Connect with us

Punjab

गांवों का सर्वांगीण विकास ही पंजाब को देशभर में नंबर एक राज्य बनाएगा: CM भगवंत सिंह मान

Published

on

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज सरपंचों को संकीर्ण सोच से ऊपर उठकर गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी निष्ठा से काम करने का आह्वान किया। यहां ‘सरपंच मिलनी’ के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरपंचों को 15 अगस्त से 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय मिलेगा। उन्होंने सरपंचों से सार्वजनिक धन के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करने, गुटबाजी को खत्म करने, आपसी सामुदायिक एकता बढ़ाने और गांवों को नशा मुक्त, स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयासों का नेतृत्व करने की अपील भी की।

‘सरपंच मिलनी’ के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंचायतों को लोकतंत्र की नींव के रूप में जाना जाता है क्योंकि पंचायतों के पास अपार शक्तियां होती हैं और इनके फैसलों को पूरे गांव द्वारा सम्मानपूर्वक माना जाता है। ग्रामीणों के हितों की रक्षा करना और उनकी उम्मीदों पर खरा उतरना हर सरपंच का नैतिक कर्तव्य है। हमारे देश की लगभग 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है, जिस कारण पंचायती राज संस्थाओं को लोकतंत्र की धुरी माना जाता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “ये संस्थाएं राज्य सरकार की जन-पक्षधर और विकास-उन्मुख योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में काम करती हैं। राज्य सरकार नीतियां बनाती है, जबकि सरपंच और पंच इन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। मैं सभी सरपंचों से अपील करता हूं कि वे आज से ही विकास कार्यों के लिए स्वयं को पुनः समर्पित करें ताकि लोगों को इसका भरपूर लाभ मिल सके।”

एक बड़ी घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरपंचों को 15 अगस्त से 10,000 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। इससे पहले पिछली सरकारों ने सरपंचों को 1,200 रुपये मानदेय देने का वादा किया था, लेकिन वह फैसला कभी अमल में नहीं आया और सरपंचों को अपना हक लेने के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। हालांकि, हमारी सरकार ने सरपंचों को 2,000 रुपये मानदेय देना शुरू किया था, जिसे अब बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार उन कार्यों के लिए अनुदान जारी कर रही है जो सार्वजनिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं और ये पहले से ही पंचायतों की सीधी निगरानी में हैं। इसी तरह गांवों के विकास से संबंधित विभिन्न कार्य भी सरपंचों के नेतृत्व में किए जाते हैं। सरपंचों को इन कार्यों और सेवाओं की निष्ठापूर्वक निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए। यह हर सरपंच का नैतिक कर्तव्य है कि वह करदाताओं के एक-एक पैसे के पूरी तरह पारदर्शी ढंग से उपयोग को सुनिश्चित करे।”

सरपंचों को आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “सरपंच विकास कार्यों में किसी भी प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप से दूर रहें। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले समय में गांवों में कई काम बड़े पैमाने पर गुटबाजी के कारण पटरी से उतर गए। गांवों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए सरपंचों को गांवों में गुटबाजी खत्म करने को मुख्य प्राथमिकता देनी चाहिए। लोकतंत्र में बहुमत हासिल करने वाला व्यक्ति या पार्टी विजेता होती है, लेकिन एक बार चुने जाने के बाद सरपंच पूरे गांव का होता है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “सरपंचों को गांव के हर निवासी के साथ बराबर का व्यवहार करना चाहिए और हर फैसला निष्पक्षता से लिया जाना चाहिए। ऐसे कई सरपंच हैं जिन्होंने अपनी समझदारी और दूरदर्शिता के कारण अपने गांवों की तस्वीर बदल दी है। सरपंचों को अपने गांवों को नशा मुक्त बनाने की ओर मुख्य जोर देना चाहिए ताकि नौजवानों को नशे की लानत से दूर किया जा सके। उन्हें गांवों में आपसी एकता, शांति और सामुदायिक माहौल को मजबूत करने के लिए भी कड़ी मेहनत करनी चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “गांवों में विकास और समृद्धि की रफ्तार को और बढ़ावा देना समय की जरूरत है। पंजाब सरकार गांवों के सर्वांगीण विकास और तरक्की के लिए प्रतिबद्ध है और इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। सरपंच सरकार और गांवों के बीच एक कड़ी होते हैं, इसलिए आपको गांवों के विकास में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।”

