Punjab
पंजाब के खिलाड़ियों ने दुनिया भर में तिरंगे का मान बढ़ाया, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा पुरस्कार और इनामी राशि से खिलाड़ियों का सम्मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब के इतिहास में बड़े खेल आयोजन के दौरान महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार विजेता 87 खिलाड़ियों और 1,070 पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 32.05 करोड़ रुपये की इनामी राशि से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गांवों से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल मैदानों तक प्रांत में खेलों के लिए व्यापक घोषणाएँ कीं। पंजाब को उभरती खेल शक्ति बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने न केवल ओलंपिक और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को 1-1 करोड़ रुपये से सम्मानित किया बल्कि 9 खिलाड़ियों को नौकरियां भी प्रदान की हैं। पहली बार टूर्नामेंट की तैयारी के लिए 220 खिलाड़ियों को 8.61 करोड़ रुपये की सीधे बैंक खातों के माध्यम से वित्तीय सहायता दी गई।
आज यहां सेक्टर-35 में म्यूनिसिपल भवन में आयोजित समारोह के दौरान खेलों के क्षेत्र में निर्णायक बदलाव का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने वर्ष 2026-27 के लिए 1,763 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक खेल बजट और जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभा को निखारने के लिए 1,300 करोड़ रुपये की लागत से 3,148 ग्रामीण खेल मैदान विकसित करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब पहली बार एशियाई चैंपियनशिप ट्रॉफी की मेजबानी करेगा और एक नवंबर को पंजाब दिवस पर भारत-पाकिस्तान के बीच रोमांचक मुकाबला होगा। पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब, देश के लिए असंख्य चैंपियन पैदा करने के बावजूद पहले कभी भी राज्य को किसी बड़े खेल आयोजन की मेजबानी करने का मौका नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि खेल संघों पर वास्तविक खिलाड़ियों के बजाय राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों का दबदबा रहा।
शानदार सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह दिन पंजाब के लिए ऐतिहासिक पल है क्योंकि 87 खिलाड़ियों को प्रतिष्ठित महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि विभिन्न खेलों के 1,070 पदक विजेता खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार सरकार ने खिलाड़ियों में 32.05 करोड़ रुपये की इनामी राशि वितरित की है। पंजाब सरकार ने न केवल ओलंपिक और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को 1-1 करोड़ रुपये से सम्मानित किया है, बल्कि 9 पदक विजेता खिलाड़ियों को नौकरियां भी प्रदान की हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपलब्धियों के माध्यम से देश और राज्य का बहुत मान बढ़ाया है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनके साथ मजबूती से खड़े हों और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें वह सम्मान, मान्यता और सहयोग मिले जिसके वे हकदार हैं।”
पंजाब सरकार के खेलों के प्रति दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पहली बार पंजाब के 220 खिलाड़ियों को खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए 8.61 करोड़ रुपये दिए गए। उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने राज्य भर में खेलों के बुनियादी ढांचे और एथलीटों के विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,763 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खेल बजट आवंटित किया है। गांवों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को निखारने के लिए 1,300 करोड़ रुपये की लागत से 3,148 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। ये मैदान गांवों के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रकाश स्तंभ बनेंगे।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पहली बार एशियाई चैंपियनशिप ट्रॉफी की मेजबानी करेगा, जिसे राज्य की खेल विरासत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने आगे घोषणा की कि इस टूर्नामेंट के दौरान बहुप्रतीक्षित भारत-पाकिस्तान मैच पंजाब दिवस पर करवाया जाएगा। उन्होंने कहा, “पंजाब ने देश को असंख्य पदक और चैंपियन दिए हैं, फिर भी पिछली सरकारों ने कभी यह सुनिश्चित नहीं किया कि राज्य को बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने का मौका मिले। हमने उस मानसिकता को बदल दिया है और पंजाब को भारत के खेल मानचित्र के केंद्र में लाया है।”
