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CM मान बोले- अकाली दल छिपकलियों की पार्टी बन गया:साहिबजादों के कार्टून पर BJP पर कार्रवाई क्यों नहीं; पावन स्वरूपों के मामले में एक्शन होगा

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पंजाब के CM भगवंत मान ने सोमवार को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SGPC और अकाली दल को जमकर घेरा। CM मान ने कहा कि 1920 में अकाली दल बना था। आज 105 साल हो गए। तब यह शेरों की पार्टी थी। आज इसे छिपकलियों की पार्टी बनाकर रख दिया। आज डायनासोर में हवा भरकर घूम रहे हैं। आज ये सिख कौम को कहां लेकर जा रहे हैं।

सीएम ने 328 पावन स्वरूपों के गायब होने के मामले में कहा कि उनके पास संस्थाओं की शिकायत आई थी। इसलिए FIR दर्ज की। पहले SGPC ने ही कानूनी कार्रवाई के प्रस्ताव पास किए। अब केस दर्ज होने के बाद फंसने लगे तो अब कह रहे हैं कि यह अंदरूनी मामला है। सरकार दखल न दे। सरकार कानूनी कार्रवाई करेगी।

सीएम ने कहा- भाजपा ने अपने आफिशियल पेज पर चारों साहिबजादों के कार्टून बनाकर बनाकर डाल दिए। लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने मीडिया से सवाल किया कि इसकी वजह पता क्या है। फिर सीएम ने कहा इन्हें 2027 का नजर आ रहा है। बीजेपी को सब माफी है।

सीएम मान सिंगर जसबीर जस्सी के धार्मिक गीत गाने के भी समर्थन में उतरे। मान ने कहा कि सभी सिंगर प्रोग्राम शुरू करते वक्त धार्मिक गीत गाते हैं। जस्सी के धार्मिक गीत पर अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने एतराज जताया था। सीएम ने अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज को कहा कि किसी ने आपकी अपॉइंटमेंट कर दी। नामिनेट हो। अब तो सिख पंथ के फैसले लो।

CM भगवंत मान की अहम बातें…

SGPC मेंबर आकाओं के इशारे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे

CM मान ने कहा- लगभग पिछले 6-7 सालों में एक बहुत बड़ी दुखदायक घटना को लेकर लोगों में रोष है। जिसमें गुरु साहिब के 328 स्वरूप चोरी हुए थे। इस बारे में बहुत सी संस्थाओं ने मांग की, मेमोरंडम दिए। फिर भी कुछ नहीं हुआ तो धरना दिया। कुछ संस्थाओं ने सरकार तक पहुंच की। उन्होंने मांग की कि इसकी जांच कराई जाए। सिख संगत को पता लगना चाहिए कि वह स्वरूप कहां है।

इसके बाद इस मामले में सरकार ने FIR दर्ज की। SIT बनाई ताकि पूरी पड़ताल हो सके। तब अचानक एसजीपीसी मेंबर अपने आकाओं के इशारों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लगे। वह कहते हैं कि ये पैसों का घोटाला है। प्रधान कहते हैं कि एसजीपीसी में रोजाना 10-20 घोटाले होते हैं।

पहले खुद ही कानूनी कार्रवाई के अधिकार दिए

सीएम ने कहा- हमारे पास शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अंतरिम कमेटी के प्रस्तावों की कापियां हैं। 12 जुलाई 2020, प्रस्ताव नंबर 368 की नकल है। इसमें लिखा गया कि कमेटी की मीटिंग 19 -5-2016 में हुई। इसमें पब्लिकेशन विभाग में लगी आग पर गंभीरता से चर्चा की गई। सिख संगत में इस घटना को लेकर कई तरह के शंकाएं पैदा हो रही हैं।

