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Punjab

बेअदबी विरोधी कानून पर सुखबीर बादल की चुप्पी बुनियादी सवाल खड़े करती है: Baltej Pannu

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने ‘जगत जोत गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार बिल, 2026’ पर शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल की लगातार चुप पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब बेअदबी को रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है, अकाली दल द्वारा कोई जवाब न आना कई गंभीर राजनीतिक सवाल खड़े करता है।

सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब के स्टेट जनरल सेक्रेटरी और मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि आप की पंजाब सरकार ने बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून लाकर अपना वादा पूरा किया है, लेकिन जो लोग ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करते थे, वे अब चुप रहना पसंद कर रहे हैं। यह चुप्पी राजनीतिक रूप से बहुत कुछ कहती है।

आप पंजाब के जनरल सेक्रेटरी ने आगे कहा कि जब भगवंत मान सरकार ने बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून लाने का ऐलान किया था, तो विरोधी पार्टियों ने इसे राजनीतिक बयानबाजी कहकर खारिज कर दिया था। वे कहते थे, ‘कानून लाओ, फिर देखेंगे।’ आज यह कानून न सिर्फ पास हो गया है बल्कि पूरी तरह से लागू भी हो गया है, और वही लोग अब शांत हो गए हैं।

बलतेज पन्नू ने कहा कि नए कानून में बेअदबी के कामों के लिए सख्त सज़ा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि कानून में उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने जैसे कड़े प्रावधान हैं, जो सज़ा और डर दोनों पक्का करते हैं।

पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अकाली-भाजपा गठबंधन और कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार बेअदबी पर कोई असरदार कानून बनाने में नाकाम रही, हालांकि वे ऐसे बिल लाए जो कभी कानून बनने के लिए नहीं थे। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि राजनीतिक फायदे के लिए यह मुद्दा ज़िंदा रहे। कुछ लोगों ने इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकीं और वे चाहते थे कि यह सिलसिला चलता रहे।

पिछली घटनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि चाहे 2015 की घटनाएं हों, 1986 में नकोदर की घटना हो या 1978 की, हर कोई जानता है कि उस समय सत्ता में कौन था और वे कैसे कोई अहम कार्रवाई करने में नाकाम रहे। 2015 की बेअदबी की घटनाओं के दौरान, बार-बार उकसाने और धमकियों के बावजूद, उस समय की सरकार असरदार तरीके से कार्रवाई करने में नाकाम रही। महीनों तक गाली-गलौज वाले पोस्टर लगाए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

बलतेज पन्नू ने पिछली सरकारों के जांच के तरीकों की भी आलोचना की और कहा कि जस्टिस ज़ोरा सिंह कमिशन और जस्टिस रणजीत सिंह कमिशन जैसे कमिशन की रिपोर्ट को नज़रअंदाज़ किया गया। गंभीर नतीजों को मामूली बताया गया और रिपोर्ट की कॉपियां सार्वजनिक तौर पर बहुत कम कीमत पर बांटी गईं।

कानून बनाने के प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि आप सरकार ने बिल का मसौदा तैयार करने से पहले कानूनी माहिरों और धार्मिक नेताओं से काफी सलाह-मशविरा किया था। यह कोई जल्दबाज़ी में लिया गया फ़ैसला नहीं था, बल्कि कड़ी सज़ा देने और डर पैदा करने के मकसद से बनाया गया एक मज़बूत कानूनी ढांचा है।

बलतेज पन्नू ने कहा कि कानून पास होने के बाद भी, न तो शिरोमणि अकाली दल और न ही उसकी लीडरशिप ने इसके समर्थन या विरोध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की चुप्पी भी उतनी ही चिंताजनक है। एसजीपीसी मीटिंग के बाद प्रेस से बात न करना राजनीतिक दबाव और स्पष्टता की कमी को दिखाता है।

उन्होंने आगे कहा कि अकाली दल का इकलौता विधायक भी विधानसभा के उस स्पेशल सेशन में शामिल नहीं हुआ, जहाँ यह बिल पास हुआ था। इतिहास में यह दर्ज होगा कि गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा की रक्षा के लिए कौन खड़ा हुआ और किसने गैरहाजिर रहना चुना।

बलतेज पन्नू ने कहा कि 13 अप्रैल को बिल पेश होने से लेकर 17 अप्रैल को राज्यपाल की मंज़ूरी और 20 अप्रैल तक नोटिफिकेशन जारी होने तक, यह ‘आप’ सरकार की मज़बूत राजनीतिक इच्छाशक्ति को दिखाता है। कुछ ही दिनों में यह कानून पूरी तरह से बन गया और लागू हो गया, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। सुखबीर सिंह बादल की चुप्पी दिखाती है कि वह पंजाब और उसकी धार्मिक भावनाओं के लिए मज़बूती से खड़े होने के बजाय अपने निजी और राजनीतिक हितों की रक्षा पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं।

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National

मशहूर अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी पाला जलालपुरिया AAP में शामिल

