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माँवां धियां सत्कार योजना’ के तहत लुधियाना रहा लाभार्थियों की सूची में सबसे आगे

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भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार की माँवां धियां सत्कार योजना के तहत लुधियाना सबसे अधिक लाभार्थियों वाला ज़िला बनकर उभरा है। इस योजना के तहत ज़िले में 7.4 लाख लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन किया गया है।

लुधियाना के बाद पटियाला में 5.3 लाख, अमृतसर में 4.9 लाख, जालंधर में 4.8 लाख, गुरदासपुर में 4.4 लाख और होशियारपुर में 4.2 लाख लाभार्थी योजना से जुड़े हैं। राज्य में सबसे कम रजिस्ट्रेशन मालेरकोटला ज़िले में दर्ज किया गया है, जहाँ 1.3 लाख लाभार्थी योजना से जुड़े हैं।

पूरे पंजाब में 14 जुलाई 2026 तक कुल 68.9 लाख लाभार्थियों का इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है।

पंजाब की सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि लुधियाना, पटियाला, अमृतसर, जालंधर, गुरदासपुर और होशियारपुर जैसे ज़िलों में अधिक रजिस्ट्रेशन के पीछे कई कारण हैं, जिनमें अधिक आबादी, मज़बूत प्रशासनिक नेटवर्क और कल्याणकारी योजनाओं के प्रति अधिक जागरूकता शामिल हैं। उन्होंने कहा, “योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए पूरी सरकारी मशीनरी मिलकर काम कर रही है।”

अधिक रेजिस्ट्रेशनों के पीछे बड़ी जनसंख्या एक प्रमुख कारण है। इन ज़िलों में शहरी और ग्रामीण आबादी अधिक है, विधानसभा क्षेत्रों की संख्या अधिक है और पात्र परिवारों की संख्या भी अधिक है, जिससे लाभार्थियों की संख्या स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। लुधियाना, अमृतसर और जालंधर जैसे बड़े शहर रोज़गार, शिक्षा और आजीविका के अवसरों के लिए आसपास के ज़िलों के लोगों को भी आकर्षित करते हैं, जिससे यहाँ रहने वाली आबादी में वृद्धि होती है।

इन ज़िलों में परिवार ज़्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों से संबंधित हैं, जिससे बेटियों वाले परिवारों को सहायता प्रदान करने वाली कल्याणकारी योजनाओं के लिए पात्र लाभार्थियों की संख्या बढ़ती है। जन्म पंजीकरण, आधार नामांकन, बैंक ख़ातों की उपलब्धता और अन्य आवश्यक दस्तावेज़ों की बेहतर व्यवस्था ने भी अधिक पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ लेने में मदद की है।

ज़िला प्रशासन ने जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ स्थानीय निकायों (लोकल बॉडीज़) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से पात्र परिवारों को आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया है। अधिकारियों ने आवेदनों के वेरिफिकेशन और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया, जिससे लाभार्थियों की संख्या बढ़ी है।

इसके विपरीत, मालेरकोटला जैसे कम आबादी वाले ज़िलों में लाभार्थियों की संख्या कम दर्ज की गई है। कम जनसंख्या और पात्र परिवारों की अपेक्षाकृत संख्या के कारण इन ज़िलों में पंजीकरण भी कम रहा है।

ज़िला-वार दर्ज किए गए लाभार्थी

क्रम संख्या ज़िला लाभार्थी (लाख में)

