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पंजाब के खिलाड़ियों ने दुनिया भर में तिरंगे का मान बढ़ाया, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा पुरस्कार और इनामी राशि से खिलाड़ियों का सम्मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब के इतिहास में बड़े खेल आयोजन के दौरान महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार विजेता 87 खिलाड़ियों और 1,070 पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 32.05 करोड़ रुपये की इनामी राशि से सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गांवों से लेकर अंतरराष्ट्रीय खेल मैदानों तक प्रांत में खेलों के लिए व्यापक घोषणाएँ कीं। पंजाब को उभरती खेल शक्ति बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने न केवल ओलंपिक और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को 1-1 करोड़ रुपये से सम्मानित किया बल्कि 9 खिलाड़ियों को नौकरियां भी प्रदान की हैं। पहली बार टूर्नामेंट की तैयारी के लिए 220 खिलाड़ियों को 8.61 करोड़ रुपये की सीधे बैंक खातों के माध्यम से वित्तीय सहायता दी गई।

आज यहां सेक्टर-35 में म्यूनिसिपल भवन में आयोजित समारोह के दौरान खेलों के क्षेत्र में निर्णायक बदलाव का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने वर्ष 2026-27 के लिए 1,763 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक खेल बजट और जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभा को निखारने के लिए 1,300 करोड़ रुपये की लागत से 3,148 ग्रामीण खेल मैदान विकसित करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब पहली बार एशियाई चैंपियनशिप ट्रॉफी की मेजबानी करेगा और एक नवंबर को पंजाब दिवस पर भारत-पाकिस्तान के बीच रोमांचक मुकाबला होगा। पिछली सरकारों पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब, देश के लिए असंख्य चैंपियन पैदा करने के बावजूद पहले कभी भी राज्य को किसी बड़े खेल आयोजन की मेजबानी करने का मौका नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि खेल संघों पर वास्तविक खिलाड़ियों के बजाय राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों का दबदबा रहा।

शानदार सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह दिन पंजाब के लिए ऐतिहासिक पल है क्योंकि 87 खिलाड़ियों को प्रतिष्ठित महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि विभिन्न खेलों के 1,070 पदक विजेता खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार सरकार ने खिलाड़ियों में 32.05 करोड़ रुपये की इनामी राशि वितरित की है। पंजाब सरकार ने न केवल ओलंपिक और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को 1-1 करोड़ रुपये से सम्मानित किया है, बल्कि 9 पदक विजेता खिलाड़ियों को नौकरियां भी प्रदान की हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब के खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपलब्धियों के माध्यम से देश और राज्य का बहुत मान बढ़ाया है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उनके साथ मजबूती से खड़े हों और यह सुनिश्चित करें कि उन्हें वह सम्मान, मान्यता और सहयोग मिले जिसके वे हकदार हैं।”

पंजाब सरकार के खेलों के प्रति दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पहली बार पंजाब के 220 खिलाड़ियों को खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए 8.61 करोड़ रुपये दिए गए। उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने राज्य भर में खेलों के बुनियादी ढांचे और एथलीटों के विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,763 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खेल बजट आवंटित किया है। गांवों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को निखारने के लिए 1,300 करोड़ रुपये की लागत से 3,148 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। ये मैदान गांवों के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रकाश स्तंभ बनेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब पहली बार एशियाई चैंपियनशिप ट्रॉफी की मेजबानी करेगा, जिसे राज्य की खेल विरासत के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने आगे घोषणा की कि इस टूर्नामेंट के दौरान बहुप्रतीक्षित भारत-पाकिस्तान मैच पंजाब दिवस पर करवाया जाएगा। उन्होंने कहा, “पंजाब ने देश को असंख्य पदक और चैंपियन दिए हैं, फिर भी पिछली सरकारों ने कभी यह सुनिश्चित नहीं किया कि राज्य को बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने का मौका मिले। हमने उस मानसिकता को बदल दिया है और पंजाब को भारत के खेल मानचित्र के केंद्र में लाया है।”

