Connect with us

Punjab

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह का BJP पर अटैक:बोले- वे भगवान राम को भी नहीं बख्शते, एमपी के मंत्री पर भी कसा तंज

Published

on

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह नशा मुक्ति की दूसरी मुहिम को शुरू करने से पहल आज रविवार को मोहाली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार को जमकर घेरा। वहीं, उन्होंने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा उनकी खबर देखी होगी। उनकी भाषा व व्यवहार देखिए। अगर बीजेपी सरकारें आएगी तो यही होगा।

स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने बताया कि मिडिल क्लास परिवार नीचे जा रहे हैं। 10 या 50 हजार लोग ऊपर जा रहे हैं। हमारी सरकारी लोगों की जेब को बचा रही है। बिजली, दवाई के चार पैसे बच रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई पर खर्च नहीं होना।

अगर अंबानी या अडानी के पास पैसा जाएगा, तो वह या तो बैंकों में पड़ा रहेगा या विदेश ले जाया जाएगा। पहले भी कई लोग पैसा लेकर देश से भाग चुके हैं। यह सरकार ऐसे लोगों की जेब में पैसा डालती है। जो पैसे को विदेश भेजते हैं।

उन्होंने कहा कि, सेमीकंडक्टर क्लस्टर बनाने की बात की जाती है। इसमें टाटा को 44 हजार करोड़ रुपए का ठेका दिया गया और 758 करोड़ रुपए का फंड ले लिया गया। इस तरह से फंड जुटाए जाते हैं। ऐसे हालात में चुनाव लड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने अपने भाषण में करीब पांच पाॅइंट उठाएं –

1. हम भविष्य, यह धर्म की राजनीति करते हैं: स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने ने कहा कि मौजूदा सरकार आने वाली पीढ़ी और नौजवानों के भविष्य के बारे में सोच रही है। वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे राजनेता भी हैं जो धर्म और जाति की राजनीति करते हैं। चाहे क्रिसमस हो, वहां जाकर गुंडागर्दी की जाती है। आप देखिए, वे भगवान राम को भी नहीं बख्शते।

2. बीजेपी ने लोगों से अधिकार छीना: मनरेगा की जगह एक नया कानून लेकर आए हैं। यह भी आपको पता होना चाहिए कि यह कितना धोखे वाला काम है। पहले गांवों से बजट तय होता था। गांव जो मांग करते थे, केंद्र सरकार को देना पड़ता था। बजट कम रखा जाता था, लेकिन कोरोना के समय इसकी उपयोगिता 150 से 200 प्रतिशत तक रही। यह लोगों का अधिकार था। अब यह अधिकार छीना जा रहा है।

3. हमने कहा दिहाड़ी बढ़ा दो, लेकिन ऐसा नहीं करेंगे: स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र भाजपा सरकार द्वारा अब तय किया जाएगा कि किस राज्य, जिले या तहसील में काम होगा। गांवों से अधिकार छीने जाएंगे। गांवों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटा जाएगा। हमने कहा था कि काम के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए जाएं। कौन-सा काम करवाना है, यह गांव के लोग तय करें। महंगाई के हिसाब से दिहाड़ी बढ़ा दी जाए। लेकिन ये लोग ऐसा नहीं करेंगे।

4. डबल इंजन सरकार हाल देखो: डबल इंजन वाली सरकार का हाल देख लीजिए। मध्य प्रदेश की खबरें देखी हैं। वहां के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की भाषा और व्यवहार देखिए। अगर बीजेपी की सरकार आएगी तो यही होगा। इंदौर को सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, लेकिन गंदा पानी, यही उसकी सच्चाई है।

5. मायनोरिटी को जैसे ट्रीट करेंगे, वैसा हमारे साथ होगा: मंत्री ने कहा कि साढ़े तीन करोड़ भारतीय विदेश में रहते है। वह वहां पैसा कम कर भेजते हैं, लेकिन अब वहां भी सख्ती हो रही है। न्यूजीलैंड की खबरें आपने देखी होगी । जैसे हम यहां पर मायनोरिटी को ट्रीट करेंगे। वैसा ही वह भी हमारे साथ करेंगे।

सभी थानों के एसएचओ को नई गाड़ियां

पंजाब पुलिस की कोशिश यही है कि अब नशा तस्करी या कोई अन्य कॉल पुलिस के कंट्रोल रूम पर आए तो तुरंत पुलिस मदद के लिए पहुंच सके। इसके लिए भी तैयारी शुरू हो चुकी है। जल्दी ही 8100 नए वाहन पीसीआर को दिए जाएंगे। जबकि 454 पुलिस थानों के एसएचओ को पुलिस ने नई गाड़ियां मुहैया करवा दी हैं। अब डीएसपी को भी नई गाड़ियां दी जाएंगी।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Punjab

मंडियों में किसानों को किसी भी तरह की नहीं होगी परेशानी, समय पर होगी लिफ्टिंग और पेमेंट: Mahindra Singh Sidhu