सरपंचों को पूर्ण सहयोग का विश्वास दिलाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया, “गांवों में विकास कार्य कराने के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है। अपने गांवों के विकास कार्यों को प्राथमिकता दें ताकि राज्य सरकार उन पर काम शुरू करवा सके। मैं आप सभी से अपील करता हूं कि राज्य के गांवों की तस्वीर बदलने के लिए एक रचनात्मक अभियान शुरू करके सक्रिय भूमिका निभाएं ताकि हम सब मिलकर ‘रंगला पंजाब’ (खुशहाल पंजाब) का सृजन कर सकें। गांवों को स्वच्छ, हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कड़ी मेहनत करें। राज्य सरकार इस नेक कार्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य में सबसे कठिन चुनाव सरपंच का होता है क्योंकि सरपंच ही होते हैं जो जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े होते हैं। सरपंच गांव का मुखिया होता है और एक अच्छा सरपंच गांव का नक्शा बदल सकता है और अपने लोगों की समृद्धि को सुनिश्चित कर सकता है। यह ‘सरपंच मिलनी’ गांव स्तर पर समस्याओं को समझने के उद्देश्य से शुरू की गई एक अनोखी पहल है। अनुदान की कोई कमी नहीं है, लेकिन गांवों में इनका सही मायने में उपयोग होना सुनिश्चित किया जाए।”

उन्होंने दोहराया, “दोष किसी पर भी लगाए जा सकते हैं, लेकिन सही सरपंच गांव के विकास की धुरी होते हैं। पहले, पिछली सरकारों का अनुदानों में अपना हिस्सा होता था, जिस कारण विकास प्रभावित होता था। आज गांवों में बड़े अनुदान आ रहे हैं और वह दिन दूर नहीं जब पंजाब के गांवों की इस पैसे से पूरी तरह तस्वीर बदल जाएगी। विकास कार्यों को प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि ये फंड इस तरीके से खर्च किए जाएं कि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिले।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा, “सबसे पहले पुस्तकालयों, स्कूलों, सोलर लाइटों और फिर गलियों-नालियों के निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। राज्य के विकास को तेज करने के लिए यह बेहद आवश्यक है और पंजाब को देश में अग्रणी बनाने के लिए यह समय की जरूरत है। मैं हर सरपंच को गांवों के सर्वांगीण विकास और अपने लोगों की समृद्धि के लिए सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग और मदद का विश्वास दिलाता हूं।”

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

National

नांदेड़ साहिब में सुखबीर बादल पर हमला, निजी अस्पताल में कराया गया भर्ती

Published

on

महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब में शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर हमला होने की खबर सामने आई है। घटना के बाद उन्हें तुरंत इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ है।

जानकारी के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल अपने परिवार के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में माथा टेकने पहुंचे थे। इसी दौरान माता साहिब कौर गुरुद्वारा साहिब के पास उनके साथ यह घटना हुई। हमले के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया।

घटना के बाद गुरुद्वारा साहिब के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस की ओर से पूरे मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमला किसने और किस वजह से किया।

फिलहाल सुखबीर सिंह बादल को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी मेडिकल जांच के बाद ही सामने आएगी। वहीं, पुलिसकर्मी के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।

घटना के बाद नांदेड़ साहिब में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और हमले से जुड़ी अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं।

Continue Reading

Punjab

पंजाब के पानी की रॉयल्टी पर बड़ा एक्शन, राजस्थान को 30 दिन का अल्टीमेटम

Published

on

पंजाब सरकार ने पानी की रॉयल्टी के मुद्दे पर बड़ा कदम उठाते हुए राजस्थान सरकार से 1.44 लाख करोड़ रुपये की बकाया राशि की मांग की है। इस संबंध में जल संसाधन विभाग की ओर से राजस्थान सरकार को पत्र भेजकर 30 दिनों के भीतर बकाया राशि का भुगतान करने या अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया है।

पंजाब सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर निर्धारित समय के भीतर राजस्थान की ओर से कोई जवाब नहीं मिलता है, तो अदालत और संवैधानिक माध्यमों से आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकार के मुताबिक, इससे पहले भी 18 मार्च और 4 मई को राजस्थान सरकार को पत्र भेजे गए थे, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

1960 से 2025 तक का हिसाब

पंजाब सरकार ने अपने दावे के लिए 1960 से 2025 तक की अवधि को आधार बनाया है। सरकार के हिसाब के अनुसार, औसतन 10 मिलियन एकड़ फीट पानी की रॉयल्टी और उस पर 8 प्रतिशत ब्याज जोड़ने के बाद कुल दावा 1,44,083 करोड़ रुपये बनता है।

