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अरविंद केजरीवाल ने गुजरात CM से मिलने का मांगा समय, जानिए क्या है वजह?

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुजरात में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर सीएम भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर उनसे मिलने का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि गुजरात में पंचायत और नगर पालिका चुनावों के पहले बहुत बड़े स्तर पर हमारे कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से गिरफ्तार किया जा रहा है। 160 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है और अभी 10 हज़ार से ज्यादा को गिरफ़्तार करने की गुजरात सरकार की योजना है। उन्होंने कहा कि “आप” की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा बुरी तरह से बौखलाई हुई है। पर इस तरह की गिरफ़्तारियों और गुंडागर्दी को गुजरात के लोग पसंद नहीं करते। लोग इसका जवाब ज़रूर देंगे।

अरविंद केजरीवाल ने गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले 30 साल से गुजरात में भाजपा की सरकार है। भाजपा के भ्रष्टाचार, अत्याचार और दमन के कुशासन से जनता बहुत परेशान हो चुकी थी। भाजपा गुजरात में कांग्रेस के साथ मिलीभगत से पिछले 30 साल से सरकार चला रही है। जिस कारण गुजरात में कोई विकल्प नहीं था। आम आदमी पार्टी के रूप में लोगों को पहली बार एक मजबूत विकल्प मिला है। लोग जानते हैं, आम आदमी पार्टी एक निडर, ईमानदार, देशभक्त और अच्छे पढ़े-लिखे लोगों की पार्टी है। आम आदमी पार्टी भाजपा से कभी समझौता नहीं करेगी। इसी कारण पिछले कुछ सालों में गुजरात में आम आदमी पार्टी की लोकप्रियता बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। पूरे गुजरात में अब यह आम चर्चा का विषय है कि भाजपा जा रही है, आम आदमी पार्टी की सरकार आ रही है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि इसी कारण भाजपा ने आम आदमी पार्टी के खिलाफ अब एक षडयंत्र रचा है। कि आम आदमी पार्टी के अधिकतर नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लौ, जिससे कि आम आदमी पार्टी ही न बचे। इसी षडयंत्र के तहत पिछले तीन महीनों में गुजरात में आम आदमी पार्टी के 160 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को भाजपा सरकार गिरफ्तार कर चुकी है। इसी कड़ी में 1 अप्रैल को गुजरात पुलिस ने गुजरात में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ईशुदान गढ़वी को भी गिरफ्तार किया और देर रात छोड़ा। वह अपने कार्यकर्ताओं की हो रही अवैध गिरफ्तारी की जानकारी लेने थाने गए थे। गुजरात पुलिस की यह कार्रवाई गुजरात में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव से पहले और तेजी से बढ़ी है। इससे यह संदेश जा रहा है कि भाजपा पुलिस के दम पर स्थानीय निकाय चुनाव जीतना चाहती है।

उन्होंने कहा कि पिछले 48 घंटों में गुजरात पुलिस की आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के पीछे भी एक खास पैटर्न साफ तौर पर दिख रहा है। जिसके तहत आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सड़क पर स्कूटर या मोटर साइकिल में पीछे से आए कुछ गुंडे रोकते है, उनसे मारपीट, गाली गलौज करते हैं। वै गुंडे क्राइम ब्रांच को फोन करते हैं, क्राइम ब्रांच वाले दो मिनट में मौके पर पहुंच जाते हैं और हमारे कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लेते हैं। ऐसे लगता है कि क्राइम ब्रांच वाले आसपास उन गुंडों के फ़ोन का ही इंतज़ार कर रहे हों। क्राइम ब्रांच वाले बिना कुछ पूछताछ के, एक तरफा कार्रवाई करते हुए हमला करने वाले गुंडों को छोड़ देते है और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओ को गुजरात पुलिस के हवाले कर देते हैं जो फिर धारा 307 (हत्या का प्रयास) लगा कर उन्हें जेल भेज देती है। पिछले 48 घंटो में हुए तीन ऐसे मामलो से यह साफ़ प्रतीत होता है की यह सब कुछ एक पूर्व नियोजित साजिश के तहत किया जा रहा है।

