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Punjab

गोवा का हेल्थ सिस्टम ध्वस्त, पंजाब से सीख लेकर 10 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस दें CM – केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब सरकार से सीख लेकर गोवा के मुख्यमंत्री को भी अपने राज्य के लोगों को 10 लाख रुपए का हेल्थ इंश्योरेंस देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बिना शर्त हर परिवार को 10 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस दे रही है। उसी तरह गोवा के हर परिवार को भी दिया जाए और सारी बीमारियों को कवर किया जाए। साथ ही, पंजाब की तरह गोवा में पैनल्ड प्राइवेट अस्पतालों का भुगतान 15 दिनों में करें, ताकि अस्पताल मरीजों के इलाज से इन्कार न करें। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और अमीरों की तरह गोवा का सबसे गरीब व्यक्ति भी अच्छे से अच्छे अस्पताल में इलाज कराने का हकदार है और यही आदर्श स्थिति है।

अरविंद केजरीवाल ने गोवा के जर्जर स्वास्थ्य मॉडल को सामने रखते हुए कहा कि गोवा का पूरा हेल्थ सिस्टम ध्वस्त हो चुका है। हालात ये हैं कि गोवा का एकमात्र सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भारी भीड़ है और बिना सिफारिश के बेड नहीं मिलते हैं। जबकि साउथ गोवा जिला अस्पताल में 193 पद खाली हैं, तो पोंडा के आईडी अस्पताल में मेडिकल उपकरण नही तक नहीं हैं। सरकार ने डीडीएसएसवाई योजना जरूर चलाई, लेकिन इससे गोवावासियों का मोह भंग हो चुका है। कुल 2.91 लाख परिवारों के कार्ड बने थे, लेकिन इसमें से 1.81 लाख परिवारों ने कार्ड का इस्तेमाल बंद कर दिया है। आज 90 फीसद लोग गंभीर बीमारी होने पर प्राइवेट अस्पताल का खर्च नहीं उठा सकते।

“आप” के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गोवा की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है। गोवा में दो तरह की स्वास्थ्य सेवाएं हैं। पहली, एक प्राइवेट और दूसरी सरकारी। अगर कोई गंभीर बीमारी हो जाए, तो लगभग 90 फीसद गोवा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर करता है। प्राइवेट स्वास्थ्य सेवाएं इतनी ज्यादा महंगी हैं कि 90 फीसद आबादी गंभीर बीमारी होने पर प्राइवेट अस्पतालों में अपना इलाज कराने का खर्च नहीं उठा सकती। सामान्य सर्दी, खांसी या बुखार के लिए लोग शायद प्राइवेट डॉक्टर के पास चले जाते हों, लेकिन अगर कोई गंभीर सर्जरी या बीमारी हो, तो कोई भी प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की हिम्मत नहीं कर सकता। अगर हम मान लें कि गोवा की आबादी 18 लाख है, तो लगभग 16 लाख लोग सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर हैं और केवल 2 लाख लोग ही प्राइवेट अस्पतालों का खर्च उठा सकते हैं और शायद 2 लाख भी बहुत बड़ा आंकड़ा है।

