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पंजाब से 155 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग के लिए केंद्र चलाएगा विशेष ट्रेनें, CM मान की बैठक रही सफल
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्होंने राज्य के किसानों और मंडियों के लिए कई महत्वपूर्ण राहत उपाय सुनिश्चित किए। इस दौरान केंद्र ने पंजाब में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन अनाज की लिफ्टिंग के लिए विशेष रेल गाड़ियां चलाने पर सहमति दे दी, जिससे रबी मंडीकरण सीजन से पहले राज्य में अनाज भंडारण संबंधी गंभीर संकट से निपटने में मदद मिलेगी।
इस हस्तक्षेप के साथ-साथ मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पंजाब पर बोझ बने संरचनात्मक मुद्दों के समाधान पर जोर दिया, जिसमें उच्च नकद ऋण ब्याज दरें, ग्रामीण विकास फंड के तहत लंबित 9,000 करोड़ रुपए, ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों के लिए मुआवजा और आढ़तियों की लंबे समय से लंबित मांगें शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने इन मुद्दों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए सचिव स्तरीय व्यवस्था बनाने सहित ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया।
एक्स हैंडल पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा: “आज दिल्ली में मैंने केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी जी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान हमने आढ़तियों की मांगों सहित पंजाब से संबंधित विभिन्न प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।”
मुख्यमंत्री ने आगे लिखा: “बैठक के दौरान केंद्र के सामने महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए, जिसमें पंजाब में पड़े 155 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की तुरंत लिफ्टिंग तथा आरडीएफ के तहत बकाया 9,000 करोड़ रुपए की तुरंत अदायगी के मुद्दे शामिल थे। इसके साथ ही, नकद ऋण सीमा के तहत राज्यों पर लगाई गई उच्च ब्याज दरों को कम करने और आढ़तियों की केंद्र से संबंधित मांगों पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने की मांग की गई। इसके अलावा, मंडी मजदूरों के ईपीएफ से संबंधित मुद्दों को तुरंत हल करने की अपील की गई और असामयिक बारिश के कारण हुए नुकसान के लिए किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग भी की गई।”
उन्होंने आगे लिखा, “मुझे बेहद खुशी हो रही है कि केंद्रीय मंत्री जी ने इन सभी मुद्दों पर बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। हम पंजाब के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
फसलों के भंडारण संबंधी भारी कमी पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य के कवरड गोदामों में 180.88 लाख मीट्रिक टन अनाज (151.20 लाख मीट्रिक टन चावल और 29.67 लाख मीट्रिक टन गेहूं) पहले से ही स्टोर किया गया है, जबकि कुल उपलब्ध कवरड भंडारण क्षमता लगभग 183 लाख मीट्रिक टन (173 लाख मीट्रिक टन कवरड गोदाम + 10 लाख मीट्रिक टन गेहूं साइलो) है। नतीजतन, चावलों के लिए केवल 0.50 लाख मीट्रिक टन कवरड स्पेस और गेहूं के लिए 1.75 लाख मीट्रिक टन साइलो स्पेस उपलब्ध है।”
उन्होंने कहा, “राज्य में 1 अप्रैल, 2026 से रबी मंडीकरण सीजन (आरएमएस) 2026-27 शुरू हो गया है, जिसमें संभावित रूप से 130-132 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जाएगी।”
मौजूदा स्टॉक के बोझ को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल के 38 लाख मीट्रिक टन गेहूं के स्टॉक में से लगभग 8.71 लाख मीट्रिक टन स्टॉक पहले ही राज्य में सीएपी या खुली स्टोरेज में पड़ा है, जिससे वैज्ञानिक तरीके से भंडारण क्षमता की कमी हो गई है और लगभग 40 लाख मीट्रिक टन गेहूं को कम अनुकूल परिस्थितियों में स्टोर करना पड़ेगा।
