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Mumbai के WankhedeStadium में Sunil Gavaskar की Statue का Unveiling

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मुंबई का ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम शनिवार को एक खास मौके का गवाह बना। भारतीय क्रिकेट के लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर की जीवन-आकार (life-size) प्रतिमा का अनावरण यहां किया गया। यह प्रतिमा मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) द्वारा नवनिर्मित शरद पवार क्रिकेट म्यूजियम के भव्य प्रवेश द्वार पर लगाई गई है। इसी जगह पर पूर्व क्रिकेट प्रशासक शरद पवार की प्रतिमा भी स्थापित की गई है।

गौरतलब है कि पिछले साल यानी 2023 वर्ल्ड कप के दौरान मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की प्रतिमा का अनावरण भी इसी मैदान पर हुआ था। अब गावस्कर की प्रतिमा के साथ वानखेड़े स्टेडियम पर भारतीय क्रिकेट के दो महान बल्लेबाजों की विरासत हमेशा याद रखी जाएगी।

सुनील गावस्कर: लिटिल मास्टर की विरासत

  • जन्म: 10 जुलाई 1949, मुंबई
  • टेस्ट डेब्यू: 1971 वेस्टइंडीज के खिलाफ, जहां उन्होंने धमाकेदार शुरुआत की।
  • करियर आंकड़े:
    • 125 टेस्ट मैच और 108 वनडे इंटरनेशनल
    • 13,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन
    • टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले पहले खिलाड़ी (1987, पाकिस्तान के खिलाफ अहमदाबाद में)
  • महत्वपूर्ण उपलब्धियां:
    • भारत की 1983 वर्ल्ड कप जीत का हिस्सा
    • भारत को 1985 वर्ल्ड चैम्पियनशिप ऑफ क्रिकेट में कप्तानी कराई, जहां फाइनल में पाकिस्तान को हराया
  • खेलने का अंदाज:
    • गावस्कर अपनी पिच-परफेक्ट डिफेंसिव तकनीक के लिए जाने जाते थे।
    • उन्होंने वेस्टइंडीज के दिग्गज तेज गेंदबाजों – एंडी रॉबर्ट्स, माइकल होल्डिंग – का जमकर सामना किया।
    • इसके अलावा रिचर्ड हैडली, इमरान खान, इयान बॉथम जैसे महान गेंदबाजों के खिलाफ भी उनका बल्ला खूब बोला।

गावस्कर का बयान

अनावरण के मौके पर गावस्कर ने कहा –
मैं हमेशा खुद को क्रिकेट इतिहास का छात्र मानता हूं। हमारे खेल के दिनों में वीडियो नहीं होते थे, हम किताबों और पत्रिकाओं से सीखते थे। ऑटोबायोग्राफी और लिखित शब्द ही हमारे गुरु थे। इसीलिए इस म्यूजियम को देखकर मुझे बेहद खुशी है। MCA ने सिर्फ मुंबई क्रिकेट के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय क्रिकेट के लिए शानदार काम किया है। युवा खिलाड़ी यहां आकर प्रेरणा ले सकेंगे।

उन्होंने आगे कहा –
कई सालों से एक ऐसे म्यूजियम की जरूरत महसूस हो रही थी, जो हमारे क्रिकेटिंग हेरिटेज को दिखा सके। अब टेक्नोलॉजी की मदद से हम पुराने समय को भी डिजिटल प्रेजेंटेशन के जरिए दिखा सकते हैं। इससे आने वाली पीढ़ियां भी क्रिकेट के सुनहरे अतीत से जुड़ सकेंगी।

शरद पवार क्रिकेट म्यूजियम

  • MCA ने इस म्यूजियम को भारतीय क्रिकेट के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित करने के लिए बनाया है।
  • यहां पुराने खिलाड़ियों और मौजूदा क्रिकेटर्स की कीमती यादें और वस्तुएं प्रदर्शित की जाएंगी।
  • पूर्व कप्तान दिलीप वेंगसरकर ने 1976 लॉर्ड्स टेस्ट की अपनी जर्सी दान की।
  • मौजूदा भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने 2023 वर्ल्ड कप की अपनी बैट और जर्सी दान की।

वानखेड़े स्टेडियम अब न सिर्फ क्रिकेट मैचों का गवाह है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट की जीवित विरासत को संजोने का प्रतीक भी बन गया है। सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर की प्रतिमाएं आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाती रहेंगी कि भारतीय क्रिकेट ने किन-किन महान खिलाड़ियों को जन्म दिया और उन्होंने देश का नाम विश्वभर में रोशन किया।

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CM भगवंत सिंह मान ने समाना में खेल स्टेडियम की आधारशिला रखी; नशे के खिलाफ खेलों को सबसे प्रभावी हथियार बताया

