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कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब विधानसभा में भाजपा सरकार द्वारा विद्यार्थियों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ प्रस्ताव किया पेश
पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज पंजाब विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सदन से अपील की कि वह देशभर में लाखों विद्यार्थियों और नौकरी के अभ्यर्थियों के भविष्य को गंभीर क्षति पहुंचाने वाले बार-बार सामने आए परीक्षा घोटालों, पेपर लीक की घटनाओं तथा संस्थागत विफलताओं के लिए केंद्र सरकार को जवाबदेह ठहराए। पंजाब विधानसभा ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
विधानसभा को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “तानाशाही भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के अहंकारी शासन में देश का हर महत्वपूर्ण क्षेत्र, विशेषकर लाखों मेहनती युवाओं का भविष्य, बिकाऊ बना दिया गया है।”
वित्त मंत्री ने कहा, “नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में प्रणालीगत भ्रष्टाचार तथा बार-बार होने वाले पेपर लीक ने युवाओं का मनोबल तोड़ दिया है। जब विद्यार्थियों को यह महसूस हुआ कि मेरिट को धन और राजनीतिक संरक्षण के बदले बेच दिया गया है, तब निराशा के कारण ढाई लाख से अधिक विद्यार्थी पुनर्परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए।”
मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “जहां प्रधानमंत्री अक्सर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने का प्रदर्शन करते हैं, वहीं उनकी सरकार की मशीनरी विद्यार्थियों की शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अपीलों का जवाब पैलेट गन, आंसू गैस और ए.के.-47 राइफलों से देती है। यहां तक कि नाबालिगों, दबाव में माफी मांगने वाली स्कूली छात्राओं तथा प्रसिद्ध समाज सुधारक सोनम वांगचुक के विरुद्ध भी न्याय देने के बजाय भारतीय न्याय संहिता की कठोर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए।”
उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव पिछले एक दशक के दौरान देश में सामने आए 70 से अधिक बड़े परीक्षा घोटालों, डिजिटल रिमोट-एक्सेस हैक तथा भर्ती घोटालों की कड़ी निंदा करता है। साथ ही यह राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) जैसी परीक्षा संस्थाओं के पूर्ण पुनर्गठन एवं विकेंद्रीकरण, पेपर लीक सिंडिकेटों के विरुद्ध उदाहरणात्मक कार्रवाई तथा शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज गैर-जरूरी आपराधिक मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग करता है।”
वित्त मंत्री ने कहा, “भाजपा शासित कई राज्यों और पंजाब की स्थिति में स्पष्ट अंतर है। जहां केंद्र सरकार भ्रष्ट सिंडिकेटों की रक्षा कर विद्यार्थियों का शोषण कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पूरी तरह मेरिट के आधार पर लगभग 70,000 सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। साथ ही अनुसूचित जाति (एस.सी.) छात्रवृत्ति योजना को पुनः शुरू किया गया, जिससे 50 हजार से अधिक वंचित वर्ग के विद्यार्थी बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सके।”
अपने संबोधन के अंत में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “भारत के युवाओं की अटूट शक्ति और जागरूकता ने अंततः अहंकारी भाजपा नेतृत्व को जनदबाव के आगे झुकने के लिए मजबूर कर दिया है। इस सदन को चाहिए कि वह इस प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे, ताकि जनता की चिंताओं और देश के युवाओं की आकांक्षाओं से उन्हें औपचारिक रूप से अवगत कराया जा सके।”
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलबीर सिंह, विधायक गुरप्रीत सिंह बनांवाली, नरेंद्र कौर भाराज, डॉ. नछत्तर पाल, गुरिंदर सिंह गैरी वड़िंग, अमृतपाल सिंह तथा सुखनंद ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सदन को संबोधित किया।
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पंजाब से सीखे भाजपा सरकार, बिना शर्त सभी महिलाओं को लक्ष्मी योजना का लाभ दे- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली लक्ष्मी योजना मंे कड़ी शर्तें लगाने पर भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार से सीखना चाहिए। ‘‘आप’’ सरकार ने पंजाब में कोई शर्त नहीं लगाई है। अगर घर में चार महिलाएं हैं तो सभी को मावां-धीयां सत्कार योजना का लाभ मिल रहा है। जबकि दिल्ली सरकार ने 10 साल से रहने का प्रमाण और एमपी-एमएलए की मंजूरी की कड़ी शर्त लगा रखा है। इससे साफ है कि ये बहुत कम महिलाओं को योजना का लाभ देना चाहते हैं। अगर भाजपा सरकार की नीयत साफ होती तो योजना में इतनी शर्तें नहीं लगाती और सारी महिलाओं को लाभ देती।
