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स्वास्थ्य सेवाएँ पंजाब के हर नागरिक के लिए ; ‘सेहत कार्ड’ के लिए आयु, लिंग या आय की कोई बाधा नहीं : Dr. Balbir Singh

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चिकित्सकीय आपात स्थिति अक्सर बिना किसी पूर्व चेतावनी के आती है; जो परिवारों को न केवल स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, बल्कि इलाज के खर्च के बोझ की चिंता में धकेल देती है l इस चुनौती से निपटने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ की शुरुआत की, जिसका स्पष्ट उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब के परिवार बिना किसी आर्थिक चिंता के समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ प्राप्त कर सकें।

भगवंत मान सरकार की प्रतिबद्धता ‘सेहत कार्ड’ के माध्यम से साकार हो रही है, जो पूरे राज्य में परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ उनमें विश्वास पैदा कर रहा है। गाँवों, कस्बों और शहरों में चल रहे व्यापक पंजीकरण अभियानों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 50,000 सेहत कार्ड जारी किए जा रहे हैं।

योजना की समावेशी प्रकृति और बढ़ती पहुँच को रेखांकित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “सेहत कार्ड सभी के लिए है; इसमें आयु, लिंग या आय की कोई बाधा नहीं है। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ रही है, अधिक परिवार कवरेज प्राप्त करने और अप्रत्याशित चिकित्सा खर्चों से खुद को सुरक्षित करने के लिए आगे आ रहे हैं।”

उन्होंने आगे बताया कि इस योजना के तहत अब तक 2 लाख से अधिक उपचार किए जा चुके हैं, जिनमें कैंसर उपचार, हृदय संबंधी हस्तक्षेप और अस्थि शल्य चिकित्सा (ऑर्थोपेडिक सर्जरी)जैसे महत्त्वपूर्ण उपचार शामिल हैं। “अब तक इस योजना के तहत ₹300 करोड़ से अधिक लागत के उपचार प्रदान किए जा चुके हैं, जिसे और मजबूत करने के लिए पंजाब बजट 2026–27 में ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, ताकि इसके लाभों को बनाए रखा जा सके और उनका विस्तार किया जा सके,” उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत परिवारों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का नकदरहित उपचार प्राप्त होता है, जिससे किसी भी मरीज को आर्थिक बाधाओं या आपात स्थिति में पैसों की कमी के कारण इलाज में देरी न करनी पड़े।

अधिकतम पहुँच सुनिश्चित करने और प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पंजाब सरकार द्वारा प्रतिदिन सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक गुरुद्वारों, पंचायत घरों, मंदिरों और सामुदायिक केंद्रों जैसे सुलभ स्थानों पर पंजीकरण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। ये शिविर विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु बनाए गए हैं, जिन्हें औपचारिक केंद्रों तक पहुँचने में कठिनाई हो सकती है।

नागरिकों के लिए स्पष्ट रणनीति प्रदान करते हुए, पंजाब सरकार ने पंजीकरण के लिए एक सरल छह-चरणीय प्रक्रिया भी निर्धारित की है। निवासी बिना किसी पूर्व नियुक्ति के निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर , सरकारी पंजीकरण शिविर या सेवा केंद्र पर सीधे जा सकते हैं। आवेदकों को आवश्यक दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी और नाबालिगों के लिए जन्म प्रमाण पत्र साथ लाने होंगे; ताकि परिवार के सभी सदस्य(जो पंजाब के निवासी होने चाहिए) योजना के अंतर्गत कवर हो सकें।

यह योजना प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख की साझा कवरेज प्रदान करती है, इसलिए सभी सदस्यों का एक साथ पंजीकरण करवाना आवश्यक है। पंजीकरण स्थल पर अधिकारी प्रक्रिया पूरी करने में सहायता करते हैं, जिसके बाद लाभार्थियों को सेहत कार्ड सक्रिय होने की पुष्टि हेतु एसएमएस (SMS) प्राप्त होता है।

इसके अतिरिक्त, सुगम पंजीकरण के लिए निवासियों को आधार कार्ड, वोटर आईडी, स्मार्ट राशन कार्ड (यदि उपलब्ध हों) और किसानों के लिए जे-फॉर्म (यदि लागू हो) जैसे सहायक दस्तावेज साथ लाने की सलाह दी जाती है।

सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, पंजाब सरकार निवासियों को निर्दिष्ट केंद्रों और ज़मीनी स्तर के शिविरों के माध्यम से सेहत कार्ड के लिए पंजीकरण करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है, ताकि हर परिवार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत नकदरहित उपचार का लाभ उठा सके।

सरल मार्गदर्शिका: छह चरणों में सेहत कार्ड के लिए पंजीकरण करें

चरण 1: किसी अपॉइंटमेंट की आवश्यकता नहींl

आप सीधे किसी केंद्र या शिविर में जाकर पंजीकरण करवा सकते हैं।

चरण 2: पंजीकरण स्थल पर जाएँ l

• आप जा सकते हैं :

-निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर

-सरकारी पंजीकरण शिविर पर

-सेवा केंद्र पर

चरण 3: आवश्यक दस्तावेज साथ लाएँ l

परिवार के सभी सदस्यों के लिए निम्नलिखित दस्तावेज साथ लाएँ:

