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भाजपा देश की सबसे पसंदीदा पार्टी- स्थापना दिवस पर बोले PM Modi

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PM Modi

पार्टी के स्थापना दिवस पर पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा ने अपने विकासोन्मुख दृष्टिकोण, सुशासन और राष्ट्रवादी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए एक छाप छोड़ी है।

भाजपा के 44वें स्थापना दिवस पर, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अप्रैल को कहा कि यह भारत की पसंदीदा पार्टी बन गई है और विश्वास व्यक्त किया कि लोग इसे केंद्र में एक और कार्यकाल के लिए चुनेंगे, जिससे इसे “पिछले दशक में कवर की गई जमीन” पर निर्माण करने की अनुमति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि भारत के युवा भाजपा को एक ऐसी पार्टी के रूप में देखते हैं जो उनकी आकांक्षाओं को पूरा कर सकती है और 21वीं सदी में राष्ट्र को नेतृत्व प्रदान कर सकती है।

मोदी ने जोर देकर कहा कि भाजपा ने भारत को भ्रष्टाचार, क्रोनिज्म, जातिवाद, सांप्रदायिकता और वोट बैंक की राजनीति की संस्कृति से मुक्त कराया, जो देश पर सबसे लंबे समय तक शासन करने वालों की पहचान है। उन्होंने कहा कि आज के भारत में स्वच्छ और पारदर्शी शासन पर जोर दिया जा रहा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास का फल बिना किसी भेदभाव के गरीबों तक पहुंचे।

उन्होंने कहा, “केंद्र हो या राज्य, हमारी पार्टी ने सुशासन को फिर से परिभाषित किया है। हमारी योजनाओं और नीतियों ने गरीबों और दलितों को ताकत दी है। जिन लोगों को दशकों तक हाशिए पर छोड़ दिया गया, उन्हें हमारी पार्टी में एक आवाज और उम्मीद मिली, “श्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा। (formerly Twitter). उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सर्वांगीण विकास प्रदान करने की दिशा में काम किया है जिससे प्रत्येक भारतीय के लिए जीवन की सुगमता को बढ़ावा मिला है।

“मैं उन सभी महान महिलाओं और पुरुषों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और बलिदान को भी बहुत सम्मान के साथ याद करता हूं जिन्होंने वर्षों से हमारी पार्टी का निर्माण किया। मैं बड़े विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हम भारत की पसंदीदा पार्टी हैं, जिसने हमेशा ‘राष्ट्र प्रथम’ के आदर्श वाक्य के साथ काम किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि भाजपा ने अपने विकासोन्मुख दृष्टिकोण, सुशासन और राष्ट्रवादी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए अपनी पहचान बनाई है।

NDA भारत की विविधता को समाहित करता हैः मोदी
मोदी ने कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित, हमारी पार्टी 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं और सपनों को मूर्त रूप देती है। भारत के युवा हमारी पार्टी को एक ऐसी पार्टी के रूप में देखते हैं जो अपनी आकांक्षाओं को पूरा कर सकती है और 21वीं सदी में भारत को नेतृत्व प्रदान कर सकती है।

उन्होंने कहा, “हमें एन. डी. ए. का अभिन्न अंग होने पर भी गर्व है, जो राष्ट्रीय प्रगति और क्षेत्रीय आकांक्षाओं के बीच एक पूर्ण सद्भाव को दर्शाता है। एन. डी. ए. एक जीवंत गठबंधन है जो भारत की विविधता को समाहित करता है। हम इस साझेदारी को संजोते हैं और मुझे यकीन है कि आने वाले समय में यह और भी मजबूत होगी। आगामी आम चुनावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “भारत एक नई लोकसभा का चुनाव करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुझे विश्वास है कि लोग हमें एक और कार्यकाल का आशीर्वाद देने जा रहे हैं ताकि हम पिछले दशक में जमीन पर निर्माण कर सकें।

भाजपा की स्थापना 1980 में तत्कालीन भारतीय जनसंघ के नेताओं द्वारा की गई थी, जो आपातकाल 1977 के बाद के चुनावों में कांग्रेस का मुकाबला करने के लिए जनता पार्टी बनाने के लिए अन्य विपक्षी दलों के साथ विलय हो गई थी। इसने 1984 में लड़े पहले राष्ट्रीय चुनाव में केवल दो लोकसभा सीटें जीतीं। हालांकि, बाद में अटल बिहारी वाजपेयी और L.K. के नेतृत्व में यह तेजी से बढ़ा। आडवाणी, 1990 के दशक में एक गठबंधन के प्रमुख के रूप में सत्ता में आए, इससे पहले कि श्री मोदी ने 2014 में पार्टी को अपने पहले बहुमत और फिर 2019 में एक बड़े जनादेश के लिए नेतृत्व किया।

