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भाजपा की कार्रवाई बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान और हर पंजाबी के लोकतात्रिंक अधिकारों पर सीधा हमला हैं: Harpal Singh Cheema
पंजाब के वित्त मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता हरपाल सिंह चीमा ने शुक्रवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पंजाब के लोगों पर अलोकतांत्रिक हमला किया है। उन्होंने इसे बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी और लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक रूप से कुर्बानी देने वाले पंजाबी इस धोखे को बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।
एक बयान में आप के सीनियर नेता और पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा ने पंजाबियों पर गैर-लोकतांत्रिक हमला किया है। संविधान के तहत बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा दिए गए वोट के अधिकार को छीना जा रहा है। यह बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान पर सीधा हमला है और 3 करोड़ पंजाबी इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। पंजाब ने हमेशा इस देश के लोकतंत्र को बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इस देश का लोकतंत्र पंजाबियों के खून और कुर्बानी पर बना है। पंजाबियों ने अपना खून बहाकर इस लोकतंत्र को बनाने में मदद की और आज भाजपा इसे तोड़ने की कोशिश कर रही है।
पंजाब के मंत्री ने दावा किया कि आज 3 करोड़ पंजाबी भाजपा को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं। भाजपा वो पार्टी है जिसे तीन काले कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान पंजाब के 700 किसानों की मौत के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इसे वो पार्टी कहा जाता है जिसने पंजाब का पानी लूटा और पंजाब को उसके हक का आर्थिक हिस्सा नहीं दिया। सभी पंजाबी एकजुट होकर ऐसी पार्टी का कड़ा विरोध करेंगे।
आप के 7 सांसदों के पार्टी छोड़ने की निंदा करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि जिन्हें आप ने पंजाबियों की आवाज बनने के लिए सम्मान देकर राज्यसभा भेजा था, उन्होंने आज गृह मंत्री अमित शाह के बहकावे में आकर पंजाब के साथ धोखा दिया है। सत्ता के लालच में किया गया ये दल बदल सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि पंजाब के हकों के साथ धोखा है। भाजपा कभी किसी के साथ खड़ी नहीं हुई और पंजाबी मौकापरस्तों को कभी माफ नहीं करते।
हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा कि भाजपा ने पंजाब के लोगों की पीठ में छुरा घोंपा है। पंजाब से आप सांसदों को तोड़कर उसने साबित कर दिया है कि उसे लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है। वो बाबा साहेब डॉ. बीआर अंबेडकर के बनाए गए संविधान को तोड़ने की कोशिश कर रही है। भाजपा इस देश के लोकतंत्र के लिए खतरा है, जबकि आप संविधान के साथ मजबूती से खड़ी है। हम संविधान की सुरक्षा और सम्मान के लिए लड़ते रहेंगे और भाजपा को सबक सिखाते रहेंगे।
पंजाब के विरोध के इतिहास पर रोशनी डालते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि. पंजाब और पंजाबियों ने उन लोगों को बार-बार हराया है जिन्होंने उन पर हावी होने की कोशिश की। जिन्होंने पंजाब पर कब्ज़ा करने की कोशिश की, उन्हें हमेशा सबक सिखाया गया है। आज भाजपा लोगों को डराकर पंजाब नहीं जीत सकती। 3 करोड़ पंजाबी सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आप सरकार के कामों को जानते हैं।
हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा कि लंबे समय तक जब भाजपा और अकाली दल पंजाब में सत्ता में थे, तब श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की घटनाएं हुईं और कोई न्याय नहीं हुआ। जब हम ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026’ लाए, तो भाजपा ने हमारे सदस्यों को तोड़ना शुरू कर दिया क्योंकि वे श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का सम्मान नहीं चाहते।
उन्होंने कहा कि यह उनकी रणनीति का हिस्सा है क्योंकि वे जानते हैं कि ‘आप’ 2027 में जीतने वाली है। लेकिन हम दृढ़ हैं। हम आम आदमी पार्टी का काम जारी रखेंगे और 2027 में फिर से सरकार बनाएंगे, साथ ही यह पक्का करेंगे कि पंजाब में भाजपा पूरी तरह हार जाए।
‘आप’ का संकल्प दोहराते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि हम अरविंद केजरीवाल और ‘आप’ के साथ चट्टान की तरह खड़े हैं। ईडी, सीबीआई या कोई भी एजेंसी भेज दो, हमें किसी भी जेल में भेज दो, हम डरेंगे नहीं। हम पंजाब के अधिकारों की रक्षा करेंगे और बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान का सम्मान बनाए रखेंगे। हम उनकी सोच और शहीद-ए-आजम भगत सिंह के आदर्शों से गाइडेंस लेते हैं। हम टूटेंगे नहीं, झुकेंगे नहीं। हम मर सकते हैं, लेकिन घुटने नहीं टेकेंगे। आज जो हुआ है वह कायरता दिखाता है और देश लोकतंत्र को बदनाम किया है।
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मान कैबिनेट के बड़े फैसले, डिजिटल यूनिवर्सिटी से लेकर प्राइवेट स्कूल फीस तक कई प्रस्तावों को मंजूरी
पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी।
हरपाल चीमा ने बताया कि कैबिनेट ने ‘द पंजाब प्राइवेट डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी पॉलिसी’ को मंजूरी दे दी है। इसके तहत राज्य में तीन नई डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएंगी। इनमें एक होशियारपुर और दो पटियाला में बनाई जाएंगी। पटियाला के गांव फतेहपुर में एक यूनिवर्सिटी स्थापित होगी, जबकि विश्व प्रसिद्ध एजुकेशन ब्रांड फिजिक्स वाला पटियाला के गांव आनंदपुर केशव में डिजिटल यूनिवर्सिटी खोलेगा। वहीं, होशियारपुर में क्लाउड यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी, जहां आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी।
उन्होंने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकार के अधीन कॉन्ट्रैक्ट पर लाने के लिए सरकार एक विशेष मनी बिल ला रही है। इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा में पेश कर पारित कराया जाएगा।
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि निजी स्कूलों में मनमाने फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए लाए गए अध्यादेश को विधेयक में बदलने की मंजूरी दे दी गई है। विधानसभा और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। इसके तहत कोई भी निजी स्कूल 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। यदि कोई स्कूल इससे अधिक फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे नियामक (रेगुलेटरी) संस्था से अनुमति लेनी होगी।
कैबिनेट ने ‘पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ ट्रीज़ बिल’ को भी मंजूरी दी है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति एक पेड़ काटता है तो उसे 10 नए पेड़ लगाने होंगे। ऐसा नहीं करने पर पहली बार प्रति पेड़ 10 हजार रुपये, दूसरी बार 35 हजार रुपये और तीसरी बार 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
इसके अलावा कैबिनेट ने पंजाब लोक निर्माण विभाग (PWD) में सिविल पदों पर सीधी भर्ती को भी मंजूरी दे दी है, जिससे विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का रास्ता साफ हो गया है।
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पंजाब विधानसभा में रोजगार और औद्योगिक निवेश पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन ने रोजगार सृजन और औद्योगिक निवेश को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान सरकार की रोजगार नीतियों, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और राज्य में आए बड़े औद्योगिक निवेश की सराहना की गई।
प्रस्ताव पेश करते हुए विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि 1 अप्रैल 2022 से अब तक योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर 68,228 सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने बताया कि 16 मार्च 2022 से 31 जुलाई 2026 तक पंजाब को 1,83,837 करोड़ रुपये के 9,899 औद्योगिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके जरिए राज्य में 6,16,436 नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में 16,316, गृह विभाग में 14,723, बिजली विभाग में 8,706, स्थानीय निकाय विभाग में 5,681 और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 4,758 नियुक्तियां की गई हैं।
धालीवाल ने कहा कि पहले पंजाब में सरकारी नौकरियां सिफारिश, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार का शिकार थीं, जिससे योग्य युवाओं का भरोसा व्यवस्था से उठ चुका था। लेकिन मौजूदा सरकार ने पारदर्शी परीक्षाओं और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के जरिए इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।
उन्होंने कहा कि अब युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए किसी सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि उन्हें उनकी योग्यता और मेहनत के आधार पर अवसर मिल रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल सरकारी नौकरियों से बेरोजगारी की समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसलिए राज्य सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और नीतिगत स्थिरता के माध्यम से औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया है।
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स्वास्थ्य योजना की सफलता तभी है, जब ज़रूरत के समय लोगों तक उपचार पहुँच सके : डॉ. बलबीर सिंह
किसी भी स्वास्थ्य योजना की वास्तविक सफलता केवल इस बात से नहीं आँकी जा सकती कि उस पर कितना ख़र्च हुआ या कितने मामलों का निपटारा हुआ, बल्कि इस बात से तय होती है कि ज़रूरत के समय लोगों को समय पर उपचार मिल पाया या नहीं। भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत 8 जनवरी 2026 से अब तक 2,91,417 लाभार्थियों को उपचार का लाभ मिल चुका है, जो कि एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक लगभग ₹1,044 करोड़ मूल्य की कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा चुकी हैं। इन आंकड़ों के पीछे हज़ारों ऐसे परिवार हैं, जिन्हें चिकित्सा आपात स्थिति के दौरान इलाज के ख़र्च की चिंता किए बिना अपने प्रियजनों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला।
इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “किसी भी स्वास्थ्य योजना की सफलता तभी मानी जाती है, जब वह ज़रूरत के समय लोगों तक पहुँचे। मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल आंकड़ों की योजना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि किसी भी मरीज़ को इलाज और आर्थिक बोझ के बीच चुनाव न करना पड़े। प्रत्येक लाभार्थी उस परिवार का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे कठिन समय में इस योजना का सहारा मिला।”
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने आगे कहा, “हम जानते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएँ लगातार बदल रही हैं और हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम स्वास्थ्य व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाते रहें। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से हम कैशलेस उपचार को अधिक सुलभ बना रहे हैं, स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत कर रहे हैं तथा यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक पात्र नागरिक तक इस योजना का लाभ पहुँचे।”
मुख्यमंत्री सेहत योजना से लाभान्वित अनेक लोगों ने इस योजना के प्रति संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की है। सुरेशपाल कौर ने बताया कि कठिन गर्भावस्था के दौरान मुख्यमंत्री सेहत योजना उनके परिवार के लिए संबल बनी। उन्होंने कहा, “गर्भावस्था के दौरान मुझे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो गई थी और सीज़ेरियन डिलीवरी करवाने की ज़रूरत थी। ऐसे समय में सेहत कार्ड हमारे लिए बहुत बड़ी मदद साबित हुआ। जन्म के बाद मेरे बच्चे को विशेष नवजात चिकित्सा (नीओनेटल केयर) की आवश्यकता थी, जिसका पूरा उपचार भी मुख्यमंत्री सेहत योजना के पैकेज के तहत उपलब्ध करवाया गया। इस योजना ने कठिन समय में हमारा साथ दिया और मेरे बच्चे को जीवन की स्वस्थ शुरुआत मिली।”
सुनाम की रूपिंदर कौर ने बताया कि कई वर्षों से घुटनों के असहनीय दर्द के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो गया था। उन्होंने कहा, “मैं लंबे समय से घुटनों के गंभीर दर्द से पीड़ित थी, लेकिन ख़र्च की चिंता के कारण ऑपरेशन के बारे में सोच पाना भी मुश्किल था। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मेरा घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) नि:शुल्क हुआ। इस उपचार ने मुझे फिर से सामान्य और बेहतर जीवन जीने का अवसर दिया है।”
इसी प्रकार तरनतारन के बीर सिंह को हृदय संबंधी बीमारी का पता चलने पर मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत समय पर उपचार मिला। उनका एंजियोग्राफी के साथ पीटीसीए (परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी) किया गया।
बीर सिंह ने कहा, “डॉक्टरों ने बताया कि हृदय रोग के उपचार में देरी नहीं की जा सकती और इसका ख़र्च परिवार के लिए बहुत बड़ा बोझ बन सकता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के कारण मुझे समय पर आवश्यक उपचार मिल गया।”
मुख्यमंत्री सेहत योजना का प्रभाव अब पूरे पंजाब में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राज्य के प्रत्येक ज़िले के लाभार्थी इस योजना के तहत उपचार प्राप्त कर रहे हैं। स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के ज़िला-वार आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,91,417 लोगों को योजना का लाभ मिल चुका है। ज़िलों में पटियाला 27,892 लाभार्थियों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद बठिंडा में 22,584 तथा लुधियाना में 21,729 लाभार्थियों ने योजना का लाभ प्राप्त किया है। यह दर्शाता है कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पंजाब में इसकी व्यापक माँग है।
योजना के अंतर्गत जालंधर (19,312), होशियारपुर (19,075), अमृतसर (16,550), संगरूर (16,549), श्री मुक्तसर साहिब (14,800), फिरोज़पुर (13,344) तथा गुरदासपुर (12,037) में भी बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त मोगा (11,669), फाज़िल्का (11,516), मानसा (10,539), फरीदकोट (10,309), बरनाला (8,773), तरनतारन (8,714), रूपनगर (8,574), एस.ए.एस. नगर (8,085), फतेहगढ़ साहिब (7,933), शहीद भगत सिंह नगर (6,999), कपूरथला (5,928), पठानकोट (5,844) तथा मालेरकोटला (2,472) के लाभार्थियों ने भी कैशलेस उपचार प्राप्त किया है। यह व्यापक पहुँच इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों सहित प्रदेश के सभी ज़िलों में परिवारों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुँचा रही है।
मुख्यमंत्री सेहत योजना का लगातार बढ़ता दायरा स्वास्थ्य सेवाओं में एक सरल लेकिन महत्त्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। अब लोगों को उपचार शुरू करवाने से पहले यह चिंता नहीं सताती कि वे इसका ख़र्च कैसे उठाएँगे। योजना का विस्तार लगातार जारी है और इसका उद्देश्य स्पष्ट है—पंजाब के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाना।
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