1 अमृतसर 4.9

2 बरनाला 1.6

3 बठिंडा 3.8

4 फ़रीदकोट 1.8

5 फ़तेहगढ़ साहिब 1.5

6 फ़ाज़िल्का 2.9

7 फ़िरोज़पुर 2.5

8 गुरदासपुर 4.4

9 होशियारपुर 4.2

10 जालंधर 4.8

11 कपूरथला 1.7

12 लुधियाना 7.4

13 मालेरकोटला 1.3

14 मानसा 2.4

15 मोगा 2.6

16 पठानकोट 1.8

17 पटियाला 5.3

18 रूपनगर 1.8

19 एस.ए.एस. नगर (मोहाली) 1.7

20 एस.बी.एस. नगर (नवांशहर) 1.6

21 संगरूर 3.6

22 श्री मुक्तसर साहिब 2.7

23 तरनतारन 2.6

कुल दर्ज किए गए लाभार्थी: 68.9 लाख

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लोक-कल्याण की सीमाओं से आगे: कैसे ‘मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना’ बनी पंजाब का नया सोशल मीडिया ट्रेंड

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मोबाइल पर सुनाई देने वाली परिचित ‘टूँ -टूँ’ नोटिफिकेशन की आवाज अब पंजाब में महज़ एक अलर्ट नहीं रह गई है। यह हजारों सोशल मीडिया रीलों की पहचान बन चुकी है, जिनमें पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना का जश्न मनाया जा रहा है। गांवों के आंगनों से लेकर शहरों की चहल-पहल तक महिलाएं गुनगुना रही हैं, नृत्य कर रही हैं, हास्य-व्यंग्य कर रही हैं और इस योजना से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रही हैं। उन्होंने एक कल्याणकारी योजना को राज्य के सबसे अनोखे डिजिटल ट्रेंड में बदल दिया है।

आमतौर पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की चर्चा नीति घोषणाओं, बजट आवंटन, लाभार्थियों की संख्या और आधिकारिक प्रचार अभियानों तक ही सीमित रहती है। बहुत कम ऐसा होता है कि स्वयं लाभार्थी ही किसी योजना के सबसे बड़े प्रचारक बन जाएं। मावां धियां सत्कार योजना ने इस परंपरा को बदल दिया है।

पूरे पंजाब में महिलाएं इस योजना से प्रेरित हास्य रीलें, डांस वीडियो, लिप-सिंक प्रस्तुतियां और रचनात्मक सोशल मीडिया पोस्ट तैयार कर रही हैं। उन्होंने इस योजना को जमीनी स्तर पर एक सोशल मीडिया आंदोलन का रूप दे दिया है।

इस ट्रेंड की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह स्वाभाविक (ऑर्गेनिक) है। इसे आगे बढ़ाने के लिए न तो किसी सेलिब्रिटी का सहारा लिया गया है और न ही किसी पेड इन्फ्लुएंसर का। इसके बजाय लाभार्थी महिलाएं स्वयं ट्रेंडिंग ऑडियो, लोकप्रिय रील फॉर्मेट और रोजमर्रा के हास्य के माध्यम से अपनी खुशी अपनी स्थानीय बोली में व्यक्त कर रही हैं, जिससे इस ट्रेंड को एक अलग पंजाबी रंग मिला है। ये वीडियो दोस्तों और परिवारों के बीच तेजी से साझा किए जा रहे हैं और अब ‘टूँ-टूँ ‘ की आवाज घरों, गलियों और बाजारों में गूंजने लगी है।

इस पूरी प्रक्रिया में महिलाएं इस योजना की सबसे प्रभावी संचारक बनकर उभरी हैं। वे अपनी रचनात्मकता और निजी अनुभवों के जरिए अपने सामाजिक दायरे में योजना का परिचय करा रही हैं। हर रील न केवल किसी एक व्यक्ति के अनुभव को सामने लाती है, बल्कि पीयर-टू-पीयर शेयरिंग के माध्यम से जागरूकता भी बढ़ाती है और उन लोगों तक पहुंचती है, जहां पारंपरिक प्रचार अभियान अक्सर नहीं पहुंच पाते।

सोशल मीडिया पर छाए एक लोकप्रिय गीत की शुरुआत इन चर्चित पंक्तियों से होती है—

“टूँ -टूँ बजे… टूँ-टूँ बजे…”