Published

on

आम आदमी पार्टी (आप) ने पंजाब की मंडियों में गेहूं की फसल की सरकारी खरीद शुरू होने पर किसानों को हर मुमकिन मदद और सुविधाएं देने का भरोसा दिया है। पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार द्वारा पिछले चार सालों में कृषि के क्षेत्र में किए गए क्रांतिकारी सुधारों और मौजूदा खरीद सीजन की तैयारियों पर रोशनी डाली।

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए किसान विंग के चेयरमैन महिंद्र सिंह सिद्धू ने कहा कि मान सरकार ने किसानों के लिए जो किया है, वह ऐतिहासिक है। उन्होंने बताया कि सरकार बिना किसी जाति या धर्म के भेदभाव के 600 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है, जिसका फायदा किसान परिवारों को भी मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बार किसानों को कृषि के लिए दिन में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिना रुकावट बिजली मिल रही है, जिससे उन्हें रात में खेतों में नहीं जाना पड़ रहा है। इसके अलावा गांवों के सरकारी स्कूलों का रूप बदलने से किसानों और मजदूरों के बच्चे अब ऊंची शिक्षा हासिल कर बड़े अधिकारी बन रहे हैं।

सिद्धू ने आगे कहा कि किसान विंग को पंजाब की 1896 अनाज मंडियों और खरीद केंद्रों की खास जिम्मेदारी सौंपी गई है। किसान विंग के पदाधिकारी सरकारी अधिकारियों से मिलेंगे ताकि यह पक्का किया जा सके कि किसी भी किसान को अपनी फसल बेचने में कोई दिक्कत न हो। उन्होंने आढ़तियों से अपील की कि वे फसल का सही तौल करें और समय पर ‘जे-फॉर्म’ जमा करें। उन्होंने कहा कि मंडियों में किसानों के लिए पानी, बिजली और साफ-सफाई का पूरा इंतजाम होगा।

किसान विंग के महासचिव सतबीर सिंह बख्शीवाला ने पिछली सरकारों से तुलना करते हुए कहा कि पहले किसानों को मंडियों में तीन-चार रातें बितानी पड़ती थीं, लेकिन मान सरकार में फसल का उठान इतनी तेजी से हो रहा है कि किसान को मुश्किल से एक रात भी रुकना नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की हर समस्या का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है और उठान प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रदेश मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि सरकारी खरीद आधिकारिक तौर पर 1 अप्रैल से शुरू हो गई है। खराब मौसम के कारण थोड़ी देरी हुई है, लेकिन आने वाले कुछ दिनों में खरीद और आवक में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा घोषित एक नए पायलट प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि खेतों के बीच में खंभों की समस्या को हल करने के लिए मुख्यमंत्री के पैतृक गांव सतोज से यह प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है, जिसे बाद में पूरे पंजाब में लागू किया जाएगा।

नहर के पानी के मुद्दे पर पन्नू ने कहा कि जब मान सरकार ने शपथ ली थी, तब नहर का पानी सिर्फ़ 22% खेतों तक पहुंचता था, जिसे आज बढ़ाकर 88% कर दिया गया है। हमारा लक्ष्य इसे 90% से आगे ले जाना है। पिछली सरकारें सिर्फ़ ‘पानी के रखवाले’ होने का दिखावा करती थीं, जबकि मान सरकार ने असल में नहर का पानी टेल तक पहुंचाया है। इससे न सिर्फ़ फ़सल की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ग्राउंडवाटर भी बचेगा। उन्होंने दोहराया कि मान सरकार का हर कदम पंजाब के किसानों और युवाओं को बचाने के लिए समर्पित है।

Continue Reading

National

AAP ने जालंधर के अशोक मित्तल को दी बड़ी जिम्मेदारी:राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में बने उपनेता

Published

on

आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में बड़ा संगठनात्मक फैसला लेते हुए राघव चड्ढा को उपनेता के पद से हटा दिया है। अब उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस संबंध में पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को औपचारिक पत्र भी भेज दिया है।

पार्टी द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राघव चड्ढा को उपनेता के पद से हटाया जाए और उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया जाए। इसके साथ ही पार्टी ने यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी के कोटे से सदन में बोलने का समय भी न दिया जाए।

राघव चड्ढा लंबे समय से राज्यसभा में पार्टी के उपनेता के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। वे पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाते रहे हैं। ऐसे में उन्हें पद से हटाने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

पार्टी ने अशोक मित्तल पर भरोसा जताया

वहीं, अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी सौंपते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। अशोक मित्तल राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं और अब उन्हें उपनेता बनाकर पार्टी ने उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी दी है। माना जा रहा है कि वह सदन में पार्टी की रणनीति को मजबूत तरीके से आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