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि प्राइवेट अस्पताल बहुत सारे हैं, लेकिन सरकारी क्षेत्र में केवल एक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल जीएमसी है। जीएमसी की हालत बहुत खराब है, वहां जरूरत से ज्यादा भीड़ होती है। अगर वहां बेड चाहिए, तो किसी की सिफारिश लगानी पड़ती है। डॉक्टर के पास जाओ तो वे दवाइयां लिख देते हैं, जिन्हें बाहर से खरीदना पड़ता है। दवाइयां महंगी होने के कारण ज्यादातर लोग उन्हें खरीद नहीं पाते। जीएमसी के बारे में जितना कम कहा जाए, उतना ही बेहतर है। उसकी हालत बहुत ज्यादा बुरी है। पूरे राज्य में एक ही जीएमसी है, इसलिए काणकोण से वहां पहुंचने में दो घंटे लगते हैं। अगर कोई इमरजेंसी हो जाए, तो दो घंटे में तो मरीज की जान ही चली जाएगी। पोंडा से वहां पहुंचने में एक घंटा लगता है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इसके अलावा साउथ गोवा डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल है, जहां 193 पद खाली पड़े हैं। वहां कई स्पेशलिस्ट नहीं हैं और दवाइयों की बहुत ज्यादा कमी है। वह अस्पताल पूरी तरह से ठप पड़ा है। पोंडा के आईडी अस्पताल में तो बुनियादी मेडिकल उपकरण ही गायब हैं। वह पर्याप्त रूप से सुसज्जित नहीं है। वहां न तो सीटी स्कैन है और न ही एमआरआई है। वहां आठ लिफ्ट हैं, जिनमें से सात खराब हैं। आईडी अस्पताल पोंडा ज्यादातर सिर्फ एक रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। जितने भी मरीज आते हैं, उन्हें जीएमसी रेफर कर दिया जाता है। वहां स्पेशलिस्ट नहीं हैं, स्टाफ की भारी कमी है और बहुत सारे डॉक्टर नहीं हैं, जबकि इस अस्पताल को बने 12 साल हो चुके हैं। इस तरह गोवा का पूरा सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम पूरी तरह से ढह चुका है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 90 फीसद लोगों को यह नहीं पता कि अगर उनके घर में कोई बीमार हो जाए तो वे कहां जाएं। लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने दीनदयाल स्वास्थ्य सेवा योजना निकाली थी, ताकि अगर किसी को सरकारी अस्पताल में ठीक से इलाज न मिले, तो वह प्राइवेट अस्पताल में जाकर इलाज करा सके। इस योजना की राशि अब बढ़ाकर, तीन लोगों के परिवार के लिए पूरे साल का 4 लाख रुपए का इंश्योरेंस कर दिया गया है। अगर परिवार में चार या उससे अधिक सदस्य हैं, तो यह राशि 6 लाख रुपए है। लेकिन आज के समय में 4 लाख और 6 लाख रुपए कुछ भी नहीं होते।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि इस योजना का कवरेज बढ़ने के बजाय घट गया है। साल 2022-23 में 2.95 लाख परिवारों को कार्ड जारी किए गए थे, लेकिन 2025-26 आते-आते यह आंकड़ा गिरकर 1.81 लाख रह गया है। करीब सवा लाख लोगों ने अपने कार्ड इस्तेमाल करना बंद कर दिया है। इससे साफ जाहिर है कि लोगों को इस योजना का कोई फायदा नहीं मिल रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आदर्श स्थिति तो यह है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावी, कुशल और काम करने लायक बनाया जाए। लेकिन इसमें समय लगेगा और जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता। इसलिए हमने पंजाब में यह किया है कि हर परिवार को 10-10 लाख रुपए का इंश्योरेंस कवर दिया है। इसके लिए कोई आय सीमा या कोई अन्य योग्यता मानदंड नहीं है। बस व्यक्ति पंजाब का निवासी होना चाहिए।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गोवा में जहां 447 बीमारियां कवर की जाती हैं, वहीं पंजाब में 2350 बीमारियों और प्रक्रियाओं को कवर किया गया है। यह गोवा से छह गुना ज्यादा है। लगभग सब कुछ कवर किया गया है और अगर कोई बीमारी छूट जाती है, तो हम उसे भी जोड़ देते हैं। हमारी सरकार लोगों की मांगों और जरूरतों के प्रति बहुत संवेदनशील है। पंजाब में लगभग सारे अस्पताल (सरकारी और प्राइवेट) इसमें शामिल हैं। अस्पतालों को 15 दिन के अंदर भुगतान हो जाता है और उन्हें आज के मार्केट रेट के हिसाब से पैसा दिया जाता है। इस योजना को लागू हुए अभी 6 महीने भी नहीं हुए हैं और हमें लोगों से बहुत ही शानदार फीडबैक मिल रहा है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इसमें कोई राजनीति नहीं है, बस लोगों का फायदा होना चाहिए। इसलिए आज हम गोवा के मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि वे पंजाब की अच्छी नीतियों को अपनाएं और गोवा में भी 10 लाख रुपए के इंश्योरेंस वाली यह योजना लागू करें। अगर गोवा में यह योजना लागू होती है, तो मणिपाल हॉस्पिटल, विक्टर हॉस्पिटल, हेल्थवे, गैलेक्सी और रेडकर हॉस्पिटल जैसे प्राइवेट अस्पताल आम जनता की पहुंच में आ जाएंगे। लोगों को जीएमसी पहुंचने के लिए दो-दो घंटे का सफर नहीं करना पड़ेगा।

