Punjab
ED की कार्रवाई को लेकर पंजाब में सियासी तूफान, AAP ने केंद्र पर उठाए सवाल
संजय अरोड़ा के चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई छापेमारी ने पंजाब की राजनीति में एक नया हलचल भरा माहौल पैदा कर दिया है। यह कार्रवाई अब केवल एक आर्थिक जांच तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, केंद्र और राज्य सरकार के बीच बढ़ते टकराव और आम आदमी पार्टी पर बन रहे राजनीतिक दबाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईडी की टीमें सुबह तड़के संजय अरोड़ा के चंडीगढ़ स्थित आवास पर पहुंचीं। बताया जा रहा है कि अधिकारी कई वाहनों में वहां पहुंचे और काफी समय तक तलाशी अभियान चलाया गया। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इससे जुड़ी अन्य जगहों पर भी एक साथ कार्रवाई की गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब संजय अरोड़ा जांच एजेंसियों के घेरे में आए हों। इससे पहले भी उनके कारोबारी और रिहायशी ठिकानों पर छापेमारी हो चुकी है। उस समय जांच का केंद्र कथित विदेशी मुद्रा नियम उल्लंघन और संपत्ति लेन-देन से जुड़े मामले बताए गए थे। अब ताजा कार्रवाई के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि जांच का दायरा बड़ा हो सकता है।
कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में रियल एस्टेट और औद्योगिक जमीनों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि कुछ औद्योगिक उद्देश्य के लिए दी गई जमीनों का कथित तौर पर अन्य व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किया गया। हालांकि इन दावों पर अभी तक कोई अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है और जांच जारी बताई जा रही है।
इस मामले से जुड़ी मोहाली और खरड़ की कार्रवाइयों ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में “कैश रेन” वाली घटना को बड़े स्तर पर उभारा गया, जिसमें बताया गया कि एक इमारत से नोटों से भरे बैग नीचे फेंके गए और भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई। ये कार्रवाइयां भी उसी बड़े आर्थिक जांच नेटवर्क का हिस्सा बताई जा रही हैं जिसमें पंजाब के कुछ कारोबारी और राजनीतिक नाम चर्चा में हैं।
दूसरी ओर आम आदमी पार्टी इस पूरे मामले को राजनीतिक नजरिए से देख रही है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के अन्य नेता लगातार यह दलील दे रहे हैं कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों की सरकारों पर दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि दिल्ली के बाद अब पंजाब में भी राजनीतिक माहौल प्रभावित करने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस बीच भाजपा द्वारा पंजाब में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाए जाने की बातें भी चर्चा में हैं। पंजाब भाजपा के नेता लगातार कानून-व्यवस्था, प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर आम आदमी पार्टी को घेर रहे हैं। इस कारण यह मामला अब सिर्फ जांच का नहीं, बल्कि पंजाब की आने वाली राजनीतिक दिशा से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।
संजय अरोड़ा को पंजाब सरकार में उद्योग और निवेश से जुड़ा एक अहम चेहरा माना जाता है। उन्हें पंजाब में निवेश लाने और औद्योगिक माहौल बनाने वाले नेता के रूप में प्रोजेक्ट किया जाता रहा है। इसी वजह से उनके खिलाफ हो रही हर कार्रवाई का राजनीतिक असर भी बड़ा माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस मामले को लेकर दो बड़ी धारणाएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष मानता है कि अगर ईडी के पास मजबूत दस्तावेजी या वित्तीय आधार हैं तो जांच आगे बढ़ सकती है और अन्य नाम भी सामने आ सकते हैं। दूसरा पक्ष इसे केंद्र और पंजाब सरकार के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का हिस्सा मान रहा है।
फिलहाल न तो किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि हुई है और न ही ईडी की ओर से कोई अंतिम आरोप सार्वजनिक तौर पर लगाए गए हैं। संजय अरोड़ा पहले भी कह चुके हैं कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। इसके बावजूद पंजाब की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में बड़ी चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि क्या यह सिर्फ एक वित्तीय जांच है या फिर 2027 की पंजाब राजनीति के लिए बन रहे नए राजनीतिक माहौल का शुरुआती संकेत। क्योंकि जैसे-जैसे केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयां बढ़ रही हैं, उसी तरह “केंद्र बनाम पंजाब” वाला राजनीतिक नैरेटिव भी और तेज होता दिखाई दे रहा है।
