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भाजपा के हाथ 700 किसानों के खून से रंगे हुए हैं, पंजाब काले कृषि कानूनों का अपमान कभी नहीं भूलेगा: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

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राज्य के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार करने के लिए भाजपा पर प्रहार करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि भगवा पार्टी देश के किसी भी राज्य से जीत सकती है, लेकिन वह महान गुरुओं, संतों, पीरों-पैगंबरों और शहीदों की धरती पंजाब से जीतने का सपना भी नहीं देख सकती। मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के लोग भाजपा के संदिग्ध चरित्र से अच्छी तरह परिचित हैं और वे इसे अच्छा सबक सिखाएंगे। पंजाबी कभी नहीं भूलेंगे कि कृषि कानूनों के विरोध के दौरान राज्य के अन्नदाताओं के साथ कैसा अपमानजनक व्यवहार किया गया था और भाजपा के हाथ इस आंदोलन के दौरान शहीद हुए 700 से अधिक किसानों के खून से रंगे हुए हैं।

पंजाब में भाजपा के रिकॉर्ड को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही भाजपा कुछ राज्यों में अपनी चुनावी कार्यगुजारी से खुश हो, लेकिन पंजाब के मामले में भाजपा ने हमेशा पंजाब के साथ अन्याय और सौतेला व्यवहार किया है। वह पंजाब को पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़, भाखड़ा डैम और हर जायज हक से वंचित करना चाहती है। यहां तक कि भगवा पार्टी ने पंजाब के विकास में बाधा डालने के लिए राज्य को मिलने वाली ग्रांट के जायज हिस्से को अभी तक रोक रखा है।

राज्य में भाजपा के आने की संभावनाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “हवाई किले उड़ा रही भाजपा नेतृत्व को यह भूल जाना चाहिए कि वह कभी भी पंजाब में सत्ता में नहीं आ सकेगी, क्योंकि राज्य और इसके लोगों के खिलाफ इस पार्टी के पाप कभी माफ नहीं किए जा सकते।” उन्होंने कहा कि भाजपा किस मुंह से पंजाब में आएगी जब उसके नेता हमेशा से ही राज्य और इसके लोगों के मुद्दों को उठाने में नाकाम रहे हैं। पंजाब के बहादुर और समझदार लोग इन कुकर्मों को कभी नहीं भूलेंगे और इन्हें उचित सबक सिखाएंगे।

स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “पूरे राज्य में कुल 990 आम आदमी क्लीनिकों में मुफ्त इलाज प्रदान किया जा रहा है और यह संख्या जल्द ही 1400 तक पहुंच जाएगी। इन क्लीनिकों में 107 दवाइयां और 47 प्रकार के डायग्नोस्टिक टेस्ट मुफ्त उपलब्ध हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में राज्यवासियों का विश्वास और मजबूत हो रहा है। हजारों लोग रोजाना इन क्लीनिकों में आ रहे हैं और ओपीडी में मरीजों की संख्या पहले ही पांच करोड़ को पार कर चुकी है।”

यूनिवर्सल हेल्थकेयर कवरेज के बारे में उन्होंने कहा, “व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना शुरू की है, जो देश में अपनी तरह की पहली योजना है। इसके तहत राज्य के हर परिवार को 10 लाख रुपए तक का नकद रहित इलाज प्रदान किया जाएगा। यह योजना राज्यवासियों का वित्तीय बोझ कम करने के साथ-साथ उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करती है, जिससे हर परिवार इन मुफ्त सुविधाओं का हकदार है और रजिस्ट्रेशन के लिए उत्साहित होता है।

उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार ने मावां-धीयां सत्कार योजना शुरू की है, जिसके तहत हर महिला को 1,000 रुपए प्रति माह और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपए प्रति माह मिलेंगे। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर होगी। साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने वाली महिलाएं भी इस योजना का लाभ लेने की हकदार होंगी। इस स्कीम के तहत महिलाओं को 9,300 करोड़ रुपए आवंटित किए जाएंगे और लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को लाभ मिलेगा।”