पुरानी व्यवस्था पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में खेल संघों पर पहले राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों का दबदबा था, लेकिन पंजाब सरकार ने उस प्रवृत्ति को समाप्त कर दिया है और मेरिट के आधार पर आम खिलाड़ियों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं।
पंजाब को खेलों की महाशक्ति में बदलने के लिए बड़ी पहल करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने शीर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार प्रदान करके और बड़े पैमाने पर नकद पुरस्कार वितरित करके वर्ष 2019 से 2023 तक के बकाया सम्मानों के दशकों लंबे बैकलॉग को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने खिलाड़ियों को जीत के बाद ही पुरस्कार देने की पुरानी प्रथा को भी बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब एथलीटों को टूर्नामेंटों से पहले वित्तीय रूप से सहायता दी जा रही है ताकि उन्हें उच्च स्तर पर तैयारी करने और प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा, “हमारे खिलाड़ियों की सहायता के लिए पंजाब सरकार ने प्रशिक्षण और उच्च स्तरीय खेल उपकरणों की खरीद के लिए नए लॉन्च किए गए खेल पोर्टल के माध्यम से 15 करोड़ रुपये से अधिक राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की है। इस पोर्टल में फेंसिंग (तलवारबाजी), कायाकिंग, शूटिंग (निशानेबाजी) और आर्चरी (तीरंदाजी) जैसे खेलों के लिए विशेष अनुदान भी शामिल हैं और यह खिलाड़ियों को कॉर्पोरेट प्रायोजकों से जोड़ने में मदद करेगा।”
शीर्ष सम्मानित खिलाड़ियों में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, हरलीन देवल और अमनजोत कौर को विश्व कप जीतने के लिए डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये से सम्मानित किया गया। निशानेबाजी में विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता अमनप्रीत सिंह को 1.54 करोड़ रुपये और नीरज कुमार को 1.52 करोड़ रुपये की राशि से सम्मानित किया गया, जबकि किरनदीप कौर और कृतिका शर्मा ने 50-50 लाख रुपये प्राप्त किए।
उभरते निशानेबाज विजेवीर सिद्धू को 28.50 लाख रुपये से सम्मानित किया गया, वुशू खिलाड़ी कुशल कुमार ने 25 लाख रुपये प्राप्त किए, जबकि पैरा-पॉवरलिफ्टिंग विश्व चैंपियन परमजीत कुमार को उनकी शानदार अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के लिए 55 लाख रुपये दिए गए।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि खेलों में लगातार शानदार उपलब्धियाँ हासिल करने वाले खिलाड़ियों के सम्मान में कई वर्षों के महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार वितरित किए गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 के पुरस्कार विजेताओं में हॉकी खिलाड़ी रमनदीप सिंह, जूडो खिलाड़ी किरनजीत सिंह, कबड्डी खिलाड़ी हरविंदर कौर, रोइंग खिलाड़ी जसप्रीत सिंह, निशानेबाज अंगद वीर सिंह बाजवा, वेटलिफ्टर प्रदीप सिंह, पहलवान हरप्रीत सिंह और तैराक चाहत अरोड़ा शामिल थे।
उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2020 में तीरंदाजी में संगमप्रीत सिंह बिस्ला, एथलेटिक्स में ट्विंकल चौधरी, बेसबॉल में वीरपाल, बास्केटबॉल में अमृतपाल सिंह, कायाकिंग और कैनोइंग में अवतार सिंह, साइक्लिंग में अमरजीत सिंह, फेंसिंग में इना अरोड़ा और हैंडबॉल में हरजिंदर सिंह को सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि 2021 के तीरंदाजी चैंपियन सुखबीर सिंह, एथलीट किरपाल सिंह, बेसबॉल खिलाड़ी अमनजीत कौर बैंस, कायाकिंग खिलाड़ी प्रियंका देवी, साइकिल सवार नमन कपिल, फेंसर उदयवीर सिंह और हैंडबॉल खिलाड़ी मनदीप कौर को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्जुन पुरस्कार विजेताओं और ओलंपिक हॉकी सितारों को विशेष श्रेणी समर्पित की गई है, जिनमें से अधिकांश पंजाब में उच्च सरकारी पदों पर सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मानित समूह में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ ओलंपिक पदक विजेता गुरजंट सिंह और रुपिंदर पाल सिंह शामिल हैं, जो दोनों पीसीएस अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ओलंपिक हॉकी सितारों मनदीप सिंह, हारदिक सिंह, वरुण कुमार, शमशेर सिंह, गोलकीपर कृष्ण बहादुर पाठक और दिलप्रीत सिंह को भी सम्मानित किया, जो पंजाब पुलिस में डीएसपी के रूप में सेवा दे रहे हैं।