जरूरत है कि शंकाओं को दूर किया जाए। कोई जांच प्रभावित न हो, तुरंत विभाग से जुडे़ अधिकारी बदले जाएं। कुलवंत सिंह जिल्दसाज का पब्लिकेशन में काम में कोताही के कारण ठेका रद्द किया जाता। वहीं, गोइंदवाल साहिब गुरु साहिब के वृद्ध स्वरूप को अग्नि भेंट करने की सेवा भी बदली जाती है। पावन स्वरूप के ओरिजिनल स्वरूपों रिकवरी व उपयुक्त अधिकारी व कर्मचारियों कानूनी कार्रवाई करने के अधिकार सेवादार के महासचिव को दिए गए।

धामी साहिब ने 5 साल में कौन सी कार्रवाई की

सीएम ने कहा- अब धामी साहब (SGPC प्रधान) बताएं कि साढ़े 5 साल में कौन सी कार्रवाई की?। सीएम ने 27 अगस्त 2020 का 466 का प्रस्ताव पढ़ा। सीएम ने कहा- इसमें लिखा है कि अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी डयूटी में कोताही ही नहीं की, बल्कि अमानत व ख्यानत भी की। डॉ. रूप सिंह मुख्य सचिव, मनजीत सिंह, गुरबचन सिंह प्रेस और पब्लिकेशन पर पर्चा दर्ज करवाया। जुझार सिंह अकाउंटेंट को डिसमिस कर पर्चा कराया। इसके अलावा कई प्रस्ताव उन्होंने पढ़े।

पहले पर्चे डाले, फिर रद्द किए, सरकार से एक्ट पास क्यों कराया

सीएम ने कहा- पहले इतने पर्चे डाल दिए और बाद में इन्होंने कैंसिल कर लिए। 5 सितंबर 2020 को सारे पर्चे कैंसिल किए। इन्होंने उस समय जागद ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008 पास करवाया। यह राइट लिया कि स्वरूप छापने का काम एसजीपीसी करेगी। फिर उस समय यह एक्ट सरकार से क्यों पास कराया।

उस समय भी अकाल तख्त से प्रस्ताव पास करवा देते है। जब यह छापने का एक्ट सरकार से पास करवा लिया तो सरकार जवाब भी मांगेगी। फिर कहते हैं कि यह धार्मिक मामलों में दखल है। जब बेदअबी होती है तो कहते हैं कि सरकार क्या कर रही है। धामी साहब को जब राजनीतिक कामों से फुर्सत मिले तो उन्हें अन्य जिम्मेदारी का एहसास होगा।

SGPC प्रधान कठपुतली, अकाल तख्त से नहीं टकरा सकते

CM ने कहा- एसजीपीसी प्रधान को कठपुतली की तरह प्रयोग किया जाता है। हम अकाल तख्त से नहीं टकरा सकते है। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350 साल में हमने तो सारे इंतजाम किए। हम अपना फर्ज निभा रहे है। यह कहते हैं, यहां न आया करो। मैं एसजीपीसी को कहना चाहता हूं कि आपकी वोटें तो मोदी डलवाते है। चौदह साल से वोटें नहीं पड़ी। वोट डलवाने के लिए प्रस्ताव डाल दो। हर साल कह देते हैं कि अकाली को बहुत बड़ी जीत है। प्रधान साहिब कहते है कि पैसे लेन-देन का मामला है, इसमें बेदअबी है।

अकाली दल ने पंजाब का कुछ नहीं किया

सीएम ने कहा- कुर्सी के लिए यह बांग्लादेश, भूटान कही जाना पड़ जाए, यह जाएंगे। मगर, पंजाब के लिए कुछ नहीं किया। सिख कौम का कोई मुद्दा दिल्ली में नहीं उठाया। जब सरकार में भागीदार थे, उस समय भी नहीं उठाया। सबको मंजूरी देते रहे। सेंट्रल यूनिवर्सिटी को बादल साहब ने मंजूरी दी।