एक अन्य लोकप्रिय गीत मजाकिया अंदाज में कल्पना करता है कि पैसे आने के बाद खरीदारी कैसी होगी—

“देखना लिफाफों में सूट आएंगे मित्रा, जब टूँ -टूँ होगी…”

इन आकर्षक धुनों और गीतों ने हजारों महिलाओं को अपने-अपने संस्करण बनाने के लिए प्रेरित किया है और अब ये गीत इस योजना की पहचान बन चुके हैं।

इस ट्रेंड ने पुरुषों को भी हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित किया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक रैप में वे मजाकिया अंदाज में पूछते हैं कि लाभ केवल महिलाओं को ही क्यों मिल रहा है—

“सीएम मान को मेरा सीधा-सा संदेश पहुंचा दो,

पुरुषों के खाते में भी 500 रुपये डाल दो।

सारा पैसा सिर्फ बीबियों पर ही मत लगा दो,

हमें भी थोड़ा-बहुत ‘टूँ-टूँ ’ सुना दो।”

यह हास्य दर्शाता है कि यह योजना अब लोगों की रोजमर्रा की बातचीत का हिस्सा बन चुकी है। एक कल्याणकारी योजना अब सांस्कृतिक चर्चा का विषय बन गई है, जिसने मनोरंजक, सहज और व्यापक रूप से साझा किए जाने वाले डिजिटल कंटेंट को जन्म दिया है।

इन रीलों की लोकप्रियता यह भी दिखाती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म किस तरह जनसंचार का स्वरूप बदल रहे हैं। छोटे वीडियो वाले मंच अब केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहे। वे ऐसे मंच बनते जा रहे हैं, जहां आम नागरिक अपनी आवाज, हास्य और अनुभवों के माध्यम से सरकारी नीतियों को अपने अंदाज में प्रस्तुत करते हैं और कई बार पारंपरिक प्रचार से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से योजनाओं को लोगों तक पहुंचाते हैं।

संचार विशेषज्ञ लंबे समय से मानते रहे हैं कि सबसे प्रभावी अभियान वही होता है, जिसमें लोग स्वेच्छा से भागीदारी करें। मावां धियां सत्कार योजना इस कसौटी पर खरी उतरती दिखाई देती है। इसके लाभार्थी अब केवल किसी कल्याणकारी योजना के प्राप्तकर्ता भर नहीं रह गए हैं, बल्कि वे कहानीकार, कंटेंट क्रिएटर और अनजाने में ही योजना के सबसे विश्वसनीय ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं। उनकी भागीदारी इस योजना को प्रामाणिकता प्रदान करती है और परिवारों, पड़ोस तथा समुदायों के बीच इस पर संवाद और चर्चा को भी बढ़ावा देती है।

मावां धियां का यह अनुभव पंजाब की उस पुरानी परंपरा को भी दर्शाता है, जिसमें सामाजिक परिवर्तन को संगीत, हास्य और कहानी कहने की कला के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस परंपरा को एक नया मंच प्रदान किया है। लोकप्रिय संस्कृति और व्यक्तिगत अनुभवों के मेल से महिलाओं ने एक कल्याणकारी योजना को एक जीवंत ऑनलाइन आंदोलन में बदल दिया है, जो आर्थिक सहायता का जश्न गर्व, रचनात्मकता और आशावाद के साथ मना रहा है।

जैसे-जैसे सरकारें नागरिकों से अधिक सार्थक तरीके से जुड़ने के नए रास्ते तलाश रही हैं, मावां धियां सत्कार योजना एक महत्वपूर्ण सीख प्रस्तुत करती है। सबसे प्रभावशाली संवाद अक्सर विज्ञापन एजेंसियों या आधिकारिक प्रचार अभियानों से नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज़ से जन्म लेता है, जिनके जीवन पर किसी नीति का प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। पंजाब में लाभार्थियों ने एक कल्याणकारी योजना को जन-चर्चा में बदल दिया है—एक ऐसा संवाद , जो सरकारी नारों के बजाय वास्तविक आवाज़ों, साझा अनुभवों और ‘टूँ -टूँ ‘ की परिचित धुन के माध्यम से फैल रहा है।

