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Punjab में रिकॉर्ड तोड़ Investment! Germany की Freudenberg Group ने लगाया ₹339 Crore का बड़ा दांव, युवाओं के लिए नए Employment के दरवाज़े खुले
पंजाब अब सिर्फ खेती-बाड़ी वाला राज्य नहीं रहा, बल्कि यह अब इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट का नया हब बनता जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब सरकार की साफ़ नीयत और मेहनत का नतीजा है कि जर्मनी की मशहूर कंपनी Freudenberg Group ने रूपनगर जिले के मोरिंडा में ₹339 करोड़ का ऐतिहासिक निवेश किया है।
यह निवेश पंजाब की अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य दोनों के लिए बहुत बड़ी खबर है। कुछ समय पहले शुरू हुई यह परियोजना अब पूरी तरह से चालू हो चुकी है और पंजाब के विकास की नई मिसाल पेश कर रही है।
कैसा है यह निवेश?
Freudenberg Group ने मोरिंडा में दो आधुनिक फैक्ट्रियाँ बनाई हैं, जहाँ गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले सील्स और वाइब्रेशन कंट्रोल पार्ट्स (कंपन कम करने वाले पुर्जे) बनाए जा रहे हैं।
इन पुर्जों को भारत के साथ-साथ विदेशों में भी एक्सपोर्ट किया जाएगा।
इस निवेश से पंजाब में 200 से ज़्यादा लोगों को सीधी नौकरी मिली है और हज़ारों लोगों को सप्लाई चेन और दूसरे कामों से अप्रत्यक्ष रोजगार के मौके मिल रहे हैं।
युवाओं के लिए ट्रेनिंग और मौके
पंजाब के नौजवानों को इस प्रोजेक्ट में काम करने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी गई है। चंडीगढ़ और आसपास के कॉलेजों से युवाओं को तैयार किया गया ताकि वे नई तकनीक से काम करना सीखें और आने वाले समय में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री का हिस्सा बनें।
यह निवेश पंजाब के युवाओं के लिए “मान की गारंटी” वाली नौकरी लेकर आया है।
सरकार की भूमिका – ‘इन्वेस्ट पंजाब’ बना गेमचेंजर
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने निवेशकों के लिए ‘Invest Punjab’ सिंगल-विंडो सिस्टम शुरू किया है। इस सिस्टम की मदद से कंपनियों को सभी सरकारी मंज़ूरियाँ सिर्फ तीन दिन में मिल जाती हैं।
इसके कारण अब राज्य में बिज़नेस शुरू करना पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गया है।
सरकार ने Ease of Doing Business के लिए कई सुधार किए हैं – जैसे ज़मीन आवंटन की प्रक्रिया आसान बनाना, बिजली की सुचारू सप्लाई, स्किल डेवलपमेंट, लेबर वेलफेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार।
Environment-Friendly Project
Freudenberg की फैक्ट्रियों में सोलर एनर्जी से बिजली बनाई जा रही है और पानी बचाने की तकनीकें अपनाई गई हैं। यह दिखाता है कि पंजाब सरकार इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी उतना ही ध्यान दे रही है।
कंपनी के अधिकारियों ने क्या कहा?
