Punjab
भगवंत मान सरकार बेअदबी के खिलाफ लाई सबसे सख्त कानून, इंसाफ सुनिश्चित करने के लिए उम्रकैद और 25 लाख रुपये का जुर्माना: हरपाल सिंह चीमा
विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा पेश किए गए “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल” के समर्थन में बोलते हुए, वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने ‘बेअदबी’ के लिए सख्त सजा सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक संशोधन लाने पर मुख्यमंत्री का तहे दिल से धन्यवाद किया।
इस संशोधन को भगवंत मान सरकार का एक ईमानदार प्रयास बताते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने लोगों को गुमराह करने के लिए विपक्ष की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि संशोधित बिल में ऐतिहासिक सजा के प्रावधान किए गए हैं, जिसमें ‘बेअदबी’ के दोषियों के लिए उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, तथा इस अपराध को पूरी तरह गैर-जमानती श्रेणी में रखा गया है।
अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री चीमा ने शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राज्य में ‘बेअदबी’ की घटनाओं के काले इतिहास को नकोदर कांड से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ‘बेअदबी’ की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का सिलसिला हमेशा उसी समय शुरू हुआ जब पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार सत्ता में थी।
मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “4 फरवरी 1986 को नकोदर में, श्री गुरु अर्जन देव गुरुद्वारा साहिब में गुरु ग्रंथ साहिब के पांच स्वरूपों को आग के हवाले किए जाने की घटना के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध कर रहे सिख युवाओं पर पुलिस ने गोली चला दी थी। इस पुलिस फायरिंग में भाई रविंदर सिंह (लित्तरां), भाई हरमिंदर सिंह (चुल्लेपुर), भाई बलधीर सिंह (रामगढ़) और भाई झिलमन सिंह (गोरसियां) समेत चार युवक शहीद हो गए थे। घटना के बाद जस्टिस गुरनाम सिंह आयोग बनाया गया। हालांकि रिपोर्ट का पहला हिस्सा सौंप दिया गया, लेकिन दूसरा हिस्सा रहस्यमय तरीके से गायब हो गया।”
पिछली सरकारों द्वारा कार्रवाई की कमी को उजागर करते हुए उन्होंने आगे कहा, “1997 से 2002 और 2007 से 2017 तक लगातार अकाली-भाजपा सरकारों तथा 2002 से 2007 तक कांग्रेस सरकार ने लापता रिपोर्ट खोजने या न्याय दिलाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया। हैरानी की बात है कि नकोदर कांड में दोषी पाए गए अधिकारियों को बाद में सरकार और राजनीतिक दलों में महत्वपूर्ण पदों से नवाजा गया।”
2015 की घटनाओं का जिक्र करते हुए कैबिनेट मंत्री ने बताया कि अकाली-भाजपा सरकार ने सबूतों को नष्ट करने की सक्रिय कोशिश की, जिसमें बहिबल कलां गोलीकांड के बुलेट सबूतों से छेड़छाड़ भी शामिल है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “एक उच्च शिक्षित नेता, जो सांसद, केंद्रीय मंत्री और उपमुख्यमंत्री रह चुका है, वह श्री अकाल तख्त साहिब के सामने अपनी गलतियां स्वीकार करने के बाद इस तरह के कबूलनामे के लिए ‘दबाव’ पाये जाने का दावा कैसे कर सकता है?”
कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “कांग्रेस दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह विफल रही। उन्होंने केवल विशेष जांच टीमें बनाईं, लेकिन कभी भी अदालत में चालान पेश नहीं किए। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में हम लोगों को न्याय दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हमने आखिरकार जवाबदेही तय करने के लिए चालान पेश किए हैं।”
अपने विधानसभा संबोधन के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सरकार के रुख को स्पष्ट किया और कहा कि इन मुद्दों पर शिरोमणि अकाली दल का इतिहास दागदार रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पंजाब के राज्यपाल जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए बिना किसी देरी के “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) बिल, 2026” को मंजूरी देंगे। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए यह भी सवाल किया कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘बेअदबी’ के खिलाफ ऐसा सख्त कानून क्यों नहीं बनाया।
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आप सांसद मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी साइनबोर्ड फिर से लगाने के फैसले का किया स्वागत
आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अपने कैंपस में पंजाबी साइनबोर्ड और नेमप्लेट फिर से लगाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे पंजाब की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया।
कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में साइनबोर्ड और नेमप्लेट से पंजाबी (गुरुमुखी) हटाने पर कड़ा एतराज़ जताया था। उन्होंने इस कदम को पंजाब के इतिहास, संस्कृति और पहचान को दिखाने वाली भाषा का अपमान बताया।
इस मामले को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, सीपी राधाकृष्णन के सामने उठाते हुए, कंग ने उनसे तुरंत दखल देने की मांग की ताकि पंजाबी को उसकी सही जगह और सम्मान मिले, खासकर एक ऐसे संस्थान में जो पंजाब के नाम और विरासत को बनाए रखता है।
इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए, कंग ने कहा कि उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से एक ऑफिशियल लेटर मिला है, जिसमें कन्फर्म किया गया है कि पंजाबी साइनबोर्ड लगाने का प्रोसेस शुरू हो चुका है। लेटर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पंजाबी साइनबोर्ड के लिए ऑर्डर दे दिया है और उन्हें लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
इस फैसले का स्वागत करते हुए, कंग ने कहा कि इससे एक मजबूत संदेस जाता है कि पंजाब के वजूद और पंजाबी भाषा की इज्ज़त को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि पंजाबी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि पंजाब की रिच कल्चरल विरासत और सामूहिक पहचान की निशानी है, जिसका हर लेवल पर सम्मान किया जाना चाहिए और उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
कंग ने इस मामले पर तुरंत ध्यान देने के लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, श्री सी. पी. राधाकृष्णन का धन्यवाद किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी तारीफ़ की कि उन्होंने सुधार के कदम उठाए और पंजाब के लोगों की चिंताओं पर पॉज़िटिव जवाब दिया।
आप सांसद ने कहा कि पंजाब से जुड़े हर संस्थान में पंजाबी के सम्मान, अहमियत और हक की हमेशा रक्षा होनी चाहिए।
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मोहाली को मिला नया मेयर, विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत समाना ने संभाली कमान
मोहाली नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह समाना को मेयर चुना गया। वहीं आर.पी. शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर और हरपाल चन्नी को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा, विधायक कुलवंत सिंह और पार्टी नेता डॉ. सन्नी आहलूवालिया ने सरबजीत समाना को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।
मेयर पद को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। शुरुआत में डॉ. सन्नी आहलूवालिया को इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी नेतृत्व से करीबी संबंधों के चलते उनका नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदले और सरबजीत समाना को उम्मीदवार बनाया गया।
बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले विधायक कुलवंत सिंह ने पार्टी पार्षदों के साथ लगातार बैठकें कीं। नगर निगम चुनाव जीतने वाले कई पार्षद उनके करीबी सहयोगी माने जाते हैं, जिससे मेयर पद की दौड़ में उनके बेटे का पलड़ा भारी रहा।
पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पंजाब आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा खुद नगर निगम कार्यालय पहुंचे और उनकी मौजूदगी में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।
दूसरी ओर, मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया, जबकि शिरोमणि अकाली दल के पार्षद बैठक के दौरान वॉकआउट कर गए। इसके चलते चुनावी माहौल काफी गर्म रहा।
चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी पार्षदों के मोबाइल फोन नगर निगम कार्यालय के बाहर जमा कराए गए और रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ही उन्हें बैठक कक्ष में प्रवेश दिया गया।
सरबजीत सिंह समाना के मेयर बनने के साथ ही मोहाली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पकड़ और मजबूत हो गई है। अब शहर के विकास कार्यों और नगर निगम की आगामी योजनाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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अकाली दल को बड़ा झटका! मनप्रीत इयाली ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल
पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दाखा से शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह इयाली मंगलवार को औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उनके इस फैसले को पंजाब की पंथक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
संगठन में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त और पद की अपेक्षा के इस मंच का साथ चुना है। उनका उद्देश्य पंजाब की पंथक और क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करना तथा राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाना है।
इयाली ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी रूप से वह अभी भी शिरोमणि अकाली दल के विधायक हैं। उन्होंने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ फिलहाल एक सामाजिक और संगठनात्मक मंच है, न कि चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल, इसलिए विधायक पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनमें राज्य के पानी का मुद्दा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों का मामला, चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार और अन्य क्षेत्रीय हित शामिल हैं। इन मुद्दों को नई ऊर्जा और मजबूती के साथ उठाया जाएगा।
मनप्रीत इयाली ने कहा कि पंजाब, पंजाबी पहचान और पंथक विचारधारा को मजबूत करने के लिए समान सोच रखने वाली सभी ताकतों को एक मंच पर आने की जरूरत है। उनके इस कदम के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।
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