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि ये वे अस्पताल हैं जहां सबसे अमीर और राजनीतिक रूप से रसूखदार लोग अपना इलाज कराते हैं। अगर यह योजना लागू हुई तो ये अस्पताल गोवा के सबसे गरीब व्यक्ति की पहुंच में भी आ जाएंगे और सबको एक जैसा इलाज मिलने लगेगा। गोवा के लोगों की तरफ से हमारी गोवा के मुख्यमंत्री से अपील है कि पंजाब की “आप” सरकार वाली 10 लाख रुपए की इंश्योरेंस योजना गोवा में भी लागू की जाए।

इन चार कारणों से गोवा में दीन दयाल स्वास्थ्य सेवा योजना फेल-

  • 1. कम राशि:* इसकी राशि बहुत कम है। आजकल अगर किसी को हार्ट अटैक या कैंसर जैसी कोई गंभीर बीमारी हो जाए, तो एक ही बीमारी के इलाज में 4 लाख से ज्यादा का खर्च आ जाता है।
  • 2. बीमारियों का कम कवरेज:* इस योजना के तहत कवर की जाने वाली बीमारियों और प्रक्रियाओं की संख्या बहुत कम है, यह सिर्फ 447 है। इसमें मोतियाबिंद की सर्जरी भी शामिल नहीं है (मोतियाबिंद का ऑपरेशन तो हमारे विधायक वेंजी वीगास वैसे ही करवा देते हैं)। इसके अलावा इसमें पीईटी स्कैन शामिल नहीं है, जो कैंसर की जांच के लिए जरूरी होता है। कैंसर की कई सारी थेरेपी और प्रक्रियाएं इसमें शामिल नहीं हैं। इसमें इतनी कम बीमारियां कवर हैं कि यह पूरी योजना गोवा के ज्यादातर लोगों के लिए अप्रासंगिक और व्यर्थ हो गई है।
  • 3. भुगतान में देरी:* सरकार अस्पतालों को इलाज का पैसा समय पर नहीं देती है। कई-कई महीनों तक पैसा पेंडिंग रहता है, जिसकी वजह से अस्पताल डीडीएसएसवाई कार्ड को स्वीकार करना ही बंद कर देते हैं। लोग कार्ड लेकर जाते हैं, लेकिन अस्पताल उस कार्ड पर इलाज नहीं करते।
  • 4. पुरानी दरें:* सरकार जिस दर पर अस्पतालों को भुगतान करती है, वे दरें 2016 में तय की गई थीं। ज्यादातर अस्पतालों को लगता है कि ये दरें उनके लिए लाभदायक नहीं हैं, इसलिए वे कोई न कोई बहाना बनाकर इस कार्ड को स्वीकार नहीं करते।
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ABVP की जीत पर AAP/ASAP का बड़ा सवाल: विवादित दस्तावेज़ों और चुनावी पात्रता पर हाईकोर्ट जाएगी टीम, PU प्रशासन की चुप्पी पर भी उठे सवाल

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पंजाब यूनिवर्सिटी में हुए छात्र संघ चुनाव के बाद जहां ABVP उम्मीदवार अंकित बिधान की जीत की खबर सामने आ रही है, वहीं आम आदमी पार्टी से जुड़ी छात्र टीम ASAP ने इस पूरे चुनाव और विशेष रूप से ABVP उम्मीदवार की चुनावी पात्रता को हाईकोर्ट में चुनौती देने का ऐलान किया है।

ASAP का कहना है कि चुनाव से पहले ही उसने पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को उम्मीदवार की पात्रता, उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड, कथित Unfair Means (UMC) मामले, चुनाव लड़ने की योग्यता और दस्तावेज़ों से जुड़े गंभीर सवालों से लिखित/औपचारिक रूप से अवगत कराया था। प्रशासन की ओर से मामले पर संज्ञान लेने का भरोसा भी दिया गया, लेकिन चुनाव संपन्न होने तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

ASAP के अनुसार, अब इस पूरे मामले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा और यह सवाल उठाया जाएगा कि जब किसी उम्मीदवार की चुनाव लड़ने की पात्रता पर गंभीर आपत्तियां पहले से विश्वविद्यालय के संज्ञान में थीं, तो उन पर निर्णय लिए बिना उसे चुनाव लड़ने की अनुमति किस आधार पर दी गई।

“जिस उम्मीदवारी पर चुनाव से पहले सवाल उठे, उसके परिणाम को बिना जांच के कैसे वैध माना जा सकता है?”