इस समारोह में ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पंजाब की पहली महिला मुक्केबाज सिमरनजीत कौर बाठ को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद देश को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पंजाब के पैरा-एथलीटों को भी सम्मानित किया गया।
इस समारोह के दौरान सम्मानित किए गए प्रमुख पैरा-एथलीटों में एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मोहम्मद यासर, तैराक वैभव राजोरिया, पहलवान सुरेंदर कंबोज, पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी पलक कोहली और पैरा-पॉवरलिफ्टर परमजीत कुमार शामिल थे।
समारोह के दौरान उन खिलाड़ियों की माताओं और परिवार के सदस्यों को भी सम्मान लेने के लिए मंच पर बुलाया गया, जो अपने प्रशिक्षण आदि के कारण समारोह में शामिल नहीं हो सके। इनमें एशियाई खेलों के पदक विजेता हरमिलन बैंस के माता-पिता और अर्जुन पुरस्कार विजेता माधुरी सक्सेना भी शामिल थे।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने खिलाड़ियों के परिवारों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “माता-पिता द्वारा किए गए बलिदान खेलों में हर सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका समर्पण, अनुशासन और अटूट समर्थन चैंपियन पैदा करता है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब सरकार ने खेल बजट को 17 गुना बढ़ा दिया है और वर्ष 2019 से 2023 तक 87 नामचीन खिलाड़ियों को महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार प्रदान किए गए हैं।
महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज पंजाब और खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि उन खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा रहा है जिन्होंने अपने माता-पिता, पंजाब और देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया है। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को ब्लेज़र, स्क्रॉल (मान-पत्र) और घोड़े पर सवार महाराजा रणजीत सिंह के यादगार चिन्ह और 5 लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया गया।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए 87 पुरस्कार विजेताओं को 4.35 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।
भारतीय खेलों में पंजाब के बहुमूल्य योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य ने भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह, भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के कप्तान शुभमन गिल, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और भारतीय बास्केटबॉल टीम के कप्तान पलप्रीत सिंह बराड़ सहित देश को कई कप्तान दिए हैं।
उन्होंने आगे कहा कि गुरप्रीत सिंह संधू ने पिछले साल भारतीय फुटबॉल टीम की कप्तानी की थी और पंजाबी क्रिकेटर गुरनूर बराड़ को हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए चुना गया था।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता हॉकी खिलाड़ियों को 1-1 करोड़ रुपये से सम्मानित किया है, जबकि एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं को भी 1-1 करोड़ रुपये की इनामी राशि दी गई है।
उन्होंने आगे कहा कि 9 ओलंपिक पदक विजेता खिलाड़ियों को पीसीएस और डीएसपी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि 2022 से पंजाब सरकार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और पैरा-एथलीटों में 106.20 करोड़ रुपये की इनामी राशि वितरित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 से खेल तैयारी के उद्देश्यों के लिए 220 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को 8.61 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं, जबकि खेल संस्थानों को खेल उपकरणों की खरीद के लिए डीबीटी के माध्यम से 15 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे बताया कि पंजाब भर के 6,000 गांवों में 17,000 खेल किट वितरित की जा रही हैं और जिम स्थापित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में खिलाड़ियों के लिए आहार भत्ता 248 रुपये से बढ़ाकर 480 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है, जबकि जिला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में भत्ता 225 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।
पंजाब की बेमिसाल हॉकी विरासत को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 50 से अधिक पंजाबी हॉकी खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं, जबकि 10 पंजाबी खिलाड़ियों ने विभिन्न ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “संसारपुर, खुसरोपुर और मिठापुर जैसे गांवों ने 20 से अधिक ओलंपियन पैदा करके विश्व हॉकी में पंजाब का नाम रोशन किया है।”
