Politics
पंजाब में बड़ी सियासी हलचल, भाजपा नेता पूर्व CM अमरिंदर सिंह और बेटे को ईडी का समन
पंजाब में बड़ा सियासी हलचल देखा जा रहा है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणिंदर सिंह को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) उल्लंघन के एक पुराने मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है. यह मामला 2016 का है. इसमें पिता-पुत्र पर विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी होने का आरोप है. इसमें स्विस बैंक में खाते होने की बात शामिल है. ईडी ने अमरिंदर सिंह को 12 फरवरी को जालंधर कार्यालय में पेश होने के लिए कहा है, जबकि रणिंदर सिंह को 13 फरवरी को बुलाया गया है. हालांकि, 83 वर्षीय अमरिंदर सिंह इस समन पर पेश होने की संभावना कम है क्योंकि उन्होंने 10 या 11 फरवरी को मोहाली के एक निजी अस्पताल (फोर्टिस) में घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी कराई है. सर्जरी के बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया था, जहां उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है.
ईडी उन्हें नई तारीख दे सकता है. रणिंदर सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कानून का पालन करने वाले नागरिकों के रूप में, हम हर जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे. हमें कानून के शासन में पूर्ण विश्वास है और हम आश्वस्त हैं कि सत्य और न्याय की जीत होगी.
क्या है मामला
यह मामला 2016 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा दायर चार्जशीट से शुरू हुआ, जब अमरिंदर सिंह कांग्रेस में थे. आईटी विभाग ने लुधियाना की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज की, जिसमें रणिंदर सिंह को विदेशी संपत्तियों का लाभार्थी बताया गया. आरोप है कि रणिंदर सिंह ने HSBC प्राइवेट बैंक (सुइस), जेनेवा, स्विट्जरलैंड में बैंक खाते बनाए रखे और नियंत्रित किए. जांच में पता चला कि रणिंदर सिंह जुलाई 2005 में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में ‘जैकरैंडा ट्रस्ट’ के ‘सेटलर’ थे, जिसमें HSBC ट्रस्ट कंपनी लिमिटेड ट्रस्टी के रूप में शामिल थी.
आई-टी विभाग ने दावा किया कि रणिंदर ने एजेंसी को गुमराह किया और कहा कि उनके पास परिवार की विदेशी आय और ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेज नहीं हैं. फ्रांस सरकार से मिली क्रेडिबल जानकारी (मास्टर शीट्स) के आधार पर यह पता चला कि सिंह परिवार विदेशी बिजनेस एंटिटी के माध्यम से संपत्तियां नियंत्रित कर रहा था, जिसमें दुबई में संपत्ति भी शामिल है.
पिता-पुत्र ने लुधियाना कोर्ट के आदेश के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की, जिसमें दावा किया गया कि आई-टी रिकॉर्ड में फ्रांस गणराज्य से मिली ‘गुप्त’ जानकारी है और डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट (DTAA) के तहत इसे किसी तीसरे व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता. लेकिन सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के आदेश को बरकरार रखा और कहा कि यह वेल-रीजनड है तथा कानून में कोई त्रुटि नहीं है. इस आदेश के बाद ED ने जांच आगे बढ़ाई और समन जारी किए.
राजनीतिक और कानूनी संदर्भ
यह मामला अमरिंदर सिंह के राजनीतिक करियर में पुराना है. 2020 में भी रणिंदर सिंह को ED ने जालंधर में समन किया था. ED की जांच FEMA के तहत है, जबकि आई-टी विभाग ने टैक्स चोरी और अघोषित संपत्तियों का आरोप लगाया था. विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट के 2025 के फैसले ने ED को दस्तावेजों की जांच की अनुमति दी, जिससे यह मामला फिर सक्रिय हुआ. अमरिंदर सिंह दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा में हैं. उन्होंने हमेशा इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है. परिवार ने सहयोग का वादा किया है, लेकिन स्वास्थ्य कारणों से अमरिंदर सिंह की पेशी टल सकती है.