लक्ष्मी योजना में कड़ी शर्तों और सांसद-विधायक की मंजूरी अनिवार्य होने के सवाल पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इससे साफ जाहिर है कि वे केवल भाजपा के लोगों को यह लाभ देना चाहते हैं, दूसरे लोगों को देना ही नहीं चाहते। जो यह शर्त लगाई गई है कि 10 साल रहने वाला होना चाहिए और सांसद-विधायक की मंजूरी चाहिए, इससे पता चलता है कि इन्हें यह लाभ देना ही नहीं है, केवल राजनीति करनी है। जितनी शर्तें इन्होंने लगाई हैं, उसके हिसाब से दिल्ली की 10 फीसद महिलाओं को भी इसका लाभ नहीं मिलेगा। पंजाब में हमने कोई शर्त नहीं लगाई, एक घर में अगर चार महिलाएं हैं तो चारों को मिलेगी। हमने अमीर, गरीब, जात-पात का कोई भेदभाव नहीं किया। जैसे पंजाब में साफ नीयत से सबको लाभ दे रहे हैं, वैसे ही अगर नीयत साफ है तो दिल्ली में भी दें।
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’मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 708 फेफड़ा (लंग) कैंसर मरीज़ों को ₹3.43 करोड़ का कैशलेस उपचार मिला
विश्व फेफड़ा (लंग) कैंसर दिवस के अवसर पर भगवंत मान सरकार ने एक सरल लेकिन महत्त्वपूर्ण संदेश दिया है कि कोई भी व्यक्ति केवल इसलिए फेफड़ा कैंसर से अपनी जंग न हारे क्योंकि वह उपचार का ख़र्च वहन करने में सक्षम नहीं है। मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के माध्यम से राज्य सरकार न केवल जीवनरक्षक उपचार का ख़र्च उठा रही है, बल्कि बीमारी होने से पहले ही उसकी रोकथाम के लिए भी निवेश कर रही है।
योजना के आँकड़े इस प्रतिबद्धता को वास्तविकता में बदलते हुए दिखाई देते हैं। अब तक, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 708 फेफड़ा (लंग) कैंसर मरीज़ों को कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया गया है, जिस पर ₹3.43 करोड़ के दावे स्वीकृत किए जा चुके हैं। इससे सैकड़ों परिवारों को अस्पताल के बिलों की चिंता करने के बजाय मरीज़ के स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली है।
इस अवसर पर पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि फेफड़ा (लंग) कैंसर दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में से एक है, लेकिन यह ऐसा कैंसर भी है जिसमें रोकथाम और समय पर पहचान से उपचार के परिणाम बेहतर बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लोगों को उपचार की लागत की चिंता किए बिना समय पर इलाज मिल सके। हमारी ज़िम्मेदारी केवल उपचार उपलब्ध करवाने तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास है कि लोग समय पर अस्पताल पहुँचें और किसी भी मरीज़ तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के बीच आर्थिक तंगी कभी बाधा न बने।”
तंबाकू नियंत्रण में पंजाब की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य ने पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा, “हाल ही में, नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-6) द्वारा भारत में सबसे कम तंबाकू सेवन वाले राज्य के रूप में पंजाब की पहचान निरंतर जन-जागरूकता मुहिमों, प्रभावी तंबाकू नियंत्रण उपायों और लोगों की सक्रिय भागीदारी की सफलता का प्रमाण है। यह उपलब्धि हमारे इस विश्वास को और मज़बूत करती है कि फेफड़ा कैंसर के विरुद्ध रोकथाम ही सबसे प्रभावी हथियार है। मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि वे तंबाकू से दूर रहें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ और कैंसर-मुक्त, स्वस्थ पंजाब के निर्माण में अपना योगदान दें।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार फेफड़ा कैंसर विश्वभर में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है और तंबाकू का सेवन इसका सबसे प्रमुख ज़ोख़िम कारक है। भारत में भी तंबाकू सेवन में वृद्धि और बीमारी की देर से पहचान के कारण इसका बोझ लगातार बढ़ रहा है; ऐसे में रोकथाम, जन-जागरूकता और समय पर जाँच पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब, से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत लाभान्वित 708 मरीज़ों में 413 पुरुष शामिल हैं, जिनके उपचार पर ₹1,89,68,865 ख़र्च किए गए, जबकि 295 महिलाओं को ₹1,53,19,215 की लागत वाला कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया गया।