पुरानी व्यवस्था पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में खेल संघों पर पहले राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों का दबदबा था, लेकिन पंजाब सरकार ने उस प्रवृत्ति को समाप्त कर दिया है और मेरिट के आधार पर आम खिलाड़ियों के लिए दरवाजे खोल दिए हैं।

पंजाब को खेलों की महाशक्ति में बदलने के लिए बड़ी पहल करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने शीर्ष राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार प्रदान करके और बड़े पैमाने पर नकद पुरस्कार वितरित करके वर्ष 2019 से 2023 तक के बकाया सम्मानों के दशकों लंबे बैकलॉग को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने खिलाड़ियों को जीत के बाद ही पुरस्कार देने की पुरानी प्रथा को भी बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब एथलीटों को टूर्नामेंटों से पहले वित्तीय रूप से सहायता दी जा रही है ताकि उन्हें उच्च स्तर पर तैयारी करने और प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा, “हमारे खिलाड़ियों की सहायता के लिए पंजाब सरकार ने प्रशिक्षण और उच्च स्तरीय खेल उपकरणों की खरीद के लिए नए लॉन्च किए गए खेल पोर्टल के माध्यम से 15 करोड़ रुपये से अधिक राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की है। इस पोर्टल में फेंसिंग (तलवारबाजी), कायाकिंग, शूटिंग (निशानेबाजी) और आर्चरी (तीरंदाजी) जैसे खेलों के लिए विशेष अनुदान भी शामिल हैं और यह खिलाड़ियों को कॉर्पोरेट प्रायोजकों से जोड़ने में मदद करेगा।”

शीर्ष सम्मानित खिलाड़ियों में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, हरलीन देवल और अमनजोत कौर को विश्व कप जीतने के लिए डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपये से सम्मानित किया गया। निशानेबाजी में विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता अमनप्रीत सिंह को 1.54 करोड़ रुपये और नीरज कुमार को 1.52 करोड़ रुपये की राशि से सम्मानित किया गया, जबकि किरनदीप कौर और कृतिका शर्मा ने 50-50 लाख रुपये प्राप्त किए।

उभरते निशानेबाज विजेवीर सिद्धू को 28.50 लाख रुपये से सम्मानित किया गया, वुशू खिलाड़ी कुशल कुमार ने 25 लाख रुपये प्राप्त किए, जबकि पैरा-पॉवरलिफ्टिंग विश्व चैंपियन परमजीत कुमार को उनकी शानदार अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के लिए 55 लाख रुपये दिए गए।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि खेलों में लगातार शानदार उपलब्धियाँ हासिल करने वाले खिलाड़ियों के सम्मान में कई वर्षों के महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार वितरित किए गए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 के पुरस्कार विजेताओं में हॉकी खिलाड़ी रमनदीप सिंह, जूडो खिलाड़ी किरनजीत सिंह, कबड्डी खिलाड़ी हरविंदर कौर, रोइंग खिलाड़ी जसप्रीत सिंह, निशानेबाज अंगद वीर सिंह बाजवा, वेटलिफ्टर प्रदीप सिंह, पहलवान हरप्रीत सिंह और तैराक चाहत अरोड़ा शामिल थे।

उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2020 में तीरंदाजी में संगमप्रीत सिंह बिस्ला, एथलेटिक्स में ट्विंकल चौधरी, बेसबॉल में वीरपाल, बास्केटबॉल में अमृतपाल सिंह, कायाकिंग और कैनोइंग में अवतार सिंह, साइक्लिंग में अमरजीत सिंह, फेंसिंग में इना अरोड़ा और हैंडबॉल में हरजिंदर सिंह को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि 2021 के तीरंदाजी चैंपियन सुखबीर सिंह, एथलीट किरपाल सिंह, बेसबॉल खिलाड़ी अमनजीत कौर बैंस, कायाकिंग खिलाड़ी प्रियंका देवी, साइकिल सवार नमन कपिल, फेंसर उदयवीर सिंह और हैंडबॉल खिलाड़ी मनदीप कौर को सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अर्जुन पुरस्कार विजेताओं और ओलंपिक हॉकी सितारों को विशेष श्रेणी समर्पित की गई है, जिनमें से अधिकांश पंजाब में उच्च सरकारी पदों पर सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सम्मानित समूह में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह के साथ ओलंपिक पदक विजेता गुरजंट सिंह और रुपिंदर पाल सिंह शामिल हैं, जो दोनों पीसीएस अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ओलंपिक हॉकी सितारों मनदीप सिंह, हारदिक सिंह, वरुण कुमार, शमशेर सिंह, गोलकीपर कृष्ण बहादुर पाठक और दिलप्रीत सिंह को भी सम्मानित किया, जो पंजाब पुलिस में डीएसपी के रूप में सेवा दे रहे हैं।

