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CM भगवंत सिंह मान द्वारा जैतो को 28.68 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य भर में विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हुए फरीदकोट के जैतो में 28.68 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें कम्युनिटी हेल्थ सेंटर को 30 बिस्तरों वाले अस्पताल में अपग्रेड करना तथा पीने के साफ पानी और खेल ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश शामिल है।

उन्होंने कहा कि 2022 में ‘झाड़ू’ (आप का चुनाव चिन्ह) के लिए लोगों के जनादेश ने शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के सपनों को साकार करने की नींव रखी, जो अब पूरे हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने ‘आप’ के शासन मॉडल की तुलना विपक्षी दलों से करते हुए कहा कि जहां ‘आप’ साफ पानी, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और महिलाओं को आर्थिक सहायता दे रही है, वहीं पारंपरिक पार्टियां हमेशा लोगों की सेवा करने में विफल रही हैं।

उन्होंने भाजपा, कांग्रेस और अकाली दल पर तीखा हमला बोलते हुए उनके शासनकाल पर सवाल उठाए और उन पर भाई-भतीजावाद तथा आपराधिक तत्वों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने बढ़ती गरीबी और मुश्किलों के लिए केंद्र सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया।

13 अप्रैल को बैसाखी के दिन होने वाले विशेष सत्र में एक साल तक कोई जमानत न देने और उम्रकैद की सजा का प्रावधान रखने वाला सख्त बेअदबी विरोधी कानून बनाने की घोषणा करते हुए भगवंत सिंह मान ने 2027 के चुनावों को अपनी सरकार के पक्ष में स्पष्ट माहौल बताया। उन्होंने कहा कि जहां कांग्रेस का संबंध शुरू से ही सिख विरोधी दंगों से जुड़ा रहा है, वहीं अकाली दल अपने काले कारनामों के कारण पूरी तरह बदनाम हो चुका है और केवल उनकी ‘आप’ पार्टी ही बेहतर शासन-आधारित “एकमात्र विकल्प” है, जो “रंगला पंजाब” बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि जैतो की धरती ने हमेशा इतिहास रचा है, जिसे उनकी पार्टी सलाम करती है। उन्होंने कहा कि साहित्य हो या संघर्ष, जब भी किसी क्षेत्र में जरूरत पड़ी, जैतो हमेशा आगे बढ़कर सबसे आगे खड़ा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि अकालियों को दी गई हर वोट गुरु और गुरबाणी की बेअदबी के पक्ष में फैसला होगी। उन्होंने कहा कि अकालियों ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी कर हर व्यक्ति की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अकालियों ने महान गुरुओं की बाणी का अपमान किया और बहिबल कलां तथा बरगाड़ी में निर्दोष लोगों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। उन्होंने कहा कि अकालियों ने श्री अकाल तख्त साहिब का भी गंभीर अपमान किया है। उन्होंने आगे कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदारों की नियुक्ति भी अकालियों की मनमानी से होती है, जो पंजाब के लोगों के साथ अन्याय है।

विकास के दावों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री दावा करते हैं कि उनके शासनकाल में राज्य में बड़े पैमाने पर विकास हुआ, लेकिन कोटकपूरा, बहिबल कलां और अन्य स्थानों पर जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी हुई और निर्दोष मारे गए, उन मुद्दों पर वे चुप्पी साध लेते हैं।

अकाली दल की “पंजाब बचाओ यात्रा” पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस यात्रा का असली नाम “परिवार बचाओ यात्रा” होना चाहिए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अकाली नेता यह स्पष्ट करें कि 15 वर्षों तक राज्य को लूटने के बाद अब वे किससे पंजाब को बचाने की बात कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अकालियों ने राज्य को बेरहमी से लूटा और पंजाबियों की मानसिकता को भावनात्मक रूप से कुचला। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न माफियाओं को संरक्षण दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अकाली नेतृत्व को कभी माफ नहीं किया जा सकता, क्योंकि वे कई पीढ़ियों के विनाश के लिए जिम्मेदार हैं। उनके लंबे कुशासन के दौरान नशे का व्यापार बड़े पैमाने पर बढ़ा-फूला।

उन्होंने आगे कहा कि इन नेताओं के हाथ लाखों युवाओं के खून से रंगे हुए हैं, जो इन नेताओं के सरकारी वाहनों के जरिए राज्य में सप्लाई किए जाने वाले नशों का शिकार हुए। उन्होंने कहा कि इन नेताओं के पाप माफ नहीं किए जा सकते और अकालियों को उनके कुकर्मों की लंबी सूची के लिए लोग कभी भी माफ नहीं करेंगे।

इस दौरान विधायी कार्रवाई की रूपरेखा पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आप सरकार ने जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2008 में संशोधन के लिए 13 अप्रैल को पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। उन्होंने आगे कहा कि पवित्र ग्रंथ की बेअदबी की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम 10 साल और उम्रकैद तक की सख्त सजा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार ने कानून बनाने के लिए अनुभवी कानूनी विशेषज्ञों की सहायता ली है और इस संबंध में संत समाज से भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।