सिंचाई पहल का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने राज्य के हर कोने में किसानों की सहायता के लिए 14,000 किलोमीटर लंबा नहरी/पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया है और इसके जरिए 21,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो दो भाखड़ा नहरों के पानी की सप्लाई के बराबर है। इससे किसानों को अपनी सिंचाई जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिल रही है।नहरों और नदियों में पानी के स्तर को दो से चार मीटर बढ़ाने के लिए रिचार्ज पॉइंट बनाए गए हैं, जिससे आने वाली पीढ़ियों की भलाई सुनिश्चित की जा रही है क्योंकि पंजाब खेती प्रधान राज्य होने के कारण काफी हद तक पानी पर निर्भर है।

इसके साथ ही लोगों के टैक्स के पैसे को राज्यवासियों की भलाई पर समझदारी से खर्च किया जा रहा है और यह पैसा विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों के माध्यम से लोगों को वापस लौट रहा है।” शासन की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार 90 प्रतिशत घरों को मुफ्त बिजली प्रदान करके, भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी तरीके से 65,000 से अधिक नौकरियां देकर, सड़कों को बेहतर बनाकर, टोल प्लाजा बंद करके रोजाना 70 लाख रूपए बचाकर और बुनियादी ढांचे का निर्माण करके लोगों के लिए काम कर रही है।

इसके साथ ही इस बात पर जोर दिया गया है कि कोई भी मुफ्त या रियायत गरीबी को खत्म नहीं कर सकती और केवल शिक्षा ही लोगों के स्तर को ऊंचा उठाकर उनके जीवन स्तर में सुधार कर सकती है।” शिक्षा और कृषि के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य सरकार के प्रयासों से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं में बेमिसाल प्रदर्शन कर रहे हैं। इतिहास में पहली बार धान के सीजन के दौरान खेतों के ट्यूबवेलों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली सप्लाई दी गई है और सिंचाई के लिए दिन में बिजली देने से किसानों के जीवन में भारी बदलाव आ रहा है क्योंकि सरकारी खजाने का एक-एक पैसा लोगों की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।”

पारंपरिक पार्टियों पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, “पारंपरिक पार्टियों के नेता लंबे समय से लोगों को गुमराह कर रहे थे, लेकिन अब लोग उनके प्रचार से प्रभावित नहीं हो रहे हैं और अपनी सत्ता के दौरान महलनुमा घरों में रहने वाले नेताओं को भी लोगों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है, जो नए युग की निशानदेही करता है। जहां कभी अजेय माने जाने वाले नेता अब राजनीतिक गुमनामी के अंधेरे में गुम हो गए हैं।” जवाबदेही और बेअदबी के मुद्दे पर भगवंत सिंह मान ने कहा, “लोगों ने ऐसे अहंकारी नेताओं को उचित सबक सिखाया है, जिन्होंने कभी आम आदमी की परवाह नहीं की और अपने शानदार आवासों तक सीमित रहे। या फिर वे जिन्होंने गुरबाणी के नाम पर वोट मांगे और उनके ही कार्यकाल के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं हुईं, लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।”

उन्होंने कहा, “सरकार ने जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम 2026 सर्वसम्मति से पास किया है, जो सख्त सजा सुनिश्चित करता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं समाप्त हो सकें और कोई भी ऐसा घिनौना अपराध करने की हिम्मत न कर सके।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “इस न क्षमा योग्य अपराध के दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी क्योंकि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के पिता माने जाते हैं और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का फर्ज है। दुनिया भर के लोग इस ऐतिहासिक कदम की सराहना कर रहे हैं।”

भगवंत सिंह मान ने कहा, “बादल परिवार इस एक्ट का विरोध कर रहा है, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि ऐसे मुद्दे पर भी राजनीति करना किसी पंथक पार्टी को शोभा नहीं देता। जबकि हम परमात्मा का धन्यवाद करने के लिए 6 से 9 मई तक तख्त श्री केसगढ़ साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, दमदमा साहिब, मस्तुआणा साहिब, गुरुद्वारा दुख निवारण साहिब और श्री फतेहगढ़ साहिब में माथा टेकने के लिए श्री आनंदपुर साहिब से शुक्राना यात्रा निकालेंगे।” वे श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस और श्री गुरु रविदास जी के 650वें प्रकाश पर्व को मनाने का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं और सरकार इस मौके को पूरे विश्व में पूरी श्रद्धा एवं धार्मिक उत्साह के साथ मनाएगी ताकि गुरु जी के समानता और इंसानियत के संदेश का प्रकाश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

