग्रंथ की बेअदबी करने पर 7 से 20 साल की कैद और 2 से 10 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही सामाजिक या धार्मिक सद्भावना को भंग करने के इरादे से बेअदबी करने पर 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा और 5 से 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। बेअदबी में सहायता करने वालों को भी बराबर सजा मिलेगी और बेअदबी करने की कोशिश करने पर 3 से 5 साल की कैद और 1-3 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यह प्रस्तावित कानून ऐसी अमानवीय गतिविधियों पर रोक लगाने का काम करेगा और राज्य में शांति, भाईचारक सद्भावना तथा धार्मिक भावनाओं का सत्कार बनाए रखने में मदद करेगा।”

इस दौरान उन्होंने कहा कि वे बेहद सौभाग्यशाली महसूस करते हैं कि सभी पवित्र धार्मिक ग्रंथों के प्रति श्रद्धा और सत्कार के रूप में उनके नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने राज्य में विभिन्न धर्मों के धार्मिक ग्रंथों के पावन स्वरूपों को ले जाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहनों को मोटर वाहन टैक्स (एमवीटी) से छूट देने की मंजूरी दे दी है।

उन्होंने बताया, “इन वाहनों के लिए छूट विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा आयोजित नगर कीर्तनों को ध्यान में रखकर दी गई है और यह कदम साम्प्रदायिक सद्भावना, शांति तथा भाईचारिक सद्भावना को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। यह छूट विभिन्न धार्मिक संगठनों द्वारा उनके धार्मिक समारोहों या समागमों में इस्तेमाल होने वाले विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहनों पर दी गई है, ताकि सभी धार्मिक संस्थाओं को वित्तीय राहत मिल सके।”

लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि लोकसभा सदस्य के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने श्री गुरू गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि भेंट करने के मामले को तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन के सामने उठाने के बाद सदन ने श्री गुरू गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों को उनके शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि भेंट की थी। पूरा राज्य उस महीने को ‘शोक के महीने’ के रूप में मनाता है क्योंकि इन दिनों के दौरान जालिम शासकों ने छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवारों में चिनवा दिया था। उनसे पहले 190 से अधिक संसद सदस्यों ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन उनमें से किसी ने भी इस मुद्दे को उठाने की जहमत नहीं की।

उन्होंने कहा कि वे बेहद सौभाग्यशाली महसूस करते हैं कि उन्हें श्री गुरू तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस और श्री गुरू रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को मनाने का मौका मिला है। हमारी सरकार श्री गुरू रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को शानदार ढंग से मनाने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि गुरू जी का संदेश दुनिया भर में फैलाना हमारा सामूहिक फर्ज है। श्री गुरू रविदास महाराज जी ने किसी भी तरह के भेदभाव से मुक्त एक समानतावादी समाज की कल्पना की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा, “श्री गुरू रविदास महाराज जी ने समूची मानवता की भलाई और समाज के सभी वर्गों की बराबरी का संदेश दिया, जिससे समानतावादी मूल्यों पर आधारित समाज की सृष्टि हुई। राज्य सरकार द्वारा श्री गुरू रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को मनाने के लिए पूरे साल के समागम आयोजित किए गए हैं। श्री गुरू रविदास महाराज जी ने एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना की जहां किसी को भी किसी तरह का दुख सहन न करना पड़े। राज्य सरकार ने विश्व भर में 650वें प्रकाश पर्व को शानदार ढंग से मनाने के लिए संत समाज से आशीर्वाद और सुझावों के लिए अपील की है।”

अंत में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह मेरे लिए बेहद गर्व और संतोष की बात थी कि ये जश्न मेरे कार्यकाल के दौरान मनाए जा रहे हैं। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि ये जश्न पूरे धार्मिक जोश और उत्साह के साथ मनाए जाएं।” उन्होंने संत समाज के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे जश्नों की रूपरेखा और कार्यक्रमों को अंतिम रूप देने के लिए अपने सुझाव देकर राज्य का नेतृत्व करें।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Punjab