अनाज की धीमी उठाई का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि हमारी सरकार लगातार गेहूं और चावल की राज्य से उठाई की मांग करती रही है ताकि चावल की खरीद और स्टोरेज के लिए जरूरी भंडारण क्षमता बनाई जा सके। हालांकि पिछले कई महीनों से राज्य से गेहूं और चावल की औसत उठाई प्रति माह केवल 5 लाख मीट्रिक टन रही है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हर महीने कम से कम 12 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल की उठाई की जाए या वैकल्पिक रूप से, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान आम लोगों को पेश मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत अनाज का वितरण बढ़ाने जैसे प्रबंध किए जाएं, जैसा कोविड-19 महामारी के दौरान किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि इससे रबी मंडीकरण सीजन 2026-27 के दौरान सुचारू खरीद कार्य सुनिश्चित होंगे और खरीफ मंडीकरण सीजन 2025-26 के लिए धान की मिलिंग को तेज किया जा सकेगा।
एक अन्य मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि खरीद के लिए फंडों का प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अधिकृत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह द्वारा किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय स्टेट बैंक जो ब्याज दर वसूल रहा है, वह भारतीय खाद्य निगम पर लागू रिकवरी दर से 0.5 प्रतिशत अधिक है और मासिक मिश्रित आधार पर ब्याज लगा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि भारत सरकार द्वारा हर सीजन के लिए जारी की गई अस्थायी लागत शीटों में राज्य को फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) की ब्याज दर पर केवल साधारण ब्याज की अनुमति है। नतीजतन पंजाब राज्य को हर सीजन में लगभग 500 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, जिससे बचा जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि हमने यह मुद्दा केंद्रीय वित्त मंत्री के पास भी उठाया है। तीसरा मुद्दा ग्रामीण विकास फंड से संबंधित है। हमने बार-बार कहा है कि हमारी मंडियों तक जाने वाली सड़कों के निर्माण की जरूरत है और हमने विधानसभा में एक बिल भी पास किया है जिसमें कहा गया है कि यह पैसा केवल मंडियों की मरम्मत, मंडियों के आधुनिकीकरण और मंडियों की सड़कों को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने इन फंडों का दुरुपयोग किया, जिसके कारण यह पैसा रोका गया है।
उन्होंने आगे कहा कि हम इस मुद्दे पर पहले ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं और मामला फिलहाल विचाराधीन है। मुकदमेबाजी को लंबा खींचने की बजाय केंद्र सरकार को पंजाब के जायज बकाए जारी कर देने चाहिए। यह पंजाब का हिस्सा है और पंजाब का हक है और हम केवल वही मांग रहे हैं जो हमारा जायज हक है।
उन्होंने आगे कहा कि यदि केंद्र के बजट में कोई रुकावट है तो फंड किस्तों में या किसी भी तरीके से जो उचित समझा जाए, जारी किए जा सकते हैं। लेकिन यह राशि अब 9000 करोड़ तक पहुंच गई है, जिसे अभी भी जारी नहीं किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हमने इस मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया है और हमें भरोसा दिया गया है कि आने वाले दिनों में इस संबंध में कोई व्यवस्था बनाने के लिए सचिव स्तर पर बैठक बुलाई जाएगी, जिसके माध्यम से यह फंड जारी होना शुरू हो जाएंगे।
उन्होंने अपील की, “पंजाब को भारतीय खाद्य निगम की ब्याज दर के बजाय, भारतीय स्टेट बैंक द्वारा नकद ऋण सीमा (सीसीएल) पर लगाए जाने वाले ब्याज दर के अनुसार मासिक मिश्रित आधार पर ब्याज लेने की अनुमति दी जाए।”
आढ़तियों के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुख्य मुद्दा यह है कि आढ़ती 2.5 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहे हैं, जबकि भारत सरकार ने अपना कमीशन मौजूदा दरों पर निर्धारित किया है।”
आढ़तियों के कमीशन के मुद्दे पर विचार करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा, “भारत सरकार के खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) ने आढ़तियों (कमीशन एजेंट) के कमीशन को खरीफ मार्केटिंग सीजन (केएमएस) 2020-21 के लिए धान के लिए 45.88 रुपए प्रति क्विंटल और रबी मार्केटिंग सीजन (आरएमएस) 2021-22 के लिए गेहूं के लिए 46.00 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया था।”