Freudenberg Group के CEO डॉ. मोहसेन सोही ने कहा था,
“पंजाब में हमारा निवेश इस बात का सबूत है कि हमें यहाँ के लोगों और सरकार की नीतियों पर पूरा भरोसा है।”
वहीं Freudenberg India के अधिकारी श्री शिवसैलम ने कहा,
“पंजाब सरकार के सहयोग से हमने मोरिंडा में यह आधुनिक फैक्ट्री तैयार की है, जो भारत की तरक्की में योगदान दे रही है।”
विदेशी निवेश से बदल रहा पंजाब
Freudenberg के अलावा कई और अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भी पंजाब में निवेश कर रही हैं —
- De Heus (नीदरलैंड) – ₹150 करोड़, राजपुरा में
- Nestlé (स्विट्जरलैंड) – ₹2000 करोड़, डेराबसी में
- Claas (जर्मनी) – ₹500 करोड़, ब्यास में
इन सब निवेशों से पंजाब अब ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में भारत का उभरता हुआ औद्योगिक केंद्र बन गया है।
अब तक का कुल निवेश और भविष्य की योजना
2022 से अब तक पंजाब में कुल ₹1.23 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिनसे करीब 4.7 लाख नई नौकरियाँ बनने की उम्मीद है।
अब सरकार ने 2026 के पंजाब निवेश सम्मेलन में ₹5 लाख करोड़ के नए निवेश का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान का बयान
“हमारा सपना है कि पंजाब का हर नौजवान काम करे और हर घर में खुशहाली आए। Freudenberg का निवेश हमारी मेहनत और पंजाब के शांत माहौल का सबूत है। पंजाब अब तेजी से तरक्की कर रहा है और हम चाहते हैं कि हर पंजाबी इस बदलाव का हिस्सा बने।”
यह निवेश सिर्फ पैसों की बात नहीं, बल्कि पंजाब के युवाओं, परिवारों और समाज के लिए नई उम्मीद की कहानी है।
Freudenberg Group का प्रोजेक्ट यह साबित करता है कि जब सरकार की नीयत साफ हो और सिस्टम पारदर्शी हो, तो विदेशी कंपनियाँ भी भरोसे के साथ निवेश करती हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार अब हर पंजाबी के लिए बेहतर ज़िंदगी और नए अवसर लाने के लिए लगातार काम कर रही है।
पंजाब का यह नया दौर “खेतों की धरती” से आगे बढ़कर “इंडस्ट्री और रोजगार की धरती” बनता जा रहा है।
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चंडीगढ़ के 5 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी:मेल पर मैसेज भेजा, स्कूलों में छुट्टी
चंडीगढ़ और गुरुग्राम में बुधवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब कई नामी प्राइवेट स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल मिले। धमकी मिलते ही पुलिस, ऑपरेशन सेल, एसडीआरएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं और सभी स्कूलों में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया।
चंडीगढ़ के स्कूलों को मिली धमकी
जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ में चार बड़े निजी स्कूलों को बम धमकी वाला ई-मेल मिला है।
इनमें प्रमुख रूप से:
- सेक्टर-25 स्थित चितकारा इंटरनेशनल स्कूल
- सेक्टर-45 स्थित एक निजी स्कूल
शामिल हैं। एहतियातन स्कूलों में बच्चों की एंट्री रोक दी गई है और सीनियर अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
गुरुग्राम में भी कई स्कूल निशाने पर
उधर, गुरुग्राम में भी बुधवार सुबह कई नामी स्कूलों को धमकी भरा ई-मेल मिलने से अफरा-तफरी मच गई। जिन चार निजी स्कूलों को धमकी मिली है, उनमें:
- डीएलएफ फेज-1 स्थित कुंसकपालन स्कूल
- सेक्टर-53 स्थित लैंसर्स स्कूल
- सेक्टर-64 स्थित हेरिटेज एक्सपीरिएंशियल लर्निंग स्कूल
- बादशाहपुर स्थित पाथवेज वर्ल्ड स्कूल
शामिल हैं।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, सर्च ऑपरेशन जारी
सूचना मिलते ही पुलिस टीमों ने तुरंत सुरक्षा प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए।
- एसडीआरएफ की टीमें भी मौके पर तैनात
- चारों स्कूल परिसरों में तलाशी अभियान जारी
- छात्रों और स्टाफ को सुरक्षा के मद्देनजर बाहर निकाला गया
फिलहाल किसी भी स्कूल से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
सुबह मिला धमकी भरा ई-मेल