ई-20 पेट्रोल से वाहनों के नुकसान का मुद्दा पंजाब विधानसभा में गूंजा

Published

on

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब विधानसभा में ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में यह मानने के बावजूद कि ई-20 से वाहनों की माइलेज घटती है, इसे जबरदस्ती थोपा है। उन्होंने कहा कि इस कदम से वाहन मालिकों पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई है और आरोप लगाया कि इसका मकसद अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करना है, जिसके तहत भारत अगले पाँच सालों में 20 अरब डॉलर का इथेनॉल आयात करेगा। इस बात पर जोर देते हुए कि उपभोक्ताओं को चुनाव के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से फ्यूल स्टेशनों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों उपलब्ध कराने और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए ई-20 की कीमत घटाने की मांग करता हुआ एक प्रस्ताव पारित किया।

अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान, मैंने उपभोक्ताओं पर ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल थोपे जाने और इससे लोगों के वाहनों को हो रहे नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। यह तेल केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के थोपा गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, इससे 67 फीसदी वाहनों की माइलेज घटी है, जबकि 45 फीसदी वाहनों के इंजन खराब हुए हैं, जिससे आम लोगों पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ा है।”

उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, “केंद्र सरकार ने स्वयं संसद में माना है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों की माइलेज घटाता है। यह सब अमेरिका के साथ हुए एक बड़े व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करने और कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए किया जा रहा है। हमारी मांग है कि फ्यूल स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 के बीच चयन करने का अधिकार दिया जाए और ई-20 की कीमत तुरंत घटाई जाए। पंजाब विधानसभा ने आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इंकलाब जिंदाबाद।”

विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस को समेटते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह देश के हर नागरिक के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल बिना किसी उचित शोध, वैज्ञानिक अध्ययन या सलाह-मशवरे के वाहन मालिकों पर थोपा गया है। केंद्र सरकार ने यह साबित करने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया और न ही किसी इंजीनियरिंग कॉलेज या आई.आई.टी. से प्रमाण-पत्र लिया है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों के इंजनों के लिए सुरक्षित है।”

केंद्र पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ई-10 पेट्रोल पर चलने के लिए डिज़ाइन किए गए इंजनों को व्यापक विरोध के बावजूद मनमाने ढंग से ई-20 पर तब्दील कर दिया गया। 45,000 से अधिक वाहनों के सर्वेक्षण के अनुसार, 67 फीसदी ने माइलेज में भारी गिरावट दर्ज की, जबकि 45 फीसदी इंजन खराब हो गए हैं। यह आम लोगों, जो सालों की बचत और किश्तों पर वाहन खरीदते हैं, की खून-पसीने की कमाई की खुली लूट के अलावा कुछ नहीं है।”

वाहन मालिकों पर पड़ रहे बोझ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले तो आम लोग बड़ी मुश्किल से वाहन खरीदते हैं और फिर उन्हें इस नीति के कारण मरम्मत का अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ता है। यह बहुत अफसोसजनक है कि केंद्र सरकार ई-20 के नाम पर लोगों को गुमराह कर रही है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी यह मुद्दा उठाया है और दो लाख से अधिक हस्ताक्षर वाली जनता की याचिका तैयार की है, जो वे प्रधानमंत्री को सौंपने जा रहे हैं।”

केंद्र के अपने कबूलनामे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “शुरू में केंद्र सरकार ने दावा किया था कि सिर्फ वाहन निर्माता ही माइलेज का निर्धारण कर सकते हैं। लेकिन हर चालक अपने वाहन की माइलेज देख सकता है, जो आधुनिक वाहनों के डैशबोर्ड पर दिखाई देती है। केंद्र ने अब संसद में मान लिया है कि ई-20 पेट्रोल माइलेज को छह फीसदी तक घटा सकता है और यह वाहनों के इंजनों को प्रभावित करता है।”

इस नीति के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सिर्फ इथेनॉल के बारे में नहीं, बल्कि इस संबंध में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते से है। इस समझौते के तहत भारत अगले पाँच सालों में इथेनॉल के आयात को पाँच गुना बढ़ाकर लगभग एक अरब लीटर से पाँच अरब लीटर करेगा, जो कि लगभग 20 अरब डॉलर बनता है। अमेरिका इथेनॉल का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है और भारत को यह बोझ उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डोनाल्ड ट्रंप के आगे झुकने और उनकी हर बात को स्वीकार करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? अमेरिकी किसान अपनी अतिरिक्त पैदावार का निपटारा कर रहे हैं, जबकि भारतीय उपभोक्ताओं को उसकी कीमत चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