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि राज्य सरकार खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा युवाओं को नशे की बुराई से दूर रखने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में 3,100 स्टेडियमों का निर्माण कर रही है। समाना में खेल स्टेडियम की आधारशिला रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने, नशे के खात्मे तथा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने हेतु खेल बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व निवेश कर रही है।

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह स्टेडियम 10.35 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से नौ एकड़ पंचायत भूमि पर बनाया जाएगा। इसमें आठ लेन वाला अंतरराष्ट्रीय स्तर का 400 मीटर सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक होगा। यह ट्रैक 100 मीटर, 200 मीटर और 400 मीटर दौड़ सहित विभिन्न ट्रैक प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए उपयुक्त होगा।”

उन्होंने कहा कि ट्रैक के अंदरूनी क्षेत्र को शॉट पुट, हैमर थ्रो, लॉन्ग जंप, हाई जंप, डिस्कस थ्रो तथा अन्य फील्ड प्रतियोगिताओं के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं से विकसित किया जाएगा। इससे खिलाड़ियों को उच्च स्तर का प्रशिक्षण प्राप्त करने और प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्टेडियम के निर्माण से समाना विधानसभा क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के युवाओं और खिलाड़ियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे वे एथलेटिक्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकेंगे तथा राष्ट्रीय स्तर पर अपने क्षेत्र और पंजाब का नाम रोशन करेंगे।

नशे के खिलाफ लड़ाई में खेलों को सबसे प्रभावी हथियार बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “खेल संस्कृति को बढ़ावा देना राज्य सरकार के नशा विरोधी अभियान का सबसे मजबूत माध्यम है। खेलों के प्रचार-प्रसार से युवाओं की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा मिल रही है। जो युवा खेलों में सक्रिय हैं, उनके पास नशे की ओर देखने का भी समय नहीं होता, क्योंकि वे अपने-अपने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पहचान बनाने में जुटे रहते हैं। यह पहल पंजाब से नशे की बुराई को समाप्त करने तथा राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”

राज्य के खेल बुनियादी ढांचे की पहल पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “तंदुरुस्त शरीर और स्वस्थ मन के उद्देश्य से पंजाब सरकार द्वारा पूरे राज्य में 1,250 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सुविधाओं से लैस 3,100 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। ये खेल मैदान ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान में क्रांतिकारी भूमिका निभाएंगे। ये युवाओं को नशों से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के उनके सपनों को साकार करने में मदद करेंगे।”

खिलाड़ियों के लिए तैयार की जा रही सुविधाओं की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये मैदान उभरते खिलाड़ियों के लिए उम्मीद और अवसर की किरण बनेंगे तथा राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होंगे। इन स्टेडियमों के चारों ओर बाड़ लगाई जाएगी, जिसके साथ-साथ पौधे लगाए जाएंगे और फ्लडलाइटों से युक्त छह फुट चौड़ा वॉकिंग ट्रैक बनाया जाएगा। यहां वॉलीबॉल, फुटबॉल और हॉकी के मैदान होंगे, साथ ही स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय खेलों के आधार पर अतिरिक्त कोर्ट भी बनाए जाएंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “इसी प्रकार 400 मीटर का छह लेन वाला रनिंग ट्रैक, एलईडी लाइटों से युक्त उच्च क्षमता वाली प्रकाश व्यवस्था, स्प्रिंकलर सिस्टम सहित सबमर्सिबल पंप, कंक्रीट की बेंचें, बच्चों के खेलने के लिए विशेष क्षेत्र, व्हीलचेयर रैंप तथा खेल सामग्री रखने के लिए स्टोरेज की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। युवाओं को खेल किट और खेल सामग्री वितरित करने के साथ-साथ उच्च प्रशिक्षित पेशेवर कोचों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य के खेल बजट में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है और वर्ष 2026-27 के लिए 1,791 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “वर्ष 2023 में नई खेल नीति लागू की गई थी और पहली बार खिलाड़ियों को खेलों की तैयारी के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसमें ओलंपिक के लिए 15 लाख रुपये तथा एशियाई खेलों के लिए 8 लाख रुपये शामिल हैं। पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले हॉकी खिलाड़ियों को एक-एक करोड़ रुपये तथा एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं को भी एक-एक करोड़ रुपये की राशि देकर सम्मानित किया गया। इसी प्रकार नौ ओलंपिक पदक विजेताओं को पीसीएस और डीएसपी की नौकरियां दी गई हैं। ‘खेड़ां वतन पंजाब दीआं’ राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने में सफल रही हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से ये खेल पिछले तीन वर्षों से आयोजित किए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 5 लाख खिलाड़ियों ने इसमें भाग लिया और तीन वर्षों में 97.3 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। किला रायपुर की ग्रामीण खेलों की व्यापक रूप से सराहना हुई है और इन्हें ‘मिनी ओलंपिक’ के रूप में विश्व स्तर पर पहचान मिली है। 11 जुलाई 2025 को पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से ‘पशुओं पर अत्याचार की रोकथाम (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2025’ पारित किया था। इसके माध्यम से बैलगाड़ी दौड़ जैसी पारंपरिक ग्रामीण खेलों को पुनर्जीवित करना संभव हुआ और वर्ष 2014 के बाद इस वर्ष बैलगाड़ी दौड़ एक बार फिर मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी।”