अकाली नेतृत्व पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ये अवसरवादी नेता हैं, जो अपनी सुविधा और निजी राजनीतिक हितों के अनुसार गिरगिट की तरह रंग और रुख बदलते रहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हर कोई जानता है कि यह परिवार अंग्रेजों का समर्थक रहा है और देशभक्तों के खिलाफ अंग्रेजों का साथ देने के लिए इस परिवार को ‘सर’ की उपाधि से नवाजा गया था। उन्होंने आगे कहा कि इस परिवार ने 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग हत्याकांड के दोषी जनरल डायर के लिए इस घिनौनी घटना के बाद रात के खाने की मेजबानी की थी।

उन्होंने कहा, “इस कार्रवाई ने उनकी देश-विरोधी और पंजाब-विरोधी मानसिकता को उजागर किया है।” उन्होंने आगे कहा, “सिर्फ यही नहीं, परिवार ने जनरल डायर को श्री हरिमंदिर साहिब में सिरोपा भेंट करने और माफी दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई थी।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “यह और भी हैरान करने वाली बात है कि सिरोपा भेंट करने वाले जत्थेदार अरूड़ सिंह, पूर्व लोकसभा सदस्य सिमरजीत सिंह मान के नाना थे।”

इतिहास का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा, “बादल परिवार के पूर्वजों के दोहरे चरित्र का सच इतिहास के पन्नों में दर्ज है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता।” उन्होंने आगे कहा, “इस परिवार के हाथ देशभक्तों के खून से रंगे हैं और राष्ट्रवादियों की पीठ में छुरा घोंपने से लेकर कौम के साथ विश्वासघात करने तक उनकी भूमिका को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।”

कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कांग्रेस में हर नेता राज्य का मुखिया बनना चाहता है। उनके पास कार्यकर्ताओं से ज्यादा मुख्यमंत्री हैं।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनके शीर्ष नेता ने हाल ही में एक रैली के दौरान उन्हें सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “कांग्रेस एक विभाजित पार्टी है, जो आंतरिक खींचतान के कारण बिखरने के कगार पर है।” उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें एकजुट करने के लिए भेजे गए नेताओं को उनके नाम तक सही से बोलना नहीं आता।”

2027 के चुनाव की रूपरेखा के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों के पास चुनने के लिए तीन कलमें होंगी।” उन्होंने कहा, “पहली कलम कांग्रेस की है, जिसकी स्याही श्री हरिमंदिर साहिब पर हमले, 1984 के दंगों और अन्य सिख-विरोधी रुख का प्रतीक है। इसी तरह दूसरी कलम अकालियों की है, जिसमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की स्याही है।” उन्होंने जोर देते हुए कहा, “तीसरी कलम आप की है, जो जन-हितैषी और विकासशील पहलों के जरिए राज्य को फिर से रंगला पंजाब बनाकर इसकी शान बहाल कर रही है।”

सुशासन के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार ने कई जन-हितैषी पहलें की हैं, जिससे राज्य की बदली हुई तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।” उन्होंने आगे कहा, “लोगों के टैक्स का पैसा बहुत समझदारी से जनता की भलाई पर खर्च किया जा रहा है। यह पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के उन्नयन के माध्यम से फिर से राज्य पर ही लगाया जा रहा है।”

सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमने 90 फीसदी घरों को मुफ्त बिजली प्रदान की है, बिना किसी भ्रष्टाचार के 65,000 से अधिक नौकरियां दी हैं, सड़कों में सुधार किया है, टोल प्लाजा बंद किए हैं, जिससे रोजाना 70 लाख रुपये की बचत हो रही है और बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है।” उन्होंने आगे कहा, “नहरी पानी का उपयोग 22 फीसदी से बढ़कर 71 फीसदी हो गया है और आने वाले धान के सीजन तक 90 फीसदी तक पहुंच जाएगा।”

शिक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुफ्त सुविधाएं गरीबी को खत्म नहीं कर सकतीं। शिक्षा ही एकमात्र साधन है, जिसके जरिए लोगों को ऊपर उठाया जा सकता है।” उन्होंने आगे कहा, “विद्या वह प्रकाश है जो अंधकार को दूर करता है, इसलिए हम शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं।”

स्वास्थ्य देखभाल के बारे में भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 65 लाख परिवारों को स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हर परिवार 10 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज का हकदार है, जिसमें 30 लाख से अधिक कार्ड जारी किए जा चुके हैं और अब तक 1.65 लाख इलाज प्रदान किए जा चुके हैं।” उन्होंने लोगों से ऐसी लाभकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाने की अपील भी की।

बिजली आपूर्ति के बारे में उन्होंने कहा, “पहली बार धान के सीजन के दौरान खेतों के ट्यूबवेलों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली आपूर्ति दी गई है।” उन्होंने आगे कहा, “किसानों को दिन के समय बिजली मिल रही है, जिससे उनके जीवन में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है।” उन्होंने दोहराया, “सरकारी खजाने का एक-एक पैसा जनता के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।”