इस समारोह में ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पंजाब की पहली महिला मुक्केबाज सिमरनजीत कौर बाठ को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही अपनी शारीरिक चुनौतियों के बावजूद देश को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पंजाब के पैरा-एथलीटों को भी सम्मानित किया गया।

इस समारोह के दौरान सम्मानित किए गए प्रमुख पैरा-एथलीटों में एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मोहम्मद यासर, तैराक वैभव राजोरिया, पहलवान सुरेंदर कंबोज, पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी पलक कोहली और पैरा-पॉवरलिफ्टर परमजीत कुमार शामिल थे।

समारोह के दौरान उन खिलाड़ियों की माताओं और परिवार के सदस्यों को भी सम्मान लेने के लिए मंच पर बुलाया गया, जो अपने प्रशिक्षण आदि के कारण समारोह में शामिल नहीं हो सके। इनमें एशियाई खेलों के पदक विजेता हरमिलन बैंस के माता-पिता और अर्जुन पुरस्कार विजेता माधुरी सक्सेना भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने खिलाड़ियों के परिवारों का धन्यवाद करते हुए कहा कि “माता-पिता द्वारा किए गए बलिदान खेलों में हर सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका समर्पण, अनुशासन और अटूट समर्थन चैंपियन पैदा करता है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पंजाब सरकार ने खेल बजट को 17 गुना बढ़ा दिया है और वर्ष 2019 से 2023 तक 87 नामचीन खिलाड़ियों को महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार प्रदान किए गए हैं।

महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार के बारे में बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज पंजाब और खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि उन खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा रहा है जिन्होंने अपने माता-पिता, पंजाब और देश का नाम दुनिया भर में रोशन किया है। प्रत्येक पुरस्कार विजेता को ब्लेज़र, स्क्रॉल (मान-पत्र) और घोड़े पर सवार महाराजा रणजीत सिंह के यादगार चिन्ह और 5 लाख रुपये की राशि से सम्मानित किया गया।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए 87 पुरस्कार विजेताओं को 4.35 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।

भारतीय खेलों में पंजाब के बहुमूल्य योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य ने भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह, भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के कप्तान शुभमन गिल, भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और भारतीय बास्केटबॉल टीम के कप्तान पलप्रीत सिंह बराड़ सहित देश को कई कप्तान दिए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि गुरप्रीत सिंह संधू ने पिछले साल भारतीय फुटबॉल टीम की कप्तानी की थी और पंजाबी क्रिकेटर गुरनूर बराड़ को हाल ही में भारतीय क्रिकेट टीम के लिए चुना गया था।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता हॉकी खिलाड़ियों को 1-1 करोड़ रुपये से सम्मानित किया है, जबकि एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेताओं को भी 1-1 करोड़ रुपये की इनामी राशि दी गई है।

उन्होंने आगे कहा कि 9 ओलंपिक पदक विजेता खिलाड़ियों को पीसीएस और डीएसपी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि 2022 से पंजाब सरकार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और पैरा-एथलीटों में 106.20 करोड़ रुपये की इनामी राशि वितरित की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 से खेल तैयारी के उद्देश्यों के लिए 220 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को 8.61 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं, जबकि खेल संस्थानों को खेल उपकरणों की खरीद के लिए डीबीटी के माध्यम से 15 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे बताया कि पंजाब भर के 6,000 गांवों में 17,000 खेल किट वितरित की जा रही हैं और जिम स्थापित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स में खिलाड़ियों के लिए आहार भत्ता 248 रुपये से बढ़ाकर 480 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है, जबकि जिला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में भत्ता 225 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है।