National
राघव चड्ढा बताएं, जनहित के मुद्दों पर मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे हैं? AAP का सवाल
आम आदमी पार्टी ने पंजाब से राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने को समान्य कार्रवाई बताते उनके बयान पर पलटवार किया है। पार्टी ने राघव चड्ढा पूछा है कि वह देश और पार्टी से जुड़े मुद्दों पर भाजपा या मोदी सरकार के खिलाफ बोलने से क्यों डर रहे हैं? लगातार पार्टी लाइन के खिलाफ काम रहे थे। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने और एलपीजी संकट पर सदन में बोलने से इन्कार करने समेत कई बार राघव चड्ढा ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया। एक लंबे अरसे से राघव चड्ढा ने संसद में ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाया है, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किए हों। पार्टी का कहना है कि केजरीवाल ने सबको निडरता और साहस से लड़ना सिखाया है, लेकिन राघव चड्ढा भाजपा और मोदी सरकार से सवाल करने से डर रहे हैं। ऐसे डर की राजनीति कैसे चलेगी?
भगवंत सिंह मान ने राघव चड्ढा के मुद्दे पर कहा कि यह पार्टी का फैसला है। पार्टियां इस तरह के फैसले लेती रहती हैं। संसद में अपना नेता और उपनेता बदलती रहती है। जब मैं पहली बार चुनाव जीता तो उस समय पार्टी ने डॉ. गांधी को नेता बनाया। कुछ समय बाद मैं भी पार्लियामेंट बोर्ड का नेता बना। यह पार्टी का निर्णय है। ऐसे छोटे-छोटे निर्णय होते रहते हैं। कई बार लोकसभा और राज्यसभा में सभी विपक्षी पार्टियों को एकमत में फैसला लेना होता है। जैसे सदन से वॉकआउट करना या सरकार की नीतियों का विरोध करना हो। अगर कोई व्यक्ति इन सामूहिक फैसलों का समर्थन नहीं करता है और पार्टी लाइन के विपरित जाता है तो फिर वह पार्टी के व्हिप के खिलाफ है। कोई भी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाएगा, तो उस पर कार्रवाई होगी।
‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि हम लोग अरविंद केजरीवाल के सच्चे सिपाही हैं और हमने अरविंद केजरीवाल से एक ही बात सीखी है- निडरता, हिम्मत और साहस के साथ लड़ना और संघर्ष करना। लेकिन बड़े अफसोस के साथ यह कहना पड़ रहा है कि देश के तमाम मुद्दों पर जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आता है, तो राघव चड्ढा उस पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं। पश्चिम बंगाल में लोगों के वोट के अधिकार छीने जा रहे हैं। दिल्ली में हम लोगों ने देखा कि किस तरह से चुनाव आयोग का दुरुपयोग हुआ। जब पंजाब का मुद्दा होता है, तो उस वक्त वह खामोश रहते हैं, कुछ नहीं बोलते हैं। वह प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आवाज नहीं निकालते हैं।
संजय सिंह ने आगे कहा कि जनहित से जुड़े जो मुद्दे, देश, आम आदमी पार्टी और पार्टी के कार्यकर्ताओं से जुड़े हुए हैं, उन पर राघव चड्ढा चुप रहते हैं। गुजरात में “आप” कार्यकर्ताओं को पीटा-मारा जाता है, उस पर वह नहीं बोलते हैं। पंजाब के तमाम अधिकारों को छीनने का काम मोदी सरकार करती है, उस पर भी वह कुछ नहीं बोलते हैं। जब बहुत सारे मुद्दों पर सदन से वॉकआउट करने का मामला आता है, तो उस समय वह वॉकआउट नहीं करते हैं। ये तमाम चीजें हैं, जिसका जवाब देश और जनता राघव चड्ढा से चाहती है।
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा से कहा कि हम सब लोग अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं और हमने तो एक ही बात सीखी है कि ‘‘जो डर गया, समझो मर गया।’’ हम सबको तो सरकार की आंखों में आंखें डालकर जनता के मुद्दे उठाने थे। पिछले कुछ दिनों में हमने देखा है कि जो भी व्यक्ति सरकार के खिलाफ गंभीर मुद्दे उठाता है, सरकार से सवाल पूछता है और लोगों की बात करता है, सरकार एक तानाशाह की तरह उसे तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैन कर रही है। चाहे वह एक्स हो, फेसबुक हो या यूट्यूब, हर जगह बैन किया जा रहा है। एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। मुकदमे किए जा रहे हैं।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई संसद में अपना सॉफ्ट पीआर करे। संसद में एक छोटी सी पार्टी के पास बेहद सीमित समय होता है। उसमें अगर कोई समोसों की बात उठा रहा है, तो उससे कहीं ज्यादा जरूरी है कि देश के बड़े मुद्दों को उठाया जाए। उन्होंने कहा कि पूरे देश के हर राज्य में हमने देखा है कि चुनाव से पहले सही लोगों के वोट काटे जाते हैं और फर्जी व झूठे वोट बनाकर सरकार पूरी बेईमानी से सिस्टम पर कब्जा करके चुनाव जीत रही है। पश्चिम बंगाल में भी यही हो रहा है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अभी सारी विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग चलाने के लिए प्रस्ताव लाना चाहा, लेकिन आपने (राघव चड्ढा) उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। जब भी कोई ऐसा मुद्दा आता है, जिस पर विपक्ष वॉकआउट करता है, तो आप वॉकआउट नहीं करते हैं। पिछले काफी अरसे से मैंने देखा है कि आपने सदन में ऐसा कोई भी मुद्दा नहीं उठाया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी या भाजपा सरकार से कोई सवाल किया गया हो। ऐसे डर की राजनीति कैसे चलेगी?