एसवाईएल के सर्वे को बादल साहब ने मंजूरी दी। किसानों से जुड़े कृषि सुधार बिल आए तो 3 महीने पूरा बादल परिवार कहता रहा कि ये बिल्कुल सही हैं। बाद में कहा कि बहुत खराब बिल हैं। आज भी कह दें कि गठबंधन करना तो यह कह देंगे सारी गलतियां माफ हैं। सिर्फ और सिर्फ सत्ता प्राप्ति के लिए पावर का प्रयोग हुआ है।

जिन पर केस दर्ज, कानूनी कार्रवाई होगी

सीएम मान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि 328 पावन स्वरूप गायब होने के मामले में जिन लोगों के नाम केस में दर्ज हैं। उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीएम ने धार्मिक मामलों में सरकार के दखल पर कहा- 2008 में उसी सरकार से एक्ट पास करवाते थे, उस समय दखल नहीं था। अपने घर पर जत्थेदार बुलाकर कागजों पर साइन करवा लिए।

उस समय सरकार का दखल नहीं था। 2 दिसंबर को सुखबीर बादल सारे अपराध कबूल कर गया, हांजी मैंने करवाए थे। मुक्तसर साहिब में जाकर कहा कि वैसे ही मुंह से निकल गया। वल्टोहा किस स्तर पर जत्थेदारों के खिलाफ बयानबाजी कर गया। उसे 2 दिन की सेवा लगा दी। ज्ञानी गुरबचन सिंह को माफी दे दी। कहा कि पुराने फैसले रद्द कर दिए।

सहजधारी धार्मिक गीत नहीं गा सकते तो गोलक में पैसा मत डलवाओ

सीएम ने कहा- पंजाब में जितने भी कलाकार है, वह कोई भी प्रोग्राम करते है, वह पहला गाना धार्मिक गाते थे। जसबीर जस्सी ने शबद नहीं, 2 गीत गाए है। वह शबद गायन नहीं था। पता नहीं इस तरह के फरमान किसी तरह जारी किए जा रहे हैं। इससे प्रचार बिल्कुल ही बंद हो जाएंगे। सीएम ने निहंग के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अगर सहजधारी धार्मिक गीत नहीं गा सकता है तो उनसे गोलक में पैसा क्यों डलवाते है।

यह भी पाबंदी लगा दो कि पतित माथा टेक नहीं सकते है। पता नहीं कहा से यह चीजें लेकर आए। एसजीपीसी को धर्म का प्रचार करना चाहिए। गुरुराम दास मेडिकल कॉलेज सिखों के बच्चों डॉक्टर बनाने के लिए बनाया था। लेकिन आज वह सबसे ज्यादा महंगा है। सुखबीर बादल के कहने से वहां एमबीबीएस की सीटें मिलती है। सराय में कमरे के लिए सिफारिश करनी पड़ती है।

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मोदी सरकार का रातों-रात डीज़ल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने का फ़ैसला पंजाब और किसान विरोधी कदम: कुलदीप सिंह धालीवाल

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा डीज़ल, पेट्रोल और सीएनजी की कीमतों में की गई ज़बरदस्त बढ़ोतरी को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। धालीवाल ने इसे देश विरोधी, पंजाब विरोधी और पूरी तरह से किसान विरोधी कदम बताते हुए कहा कि जब देश के लोग सुबह उठे तो केंद्र सरकार ने उन्हें महंगाई का बड़ा झटका दिया। इस फैसले से यह साफ हो गया है कि बीजेपी आम लोगों और देश के अन्नदाता को बर्बाद करने पर तुली हुई है।

शुक्रवार को आप नेता प्रभवीर बराड़ के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुलदीप धालीवाल ने पंजाब में मौजूदा कृषि के संकट और धान के सीजन का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय पूरे देश में और खासकर पंजाब में धान की बुआई का सीजन शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली हमारी सरकार ने किसानों के लिए नहर के पानी का इंतजाम किया है और 1 जून से धान की बुआई जोरों पर शुरू होने जा रही है। किसान अपनी गेहूं की फसल और पराली को बचाकर अगली मुख्य फसल के लिए दिन-रात अपने खेतों को तैयार करने में लगे हुए हैं। ऐसे नाजुक समय में डीजल की कीमत में 3.11 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी पंजाब के किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।

भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी की नीयत पर सवाल उठाते हुए धालीवाल ने कहा कि किसानों के आंदोलन के मोदी सरकार को आगे झुकना पड़ा और तीनों काले कृषि कानून वापस लेने पड़े, तो हार की टीस प्रधानमंत्री मोदी के दिमाग से अभी नहीं निकल रही है। मोदी सरकार जानबूझकर पंजाब और उसके किसानों-मजदूरों को बार-बार परेशान कर रही है। केंद्र ने पहले पंजाब का रूरल डेवलपमेंट फंड (आरडीएएफ) रोका और अब डीजल की कीमतें बढ़ाकर किसानों पर असहनीय बोझ डाल दिया है। पंजाब देश के अनाज उत्पादन में सबसे आगे है, इसलिए इस बढ़ोतरी का सबसे बुरा असर हमारे किसानों पर पड़ेगा।

धालीवाल ने केंद्र सरकार की गलत विदेश और व्यापार नीतियों पर बोलते हुए कहा कि जब इस साल 26 फरवरी को अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर साइन हुए थे, तो आम आदमी पार्टी देश की पहली पार्टी थी जिसने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस सौदे का कड़ा विरोध किया था। मैंने उसी दिन चेतावनी दी थी कि अमेरिका के सामने मोदी के घुटने टेकने से यह देश बर्बाद हो जाएगा। इससे पहले हमारा पुराना और भरोसेमंद दोस्त रूस हमें सिर्फ़ $35 से $50 प्रति बैरल पर सस्ता कच्चा तेल दे रहा था, जो आज भी चीन को मिल रहा है। लेकिन अमेरिका के दबाव में मोदी सरकार ने वहाँ से तेल खरीदना बंद कर दिया और आज देश इसका नतीजा भुगत रहा है। पेट्रोल और डीज़ल के दाम ₹100 के पार हो गए हैं।

उन्होंने पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ और उनकी टीम पर निशाना साधते हुए कहा कि जाखड़ एंड कंपनी, जो कल तक केंद्र की वकालत कर रही थी, आज जनता को जवाब दे कि यह कैसा न्याय है? परसों केंद्र सरकार ने धान का एमएसपी ऊँट के मुँह में जीरे जैसा सिर्फ़ 72 पैसे प्रति किलोग्राम बढ़ाकर किसानों के साथ क्रूर मज़ाक किया। दूसरी तरफ़, डीज़ल के दाम 3.11 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए। उन्होंने कहा कि लुधियाना एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स से पूछिए कि धान उगाने की लागत क्या है। बाज़ार में चावल 50 रुपये से 200 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा है और किसान को सिर्फ़ 72 पैसे दिए जा रहे हैं।

कुलदीप धालीवाल ने कहा कि डीज़ल के दाम बढ़ने से न सिर्फ़ किसान बल्कि आम नागरिक भी बुरी तरह प्रभावित होंगे। माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से खाने-पीने की हर ज़रूरी चीज़ के दाम आसमान छूने लगेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक तरफ़ तो जनता को कम गाड़ी चलाने, ऑफ़िस में कार न लाने, मोटरसाइकिल और साइकिल इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है और दूसरी तरफ़, वह खुद देश को महंगाई के दलदल में धकेलकर सरकारी हवाई जहाज़ उड़ाकर विदेश दौरे पर निकल गए हैं। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार के इस जनविरोधी फ़ैसले की कड़ी निंदा करते हैं। केंद्र सरकार को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए।

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भाजपा ने पश्चिम बंगाल में वोट चुराए, अब तेल की कीमतें बढ़ाकर लोगों को लूट रही है: अमन अरोड़ा

