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स्वास्थ्य सेवाएँ पंजाब के हर नागरिक के लिए ; ‘सेहत कार्ड’ के लिए आयु, लिंग या आय की कोई बाधा नहीं : Dr. Balbir Singh

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चिकित्सकीय आपात स्थिति अक्सर बिना किसी पूर्व चेतावनी के आती है; जो परिवारों को न केवल स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, बल्कि इलाज के खर्च के बोझ की चिंता में धकेल देती है l इस चुनौती से निपटने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ की शुरुआत की, जिसका स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब के परिवार बिना किसी आर्थिक चिंता के समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त कर सकें।

भगवंत मान सरकार की प्रतिबद्धता ‘सेहत कार्ड’ के माध्यम से साकार हो रही है, जो पूरे राज्य में परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनमें विश्वास पैदा कर रहा है। गाँवों, कस्बों और शहरों में चल रहे व्यापक पंजीकरण अभियानों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 50,000 सेहत कार्ड जारी किए जा रहे हैं।

योजना की समावेशी प्रकृति और बढ़ती पहुँच को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “सेहत कार्ड सभी के लिए है; इसमें आयु, लिंग या आय की कोई बाधा नहीं है। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ रही है, अधिक परिवार कवरेज प्राप्त करने और अप्रत्याशित चिकित्सा खर्चों से खुद को सुरक्षित करने के लिए आगे आ रहे हैं।”

उन्होंने आगे बताया कि इस योजना के तहत अब तक 2 लाख से अधिक उपचार किए जा चुके हैं, जिनमें कैंसर उपचार, हृदय संबंधी हस्तक्षेप और अस्थि शल्य चिकित्सा (ऑर्थोपेडिक सर्जरी)जैसे महत्त्वपूर्ण उपचार शामिल हैं। “अब तक इस योजना के तहत ₹300 करोड़ से अधिक लागत के उपचार प्रदान किए जा चुके हैं, जिसे और मजबूत करने के लिए पंजाब बजट 2026–27 में ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, ताकि इसके लाभों को बनाए रखा जा सके और उनका विस्तार किया जा सके,” उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत परिवारों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का नकदरहित उपचार प्राप्त होता है, जिससे किसी भी मरीज को आर्थिक बाधाओं या आपात स्थिति में पैसों की कमी के कारण इलाज में देरी न करनी पड़े।

अधिकतम पहुँच सुनिश्चित करने और प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पंजाब सरकार द्वारा प्रतिदिन सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक गुरुद्वारों, पंचायत घरों, मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों जैसे सुलभ स्थानों पर पंजीकरण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। ये शिविर विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु बनाए गए हैं, जिन्हें औपचारिक केंद्रों तक पहुँचने में कठिनाई हो सकती है।

नागरिकों के लिए स्पष्ट रणनीति प्रदान करते हुए, पंजाब सरकार ने पंजीकरण के लिए एक सरल छह-चरणीय प्रक्रिया भी निर्धारित की है। निवासी बिना किसी पूर्व नियुक्ति के निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर , सरकारी पंजीकरण शिविर या सेवा केंद्र पर सीधे जा सकते हैं। आवेदकों को आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी और नाबालिगों के लिए जन्म प्रमाण पत्र साथ लाने होंगे; ताकि परिवार के सभी सदस्य(जो पंजाब के निवासी होने चाहिए) योजना के अंतर्गत कवर हो सकें।

यह योजना प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख की साझा कवरेज प्रदान करती है, इसलिए सभी सदस्यों का एक साथ पंजीकरण करवाना आवश्यक है। पंजीकरण स्थल पर अधिकारी प्रक्रिया पूरी करने में सहायता करते हैं, जिसके बाद लाभार्थियों को सेहत कार्ड सक्रिय होने की पुष्टि हेतु एसएमएस (SMS) प्राप्त होता है।

इसके अतिरिक्त, सुगम पंजीकरण के लिए निवासियों को आधार कार्ड, वोटर आईडी, स्मार्ट राशन कार्ड (यदि उपलब्ध हों) और किसानों के लिए जे-फॉर्म (यदि लागू हो) जैसे सहायक दस्तावेज साथ लाने की सलाह दी जाती है।

सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, पंजाब सरकार निवासियों को निर्दिष्ट केंद्रों और ज़मीनी स्तर के शिविरों के माध्यम से सेहत कार्ड के लिए पंजीकरण करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है, ताकि हर परिवार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत नकदरहित उपचार का लाभ उठा सके।

सरल मार्गदर्शिका: छह चरणों में सेहत कार्ड के लिए पंजीकरण करें

चरण 1: किसी अपॉइंटमेंट की आवश्यकता नहींl

आप सीधे किसी केंद्र या शिविर में जाकर पंजीकरण करवा सकते हैं।

चरण 2: पंजीकरण स्थल पर जाएँ l

• आप जा सकते हैं :

-निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर

-सरकारी पंजीकरण शिविर पर

-सेवा केंद्र पर

चरण 3: आवश्यक दस्तावेज साथ लाएँ l

परिवार के सभी सदस्यों के लिए निम्नलिखित दस्तावेज साथ लाएँ:

• आधार कार्ड

• वोटर आईडी

• नाबालिगों के लिए जन्म प्रमाण -पत्र

• सभी सदस्य पंजाब के निवासी होने चाहिए

चरण 4: पारिवारिक कवरेज को समझें

• यह योजना प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कवर प्रदान करती है। यह राशि परिवार के सभी सदस्यों के बीच साझा होती है, इसलिए सभी के लिए दस्तावेज़ साथ लाना महत्त्वपूर्ण है।