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि हम लोगों को पंजाब के मुद्दे उठाने हैं। जहां से आप चुनकर आए हैं, आप उन मुद्दों को उठाने से भी घबराते हैं। अभी गुजरात में आम आदमी पार्टी के करीब 160 कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमों के तहत एफआईआर दर्ज की गई, कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन आप उस पर भी चुप रहे। आम आदमी पार्टी के तमाम नेता जेल में थे। अरविंद केजरीवाल को बतौर मुख्यमंत्री सरकार ने एक झूठे मुकदमे में गिरफ्तार कर लिया, उस समय भी आप देश में नहीं थे और कहीं जाकर छिप गए थे।
सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि मेरा मानना यह है कि देश के लिए असली मुद्दे हमें निडरता और साहस के साथ उठाने पड़ेंगे। भाजपा की आंखों में आंखें डालकर मुद्दे उठाने पड़ेंगे। वरना आपके इन सॉफ्ट मुद्दों से सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। बल्कि भाजपा तो गुरुवार से आपको सोशल मीडिया पर सपोर्ट कर रही है। आप इस बारे में सोचिएगा और देखिएगा कि आप कहां से चले थे और कहां आ गए हैं। देश को किन चीजों की जरूरत है और आप कैसे बेहतर कर सकते हैं।
उधर, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने राघव चड्ढा से सवाल करते हुए कहा कि वह भाजपा से इतना क्यों डरते हैं? वह भाजपा पर सवाल उठाने से क्यों डरते हैं? वह मोदी जी से सवाल पूछने से क्यों डरते हैं? आज हमारा देश एक बहुत बड़े संकट से गुजर रहा है। आज हमारे देश के लोकतंत्र और संविधान पर खतरा मंडरा रहा है। आज हमारी आंखों के सामने चुनाव आयोग का दुरुपयोग करके पश्चिम बंगाल का चुनाव चुराया जा रहा है, लेकिन वह उस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं। वह उस पर बोलने से डर रहे हैं।
आतिशी ने कहा कि हम सबने देखा है कि किस तरह से दिल्ली में गलत तरीके से वोट काटे गए। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने गलत तरीके से वोट बनाए और भाजपा चुनाव चुराकर ले गई। आज पश्चिम बंगाल में भी यही हो रहा है, वहां भी चुनाव आयोग का दुरुपयोग हो रहा है। लेकिन जब तृणमूल कांग्रेस और पूरा विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आता है, तो राघव चड्ढा उस पर हस्ताक्षर करने से मना कर देते हैं। क्या उन्होंने एक बार भी संसद में पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र पर हो रहे हमले पर सवाल उठाए? वोट काटने पर सवाल उठाए? गलत तरीके से बन रहे वोटों पर सवाल उठाए? उन्होंने ये सवाल क्यों नहीं उठाए? क्या वह भाजपा से डर रहे हैं? क्या वह मोदी जी से डर रहे हैं?