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, “यह अत्यंत गर्व और संतोष की बात है कि पहली बार पंजाब को एशियन कप हॉकी के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की मेजबानी करने का अवसर मिला है और यह खेलों के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि है। हॉकी में पंजाबियों की बड़ी भागीदारी होने के बावजूद पंजाब ने अब तक कभी किसी बड़े हॉकी टूर्नामेंट की मेजबानी नहीं की थी।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब पहली बार अक्टूबर में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करेगा। यह एशिया का सबसे प्रतिष्ठित हॉकी टूर्नामेंट है, जिसके अंतर्गत मैच बलबीर सिंह सीनियर हॉकी स्टेडियम, मोहाली तथा सुरजीत हॉकी स्टेडियम, जालंधर में खेले जाएंगे।”

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वेनेजुएला में दो भीषण भूकंपों ने मचाई तबाही, आपातकाल घोषित

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वेनेजुएला में प्रकृति ने भारी तबाही मचाई है। देश कुछ ही सेकंड के अंतराल में आए दो शक्तिशाली भूकंपों से हिल उठा। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार पहला भूकंप 7.2 तीव्रता का था, जिसके करीब 40 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का एक और अधिक शक्तिशाली भूकंप आया। दोनों भूकंपों का केंद्र मोरोन क्षेत्र के पास था और इनके झटके उत्तरी वेनेजुएला के बड़े हिस्से में महसूस किए गए।

राजधानी कराकस समेत कई शहरों में बहुमंजिला इमारतें ढह गईं, जबकि सड़कों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कम से कम 32 लोगों की मौत हो चुकी है और 700 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हालांकि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कार्यकारी राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है। स्कूलों और गैर-जरूरी गतिविधियों को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है, जबकि स्वास्थ्य और राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

कराकस के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते उसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। देश के कई हिस्सों में बिजली, पानी और संचार सेवाएं प्रभावित हुई हैं। भूकंपों के बाद करीब 20 आफ्टरशॉक भी दर्ज किए गए हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

भूकंप के बाद प्यूर्टो रिको और वर्जिन द्वीप समूह के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया।

इस तबाही पर दुनिया भर के नेताओं ने दुख व्यक्त किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में वेनेजुएला के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।

वहीं USGS ने चेतावनी दी है कि यह एक व्यापक आपदा साबित हो सकती है। एजेंसी के शुरुआती आकलन के अनुसार जान-माल का नुकसान काफी बड़ा हो सकता है और वास्तविक स्थिति राहत एवं बचाव कार्य पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

इस बीच एशिया के देश जापान में भी एक तेज भूकंप महसूस किया गया है, जिसके बाद दुनिया भर के भूकंप वैज्ञानिक प्रशांत और कैरेबियाई क्षेत्रों की भूकंपीय गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

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अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, पेट्रोल-डीजल भी हो सकता है सस्ता!

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीदों ने वैश्विक तेल बाजार को राहत दी है। इसके साथ ही भारत में भी लोगों की नजरें पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर टिकी हुई हैं।

हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला और इसका असर भारत समेत कई देशों के ईंधन बाजार पर भी पड़ा।

अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल परिवहन सामान्य होने की संभावनाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है। वैश्विक बाजार में WTI कच्चा तेल घटकर 80.47 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि ब्रेंट क्रूड करीब 4 प्रतिशत गिरकर 83.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। वहीं इंडियन बास्केट में भी कच्चे तेल की कीमत लगभग 93.19 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और तेल कंपनियों का मार्जिन भी शामिल होता है।

यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक निचले स्तर पर बनी रहती हैं और तेल कंपनियों को लागत में स्थायी राहत मिलती है, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार यदि ब्रेंट क्रूड की कीमत मौजूदा स्तर से नीचे बनी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 1 से 3 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती संभव है। हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला तेल विपणन कंपनियों और सरकार की कर नीति पर निर्भर करेगा।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी का सीधा लाभ आम लोगों को मिल सकता है। इससे परिवहन लागत कम होगी, महंगाई पर दबाव घटेगा और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी स्थिरता आ सकती है। इसके अलावा हवाई किराए, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक उत्पादन की लागत में भी कमी आ सकती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा मिल सकता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई यह नरमी भारतीय उपभोक्ताओं को कब और कितनी राहत दिला पाती है।

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