आयु वर्ग के अनुसार विश्लेषण से पता चलता है कि सबसे अधिक 286 लाभार्थी 61 से 75 वर्ष आयु वर्ग के हैं, जिनके उपचार पर ₹1,34,56,310 ख़र्च किए गए। इसके बाद 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 247 मरीज़ों को ₹1,24,83,240 की लागत वाला उपचार मिला। योजना के तहत 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 100 मरीज़ों , 19 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 9 मरीज़ों तथा 13 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 2 किशोर मरीज़ों को भी सहायता मिली, जो दर्शाता है कि फेफड़ा कैंसर विभिन्न आयु वर्गों के लोगों को प्रभावित कर सकता है।
ज़िलेवार आँकड़ों के अनुसार बठिंडा में सबसे अधिक 179 मरीज़ों को ₹1,46,02,300 की लागत वाला उपचार मिला। इसके बाद संगरूर में 163 मरीज़ों को ₹56,62,600 तथा फरीदकोट में 149 मरीज़ों को ₹37,85,760 की लागत वाला उपचार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त अमृतसर (55 मरीज़), जालंधर (42), पटियाला (20), एस.ए.एस. नगर (19), लुधियाना (11), फतेहगढ़ साहिब (1) तथा पठानकोट (1) के मरीज़ों ने भी योजना का लाभ उठाया। इन ज़िलों में कुल 640 लाभार्थियों को ₹3,17,04,235 की लागत का उपचार उपलब्ध करवाया गया।
डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों से सभी प्रकार के तंबाकू से दूर रहने, लगातार खाँसी, सीने में दर्द, बिना कारण वज़न कम होना तथा साँस लेने में तकलीफ़ जैसे चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय पर रोग की पहचान होने से मरीज़ के जीवित रहने की संभावना और उपचार की सफलता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भगवंत मान सरकार कैंसर की समय पर स्क्रीनिंग को मज़बूत करने, गुणवत्तापूर्ण उपचार तक पहुँच का विस्तार करने तथा मुख्यमंत्री सेहत योजना का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “योजना के तहत स्वीकृत प्रत्येक दावे के पीछे एक ऐसा मरीज़ है, जिसे जीवन का दूसरा अवसर मिला है; और एक ऐसा परिवार है, जिसे इलाज पर होने वाले भारी-भरकम ख़र्च से सुरक्षा मिली है।”
इसके अलावा, पंजाब सरकार मरीज़ों के बेहतर स्वास्थ्य लाभ और कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समग्र (होलिस्टिक) उपायों को भी बढ़ावा दे रही है।कैंसर नर्सिंग (पबमेड) पत्रिका में वर्ष 2023 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि योग में किए जाने वाले साँस संबंधी अभ्यास फेफड़ा कैंसर की सर्जरी के बाद मरीज़ों में लक्षणों को कम करने और स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। पंजाब सरकार की ‘सीएम दी योगशाला’ (CMDY) पहल का उद्देश्य नियमित योग और ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर लोगों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है
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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लुधियाना को दो और ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सौगात दी
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज लुधियाना के किदवई नगर और मिलर गंज में दो नए ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ जनता को समर्पित किए, जिसके साथ जिले में स्कूल ऑफ एमिनेंस की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। आधुनिक कक्षाओं, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, ऑडिटोरियम तथा अन्य उन्नत सुविधाओं से सुसज्जित ये नए परिसर सरकारी शिक्षा को मजबूत करने और विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शैक्षणिक आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पंजाब सरकार के ठोस प्रयासों का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में लगातार किए गए निवेश ने सरकारी स्कूलों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि बेहतर आधारभूत ढांचे, विदेशों में शिक्षकों के प्रशिक्षण तथा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के कारण अभिभावकों का सरकारी स्कूलों के प्रति विश्वास लगातार बढ़ा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में 27वें स्थान से छलांग लगाकर पहला स्थान प्राप्त किया है, जो प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर स्वस्थ, शिक्षित और नशा-मुक्त पंजाब के निर्माण के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराता है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विद्यार्थियों से संवाद किया तथा कक्षाओं और प्रयोगशालाओं का दौरा किया