आतिशी ने कहा कि आज देश के आम आदमी के सामने सबसे बड़ा संकट एलपीजी गैस सिलेंडर का है। राघव चड्ढा तो बड़े आदमी हैं, राज्यसभा के सांसद हैं, हो सकता है उनको दिक्कत ना आती हो। लेकिन एक आम परिवार, एक छोटे से मकान या कच्ची कॉलोनी में रहने वाले और एक गैस सिलेंडर कनेक्शन वाले परिवार को आज अपने बच्चों के लिए खाना बनाने में भारी दिक्कत हो रही है। पिता सोच रहे हैं कि काम पर जाऊं और दिहाड़ी लेकर आऊं, या लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होकर गैस का सिलेंडर ले आऊं ताकि कल मेरे बच्चों के लिए लंच बन सके।
आतिशी ने कहा कि जब आम आदमी पार्टी ने पंजाब में और दिल्ली विधानसभा में सिलेंडर का सवाल उठाया, जब आम आदमी पार्टी के सांसदों ने एलपीजी सिलेंडर का मुद्दा उठाया और जब राघव चड्ढा को एलपीजी के मुद्दे पर बोलने के लिए कहा गया, तो वह चुप रह गए। क्या वह मोदी जी से डर गए हैं? आज इस देश में हर इंसान को यह तय करना होगा कि क्या वह मोदी जी के साथ है या वह संविधान और लोकतंत्र के साथ है।
आतिशी ने कहा कि मुझे याद आ रहा है कि जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए थे, तब हम सब सड़कों पर खड़े होकर लड़ रहे थे। पुलिस हम पर लाठियां बरसा रही थी और हमें घसीट-घसीट कर पकड़ कर ले जा रही थी। दिल्ली के अलग-अलग थानों में, कहीं नरेला में, तो कहीं बवाना में हम डिटेन किए गए थे। हम रोज सड़कों पर लड़ रहे थे और तब राघव चड्ढा लंदन में थे। उन्होंने हमें बताया था कि उनकी आंख का ऑपरेशन हो रहा है, इसलिए वह लंदन में हैं। तब मीडिया ने हमसे बहुत सवाल पूछे। बार-बार हमने मीडिया से कहा कि राघव चड्ढा डरे नहीं हैं। उनकी आंख में दिक्कत है और वह अपना ऑपरेशन करवाने गए हैं। लेकिन आज मेरे मन में भी यह सवाल आ रहा है कि जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए, क्या तब भी वह भाजपा से डर गए थे? क्या तब भी वह मोदी जी से डर गए थे? क्या वह डर कर लंदन भाग गए थे?
आतिशी ने आगे कहा कि हो सकता है कि राघव चड्ढा मोदी जी से डरते हों, हो सकता है कि वह जेल जाने से डरते हों। लेकिन हम अरविंद केजरीवाल के सिपाही हैं। हम ना भाजपा से डरते हैं, ना मोदी जी से डरते हैं, ना उनकी एजेंसियों से डरते हैं और ना ही जेल जाने से डरते हैं। इसलिए हम इस देश के आम आदमी की आवाज उठाते आए हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। हम इस लोकतंत्र के लिए आवाज उठाते आए हैं और लोकतंत्र के लिए आवाज उठाते रहेंगे। मोदी जी या भाजपा से डरने से संविधान और लोकतंत्र नहीं बचेगा। आज राघव चड्ढा को यह तय करना है कि क्या वह संविधान के साथ हैं या फिर मोदी जी के साथ हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने कहा कि हम केजरीवाल के सिपाही हैं। निडरता ही हमारी पहली पहचान है। कोई मोदी से डर जाए तो देश के लिए क्या लड़ेगा? पार्टी को संसद में बोलने का थोड़ा सा समय मिलता है। उसमें या तो देश बचाने का संघर्ष कर सकते हैं या एयरपोर्ट कैंटीन में समोसे सस्ते करवाने का। गुजरात में हमारे सैंकड़ों कार्यकर्ता भाजपा की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिए, क्या सांसद साहब सदन में कुछ बोले?