श्री गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व संबंधी चल रहे जश्नों के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मानवता और समानता का प्रचार करने वाले, दुखों-गमों से मुक्त समाज की सोच रखने वाले श्री गुरु रविदास महाराज जी के 650वें प्रकाश पर्व को मनाने के लिए साल भर चलने वाले समागम शुरू हो गए हैं और सरकार ने इन जश्नों को विश्व स्तर पर आयोजित करने के लिए संत समाज से आशीर्वाद और सुझाव मांगे हैं।” अपने समापन संबोधन में उन्होंने कहा, “यह बहुत गर्व की बात है कि ये जश्न उनके कार्यकाल के दौरान मनाए जा रहे हैं और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि ये पूरे धार्मिक उत्साह के साथ करवाए जाएं।” उन्होंने बताया कि संत समाज के प्रतिनिधियों से इन कार्यक्रमों को नया रूप देने के लिए मार्गदर्शन और योगदान देने की अपील की गई है। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद और अन्य भी मौजूद थे।

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अमृतसर में पुलिस-बदमाश मुठभेड़, गोली लगने के बाद 2 आरोपी गिरफ्तार

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पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण अध्यादेश को मंजूरी दी गई, जिसके तहत अब राज्य के निजी स्कूल हर साल 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।

कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि सरकार का उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत देना और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नए नियमों के लागू होने के बाद फीस वृद्धि को नियंत्रित किया जाएगा और निजी स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगेगा।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि सरकार अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि जिन निजी स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों के दौरान 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, उनसे वसूली गई अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करवाई जाएगी।

सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। नए नियमों के तहत प्राथमिक स्कूलों पर 50 हजार रुपये तक, हाई स्कूलों पर 2 लाख रुपये तक और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

पंजाब सरकार का कहना है कि यह फैसला लाखों अभिभावकों को राहत देने वाला साबित होगा। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी तथा शिक्षा को व्यवसाय बनाने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगेगी।

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बादल परिवार के काले कारनामे एक-एक करके जनता के सामने लाए जाएंगे और उन्हें उनके पापों की मिसाली सजा मिलेगी : CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि पंजाब के लोग यह नहीं भूले हैं कि किस तरह बादल परिवार और अकाली नेतृत्व ने बार-बार प्रदेश के हितों से समझौता किया, तीन काले कृषि कानूनों का समर्थन किया, राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का दुरुपयोग किया और पंजाब में नशे के कलंक को पनपने दिया। फरीदकोट के गांव पंजगराईं कलां में ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान लोगों से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने जहां पंजाब को नशे, बेरोजगारी और पतन की ओर धकेला, वहीं ‘आप’ सरकार नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पारदर्शी सरकारी भर्ती, शिक्षा में ऐतिहासिक सुधार, सभी के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं और महिलाओं के हित वाली कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश की तस्वीर बदल रही है।

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पंजाब और इसके लोगों के साथ विश्वासघात करने वालों का हर करतूत जनता के सामने लाया जाएगा, जबकि मौजूदा सरकार एक स्वस्थ, शिक्षित और समृद्ध पंजाब के निर्माण की दिशा में पूरी तरह से केंद्रित है। सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, जिनके साथ पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां भी मौजूद थे, ने कहा कि बादल परिवार ने प्रदेश पर लंबे समय तक शासन किया है और हमेशा प्रदेश को कमजोर करने की साजिशें रची हैं। उन्होंने कहा, “बादलों का एकमात्र एजेंडा प्रदेश और इसके लोगों के हितों से समझौता करके अपने निजी हितों को सुरक्षित करना रहा है। ये ऐसे अवसरवादी नेता हैं, जो अपने निजी और राजनीतिक हितों के अनुसार गिरगिट की तरह रंग और रुख बदलते हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों ने अकालियों को चुना था लेकिन वे गद्दार साबित हुए और उन्होंने हमेशा प्रदेश और इसके लोगों की पीठ में छुरा घोंपा। भगवंत सिंह मान ने कहा, “जब पूरी किसानी अपने अधिकारों के लिए लड़ रही थी, तब अकालियों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपनी कुर्सियां बचाने के लिए मोदी सरकार के काले कृषि कानूनों का समर्थन किया था। अकालियों ने अपने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया और लोग इसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं कर सकते।”