उन्होंने आगे कहा, “उस समय से हर साल धान और गेहूं दोनों के लिए एक समान निर्धारित कमीशन जारी रखा गया है, जिसके कारण आढ़ती असंतुष्ट हैं और राज्य सरकार आढ़तियों का कमीशन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार को लगातार लिख रही है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय ने गेहूं के लिए 4.75 रुपये प्रति क्विंटल (46 रुपए से 50.75 रुपए) और धान के लिए 4.73 रुपये प्रति क्विंटल (45.88 रुपए से 50.61 रुपए) के कमीशन में मामूली बढ़ोतरी की है, जो आरएमएस 2026-27 से लागू होगी।” उन्होंने आगे कहा, “आढ़तियों द्वारा इस मामूली बढ़ोतरी को स्वीकार नहीं किया गया है और मांग की गई है कि पंजाब कृषि उत्पाद बाजार अधिनियम, 1961 और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार, आढ़तियों का कमीशन एमएसपी के 2.5 प्रतिशत पर निर्धारित किया जाए।”
उन्होंने अपील की, “भारत सरकार को डीएफपीडी के माध्यम से आढ़तियों के कमीशन में इस मामूली बढ़ोतरी की समीक्षा करनी चाहिए और पंजाब कृषि उपज बाजार अधिनियम, 1961 के अनुसार एमएसपी के 2.5 प्रतिशत की दर से कमीशन को मंजूरी दी जानी चाहिए।”
एक अन्य चिंता को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले कई सालों से, भारतीय खाद्य निगम ईपीएफ से संबंधित मुद्दों के कारण हर सीजन में खरीदी जाने वाली फसलों के लिए भुगतान किए जाने वाले मंडी लेबर चार्ज का 30 प्रतिशत अपने पास रख रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “इसके परिणामस्वरूप, आढ़तियों से संबंधित लगभग 50 करोड़ रुपए की राशि एफसीआई के पास पड़ी है, जिससे उनका वित्तीय बोझ और बढ़ गया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य की एजेंसियां आढ़तियों से अंडरटेकिंग या हलफिया बयान प्राप्त करने के बाद उन्हें भुगतान कर रही हैं, जिसमें कहा गया है कि यदि ईपीएफ अधिकारियों द्वारा कोई देनदारी निर्धारित की जाती है, तो आढ़ती इसे पूरा करेंगे।” उन्होंने जोर देकर कहा, “इसलिए ईपीएफ के हिसाब से लेबर चार्ज का 30 प्रतिशत अपने पास रखना किसी भी तरह उचित नहीं है।” केंद्रीय मंत्री से अपील की कि वे एफसीआई को राज्य एजेंसियों की तरह हलफिया बयान लेकर भुगतान जारी करने के निर्देश दें।
राष्ट्रीय खाद्य खरीद प्रणाली में पंजाब की प्रमुख भूमिका को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने, किसानों के हितों की रक्षा करने और राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ने से रोकने के लिए केंद्र द्वारा इन मुद्दों पर समय पर हस्तक्षेप करने की जरूरत है।
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अमन अरोड़ा ने शाहकोट हलके में नौकरियों के मामले में कांग्रेसी विधायक लाडी को घेरा
पंजाब विधान सभा में विपक्ष को घेरते हुए पंजाब के रोजगार सृजन, कौशल विकास और प्रशिक्षण तथा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री अमन अरोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं और 1,83,837 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र में 6,36,636 नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं।
आज सदन में विधायक स. कुलदीप सिंह धालीवाल द्वारा रोजगार के अवसरों के बारे में पेश किए गए प्रस्ताव पर चर्चा का समापन करते हुए श्री अमन अरोड़ा ने सदन को बताया कि इस बड़े निवेश प्रवाह ने सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से निजी क्षेत्र में 6.36 लाख से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा किए हैं। उन्होंने जापान की प्रमुख स्टील कंपनी आइची स्टील का उदाहरण दिया, जिसने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की सुविधाओं और कारोबार को आसान बनाने वाली नीतियों से प्रभावित होकर अपने नियोजित निवेश को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1100 करोड़ रुपये कर दिया है।