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि भारत ने 41 साल के अंतराल के बाद टोक्यो ओलंपिक 2021 में हॉकी में कांस्य पदक जीता था, जिसमें मनप्रीत सिंह के नेतृत्व वाली टीम में 9 पंजाबी खिलाड़ी थे। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने पेरिस ओलंपिक 2024 में फिर कांस्य पदक जीता, जिसकी टीम में 10 पंजाबी खिलाड़ी थे, जिसकी कप्तानी हरमनप्रीत सिंह ने की, जो टूर्नामेंट के सबसे अधिक स्कोरर के रूप में भी उभरे।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे घोषणा की कि पंजाब सरकार ने खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए एक नया “आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्सपर्सन” कैडर बनाया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न खेल विषयों में 500 सीटें सृजित की गई हैं, जबकि 45 जूनियर कोच और तीन कोच पहले ही नियमित रूप से भर्ती किए जा चुके हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पंजाब, देश का पहला राज्य बन गया है जिसने खेल विज्ञान के लिए अलग स्पोर्ट्स मेडिसिन कैडर स्थापित किया है। विभिन्न श्रेणियों में 112 सीटों के लिए भर्ती पहले ही पूरी हो चुकी है, जबकि 206 फिजिकल ट्रेनर सीटों के लिए भर्ती जारी है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने यह भी कहा कि जमीनी स्तर पर कौशल खोज कार्यक्रम के तहत पंजाब भर में युवा प्रतिभा को निखारने के लिए 253 नर्सरी कोचों और 26 खेल सुपरवाइजरों के साथ 253 खेल नर्सरियां स्थापित की गई हैं।
भगवंत मान सरकार जीत के बाद ही खिलाड़ियों को सम्मानित करने के मॉडल से हटकर खिलाड़ियों को खेलों के लिए तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने जीत के बाद ही खिलाड़ियों को सम्मानित करने के पुराने मॉडल से हटकर अलग दृष्टिकोण अपनाया है, जिसके तहत बड़े टूर्नामेंटों से पहले ही एथलीटों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं की तैयारी करने और उच्च स्तरीय उपकरण लेने में मदद करने के लिए नए शुरू किए गए खेल पोर्टल के माध्यम से 15 करोड़ रुपये से अधिक राशि पहले ही सीधे वितरित की जा चुकी है। पोर्टल में शूटिंग, तलवारबाजी, कायाकिंग और तीरंदाजी जैसे खेलों के लिए अनुकूलित अनुदान शामिल हैं, जबकि एथलीटों को दीर्घकालिक सहायता के लिए कॉर्पोरेट प्रायोजकों से जुड़ने में भी मदद की जा रही है।
भगवंत मान सरकार गांवों से अंतरराष्ट्रीय मंचों तक बना रही है विश्व स्तरीय खेल बुनियादी ढांचा
2026-27 के लिए 1,763 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खेल बजट आवंटित किया गया है। गांवों में खेल प्रतिभा को निखारने के लिए 1,300 करोड़ रुपये की लागत से 3,148 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आगे घोषणा की कि 6,000 गांवों में जिम स्थापित किए जा रहे हैं, 17,000 खेल किट वितरित की जा रही हैं और पंजाब भर के खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए एक नया “आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्सपर्सन” कैडर तैयार किया गया है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ के सेक्टर 42 में 43 करोड़ 66 लाख रुपये की लागत से बनने वाले युवा भवन का आभासी तौर पर शिलान्यास किया। युवक सेवाएं विभाग द्वारा बनाए जा रहे इस युवा भवन में 200 युवाओं के लिए छात्रावास, 400 सीटों वाला ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस हॉल, सेमिनार हॉल और मेस आदि सुविधाएं होंगी। इसी तरह मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए पंजाब स्पोर्ट्स पोर्टल की शुरुआत की। खिलाड़ियों द्वारा लंबे समय से ऐसे पोर्टल की मांग की जा रही थी। इस पोर्टल से देश-विदेश के किसी भी कोने से खिलाड़ी इस पोर्टल पर खिलाड़ियों के लिए जानकारी हासिल करने और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकता है।
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पंजाब को जल्द मिल सकता है नया स्थायी DGP, तीन नामों पर चर्चा
पंजाब के नए स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य को नया स्थायी पुलिस प्रमुख मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक घोषणा होने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, नए डीजीपी की नियुक्ति के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल तैयार किया गया है। इस पैनल में मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सरस्वती चौहान और हरप्रीत सिंह सिद्धू के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
