Punjab
गांवों का सर्वांगीण विकास ही पंजाब को देशभर में नंबर एक राज्य बनाएगा: CM भगवंत सिंह मान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सरपंचों को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी निष्ठा से काम करने का आह्वान किया। यहां ‘सरपंच मिलनी’ के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरपंचों को 15 अगस्त से 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय मिलेगा। उन्होंने सरपंचों से सार्वजनिक धन के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करने, गुटबाजी को खत्म करने, आपसी सामुदायिक एकता बढ़ाने और गांवों को नशा मुक्त, स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयासों का नेतृत्व करने की अपील भी की।
‘सरपंच मिलनी’ के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंचायतों को लोकतंत्र की नींव के रूप में जाना जाता है क्योंकि पंचायतों के पास अपार शक्तियां होती हैं और इनके फैसलों को पूरे गांव द्वारा सम्मानपूर्वक माना जाता है। ग्रामीणों के हितों की रक्षा करना और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना हर सरपंच का नैतिक कर्तव्य है। हमारे देश की लगभग 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है, जिस कारण पंचायती राज संस्थाओं को लोकतंत्र की धुरी माना जाता है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “ये संस्थाएं राज्य सरकार की जन-पक्षधर और विकास-उन्मुख योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करती हैं। राज्य सरकार नीतियां बनाती है, जबकि सरपंच और पंच इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। मैं सभी सरपंचों से अपील करता हूं कि वे आज से ही विकास कार्यों के लिए स्वयं को पुनः समर्पित करें ताकि लोगों को इसका भरपूर लाभ मिल सके।”
एक बड़ी घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरपंचों को 15 अगस्त से 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। इससे पहले पिछली सरकारों ने सरपंचों को 1,200 रुपये मानदेय देने का वादा किया था, लेकिन वह फैसला कभी अमल में नहीं आया और सरपंचों को अपना हक लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। हालांकि, हमारी सरकार ने सरपंचों को 2,000 रुपये मानदेय देना शुरू किया था, जिसे अब बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार उन कार्यों के लिए अनुदान जारी कर रही है जो सार्वजनिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं और ये पहले से ही पंचायतों की सीधी निगरानी में हैं। इसी तरह गांवों के विकास से संबंधित विभिन्न कार्य भी सरपंचों के नेतृत्व में किए जाते हैं। सरपंचों को इन कार्यों और सेवाओं की निष्ठापूर्वक निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। यह हर सरपंच का नैतिक कर्तव्य है कि वह करदाताओं के एक-एक पैसे के पूरी तरह पारदर्शी ढंग से उपयोग को सुनिश्चित करे।”
सरपंचों को आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरपंच विकास कार्यों में किसी भी प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप से दूर रहें। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले समय में गांवों में कई काम बड़े पैमाने पर गुटबाजी के कारण पटरी से उतर गए। गांवों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरपंचों को गांवों में गुटबाजी खत्म करने को मुख्य प्राथमिकता देनी चाहिए। लोकतंत्र में बहुमत हासिल करने वाला व्यक्ति या पार्टी विजेता होती है, लेकिन एक बार चुने जाने के बाद सरपंच पूरे गांव का होता है।