कांग्रेस के विधायक हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया द्वारा उनके शाहकोट विधानसभा हलके में किसी भी व्यक्ति को सरकारी नौकरी न मिलने के आरोप पर श्री अमन अरोड़ा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपने शाहकोट हलके में सभा रखने की चुनौती दी। उन्होंने कहा, ”मैं आऊंगा और हम लोगों से पूछेंगे, क्या उन्हें नौकरियां मिली हैं। अगर मैं गलत हुआ, तो मैं मंत्री पद और विधायक के तौर पर इस्तीफा दे दूंगा। अगर मैं सही हुआ तो लाडी को इस्तीफा देना होगा।” कांग्रेसी विधायक लाडी ने यह चुनौती स्वीकार नहीं की और चर्चा छोड़कर बैठ गए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब सरकार ने सभी सरकारी नौकरियां बिना किसी रिश्वत या सिफारिश के केवल योग्यता के आधार पर दी हैं।
श्री अमन अरोड़ा ने कौशल विकास के लिए राज्य सरकार के रिकॉर्ड प्रयासों का हवाला देते हुए बताया कि राज्य के बजट में 75 सालों में पहली बार कौशल विकास मिशन के लिए 25 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल 10 करोड़ रुपये थे। उन्होंने दावा किया कि 22 लाख से अधिक नौजवानों को रोजगार में प्लेसमेंट कैंपों और हैंडहोल्डिंग अभ्यासों के माध्यम से सुविधा दी गई है। उन्होंने बताया कि सुनाम में हाल ही में आयोजित एक मेगा रोजगार मेले में, 61 कंपनियों ने भाग लिया और लगभग 700 नौजवानों को मौके पर ही नियुक्ति पत्र जारी किए।
रोजगार सृजन मंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये की लागत से संगरूर जिले में विश्व स्तरीय संत अतर सिंह महाराज आर्म्ड फोर्सेज प्रेपरेटरी इंस्टीट्यूट स्थापित किया जा रहा है। यह विश्व स्तर पर अपनी तरह का पहला संस्थान है, जहां सशस्त्र सेनाओं में अधिकारी स्तर के पदों के लिए वार्षिक 500 नौजवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए श्री अमन अरोड़ा ने बताया कि 15-29 साल आयु वर्ग में पंजाब की बेरोजगारी दर वर्ष 2022 की 19.1 प्रतिशत से घटकर 2025 में 17 प्रतिशत हो गई है। मंत्री ने पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वेक्षण का हवाला देते हुए बताया कि अब पंजाब बेहतर रोजगार मैट्रिक्स वाले राज्यों में शामिल है।
वैश्विक स्तर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के समय भारत की जीडीपी चीन से थोड़ी अधिक थी। उन्होंने कहा, ”चीन ने अपने प्रत्येक व्यक्ति को काम पर लगाया और दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनकर उभरा। चीन निकट भविष्य में अमेरिका को पछाड़ सकता है। हमारे पास वही क्षमता है, लेकिन सही वातावरण की कमी थी। पर अब हम इसे ठीक कर रहे हैं।”
कैबिनेट मंत्री ने जोर देकर कहा कि दुनिया की कोई भी सरकार प्रत्येक नागरिक को नौकरी देने की गारंटी नहीं दे सकती। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का असल कर्तव्य उद्योग और रोजगार के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना होता है। उन्होंने कहा, ”हम यहां केवल आंकड़े पेश करने के लिए नहीं हैं। हम ऐसा माहौल बना रहे हैं, जहां हर नौजवान अपने पैरों पर खड़ा हो सके।”
विपक्ष द्वारा नौकरियों के बारे में व्हाइट पेपर जारी करने की मांग पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘सबसे अच्छा, सस्ता और टिकाऊ व्हाइट पेपर लोगों से सीधे तौर पर पूछना है। आरटीआई दायर करो या लोगों के साथ मीटिंग करो। लोग खुद बताने देंगे कि उन्हें नौकरियां मिली हैं या नहीं।”
श्री अमन अरोड़ा ने पिछली कांग्रेस सरकार के ‘हर घर नौकरी’ वादे पर कटाक्ष करते हुए इसे पंजाब के नौजवानों के साथ ‘सबसे बड़ा धोखा’ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘आप’ सरकार ने बिना किसी रिश्वत के पारदर्शी तरीके से 68000 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार का एकमात्र उद्देश्य पंजाब को ‘कारोबार करने में आसानी’ के लिए एक मॉडल राज्य बनाना और सम्मानजनक, कौशल-आधारित रोजगार पैदा करना है।