चरण 5: पंजीकरण पूरा करें

• केंद्र या शिविर में अधिकारी आपकी जानकारी दर्ज करने और प्रक्रिया पूरी करने में आपकी सहायता करेंगे।

चरण 6: पुष्टि प्राप्त करें

• पंजीकरण होने के बाद आपको एक एसएमएस प्राप्त होगा, जो आपके सेहत कार्ड लाभों के सक्रिय होने की पुष्टि करेगा।

साथ लाने वाले दस्तावेज:

• आधार कार्ड (पहचान और पते का प्रमाण- पत्र)

• वोटर आईडी

• स्मार्ट राशन कार्ड (यदि उपलब्ध हो)

• जे-फॉर्म (किसानों के लिए, यदि लागू हो)

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आप सांसद मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी साइनबोर्ड फिर से लगाने के फैसले का किया स्वागत

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आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अपने कैंपस में पंजाबी साइनबोर्ड और नेमप्लेट फिर से लगाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे पंजाब की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया।

कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में साइनबोर्ड और नेमप्लेट से पंजाबी (गुरुमुखी) हटाने पर कड़ा एतराज़ जताया था। उन्होंने इस कदम को पंजाब के इतिहास, संस्कृति और पहचान को दिखाने वाली भाषा का अपमान बताया।

इस मामले को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, सीपी राधाकृष्णन के सामने उठाते हुए, कंग ने उनसे तुरंत दखल देने की मांग की ताकि पंजाबी को उसकी सही जगह और सम्मान मिले, खासकर एक ऐसे संस्थान में जो पंजाब के नाम और विरासत को बनाए रखता है।

इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए, कंग ने कहा कि उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से एक ऑफिशियल लेटर मिला है, जिसमें कन्फर्म किया गया है कि पंजाबी साइनबोर्ड लगाने का प्रोसेस शुरू हो चुका है। लेटर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पंजाबी साइनबोर्ड के लिए ऑर्डर दे दिया है और उन्हें लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

इस फैसले का स्वागत करते हुए, कंग ने कहा कि इससे एक मजबूत संदेस जाता है कि पंजाब के वजूद और पंजाबी भाषा की इज्ज़त को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि पंजाबी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि पंजाब की रिच कल्चरल विरासत और सामूहिक पहचान की निशानी है, जिसका हर लेवल पर सम्मान किया जाना चाहिए और उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कंग ने इस मामले पर तुरंत ध्यान देने के लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, श्री सी. पी. राधाकृष्णन का धन्यवाद किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी तारीफ़ की कि उन्होंने सुधार के कदम उठाए और पंजाब के लोगों की चिंताओं पर पॉज़िटिव जवाब दिया।

आप सांसद ने कहा कि पंजाब से जुड़े हर संस्थान में पंजाबी के सम्मान, अहमियत और हक की हमेशा रक्षा होनी चाहिए।

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मोहाली को मिला नया मेयर, विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत समाना ने संभाली कमान

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मोहाली नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह समाना को मेयर चुना गया। वहीं आर.पी. शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर और हरपाल चन्नी को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा, विधायक कुलवंत सिंह और पार्टी नेता डॉ. सन्नी आहलूवालिया ने सरबजीत समाना को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

मेयर पद को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। शुरुआत में डॉ. सन्नी आहलूवालिया को इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी नेतृत्व से करीबी संबंधों के चलते उनका नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदले और सरबजीत समाना को उम्मीदवार बनाया गया।

बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले विधायक कुलवंत सिंह ने पार्टी पार्षदों के साथ लगातार बैठकें कीं। नगर निगम चुनाव जीतने वाले कई पार्षद उनके करीबी सहयोगी माने जाते हैं, जिससे मेयर पद की दौड़ में उनके बेटे का पलड़ा भारी रहा।

पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पंजाब आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा खुद नगर निगम कार्यालय पहुंचे और उनकी मौजूदगी में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।

दूसरी ओर, मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया, जबकि शिरोमणि अकाली दल के पार्षद बैठक के दौरान वॉकआउट कर गए। इसके चलते चुनावी माहौल काफी गर्म रहा।

चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी पार्षदों के मोबाइल फोन नगर निगम कार्यालय के बाहर जमा कराए गए और रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ही उन्हें बैठक कक्ष में प्रवेश दिया गया।

सरबजीत सिंह समाना के मेयर बनने के साथ ही मोहाली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पकड़ और मजबूत हो गई है। अब शहर के विकास कार्यों और नगर निगम की आगामी योजनाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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अकाली दल को बड़ा झटका! मनप्रीत इयाली ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल

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पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दाखा से शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह इयाली मंगलवार को औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उनके इस फैसले को पंजाब की पंथक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त और पद की अपेक्षा के इस मंच का साथ चुना है। उनका उद्देश्य पंजाब की पंथक और क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करना तथा राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाना है।

इयाली ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी रूप से वह अभी भी शिरोमणि अकाली दल के विधायक हैं। उन्होंने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ फिलहाल एक सामाजिक और संगठनात्मक मंच है, न कि चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल, इसलिए विधायक पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता।

उन्होंने कहा कि पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनमें राज्य के पानी का मुद्दा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों का मामला, चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार और अन्य क्षेत्रीय हित शामिल हैं। इन मुद्दों को नई ऊर्जा और मजबूती के साथ उठाया जाएगा।

मनप्रीत इयाली ने कहा कि पंजाब, पंजाबी पहचान और पंथक विचारधारा को मजबूत करने के लिए समान सोच रखने वाली सभी ताकतों को एक मंच पर आने की जरूरत है। उनके इस कदम के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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