मुख्यमंत्री ने नव-आरंभ किए गए ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ का दौरा करते हुए विद्यार्थियों के साथ काफी समय बिताया। उन्होंने कक्षाओं, विज्ञान प्रयोगशालाओं तथा अन्य शैक्षणिक सुविधाओं का निरीक्षण किया और आधुनिक आधारभूत ढांचे का जायजा लेने के साथ विद्यार्थियों से उनकी पढ़ाई, वैज्ञानिक प्रयोगों और सीखने के अनुभवों पर बातचीत की। भगवंत सिंह मान ने शिक्षकों और स्कूल स्टाफ से भी मुलाकात की तथा राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए उनके समर्पण की सराहना की।
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान अनेक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक उनसे ऑटोग्राफ लिए, जबकि कुछ विद्यार्थियों ने प्रेम और सम्मान के प्रतीक के रूप में अपने हाथों से बनाए गए स्केच और चित्र उन्हें भेंट किए। कार्यक्रम के दौरान एक विद्यार्थी के अभिभावकों ने मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट किया और उनकी अगुवाई में शिक्षा क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए पंजाब सरकार द्वारा किए जा रहे क्रांतिकारी प्रयासों की प्रशंसा की।
इन ऐतिहासिक क्षणों की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “आज लुधियाना में नए ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ भवन का उद्घाटन करना मेरे लिए अत्यंत गर्व और संतोष का विषय है। हमारे सरकारी स्कूलों का उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों को निजी स्कूल छोड़कर यहां प्रवेश लेने के लिए प्रेरित कर रहा है। पंजाब आज स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में देश में पहले स्थान पर है और इस वर्ष हमारे सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है, जबकि 125 से अधिक विद्यार्थियों ने जेईई मेन्स परीक्षा पास की है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर हम उस ‘रंगले पंजाब’ का निर्माण कर रहे हैं, जिसका हमारे बच्चे सपना देखते हैं। इंकलाब जिंदाबाद।”
यह रहा भाग-2 का हिंदी अनुवाद, मूल प्रेस विज्ञप्ति के क्रम और शैली को यथावत रखते हुए।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज पंजाब के लोगों, विशेष रूप से लुधियाना के निवासियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। किदवई नगर और मिलर गंज में दो नए ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ भवन जनता को समर्पित किए जा रहे हैं। इन दो नए स्कूलों के साथ लुधियाना में अब 16 स्कूल ऑफ एमिनेंस हो गए हैं, जिससे यह पंजाब का सबसे अधिक स्कूल ऑफ एमिनेंस वाला पहला जिला बन गया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब की औद्योगिक क्रांति का नेतृत्व करने के बाद अब लुधियाना राज्य की शिक्षा क्रांति में भी अग्रणी बनकर उभर रहा है। स्कूल ऑफ एमिनेंस मॉडल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच में अमीर और गरीब के बीच की खाई को काफी हद तक समाप्त किया है। आज सामान्य परिवारों के बच्चों को ऐसी सुविधाएं मिल रही हैं, जो अनेक निजी विद्यालयों से भी बेहतर हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “ये स्कूल आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उनके सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “किदवई नगर स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस 10.62 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया गया है। नया भवन 8300 वर्ग गज से अधिक क्षेत्र में बनाया गया है और इसमें कुल 60 कमरे हैं, जिनमें 27 कक्षाएं, सात आधुनिक प्रयोगशालाएं, एक पुस्तकालय, प्राचार्य कक्ष, 500 विद्यार्थियों की क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम तथा नौ शौचालय शामिल हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मिलर गंज स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस 3.48 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है। यह नई इमारत 1800 वर्ग गज से अधिक क्षेत्र में निर्मित की गई है और इसमें कुल 22 कमरे हैं, जिनमें 11 कक्षाएं, सात प्रयोगशालाएं, प्राचार्य कक्ष तथा छह शौचालय शामिल हैं। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए यहां एक लिफ्ट भी स्थापित की गई है। इससे पहले इंद्रपुरी, लुधियाना में भी एक अत्याधुनिक स्कूल ऑफ एमिनेंस भवन का उद्घाटन किया जा चुका है।”