इससे पहले पंजाब सरकार ने नियमों के अनुसार वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजा था। यूपीएससी योग्य अधिकारियों के नामों की सिफारिश करता है, जिसके बाद राज्य सरकार उनमें से एक अधिकारी को स्थायी डीजीपी नियुक्त करती है।
फिलहाल पंजाब पुलिस की कमान कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव के हाथों में है। हालांकि, पंजाब को पिछले कई वर्षों से स्थायी डीजीपी नहीं मिला है, जिसके चलते इस पद को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।
अब उम्मीद जताई जा रही है कि यूपीएससी की ओर से अनुशंसित पैनल में शामिल किसी एक अधिकारी के नाम को मंजूरी देकर पंजाब सरकार जल्द ही नए स्थायी डीजीपी की नियुक्ति का ऐलान कर सकती है।
हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक किसी एक नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अंतिम मंजूरी और सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद ही पंजाब के नए स्थायी डीजीपी के नाम पर आधिकारिक मुहर लगेगी।
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भगवंत मान सरकार ने जसवंत सिंह खालड़ा मर्डर केस के दोषियों की समय से पहले रिहाई से जुड़ी किसी भी फाइल पर साइन नहीं किया- बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने विरोधियों पर हमला बोलते हुए कहा कि स्वर्गीय जसवंत सिंह खालड़ा केस के मुख्य आरोपी पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह की माफी और समय से पहले रिहाई के बारे में सोशल मीडिया और कुछ कथित तौर पर जिम्मेदार मीडिया हाउस द्वारा फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह से झूठी, मनगढ़ंत और पंजाब की मान सरकार को बदनाम करने की गहरी साजिश है।
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बलतेज पन्नू ने साफ किया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ऐसी किसी फाइल पर साइन नहीं किए हैं और न ही पंजाब सरकार के लेवल पर ऐसी किसी फाइल पर कोई प्रोसेस हुआ है। यह पूरा मामला सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, जिसमें राज्य सरकार का कोई रोल नहीं है। यह अकाली दल (बादल) और उनके सोशल मीडिया सेल हैं जो अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन और पिछले पापों को छिपाने के लिए साफ झूठ फैला रहे हैं।
बलतेज पन्नू ने मीडिया के सामने तथ्य और आंकड़े पेश करते हुए साफ किया कि पूरे केस की जांच सेंट्रल एजेंसी सीबीआई ने की थी। नए कानूनी प्रोविज़न (सेक्शन 477 बीएनएसएस / 435 सीआरपीसी) के तहत, सीबीआई केस में किसी भी आरोपी की समय से पहले रिहाई पर फैसला लेने का अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है।
उन्होंने कहा कि आरोपी जसपाल सिंह ने खुद 2017 में समय से पहले रिहाई के लिए सेंट्रल गृह मंत्रालयमें अप्लाई किया था, जिसे एमएचए और 2018 में उस समय के राज्यपाल ने रद्द कर दिया था। इसके बाद 2019 और फिर 2023 में यह मामला पूरी तरह से केंद्र सरकार लेवल पर ही चलता रहा।
पन्नू ने सवाल किया कि जब गृह मंत्रालय से पंजाब सरकार को ऐसी कोई फाइल आई नहीं, तो मुख्यमंत्री मान साहिब के हस्ताक्षर होने और फाइल राज्यपाल के ऑफिस में लंबित होने का दावा कैसे किया जा सकता है? ये ओल्ड स्कूल राजनीति करने वाले लोग, जिन्हें न तो गूगल चलाना आता है और न ही एआई या चैटजीपीटी जैसे आधुनिक टूल्स की जानकारी है, केवल सनसनी फैलाने के लिए झूठा प्रचार कर रहे हैं।
शिरोमणि अकाली दल (बादल) को ‘अकाली दल बेअदबी’ का नाम देते हुए पन्नू ने उसके दोहरे चरित्र पर बड़ा हमला बोला। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही बीबी परमजीत कौर खालड़ा के हालिया बयान का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि आज अकाली दल का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है।
बीबी खालड़ा ने खुद साफ़ किया हैं कि 1996 में उनके पूरे परिवार और ह्यूमन राइट्स विंग ने बादल दल की इस उम्मीद में मदद की थी कि सरकार सत्ता में आने पर वे शहीद जसवंत सिंह खालड़ा को ढूंढने और दोषियों को सज़ा दिलाने में मदद करेंगे। लेकिन 1997 में, जैसे ही सरकार बनी, प्रकाश सिंह बादल ने मदद करने के बजाय बीबी खालड़ा को जवाब दिया कि ‘बीबा जी, जो चेयरमैनशिप लेनी है, ले लो और अपने बच्चों को पाल लो, अब इस मामले में क्या रखा है।’ पन्नू ने कहा कि सच कमीशन बनाने और दोषियों को सज़ा दिलाने का वादा करने वाले बादलों ने सरकार आते ही उन हत्यारे अफ़सरों को ऊँचे पदों से नवाज़ा।
