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पंजाब SC आयोग चेयरमैन का बाजवा पर तंज:जसवीर बोले- गरीबों को अपमानित करने वालों पर होगी कार्रवाई, बाबा निरंजन दास का आशीर्वाद लिया

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पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी आज (शनिवार) जालंधर के दौर पर हैं। जहां उन्होंने डेरा सचखंड बल्ला में नतमस्तक होकर बाबा निरंजन दास जी का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा को जारी नोटिस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि संविधान और कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

गढ़ी ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी यदि कोई भी नेता गरीबों के मान-सम्मान को ठेस पहुंचाने या उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश करेगा, तो आयोग एक मजबूत प्रतिद्वंदी की तरह उनके सामने खड़ा होगा।

डेरा सचखंड बल्ला में टेका मत्था

चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने बाबा निरंजन दास जी से मुलाकात की और उन्हें गुलाब के फूल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा कि आज का दिन प्रेम का प्रतीक है और इसी भावना के साथ वे मानवता और सद्भाव का आशीर्वाद लेने पहुंचे हैं।

इसके पश्चात, वे जालंधर के अंबेडकर भवन भी गए, जहां सीपीएफ यूनियन के प्रधान और अन्य पदाधिकारियों के साथ भारतीय संविधान दिवस और अनुसूचित जाति के अधिकारों से जुड़े विभिन्न गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रताप सिंह बाजवा को नोटिस और आयोग की सख्त चेतावनी

गढ़ी ने बताया कि आयोग ने प्रताप सिंह बाजवा को नोटिस जारी किया है और उन्हें 16 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी की शिक्षाओं और सिद्धांतों के अनुसार, यदि कोई भी दबंग व्यक्ति किसी गरीब सिख या वंचित वर्ग के व्यक्ति को ललकारेगा, तो पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग खामोश नहीं बैठेगा। आयोग पूरी ताकत के साथ पीड़ित के साथ खड़ा होगा और आरोपी का सामना करेगा।

कानून का उल्लंघन करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

चेयरमैन गढ़ी ने अपने संबोधन में बिना किसी विशेष नेता का नाम लिए तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देश का संविधान और कानून सर्वोपरि है। यदि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के दायरे का उल्लंघन करता है, तो एससी आयोग उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि अगर हमें कहीं भी यह नजर आया कि कोई नेता गरीबों की बैंड बजाने की बात करता है, उनके रंग-रूप या जाति पर टिप्पणी कर उनका मजाक उड़ाता है, या फिर ‘3 मिनट में गर्दन मरोड़ने’ जैसी हिंसक धमकियां देता है, तो आयोग ऐसे लोगों के खिलाफ चट्टान की तरह खड़ा होगा।

कहा कि, आयोग का मुख्य उद्देश्य समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना है, और इसके लिए वे किसी भी टकराव से पीछे नहीं हटेंगे।

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दिल की बीमारियों से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज; आपातकालीन स्थितियों में सहायता प्रदान कर रही ‘’Mukhyamantri Sehat Yojana’

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पंजाब की प्रमुख मुख्यमंत्री सेहत योजना स्वास्थ्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रही है, जो प्रति परिवार 10 लाख रुपये की कवरेज प्रदान करती है और अचानक डॉक्टरी आपातकाल के दौरान वित्तीय बोझ को कम करते हुए समय पर इलाज लेने में सक्षम बनाती है। कई बीमारियां जैसे दिल का दौरा, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं किसी भी समय हमला कर सकती हैं, इसलिए पंजाब सरकार का दृष्टिकोण व्यापक स्तर पर जन स्वास्थ्य हस्तक्षेप के माध्यम से डॉक्टरी जरूरत और किफायती इलाज के बीच के अंतर को पूरा करने पर केंद्रित है।

दिल का दौरा, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं जैसी बीमारियां बिना किसी चेतावनी के हमला कर सकती हैं, जिससे अचानक गंभीर लक्षण पैदा होते हैं और गंभीर जटिलताओं को रोकने के लिए तुरंत डॉक्टरी सहायता की जरूरत होती है। यह सुझाव देता है कि ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां अक्सर गुप्त रूप से विकसित होती हैं और बिना किसी चेतावनी के हमला करती हैं, जिसके संबंध में फैसला लेने के लिए बहुत कम समय बचता है। पंजाब में इस बढ़ती चिंता को वित्तीय तैयारी के माध्यम से देखा जा रहा है, मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी सरकार-समर्थित पहल का उद्देश्य डॉक्टरी जरूरत और किफायती इलाज के बीच के अंतर को पूरा करना है।

पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में चल रही यह योजना हर परिवार को प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान करती है। यह योजना सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में 2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज कवर करती है।

बड़ी और गंभीर बीमारियों की छिपी शुरुआत को उजागर करते हुए विश्व स्वास्थ्य आंकड़े समय पर फैसला लेने की जरूरत को दर्शाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज और सांस लेने की समस्या जैसी बीमारियां हर साल विश्व भर में लगभग 75 प्रतिशत मौतों का कारण बनती हैं और बहुत से पीड़ितों को यह भी नहीं पता होता कि वे जोखिम में हैं। मोहाली के जिला अस्पताल की मेडिसिन की मेडिकल ऑफिसर डॉ. ईशा अरोड़ा ने कहा कि जब तक मरीज हमारे पास आते हैं, बीमारी अक्सर अगले चरण तक पहुंच जाती है। उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में ही बीमारी का पता लगाने से बेहतर नतीजों में मदद मिल सकती है, लेकिन इसे अभी भी प्राथमिकता नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा नियमित जांचें बहुत कम करवाई जाती हैं क्योंकि लक्षणों का पता न लगना उनमें सुरक्षित होने की गलत भावना पैदा कर देता है।

डॉक्टरी विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि जब आपातकाल आता है, तो समय सबसे महत्वपूर्ण कारक बन जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार दिल के दौरे या स्ट्रोक के इलाज में कुछ मिनटों की देरी भी स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है और यहां तक कि जान भी ले सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे पलों में मरीज आम तौर पर झिझक महसूस करते हैं। डॉ. ईशा अरोड़ा ने कहा कि इलाज शुरू होने से पहले ही परिवार अक्सर खर्चे पर विचार करने लग पड़ते हैं और यह देरी खतरनाक हो सकती है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी वित्तीय सुरक्षा योजनाओं से एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है।

इस योजना को कवरेज से लेकर वास्तविक देखभाल डिलीवरी तक पंजाब भर में काफी बढ़ावा मिला है। अधिकारियों का कहना है कि 33 लाख से अधिक परिवारों को इस योजना के तहत नामांकित किया गया है, जिसमें खासकर डायलिसिस, कैंसर और दिल जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लाखों मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। पंजाब की राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार इस योजना के तहत 33 लाख से अधिक लाभार्थियों को सफलतापूर्वक रजिस्टर किया गया है और 1,98,793 मुफ्त इलाजों को मंजूरी दी गई है, जिसकी राशि लगभग 3,30,01,32,533 रुपये बनती है। इस कुल राशि में से 59,34,18,468 रुपये पहले ही अस्पतालों को वितरित किए जा चुके हैं। हर उम्र वर्ग के लोगों, खास तौर पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, ने इस स्कीम से लाभ उठाया है, जिसमें दिल की सर्जरी और कैंसर की देखभाल जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस पहल ने कई परिवारों के महंगे इलाज के खर्च को कम करने में मदद की है, जिनके लिए पहले उन्हें उधार लेना पड़ता था या संपत्ति बेचनी पड़ती थी। भारतीय संदर्भ में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय और सरकार द्वारा समर्थित अध्ययनों में यह सामने आया है कि कुल स्वास्थ्य देखभाल खर्च का लगभग 47 प्रतिशत लोगों की जेब से ही खर्च होता है।

प्रारंभिक संकेत जमीनी स्तर पर उत्साहजनक रुझानों की ओर इशारा करते हैं, हालांकि व्यापक मूल्यांकन अभी जारी है। इनमें मरीजों की अस्पताल में इलाज कराने की इच्छा में वृद्धि, आपातकालीन भर्ती में कम देरी और कुछ मामलों में शुरुआती चरण में जांच करवाने की प्रवृत्ति शामिल है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना पूरे राज्य में समान स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिवार को आर्थिक कठिनाइयों के कारण इलाज में देरी का सामना न करना पड़े। हम कवरेज बढ़ाने, अस्पताल नेटवर्क को बेहतर बनाने और क्रियान्वयन को और मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।