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “सरपंचों को गांव के हर निवासी के साथ बराबर का व्यवहार करना चाहिए और हर फैसला निष्पक्षता से लिया जाना चाहिए। ऐसे कई सरपंच हैं जिन्होंने अपनी समझदारी और दूरदर्शिता के कारण अपने गांवों की तस्वीर बदल दी है। सरपंचों को अपने गांवों को नशा मुक्त बनाने की ओर मुख्य जोर देना चाहिए ताकि नौजवानों को नशे की लानत से दूर किया जा सके। उन्हें गांवों में आपसी एकता, शांति और सामुदायिक माहौल को मजबूत करने के लिए भी कड़ी मेहनत करनी चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “गांवों में विकास और समृद्धि की रफ्तार को और बढ़ावा देना समय की जरूरत है। पंजाब सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास और तरक्की के लिए प्रतिबद्ध है और इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। सरपंच सरकार और गांवों के बीच एक कड़ी होते हैं, इसलिए आपको गांवों के विकास में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।”
सरपंचों को पूर्ण सहयोग का विश्वास दिलाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया, “गांवों में विकास कार्य कराने के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है। अपने गांवों के विकास कार्यों को प्राथमिकता दें ताकि राज्य सरकार उन पर काम शुरू करवा सके। मैं आप सभी से अपील करता हूं कि राज्य के गांवों की तस्वीर बदलने के लिए एक रचनात्मक अभियान शुरू करके सक्रिय भूमिका निभाएं ताकि हम सब मिलकर ‘रंगला पंजाब’ (खुशहाल पंजाब) का सृजन कर सकें। गांवों को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कड़ी मेहनत करें। राज्य सरकार इस नेक कार्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य में सबसे कठिन चुनाव सरपंच का होता है क्योंकि सरपंच ही होते हैं जो जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े होते हैं। सरपंच गांव का मुखिया होता है और एक अच्छा सरपंच गांव का नक्शा बदल सकता है और अपने लोगों की समृद्धि को सुनिश्चित कर सकता है। यह ‘सरपंच मिलनी’ गांव स्तर पर समस्याओं को समझने के उद्देश्य से शुरू की गई एक अनोखी पहल है। अनुदान की कोई कमी नहीं है, लेकिन गांवों में इनका सही मायने में उपयोग होना सुनिश्चित किया जाए।”
उन्होंने दोहराया, “दोष किसी पर भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन सही सरपंच गांव के विकास की धुरी होते हैं। पहले, पिछली सरकारों का अनुदानों में अपना हिस्सा होता था, जिस कारण विकास प्रभावित होता था। आज गांवों में बड़े अनुदान आ रहे हैं और वह दिन दूर नहीं जब पंजाब के गांवों की इस पैसे से पूरी तरह तस्वीर बदल जाएगी। विकास कार्यों को प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि ये फंड इस तरीके से खर्च किए जाएं कि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिले।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “सबसे पहले पुस्तकालयों, स्कूलों, सोलर लाइटों और फिर गलियों-नालियों के निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। राज्य के विकास को तेज करने के लिए यह बेहद आवश्यक है और पंजाब को देश में अग्रणी बनाने के लिए यह समय की जरूरत है। मैं हर सरपंच को गांवों के सर्वांगीण विकास और अपने लोगों की समृद्धि के लिए सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग और मदद का विश्वास दिलाता हूं।”
Punjab
‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और CM भगवंत सिंह मान ने होशियारपुर में बसों को दिखाई हरी झंडी
सेवा और श्रद्धा भावना को मुख्य रखते हुए भगवंत सिंह मान सरकार ने ‘मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना’ का विस्तार किया है, जिसके तहत अब श्रद्धालु श्री खाटू श्याम-सालासर बालाजी, हरिद्वार-ऋषिकेश और मथुरा जी-वृंदावन धाम जैसे पवित्र स्थानों की यात्रा कर रहे हैं। बुधवार को इन स्थानों के लिए श्रद्धालुओं को ले जाने वाली 15 बसों को ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने होशियारपुर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिन्होंने बसों के अंदर जाकर प्रबंधों का जायजा भी लिया और श्रद्धालुओं से बातचीत की।