अनुराग ढांडा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में वोट का अधिकार छीना जा रहा है। सदन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव आया तो भाई साहब ने साइन करने से मना कर दिया। पार्टी ने सदन से वाकआउट किया तो मोदी जी की हाज़िरी लगाने के लिए बैठे रहते हैं। पिछले कुछ सालों से तुम डर गए हो राघव। मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो। देश के असली मुद्दों पर बोलने से घबराते हो। जो डर गया वो समझो मर गया।
Politics
कुराली में हरियाणा के CM नायब सैनी का भारी विरोध, आप नेताओं ने दिखाए काले झंडे
आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खरड़ विधायक अनमोल गगन मान, पंजाब यूथ विंग के कार्यकारी प्रधान परमिंदर सिंह गोल्डी और मोहाली जिला प्रधान प्रभजोत कौर के नेतृत्व में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कुराली दौरे के दौरान उनका जमकर विरोध किया और काले झंडे दिखाए।
पंजाब यूथ प्रधान परमिंदर सिंह गोल्डी ने कहा कि आज हम उनकी दोहरी सोच के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। नायब सैनी और उनके साथी दो चेहरे दिखा रहे हैं। एक तरफ वे हरियाणा जाकर कहते हैं, हमें पानी दो, पंजाब हमें पानी नहीं देता, और दूसरी तरफ वे पंजाब आकर पंजाब की भलाई की बात करते हैं। यह दोहरा रवैया मंजूर नहीं है। वे गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं, लेकिन पंजाब के लोग सब समझते हैं। हम उन्हें पंजाब में कभी कामयाब नहीं होने देंगे।
गोल्डी ने कहा कि वे खुद को डेवलपमेंट का मॉडल कहते हैं और गुजरात मॉडल की बात करते हैं। लेकिन जब हम गुजरात की असलियत देखते हैं, तो पता चलता है कि वहां भी किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के खिलाफ कानून लाए गए, जिसके विरोध में पंजाब समेत देश भर के हजारों किसानों ने अपनी जान दे दी, फिर उन कानूनों को वापस ले लिया गया। वे खुद को किसानों का हितैषी कहते हैं, लेकिन असल में वे किसानों को कमजोर करने वाली नीतियां लाते हैं।
मोहाली की जिला प्रधान प्रभजोत कौर ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने पंजाब का ग्रामीण विकास फंड रोक दिया है। बाढ़ के समय उन्होंने 1.600 करोड़ रुपये देने का वादा किया था, लेकिन आज तक पंजाब को एक पैसा भी नहीं दिया गया। पंजाब को बीस हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ, लेकिन फिर भी केंद्र की भाजपा सरकार चुप रही। यह पंजाब के साथ बहुत बड़ा धोखा है। उन्हें शर्म आनी चाहिए कि मुश्किल समय में पंजाब का साथ देने के बजाय लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
प्रभजोत कौर ने कहा कि मैं पंजाब के समझदार लोगों से अपील करती हूं कि वे उनकी बातों में न आएं। जो लोग मुश्किल समय में पंजाब के साथ खड़े नहीं होते, वे कभी पंजाब का भला नहीं कर सकते। पंजाब की असली ताकत यहां के लोग हैं, और लोग ही तय करेंगे कि पंजाब के हित में क्या सही है।
इस मौके पर हलका संगठन इंचार्ज नवदीप सैनी, विकास मोहन, ट्रेड विंग के जिला अध्यक्ष तरलोचन सिंह, किसान विंग के जिला अध्यक्ष जसबीर सिंह बलियाली, प्रदेश महासचिव संजीव चौधरी, महिला नेता स्वर्ण लता शर्मा आदि मौजूद थे।
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‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ एक व्यापक लड़ाई, सामूहिक प्रयास से ही खत्म होगा नशे का जाल —Manish Sisodia
आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा कि ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ एक व्यापक और निर्णायक लड़ाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए समाज के हर वर्ग की एकजुट भागीदारी बेहद जरूरी है।
जालंधर में चार जिलों के ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों के प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए सिसोदिया ने कहा कि गांव-गांव और वार्ड-वार्ड में जाकर नशा बेचने वालों की जानकारी इकट्ठा करनी होगी, ताकि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल की सोच और भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला रही है।
सिसोदिया ने कहा कि जहां एक ओर नशे के आदी लोगों को इलाज और पुनर्वास के जरिए मुख्यधारा में लाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नशा तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की जा रही है, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह के अपराध करने से पहले सोचे।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और कोऑर्डिनेटरों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस अभियान को एक सामान्य कार्यक्रम की तरह नहीं, बल्कि एक “युद्ध” की तरह लिया जाए और ‘रंगला पंजाब’ बनाने के लिए हर व्यक्ति अपनी भूमिका निभाए। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में जिला स्तर पर और अधिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इस मौके पर कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत ने कहा कि राज्य सरकार नशा तस्करों के खिलाफ लगातार कड़ी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि सख्त कार्रवाई के कारण कई तस्कर या तो जेल में हैं या राज्य छोड़ चुके हैं, और भविष्य में भी यह अभियान इसी तरह जारी रहेगा।
बैठक में कई विधायक, हल्का इंचार्ज, जिला पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ब्लॉक कोऑर्डिनेटर शामिल हुए, जिन्होंने नशा मुक्त पंजाब के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया।
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