पंजाब की बेमिसाल हॉकी विरासत को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि 50 से अधिक पंजाबी हॉकी खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं, जबकि 10 पंजाबी खिलाड़ियों ने विभिन्न ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “संसारपुर, खुसरोपुर और मिठापुर जैसे गांवों ने 20 से अधिक ओलंपियन पैदा करके विश्व हॉकी में पंजाब का नाम रोशन किया है।”

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि भारत ने 41 साल के अंतराल के बाद टोक्यो ओलंपिक 2021 में हॉकी में कांस्य पदक जीता था, जिसमें मनप्रीत सिंह के नेतृत्व वाली टीम में 9 पंजाबी खिलाड़ी थे। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने पेरिस ओलंपिक 2024 में फिर कांस्य पदक जीता, जिसकी टीम में 10 पंजाबी खिलाड़ी थे, जिसकी कप्तानी हरमनप्रीत सिंह ने की, जो टूर्नामेंट के सबसे अधिक स्कोरर के रूप में भी उभरे।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे घोषणा की कि पंजाब सरकार ने खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए एक नया “आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्सपर्सन” कैडर बनाया है। उन्होंने कहा कि विभिन्न खेल विषयों में 500 सीटें सृजित की गई हैं, जबकि 45 जूनियर कोच और तीन कोच पहले ही नियमित रूप से भर्ती किए जा चुके हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब, देश का पहला राज्य बन गया है जिसने खेल विज्ञान के लिए अलग स्पोर्ट्स मेडिसिन कैडर स्थापित किया है। विभिन्न श्रेणियों में 112 सीटों के लिए भर्ती पहले ही पूरी हो चुकी है, जबकि 206 फिजिकल ट्रेनर सीटों के लिए भर्ती जारी है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने यह भी कहा कि जमीनी स्तर पर कौशल खोज कार्यक्रम के तहत पंजाब भर में युवा प्रतिभा को निखारने के लिए 253 नर्सरी कोचों और 26 खेल सुपरवाइजरों के साथ 253 खेल नर्सरियां स्थापित की गई हैं।

भगवंत मान सरकार जीत के बाद ही खिलाड़ियों को सम्मानित करने के मॉडल से हटकर खिलाड़ियों को खेलों के लिए तैयार करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने जीत के बाद ही खिलाड़ियों को सम्मानित करने के पुराने मॉडल से हटकर अलग दृष्टिकोण अपनाया है, जिसके तहत बड़े टूर्नामेंटों से पहले ही एथलीटों को वित्तीय सहायता दी जा रही है। खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं की तैयारी करने और उच्च स्तरीय उपकरण लेने में मदद करने के लिए नए शुरू किए गए खेल पोर्टल के माध्यम से 15 करोड़ रुपये से अधिक राशि पहले ही सीधे वितरित की जा चुकी है। पोर्टल में शूटिंग, तलवारबाजी, कायाकिंग और तीरंदाजी जैसे खेलों के लिए अनुकूलित अनुदान शामिल हैं, जबकि एथलीटों को दीर्घकालिक सहायता के लिए कॉर्पोरेट प्रायोजकों से जुड़ने में भी मदद की जा रही है।

भगवंत मान सरकार गांवों से अंतरराष्ट्रीय मंचों तक बना रही है विश्व स्तरीय खेल बुनियादी ढांचा

2026-27 के लिए 1,763 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खेल बजट आवंटित किया गया है। गांवों में खेल प्रतिभा को निखारने के लिए 1,300 करोड़ रुपये की लागत से 3,148 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आगे घोषणा की कि 6,000 गांवों में जिम स्थापित किए जा रहे हैं, 17,000 खेल किट वितरित की जा रही हैं और पंजाब भर के खिलाड़ियों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए एक नया “आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्सपर्सन” कैडर तैयार किया गया है।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ के सेक्टर 42 में 43 करोड़ 66 लाख रुपये की लागत से बनने वाले युवा भवन का आभासी तौर पर शिलान्यास किया। युवक सेवाएं विभाग द्वारा बनाए जा रहे इस युवा भवन में 200 युवाओं के लिए छात्रावास, 400 सीटों वाला ऑडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस हॉल, सेमिनार हॉल और मेस आदि सुविधाएं होंगी। इसी तरह मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए पंजाब स्पोर्ट्स पोर्टल की शुरुआत की। खिलाड़ियों द्वारा लंबे समय से ऐसे पोर्टल की मांग की जा रही थी। इस पोर्टल से देश-विदेश के किसी भी कोने से खिलाड़ी इस पोर्टल पर खिलाड़ियों के लिए जानकारी हासिल करने और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकता है।