1. खंभालिया- 31 मार्च 2026 को दीपक सिंह दोपहर लगभग 3 बजे घर जा रहे थे। तभी 2 लोग बाइक से आए, ओवरटेक किया और मारपीट की। शिकायत दर्ज कराने के लिए जब वह खंभालिका पुलिस स्टेशन पहुंचे तो उन्ही पर केस दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

2. पोरबंदर- 30-31 मार्च 2026 को पवन और जगदीश अपने काम से जा रहे थे, तभी एक स्कूटी सवार ने जानबूझ कर उनकी गाड़ी के आगे स्कूटी लगाकर मारपीट की। पुलिस ने बिना जाँच पवन और जगदीश पर धारा 307 (हत्या का प्रयास) लगा दी। दोनों गिरफ्तार हैं और जेल में हैं।

3. जामनगर- 31 मार्च 2026 को नवीन काकरान, मुन्ना कुमार, आलोक सिंह, पुनीतराज, प्रियव्रत की गाड़ी को एक स्कूटी सवार की ने टच किया। उसने आलोक सिंह से बहस की, धक्का दिया। पुलिस ने पीड़ितों पर ही 307 का केस कर दिया।

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सबसे बड़ी आश्चर्य की बात है कि ये स्कूटर सवार आखिर कौन हैं? इन्हें हर जगह ‘‘आप’’ के कार्यकर्ताओं से टक्कर मारने के लिए कौन भेज रहा है? और हर जगह ऐसा लगता है कि पुलिस उनकी शिकायत पर एक जैसी एफआईआर करने को तैयार बैठी है। इस से साफ जाहिर है कि ये सब एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत हो रहा है। केवल यही तीन मामले नहीं, अभी तक हमारे जितने कार्यकर्ता अन्य मामलों में भी गिरफ्तार किए गए हैं, उन सभी पर लगाएं गए कैस पूरी तरह से झूठे और फर्जी हैं। यही नहीं, आम आदमी पार्टी के सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं के घर पर पुलिस जाकर खुलेआम धमकी दे रहे हैं। उन्हें गुजरात छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जा रही है। उनके परिवारों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्हें विभिन्न तरीकों से डराने की कोशिश की जा रही है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात में आम आदमी पार्टी को खत्म करने की यह साजिश टॉप लेवल पर रची गई है। सुनने में यह भी आ रहा है कि अगले कुछ दिनों में दस हजार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने की योजना है। जिससे स्थानीय निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी उम्मीदवार ही न उतार पाए और भाजपा एक तरफा चुनाव जीत जाए। क्या इस तरह से भाजपा गुजरात में चुनाव जीतना चाहती है? यह तो लोकतंत्र के लिए भद्दा मजाक है। अगर विपक्ष के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाल कर ही चुनाव जीतना है तो चुनाव कराने की ही जरूरत क्या है?

अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। अगर हम चाहे तो पंजाब में हम भी भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को इसी तरह झूठे केस करके जेल में डाल सकते हैं। लेकिन हम ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि हम अच्छे और शरीफ लोग हैं। संविधान में विश्वास रखते हैं। हम गुडागर्दी नहीं करते हैं। और फिर हमें ऐसा करने की जरूरत भी नहीं है। क्योंकि हमने पंजाब में बहुत अच्छे काम किए हैं। अपने कामों से हमने लोगों का दिल जीता है। हम चुनाव अपने कामों के बल पर लड़ते हैं। हम अपने अच्छे काम के नाम पर वोट मांगेंगे। आपको गुजरात में यह दमन इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि आपने सब गलत काम किए हैं, गुंडागर्दी की है, चोरी की है, अत्याचार और दमन किया है। आपने कोई अच्छा काम नहीं किया है। गुजरात की जनता को दिखाने के लिए आपके पास कोई अच्छा काम नहीं है। इसलिए आपको चुनाव जीतने के लिए यह दमन और अत्याचार करना पड़ रहा है।