नामांकन अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी लक्षित जागरूकता अभियानों पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि लाभार्थियों को यह समझाया जा सके कि इस योजना का उपयोग कैसे और कब करना है। क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे अधिकारियों ने बताया कि जागरूकता बढ़ाने, दावों की प्रक्रिया को सरल बनाने और अस्पतालों तथा मरीजों दोनों के लिए एक सुगम और अधिक सुलभ अनुभव सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इसके साथ ही, विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल अभी भी एक महत्वपूर्ण कमी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जांच, शुरुआती परीक्षण और जोखिम कारकों की निगरानी अभी भी सीमित है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण वयस्कों में से केवल एक चौथाई ने ही बुनियादी स्वास्थ्य जांच करवाई है, जबकि महिलाओं में कैंसर स्क्रीनिंग की दर 2 प्रतिशत से भी कम है। बीमारी का पता चलने पर स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

स्वास्थ्य आपातकाल की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन तैयारी को मजबूत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा, बढ़ी हुई जागरूकता और निवारक देखभाल पर ध्यान केंद्रित करने से पंजाब में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूती मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब बीमारी बिना किसी चेतावनी के हमला करती है, तो इलाज मिलने में देरी और समय पर देखभाल के बीच का अंतर अक्सर ठीक होने और लंबे समय तक बीमारी के बने रहने के परिणामों को तय करता है। इसलिए, तैयारी केवल एक नीतिगत प्राथमिकता नहीं, बल्कि एक आवश्यकता बन जाती है।

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CM भगवंत सिंह मान द्वारा जैतो को 28.68 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य भर में विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हुए फरीदकोट के जैतो में 28.68 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें कम्युनिटी हेल्थ सेंटर को 30 बिस्तरों वाले अस्पताल में अपग्रेड करना तथा पीने के साफ पानी और खेल ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश शामिल है।

उन्होंने कहा कि 2022 में ‘झाड़ू’ (आप का चुनाव चिन्ह) के लिए लोगों के जनादेश ने शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के सपनों को साकार करने की नींव रखी, जो अब पूरे हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ‘आप’ के शासन मॉडल की तुलना विपक्षी दलों से करते हुए कहा कि जहां ‘आप’ साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और महिलाओं को आर्थिक सहायता दे रही है, वहीं पारंपरिक पार्टियां हमेशा लोगों की सेवा करने में विफल रही हैं।

उन्होंने भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल पर तीखा हमला बोलते हुए उनके शासनकाल पर सवाल उठाए और उन पर भाई-भतीजावाद तथा आपराधिक तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने बढ़ती गरीबी और मुश्किलों के लिए केंद्र सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया।

13 अप्रैल को बैसाखी के दिन होने वाले विशेष सत्र में एक साल तक कोई जमानत न देने और उम्रकैद की सजा का प्रावधान रखने वाला सख्त बेअदबी विरोधी कानून बनाने की घोषणा करते हुए भगवंत सिंह मान ने 2027 के चुनावों को अपनी सरकार के पक्ष में स्पष्ट माहौल बताया। उन्होंने कहा कि जहां कांग्रेस का संबंध शुरू से ही सिख विरोधी दंगों से जुड़ा रहा है, वहीं अकाली दल अपने काले कारनामों के कारण पूरी तरह बदनाम हो चुका है और केवल उनकी ‘आप’ पार्टी ही बेहतर शासन-आधारित “एकमात्र विकल्प” है, जो “रंगला पंजाब” बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जैतो की धरती ने हमेशा इतिहास रचा है, जिसे उनकी पार्टी सलाम करती है। उन्होंने कहा कि साहित्य हो या संघर्ष, जब भी किसी क्षेत्र में जरूरत पड़ी, जैतो हमेशा आगे बढ़कर सबसे आगे खड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि अकालियों को दी गई हर वोट गुरु और गुरबाणी की बेअदबी के पक्ष में फैसला होगी। उन्होंने कहा कि अकालियों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी कर हर व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अकालियों ने महान गुरुओं की बाणी का अपमान किया और बहिबल कलां तथा बरगाड़ी में निर्दोष लोगों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि अकालियों ने श्री अकाल तख्त साहिब का भी गंभीर अपमान किया है। उन्होंने आगे कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदारों की नियुक्ति भी अकालियों की मनमानी से होती है, जो पंजाब के लोगों के साथ अन्याय है।