बलतेज पन्नू ने कहा कि हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हुई फिल्म ‘सतलुज’ को किस तरह कुछ ही घंटों में भाजपा की केंद्र सरकार ने हटवाया, उससे साफ़ है कि कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा मिलकर उस काले दौर की सच्चाई को दबाना चाहते हैं। लेकिन आज की जागरूक पीढ़ी सब जानती है। अकाली दल अपनी नाकामी और धोखे को छिपाने के लिए सुबह-सुबह सोशल मीडिया पर जो झूठ का पुलिंदा फैलाता है, वह अब नहीं चलेगा।
पन्नू ने बिना जांच-पड़ताल किए यह फेक न्यूज़ छापने वाले मीडिया हाउस को भी आड़े हाथों लिया और चेतावनी दी कि गलत फैक्ट्स पर आधारित खबरें कानून के दायरे में आती हैं। एक ज़िम्मेदार पार्टी प्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने पंजाब सरकार से अपील की है कि ऐसी अफवाहें फैलाने और झूठी खबरें छापने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि पंजाब के अमन-चैन और सरकार की पार्दशिता को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को कड़ा सबक मिल सके।
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पंजाब की वोटर लिस्ट से किसी भी असली वोटर का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए, आप के कार्यकर्ता हर नागरिक की मदद के लिए तैयार हैं: अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने गुरुवार को पंजाब के लोगों से अपील की कि वे भारत के चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि हर योग्य वोटर को अपना वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरा करना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि उनके वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहें और उन्हें पंजाब सरकार की अलग-अलग भलाई की योजनाओं का फायदा मिलता रहे।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, आप पंजाब के प्रधान अमन अरोड़ा ने कहा कि एसआईआर अभ्यास एक पूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया है जिसका मकसद वोटर रोल को अपडेट करना है। उन्होंने पंजाब के हर वोटर से अपील की कि वे प्रशासन के साथ सहयोग करें और तय तारीख से पहले ज़रूरी फॉर्मैलिटी पूरी करें।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की लीडरशिप वाली पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई लगभग हर भलाई की योजना लाभपात्री की राज्य के रजिस्टर्ड वोटर के तौर पर पहचान से जुड़ी है। उन्होंने कहा, “चाहे वह ‘माँ बेटी सत्कार योजना’ हो, 10 लाख रुपये की हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम हो, राशन/खाने से जुड़े भलाई के प्रोग्राम हों या अलग-अलग पेंशन स्कीम हों, इन सभी का फायदा पंजाब के उन योग्य निवासियों को मिलता है जिनकी पहचान सही तरीके से वेरिफाई हो चुकी है।”
अमन अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी लोगों से अपील की थी कि वे पक्का करें कि उनका नाम वोटर लिस्ट में रहे। उन्होंने कहा, “भगवंत मान सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में कई लोगों के भले के लिए योजनाएं शुरू की हैं। हम चाहते हैं कि हर सही फायदा उठाने वाले को बिना किसी रुकावट के ये फायदे मिलते रहें। इसलिए, यह बहुत ज़रूरी है कि हर असली वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरा करे और अपना वोट सुरक्षित करे।”
इस सुधार प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि भाजपा ने पहले भी दूसरे राज्यों में राजनीतिक फायदे के लिए ऐसे तरीकों का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने साफ किया कि आप नहीं चाहती कि पंजाब में एक भी असली वोटर अपना वोट देने का हक खोए।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस काम को सिर्फ वोटर वेरिफिकेशन प्रक्रिया के तौर पर न देखें, बल्कि इसे पंजाब सरकार की तरफ से दी जा रही भलाई की योजनाओं और पब्लिक सर्विस तक उनकी लगातार पहुंच पक्की करने के लिए एक ज़रूरी कदम समझें।
अमन अरोड़ा ने आगे बताया कि आप ने लोगों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरा करने में मदद करने के लिए पूरे पंजाब में बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-1 और बीएलए-2) तैनात किए हैं। उन्होंने कहा, “आप के कार्यकर्ता बूथ लेवल पर वोटरों की किसी भी डॉक्यूमेंट्री या प्रक्रिया से जुड़ी ज़रूरतों में मदद करने के लिए मौजूद हैं, ताकि कोई भी असली वोट न कट जाए।”
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