केंद्र सरकार की विदेश नीति की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र के फैसले बड़े कॉरपोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। स्थिति अब यह बन चुकी है कि भारत को कहाँ से कच्चा तेल खरीदना है और कहाँ से नहीं, यह अमेरिका तय करता है। ऑपरेशन सिंधूर के दौरान भी, अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान से संबंधित विकास की घोषणा की थी, जिससे हमारी विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।”

इसे लागू करने की समय-सीमा पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्र ने असल में 2030 तक ई-20 को लागू करने की योजना बनाई थी। 2026 में इसे लागू करने की क्या जल्दी थी? उन्होंने ई-20 से शुरुआत की है और ई-25 तथा ई-50 को लागू करने से पहले विवाद के ठंडा पड़ने का इंतज़ार कर रहे हैं।”

विधानसभा के रुख को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब विधानसभा ने इस गंभीर राष्ट्रीय मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है। भाजपा सदस्यों ने हिस्सा न लेने का फैसला किया, लेकिन हम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट होनी चाहिए। पहले, लोग लैड और अनलेड पेट्रोल में से एक चुन सकते थे। यह फैसला लोगों की मर्जी को ताक पर रखकर जबरन उन पर थोपा गया है।”

इस नीति की तुलना टोल प्लाज़ा से करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “दुनिया भर में, लोगों के पास टोल सड़कों या बिना टोल वाली सड़कों का चयन करने का विकल्प होता है। जब नागरिक पहले ही रोड टैक्स अदा करते हैं, तो उन्हें अलग से टोल टैक्स क्यों देना पड़े? पंजाब सरकार ने 19 टोल प्लाज़ा बंद कर दिए हैं, जिससे यात्रियों को हर रोज़ लगभग 67 लाख रुपये की बचत हो रही है।”

अपनी मांग को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों को तुरंत पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 में से एक चुनने की छूट दी जानी चाहिए और ई-20 की कीमत घटाई जानी चाहिए। मैंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर उनसे आम लोगों के हितों की रक्षा करने की अपील की है।”

Continue Reading

Punjab

पंजाब देश में सबसे अधिक वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल, कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी आगे: हरपाल सिंह चीमा

Published

on

यह रेखांकित करते हुए कि पंजाब पहले से ही देश में सबसे अधिक सरकारी वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल है तथा कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां कहा कि पूर्ववर्ती शिरोमणि अकाली दल-भाजपा तथा कांग्रेस सरकारों की नीतियों के कारण राज्य को कर्मचारियों के वेतन आयोग के बकायों के रूप में 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार हाईकोर्ट द्वारा स्वीकृत निपटान योजना के तहत पहले ही 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये का भुगतान कर चुकी है तथा हाईकोर्ट के ताजा फैसले और उपलब्ध कानूनी उपायों का परीक्षण करते हुए सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन आयोग की रिपोर्ट वास्तव में वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई थी, लेकिन इसे कई वर्षों तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट केवल जुलाई 2021 में लागू की गई। परिणामस्वरूप 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये को स्थगित कर दिया गया, जिससे 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी उत्पन्न हो गई।”

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि हालांकि तत्कालीन शासनकाल के दौरान वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन बकाया राशियों में से एक रुपया भी जारी किए बिना अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, जिससे पूरा वित्तीय बोझ वर्तमान सरकार पर आ गया।

‘आप’ सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विभिन्न कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद पंजाब सरकार ने एक सुनियोजित निपटान योजना तैयार की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, “14,191 करोड़ रुपये की कुल देनदारी में से ‘आप’ सरकार पहले ही कर्मचारियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी है। हाईकोर्ट ने इस निपटान योजना को स्वीकार कर लिया था और इसे लागू करने का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है।”

वर्तमान महंगाई भत्ते (डीए) के वितरण संबंधी हाईकोर्ट के ताजा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि एकल पीठ की व्याख्या में कुछ संवैधानिक मानदंडों तथा न्यायिक नज़ीरों की अनदेखी की गई प्रतीत होती है।

महाराष्ट्र राज्य के मामले में वर्ष 2005 के संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय देश में सबसे अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, जो कई श्रेणियों में केंद्र सरकार के वेतन ढांचे से भी अधिक हैं।