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जनता के सहयोग से पंजाब को हर क्षेत्र में नंबर एक बनाने का सफर जारी रहेगा: CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज दावा किया कि पंजाब को हर क्षेत्र में देश का नंबर एक राज्य बनाने का सफर यहाँ के लोगों के सहयोग और विश्वास से निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और समाज कल्याण के क्षेत्रों में क्रांतिकारी पहलों के माध्यम से लोगों से किया हर वादा पूरा किया है। मुकेरियाँ हल्के में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सियासत सत्ता का सुख भोगने के लिए नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों की तरक्की और खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहाँ उनकी सरकार लोगों को अधिक अधिकार देकर अपने वादे पूरे करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं कांग्रेस सत्ता की लड़ाई में उलझी हुई है और उसने पहले ही ऐलान कर दिया है कि अगर वह सत्ता में आई तो कल्याणकारी योजनाओं को बंद करेगी। भगवंत सिंह मान ने दोहराया कि श्री गुरु साहिब की बेअदबी के लिए जिम्मेदार लोगों को माफ नहीं किया जाएगा और उन्हें कानून का सामना करना पड़ेगा।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कांग्रेस में कोई भी नेता दूसरे के साथ खड़े होने को तैयार नहीं है क्योंकि हर कोई लोगों की परवाह किए बिना मुख्यमंत्री बनना चाहता है। कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि उनके सभी नेता बस यात्रा पर जाएँगे, जिसे राहुल गांधी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। वे साथ जा तो सकते हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से साथ वापस नहीं आएँगे क्योंकि अपनी भयानक आंतरिक लड़ाई के कारण हर नेता ज़ख्मी हो जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे ‘आप’ के लोक-पक्षीय कार्यों के आधार पर पार्टी को इतना बड़ा जनादेश दें कि इन मौकापरस्त नेताओं को सरकार बनाने और मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए लड़ने का मौका ही न मिले। उन्होंने कहा, “इन लालची नेताओं के हाथों में सत्ता न सौंपें क्योंकि ये ‘आप’ सरकार द्वारा जनकल्याण के लिए शुरू की गई सभी योजनाओं को बंद कर देंगे। कांग्रेसी नेताओं ने बार-बार दावा किया है कि अगर वे सत्ता में आए तो इन योजनाओं को बंद कर देंगे।”

अकाली दल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अकाली दल लोगों से झूठे वादे करके सत्ता हथियाना चाहता है, लेकिन पंजाब के लोग उनके भ्रामक प्रचार में नहीं आएँगे। लोगों ने बादलों को पाँच बार मुख्यमंत्री चुना, लेकिन उन्होंने राज्य या इसके लोगों के लिए कभी कुछ अच्छा नहीं किया।”

अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “अकाली नेता लोगों के बीच अपना आधार खो चुके हैं। वे अपनी रैलियों में भीड़ दिखाने के लिए पैसे देकर लाए गए कार्यकर्ताओं का उपयोग कर रहे हैं। हर अकाली रैली में वही भीड़ नज़र आती है। ये लोग कभी दावा करते थे कि वे पंजाब पर 25 साल राज करेंगे, लेकिन राज्य के समझदार और बहादुर लोगों ने उन्हें राजनीतिक गुमनामी में धकेल दिया है। ये मौकापरस्त नेता अपनी सुविधा और निजी राजनीतिक हितों के अनुसार रंग और अपना रुख बदलते हैं। पूरा राज्य इनका असली चेहरा जानता है क्योंकि इन्होंने हमेशा राजनीतिक नाटकबाज़ी के माध्यम से लोगों को गुमराह किया है।”