विकास के दावों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री दावा करते हैं कि उनके शासनकाल में राज्य में बड़े पैमाने पर विकास हुआ, लेकिन कोटकपूरा, बहिबल कलां और अन्य स्थानों पर जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी हुई और निर्दोष मारे गए, उन मुद्दों पर वे चुप्पी साध लेते हैं।

अकाली दल की “पंजाब बचाओ यात्रा” पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस यात्रा का असली नाम “परिवार बचाओ यात्रा” होना चाहिए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अकाली नेता यह स्पष्ट करें कि 15 वर्षों तक राज्य को लूटने के बाद अब वे किससे पंजाब को बचाने की बात कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अकालियों ने राज्य को बेरहमी से लूटा और पंजाबियों की मानसिकता को भावनात्मक रूप से कुचला। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न माफियाओं को संरक्षण दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अकाली नेतृत्व को कभी माफ नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे कई पीढ़ियों के विनाश के लिए जिम्मेदार हैं। उनके लंबे कुशासन के दौरान नशे का व्यापार बड़े पैमाने पर बढ़ा-फूला।

उन्होंने आगे कहा कि इन नेताओं के हाथ लाखों युवाओं के खून से रंगे हुए हैं, जो इन नेताओं के सरकारी वाहनों के जरिए राज्य में सप्लाई किए जाने वाले नशों का शिकार हुए। उन्होंने कहा कि इन नेताओं के पाप माफ नहीं किए जा सकते और अकालियों को उनके कुकर्मों की लंबी सूची के लिए लोग कभी भी माफ नहीं करेंगे।

इस दौरान विधायी कार्रवाई की रूपरेखा पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आप सरकार ने जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2008 में संशोधन के लिए 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। उन्होंने आगे कहा कि पवित्र ग्रंथ की बेअदबी की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम 10 साल और उम्रकैद तक की सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने कानून बनाने के लिए अनुभवी कानूनी विशेषज्ञों की सहायता ली है और इस संबंध में संत समाज से भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।

अकाली नेतृत्व पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये अवसरवादी नेता हैं, जो अपनी सुविधा और निजी राजनीतिक हितों के अनुसार गिरगिट की तरह रंग और रुख बदलते रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हर कोई जानता है कि यह परिवार अंग्रेजों का समर्थक रहा है और देशभक्तों के खिलाफ अंग्रेजों का साथ देने के लिए इस परिवार को ‘सर’ की उपाधि से नवाजा गया था। उन्होंने आगे कहा कि इस परिवार ने 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड के दोषी जनरल डायर के लिए इस घिनौनी घटना के बाद रात के खाने की मेजबानी की थी।

उन्होंने कहा, “इस कार्रवाई ने उनकी देश-विरोधी और पंजाब-विरोधी मानसिकता को उजागर किया है।” उन्होंने आगे कहा, “सिर्फ यही नहीं, परिवार ने जनरल डायर को श्री हरिमंदिर साहिब में सिरोपा भेंट करने और माफी दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई थी।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “यह और भी हैरान करने वाली बात है कि सिरोपा भेंट करने वाले जत्थेदार अरूड़ सिंह, पूर्व लोकसभा सदस्य सिमरजीत सिंह मान के नाना थे।”

इतिहास का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा, “बादल परिवार के पूर्वजों के दोहरे चरित्र का सच इतिहास के पन्नों में दर्ज है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता।” उन्होंने आगे कहा, “इस परिवार के हाथ देशभक्तों के खून से रंगे हैं और राष्ट्रवादियों की पीठ में छुरा घोंपने से लेकर कौम के साथ विश्वासघात करने तक उनकी भूमिका को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।”

कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कांग्रेस में हर नेता राज्य का मुखिया बनना चाहता है। उनके पास कार्यकर्ताओं से ज्यादा मुख्यमंत्री हैं।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनके शीर्ष नेता ने हाल ही में एक रैली के दौरान उन्हें सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस एक विभाजित पार्टी है, जो आंतरिक खींचतान के कारण बिखरने के कगार पर है।” उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें एकजुट करने के लिए भेजे गए नेताओं को उनके नाम तक सही से बोलना नहीं आता।”