स्कूल प्रबंधन के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हें ई-मेल के जरिए धमकी मिली।
धमकी उस समय सामने आई जब:
- बच्चों के स्कूल पहुंचने का समय हो चुका था
- स्कूल बसें बच्चों को लेकर परिसर तक पहुंचने लगी थीं
इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी और पेरेंट्स को मैसेज भेजकर बच्चों को स्कूल न भेजने की अपील की। जो बच्चे स्कूल पहुंच चुके थे, उन्हें सुरक्षित रूप से बाहर भेज दिया गया।
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Chandigarh court को बम से उड़ाने की धमकी:ई-मेल पर लिखा- ड्रोन से हमला करेंगे, पुलिस ने चारों तरफ से एरिया सील किया
चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सूचना मिलते ही पुलिस ने कोर्ट परिसर को तुरंत खाली करा लिया गया। मौके पर स्थानीय पुलिस के साथ-साथ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, बम स्क्वॉड और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पहुंच गईं।
किसी को भी कोर्ट के अंदर जाने की इजाजत नहीं है, फिलहाल कोर्ट परिसर के दोनों गेट बंद कर दिए गए हैं। पुलिस ने पूरे परिसर को चारों तरफ से सील कर दिया है। एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कोर्ट परिसर के अंदर भी तलाशी अभियान जारी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह धमकी ई मेल के माध्यम से आई है। मेल में धमकी देने वाले ने ड्रोन के जरिए बम ब्लास्ट कर कोर्ट को उड़ाने की बात कही है।
कोर्ट की मेल आईडी पर मिली धमकी
बम स्क्वॉड की टीम पूरे परिसर की जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। सुरक्षा के मद्देनजर कोर्ट परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
चंडीगढ़ पुलिस के अधिकारी ने बताया कि आरोपी ने कोर्ट की मेल आईडी पर मेल कर धमकी दी है। जैसे ही यह मामला सामने आया, उसके बाद तुरंत एसएसपी आफिस को सूचित किया गया। जिसके बाद बम स्क्वॉड सहित पुलिस की कई टीमें मौके पर पहुंची। थाना सेक्टर-36, 39 डीएसपी भी मौके पर पहुंच गए हैं।
SHO बोले- मेल में ड्रोन से बम फेंकने की बात सामने आई
थाना 39 SHO राम दयाल ने बताया कि सुबह 11:55 बजे मेल के जरिए धमकी की सूचना आई थी। इसके बाद कोर्ट में मौजूद सभी लोगों को पॉर्किंग स्थल लाया गया। सूचना मिलने के बाद कोर्ट परिसर खाली करवा दिया है। पूरा परिसर और रूम चैक करवाए गए हैं। सबोटाज टीम पूरा निरीक्षण कर रही है। अब कोई खतरा नहीं है। मेल करने वाली की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि मेल में ड्रोन के जरिए बम फेंकने की बात सामने आई है। पुलिस की टीमों ने 2 घंटे तक ऑपरेशन चलाया।
पहले भी मिल चुकी धमकी
चंडीगढ़ जिला कोर्ट ने पहले इस साल 3 बार पहले भी धमकियां मिल चुकी हैं। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को 22 मई को ईमेल के जरिए ही बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। जिसके बाद पूरा परिसर खाली करा दिया गया था। ठीक इसके एक सप्ताह बाद हरियाणा सिविल सेक्रेटेरिएट (मुख्यमंत्री कार्यालय सहित) को कॉल कर बम से उड़ाने की धमकी मिली। इसके बाद पूरी बिल्डिंग को खाली करा दिया गया था। उधर, चंडीगढ़ से मुंबई जाने वाली इंडिगो फ्लाइट को 6-7 मई को बम से उड़ाने की धमकी मिल चुकी है। इससे मुंबई एयरपोर्ट पर अलर्ट रहा था।
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चंडीगढ़ PGI में 1.14 करोड़ का घोटाला: CBI ने की 6 कर्मी समेत 8 पर FIR, फोटोकॉपी दुकान से मरीजों की ग्रांट में खेल
चंडीगढ़ PGI में 1.14 करोड़ रुपए के घोटाले का खुलासा हुआ है। PGI की प्राइवेट ग्रांट से जुड़े 6 लोग मरीजों को मिलने वाला पैसा निजी खातों में डलवा रहे थे। इस मामले में CBI ने पीजीआई के 6 कर्मचारियों और 2 अन्य लोगों समेत 8 के खिलाफ FIR दर्ज की है। CBI जांच में सामने आया है कि यह पूरा स्कैंडल आरोपी एक फोटोकॉपी वाले की दुकान से चला रहे थे। इसमें दुकान के मालिक को भी आरोपी बनाया गया है।