उन्होंने आगे कहा, “इंद्रपुरी स्कूल प्रीमियम सुविधाओं से सुसज्जित है, जिसमें एक स्विमिंग पूल तथा एक टेनिस कोर्ट भी शामिल है। यहां विद्यार्थियों की संख्या 1320 से बढ़कर 1788 हो गई है, जो सरकारी विद्यालयों के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “लुधियाना जिले के 200 सरकारी विद्यालयों के आधारभूत ढांचे का व्यापक उन्नयन किया गया है। जिले भर में लगभग तीन लाख विद्यार्थी सरकारी विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं। लुधियाना में अब 16 स्कूल ऑफ एमिनेंस, 11 स्कूल ऑफ ब्रिलियंस तथा 35 स्कूल ऑफ हैप्पीनेस संचालित हो रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने के उद्देश्य से शिक्षा क्षेत्र में कई ऐतिहासिक पहल की हैं। केवल मुफ्त सुविधाओं अथवा रियायती योजनाओं से गरीबी और सामाजिक बुराइयों का स्थायी समाधान संभव नहीं है, बल्कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जो लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाकर उन्हें इस दुष्चक्र से बाहर निकाल सकती है। इसलिए सरकार शिक्षा के स्तर को और अधिक बेहतर बनाने तथा आम लोगों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य सरकार के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर पहुंचा है। राज्य सरकार ने प्राथमिक एवं मिडिल शिक्षा को सुदृढ़ किया है, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया है, स्मार्ट कक्षाएं शुरू की हैं तथा शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। नीति आयोग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़े भी इस उपलब्धि की पुष्टि करते हैं कि पंजाब ने प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए अग्रणी स्थान प्राप्त किया है।”
यह रहा भाग-3 (अंतिम भाग) का हिंदी अनुवाद, मूल प्रेस विज्ञप्ति के क्रम और शैली को यथावत रखते हुए।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले चार वर्षों से राज्य सरकार ने शिक्षकों के प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और स्मार्ट कक्षाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है और आज पंजाब इस क्षेत्र में देश में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि पहले यह स्थान केरल के पास था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से पहला स्थान प्राप्त किया है। आने वाले समय में भी ऐसे अनेक प्रयास किए जाएंगे। शिक्षा वह प्रकाश है, जो अंधकार को दूर कर समाज और राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बनाती है, इसलिए राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।”

उन्होंने कहा, “हमारी सरकार का दृढ़ विश्वास है कि प्रत्येक बच्चा, चाहे वह किसी भी आर्थिक पृष्ठभूमि से संबंधित हो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार रखता है। शिक्षा के क्षेत्र को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की सभी पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सामान्य परिवारों के बच्चों को भी वही अवसर प्राप्त हों, जो अन्य बच्चों को उपलब्ध हैं। शिक्षा आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाने तथा समृद्ध पंजाब के निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम है और राज्य सरकार इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “जब मैंने पदभार संभाला था, उस समय स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब देश में 27वें स्थान पर था। यह अत्यंत गर्व और संतोष की बात है कि आज राज्य इस क्षेत्र में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। वर्ष 2021 में सरकारी स्कूलों के केवल 80 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जबकि वर्ष 2026 में यह संख्या बढ़कर 881 हो गई है, जो पंजाब के सरकारी विद्यालयों के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। पंजाब ने सरकारी विद्यालयों में अभिभावक-शिक्षक बैठकों के आयोजन में भी अग्रणी भूमिका निभाई है, जिनमें लगभग 24 लाख अभिभावकों की भागीदारी दर्ज की गई। लगभग 20,000 सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को निःशुल्क बस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है, जिनमें 12,000 छात्राएं शामिल हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लुधियाना में 155 विद्यार्थियों ने जेईई और नीट परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं, जबकि 47 विद्यार्थियों ने पंजाब राज्य प्रतिभा खोज परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। पिछले वर्ष लुधियाना के 201 विद्यार्थियों ने विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय स्तर पर जिले का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने सात स्वर्ण पदकों सहित कुल 25 पदक जीतकर जिले और राज्य का गौरव बढ़ाया।”
इससे पूर्व मलिका सिंह, केशव कुमार, राहुल, ऐशप्रीत कौर, अक्ष, सौरभ, आराधना, जसदीप कौर, लवी तथा अन्य विद्यार्थियों ने शिक्षा क्षेत्र को नई दिशा देने वाली अभिनव पहलों के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।
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