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दिल की बीमारियों से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज; आपातकालीन स्थितियों में सहायता प्रदान कर रही ‘’Mukhyamantri Sehat Yojana’
पंजाब की प्रमुख मुख्यमंत्री सेहत योजना स्वास्थ्य सुरक्षा की महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर रही है, जो प्रति परिवार 10 लाख रुपये की कवरेज प्रदान करती है और अचानक डॉक्टरी आपातकाल के दौरान वित्तीय बोझ को कम करते हुए समय पर इलाज लेने में सक्षम बनाती है। कई बीमारियां जैसे दिल का दौरा, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं किसी भी समय हमला कर सकती हैं, इसलिए पंजाब सरकार का दृष्टिकोण व्यापक स्तर पर जन स्वास्थ्य हस्तक्षेप के माध्यम से डॉक्टरी जरूरत और किफायती इलाज के बीच के अंतर को पूरा करने पर केंद्रित है।
दिल का दौरा, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं जैसी बीमारियां बिना किसी चेतावनी के हमला कर सकती हैं, जिससे अचानक गंभीर लक्षण पैदा होते हैं और गंभीर जटिलताओं को रोकने के लिए तुरंत डॉक्टरी सहायता की जरूरत होती है। यह सुझाव देता है कि ऐसी स्वास्थ्य स्थितियां अक्सर गुप्त रूप से विकसित होती हैं और बिना किसी चेतावनी के हमला करती हैं, जिसके संबंध में फैसला लेने के लिए बहुत कम समय बचता है। पंजाब में इस बढ़ती चिंता को वित्तीय तैयारी के माध्यम से देखा जा रहा है, मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी सरकार-समर्थित पहल का उद्देश्य डॉक्टरी जरूरत और किफायती इलाज के बीच के अंतर को पूरा करना है।
पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में चल रही यह योजना हर परिवार को प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान करती है। यह योजना सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में 2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज कवर करती है।
बड़ी और गंभीर बीमारियों की छिपी शुरुआत को उजागर करते हुए विश्व स्वास्थ्य आंकड़े समय पर फैसला लेने की जरूरत को दर्शाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज और सांस लेने की समस्या जैसी बीमारियां हर साल विश्व भर में लगभग 75 प्रतिशत मौतों का कारण बनती हैं और बहुत से पीड़ितों को यह भी नहीं पता होता कि वे जोखिम में हैं। मोहाली के जिला अस्पताल की मेडिसिन की मेडिकल ऑफिसर डॉ. ईशा अरोड़ा ने कहा कि जब तक मरीज हमारे पास आते हैं, बीमारी अक्सर अगले चरण तक पहुंच जाती है। उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में ही बीमारी का पता लगाने से बेहतर नतीजों में मदद मिल सकती है, लेकिन इसे अभी भी प्राथमिकता नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा नियमित जांचें बहुत कम करवाई जाती हैं क्योंकि लक्षणों का पता न लगना उनमें सुरक्षित होने की गलत भावना पैदा कर देता है।
डॉक्टरी विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि जब आपातकाल आता है, तो समय सबसे महत्वपूर्ण कारक बन जाता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार दिल के दौरे या स्ट्रोक के इलाज में कुछ मिनटों की देरी भी स्थायी नुकसान का कारण बन सकती है और यहां तक कि जान भी ले सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे पलों में मरीज आम तौर पर झिझक महसूस करते हैं। डॉ. ईशा अरोड़ा ने कहा कि इलाज शुरू होने से पहले ही परिवार अक्सर खर्चे पर विचार करने लग पड़ते हैं और यह देरी खतरनाक हो सकती है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी वित्तीय सुरक्षा योजनाओं से एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाने की उम्मीद की जाती है।
इस योजना को कवरेज से लेकर वास्तविक देखभाल डिलीवरी तक पंजाब भर में काफी बढ़ावा मिला है। अधिकारियों का कहना है कि 33 लाख से अधिक परिवारों को इस योजना के तहत नामांकित किया गया है, जिसमें खासकर डायलिसिस, कैंसर और दिल जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लाखों मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। पंजाब की राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार इस योजना के तहत 33 लाख से अधिक लाभार्थियों को सफलतापूर्वक रजिस्टर किया गया है और 1,98,793 मुफ्त इलाजों को मंजूरी दी गई है, जिसकी राशि लगभग 3,30,01,32,533 रुपये बनती है। इस कुल राशि में से 59,34,18,468 रुपये पहले ही अस्पतालों को वितरित किए जा चुके हैं। हर उम्र वर्ग के लोगों, खास तौर पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, ने इस स्कीम से लाभ उठाया है, जिसमें दिल की सर्जरी और कैंसर की देखभाल जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस पहल ने कई परिवारों के महंगे इलाज के खर्च को कम करने में मदद की है, जिनके लिए पहले उन्हें उधार लेना पड़ता था या संपत्ति बेचनी पड़ती थी। भारतीय संदर्भ में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय और सरकार द्वारा समर्थित अध्ययनों में यह सामने आया है कि कुल स्वास्थ्य देखभाल खर्च का लगभग 47 प्रतिशत लोगों की जेब से ही खर्च होता है।