उन्होंने कहा, “जिन्हें कभी अजेय माना जाता था, आज उन्हें अपनी पार्टी की कमेटी बनाने के लिए पाँच सदस्य भी नहीं मिल रहे। इन नेताओं ने राज्य में गैंगस्टरों को पनाह दी और नशा तस्करों की पीठ थपथपाकर युवाओं को नशों के दलदल में धकेला। पंजाब के लोग इन गुनाहों के लिए उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे और एक बार फिर उन्हें करारा सबक सिखाएँगे। लोगों ने अकालियों को बार-बार चुना, लेकिन उन्होंने राज्य और इसके लोगों के साथ विश्वासघात किया।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जोर देकर कहा, “अकाली पंजाब के असली गद्दार हैं क्योंकि उन्होंने अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया। वे आम लोगों के लिए बनी सुविधाओं को हड़पकर अमीर बन गए। उनके लंबे शासन के दौरान राज्य बदहाल हो गया और माफियाओं का राज रहा। दिवंगत प्रकाश सिंह बादल ने भी सुखबीर सिंह बादल को राज्य का मुखिया नहीं बनाया क्योंकि वे जानते थे कि पूर्व उपमुख्यमंत्री, पंजाब को बर्बादी के किनारे पर ले जाएँगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों के टैक्स का पैसा राज्य का है और इसे उनकी भलाई के लिए समझदारी से खर्च किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा, “लोगों का पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के माध्यम से लोगों के पास वापस जा रहा है। हमारी सरकार लोगों के लिए काम कर रही है। हमने 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली दी है, बिना किसी भ्रष्टाचार के 68,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियाँ दी हैं, सड़कों को सुधारा है, टोल प्लाज़ा बंद करके रोज़ाना 70 लाख रुपये बचाए हैं और पूरे राज्य में बुनियादी ढाँचे का निर्माण कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब सिंचाई के लिए केवल 22 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग होता था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 88 प्रतिशत से अधिक हो गया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “नहरों और नदियों में रिचार्ज प्वाइंट बनाए गए हैं ताकि भूजल स्तर में सुधार हो सके। इसके परिणामस्वरूप भूजल स्तर दो से चार मीटर तक ऊपर आया है। यह कार्य आने वाली पीढ़ियों के हित में किया गया है, क्योंकि पंजाब का अर्थ ही पानी है और पानी के बिना पंजाब का कोई अस्तित्व नहीं है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कोई भी मुफ्त सुविधा या रियायती कार्ड गरीबी अथवा अन्य सामाजिक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। शिक्षा ही वह कुंजी है, जो लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाकर उन्हें इस दुष्चक्र से बाहर निकाल सकती है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य सरकार के अथक प्रयासों के कारण पंजाब ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। हमने प्राथमिक और मिडिल स्कूलों का उन्नयन किया है, शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया है, स्मार्ट कक्षाएं शुरू की हैं तथा शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान किया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप पंजाब स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। नीति आयोग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर प्रथम स्थान हासिल किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “पिछले चार वर्षों से हमारी सरकार ने शिक्षकों के प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और स्मार्ट कक्षाओं पर विशेष ध्यान दिया है। पहले केरल शीर्ष स्थान पर था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से पहला स्थान हासिल किया है। भविष्य में भी हम ऐसे प्रयास जारी रखेंगे। शिक्षा वह प्रकाश है, जो अंधकार को दूर कर संसार को आलोकित करती है। इसी कारण हमारी सरकार शिक्षा पर विशेष बल दे रही है।”

राज्य सरकार की स्वास्थ्य संबंधी पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की है, जिसके तहत पंजाब के सभी 65 लाख परिवारों को हेल्थ कार्ड जारी किए जा रहे हैं। प्रत्येक परिवार 10 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार का पात्र है। अब तक 30 लाख से अधिक लाभार्थियों को उनके हेल्थ कार्ड मिल चुके हैं और इस योजना के अंतर्गत लोग लगभग 650 करोड़ रुपये का मुफ्त उपचार प्राप्त कर चुके हैं। मैं सभी पात्र परिवारों से आग्रह करता हूं कि वे इन हेल्थ कार्डों का अधिकतम लाभ उठाएं।”