सामाजिक कल्याण का उल्लेख करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “मावां-धीयां सत्कार सम्मान योजना के तहत महिलाओं को प्रति माह 1000 रुपये और 18 साल से अधिक उम्र की अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1500 रुपये दिए जा रहे हैं।”

सभा को संवाद का न्योता देते हुये भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह कोई राजनीतिक रैली नहीं, बल्कि लोगों से जुड़ने का वास्तविक मंच है।” उन्होंने आगे कहा, “पिछली सरकारों ने लोगों का विश्वास तोड़ा और राज्य को लूटा, लेकिन बाद में लोगों ने बदलाव के लिए वोट दिया, जिससे स्कूलों, अस्पतालों और अन्य क्षेत्रों में परिवर्तन आया।”

जैतो की ऐतिहासिक धरती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “इस पवित्र भूमि ने हमेशा इतिहास रचा है और पंजाब की किस्मत में इसकी उपजाऊ धरती का बड़ा योगदान रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “पारंपरिक नेता चांदी के चम्मच लेकर पैदा हुए थे और उन्होंने देश के लिए न कभी कुछ किया और न ही कोई कठिनाई झेली।” उन्होंने कहा, “वे मानते रहे कि उनके पास शासन करने का दैवी अधिकार है, लेकिन लोकतंत्र में जनता ही सर्वोच्च होती है।”

सुखबीर सिंह बादल पर निशाना साधते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “शिक्षा और कल्याण पर चर्चा करने के बजाय वे भैंसों की बात करते हैं, जो एक संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है।” उन्होंने आगे कहा, “कई अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने राज्य को लूटा और इसी कारण लोगों ने उन्हें नकार दिया।”

विपक्ष के आचरण की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कहा, “वास्तविक मुद्दे उठाने के बजाय वे आरोप-प्रत्यारोप और कीचड़ उछालने में लगे हैं और राज्य के कीमती संसाधनों को लूटने के अपने अवसर का इंतजार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल करना है, जनता का कल्याण नहीं।”

‘आप’ के एजेंडे को दोहराते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और कृषि की बात करते हैं, जबकि अन्य सत्ता हथियाने की रणनीतियों में लगे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उनका एजेंडा परिवार का कल्याण है, हमारा जनता का कल्याण।” उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों के कुशासन के कारण लोगों ने आम आदमी पार्टी को चुना, जो लगातार मेहनत कर रही है।”

लोगों को पिछली सरकारों की याद दिलाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान कहा, “पारंपरिक पार्टियां कभी भी पंजाब के प्रति वफादार नहीं रहीं।” उन्होंने आगे कहा, “वे ईर्ष्या करते हैं क्योंकि ‘आप’ ने कल्याण का एजेंडा तय किया है।” उन्होंने आगे कहा, “सुखबीर सिंह बादल को पंजाब की बुनियादी भौगोलिक स्थिति के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।”

अन्य नेताओं पर निशाना साधते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनका परिवार लगातार पंजाब विरोधी ताकतों के साथ खड़ा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “आप व्यवस्था बदलने के लिए बनाई गई थी और इसके नेतृत्व में पंजाब शिक्षा और स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है।”

राष्ट्रीय मुद्दों पर भगवंत सिंह मान ने कहा, “देश पर शासन करने वालों को जनता के कल्याण की जानकारी नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “देश का नेतृत्व एक ऐसे व्यक्ति कर रहे हैं जो अधिक समय विदेशों में बिताते हैं और जमीनी हकीकत से दूर हैं।” उन्होंने कहा, “एलपीजी और तेल संकट का अनुमान पहले ही लगाया जाना चाहिए था।”

इससे पहले, ‘आप’ पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा, “यह बहुत गर्व की बात है कि भगवंत सिंह मान सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री साबित हुए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “वे जनता के कल्याण के लिए काम करने वाले एकमात्र मुख्यमंत्री हैं और पार्टी बड़े बहुमत के साथ फिर से सत्ता में आएगी।”

इस दौरान स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर और डॉ. बलबीर सिंह सहित अन्य लोग भी मौजूद थे।

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पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, निजी स्कूलों की मनमानी पर लगेगी लगाम; 5% से अधिक फीस वृद्धि पर रोक

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पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश को मंजूरी दी गई, जिसके तहत अब राज्य के निजी स्कूल हर साल 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।

कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि सरकार का उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत देना और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नए नियमों के लागू होने के बाद फीस वृद्धि को नियंत्रित किया जाएगा और निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि सरकार अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उनसे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करवाई जाएगी।

सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। नए नियमों के तहत प्राथमिक स्कूलों पर 50 हजार रुपये तक, हाई स्कूलों पर 2 लाख रुपये तक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

पंजाब सरकार का कहना है कि यह फैसला लाखों अभिभावकों को राहत देने वाला साबित होगा। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी तथा शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।

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पहली जुलाई को हर महिला के खाते में डाली जाएगी तीन महीने की ‘मांवां-धीयां सत्कार राशि’: CM भगवंत सिंह मान