हरियाणा से भी 312.59 करोड़ की मांग

पानी से जुड़े इस मामले में पंजाब सरकार ने हरियाणा से भी भाखड़ा नहर के रखरखाव से संबंधित 312.59 करोड़ रुपये की मांग की है। सरकार का कहना है कि पंजाब के पानी और नहरों से जुड़े अधिकारों तथा बकाया राशि के मामलों को गंभीरता से उठाया जा रहा है।

पुराने समझौतों से जुड़ा है मामला

पानी की रॉयल्टी का यह मुद्दा पुराने ऐतिहासिक समझौतों से भी जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, 4 सितंबर 1920 को शिमला में बीकानेर के महाराजा, बहावलपुर के नवाब और पंजाब प्रांत के बीच पानी को लेकर समझौता हुआ था। इसके बाद नवंबर 1927 में हुसैनीवाला हेडवर्क्स से पानी की आपूर्ति शुरू हुई थी।

पंजाब सरकार का दावा है कि 1960 में सिंधु जल संधि लागू होने तक राजस्थान की ओर से पंजाब को पानी की रॉयल्टी दी जाती रही। अब पंजाब सरकार ने 1960 से 2025 तक की रॉयल्टी का हिसाब लगाकर राजस्थान से बड़ी राशि की मांग की है।

अब राजस्थान सरकार के जवाब पर नजर रहेगी। 30 दिनों के भीतर अगर कोई स्पष्ट जवाब नहीं आता है, तो पंजाब सरकार की ओर से मामले को कानूनी और संवैधानिक स्तर पर आगे ले जाने की बात कही गई है।

Continue Reading

Punjab

नागरा गांव को बड़ी सौगात, 2.05 करोड़ की लागत से बनेगा वाटर वर्क्स

Published

on

पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने संगरूर जिले के नागरा गांव में 2 करोड़ 5 लाख रुपये की लागत से बनने वाले वाटर वर्क्स का उद्घाटन किया। इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 17 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिसके जरिए गांव के 758 घरों तक साफ पीने का पानी पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही डेढ़ लाख लीटर क्षमता वाला ओवरहेड टैंक भी तैयार किया जाएगा।

अमन अरोड़ा ने बताया कि पूरे विधानसभा क्षेत्र के 29 गांवों में 54 विकास कार्यों की शुरुआत, उद्घाटन या नींव रखी जा रही है। इन परियोजनाओं पर करीब 12 करोड़ 60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इनमें वाटर वर्क्स के अलावा खेल मैदान, तालाबों की देखभाल, गलियों-नालियों का निर्माण, धर्मशालाओं और अन्य जनहित के कार्य शामिल हैं।

हवारा की पैरोल पर केंद्र को घेरा

जगतार सिंह हवारा की पैरोल के मुद्दे पर अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से 10 दिन की पैरोल की मांग की गई थी और यह मामला मानवीय भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि एक मां की अपने बेटे से मिलने की इच्छा को ध्यान में रखते हुए पैरोल के मामले पर सकारात्मक विचार किया जाना चाहिए था।

फार्मेसी परीक्षा मामले पर सफाई

फार्मेसी परीक्षा में कथित नकल के मामले पर अमन अरोड़ा ने कहा कि मामला सामने आने के करीब 15 मिनट के भीतर ही इसका पता लगा लिया गया था। इसके बाद दोबारा परीक्षा भी करवाई गई। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक या किसी बड़े परीक्षा घोटाले का मामला सामने नहीं आया है।

पंजाब के पानी की रॉयल्टी पर बड़ा बयान

पंजाब के पानी की रॉयल्टी के मुद्दे पर अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब का पानी पड़ोसी राज्यों को मुफ्त में नहीं जाना चाहिए। उन्होंने राजस्थान और हरियाणा से 1.44 लाख करोड़ रुपये की मांग को जायज बताते हुए कहा कि पंजाब को अपने प्राकृतिक संसाधनों की कीमत हासिल करने का अधिकार है।

ED की कार्रवाई पर केंद्र पर निशाना

राजवीर घुम्मण से जुड़े मामले में ED की कार्रवाई को लेकर भी अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार अपना पक्ष मजबूती से उठाती रहेगी।

Continue Reading

Trending