ASAP का आरोप है कि अंकित बिधान के शैक्षणिक एवं अनुशासनात्मक रिकॉर्ड को लेकर गंभीर तथ्य हैं, जिनका उल्लेख चुनावी प्रक्रिया में किया जाना आवश्यक था। टीम के मुताबिक, बिधान पंजाब यूनिवर्सिटी में LL.B. की पढ़ाई के दौरान कई परीक्षाओं में असफल रहा और उसके खिलाफ Unfair Means का मामला भी सामने आया, जिसके चलते उसे वर्ष 2023 से 2025 तक विश्वविद्यालय से debar किया गया था।

ASAP का यह भी कहना है कि इसके बावजूद बाद में गुजरात की Sabarmati University से प्राप्त MA डिग्री के आधार पर पंजाब यूनिवर्सिटी में PhD में प्रवेश लिया गया। इसी प्रवेश की पात्रता और संबंधित दस्तावेज़ों की वैधता को लेकर भी टीम ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

ASAP का दावा है कि उम्मीदवार की शैक्षणिक पात्रता और दस्तावेज़ों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक थी, लेकिन इन सवालों के बावजूद उसे चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई।

Lingdoh Committee के नियमों का भी हवाला

ASAP ने छात्र चुनावों के लिए लागू Lyngdoh Committee recommendations का हवाला देते हुए कहा है कि चुनावी पात्रता के संबंध में विश्वविद्यालय को उम्मीदवार के अनुशासनात्मक और अकादमिक रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए थी।

टीम का कहना है कि यदि किसी छात्र को अनुशासनात्मक कारणों से विश्वविद्यालय से debar किया गया हो या उसके academic/disciplinary मामलों को लेकर गंभीर स्थिति हो, तो उसकी चुनावी पात्रता की जांच महज औपचारिकता नहीं हो सकती।

“हमारा सवाल किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से है। अगर नियम सभी छात्रों के लिए समान हैं, तो वे किसी राजनीतिक संगठन के उम्मीदवार के लिए अलग कैसे हो सकते हैं?” — ASAP

चुनाव से पहले प्रशासन को बताया, फिर भी चुनाव करा दिया गया: अब कोर्ट में जवाब मांगेगी टीम

ASAP ने कहा कि सबसे गंभीर प्रश्न पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका को लेकर है। टीम ने दावा किया कि चुनाव से पहले ही प्रशासन को इन सभी आपत्तियों और दस्तावेज़ों से संबंधित सवालों की जानकारी दे दी गई थी और प्रशासन ने मामले को देखने की बात कही थी।

इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी और मतदान संपन्न हो गया।

ASAP का कहना है कि अब प्रशासनिक स्तर पर जवाब नहीं, बल्कि न्यायिक स्तर पर जवाब मांगा जाएगा।

टीम जल्द ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख कर यह मांग रखेगी कि उम्मीदवार की चुनावी पात्रता, उसके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों और उसके कथित disciplinary record की निष्पक्ष जांच की जाए तथा यदि चुनावी नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो चुनाव परिणाम की वैधता पर भी उचित कानूनी निर्णय लिया जाए।

“जीत का जश्न बाद में, पहले दस्तावेज़ और पात्रता की जांच हो”

ASAP ने स्पष्ट किया कि उसका संघर्ष किसी छात्र संगठन की जीत या हार तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय के छात्र चुनावों में नियम सभी पर बराबर लागू होंगे या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर कुछ उम्मीदवारों को अलग मानदंड दिए जाएंगे।

ASAP ने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार की पात्रता पर चुनाव से पहले ही गंभीर सवाल विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रख दिए गए थे, तो उनका निपटारा किए बिना चुनाव करवाना पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

“अगर दस्तावेज़ सही हैं तो जांच से डरने की जरूरत नहीं है। अगर पात्रता सही है तो कोर्ट में भी वह साबित हो जाएगी। लेकिन जांच से पहले ही जीत को अंतिम सत्य मान लेना स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

ASAP ने कहा कि वह इस मामले को पूरी मजबूती के साथ कानूनी मंच पर ले जाएगी और विश्वविद्यालय चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और नियमों के समान अनुपालन की लड़ाई जारी रखेगी।

“जिस मुद्दे को चुनाव से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन को देखना चाहिए था, अब वही मुद्दा अदालत के सामने जाएगा। चुनाव खत्म हुआ है, सवाल खत्म नहीं हुए।”