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महिला आर्थिक सशक्तिकरण की ओर ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने घोषणा की कि ‘मांवां-धीयां सत्कार योजना’ के लिए उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और पहली जुलाई को महिलाओं के बैंक खातों में सीधे तीन महीने की सम्मान राशि की पहली किस्त जमा कर दी जाएगी। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति की माओं-बहनों को ₹4,500 मिलेंगे, जबकि बाकी सभी श्रेणियों की महिलाओं को ₹3,000 दिए जाएंगे।

फतेहगढ़ साहिब हलके के गांव चनारथल कलां में विभिन्न विकास कार्यों का उद्घाटन करने के बाद ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह पहल महिलाओं के सम्मान, वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए ‘आप’ सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि जब तक पंजाब में ‘आप’ सरकार रहेगी, यह सहायता बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।

फतेहगढ़ साहिब में ‘लोक मिलनी’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नौ दिन बाद पहली जुलाई को 18 साल से अधिक उम्र की महिला लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर उनके खातों में वित्तीय सहायता जमा होने के नोटिफिकेशन प्राप्त होंगे। जनरल श्रेणी से संबंधित महिलाओं को ₹1,000 प्रति माह, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह मिलेंगे। यह पैसा बिना किसी मध्यस्थ के सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। जो महिलाएं पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रही हैं, वे भी इस योजना के पात्र होंगी। पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस पहल का लाभ मिलने की उम्मीद है और पंजाब सरकार ने इसके लिए ₹9,300 करोड़ का बजट प्रावधान किया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह वित्तीय सहायता शायद महिलाओं को अमीर न बनाए, लेकिन यह निश्चित रूप से उन्हें सम्मान, स्वाभिमान और आत्म-विश्वास देगी। महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं क्योंकि वे स्वयं जीवन की स्रोत हैं। माताओं-बहनों के आशीर्वाद दुनिया की हर चुनौती को पार करने में मदद करते हैं। घरेलू दर्जे को सुधारने, लिंग समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक तथा आर्थिक फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत करना बहुत जरूरी है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं तो परिवार खुशहाल होते हैं और समाज आगे बढ़ता है।”

एक अन्य मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भारत चुनाव आयोग द्वारा चल रही एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान पंजाब सरकार किसी भी असली वोट को काटने नहीं देगी। मैं लोगों को सचेत करना चाहता हूं कि भाजपा वैध वोटों को काटने के लिए एस.आई.आर. प्रक्रिया का दुरुपयोग करने की कोशिश कर सकती है, जैसा कि चुनाव वाले अन्य राज्यों में हुआ है। हालांकि, हम पूरी तरह से सतर्क हैं और भगवा पार्टी के नापाक इरादों को सफल नहीं होने देंगे। पंजाब के हर असली मतदाता की रक्षा की जाएगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझसे पहले के मुख्यमंत्री कभी भी आम लोगों से नहीं मिले। वे तापमान चेक करने के बाद ही अपने आलीशान घरों से बाहर आते थे। दूसरी तरफ मैं 24 घंटे लोगों के लिए मौजूद रहता हूं। जनता की सेवा मेरे लिए कोई कभी-कभी की जाने वाली गतिविधि नहीं है, यह मेरी जिम्मेदारी है।”

पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन नेताओं ने अपने सरकारी पदों का दुरुपयोग करके अथाह संपत्ति इकट्ठी की और बड़े-बड़े महल बनाए। उनकी आलीशान रिहायशों की दीवारें ऊंची थीं और उनके दरवाजे आम लोगों के लिए बंद रहते थे। वे जनता की पहुंच से दूर रहे और आखिरकार लोगों ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। जब नेता लोगों की बात सुनना बंद कर देते हैं तो लोग भी आखिरकार उन नेताओं को सुनना बंद कर देते हैं।”

“पंजाब के लोगों ने उन लोगों को बार-बार नकारा है, जिन्होंने उन्हें बारी-बारी से लूटा। इन नेताओं ने आम लोगों को लंबे समय तक मूर्ख बनाया, लेकिन पंजाबी अब इतने अकलमंद हो गए हैं कि वे ऐसे लोगों के भ्रमित करने वाले प्रचार से प्रभावित नहीं होते। इन हौव्वे से भरे सियासतदानों ने हमेशा पंजाब के लोगों को हल्के में लिया, जिसकी वजह से अंत में उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी। आज ये नेता निराशा की स्थिति में हैं क्योंकि लोग उन्हें कोई साथ नहीं दे रहे।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ऐसे नेताओं का पूरा एजेंडा शुरू से ही लोगों की भलाई की बजाय अपने परिवारों के हितों के लिए रहा है।

पिछली सरकारों के नेताओं पर शाब्दिक हमला जारी रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “ये नेता पहाड़ों के कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़े हैं, जो जमीनी हकीकतों से पूरी तरह अनजान हैं। ये नेता अपने पैसों, जायदादों और यहां तक कि अपनी बसों से भी अनजान रहे हैं। अपने शासनकाल के दौरान इन्होंने सूबे भर के सफल उद्यमों में गैर-कानूनी तरीके से हिस्सेदारी हासिल करके लोगों का शोषण किया। ऐसे कामों ने ही पंजाब को पीछे धकेल दिया। इन नेताओं ने सूबे को बर्बाद कर दिया और इनके हाथ नौजवानों के खून से रंगे हुए हैं।”