2027 के चुनाव की रूपरेखा के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों के पास चुनने के लिए तीन कलमें होंगी।” उन्होंने कहा, “पहली कलम कांग्रेस की है, जिसकी स्याही श्री हरिमंदिर साहिब पर हमले, 1984 के दंगों और अन्य सिख-विरोधी रुख का प्रतीक है। इसी तरह दूसरी कलम अकालियों की है, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की स्याही है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा, “तीसरी कलम आप की है, जो जन-हितैषी और विकासशील पहलों के जरिए राज्य को फिर से रंगला पंजाब बनाकर इसकी शान बहाल कर रही है।”

सुशासन के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार ने कई जन-हितैषी पहलें की हैं, जिससे राज्य की बदली हुई तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।” उन्होंने आगे कहा, “लोगों के टैक्स का पैसा बहुत समझदारी से जनता की भलाई पर खर्च किया जा रहा है। यह पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के उन्नयन के माध्यम से फिर से राज्य पर ही लगाया जा रहा है।”

सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमने 90 फीसदी घरों को मुफ्त बिजली प्रदान की है, बिना किसी भ्रष्टाचार के 65,000 से अधिक नौकरियां दी हैं, सड़कों में सुधार किया है, टोल प्लाजा बंद किए हैं, जिससे रोजाना 70 लाख रुपये की बचत हो रही है और बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है।” उन्होंने आगे कहा, “नहरी पानी का उपयोग 22 फीसदी से बढ़कर 71 फीसदी हो गया है और आने वाले धान के सीजन तक 90 फीसदी तक पहुंच जाएगा।”

शिक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुफ्त सुविधाएं गरीबी को खत्म नहीं कर सकतीं। शिक्षा ही एकमात्र साधन है, जिसके जरिए लोगों को ऊपर उठाया जा सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “विद्या वह प्रकाश है जो अंधकार को दूर करता है, इसलिए हम शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।”

स्वास्थ्य देखभाल के बारे में भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 65 लाख परिवारों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हर परिवार 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का हकदार है, जिसमें 30 लाख से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं और अब तक 1.65 लाख इलाज प्रदान किए जा चुके हैं।” उन्होंने लोगों से ऐसी लाभकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाने की अपील भी की।

बिजली आपूर्ति के बारे में उन्होंने कहा, “पहली बार धान के सीजन के दौरान खेतों के ट्यूबवेलों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली आपूर्ति दी गई है।” उन्होंने आगे कहा, “किसानों को दिन के समय बिजली मिल रही है, जिससे उनके जीवन में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है।” उन्होंने दोहराया, “सरकारी खजाने का एक-एक पैसा जनता के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।”

सामाजिक कल्याण का उल्लेख करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “मावां-धीयां सत्कार सम्मान योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये और 18 साल से अधिक उम्र की अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपये दिए जा रहे हैं।”

सभा को संवाद का न्योता देते हुये भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह कोई राजनीतिक रैली नहीं, बल्कि लोगों से जुड़ने का वास्तविक मंच है।” उन्होंने आगे कहा, “पिछली सरकारों ने लोगों का विश्वास तोड़ा और राज्य को लूटा, लेकिन बाद में लोगों ने बदलाव के लिए वोट दिया, जिससे स्कूलों, अस्पतालों और अन्य क्षेत्रों में परिवर्तन आया।”

जैतो की ऐतिहासिक धरती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र भूमि ने हमेशा इतिहास रचा है और पंजाब की किस्मत में इसकी उपजाऊ धरती का बड़ा योगदान रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “पारंपरिक नेता चांदी के चम्मच लेकर पैदा हुए थे और उन्होंने देश के लिए न कभी कुछ किया और न ही कोई कठिनाई झेली।” उन्होंने कहा, “वे मानते रहे कि उनके पास शासन करने का दैवी अधिकार है, लेकिन लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च होती है।”

सुखबीर सिंह बादल पर निशाना साधते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “शिक्षा और कल्याण पर चर्चा करने के बजाय वे भैंसों की बात करते हैं, जो एक संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।” उन्होंने आगे कहा, “कई अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने राज्य को लूटा और इसी कारण लोगों ने उन्हें नकार दिया।”

विपक्ष के आचरण की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कहा, “वास्तविक मुद्दे उठाने के बजाय वे आरोप-प्रत्यारोप और कीचड़ उछालने में लगे हैं और राज्य के कीमती संसाधनों को लूटने के अपने अवसर का इंतजार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल करना है, जनता का कल्याण नहीं।”