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Politics

पंजाब में ग्राउंडवाटर निकालने की दर चार साल में 163.80% से घटकर 152.22% हो गई, 95 ब्लॉक में सुधार दर्ज: बलतेज पन्नू

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने सोमवार को कहा कि ग्राउंडवॉटर के ताजा मुल्याकंन से पंजाब को उम्मीद की एक बड़ी किरण मिली है, क्योंकि सरकारी डेटा से पता चलता है कि राज्य ने उस संकट को ठीक करना शुरू कर दिया है जिसे पिछली सरकारों ने दशकों तक गंभीर होने दिया। उन्होंने कहा कि यह सुधार भगवंत सिंह मान सरकार द्वारा नहर के पानी का इस्तेमाल बढ़ाने, नहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और पंजाब की ग्राउंडवॉटर पर निर्भरता कम करने के लिए की गई लगातार कोशिशों का नतीजा है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, आप पंजाब के राज्य मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “दशकों से, हम पंजाब के पानी को बचाने की ज़रूरत के बारे में सुनते आ रहे हैं। हमने नेताओं को खुद को पंजाब के पानी का कस्टोडियन कहते, प्रतीकात्मक औजार लेकर और इमोशनल भाषण देते देखा। लेकिन सवाल साधारण है: उन्होंने असल में क्या किया है? इसका जवाब अब सरकारी डेटा के रूप में पंजाब के सामने है।”

बलतेज पन्नू ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने नारों के बजाय प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और अमल पर ध्यान केंद्रित कर एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि आप सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए काम किया कि पंजाब नहर के पानी के अपने हिस्से का पूरा इस्तेमाल करे, जिससे ग्राउंडवॉटर पर बोझ कम हो।

उन्होंने कहा कि नहर के पानी का इस्तेमाल अब लगभग 80% से 82% तक पहुँच गया है, जो 2022 में सिर्फ़ 21% के आस-पास था। उन्होंने आगे कहा, “सरकार ने 14,100 नहरें चालू की हैं, 400 किलोमीटर से ज़्यादा बंद नहरों को ठीक किया है और 1,000 किलोमीटर से ज़्यादा नहरों को पक्का किया है। नहर के स्ट्रक्चर की मरम्मत के साथ-साथ, ग्राउंडवॉटर को रिचार्ज करने में मदद के लिए रिचार्ज पॉइंट भी बनाए गए हैं।”

बलतेज पन्नू ने कहा कि इन उपायों का असर अब ताजा ग्राउंडवॉटर मुल्याकंन में साफ़ दिख रहा है। बलतेज पन्नू ने कहा, “पंजाब में ग्राउंडवाटर निकालने का लेवल 2021-22 में 163.80% से घटकर 2025 में 156.36% और 2025-26 में 152.22% हो गया है, जो चार सालों में 11.58 प्रतिशत पॉइंट्स का सुधार दिखाता है। सालाना ग्राउंडवाटर निकालने का लेवल भी लगभग 28.01 बिलियन क्यूबिक मीटर से घटकर 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर हो गया है।” “11.58 प्रतिशत पॉइंट्स कागज़ पर सिर्फ़ एक आंकड़ा लग सकता है, लेकिन पंजाब के लिए इसका मतलब है कि दशकों की गिरावट के बाद, हम आखिरकार सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि ताजा मुल्याकंन की सबसे उत्साहजनक पहलू ग्राउंडवाटर मुल्याकंन ब्लॉक्स में दर्ज सुधार है। उन्होंने कहा, “पंजाब के 153 डार्क-ज़ोन ब्लॉक में से 95 में सुधार हुआ है, जबकि गंभीर ब्लॉक की संख्या 10 से घटकर 6 हो गई है। चार ब्लॉक सुरक्षित श्रेणी में आ गए हैं, जिनमें फाजिल्का में अरनीवाला, फिरोजपुर में मक्खू, होशियारपुर में हाजीपुर और पठानकोट में नरोट जैमल सिंह शामिल हैं। अन्य 14 ब्लॉक में काफी सुधार दर्ज किया गया है।”

बलतेज पन्नू ने कहा कि ग्राउंडवॉटर रिचार्ज भी बढ़ा है, कुल सालाना रिचार्ज 19.14 बिलियन क्यूबिक मीटर है। उन्होंने कहा, “इसमें बारिश से 5.53 बिलियन क्यूबिक मीटर और नहर के पानी से 5.5 बिलियन क्यूबिक मीटर शामिल है। नहर के पानी का रिचार्ज पिछले साल के 4.5 बिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर इस साल 5.5 बिलियन क्यूबिक मीटर हो गया है।”

उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दिखाते हैं कि पंजाब के लिए खेती के लिए ट्यूबवेल पर अपनी निर्भरता कम करना क्यों ज़रूरी है। उन्होंने आगे कहा, “निकाले गए 26.32 बिलियन क्यूबिक मीटर ग्राउंडवॉटर में से, लगभग 24.95 बिलियन क्यूबिक मीटर खेती के लिए इस्तेमाल होता है, जबकि लगभग 1.38 बिलियन क्यूबिक मीटर घरेलू और इंडस्ट्रियल कामों के लिए इस्तेमाल होता है।”

बलतेज पन्नू ने माना कि पंजाब अभी भी ग्राउंडवॉटर की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि बदलाव की दिशा ज़रूरी है, क्योंकि नए मुल्याकंन से पता चलता है कि ग्राउंडवॉटर निकालने में कमी आई है और कई मुल्याकंन ब्लॉक में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, “पंजाब के पानी के संकट के बारे में सिर्फ़ बात करने वाली सरकारों और इसे सुलझाने का फ़ैसला करने वाली सरकार के बीच यही फ़र्क है। भगवंत मान सरकार ने किसी दूसरे राज्य को मिलने वाले पानी में पंजाब का हिस्सा कम नहीं किया, बल्कि पंजाब के अपने नहर के पानी का इस्तेमाल बढ़ाया। विपक्ष को इस सवाल का जवाब देना चाहिए: जब वे सत्ता में थे तो यह पानी कहाँ जा रहा था?”

बलतेज पन्नू ने कहा कि यह डेवलपमेंट पंजाब की अगली पीढ़ी के लिए खास तौर पर ज़रूरी है, क्योंकि राज्य का जलसंकट आखिरकार इस बात का सवाल है कि आने वाली पीढ़ियों को क्या मिलेगा। उन्होंने कहा, “जब इतिहास लिखा जाएगा, तो हमारे बच्चों को हमसे यह नहीं पूछना चाहिए कि हमने उनके लिए रेगिस्तान क्यों छोड़ा। उन्हें यह कहने में काबिल होना चाहिए कि उनके माता-पिता की पीढ़ी ने आखिरकार समय पर एक्शन लिया। ग्राउंडवॉटर का ताज़ा डेटा पंजाब को यह उम्मीद देता है।”

उन्होंने कहा कि नारों से आगे बढ़कर ठोस नतीजे देने का यही शासन का तरीका दूसरे एरिया में भी देखा जा रहा है, जिसमें रोड सेफ्टी फोर्स, सरकारी स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम को मज़बूत करना शामिल है। बलतेज पन्नू ने कहा, “इन आंकड़ों से संदेश साफ है: अगर सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति है, तो पंजाब की समस्याएं हल हो सकती हैं। भगवंत मान सरकार ने वह प्रतिबद्धता दिखाई है; अब नतीजे खुद बोलने लगे हैं।”

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छात्रों को बड़ी राहत, पंजाबी यूनिवर्सिटी ने फीस बढ़ोतरी का फैसला लिया वापस

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पंजाबी यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए फीस में की गई हालिया बढ़ोतरी को पूरी तरह वापस लेने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद छात्रों को अब बढ़ी हुई फीस का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. जगदीप सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों की एक अहम बैठक में छात्रों की मांगों और उनके हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया। फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों और उनके प्रतिनिधियों की ओर से लगातार चिंताएं जताई जा रही थीं।

फैसले के तहत ट्यूशन और कोर्स फीस, रजिस्ट्रेशन फीस के साथ-साथ हॉस्टल फीस में किया गया पूरा इजाफा वापस ले लिया गया है। यानी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में छात्रों को वही फीस देनी होगी, जो पिछले अकादमिक सत्र में लागू थी।

वाइस चांसलर ने कहा कि फीस बढ़ोतरी को लेकर छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि उसकी प्राथमिकता छात्रों को सुलभ और किफायती उच्च शिक्षा उपलब्ध करवाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी इस समय वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन इसके बावजूद कोशिश रहेगी कि आर्थिक परेशानियों के कारण कोई भी योग्य छात्र उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। फीस बढ़ोतरी वापस लिए जाने के फैसले से बड़ी संख्या में छात्रों और उनके परिवारों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

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