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कबड्डी खिलाड़ी और मशहूर स्टॉपर पाला जलालपुरिया शनिवार को आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल हो गए। खेल जगत की इस मशहूर हस्ती के आने से पार्टी को और मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पाला जलालपुरिया को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किया और उनका स्वागत किया। पाला जलालपुरिया कबड्डी की दुनिया में अपनी बेहतरीन तकनीक और ‘क्लोज फाइटर’ के लिए जाने जाते हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पंजाब का नाम रोशन किया है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि जलालपुरिया जैसा अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी आम आदमी पार्टी में शामिल हुआ है। पाला ने हमेशा स्पोर्ट्स के फील्ड में पंजाब का नाम रोशन किया है और अब वह जन सेवा के क्षेत्र में हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे। हमारी सरकार लगातार प्लेयर्स को सम्मान देने और युवाओं को स्पोर्ट्स से जोड़ने के लिए वचनबद्ध है। पाला के पार्टी में आने से राज्य के युवाओं और खिलाड़ियों में नया उत्साह पैदा होगा।

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Politics

7 राज्यसभा सदस्यों के दल बदल से मचा सियासी तूफान, CM मान राष्ट्रपति से मिलने को तैयार, बड़ा फैसला संभव

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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने का मामला अब मामला राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए समय मांगा है। माना जा रहा है कि वह हाल ही में भाजपा में शामिल हुए 7 राज्यसभा सदस्यों के मुद्दे को लेकर अपना पक्ष रखेंगे और इस पूरे घटनाक्रम पर संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे।

जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री राष्ट्रपति से यह अनुरोध कर सकते हैं कि संबंधित राज्यसभा सदस्यों को बुलाकर उनका पक्ष सुना जाए और उसके बाद नियमों के तहत उचित फैसला लिया जाए। इसके साथ ही दलबदल कानून के तहत इन सदस्यों की सदस्यता रद्द करने की मांग भी उठाई जा सकती है।सरकार का मानना है कि यह मामला लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस पर स्पष्ट निर्णय जरूरी है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू

उधर आम आदमी पार्टी के लिए यह घटनाक्रम बड़ा झटका माना जा रहा है। पंजाब से पार्टी के छह राज्यसभा सदस्यों का एक साथ भाजपा में शामिल होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस घटनाक्रम से भाजपा की राज्यसभा में स्थिति मजबूत हुई है। खास बात यह है कि पंजाब में केवल दो विधायक होने के बावजूद भाजपा अब राज्यसभा में सात सदस्यों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है।

सीएम की मुलाकात पर टिकी नजरें

वहीं दूसरी ओर आप के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने पहले ही पार्टी का रुख साफ कर दिया है। उनका कहना है कि जब दो-तिहाई सदस्य एक साथ दल बदलते हैं तो दलबदल कानून लागू नहीं होता। इस बयान के बाद कानूनी बहस भी तेज हो गई है और विशेषज्ञ अलग-अलग राय दे रहे हैं।

अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री भगवंत मान की संभावित राष्ट्रपति से मुलाकात पर टिकी हैं। अगर यह मुलाकात होती है तो आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर कोई बड़ा संवैधानिक फैसला सामने आ सकता है, जो पंजाब की सियासत की दिशा तय करेगा।

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National

‘अदरक, जीरा, लहसुन… ये 7 कभी अकेले सब्जी नहीं बना पाएंगे’ AAP पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर CM भगवंत मान ने कसा तंज

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राघव चड्ढा (Raghav Chadha) समेत 3 सांसदों ने आप छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। वहीं, 4 सांसदों को लेकर सस्पेंस बरकरार है। आम आदमी पार्टी के भीतर सियासी घमासान के बीच आप नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक पोस्ट शेयर किया है।

भगवंत मान ने आप छोड़कर बीजेपी जॉइन कर चुके और करने की आशंका वाले 7 सांसदों की तुलना 7 मसालों से की। उन्होंने इन सब्जियों की खासियत बताते हुए कहा कि ये सब्जियां तब तक ही अहम हैं जब तक किसी में डाली न जाए। अपने आप में इनकी कोई अहमियत नहीं है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अदरक, लहसुन, जीरा, मेथी पाउडर, लाल मिर्च, काली मिर्च और धनिया। ये 7 चीजें मिलकर सब्जी को स्वादिष्ट बनाती हैं, लेकिन अकेले ये चीजें सब्जी नहीं बन सकतीं।”

राघव चड्ढा के खिलाफ एक्शन मोड में आप

आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा सहित तीनों नेताओं पर एक्शन लेने की तैयारी कर ली है। आप नेता संजय सिंह ने शुक्रवार को बताया कि राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, और संदीप पाठक के खिलाफ राज्यसभा सभापति को एक पत्र सौंपा जाएगा। इस पत्र के जरिए, राज्यसभा सभापति से राघव चड्ढा सहित तीनों सांसदों को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी।

इससे पहले, संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राज्यसभा सदस्यों के दलबदल की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे भाजपा द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा करार दिया और कहा कि पंजाब की जनता पार्टी छोड़ने वाले सात सदस्यों को कभी माफ नहीं करेगी।

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