एक और मिसाल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नेताओं ने खुद को किसान बताकर लंबे समय तक लोगों को बेवकूफ बनाया है। उन्होंने कहा, “उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि कोई अन्नदाता बसों का इतना बड़ा काफिला और गुड़गांव में आलीशान होटल कैसे बना सकता है। यह सारी संपत्ति इसलिए इकट्ठी की गई है क्योंकि उन्होंने अपने राजनीतिक हितों के लिए प्रदेश और लोगों के हितों को बेच दिया।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकाली, पीढ़ियों के घात के लिए जिम्मेदार हैं क्योंकि नशा तस्करी को उनका संरक्षण प्राप्त थी और यह उनके लंबे कुशासन के दौरान पनपी-फूली। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नेताओं के हाथ उन लाखों युवाओं के खून से रंगे हैं, जो नशे की भेंट चढ़ गए, जिसकी सप्लाई प्रदेश में सरकारी गाड़ियों के माध्यम से की जाती थी। उन्होंने कहा, “इन नेताओं के पाप क्षमा करने योग्य नहीं हैं और लोग इनके बुरे करतूतों की लंबी दास्तान के लिए इन्हें कभी भी माफ नहीं कर सकते। बेअदबी के जिम्मेदार लोग श्री अकाल तख्त साहिब पर पेश हुए और सार्वजनिक रूप से अपना गुनाह कबूल किया।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उनकी राजनीतिक इच्छाएं पूरी नहीं हुईं तो उन्होंने यू-टर्न ले लिया। भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूरा प्रदेश इन नेताओं का असली चेहरा जानता है, जिन्होंने हमेशा राजनीतिक हथकंडों के माध्यम से लोगों को गुमराह किया है। इन नेताओं ने गैंगस्टरों की पीठ थपथपाई और नशा तस्करों को पनाह देकर पंजाब के युवाओं की रगों में नशा घोला। लोग अकालियों को उनके पापों के लिए कभी माफ नहीं करेंगे और एक बार फिर उन्हें सबक सिखाएंगे। लोगों ने बार-बार उन्हें चुना, लेकिन उन्होंने बार-बार पंजाब और इसके लोगों के साथ विश्वासघात किया।” मुख्यमंत्री ने दोहराया कि अकालियों ने अपने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया, इसलिए लोग उन्हें कभी माफ नहीं कर सकते।

उन्होंने कहा कि स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल ने भी सुखबीर सिंह बादल को कभी भी प्रदेश का मुखिया नहीं बनाया क्योंकि वे जानते थे कि पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब को मुसीबत में डाल देंगे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल जमीनी हकीकतों से वाकिफ नहीं हैं क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी आराम-ओ-आइश और खुशहाली वाले सुरक्षित माहौल में गुजारी है।

उन्होंने कहा कि सुखबीर सिंह बादल को प्रदेश की बुनियादी भौगोलिक स्थिति का भी पता नहीं है लेकिन फिर भी वे पंजाब में राजनीतिक सत्ता पाना चाहते हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “बाकी बातें तो एक तरफ रहीं, पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब की बुनियादी फसलों में भी अंतर नहीं कर सकते क्योंकि वे प्रदेश के मुख्य मुद्दों से ही पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं। दूसरी तरफ पंजाब सरकार ने प्रदेश की भलाई और लोगों की खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए अनेकों पहलें की हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब सरकार ने युवाओं को 67,500 से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। उन्होंने आगे कहा, “पंजाब में भ्रष्टाचार और पक्षपात का युग खत्म हो गया है। आज युवाओं को निर्धारित योग्यता के आधार पर पारदर्शी तरीके से नौकरियां मिल रही हैं। सरकार पंजाबियों की उम्मीदों पर खरी उतर रही है और प्रदेश का एक-एक पैसा इसके लोगों के विकास पर खर्च किया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री सिर्फ मंच से बोलने के बजाय खुलकर बातचीत करके आम लोगों की बातें सुन रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी खजाने के एक-एक पैसे का इस्तेमाल लोगों की भलाई के लिए कर रही है।