आप के राज्यसभा में 10 सदस्य

 पार्टी के वर्तमान में राज्यसभा में 10 सदस्य हैं, जिनमें सात पंजाब और तीन दिल्ली से हैं। राघव चड्ढा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2012 में अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली लोकपाल विधेयक पर काम करते हुए की थी। वह जल्द ही पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता बने और 2015 के चुनावों के बाद सबसे युवा कोषाध्यक्ष भी बने।

सबसे युवा राज्यसभा सदस्य राघव चड्‌ढा

उन्होंने 2019 में दक्षिणी दिल्ली से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद 2020 में राजेंद्र नगर से विधायक बने और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहे। 2022 में वह 33 वर्ष की उम्र में राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य बने।

उन्होंने संसद में कई अहम मुद्दे उठाए, जिनमें पंचायतों में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी और मासिक स्वच्छता जैसे विषय शामिल हैं। हाल ही में उन्होंने कामगारों की समस्याएं समझने के लिए एक दिन डिलीवरी कर्मी के रूप में भी काम किया।

Continue Reading

Punjab

पंजाब सरकार का बड़ा फैसला, आंगनवाड़ी के 28 हजार से ज्यादा स्मार्टफोन अब ‘ड्रग जनगणना’ में होंगे इस्तेमाल

Published

on

आंगनवाड़ी वर्करों के लिए स्मार्टफोन खरीद को लेकर पहले से चल रहे विवाद ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। पंजाब सरकार ने अब इन स्मार्टफोनों को ड्रग्स जनगणना में लगे एन्यूमरेटरों को देने का फैसला किया है। इस फैसले से पहले ही छह साल की देरी और दो आईएएस अधिकारियों के निलंबन को लेकर यह मामला चर्चा में रहा है।

सरकार ने कुल 28,515 सैमसंग 5G स्मार्टफोन खरीदे थे। इनमें से करीब 28,000 फोन अब ड्रग्स जनगणना के एन्यूमरेटरों को दिए जाएंगे। ये फोन मूल रूप से सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनवाड़ी केंद्रों में वितरित किए जाने थे, लेकिन अब इन्हें ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया है, जो ड्रग्स जनगणना का नोडल विभाग है। इन स्मार्टफोनों की खरीद पर लगभग 57 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और यह योजना केंद्र सरकार की ओर से वित्तपोषित है।

इन स्मार्ट फोनों को कम से कम पांच जिलों में भेजा भी गया था और बाकी जिलों में वितरण की तैयारी थी। इसी बीच सरकार ने इन्हें ड्रग्स जनगणना के लिए उपयोग करने का फैसला लिया। एन्यूमरेटर महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, इसलिए उन्हें इन फोनों की जरूरत है। जनगणना पूरी होने के बाद ये फोन आंगनवाड़ी वर्करों को दे दिए जाएंगे।

संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं, आंगनवाड़ी वर्कर हेल्पर यूनियन की पंजाब अध्यक्ष बरिंदरजीत कौर छीना ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि सोमवार को मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि फोन आंगनवाड़ी वर्करों को दिए जाएंगे, लेकिन अब जानकारी मिली है कि इन्हें ड्रग्स जनगणना में लगाया जा रहा है, जो अनुचित है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी बैठक मंत्री डॉ. बलजीत कौर और विभाग के प्रशासनिक सचिव गुरकीरत किरपाल सिंह के साथ हुई थी, जिसमें उन्हें बताया गया था कि फोन खरीदे जा चुके हैं और वितरण प्रक्रिया शुरू हो रही है।

यह खरीद पोषण अभियान के तहत की गई थी, जो केंद्र सरकार की प्रायोजित योजना है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी वर्करों को फील्ड से डेटा भरने के लिए ऐप के माध्यम से सशक्त बनाना है, ताकि योजना की निगरानी बेहतर ढंग से हो सके।

इस पूरे मामले में देरी को लेकर 7 फरवरी को आईएएस अधिकारी केके यादव और जसप्रीत सिंह को निलंबित किया गया था। उस समय वे क्रमशः उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव और इंफोटेक के एमडी थे। स्मार्टफोन की खरीद प्रक्रिया पंजाब इंफोटेक के जरिए की गई थी, जिसमें अनियमितताओं और देरी की बात सामने आई थी।

शुरुआत में करीब 27,515 स्मार्टफोन के लिए टेंडर जारी किया गया था। उस समय 5G फोन उपलब्ध नहीं थे, इसलिए 4G फोन के लिए प्रक्रिया शुरू हुई और एक कंपनी को एल1 घोषित किया गया। बाद में 5G फोन की जरूरत बताते हुए नया टेंडर जारी किया गया, जिसके खिलाफ कंपनी हाई कोर्ट पहुंची थी। इसके बाद अधिकारियों पर कार्रवाई की गई और खरीद प्रक्रिया को तेज किया गया। प्रत्येक फोन की कीमत करीब 20,000 रुपये बताई गई है।

Continue Reading

Trending