‘आप’ के एजेंडे को दोहराते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और कृषि की बात करते हैं, जबकि अन्य सत्ता हथियाने की रणनीतियों में लगे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उनका एजेंडा परिवार का कल्याण है, हमारा जनता का कल्याण।” उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों के कुशासन के कारण लोगों ने आम आदमी पार्टी को चुना, जो लगातार मेहनत कर रही है।”

लोगों को पिछली सरकारों की याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कहा, “पारंपरिक पार्टियां कभी भी पंजाब के प्रति वफादार नहीं रहीं।” उन्होंने आगे कहा, “वे ईर्ष्या करते हैं क्योंकि ‘आप’ ने कल्याण का एजेंडा तय किया है।” उन्होंने आगे कहा, “सुखबीर सिंह बादल को पंजाब की बुनियादी भौगोलिक स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।”

अन्य नेताओं पर निशाना साधते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनका परिवार लगातार पंजाब विरोधी ताकतों के साथ खड़ा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “आप व्यवस्था बदलने के लिए बनाई गई थी और इसके नेतृत्व में पंजाब शिक्षा और स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है।”

राष्ट्रीय मुद्दों पर भगवंत सिंह मान ने कहा, “देश पर शासन करने वालों को जनता के कल्याण की जानकारी नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “देश का नेतृत्व एक ऐसे व्यक्ति कर रहे हैं जो अधिक समय विदेशों में बिताते हैं और जमीनी हकीकत से दूर हैं।” उन्होंने कहा, “एलपीजी और तेल संकट का अनुमान पहले ही लगाया जाना चाहिए था।”

इससे पहले, ‘आप’ पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा, “यह बहुत गर्व की बात है कि भगवंत सिंह मान सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री साबित हुए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “वे जनता के कल्याण के लिए काम करने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री हैं और पार्टी बड़े बहुमत के साथ फिर से सत्ता में आएगी।”

इस दौरान स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर और डॉ. बलबीर सिंह सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।

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पंजाब- CM भगवंत मान ने बठिंडा का पूरा थाना बदला:SHO से लेकर संतरी मानसा भेजे; नशे से मौत की कंप्लेंट पर कार्रवाई नहीं की

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पंजाब के CM भगवंत मान ने बठिंडा के सदर पुलिस स्टेशन के सभी कर्मचारियों का तबादला कर दिया। यह एक्शन नशे के कारण हो रही मौतों की शिकायत पर कार्रवाई न होने पर लिया गया। यह शिकायत गुलाबगढ़ गांव के सरपंच ने मुख्यमंत्री को दी थी।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार (5 अप्रैल) को बठिंडा के बलवंत गार्गी ऑडिटोरियम में कार्यकर्ताओं, नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान कई पंचों, सरपंचों और लोगों ने अपनी शिकायतें रखीं।

इस दौरान गांव गुलाबगढ़ के सरपंच लाखा सिंह ने मुख्यमंत्री को बताया कि

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मेरे गांव और पड़ोसी गांवों में नशीले पदार्थों के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है। नशीले पदार्थों का कारोबार रूक नहीं रहा। संबंधित सदर पुलिस स्टेशन को लगातार इसकी जानकारी दी गई। लेकिन बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

CM बोले- सभी कर्मचारियों को पठानकोट भेजो शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने सदर पुलिस स्टेशन के सभी कर्मचारियों को बठिंडा से हटाकर पठानकोट भेजने और नए कर्मचारियों की तैनाती का आदेश दिया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा-

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मैं नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई चाहता हूं, तो फिर यह कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? लोग शिकायतें क्यों कर रहे हैं? यह देरी बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तुरंत कार्रवाई करें।QuoteImage

DIG बोले- मामले में जांच भी कराई जाएगी

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद डीआईजी बठिंडा रेंज हरजीत सिंह को इस मामले में कार्रवाई का जिम्मा सौंपा गया। डीआईजी हरजीत सिंह ने फोन पर बताया कि सदर पुलिस स्टेशन के सभी कर्मचारियों का तबादला मानसा कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब नए कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी और इस मामले में जांच भी कराई जाएगी कि आखिर समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

DIG ने बताया कि उनकी रेंज में बठिंडा और मानसा जिला आते हैं, इसलिए कर्मचारियों का तबादला पठानकोट की जगह मानसा किया गया है।

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