Chandigarh
चंडीगढ़ में अगले माह से महंगी होंगी जमीनें:कलेक्टर रेट में 30 से 60% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव, 1 अप्रैल से लागू करने की तैयारी
चंडीगढ़ में एक बार फिर प्रॉपर्टी महंगी होने जा रही है। चंडीगढ़ प्रशासन ने कलेक्टर रेट बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। डीसी निशांत यादव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें कलेक्टर रेट संशोधित करने के लिए एक कमेटी गठित की गई।
प्रशासन ने शहर के अलग-अलग इलाकों के अनुसार कलेक्टर रेट में 30 से 60 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित नए रेटों को लेकर अगले सप्ताह ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा, जिसमें आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी।
1 अप्रैल से लागू हो सकते हैं नए रेट
प्रशासन के अनुसार, लोगों से सुझाव लेने के बाद अंतिम नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा। योजना है कि नए कलेक्टर रेट 1 अप्रैल से लागू कर दिए जाएं। पिछले साल भी कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की गई थी। इससे पहले वर्ष 2021 और 2017 में संशोधन हुआ था।
ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से चार गुना तक बढ़ोतरी
सूत्रों के मुताबिक, नए प्रस्ताव के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के रेट तीन से चार गुना तक बढ़ सकते हैं। वहीं कई सेक्टरों में रेट डेढ़ गुना तक बढ़ाने की तैयारी है। कलेक्टर रेट बढ़ने से प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री महंगी होगी, क्योंकि स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क इन्हीं रेटों के आधार पर तय होते हैं। ऐसे में रियल एस्टेट बाजार और आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
संभावना है कि रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर कुछ संगठनों और प्रॉपर्टी मालिकों की ओर से विरोध भी किया जा सकता है।
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ट्रिब्यून चौक पर अगले महीने से बनेगा फ्लाईओवर:सिंगला कंपनी को मिला 147.98 करोड़ का ठेका, चंडीगढ़ को जाम से मिलेगी राहत
शहर के सबसे व्यस्त ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर निर्माण की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय बोलियां (Financial Bids) खोल दी गई हैं, जिसमें सिंगला कंस्ट्रक्शंस लिमिटेड ने यह काम लिया है।
कंपनी ने 147.98 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाकर ठेका लिया है। यह रकम प्रशासन की अनुमानित लागत 214.66 करोड़ रुपये से करीब 31 प्रतिशत कम है। अब केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से अनुमति मिलते ही अगले महीने से काम शुरू हो जाएगा।
12 कंपनियों ने किया था आवेदन
इस प्रोजेक्ट के लिए देश की 12 निर्माण कंपनियों ने आवेदन किया था। जांच के बाद 8 कंपनियां तकनीकी रूप से फिट पाई गईं। 4 कंपनियों के टेंडर तकनीकी मानकों पर खरा न उतरने के कारण खारिज कर दिए गए।
1.6 किलोमीटर का होगा कॉरिडोर
अधिकारियों के अनुसार, यह सिर्फ एक फ्लाईओवर नहीं बल्कि एक इंटीग्रेटेड कॉरिडोर होगा, जिसे 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। यह 1.65 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर होगा। फ्लाईओवर की लंबाई 1442 मीटर है। इसमें 519 मीटर का अंडरपास बनेगा।
8 साल से अटका था मामला
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2016 में हुई थी और 2019 में इसे आधिकारिक मंजूरी मिली थी। लेकिन पर्यावरण प्रेमियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी थी, जिससे यह प्रोजेक्ट 5 साल तक ठंडे बस्ते में रहा। अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद अब इसके निर्माण का रास्ता साफ हुआ है।
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‘चंडीगढ़ में बीजेपी ऑफिस के बाहर हमले के लिए गृह मंत्री जिम्मेदार’, CM भगवंत मान ने किया पलटवार
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को चंडीगढ़ में भाजपा मुख्यालय के बाहर हुए हमले के लिए केंद्र सरकार खास कर गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र के नियंत्रण में आने वाले केंद्र शासित प्रदेश को सियासी दुष्प्रचार का आधार बनाकर इस्तेमाल करना पूरी तरह गलत है। इस घटना की जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्र सरकार की है और अगर इस घटना को मुझ पर थोपने की कोशिश की जा रही है तो केंद्र को अपनी ड्यूटी से भागने के बजाय चंडीगढ़ को पंजाब सरकार के हवाले कर देना चाहिए।
गांव चीमा में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर लोक अर्पण करने के मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर कोई जानता है कि चंडीगढ़ का प्रबंधन पंजाब के राज्यपाल द्वारा चलाया जाता है, फिर भी भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार किसान आंदोलन, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में आंदोलन जैसे कई मुद्दों पर सारा दोष मुझ पर थोपने को हमेशा तैयार रहती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर बेबुनियाद और बेतुकी बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पंजाब चंडीगढ़ की मांग करता है तो इसे अलगाववादी विचारधारा बताया जाता है, लेकिन दूसरी तरफ केंद्र सरकार यूटी. चंडीगढ़ में कानून व्यवस्था कायम रखने के अपने फर्ज से हमेशा भागती रही है।