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कांग्रेस का हफ़्ते भर चला राजनीतिक ड्रामा बिना किसी बदलाव के हुआ खत्म, अंदरूनी उथल-पुथल सबके सामने आई: बलतेज पन्नू

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पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह पर आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के स्टेट मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि कांग्रेस का हफ़्ते भर का राजनीतिक ड्रामा आखिरकार बिना किसी बदलाव के खत्म हो गया है, जिससे पार्टी की अंदरूनी उथल-पुथल और दिशाहीनता पूरी तरह से सामने आ गई है।

एक वीडियो बयान में, आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “कांग्रेस किसे कोई पोस्ट देती है या अपने अंदरूनी मामले कैसे चलाती है, यह पूरी तरह से उसका अपना निजी मामला है। आम आदमी पार्टी को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। हालांकि, पिछले कई दिनों से पंजाब में सिर्फ़ पॉलिटिकल ड्रामा देखने को मिल रहा है, जहाँ ब्रेकफ़ास्ट, लंच और डिनर पर होने वाली चर्चाओं में मीटिंग और अटकलें ही हावी रहे।”

कांग्रेस लीडरशिप पर निशाना साधते हुए, बलतेज पन्नू ने कहा, “ऐसा लग रहा था जैसे कांग्रेस के सीनियर लीडर भूपेश बघेल छुट्टी मनाने पंजाब आए थे, जो कई दिन बैठकों में बिताने के बाद हालात वैसे ही छोड़कर लौट गए। कई दिनों की राजनीतिक चर्चाओं और हाई-लेवल बैठकों के बाद भी, कांग्रेस किसी भी सही नतीजे पर नहीं पहुँच पाई, जो पार्टी के अंदर गहरे मतभेदों को दिखाता है।”

बलतेज पन्नू ने आगे चुटकी लेते हुए कहा, “किसी ने मज़ाक में मुझसे कहा कि जैसे ही भूपेश बघेल को यह खबर मिली कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पंजाब लौट आए हैं, वे तुरंत दिल्ली चले गए।”

बलतेज पन्नू ने कहा, “कांग्रेस अंदरूनी लड़ाई और सत्ता की लड़ाई में व्यस्त है, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार पूरी तरह से पंजाब के लोगों की भलाई के लिए काम करने और राज करने पर फोकस कर रही है। पंजाब के लोग कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई को बहुत करीब से देख रहे हैं और अच्छी तरह समझते हैं कि कौन सी पार्टी राज्य की सेवा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”

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1,279 नई सरकारी बसों के शामिल होने से पंजाब सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में भारत का नंबर-1 राज्य बनेगा : हरपाल सिंह चीमा

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पंजाब के वित्त एवं परिवहन मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां घोषणा की कि पंजाब 1,279 नई सरकारी बसों को शामिल कर अपने सार्वजनिक परिवहन बेड़े का व्यापक विस्तार करेगा, जिससे सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में राज्य देश का नंबर-1 राज्य बनने की दिशा में अग्रसर होगा। इस विस्तार के साथ राज्य में सरकारी बसों की संख्या 2,267 से बढ़कर 3,546 हो जाएगी, जो 56 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि होगी तथा पिछले दो दशकों में सबसे बड़ा विस्तार माना जाएगा।
बेड़े के विस्तार के साथ-साथ भगवंत मान सरकार यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा तथा अंतिम छोर (लास्ट माइल) तक बेहतर संपर्क सुनिश्चित करने के लिए डैशकैम, आंतरिक सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली तथा यूपीआई क्यूआर कोड आधारित इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को भी लागू करेगी।

पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस सम्मेलन को संबोधित करते हुए परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “पंजाब पिछले दो दशकों से भी अधिक समय के दौरान अपने सरकारी बस बेड़े का सबसे बड़ा विस्तार कर रहा है। 1,279 नई बसों के शामिल होने के बाद हमारी सरकारी बसों की कुल संख्या 2,267 से बढ़कर 3,546 हो जाएगी, जिससे पंजाब सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना के क्षेत्र में देश का नंबर-1 राज्य बन जाएगा।”
सरकारी बसों की प्रत्यक्ष खरीद के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार पहले ही 696 साधारण बसों की खरीद का आदेश जारी कर चुकी है। इनमें से 387 बसें पनबस तथा 309 बसें पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) में शामिल की जाएंगी। इनमें से लगभग 300 बसों के नवंबर 2026 तक सड़क पर उतरने की संभावना है, जबकि शेष बसों को दिसंबर 2026 के अंत तक चरणबद्ध ढंग से शामिल किया जाएगा।”

उन्होंने आगे बताया कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पीआरटीसी हेतु 100 मिडी बसें पहले ही खरीदी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा, “ये बसें सितंबर 2026 तक सेवा में आ जाएंगी, जिससे प्रत्यक्ष रूप से खरीदी गई बसों की कुल संख्या 796 हो जाएगी।”

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विस्तारित बस बेड़े की तैनाती वैज्ञानिक योजना के आधार पर की जाएगी। उन्होंने कहा, “राज्यभर में कम बस सुविधा वाले मार्गों की पहचान करने तथा यह सुनिश्चित करने के लिए कि बसों की तैनाती वहीं हो, जहां लोगों को उनकी सबसे अधिक आवश्यकता है, उपग्रह आधारित यात्रा पैटर्न सर्वेक्षण शुरू किए जा रहे हैं। यह साक्ष्य-आधारित व्यवस्था वर्तमान संपर्क अंतराल (कनेक्टिविटी गैप) को दूर करने में सहायक सिद्ध होगी।”

एक बड़े तकनीकी उन्नयन की घोषणा करते हुए परिवहन मंत्री ने कहा, “नई बसें पूर्ण निगरानी सुनिश्चित करने तथा यात्रियों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए डैशकैम, आंतरिक सीसीटीवी कैमरों तथा अत्याधुनिक जीपीएस ट्रैकिंग प्रणालियों से सुसज्जित होंगी।”

महिलाओं की सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के प्रति भगवंत मान सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “वर्तमान में सरकारी बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों में लगभग 54 प्रतिशत महिलाएं हैं। सभी नई बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने से उनकी सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी तथा उन्हें सुरक्षित एवं भरोसेमंद यात्रा का वातावरण उपलब्ध होगा।”

परिवहन मंत्री ने यह भी घोषणा की कि परिवहन विभाग परिचालकों (कंडक्टरों) को ऐसी अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीनें उपलब्ध करा रहा है, जिनके माध्यम से क्यूआर कोड स्कैन कर यूपीआई भुगतान स्वीकार किया जा सकेगा। उन्होंने कहा, “इस आधुनिक प्रणाली को डिजिटल भुगतान के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है, जिससे टिकटिंग व्यवस्था अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और दक्ष बनेगी।”

इस विस्तार के संरचनात्मक प्रभाव की व्याख्या करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “वर्तमान में पंजाब में प्रति एक लाख आबादी पर लगभग सात सरकारी बसें उपलब्ध हैं। इस विस्तार के बाद यह अनुपात बढ़कर प्रति एक लाख आबादी पर लगभग 12 बसें हो जाएगा, जिससे पंजाब राज्य परिवहन उपक्रमों के राष्ट्रीय औसत से कहीं आगे निकल जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा, “सरकारी बसों की बढ़ी हुई संख्या से पनबस तथा पीआरटीसी को अधिक मांग वाले मार्गों पर बसों के फेरे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। साथ ही, उन गांवों और कस्बों तक भी सरकारी बस सेवा का विस्तार किया जाएगा, जहां वर्तमान में कोई नियमित सरकारी बस सुविधा उपलब्ध नहीं है।”