मुख्यमंत्री ने बताया, “पंजाब के इतिहास में पहली बार धान (धान/पैडी) के सीजन के दौरान ट्यूबवेलों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली आपूर्ति दी गई है। पहली बार किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली मिल रही है, जिससे उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है।”

‘मांवां -धीयां सत्कार योजना’ का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार ने यह महत्वपूर्ण योजना शुरू की है, जिसके तहत पंजाब की 18 वर्ष से अधिक आयु की प्रत्येक महिला को 1,000 रुपये प्रतिमाह तथा अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। पात्र लाभार्थियों को 1 जुलाई से इसका लाभ मिलना शुरू हो गया है। 32 लाख से अधिक माताएं इस सुविधा का लाभ उठा रही हैं और 1 अगस्त को उनके मोबाइल फोन पर एक बार फिर भुगतान का संदेश प्राप्त होगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जनकल्याण के उद्देश्य से चलाई जा रही इन महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए राज्य सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “जो महिलाएं जुलाई में पंजीकरण नहीं करा सकीं, उन्हें अगस्त में तीन महीनों की राशि एक साथ प्रदान की जाएगी। यह योजना कभी बंद नहीं होगी। जब तक आम आदमी पार्टी की सरकार सत्ता में रहेगी, यह योजना जारी रहेगी।”

इस जनसभा को लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने का सुनहरा अवसर बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता से बातचीत का एक मंच है। कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन किसी ने भी लोगों के कल्याण की वास्तविक चिंता नहीं की। वे राज्य की संपत्ति लूटते रहे और केवल सत्ता की राजनीति करते रहे। इसके बाद लोगों ने झाड़ू को वोट दिया, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक सेवाओं में व्यापक परिवर्तन आया।”

अपने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जनसभा के कुछ अंश साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मुकेरियां की पवित्र धरती पर मुझे जो प्रेम, स्नेह और विश्वास मिला है, वही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। हम अपने किए गए प्रत्येक वादे को पूरा कर रहे हैं। मुफ्त बिजली, बेहतर सरकारी स्कूल, महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता, व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं, किसानों को दिन में बिजली की आपूर्ति तथा समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास अब वास्तविकता बन चुके हैं। मेरी राजनीति सत्ता प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि पंजाब के लोगों की प्रगति और समृद्धि के लिए है। आपका विश्वास हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आइए, हम सब मिलकर पंजाब को एक बार फिर हर क्षेत्र में देश का नंबर एक राज्य बनाने की इस यात्रा को आगे बढ़ाएं।

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर केजरीवाल का बड़ा ऐलान, देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू करेंगे

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आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग के लिए जनता का समर्थन जुटाना है।

रविवार को दिल्ली के रोहिणी स्थित जापानी पार्क में आयोजित सुंदरकांड पाठ के दौरान केजरीवाल ने कहा कि भगवान हनुमान से प्रार्थना की जाएगी कि श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। उन्होंने बताया कि सुंदरकांड पाठ के बाद पूरे देश में हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की जाएगी।

इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लोगों से सुंदरकांड पाठ में शामिल होने की अपील भी की थी। उन्होंने कहा कि यह अभियान धार्मिक आस्था और पारदर्शिता दोनों से जुड़ा है।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने इस कार्यक्रम को लेकर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने आरोप लगाया कि सुंदरकांड पाठ का आयोजन धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से किया गया है। उनका कहना है कि पंजाब समेत अन्य राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

हर्ष मल्होत्रा ने यह भी सवाल उठाया कि वर्ष 2024 में दिल्ली सरकार ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में साप्ताहिक सुंदरकांड पाठ आयोजित करने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में यह पहल क्यों बंद कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अब धार्मिक आयोजनों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।

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