अपनी सरकार के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब का विकास फिर से पटरी पर आ गया है। पंजाब सरकार हर आते दिन अपनी विकास की गति को तेज कर रही है। उन्होंने कहा कि हमने लगभग सत्तर सालों के खालीपन को पाटा है और रंगला पंजाब बनाने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं।”

“आप सरकार शायद देश की पहली ऐसी सरकार है जो जनता के घोषणापत्र को सही मायनों में लागू कर रही है। लोगों द्वारा उठाई गई हर वास्तविक और जायज़ मांग को पूरा किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि हम केवल चुनाव जीतने के लिए वादे नहीं करते, बल्कि जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्हें पूरा भी करते हैं।

शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सुखबीर सिंह बादल पंजाब की जमीनी हकीकतों से कोसों दूर हैं, क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन ऐशो-आराम और सुविधाओं के वातावरण में बिताया है। वे पंजाब में सत्ता हासिल करने के लिए तो उतावले हैं, लेकिन उन्हें राज्य की मूलभूत भौगोलिक स्थिति तक की जानकारी नहीं है।”

उन्होंने कहा कि यदि यह बात भी छोड़ दी जाए, तो पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब में उगाई जाने वाली सामान्य फसलों के बीच का अंतर भी नहीं बता सकते। उन्हें आम लोगों से जुड़े मुद्दों की बहुत कम समझ है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जो व्यक्ति पंजाब को समझता ही नहीं, वह अपने नेतृत्व में राज्य को आखिर कैसे चला सकता है?”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “इन नेताओं द्वारा किए गए पाप क्षमा योग्य नहीं हैं। पंजाब के लोग इनके कुकर्मों के लिए इन्हें कभी माफ नहीं करेंगे। इन नेताओं ने पंजाब के सीने पर जो घाव दिए हैं, वे आज भी लोगों के मन में ताज़ा हैं।” उन्होंने कहा, “ये अवसरवादी नेता हैं, जो अपनी सुविधा और राजनीतिक हितों के अनुसार गिरगिट की तरह रंग और रुख बदल लेते हैं। इन्होंने पंजाब में गैंगस्टरों को संरक्षण दिया और नशा तस्करों को बचाकर युवाओं की नसों में नशा भरने का काम किया। पंजाब के लोग इसे कभी नहीं भूलेंगे।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अकाली नेतृत्व एक बार फिर पंजाब के लोगों को गुमराह करने के लिए हवाई किले बना रहा है। हालांकि, पंजाब के लोग ऐसे भ्रामक प्रचार से प्रभावित नहीं होंगे। लोग अकालियों को उनके पापों के लिए कभी माफ नहीं करेंगे और एक बार फिर उन्हें उचित सबक सिखाएंगे।”

जगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन अधिनियम, 2026 का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं परमात्मा का आभारी हूं, जिसने मुझे यह ऐतिहासिक कानून लागू करने का अवसर दिया। पिछली सरकारों के दौरान जब भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं हुईं, तब दुनिया भर में करोड़ों श्रद्धालुओं और सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची।”

उन्होंने कहा, “सर्वशक्तिमान परमात्मा ने मुझे कानूनी विशेषज्ञों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह विधेयक लाने की समझ और शक्ति प्रदान की। हमने इस कानून का मसौदा पूरी सावधानी और गहराई से तैयार किया है ताकि भविष्य में कोई संशोधन या कानूनी खामी इसे कमजोर न कर सके। यह कानून समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ एक मजबूत निवारक के रूप में काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में कोई भी ऐसा घृणित अपराध करने का साहस न कर सके।”

उन्होंने कहा, “वर्षों से लोग यह कहकर सजा से बचते रहे हैं कि वे मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं या मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं। ऐसी दलीलों का अक्सर जवाबदेही से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है और अपराधी खुलेआम घूमते रहे। हमने कानून बनाते समय इस मुद्दे को गंभीरता से ध्यान में रखा है।”
ऐसे दावों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यदि कोई वास्तव में मानसिक रूप से बीमार है, तो वह केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही क्यों निशाना बनाता है? वह रेल इंजन के नीचे क्यों नहीं आ जाता या बिजली की तारों को क्यों नहीं पकड़ता? सच्चाई यह है कि ऐसी अनेक घटनाएं जानबूझकर और सुनियोजित ढंग से की गई थीं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “इसीलिए हमने कानून में यह प्रावधान शामिल किया है कि यदि किसी व्यक्ति को चिकित्सकीय रूप से मानसिक रोगी घोषित किया गया हो, तो उसके माता-पिता, अभिभावक या देखभाल करने वाले भी आपराधिक आरोपों का सामना करेंगे। सजा से बचने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए कोई ढील नहीं होगी।” अकाली नेतृत्व पर एक और हमला करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “जब वे सत्ता में थे, तब उन्होंने कभी भी ऐसा कानून बनाने के प्रति ईमानदारी नहीं दिखाई। सच्चाई यह है कि उनके इरादे ही गलत थे। उनके कार्यकाल में बेअदबी की घटनाएं हुईं और वे न्याय दिलाने में पूरी तरह विफल रहे। उन्होंने ऐसी घटनाओं को इसलिए होने दिया क्योंकि वे उनसे राजनीतिक लाभ प्राप्त करना चाहते थे।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष अपनी गलतियां स्वीकार कीं, लेकिन बाद में सार्वजनिक रूप से उनसे मुकर गए। जो लोग तख्त के सामने झूठ बोल सकते हैं, वे किसी के भी वफादार नहीं हो सकते। लोगों को ऐसे नेताओं से सावधान रहना चाहिए जिनका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल करना और राज्य को लूटना है।” मुख्यमंत्री ने कहा, “अकालियों ने अपने निजी हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया। जत्थेदारों की नियुक्तियां अकालियों की पसंद और प्रभाव से की जाती हैं, इसलिए उनमें से कई राजनीति में सक्रिय हैं। इन लोगों के पास पंजाब के लिए कोई एजेंडा नहीं है। उनका एकमात्र उद्देश्य किसी भी तरह मुझे बदनाम करना है। हालांकि, लोग उनके वास्तविक चरित्र को जानते हैं और उनकी ऐसी नाटकबाजियों से कभी प्रभावित नहीं होंगे।”

