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डेराबस्सी बस स्टैंड पर AAP का प्रदर्शन:“पंजाब के गद्दार मुर्दाबाद” के नारे लगाए, MLA रंधावा बोले- नेताओं ने निजी स्वार्थ में बदली पार्टी

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आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को मोहाली के डेराबस्सी बस स्टैंड पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सात राज्यसभा सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शन का नेतृत्व स्थानीय विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने किया।

इस दौरान बड़ी संख्या में ‘आप’ कार्यकर्ता एकत्र हुए और उन्होंने केंद्र सरकार तथा भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिन प्रतिनिधियों को जनता ने अपने विश्वास के साथ चुना था, उन्होंने पार्टी बदलकर लोगों के भरोसे के साथ धोखा किया है।

विधायक बोले- कुछ नेताओं ने निजी स्वार्थ के चलते सिद्धांतों से समझौता किया

विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने अपने संबोधन में कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने निजी स्वार्थ के चलते सिद्धांतों से समझौता किया है। रंधावा ने ऐसे कदमों को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी इसका पुरजोर विरोध करती रहेगी।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “पंजाब के गद्दार मुर्दाबाद” और “जनता के भरोसे से धोखा नहीं चलेगा” जैसे नारे लगाए, जिससे उनका रोष स्पष्ट रूप से प्रकट हुआ।पार्टी नेताओं ने घोषणा की कि आम आदमी पार्टी जनता के अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी कार्यकर्ता हर स्तर पर विरोध दर्ज कराएंगे और लोकतंत्र तथा जनादेश की रक्षा के लिए आंदोलन को तेज किया जाएगा। पार्टी ने पंजाब के हकों और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठाने का संकल्प दोहराया।

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मोहाली में AAP ने राघव चड्ढा का पुतला फूंका:पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल होने सात सांसदों के विरोध प्रदर्शन, गद्दारी करने का आरोप

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आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को मोहाली के डेराबस्सी बस स्टैंड पर जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राघव चड्ढा सहित सात राज्यसभा सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शन का नेतृत्व विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने किया।

बड़ी संख्या में ‘आप’ कार्यकर्ता केंद्र सरकार और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बस स्टैंड पर जमा हुए। इसके बाद प्रदर्शन ​शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “पंजाब के गद्दार मुर्दाबाद” और “जनता के भरोसे से धोखा नहीं चलेगा” जैसे नारे लगाए। इसके साथ कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों का पुतला फूंका

निजी स्वार्थ के लिए सिद्धांतों से किया समझौता

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिन प्रतिनिधियों को जनता ने विश्वास के साथ चुना था, उन्होंने पार्टी बदलकर लोगों के भरोसे को तोड़ा है। विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने कहा कि जनता के जनादेश का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। कुछ नेताओं ने निजी स्वार्थ के लिए सिद्धांतों से समझौता किया है। रंधावा ने कहा कि ऐसे कदम लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ हैं और ‘आप’ इसका कड़ा विरोध जारी रखेगी।

पार्टी कार्यकर्ता हर स्तर पर करेंगे विरोध

‘आप’ नेताओं ने घोषणा की कि वे जनता के अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता हर स्तर पर विरोध दर्ज कराएंगे और लोकतंत्र व जनादेश की रक्षा के लिए आंदोलन को तेज किया जाएगा। पार्टी ने स्पष्ट किया कि पंजाब के हकों और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए ‘आप’ लगातार आवाज उठाती रहेगी।

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पंजाब सरकार ने हरभजन सिंह से वापस ली Z+ सिक्योरिटी, तो केंद्र ने तुंरत दे दी सुरक्षा

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पंजाब की राजनीति में उठापटक के बीच मान सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व क्रिकेटर और आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह की जेड प्लस सुरक्षा वापस ले ली है।

रविवार सुबह जालंधर स्थित उनके आवास से सुरक्षाकर्मियों को हटा लिया गया। इस कदम ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर टूट और बगावत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