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सियाम ने भी माना, ई-20 में ज्यादा क्लोराइड और नमी के कारण खराब हो रही गाड़ियां- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ई-20 को लेकर सियाम की सौंपी गई रिपोर्ट को वापस कराने पर केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि सियाम (सोसायटी ऑफ इंडिया ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स) की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें साफ़ लिखा है कि ई-20 में बहुत ज्यादा क्लोराइड और नमी है, जिससे आपकी गाड़ियां ख़राब हो रही हैं। मोदी सरकार ने सियाम पर दबाव डालकर वो रिपोर्ट वापस करवा दी। क्यों? जब विज्ञान और इंजीनियरिंग कह रहे हैं कि ई-20 ख़राब है, तो मोदी सरकार इसे देश पर जबरन क्यों थोप रही है?
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 को लेकर सियाम की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। सियाम ने रिसर्च की और ऑटोमोबाइल के सभी मैन्युफैक्चरर्स ने मिलकर यह पाया कि क्लोराइड और मॉइस्चर ज्यादा होने की वजह से ई-20 गाड़ियों को खराब कर रहा है। सियाम ने 28 जुलाई को मोदी सरकार को यह रिपोर्ट सौंपी थी। 4 अगस्त तक केंद्र सरकार ने सियाम पर जबरदस्ती करके वह रिपोर्ट वापस करा दी। रिपोर्ट वापस करने के बाद सियाम की तरफ से कहा गया कि शायद उनकी रिपोर्ट में कुछ गड़बड़ी है और कुछ तथ्यों को दोबारा चेक करने की जरूरत है। एक तरह से मोदी सरकार जबरदस्ती करके पूरे देश पर ई-20 थोप रही है, लेकिन क्यों?
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RBI ने लगातार तीसरी बार रेपो रेट 5.25% पर रखा, ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को लगातार तीसरी बार अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रखने का फैसला किया। RBI के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा कीमतों में अनिश्चितता और आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत अब भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू मांग से आर्थिक विकास को सहारा मिल रहा है और अप्रैल-जून तिमाही का प्रदर्शन RBI के अनुमान से बेहतर रहा है।
तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए गवर्नर ने कहा कि सेवा क्षेत्र की मजबूती से शहरी खपत में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और अल नीनो से जुड़े जोखिम अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। उनके अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी प्रभावित हो रहे हैं।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे तेल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। उनका अनुमान है कि तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम होगी। उन्होंने कहा कि महंगाई पर सबसे अधिक असर खाद्य और ईंधन की कीमतों का है।
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP वृद्धि दर का अनुमान 6.6 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। वहीं, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई का अनुमान 5.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।
गवर्नर ने बताया कि जून से बैंकिंग प्रणाली में औसत तरलता (Liquidity) 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में ऋण वृद्धि मजबूत बनी हुई है और पर्याप्त तरलता उपलब्ध है।
RBI ने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक व्यापार में सुस्ती, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और व्यापार नीतियों से जुड़ी अनिश्चितता भारत के चालू खाते के घाटे पर दबाव डाल सकती है।
इस बीच रुपया भी लगातार दबाव में है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95 से 96 रुपये प्रति डॉलर के बीच कारोबार कर रहा है। महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेश की निकासी, बढ़ता व्यापार घाटा और मजबूत होता डॉलर रुपये पर लगातार दबाव बना रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक रुपया करीब 7 फीसदी कमजोर हो चुका है, जबकि ईरान के साथ तनाव शुरू होने के बाद इसमें लगभग 6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
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