प्रारंभिक संकेत जमीनी स्तर पर उत्साहजनक रुझानों की ओर इशारा करते हैं, हालांकि व्यापक मूल्यांकन अभी जारी है। इनमें मरीजों की अस्पताल में इलाज कराने की इच्छा में वृद्धि, आपातकालीन भर्ती में कम देरी और कुछ मामलों में शुरुआती चरण में जांच करवाने की प्रवृत्ति शामिल है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना पूरे राज्य में समान स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिवार को आर्थिक कठिनाइयों के कारण इलाज में देरी का सामना न करना पड़े। हम कवरेज बढ़ाने, अस्पताल नेटवर्क को बेहतर बनाने और क्रियान्वयन को और मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
नामांकन अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है और राज्य स्वास्थ्य एजेंसी लक्षित जागरूकता अभियानों पर ध्यान केंद्रित कर रही है ताकि लाभार्थियों को यह समझाया जा सके कि इस योजना का उपयोग कैसे और कब करना है। क्रियान्वयन की निगरानी कर रहे अधिकारियों ने बताया कि जागरूकता बढ़ाने, दावों की प्रक्रिया को सरल बनाने और अस्पतालों तथा मरीजों दोनों के लिए एक सुगम और अधिक सुलभ अनुभव सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही, विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल अभी भी एक महत्वपूर्ण कमी बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जांच, शुरुआती परीक्षण और जोखिम कारकों की निगरानी अभी भी सीमित है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण वयस्कों में से केवल एक चौथाई ने ही बुनियादी स्वास्थ्य जांच करवाई है, जबकि महिलाओं में कैंसर स्क्रीनिंग की दर 2 प्रतिशत से भी कम है। बीमारी का पता चलने पर स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
स्वास्थ्य आपातकाल की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन तैयारी को मजबूत किया जा सकता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से वित्तीय सुरक्षा, बढ़ी हुई जागरूकता और निवारक देखभाल पर ध्यान केंद्रित करने से पंजाब में स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूती मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब बीमारी बिना किसी चेतावनी के हमला करती है, तो इलाज मिलने में देरी और समय पर देखभाल के बीच का अंतर अक्सर ठीक होने और लंबे समय तक बीमारी के बने रहने के परिणामों को तय करता है। इसलिए, तैयारी केवल एक नीतिगत प्राथमिकता नहीं, बल्कि एक आवश्यकता बन जाती है।
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आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई जारी रहेगी, संस्कृत लागू करने का फैसला वापस
आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES), जालंधर ने अपने उस पहले के फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी। अब छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पहले की तरह अपनी मातृभाषा पंजाबी की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
इस फैसले का स्वागत करते हुए पंजाब चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. लखविंदर सिंह जौहल, महासचिव सतनाम सिंह मानक और संगठन सचिव प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने कहा कि नए नियमों के तहत छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पंजाबी या संस्कृत में से किसी एक भाषा का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। इसके साथ ही वे अंग्रेजी और हिंदी से जुड़े निर्धारित विषयों का भी चयन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत के विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जबकि दसवीं कक्षा की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
डॉ. जौहल ने पंजाबी भाषा को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का समर्थन करने वाले सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे गए उनके पत्र ने इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा पंजाबी भाषा से जुड़े विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया। कानूनी और सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ के नेतृत्व में चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब चेतना मंच ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनाए रखने की मांग की थी। अब इस फैसले को पंजाबी भाषा के संरक्षण और उसके अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।
प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।
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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया
प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।
विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।
बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।
किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”
अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।
स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।
उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”
सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।
उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”
उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।
स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”
शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।
स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।
स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”
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