एक मरीज ने इलाज के रुपए न मिलने के बाद पीजीआई प्रशासन से इसकी शिकायत की थी। इसके बाद पीजीआई प्रशासन ने प्रोफेसर डॉ. अरुण अग्रवाल की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की। जिसके बाद केस सीबीआई के पास गया।
आरोपी फोटोकॉपी की दुकान से मरीजों को मिलने वाली ग्रांट की रकम फर्जी बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करवाते थे। साथ ही मरीजों के नाम पर मिलने वाली महंगी दवाएं अवैध रूप से बाजार में बेच दी जाती थी।

पीजीआई चंडीगढ़ की प्राइवेट ग्रांट से जुड़े कर्मियों को भी आरोपी बनाया गया है।
अब पढ़िए कैसे हुआ मामले का खुलासा…
- मरीज के अकाउंट में ट्रांसफर नहीं किए रुपए:
- घोटाले का खुलासा तब हुआ जब लाभार्थी मरीज कमलेश देवी (फाइल नंबर 18796) के पति ढाई लाख रुपए की स्वीकृत ग्रांट से दवा लेने प्राइवेट ग्रांट सेल पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि उनकी फाइल नष्ट कर दी गई है और डिजिटल रिकॉर्ड भी डिलीट है। इसके बाद जांच में सामने आया कि करीब 22 लाख रुपए निवास यादव नामक के एक अकाउंट में ट्रांसफर किए गए हैं। जबकि इसका मरीज से कोई संबंध नहीं था।
- हॉस्पिटल अटेंडेंट के अकाउंट में फर्जी ट्रांसफर:
- कमलेश ने PGI प्रशासन से इसकी शिकायत की। इसके बाद PGI प्रशासन ने मामले में एक कमेटी का गठन किया। डा. अरुण की अध्यक्षता में बनी कमेटी को कई खामियां मिलीं, जिसमें एक अन्य मरीज अरविंद कुमार (फाइल नंबर 20404) को मिलने वाली राशि में से 90 हजार रुपए हॉस्पिटल अटेंडेंट नेहा के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। इसके बाद और जांच हुई तो, इनमें जांच समिति को 11 ऐसे अकाउंट मिले, जिनमें फर्जी तरीके से मरीजों खुद को मरीज का परिवार बताकर 19 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए गए थे।
- दवा विक्रेताओं को भेजे रुपए:
- वहीं, ग्रांट सेल ने दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित पांच मरीजों के इलाज के लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि और अन्य संस्थाओं से मिले 61.75 लाख रुपए में से 38 लाख 946 रुपए बिना किसी डॉक्टर की पर्ची के सीधे दवा विक्रेताओं के खातों में भेज दिए गए। हैरानी की बात यह है कि इन 5 मरीजों में से 2 की पहले ही मौत हो चुकी थी।
- 70 मामलों में गड़बड़ी, फाइलें गायब:
- पीजीआई की इंटरनल कमेटी की जांच में सामने आया कि 2017 से अक्टूबर 2021 तक के रिकॉर्ड की जांच की गई। इसमें ऐसे 70 और मामले सामने आए। इनमें 17 मामलों में दवा सप्लायरों के असली बिलों में छेड़छाड़ कर 2 बार भुगतान लिया गया। वहीं 37 मरीजों की असली फाइलें रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब पाई गईं।
- 2 पॉइंट में पढ़िए स्कैंडल में कौन शामिल…
- फोटोकॉपी की दुकान से चलाया स्कैंडल:
- PGI की प्राइवेट ग्रांट से जुड़े कर्मचारी PGI के पास स्थित गोल मार्केट में एक फोटोकॉपी दुकान से अपना स्कैंडल चलाते थे। आरोपी मरीजों को मिलने वाली ग्रांट को फर्जी खातों में ट्रांसफर करा देते थे। फोटोकॉपी दुकान के मालिक दुर्लभ कुमार, साहिल सूद और उनके रिश्तेदारों के खातों में रुपए ट्रांसफर किए थे, जिसे इन्होंने आपस में बांट लिया।
- प्राइवेट ग्रांट सेल में सामने आईं गड़बड़ी:
- जांच के दौरान सीबीआई ने पीजीआई, संबंधित विभागों और विभिन्न बैंकों से रिकॉर्ड जुटाए। इनमें पीजीआई की प्राइवेट ग्रांट सेल में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं। यह सेल विभिन्न विभागों से मिलने वाली ग्रांट का प्रबंधन करती है। इसके बाद इसी सेल के जरिए मरीजों को आर्थिक मदद और दवाएं दी जाती हैं।
- दवा कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
- सीबीआई इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है। साथ ही एचएलएल लाइफ केयर, आर कुमार मेडिकोज, कुमार एंड कंपनी और मारुति मेडिकोज की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है, हालांकि अभी इन कंपनियों को आरोपी नहीं बनाया गया है।
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