कांग्रेस पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कांग्रेस पार्टी अपनी अंतिम सांसें गिन रही है और जल्द ही अप्रासंगिक हो जाएगी, क्योंकि उसके पास पंजाब के लिए न कोई दृष्टिकोण है और न ही भविष्य के लिए कोई रोडमैप। उसका एकमात्र उद्देश्य सत्ता हासिल करना और राज्य की संपत्ति को लूटना है, लेकिन उसका यह सपना कभी पूरा नहीं होगा।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस गुटबाजी की शिकार है। वह अपने ही आंतरिक संघर्षों के कारण समाप्त हो रही है। विडंबना यह है कि जो वरिष्ठ कांग्रेसी नेता इन झगड़ालू गुटों को एकजुट करने के लिए पंजाब आते हैं, उन्हें उन नेताओं के नामों का सही उच्चारण तक नहीं आता, जिनमें वे समझौता कराने की कोशिश कर रहे होते हैं। आज पार्टी की यही स्थिति है।”

राज्य सरकार की जनकल्याणकारी पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरकारी खजाने का एक-एक पैसा लोगों के कल्याण पर खर्च किया जा रहा है। पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। किसानों को दिन के समय बिजली आपूर्ति दी जा रही है, जो पहले कभी नहीं हुई।” मुख्यमंत्री ने कहा, “एक ऐसे समय में जब देशभर में सार्वजनिक संपत्तियों को केंद्र सरकार द्वारा चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों को बेहद कम कीमतों पर सौंपा जा रहा है, पंजाब सरकार ने एक निजी थर्मल प्लांट खरीदकर और उसका नाम श्री गुरु अमरदास जी के नाम पर रखकर इतिहास रचा है। यह सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा और लोगों की सेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की है, जो देश में अपनी तरह की पहली योजना है। इसके तहत पंजाब के प्रत्येक निवासी परिवार को 10 लाख रुपये तक का कैशलेस चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह अत्यंत गर्व और संतोष की बात है कि पंजाब भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने इतनी व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की है। इस ऐतिहासिक पहल ने परिवारों पर आर्थिक बोझ को काफी कम किया है और सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की हैं। इस योजना का उद्देश्य पंजाब के प्रत्येक परिवार को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करना है और अब तक लोग इस योजना के तहत 650 करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त इलाज प्राप्त कर चुके हैं।”

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CM भगवंत सिंह मान ने बढ़ते केंद्रीकरण और शैक्षिक असमानता की चिंताओं को लेकर केंद्र से उच्च शिक्षा विधेयक पर पुनर्विचार करने की अपील की

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रस्तावित ‘विकसित भारत शिक्षा अधिनियम विधेयक, 2025’ (उच्च शिक्षा विधेयक) का जोरदार विरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कानून उच्च शिक्षा को और महंगी बना सकता है, आम परिवारों के विद्यार्थियों के लिए अवसरों को कम कर सकता है और स्थानीय शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने की राज्यों की क्षमता को खोखला कर सकता है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखे एक पत्र में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र से इस विधेयक पर पुनर्विचार करने और ऐसे सुधारों को लागू करने से पहले व्यापक विचार-विमर्श करने की अपील की है, जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकते हैं।

देश भर के करोड़ों माता-पिता के अपने बच्चों की शिक्षा पर उम्मीदें और सपने टिकाए रखने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उच्च शिक्षा किसी किसान, मजदूर या दुकानदार के बच्चे के लिए अवसरों का मार्ग होनी चाहिए, न कि परिवारों पर आर्थिक बोझ। उन्होंने दावा किया कि भारत की प्रगति उच्च शिक्षा को विश्वविद्यालयों, बुनियादी ढांचे, फैकल्टी और अनुसंधान में अधिक निवेश के माध्यम से अधिक सुलभ और किफायती बनाने पर निर्भर करती है, न कि ऐसे उपायों पर जो लागतों को बढ़ाते हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया का केंद्रीकरण करते हैं।