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पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आज, सुवेंदु अधिकारी बनेंगे मुख्यमंत्री
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक दिन माना जा रहा है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के प्रसिद्ध ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जा रहा है। भाजपा विधायक दल के नेता सुवेंदु अधिकारी आज पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, जबकि अग्निमित्रा निशीथ को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में होने वाला यह शपथ ग्रहण समारोह भाजपा के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत 21 भाजपा-एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी कोलकाता पहुंच चुके हैं।
कोलकाता के बीचों-बीच स्थित ब्रिगेड परेड ग्राउंड में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता जुटने शुरू हो गए हैं। समारोह में आने वाले लोगों के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं और स्थानीय स्तर पर झलमूड़ी समेत अन्य व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
शपथ ग्रहण समारोह को देखते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड और आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है। वहीं भाजपा विधायक दल के नेता सुवेंदु अधिकारी के आवास के बाहर भी सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
गौरतलब है कि भाजपा नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता में घोषणा की थी कि सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री होंगे। भाजपा ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
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Punjab मंत्री के घर ED की रेड, भगवंत मान ने केंद्र पर साधा निशाना
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार सुबह पंजाब सरकार के एक मंत्री के चंडीगढ़ स्थित आवास पर छापेमारी की। जानकारी के मुताबिक ED की टीम करीब 20 गाड़ियों के काफिले के साथ मंत्री के घर पहुंची और कई घंटों तक जांच की गई। बताया जा रहा है कि एक महीने के भीतर मंत्री के घर पर ED की यह दूसरी कार्रवाई है।
इस कार्रवाई के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्रीय एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट में लिखा कि ED पिछले एक साल के दौरान कई बार छापेमारी कर चुकी है, लेकिन अब तक कोई गलत सबूत सामने नहीं आया है।
भगवंत मान ने लिखा,
“आज ED एक बार फिर AAP मंत्री के घर पहुंची है। यह एक साल में तीसरी और एक महीने में दूसरी रेड है। फिर भी उन्हें कुछ नहीं मिला। पंजाब गुरुओं, शहीदों और योद्धाओं की धरती है। औरंगजेब भी पंजाब को झुका नहीं सका। यह भगत सिंह की धरती है, जिसने अंग्रेज हुकूमत के आगे भी सिर नहीं झुकाया। इसलिए पंजाब न पहले कभी झुका है और न ही कभी झुकेगा।”
इससे पहले गुरुवार को भी ED ने मोहाली और चंडीगढ़ में एक साथ करीब 12 स्थानों पर छापेमारी की थी। मोहाली के छज्जू माजरा स्थित वेस्टर्न टावर्स सोसाइटी में आईटी कारोबारी नितिन के अपार्टमेंट पर भी तड़के रेड की गई थी।
सूत्रों के मुताबिक नितिन को मुख्यमंत्री के OSD का करीबी बताया जा रहा है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री भगवंत मान पहले ही साफ कर चुके हैं कि पंजाब सरकार का इन कार्रवाइयों से कोई संबंध नहीं है और वे केंद्रीय एजेंसियों की जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।
फिलहाल ED की ओर से इस छापेमारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक माहौल में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ के तहत कैशलेस इलाज से पंजाब में 5000 से अधिक दिल के मरीजों की जान बचाई गई
दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में हर सेकंड कीमती होता है। कुछ मिनटों की देरी जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकती है। पंजाब में अब समय के साथ चल रही यह जंग लगातार जीती जा रही है, क्योंकि भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत तेज और कैशलेस एंजियोप्लास्टी सेवाएं मरीजों को जरूरत पड़ने पर समय पर यह आपातकालीन इलाज उपलब्ध करवा रही हैं।
हार्ट अटैक केवल एक चिकित्सीय आपातकालीन स्थिति ही नहीं होता, बल्कि यह परिवारों पर आर्थिक बोझ भी डालता है। पहले इलाज के लिए पैसों का प्रबंध करने, जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने और अस्पताल से मंजूरी लेने में परिवारों का कीमती समय बर्बाद हो जाता था। अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है। स्वास्थ्य कार्ड सिस्टम के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की जांच और आपातकालीन एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया, इलाज से पहले भुगतान में होने वाली देरी के बिना, तेजी से पूरी की जा रही है। यह बदलाव विशेष रूप से ‘गोल्डन ऑवर’ — अर्थात हार्ट अटैक के बाद के पहले 60 मिनट — के दौरान कीमती जानें बचाने में निर्णायक साबित हो रहा है।
विश्व स्तर पर हृदय संबंधी बीमारियां मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बनी हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल लगभग 17.9 मिलियन लोगों की मौत हृदय रोगों के कारण होती है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है, जहां इलाज में हुई देरी जानलेवा साबित होती है। पंजाब की स्वास्थ्य प्रणाली अब इस चुनौती से सक्रिय रूप से निपट रही है।
राजभर के डॉक्टरों के अनुसार, दिल की बीमारियों के मामले अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। आरामदायक जीवनशैली, तनाव, अस्वास्थ्यकर खानपान और डायबिटीज के बढ़ते मामले इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं। हालांकि, इसके साथ-साथ हृदय संबंधी बीमारियों के आपातकालीन इलाज तक पहुंच भी पहले से बेहतर हुई है।
स्टेट हेल्थ एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों के दौरान स्वास्थ्य योजना के तहत कुल 5,054 हृदय संबंधी सर्जरियां की गई हैं। इनमें 5,000 परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (पीटीसीए) प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनमें डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम भी शामिल हैं, जबकि 54 मामलों में पेरिफेरल एंजियोप्लास्टी की गई।
इन इलाजों की कुल लागत लगभग 49.6 करोड़ रुपये रही, जिसमें पीटीसीए प्रक्रियाएं संख्या और कुल खर्च दोनों मामलों में सबसे अधिक रहीं।
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस योजना का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “अब अधिक मरीज उन स्थितियों से भी बच रहे हैं, जिन्हें पहले लगभग जानलेवा माना जाता था। ऐसे नाजुक समय में स्वास्थ्य कार्ड सिस्टम के कारण इलाज की तेजी ही राज्य के लिए जीवनरक्षक बन रही है।”
अस्पतालों के कार्डियोलॉजी विभाग को तेजी से नई जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है। आपातकालीन प्रोटोकॉल इस प्रकार सुव्यवस्थित बनाए जा रहे हैं कि हार्ट अटैक के संभावित मरीजों की तुरंत जांच हो सके और प्रशासनिक कार्रवाई में फंसे बिना उन्हें आवश्यक इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और राजिंदरा अस्पताल, पटियाला के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ शर्मा ने कहा, “स्वास्थ्य कार्ड लोगों को समय पर इलाज दिलाने में मदद कर रहा है। इलाज के खर्च को लेकर जो हिचकिचाहट पहले होती थी, वह अब काफी हद तक कम हो गई है। पहले कई परिवार इलाज की लागत को लेकर असमंजस में रहते थे, जिसके कारण प्रक्रिया के लिए मंजूरी देने में देरी होती थी।” डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि कैशलेस सुविधा उपलब्ध होने से यह रुकावट लगभग समाप्त हो चुकी है।
यह बदलाव जिलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पहले मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर किए जाने के कारण खतरनाक देरी का सामना करना पड़ता था। अब योजना के तहत अधिक अस्पतालों के सूचीबद्ध होने और बेहतर सुविधाओं से लैस होने के कारण कई केंद्र लंबी दूरी तक रेफर किए बिना ही एंजियोप्लास्टी शुरू करने में सक्षम हो गए हैं।
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