उन्होंने कहा कि पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और किसानों को दिन के समय बिजली मिल रही है, जो मिसाली कदम है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ऐसे समय में जब देश की संपत्ति केंद्र सरकार द्वारा अपने करीबी दोस्तों को मामूली कीमतों पर सौंपी जा रही है, पंजाब सरकार ने एक निजी थर्मल प्लांट खरीदकर इसका नाम श्री गुरु अमरदास जी के नाम पर रखकर इतिहास रचा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की है, जो देश की अपनी तरह की पहली योजना है जो पंजाब के प्रत्येक निवासी परिवार को 10 लाख रुपये तक का नकद रहित चिकित्सा उपचार प्रदान करती है। उन्होंने आगे कहा, “पंजाब ऐसा व्यापक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करने वाला पहला भारतीय राज्य है, जिससे परिवारों पर वित्तीय बोझ कम हुआ है और मानक स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य प्रदेश के सभी परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करना है और लोग इस योजना के तहत पहले ही 650 करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त इलाज प्राप्त कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मांवां-धीयां सत्कार योजना के तहत, 1 जुलाई से 18 साल से अधिक उम्र की महिला लाभार्थियों को वित्तीय सहायता के बारे में उनके मोबाइल फोन पर सूचना मिलेगी। उन्होंने आगे कहा, “अन्य सभी वर्गों से संबंधित महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह मिलेंगे। यह फंड सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाएंगे और पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाएं भी इस योजना का लाभ लेने की पात्र होंगी।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब की 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना से लाभ होने की उम्मीद है और प्रदेश सरकार ने इसके लिए बजट में 9,300 करोड़ रुपये रखे हैं।

इस योजना के व्यापक सामाजिक महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भले ही यह वित्तीय सहायता महिलाओं को अमीर नहीं बना सकती लेकिन यह उन्हें बनता सम्मान और सत्कार जरूर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, “महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं क्योंकि वे जीवन का आधार हैं। माताओं और बहनों के आशीर्वाद में दुनिया की हर चुनौती को पार करने की ताकत होती है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लिंग समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक तथा आर्थिक निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करना बहुत जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे ईश्वर के बहुत आभारी हैं कि अकाल पुरख ने उन्हें जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन अधिनियम, 2026 को लागू करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि जब भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं हुईं, लाखों लोगों के दिल दहल गए। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ईश्वर ने उन्हें बुद्धि और बल प्रदान किया तभी वे कानूनी विशेषज्ञों के साथ उचित विचार-विमर्श के बाद यह विधेयक लाने में सक्षम हुए। उन्होंने कहा, “आप सरकार ने इस विधेयक का मसौदा बहुत सावधानीपूर्वक तैयार किया है ताकि भविष्य में कोई भी संशोधन या कमियां इसे कमजोर न कर सकें।”

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह कानून समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ बड़ी रोक के रूप में काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में कोई भी इस तरह का जघन्य अपराध करने की हिम्मत न करे। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी करना शांति, सद्भावना, भाईचारे और श्रद्धा को ढहाने की गहरी साजिश थी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के पिता हैं और इनकी पवित्रता को बनाए रखना सभी का सामूहिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा उठाए गए इस ऐतिहासिक कदम के लिए दुनिया भर के लोग खुश हैं और आभार व्यक्त कर रहे हैं।

इस अवसर पर पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां और अन्य लोग भी मौजूद थे।

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पंजाब में महिलाओं को भगवंत सिंह मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सुरक्षित एवं समय पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुँच का लाभ