अधिकांश राजनीतिक विशेषज्ञों ने 19 अप्रैल से शुरू होने वाले सात चरणों के चुनाव में भाजपा को तीसरे कार्यकाल के लिए सत्ता में बने रहने की प्रबल दावेदार माना है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, J.P. Nadda ने पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी और कहा कि पार्टी आगामी आम चुनावों में अभूतपूर्व जीत के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। एक्स पर एक पोस्ट में, श्री नड्डा ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर, मैं अपने सभी वरिष्ठ नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने अपने बलिदान, समर्पण और कड़ी मेहनत के माध्यम से संगठन को राष्ट्रव्यापी विस्तार दिया। इस अवसर पर सभी कार्यकर्ताओं को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में, मोदी जी की नीतियों ने लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। मैं अपने प्रत्येक कार्यकर्ता से आह्वान करता हूं कि वे भारत माता की समग्र प्रगति के लिए अपने कर्तव्यों का त्याग करें।

इस बीच, केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं और भाजपा को दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक दलों में से एक बनाने में उनकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “संगठन के प्रति अटूट समर्पण, काम के प्रति निष्ठा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ, दिन-रात काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं ने भाजपा को करोड़ों देशवासियों की आशा और आकांक्षा का एक शक्तिशाली माध्यम बना दिया है।

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सोना-चांदी खरीदना होगा महंगा! केंद्र सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी

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अगर आप आने वाले समय में सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपको पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। केंद्र सरकार ने सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुओं के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में बड़ा इजाफा कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक नई दरें 13 मई 2026 से लागू हो गई हैं।

सरकार के इस फैसले के बाद देश में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। विदेशों से सोना मंगवाना अब महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर ज्वेलरी बाजार और ग्राहकों पर पड़ेगा।

नई दरों के अनुसार सोने पर कुल आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है। बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) को 5 फीसदी से बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया गया है, जबकि एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) को 1 फीसदी से बढ़ाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। यूएई से तय कोटे के तहत आने वाले सोने पर भी अब बढ़ी हुई ड्यूटी लागू होगी।

इस फैसले का सबसे ज्यादा असर गहने खरीदने वालों पर पड़ सकता है। शादी या निवेश के लिए सोना खरीदना अब और महंगा हो जाएगा। ज्वेलर्स की लागत बढ़ेगी और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ेगा।

इसके साथ ही निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रीसाइक्लिंग जैसे उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि इन क्षेत्रों में कीमती धातुओं का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है। लागत बढ़ने से कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।

भारत में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 24 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 71.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 58 बिलियन डॉलर था। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 757 टन से घटकर 721 टन रह गया।

भारत दुनिया का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। देश सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से आयात करता है, जिसका हिस्सा करीब 40 फीसदी है। इसके बाद यूएई और दक्षिण अफ्रीका का नंबर आता है।

गौरतलब है कि जुलाई 2024 के बजट में सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए सोने पर ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी थी। लेकिन अब बढ़ते आयात और विदेशी मुद्रा पर दबाव को देखते हुए सरकार ने फिर से ड्यूटी बढ़ाने का फैसला लिया है।

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पीएम की सलाह आर्थिक इमरजेंसी की आहट?- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री की ओर से देशवासियों को पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल का कम इस्तेमाल करने और सोने समेत अन्य कीमतीे चीजें खरीदने में कटौती करने की सलाह देने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने सवाल किया है कि कहीं देश भारी आर्थिक संकट में तो नहीं फंस गया है। ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पीएम ने देश के सभी नागरिकों को खाने-पीने, घूमने- फिरने और विदेश यात्राओं में कटौती करने की सलाह दी है। साथ ही, सोना और अन्य कीमती चीज़ें खरीदने में भी कटौती करने की सलाह दी है। उन्होंने पूछा है कि क्या यह देश में आर्थिक इमरजेंसी की आहट है? क्या देश भारी आर्थिक संकट में फंस गया है? ऐसा तो देश में पहले कभी नहीं हुआ। प्रधानमंत्री को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए। आखिर देश की असली आर्थिक हालत क्या है?