हिमाचल सरकार के एंट्री टैक्स पर पलटवार
कांग्रेस की अगुआई वाली हिमाचल सरकार के एंट्री टैक्स लगाने के फैसले का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ ‘आप’ सरकार टोल टैक्स खत्म करके आम आदमी को राहत दे रही है, जबकि दूसरी तरफ ये लोग आम जनता पर अनाश्वयक एंट्री टैक्स लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह गैर-वाजिब है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा इसका हर स्तर पर जोरदार विरोध किया जाएगा।
किसानों के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा
किसानों की चिंताओं पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं आढ़तियों की जायज मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष उठाऊंगा क्योंकि उनकी सारी मांगें भारत सरकार से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा ये मुद्दे पहले भी बार-बार केंद्र के समक्ष उठाए गए हैं और राज्य सरकार लगातार ऐसा करती रहेगी। उन्होंने कहा कि ‘आप’ सरकार किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए सुचारू और मुश्किल रहित खरीद सुनिश्चित बनाने के लिए दृढ़ है।
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पंजाब में Universal Healthcare Model बना मिसाल, हर परिवार को बिना शर्त 10 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा!
पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए ऐसा मॉडल पेश किया है, जो देश की पारंपरिक योजनाओं से अलग और ज्यादा व्यापक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत अब राज्य के हर परिवार को बिना किसी शर्त के 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बढ़ते इलाज के खर्च के बीच यह योजना लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।
जहां केंद्र सरकार की Ayushman Bharat योजना सीमित पात्रता और 5 लाख रुपये तक के कवर तक ही सीमित है, वहीं पंजाब का यह मॉडल हर निवासी को कवर करता है, चाहे उसकी आय कुछ भी हो। यही कारण है कि इसे Universal Healthcare Model के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें इलाज का अधिकार किसी सूची या शर्त पर नहीं बल्कि जरूरत के आधार पर तय होता है।
वित्तीय दृष्टि से भी पंजाब का यह मॉडल काफी मजबूत माना जा रहा है। केंद्र सरकार जहां 140 करोड़ आबादी के लिए 9,500 करोड़ रुपये का बजट रखती है, वहीं पंजाब सरकार करीब 3 करोड़ लोगों के लिए 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस हिसाब से प्रति व्यक्ति निवेश कई गुना ज्यादा है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर दर्शाता है।
इस योजना के तहत करीब 65 लाख परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। मरीज 2,300 से अधिक इलाज पैकेजों के जरिए दिल की बीमारी, कैंसर, किडनी से जुड़ी समस्याएं, एक्सीडेंट केस और अन्य गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज करवा सकते हैं। इसके लिए 900 से अधिक अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है, जहां कैशलेस सुविधा उपलब्ध है।
योजना का एक बड़ा फायदा इसकी आसान प्रक्रिया भी है। जहां अन्य योजनाओं में पात्रता साबित करने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत होती है, वहीं पंजाब में लोग सिर्फ आधार कार्ड या वोटर आईडी के जरिए आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। इसके लिए सेवा केंद्रों और Common Service Centers के साथ-साथ ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। साथ ही, गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने और रजिस्ट्रेशन कराने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
इस योजना का असर जमीनी स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। कई ऐसे परिवार, जो पहले इलाज के खर्च के कारण परेशान रहते थे, अब बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज करवा पा रहे हैं। यह मॉडल न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रहा है, बल्कि लोगों के जीवन स्तर को भी बेहतर करने में मदद कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि एक सोच में बदलाव है, जहां स्वास्थ्य सेवा को अधिकार के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार का उद्देश्य हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है, ताकि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।
कुल मिलाकर, पंजाब का यह यूनिवर्सल हेल्थकेयर मॉडल देश के लिए एक नई दिशा दिखाता है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित नहीं बल्कि सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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