अपने पत्र में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा कि वे न केवल पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में बल्कि भारत भर के उन करोड़ों माता-पिता के प्रतिनिधि के रूप में लिख रहे हैं, जिनकी सबसे बड़ी उम्मीदें उनके बच्चों की शिक्षा से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा, “हर परिवार चाहता है कि उसका बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे, अपने पैरों पर खड़ा हो, सम्मानजनक रोजगार प्राप्त करे और देश की प्रगति में योगदान दे। इसी कारण शिक्षा केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं है, यह भारत के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा सवाल है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे शुरू में उम्मीद थी कि प्रस्तावित कानून उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता, जवाबदेही और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेगा। हालांकि विधेयक का बारीकी से अध्ययन करने के बाद मुझे गंभीर खतरा है कि यह उच्च शिक्षा से संबंधित अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णयों का केंद्रीकरण करने की कोशिश करता है, जिसके विद्यार्थियों, शिक्षकों, विश्वविद्यालयों और राज्य सरकारों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे।”

अपनी पहली बड़ी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह विधेयक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने की बजाय सत्ता के केंद्रीकरण पर अधिक केंद्रित प्रतीत होता है। उन्होंने कहा, “किसी भी शिक्षा प्रणाली की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं को कितने प्रभावी ढंग से समझती है। भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में हर राज्य को अलग-अलग सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा के बारे में किसी कानून से यह उम्मीद करना स्वाभाविक था कि वह गुणवत्ता, अनुसंधान, नवाचार, रोजगार योग्यता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर ध्यान केंद्रित करेगा। हालांकि विधेयक का अध्ययन करने के बाद ऐसा लगता है कि इसका मुख्य उद्देश्य नीति निर्माण की शक्तियों, मानकों, नियमों, मान्यता प्रणालियों और अपीलीय शक्तियों को केंद्र सरकार के हाथों में केंद्रित करना है। उन्होंने कहा, “शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है। इसलिए जहां न्यूनतम राष्ट्रीय मानक आवश्यक हो सकते हैं, वहीं राज्यों को अपनी परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुसार प्रणालियां विकसित करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। दुर्भाग्यवश यह विधेयक उस संवैधानिक संतुलन को बिगाड़ता प्रतीत होता है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि उनकी चिंता केवल राज्यों के अधिकारों की नहीं, बल्कि करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य की भी है। उन्होंने कहा, “भारत का हर राज्य अलग-अलग चुनौतियों से जूझ रहा है। कोई बेरोजगारी से निपट रहा है, कोई कौशल विकास, औद्योगिक आवश्यकताओं या प्रवासन से जूझ रहा है। पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्यों को इससे भी अधिक जटिल वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकारें विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के माध्यम से स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम, कौशल कार्यक्रम, औद्योगिक साझेदारी और रोजगारोन्मुखी पहलकदमियां विकसित करती हैं। उन्होंने कहा, “यदि शिक्षा के अधिकांश निर्णय दिल्ली में बैठी संस्थाओं द्वारा लिए जाएंगे तो राज्य धीरे-धीरे स्थानीय वास्तविकताओं को समझने और उसके अनुसार समाधान तैयार करने की अपनी क्षमता खो देंगे। परिणामस्वरूप, उच्च शिक्षा के केंद्रीकृत होने और इसकी व्यावहारिक महत्ता समाप्त होने का खतरा है।”

बढ़ते केंद्रीकरण के खतरों की ओर ध्यान दिलाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) जैसी केंद्रीय संस्थाओं के कामकाज का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “हाल के वर्षों में परीक्षा प्रबंधन, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जब केंद्रीय संस्थाएं स्वयं ऐसी चुनौतियों से जूझ रही हैं तो यह पूछना बिल्कुल उचित है कि क्या उच्च शिक्षा का और अधिक केंद्रीकरण करना सचमुच सही दिशा है।”

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच अधिक सहयोग ही बेहतर रास्ता है। उन्होंने कहा, “विभिन्न राज्यों द्वारा विकसित किए गए सफल मॉडलों को पूरे देश में साझा किया जाना चाहिए। निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक सहभागी और सहयोगात्मक होनी चाहिए। दुर्भाग्यवश यह विधेयक विपरीत दिशा में जाता हुआ दिखाई दे रहा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने यह चिंता भी व्यक्त की कि प्रस्तावित कानून उच्च शिक्षा को और अधिक महंगा बना सकता है। उन्होंने सवाल किया, “विधेयक का अध्ययन करते समय मेरे सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न उभरा। यदि अधिकांश शक्तियां केंद्र सरकार के पास केंद्रित हो जाती हैं, यदि राज्य सरकारों की भूमिका लगातार सीमित होती जाती है और यदि राज्य विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों पर केंद्रीय नियामक नियंत्रण बढ़ता है, तो इन संस्थानों के संचालन और विकास के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन कहां से आएंगे?”