विभिन्न पदों के लिए पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के वेतनमानों की तुलना प्रस्तुत करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “राज्य सरकार का कानूनी तर्क यह था कि जब राज्य का वेतन ढांचा पहले से ही काफी अधिक हो, तो कोई भी राज्य सरकार एक ही समय में सबसे अधिक मूल वेतनमान और केंद्र की सबसे अधिक डीए दरों—दोनों को बनाए नहीं रख सकती।”

उन्होंने आगे कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने स्वयं यह निर्णय लिया था कि नए भर्ती किए गए कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत शामिल किया जाएगा।

कर्मचारियों के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान किया जाएगा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “हमारी कानूनी टीम ताजा फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है, न्यायिक नज़ीरों की समीक्षा कर रही है तथा उपयुक्त कानूनी रास्ता तय करने के लिए विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने की संभावना भी शामिल है।”

प्रेस वार्ता का समापन करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पूर्ववर्ती अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारों से भारी वित्तीय बोझ विरासत में मिलने के बावजूद पंजाब सरकार सभी बकाया वित्तीय देनदारियों का योजनाबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से समाधान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

Continue Reading

Punjab

इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब हुई गाड़ियों की मरम्मत में ₹25,000 से ₹50,000 का खर्च आता है: हरपाल सिंह चीमा

Published

on

भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को अप्रैल 2026 से 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंड (ई-20 पेट्रोल) को ज़बरदस्ती लागू करने की आलोचना की, जबकि असल में डेडलाइन 2030 से आगे बढ़ा दी गई थी। वह अपने पेश किए गए प्रस्ताव के समर्थन में सदन में बोल रहे थे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूएस दुनिया का 60 परसेंट इथेनॉल बनाता है जबकि भारत सिर्फ़ 5 परसेंट बनाता है। चीमा ने भाजपा की केंद्र सरकार पर भारतीय उपभोक्ताओं और गाड़ी मालिकों की कीमत पर यीएस और डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर करने का आरोप लगाया।

राज्य में इस मुद्दे की गंभीरता पर ध्यान देते हुए, कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग के पास अभी 1,25,88,851 रजिस्टर्ड टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर और कमर्शियल गाड़ियां हैं, जबकि पड़ोसी राज्यों से खरीदी गई कुछ दूसरी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन प्रोसेस अभी भी चल रहा है। इतनी ज़्यादा पुरानी गाड़ियों वाले राज्यों पर ज़बरदस्ती ई-20 फ्यूल थोपना बहुत भारी पड़ रहा है।”

लोकल मैकेनिकों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया, “इथेनॉल ब्लेंड से खराब हुई कार को ठीक करने का खर्च ₹25,000 से ₹50,000 के बीच है।”

उन्होंने पुरानी गाड़ियों वाले लोगों के लिए दूसरा इंतज़ाम न करने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की भी आलोचना की और चेतावनी दी कि अगर डिलीवरी बॉय और छोटे व्यापारियों की गाड़ियां हर कुछ महीनों में खराब होती रहीं, तो उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी।

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया, “केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी संसद में माना था कि फ्यूल माइलेज में 6% की कमी आई है, जबकि असल में एफिशिएंसी का नुकसान बहुत ज़्यादा है। घरेलू वैज्ञानिकों, मैन्युफैक्चरर्स, सांसदों या आम जनता से सलाह किए बिना देश पर ऐसी पॉलिसी थोपना निंदनीय है। यह पॉलिसी देश को कॉर्पोरेट हितों के लिए बेच रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “इथेनॉल बनाने में बहुत पानी लगता है, जो पंजाब के पहले से ही गिरते भुमिगत पानी लेवल के लिए एक गंभीर खतरा है।”

भारी जन विरोध को हाईलाइट करते हुए, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने हाल ही में आप के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में ऑर्गनाइज़ किए गए एक डायलॉग का ज़िक्र किया, जिसमें 4,000 से 5,000 लोग शामिल हुए थे और 7 लाख लोगों ने इसे ऑनलाइन देखा था। उन्होंने बताया, “उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के मैकेनिक और एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया और इस बात पर अपनी आवाज़ उठाई कि यह पॉलिसी कंज्यूमर्स के लिए कितनी नुकसानदायक है, जिससे यह साबित होता है कि यह एक ज़रूरी और ज़रूरी नेशनल मुद्दा है जिस पर तुरंत दोबारा विचार करने की ज़रूरत है।”

Continue Reading

Trending