इस योजना के तहत 50 साल और उससे अधिक उम्र के श्रद्धालु यात्रा कर सकते हैं, जिसमें एक परिवार के अधिकतम दो सदस्य यात्रा करने के योग्य हैं, जबकि सरकार द्वारा ए.सी. स्लीपर बस यात्रा, रहने और खाने-पीने का प्रबंध मुफ़्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के पहले चरण में अब तक 4 लाख श्रद्धालु श्री अमृतसर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब-नैना देवी पर नतमस्तक हो चुके हैं।
श्रद्धालुओं की बसों को हरी झंडी दिखाने से पहले ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, “लोगों के लिए यह उनके जीवन में तीर्थ यात्रा पर जाने का एक बहुत बड़ा अवसर है। हम अभी बसों के अंदर भी गए थे। बसें बहुत ही शानदार, आरामदायक और ए.सी. हैं। लोगों को कुछ भी खर्च करने की जरूरत नहीं है। भगवंत मान सरकार यात्रा, रहने और खाने-पीने का सारा खर्च खुद उठाएगी। श्रद्धालुओं के लिए बहुत अच्छे होटलों के प्रबंध किए गए हैं। वहां पहुंचने के बाद भी अच्छी बसों का प्रबंध किया गया है, इसलिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।”
‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक ने बताया, “आज 15 बसें हरिद्वार-ऋषिकेश, मथुरा जी-वृंदावन धाम और सालासर-श्री खाटू श्याम जा रही हैं। हमने बसों के अंदर लोगों से बात की, जिनमें से कई को पहली बार सालासर और श्री खाटू श्याम जाने का अवसर मिल रहा है। आने वाले महीनों में पंजाब के कुल 1.5 लाख लोगों को विभिन्न तीर्थ स्थानों पर ले जाया जाएगा।”
श्रद्धालुओं की यात्रा के लिए शुभकामनाएं देते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, “मैं सभी को बधाई देता हूं और सुखद यात्रा के लिए प्रार्थना करता हूं। मैं प्रार्थना करता हूं कि श्रद्धालु ऐसी आशीषें लेकर लौटें जिससे पंजाब समृद्ध हो, पंजाब के लोग खुश रहें, और पंजाब में खुशी और शांति हो। मैं सभी की खुशी, अच्छी सेहत और एक सफल यात्रा की कामना करता हूं।”
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत बसों को हरी झंडी दिखाने के अवसर पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस पवित्र अवसर पर मैं होशियारपुर, पठानकोट, मुकेरियां और आस-पास के इलाकों से आए सभी लोगों को दिल से बधाई देता हूं, जो खाटू श्याम, सालासर, वृंदावन, मथुरा, ऋषिकेश तथा अन्य स्थानों के दर्शनों के लिए जा रहे हैं। इससे पहले भी दरबार साहिब, राम तीर्थ, अमृतसर साहिब, वाघा बॉर्डर और फतेहगढ़ साहिब जैसे धार्मिक स्थानों के लिए तीर्थ यात्रा बसें चल रही हैं। सभी धर्मों के धार्मिक स्थान इंसानियत और आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “आज होशियारपुर से वृंदावन, सालासर, खाटू श्याम, ऋषिकेश और मथुरा के लिए 15 बसें जा रही हैं। हम श्रद्धालुओं से मिले और बसों में बैठे श्रद्धालु बहुत खुश हैं और पहले ही भजन गा रहे हैं। मैं अरदास करता हूं कि उनकी यात्रा शुभ हो, वे खुशी-खुशी, गाते हुए और आनंद मनाते हुए जाएं और पंजाब की भलाई और तरक्की के लिए अरदास करके लौटें। मैं सभी से अपील करता हूं कि वे दर्शनों के लिए जाएं और पंजाब की बेहतरी, तरक्की और अच्छी सेहत के लिए अरदास, दुआ और आरती करके लौटें।”

उन्होंने कहा, “सभी श्रद्धालुओं की यात्रा के लिए एसी स्लीपर बसों का प्रबंध किया गया है और उनके रहने के लिए ए.सी. कमरों का प्रबंध किया जाएगा। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन और देखभाल प्रदान की जाएगी। प्रत्येक श्रद्धालु का चिकित्सा बीमा सुनिश्चित किया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ़्त इलाज करवा सकें। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रत्येक बस में एक अटेंडेंट मौजूद रहेगा और प्रत्येक मंजिल पर एक विशेष टीम तैनात की गई है ताकि दर्शन करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से हो सके।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “यात्रा पूरी होने पर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद और यादगार के रूप में पीतल का गिलास भी दिया जाएगा। किसी भी क्षेत्र, जाति या धर्म के लोग इन धार्मिक यात्राओं की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। पंजाब सरकार का यह प्रयास उन वरिष्ठ नागरिकों की इच्छाओं को पूरा कर रहा है जो विभिन्न धार्मिक स्थानों के दर्शन करके आशीर्वाद लेना चाहते हैं।