• आधार कार्ड

• वोटर आईडी

• नाबालिगों के लिए जन्म प्रमाण -पत्र

• सभी सदस्य पंजाब के निवासी होने चाहिए

चरण 4: पारिवारिक कवरेज को समझें

• यह योजना प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹10 लाख तक का कवर प्रदान करती है। यह राशि परिवार के सभी सदस्यों के बीच साझा होती है, इसलिए सभी के लिए दस्तावेज़ साथ लाना महत्त्वपूर्ण है।

चरण 5: पंजीकरण पूरा करें

• केंद्र या शिविर में अधिकारी आपकी जानकारी दर्ज करने और प्रक्रिया पूरी करने में आपकी सहायता करेंगे।

चरण 6: पुष्टि प्राप्त करें

• पंजीकरण होने के बाद आपको एक एसएमएस प्राप्त होगा, जो आपके सेहत कार्ड लाभों के सक्रिय होने की पुष्टि करेगा।

साथ लाने वाले दस्तावेज:

• आधार कार्ड (पहचान और पते का प्रमाण- पत्र)

• वोटर आईडी

• स्मार्ट राशन कार्ड (यदि उपलब्ध हो)

• जे-फॉर्म (किसानों के लिए, यदि लागू हो)

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।

प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।

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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया

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प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।

विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।

बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।

किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”

अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।

स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”

सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”

उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।

स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”

शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।

स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।

स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”

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केजरीवाल की मोदी सरकार को चुनौती, E-20 पर कोई रिसर्च रिपोर्ट है तो सार्वजनिक करे

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल मोदी सरकार से ई-20 लागू करने से पहले की कोई वैज्ञानिक रिसर्च रिपोर्ट है तो उसे सार्वजनिक करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ई-20 बिना वैज्ञानिक अध्ययन के ही लागू किया, अब वैसे ही ये लोग ई-50 भी लागू कर देंगे। इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले को धमका कर चुप करा दिया जा रहा है। इसकी असल वजह ये है कि मोदी जी ट्रम्प के दबाव में हैं और इसी कारण तमाम वैज्ञानिक सबूतों के खिलाफ जाकर जबरदस्ती देश पर एथेनॉल थोप रहे हैं। मोदी जी ने कभी साइंस, इंजीनियरिंग या रिसर्च का सम्मान नहीं किया। वे सिर्फ अपना हिडन एजेंडा पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार डीजल में भी मिलावट करने वाली है। इसलिए लोग अभी कुछ वर्ष पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियां खरीदने से बचें।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-20 से आगे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में यदि कभी ऐसा प्रस्ताव आता भी है, तो वह व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और वाहन निर्माताओं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों तथा अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद ही होगा। ई-20 कोई जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला नहीं है। भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम दो दशकों से अधिक समय से चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा है। ई-20 लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा किया गया।

अरविंद केजरीवाल ने भाजपा नेता अमित मालवीय पर पलटवार करते हुए कहा कि आप ख़ुद ही कह रहे हैं कि ई-20 से आगे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का “अभी” कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आप माहौल ठंडा होने का इंतज़ार कर रहे हैं। जैसे ही माहौल ठंडा होगा, आप उसे लागू कर देंगे। मुझे खुशी है कि आपने स्वीकार किया कि निर्णय “अभी” नहीं लिया गया।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जैसे ई-20 बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के लागू किया गया, किसी की नहीं सुनी गई, धमकियां देकर सबको चुप करवा दिया गया, वैसे ही आप ई-50 भी लागू कर देंगे। यही आपका काम करने का स्टाइल है। आप कहां विज्ञान, साइंस और इंजीनियरिंग को मानते हैं। अगर आपने ई-20 लागू करने के पहले कोई अध्ययन करवाया है तो उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं करते? छुपा क्यो रहे हैं?

अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि मोदी सरकार का क्या प्लान है? पता चल रहा है कि पेट्रोल में 50 फीसद से ज्यादा की मिलावट करेंगे। अभी बस माहौल शांत होने का इंतज़ार कर रहे हैं। पहले आपकी ई-0 और ई-10 गाड़ियों में ज़बरदस्ती ई-20 पेट्रोल डालकर कबाड़ा किया। आज अगर आप ई-20 नई गाड़ी खरीदते हैं तो सरकार कुछ दिन बाद उसमे ज़बरदस्ती ई-50 पेट्रोल डालकर उसका कबाड़ा कर देगी। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही डीजल में भी मिलावट करने वाली है। इसलिए अभी कुछ वर्ष आप पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियां खरीदने से बचें।

एक अन्य पोस्ट में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने सियाम को अपनी रिपोर्ट वापस लेने के लिए मजबूर किया। यह मोदी जी का टिपिकल गुंडागर्दी वाला स्टाइल है। मोदी जी ने कभी साइंस, इंजीनियरिंग या रिसर्च का सम्मान नहीं किया, वे केवल अपना हिडन एजेंडा पूरा करते हैं। मोदी जी अमेरिका से एथेनॉल खरीदने के लिए ट्रंप के दबाव में हैं। उस दबाव को बर्दाश्त न कर पाने की वजह से वे तमाम वैज्ञानिक सबूतों के खिलाफ जाकर पूरे देश पर जबरदस्ती एथेनॉल थोप रहे हैं।

मोदी सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल में भी इथेनॉल मिलाने की बना रही योजना- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सूत्रों से पता चला है कि मोदी सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) में भी एथेनॉल मिलाने की योजना बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उड़ानों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

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