प्रेस सम्मेलन के समापन पर वित्त एवं परिवहन मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “यह सुदृढ़ और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क राज्य के प्रत्येक नागरिक को किफायती, विश्वसनीय, सुरक्षित तथा सुलभ परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पंजाब सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”
भगवंत मान सरकार द्वारा पंजाब के सार्वजनिक परिवहन का बड़ा विस्तार

वर्तमान सरकारी बसों की संख्या: 2,267 बसें
कुल नई बसें शामिल की जा रही हैं: 1,279

विस्तार के बाद सरकारी बसों की कुल संख्या: 3,546

बस बेड़े में कुल वृद्धि: 56 प्रतिशत — दो दशकों से अधिक समय में सबसे बड़ा विस्तार

बसों की प्रत्यक्ष खरीद (796)

696 साधारण बसों का ऑर्डर दिया गया:
पनबस के लिए 387 बसें
पी.आर.टी.सी. के लिए 309 बसें

ग्रामीण और शहरी संपर्क को
बेहतर बनाने के लिए पी.आर.टी.सी. के लिए 100 मिडी बसें पहले ही खरीदी जा चुकी हैं।

प्रत्यक्ष रूप से खरीदी गई कुल बसें: 796

प्रारंभिक समय-सीमा:
लगभग 300 साधारण बसें नवंबर 2026 तक सड़कों पर उतरेंगी।

शेष साधारण बसों को दिसंबर 2026 तक शामिल कर लिया जाएगा।

100 मिडी बसें सितंबर 2026 तक सेवा में आ जाएंगी।

बसों की बेहतर उपलब्धता:
वर्तमान उपलब्धता: प्रति लाख आबादी पर लगभग 7 सरकारी बसें
विस्तार के बाद: प्रति लाख आबादी पर लगभग 12 सरकारी बसें

बेहतर संपर्क (कनेक्टिविटी):
व्यस्त मार्गों पर बस सेवाओं में वृद्धि।
उन गांवों और कस्बों को सरकारी बस सेवा से जोड़ना, जहां वर्तमान में कोई निर्धारित सेवा उपलब्ध नहीं है।
पूरे पंजाब में अंतिम छोर (लास्ट माइल) तक बेहतर कनेक्टिविटी।

कम सेवा वाले मार्गों की पहचान करने तथा जहां बसों की सबसे अधिक आवश्यकता है, वहां उन्हें तैनात करने के लिए सैटेलाइट आधारित सर्वेक्षण।

कुशल संचालन:

वार्षिक निर्धारित माइलेज: 3,842 लाख किलोमीटर

प्रति बस औसत दैनिक परिचालन: लगभग 300 किलोमीटर, जिसे सर्वोत्तम उपयोग स्तर माना जाता है

विस्तार क्यों?
यात्रियों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, विशेषकर महिलाओं के लिए निःशुल्क बस यात्रा शुरू होने के बाद।

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अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी; होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी टकराव की आशंका

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पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में फिर से तल्खी बढ़ गई है। होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हमलों को लेकर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर अंतरिम युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान ने अब तक अपने सभी वादों का पालन किया है, जबकि अमेरिका ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। उनके अनुसार, वाशिंगटन लगातार अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हट रहा है।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर सख्त बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यदि ईरानी सरकार उनके खिलाफ किसी भी प्रकार के हमले या हत्या की कोशिश करती है, तो अमेरिका बेहद कठोर सैन्य जवाब देगा। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अमेरिका ने ईरान से मांग की है कि वह होरमुज़ जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रखे, जहाजों पर होने वाले हमले तुरंत रोके और समुद्री यातायात में किसी प्रकार की बाधा न डाले। वाशिंगटन का कहना है कि यदि ईरान ऐसा नहीं करता, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान सार्वजनिक रूप से घोषणा करे कि होरमुज़ जलडमरूमध्य सभी देशों के जहाजों के लिए सुरक्षित और खुला रहेगा तथा भविष्य में किसी भी व्यापारिक जहाज को निशाना नहीं बनाया जाएगा। साथ ही जहाजों पर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क या प्रतिबंध भी नहीं लगाया जाएगा।

बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब पश्चिम एशिया की स्थिति पर टिकी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

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