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि विधेयक इस प्रश्न का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं देता। उन्होंने कहा, “यदि निर्णय लेने की शक्तियों का केंद्रीकरण किया जाता है, जबकि आवश्यक वित्तीय सहायता की कोई गारंटी नहीं है, तो विश्वविद्यालयों पर अनिवार्य रूप से राजस्व बढ़ाने का दबाव पड़ेगा। इससे फीस में वृद्धि हो सकती है, स्व-वित्तपोषित (सेल्फ-फाइनेंस्ड) पाठ्यक्रमों पर निर्भरता बढ़ सकती है और निजी निवेश पर निर्भरता भी बढ़ सकती है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चेतावनी दी कि ऐसे मॉडल का सबसे अधिक बोझ मध्यम वर्ग, निम्न-मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “उच्च शिक्षा अवसरों का एक माध्यम होनी चाहिए। यह ऐसा विशेषाधिकार नहीं बनना चाहिए, जो केवल उन्हीं को उपलब्ध हो जो इसका खर्च उठा सकते हैं।”

मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा के धीरे-धीरे हो रहे निजीकरण को लेकर भी चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, “विधेयक का अध्ययन करने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को धीरे-धीरे ऐसे मॉडल की ओर धकेला जा सकता है, जहां सरकारी संस्थान कमजोर हो जाएंगे और निजी क्षेत्र पर निर्भरता लगातार बढ़ती जाएगी।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नीति निर्माण, नियमों और नियंत्रण का पूर्ण केंद्रीकरण बिना किसी स्पष्ट वित्तीय जिम्मेदारी के किया जाता है, तो सरकारी विश्वविद्यालयों को निजी संस्थानों और निजी पूंजी पर निर्भर होने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “ऐसे बदलाव का सीधा प्रभाव लाखों विद्यार्थियों पर पड़ेगा, जिनके माता-पिता उन्हें कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाने के लिए लगातार बड़ी-बड़ी कुर्बानियां दे रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा कि भारत जैसे देश में उच्च शिक्षा को आर्थिक बाधाओं से सीमित करने के बजाय एक अधिकार के रूप में मजबूत किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह इस विधेयक के वर्तमान स्वरूप को वापस ले और इसकी व्यापक समीक्षा करे। उन्होंने कहा, “भारत को ऐसे कानून की आवश्यकता नहीं है, जो उच्च शिक्षा का और अधिक केंद्रीकरण करे। हमें ऐसे ढांचे की आवश्यकता है जो विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को उनके क्षेत्रों, उद्योगों, समाजों और युवाओं की आवश्यकताओं से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने की अनुमति दे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उच्च शिक्षा की अधिकांश संस्थाएं राज्य सरकारों द्वारा स्थापित, संचालित और वित्तीय रूप से समर्थित होती हैं। इसलिए सुधारों को ऐसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जो राज्यों को अधिक अधिकार, अधिक लचीलापन और अधिक जिम्मेदारी प्रदान करे। उन्होंने कहा, “राज्यों को अपने युवाओं की आकांक्षाओं और आवश्यकताओं के अनुरूप शैक्षणिक प्रणालियां विकसित करने के लिए सशक्त बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही केंद्र सरकार को नियामक नियंत्रण बढ़ाने के बजाय उच्च शिक्षा में निवेश बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (ग्रॉस एनरोलमेंट रेशो )को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा, “उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी संस्थानों को अधिक संसाधनों, मजबूत बुनियादी ढांचे, आधुनिक प्रयोगशालाओं, गुणवत्तापूर्ण फैकल्टी और आवश्यक अनुसंधान निधियों की आवश्यकता है। उन्हें नियंत्रण की अतिरिक्त परतों की आवश्यकता नहीं है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यदि केंद्र सरकार वास्तव में भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना चाहती है, तो उसे प्रशासनिक केंद्रीकरण की बजाय शैक्षणिक निवेश को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालयों को अतिरिक्त नियंत्रण देने के बजाय संसाधन, स्वायत्तता और अवसर दिए जाने चाहिए। यह केवल केंद्र-राज्य संबंधों का प्रश्न नहीं है। यह करोड़ों विद्यार्थियों, उनके परिवारों और भारत के भविष्य से जुड़ा हुआ प्रश्न है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्रगति आम परिवारों के सपनों को साकार करने पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, “जब किसी किसान का बेटा इंजीनियर बनता है, जब किसी मजदूर की बेटी डॉक्टर बनती है और जब किसी छोटे दुकानदार का बच्चा वैज्ञानिक बनता है, तब भारत आगे बढ़ता है। हमारी शिक्षा व्यवस्था को ऐसे सपनों को साकार करना आसान बनाना चाहिए, न कि अधिक कठिन।”

अपनी अपील दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार से विधेयक वापस लेने और इसके स्थान पर ऐसा ढांचा लाने की मांग की, जो शिक्षा को अधिक सुलभ, किफायती, उच्च गुणवत्ता वाली और राज्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए। उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “देश शिक्षा पर नियंत्रण करके महान नहीं बनते। देश शिक्षा में निवेश करके महान बनते हैं।”

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