अंत में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गुजरात की जनता सबकुछ देख रही है। वह भाजपा की तानाशाही से न तो डरेगी और ना ही दबेगी। आप कितने लोगो को जेल में डालोगे? क्या आप गुजरात की पूरी 6 करोड़ जनता को जेल में डाल सकते हो? आज आम आदमी पार्टी की सोच गुजरात के हर घर में पहुंच चुकी है। बीजेपी उसे जितना दबाने की कोशिष करेगी, ‘‘आप’’ की सोच और अधिक फैलेगी। मैं और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान हमारे गुजरात के नेताओं के साथ आपसे मिलना चाहते हैं। उम्मीद है कि आप जल्द से जल्द मिलने का समय देंगे।

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गुरुग्राम में किसने खरीदा ₹271 करोड़ का देश का सबसे महंगा पेंटहाउस!

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भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में गुरुग्राम ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। डीएलएफ के सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट ‘द डहलियास’ में करीब ₹271 करोड़ का पेंटहाउस बिकने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महंगी प्रॉपर्टी को कारोबारी मानव सरदाना ने खरीदा है, जो ‘इंपीरियल ऑटो’ से जुड़े रहे हैं। इस डील ने गुरुग्राम की प्रीमियम रियल एस्टेट मार्केट में नई चर्चा छेड़ दी है।

‘द डहलियास’ को डीएलएफ का सबसे महत्वाकांक्षी सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट 29 मंजिलों वाले 8 टावरों में फैला है, जिसमें कुल 420 अपार्टमेंट्स हैं। इसकी कुल प्रोजेक्ट वैल्यू करीब ₹40,000 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। प्रोजेक्ट को खास तौर पर बेहद हाई-नेट-वर्थ ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ₹271 करोड़ में खरीदे गए इस पेंटहाउस का सुपर एरिया करीब 17,200 वर्ग फीट है, जबकि इसका कारपेट एरिया लगभग 10,500 वर्ग फीट बताया गया है। इस हिसाब से सुपर एरिया के आधार पर इसकी कीमत करीब ₹1.58 लाख प्रति वर्ग फीट और कारपेट एरिया के हिसाब से लगभग ₹2.6 लाख प्रति वर्ग फीट बैठती है।

इतनी बड़ी कीमत के साथ यह सौदा भारत के सबसे महंगे आवासीय संपत्ति लेनदेन में शामिल हो गया है। खास बात यह है कि कारपेट एरिया के हिसाब से कीमत गुरुग्राम को देश के सबसे महंगे रिहायशी बाजारों में शामिल मुंबई की प्रीमियम लोकेशनों के काफी करीब ले आती है।

मुंबई के वर्ली और अन्य प्रमुख इलाकों में भी लग्जरी घरों की कीमतें कई बार ₹2 लाख प्रति वर्ग फीट से ऊपर पहुंच जाती हैं। ऐसे में गुरुग्राम में ₹2.6 लाख प्रति वर्ग फीट के करीब की यह डील शहर में बढ़ती लग्जरी हाउसिंग डिमांड और प्रीमियम प्रॉपर्टी की कीमतों को दर्शाती है।

गुरुग्राम पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रमुख लग्जरी रियल एस्टेट बाजारों में तेजी से उभरा है। बड़े कॉरपोरेट हाउस, उद्योगपति और हाई-नेट-वर्थ खरीदार यहां बड़े आकार के अपार्टमेंट, पेंटहाउस और अल्ट्रा-लक्जरी घरों में निवेश कर रहे हैं। ₹271 करोड़ की यह डील इस बात का संकेत मानी जा रही है कि गुरुग्राम में प्रीमियम प्रॉपर्टी का बाजार अब देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों को टक्कर देने लगा है।

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देश में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ, सिर्फ ‘‘आप’’ लड़ रही आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विश्व आदिवासी दिवस पर देश भर के आदिवासी समाज को बधाई देते हुए कहा कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ है। दूसरी सभी पार्टियों ने आदिवासी समाज के जल, जंगल और ज़मीन पर डाका डाला और उनसे छीन कर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया। केवल आम आदमी पार्टी ही आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ रही है। आज आदिवासी नेता चैतर वसावा एक झूठे केस में जेल में हैं, क्योंकि वे आदिवासी समाज की आवाज़ उठा रहे थे। हम सभी उनके जल्द बाहर आने के लिए प्रार्थना करते हैं।

अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर आदिवासी समाज के लोगों से कहा कि पिछले 75 साल में आदिवासी समाज के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हुआ है। 75 साल में देश ने तरक्की की, बाकी सभी समाज के लोगों ने तरक्की की, लेकिन आदिवासी समाज पीछे रह गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आदिवासी समाज को जानबूझकर पीछे रखा गया। उनके जितने भी संसाधन थे, उन पर डाका डाला गया। जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज का पैदाइशी अधिकार है, लेकिन इन्हें समाज से छीनकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया गया क्योंकि बाकी पार्टियों के नेता चोर और भ्रष्टाचारी थे।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी आपके अधिकारों के लिए लड़ रही है और इसके लिए कितनी ही बार हमारे नेता जेल गए हैं। चैतर वसावा आदिवासी समाज का बेटा और भाई है। वह आदिवासी समाज को हक दिलवाने के लिए न जाने कितनी बार जेल गए हैं। ये लोग पेसा कानून तो ले आए, लेकिन उसे लागू नहीं किया। समाज और ग्राम सभा से पूछे बिना ही ये सारे निर्णय ले लेते हैं। आज चैतर वसावा जेल में है क्योंकि वह आदिवासी समाज के लिए लड़ रहा है। वह जल्दी बाहर आए, इसके लिए प्रार्थना करना।

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बेंगलुरु के 3-Star और 5-Star होटलों में बड़ी फूड सेफ्टी जांच, Expired दूध-मांस और खराब सब्जियां मिलने से मचा हड़कंप

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बेंगलुरु के बड़े और लग्जरी होटलों की रसोइयों में फूड सेफ्टी को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और एफएसएसएआई की टीमों ने शहर के 26 होटलों में अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, खराब मांस और मछली, सड़ी हुई सब्जियां, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए।

इस कार्रवाई के लिए 30 निरीक्षण टीमें तैनात की गई थीं। अधिकारियों ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल लिए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। वहीं, जो खाद्य सामग्री एक्सपायर्ड या इस्तेमाल के लायक नहीं पाई गई, उसे जब्त कर नष्ट कर दिया गया।

जांच के दौरान द ललित अशोक से करीब 76 किलो मांस, 200 किलो सब्जियां और 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध बरामद किया गया। ताज यशवंतपुर से करीब 72 किलो मांस और मछली, जबकि फोर सीजन्स होटल से लगभग 19 किलो मांस मिला। शांगरी-ला होटल से करीब 15 किलो मांस और विवांता बेंगलुरु व्हाइटफील्ड से लगभग 3 किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद हटाए गए।

सबसे बड़ी बरामदगी में से एक रेडिसन ब्लू एट्रिया से हुई, जहां करीब 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिली। इसमें लगभग 50 किलो चिकन, 25 किलो मांस, 23 किलो मछली और 7 किलो सब्जियां शामिल थीं। इसके अलावा कुछ होटलों की रसोई और स्टोरेज एरिया में साफ-सफाई से जुड़ी गंभीर कमियां भी सामने आईं।

अधिकारियों को कुछ सब्जियों पर फंगस मिली, जबकि कई जगह खाद्य सामग्री को सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया था। शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने में भी लापरवाही सामने आई। कुछ उत्पादों पर जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था।

निरीक्षण के दौरान चिकन, मटन, मछली, दूध, खाना पकाने के तेल, मसाले, चीज और सॉस समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं। इनकी प्रयोगशाला जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ फूड सेफ्टी मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।

जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया है, वहां होटल प्रबंधन को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट और निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत बड़े और लग्जरी होटलों से इसलिए की गई है, ताकि यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि होटल चाहे कितना भी बड़ा या महंगा हो, फूड सेफ्टी के नियम सभी के लिए समान हैं।

अब अधिकारियों की नजर उन फूड स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटरों पर भी है, जहां से होटलों और कैटरिंग संस्थानों को खाद्य सामग्री की सप्लाई होती है। बेंगलुरु में हुई इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पूरे मामले की अंतिम तस्वीर प्रयोगशाला रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई के बाद ही साफ होगी।

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