उधर, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी स्वदेशी अपनाने और विदेशी चीजें कम से कम खरीदने की सलाह पर प्रधामंत्री पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शब्दों के उस्ताद हैं, लेकिन उनको देश के सामने सच बोलना चाहिए। यह सर्वविदित है कि मौजूदा समय में भारत की डोर व्हाइट हाउस के हाथों में है, क्योंकि हर फैसला व्हाइट हाउस की सहमति से ही लिया जा रहा है। भारत-पाकिस्तान युद्ध जैसे मुद्दों में भी सीज फायर की घोषणा अमेरिकी अधिकारियों की ओर से की गई थी, जो देश की संप्रभुता पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सीएम भगवंत सिंह मान ने कहा कि भले ही देश के शासक विश्व गुरु होने का दावा करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि वे विश्व चेला बनने की ओर बढ़ रहे हैं क्योंकि व्हाइट हाउस के आदेशों का आंख मूंदकर पालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन रक्षा क्षेत्र तक में एफडीआई जैसे उनके कदमों ने देश को बर्बाद कर दिया है। भगवंत मान ने आगाह किया कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय कृषि को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है।

देश के युवाओं को पेपर लीक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने नीट परीक्षा का पेपर लीक होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर साल 7 करोड़ युवा इंजीनियरिंग, मेडिकल कॉलेजों में दाखिले और सरकारी नौकरियों के लिए परीक्षाएँ देते हैं। लेकिन राजनीतिक संरक्षण में चल रहे पेपर लीक गिरोह इन युवाओं का भरोसा और हौसला तोड़ रहे हैं। पेपर लीक में शामिल माफिया और उन्हें संरक्षण देने वाले नेता देश के दुश्मन हैं। ये लोग देश की नींव को खोखला कर रहे हैं। सरकारें इस अपराध की साझेदार बन चुकी हैं। इसके खिलाफ युवाओं को देशभर में एक निर्णायक लड़ाई छेड़नी होगी।

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‘एक साल तक सोना न खरीदें’ PM मोदी की बड़ी अपील

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में हैदराबाद में एक रैली के दौरान देशवासियों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने की अपील किए जाने के बाद देशभर की ज्वेलरी इंडस्ट्री में चर्चा और चिंता का माहौल बन गया है। PM मोदी ने देश की आर्थिक स्थिति, विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव और वैश्विक संकटों को ध्यान में रखते हुए लोगों से सोने की खरीद कम करने और “मेड इन इंडिया” उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की थी।

इस बयान के बाद दिल्ली और देशभर के व्यापारियों एवं उद्यमियों के संगठन ‘चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री’ (CTI) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद ज्वेलरी और सोने के कारोबार से जुड़े सैकड़ों व्यापारियों ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह की अपीलों से ग्राहकों में असमंजस और डर का माहौल बन सकता है, जिसका सीधा असर सोने की बिक्री पर पड़ सकता है।

CTI के अनुसार चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। यदि लोग प्रधानमंत्री की अपील को बड़े स्तर पर मानते हैं तो देश में सोने की मांग 800 टन से घटकर लगभग 500 टन तक आ सकती है। व्यापारियों का मानना है कि इससे ज्वेलरी बाजार में बड़ी मंदी आ सकती है।

ज्वेलर्स ने खास तौर पर चिंता जताई है कि यह अपील ऐसे समय पर आई है जब देश में शादी-विवाह का सीजन चरम पर है। भारत में शादी समारोहों के दौरान सोने की खरीद को पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि ग्राहक सोने की खरीद से पीछे हटते हैं तो इसका बड़ा असर छोटे ज्वेलर्स से लेकर बड़ी ज्वेलरी कंपनियों तक सभी पर पड़ सकता है।

CTI ने यह भी कहा कि इस अपील का असर सिर्फ बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। निवेशकों की चिंता के कारण ज्वेलरी सेक्टर के स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि ज्वेलरी इंडस्ट्री देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, जिससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। इसलिए उद्योग को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित नीतियां और स्पष्ट संदेश बेहद जरूरी हैं। अब ज्वेलरी कारोबार से जुड़े व्यापारी नई रणनीतियों और ग्राहकों को आकर्षित करने के नए तरीकों पर काम करने की तैयारी कर रहे हैं।

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