केंद्र सरकार ने दी सुरक्षा

सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा वापस लेने का निर्णय हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के मद्देनजर लिया गया है। इससे पहले आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा की सुरक्षा में भी बदलाव किया गया था। बाद में उन्हें केंद्र की ओर से जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिल गई थी। अब हरभजन सिंह को भी केंद्र सरकार ने तुरंत सुरक्षा दे दी है। 

दरअसल, राघव चड्ढा ने दावा किया था कि आप के सात राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं, जिनमें हरभजन सिंह का नाम भी शामिल बताया गया। हालांकि, हरभजन सिंह ने इस पूरे मामले पर अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, आप नेतृत्व ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि केवल तीन सांसदों ने ही पार्टी छोड़ी है।

इधर, पार्टी छोड़ने की खबरों के बीच आप कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। जालंधर, लुधियाना और फगवाड़ा में कुछ सांसदों के आवास और संस्थानों के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए। दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए, जिससे माहौल और गरमा गया। पुलिस मौके पर मौजूद रही, लेकिन प्रदर्शन को लेकर सख्ती कम नजर आई।

राष्ट्रपति से मिलने के लिए सीएम मान ने मांगा समय

राजनीतिक तनाव के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। माना जा रहा है कि वे पार्टी बदलने वाले सांसदों के खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई की मांग उठा सकते हैं। दूसरी ओर, आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह भी उपराष्ट्रपति से मुलाकात कर इन सांसदों की सदस्यता रद करने की मांग करेंगे।

पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति को चुनावी मोड में ला दिया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की उठापटक को बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह संकट गहराता है तो इसका असर पार्टी के संगठन और चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

फिलहाल, हरभजन सिंह की चुप्पी और सुरक्षा वापसी के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि वे इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और पंजाब की सियासत किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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7 राज्यसभा सदस्यों के दल बदल से मचा सियासी तूफान, CM मान राष्ट्रपति से मिलने को तैयार, बड़ा फैसला संभव

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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने का मामला अब मामला राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा है। माना जा रहा है कि वह हाल ही में भाजपा में शामिल हुए 7 राज्यसभा सदस्यों के मुद्दे को लेकर अपना पक्ष रखेंगे और इस पूरे घटनाक्रम पर संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे।

जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री राष्ट्रपति से यह अनुरोध कर सकते हैं कि संबंधित राज्यसभा सदस्यों को बुलाकर उनका पक्ष सुना जाए और उसके बाद नियमों के तहत उचित फैसला लिया जाए। इसके साथ ही दलबदल कानून के तहत इन सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग भी उठाई जा सकती है।सरकार का मानना है कि यह मामला लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर स्पष्ट निर्णय जरूरी है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू

उधर आम आदमी पार्टी के लिए यह घटनाक्रम बड़ा झटका माना जा रहा है। पंजाब से पार्टी के छह राज्यसभा सदस्यों का एक साथ भाजपा में शामिल होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस घटनाक्रम से भाजपा की राज्यसभा में स्थिति मजबूत हुई है। खास बात यह है कि पंजाब में केवल दो विधायक होने के बावजूद भाजपा अब राज्यसभा में सात सदस्यों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।

सीएम की मुलाकात पर टिकी नजरें

वहीं दूसरी ओर आप के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने पहले ही पार्टी का रुख साफ कर दिया है। उनका कहना है कि जब दो-तिहाई सदस्य एक साथ दल बदलते हैं तो दलबदल कानून लागू नहीं होता। इस बयान के बाद कानूनी बहस भी तेज हो गई है और विशेषज्ञ अलग-अलग राय दे रहे हैं।

अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री भगवंत मान की संभावित राष्ट्रपति से मुलाकात पर टिकी हैं। अगर यह मुलाकात होती है तो आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर कोई बड़ा संवैधानिक फैसला सामने आ सकता है, जो पंजाब की सियासत की दिशा तय करेगा।

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