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पांच जिलों होशियारपुर, जालंधर, कपूरथला, पठानकोट और गुरदासपुर के श्रद्धालुओं को लेकर कुल 15 बसें होशियारपुर से विभिन्न धार्मिक स्थानों के लिए रवाना हुई हैं। होशियारपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, जालंधर और कपूरथला से 10 बसें ऋषिकेश-हरिद्वार जाएंगी। इसी तरह फगवाड़ा और गुरदासपुर से 2 बसें श्रद्धालुओं को मथुरा-वृंदावन लेकर जाएंगी जबकि जालंधर और गुरदासपुर से 3 बसें श्रद्धालुओं को श्री खाटू श्याम-सालासर लेकर जाएंगी।”
उन्होंने कहा, “योजना के पहले चरण में अब तक 4 लाख श्रद्धालु श्री अमृतसर साहिब और श्री आनंदपुर साहिब-नैना देवी पर नतमस्तक हो चुके हैं। इस तीर्थ यात्रा के लिए विभिन्न जिलों से क्लस्टर बनाए गए हैं। इस तीर्थ यात्रा पर अब तक 148 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और इन यात्राओं पर 10 लाख श्रद्धालुओं को ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस विशेष तीर्थ यात्रा के लिए श्री आनंदपुर साहिब पर एक टेंट सिटी भी स्थापित की गई है और यात्रा बहुत ही सुचारू रूप से चल रही है।”
इस अवसर पर ‘आप’ के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया तथा अन्य भी उपस्थित थे।
Politics
CM भगवंत सिंह मान ने जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने के लिए राज्यपाल से मुलाकात की
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की और जगतार सिंह हवारा को मानवीय आधार पर 10 दिन की पैरोल देने के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि 31 साल बाद उनकी बीमार माता के अपने बेटे से मिलने की उम्मीद फिर से जगी है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस मामले में राज्यपाल की सिफारिश आवश्यक है, क्योंकि मामले की सुनवाई दिल्ली में चल रही है। उन्होंने साथ ही भरोसा दिलाया कि यदि हवारा को पैरोल दी जाती है तो पंजाब सरकार कानून-व्यवस्था पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने देने के लिए पूरी जिम्मेदारी निभाएगी।
राज्यपाल से मानवीय आधार पर इस मामले पर विचार करने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जगतार सिंह हवारा पिछले 31 वर्षों से जेल में बंद हैं। उनकी माता वृद्धावस्था में हैं, उम्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं और इस समय अर्ध-बेहोशी की अवस्था में हैं। उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मैंने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे जगतार सिंह हवारा को जल्द से जल्द 10 दिन की पैरोल देने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करें, ताकि वह अपनी माता से मिल सकें।”
उन्होंने आगे कहा, “चंडीगढ़ के प्रशासक होने के नाते इस संबंध में फैसला लेने के लिए राज्यपाल की सिफारिश आवश्यक है। इसलिए मामले के मानवीय पहलू और जगतार सिंह हवारा की माता की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए मैंने राज्यपाल से जल्द से जल्द फैसला लेने की अपील की है।”
राज्यपाल को कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए पंजाब सरकार की पूरी जिम्मेदारी का भरोसा दिलाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “जगतार सिंह हवारा के अपने घर आने के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने की राज्य सरकार पूरी गारंटी लेती है। उनके समर्थकों और परिवार के सदस्यों ने भी इस संबंध में राज्य सरकार को पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया है।”
उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पंजाब में कड़ी मेहनत से हासिल की गई शांति की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस कार्य में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। मैंने राज्यपाल को इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने के लिए राज्य सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा भी दिया है।”
Punjab
‘बेअदबी पार्टी’ पूरी तरह से ‘ईडी पार्टी’ और ED की प्रवक्ता बन चुकी है: हरपाल सिंह चीमा
पंजाब के वित्त मंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के सीनियर लीडर हरपाल सिंह चीमा ने बेअदबी पार्टी’ (शिरोमणि अकाली दल) और ‘ईडी पार्टी’ (भाजपा) पर तीखा हमला किया। उन्होंने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) के बीच हुए लेटर के बारे में अकाली दल के बयानों की कड़ी निंदा की।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “‘चिट्टा पार्टी’ (अकाली दल) ने अपने सभी उसूल छोड़ दिए हैं और अब ‘ईडी पार्टी’ (भाजपा) और सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एजेंसियों के लिए माउथपीस के तौर पर काम कर रही है। यह हैरानी की बात है कि अकाली दल ईडी द्वारा डीजीपी को भेजे गए लेटर को आम आदमी पार्टी को बदनाम करने के हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “इससे साफ पता चलता है कि शिरोमणि अकाली दल भाजपा की एक विंग और माउथपीस के तौर पर काम कर रहा है, जो अपनी खोई हुई राजनितिक ज़मीन वापस पाने की बेकार कोशिश कर रही है।”
2007 से 2017 के बुरे दौर को याद करते हुए, उन्होंने पंजाब के सामाजिक ताने-बाने, अर्थव्यवस्था और युवाओं को बर्बाद करने के लिए सीधे तौर पर उस समय की अकाली-भाजपा सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोग ड्रग्स (चिट्टा) की बीमारी, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी और बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार को नहीं भूले हैं, जिसकी वजह से राज्य को ‘उड़ता पंजाब’ की दर्दनाक पीड़ा झेलनी पड़ी।”
मंत्री ने दावा किया, “अकाली-भाजपा के 10 साल के शासन में, पंजाब हर तरह से बर्बाद हो गया। माता-पिता को अपनी ज़मीन, घर और ज़िंदगी भर की कमाई बेचकर अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए मजबूर होना पड़ा, इस डर से कि सरकार द्वारा पाले-पोसे गए ड्रग माफिया उनका भविष्य बर्बाद कर देंगे।”
केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए, आप नेता ने डॉ. बीआर अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को केंद्र द्वारा योजनाबद्ध तरीके से नुकसान पहुंचाने की निंदा की। उन्होंने कहा, “ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी सेंट्रल एजेंसियों का इस्तेमाल अक्सर विपक्षी नेताओं को डराने, स्थानीय प्रशासन को धमकाने और देश भर में चुनी हुई राज्य सरकारों को गिराने के लिए किया जाता है, जैसा कि पश्चिम बंगाल, बिहार में किया जा रहा है और आप लीडरशिप को टारगेट किया जा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा, “भाजपा का डेमोक्रेटिक वैल्यू या संविधान में कोई भरोसा नहीं है। जब भी चुनाव पास आते हैं या कोई विपक्षी सरकार मज़बूती से सत्ता में होती है, तो सेंट्रल एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने और सरकारों को गिराने के लिए किया जाता है।”
अपने भाषण के अंत में, हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब के लोग अकाली दल की मौकापरस्त राजनीति और भाजपा के साथ उसके ऐतिहासिक गठबंधन को अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने कहा, “जो पार्टी कभी पंजाब के हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती थी, वह अब अपनी राजनीतिक खाल बचाने के लिए सेंट्रल एजेंसियों के इशारों पर चल रही है। पंजाब के लोग इन सस्ती राजनीतिक चालों को अच्छी तरह समझते हैं। न तो ईडी और न ही अकाली दल पंजाबियों को गुमराह करने या आप सरकार के प्रगतिशील शासन को पटरी से उतारने में कामयाब होगा।”
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