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स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA), पंजाब के आंकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत किए गए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) मामलों में से 57 प्रतिशत गर्भावस्था के पहले आठ सप्ताह के भीतर किए गए। अब तक दर्ज 323 कैशलेस प्रक्रियाओं, जिनकी कुल लागत 14.86 लाख रुपये रही, में से 185 मामले शुरुआती गर्भावस्था के दौरान किए गए। यह राज्य भर के 800 से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में समय पर और सुरक्षित प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक बढ़ती पहुँच को दर्शाता है।

गर्भपात का निर्णय कई व्यक्तिगत, चिकित्सकीय और सामाजिक-आर्थिक कारणों से प्रभावित होता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पहले आठ सप्ताह के भीतर किए गए एमटीपी मामलों की संख्या कुल मामलों के आधे से अधिक रही, जिससे यह योजना के अंतर्गत सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली श्रेणी बन गई है।

ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत गर्भसमापन (एमटीपी) सेवाओं की कैशलेस सुविधा का दायरा बढ़ाया है। अब महिलाएँ सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी बिना ख़र्च किए ये सेवाएँ प्राप्त कर सकती हैं, जिससे पूरे पंजाब में स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुँच और आसान हो गई है।

आंकड़े संकेत देते हैं कि अधिकांश लाभार्थी गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में ही गर्भपात सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जब चिकित्सकीय प्रक्रियाएँ कम जटिल होती हैं और स्वास्थ्य ज़ोखिम भी कम होते हैं।

मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पंजाब के 800 से अधिक सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में एमटीपी सेवाएँ कैशलेस उपलब्ध हैं। इस योजना का उद्देश्य लोगों के जेब से होने वाले ख़र्च को कम करना और समय पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को बेहतर बनाना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सूचीबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों के हालिया विस्तार का उद्देश्य सेवाओं तक पहुँच को आसान बनाना और उपचार में होने वाली देरी को कम करना है। उन्होंने कहा, “सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस सेवाएँ उपलब्ध करवाने का उद्देश्य समय पर उपचार सुनिश्चित करना और देरी से हस्तक्षेप के कारण उत्पन्न होने वाली जटिलताओं को कम करना है।”

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सकीय निगरानी में समय पर गर्भपात सेवाओं तक पहुँच स्वास्थ्य ज़ोखिमों को कम करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माता कौशल्या अस्पताल की सीनियर प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रमिता अग्रवाल ने कहा कि निर्धारित गर्भकाल सीमा के भीतर चिकित्सकीय निगरानी में किया गया गर्भसमापन सुरक्षित और प्रभावी होता है।

उन्होंने कहा कि उपचार लेने में देरी अक्सर आर्थिक कठिनाइयों, जागरूकता की कमी और सामाजिक बाधाओं से जुड़ी होती है, जिसके कारण कई बार महिलाएँ असुरक्षित तरीकों या स्वयं दवा लेने का सहारा लेती हैं। उन्होंने कहा, “सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी भी दवा या प्रक्रिया से पहले प्रत्येक मामले का उचित चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है।”

डॉ. रमिता अग्रवाल ने गर्भपात करवाने के कुछ सामान्य कारण भी साझा किए:

गर्भनिरोधक साधनों का प्रभावी न होना : कंडोम, आईयूडी या अन्य गर्भनिरोधक साधनों का अपेक्षित रूप से प्रभावी न होना।

अनियोजित या अनचाहा गर्भधारण: जब महिला या दंपत्ति बच्चे के लिए तैयार न हों।

आर्थिक कारण: प्रसव और बच्चे के पालन-पोषण से जुड़े ख़र्चों को लेकर चिंताएँ ।

माँ के स्वास्थ्य संबंधी ज़ोखिम: गर्भावस्था जारी रहने से महिला के शारीरिक स्वास्थ्य पर ख़तरा होना।

भ्रूण में गंभीर असामान्यताएँ : भ्रूण में गंभीर जन्मजात या चिकित्सकीय समस्याओं का पता चलना।

व्यक्तिगत, शैक्षणिक या करियर संबंधी कारण: गर्भावस्था का पढ़ाई, नौकरी या जीवन की अन्य योजनाओं पर प्रभाव पड़ना।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना का विस्तार प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने में कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। यह आर्थिक बाधाओं को कम करके और संस्थागत स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बढ़ाकर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करवाने में मदद कर रहा है।

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