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बढ़ती महंगाई से पैदा हुई मुश्किलों का सामना कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने एक बार फिर आम लोगों, किसानों और छोटे व्यापारियों पर तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई का बोझ डाल दिया है। पूरा देश देख रहा है कि 12 साल पहले सत्ता में आने से पहले पीएम मोदी ने जो बड़े-बड़े वादे किए थे, उसके बावजूद लोग महंगाई की मार झेल रहे हैं।

तेल और एलपीजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹943 बढ़ाकर छोटे बिजनेसमैन और ट्रेडर्स पर भारी चोट की है। इसके साथ ही केंद्र ने पेट्रोल की कीमत में ₹3.14 प्रति लीटर, डीज़ल की कीमत में ₹3.11 प्रति लीटर और सीएनजी की कीमत में ₹2 की बढ़ोतरी की है। यह देश के लोगों के लिए शर्मनाक तोहफ़ा है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा को सिर्फ़ चुनाव के समय ही लोगों की भलाई याद आती है, लेकिन वोट मिलने के बाद वह लोगों पर आर्थिक बोझ डाल देती है। अमन अरोड़ा ने कहा कि भाजपा चुनाव के समय लोगों की भलाई की बात करती है, लेकिन वोट मिलने के बाद वह लोगों की मेहनत की कमाई लूटने लगती है। कीमतों में यह बढ़ोतरी सिर्फ़ सत्ताधारी पार्टी के करीबी कुछ चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए की जा रही है।

भाजपा के चुनावी वादों पर निशाना साधते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि भाजपा ने हर नागरिक के बैंक अकाउंट में ₹15 लाख जमा करने, दो करोड़ नौकरियाँ देने और किसानों की इनकम दोगुनी करने का वादा किया था। किसानों की इनकम दोगुनी करने के बजाय, भाजपा सरकार ने महंगाई और तेल की बढ़ती कीमतों के ज़रिए किसानों पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ाया है।

पंजाब के कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले असर का ज़िक्र करते हुए आप पंजाब के स्टेट प्रेसिडेंट ने कहा कि डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर धान की बुआई के सीज़न में खेती के कामों पर पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि धान की बुआई के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए हज़ारों लीटर पानी और तेल की ज़रूरत होती है। डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर उनके खेती के कामों पर पड़ेगा और उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

अमन अरोड़ा ने आगे कहा कि एक समय था जब पेट्रोल की कीमतों में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी पर देश भर में विरोध शुरू हो जाता था, लेकिन पिछले 12-13 सालों से महंगाई झेल रहे लोग अब थक चुके हैं और निराश हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की घरेलू आर्थिक नीतियों की पूरी तरह से नाकामी का नतीजा हैं।

भारत को “आत्मनिर्भर” बनाने के केंद्र के दावों पर सवाल उठाते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि पिछले एक दशक में रिवर्स इंपोर्ट पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। तेल इंपोर्ट से जुड़े केंद्र की विदेश नीति के फैसलों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “यह समझना मुश्किल है कि रूस जैसे देशों से मौके मिलने के बावजूद भारत तेल खरीदने पर खुद से फैसले लेने में क्यों हिचकिचा रहा है।”

पेट्रोल, डीज़ल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी की कड़ी निंदा करते हुए, अमन अरोड़ा ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह तुरंत इस बढ़ोतरी को वापस ले। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महंगाई इसी तरह आम आदमी का दम घोंटती रही, तो जनता का गुस्सा सड़कों पर उतर सकता है, जिसके भाजपा सरकार के लिए बड़े राजनीतिक नतीजे भुगतने पड़ेंगे।

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Punjab में हाइपरटेंशन के बढ़ते मामलों के बीच बुज़ुर्गों और मध्यम आयु वर्ग के मरीज़ों को बिना आर्थिक बोझ के जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध करवा रही ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना

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विश्व हाइपरटेंशन दिवस के अवसर पर,भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना उच्च रक्तचाप और उससे जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे मरीज़ों को किफायती और समय पर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाकर उन्हें महत्त्वपूर्ण राहत प्रदान कर रही है। जैसे-जैसे विभिन्न आयु वर्गों में उच्च रक्तचाप के मामले बढ़ रहे हैं, यह योजना पंजाब के हज़ारों परिवारों को समय पर उपचार उपलब्ध करवाने के साथ-साथ भारी चिकित्सा खर्चों से भी सुरक्षा प्रदान कर रही है।

हाइपरटेंशन ,जिसे आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर कहा जाता है, को डॉक्टर अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं। यह बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के स्ट्रोक, हार्ट फेलियर या किडनी रोग जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। यह बीमारी लगभग हर आयु वर्ग में देखने को मिल रही है।

अस्पतालों में बुज़ुर्ग पुरुष जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार करते दिखाई देते हैं, महिलाएँ अपने पर्स में दवाइयों की पर्चियाँ संभालकर रखती हुई दिखाई देती हैं। जबकि युवा मरीज़, जिन्हें पहले इस बीमारी के लिए बहुत कम उम्र का माना जाता था, अब रक्तचाप की बढ़ती रीडिंग को लेकर चिंता व्यक्त करते नज़र आते हैं। हर मरीज़ की फ़ाइल के पीछे एक ऐसा परिवार है जो बीमारी और बढ़ते इलाज के ख़र्च के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, भारत में उच्च रक्तचाप का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है, जिसके प्रमुख कारण अस्वस्थ खान-पान, तनाव, तंबाकू का सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित जीवनशैली हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज़ों को इस बीमारी का पता तब चलता है जब गंभीर जटिलताएँ उत्पन्न हो चुकी होती हैं। ऐसे बढ़ते स्वास्थ्य संकट के बीच पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो रही है। यह योजना हज़ारों मरीज़ों को उच्च रक्तचाप और उससे जुड़ी जटिलताओं का इलाज बिना भारी चिकित्सा बिलों के बोझ के उपलब्ध करवा रही है।

अनियंत्रित रक्तचाप के चलते होने वाले स्ट्रोक, हृदय संबंधी गंभीर आपात स्थितियों और किडनी से जुड़ी बीमारियों के उपचार एवं अस्पताल में भर्ती होने का ख़र्च अब इस योजना के तहत वहन किया जा रहा है, जिससे मानसिक तनाव से गुज़र रहे परिवारों को राहत मिल रही है।

पंजाब में अधिकांश मरीज़ अभी भी मध्यम आयु वर्ग और बुज़ुर्ग आबादी से संबंधित हैं, जिनमें 40 से 80 वर्ष आयु वर्ग सबसे अधिक प्रभावित है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, गुरदासपुर में 94 वर्ष तक की आयु वाले मरीज़ दर्ज किए गए, जबकि एस.ए.एस.नगर में 98 वर्ष आयु तक के मरीज़ दर्ज किए गए, जिससे स्पष्ट होता है कि यह रोग बुज़ुर्गों में व्यापक रूप से फैला हुआ है।

पटियाला,एस.ए.एस.नगर ,होशियारपुर, जालंधर और फरीदकोट जैसे जिलों में पुरुषों और महिलाओं दोनों में बड़ी संख्या में मामले दर्ज किए गए। वहीं अमृतसर और लुधियाना के अस्पताल रिकॉर्ड में 50 से 77 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई है।

डॉ. सौरभ शर्मा, जो कि सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं राजिंद्रा अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष हैं, कहते हैं कि उच्च रक्तचाप अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कहा,“आधुनिक जीवनशैली हर आयु वर्ग के लिए नई स्वास्थ्य चुनौतियाँ लेकर आई है। हालाँकि अधिकांश मामले 40 से 90 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में देखे जाते हैं, लेकिन अब किशोरों और 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में भी हाइपरटेंशन के मामले सामने आ रहे हैं।”

डॉ. शर्मा ने कहा,“तनाव, खराब खान-पान, व्यायाम की कमी और अनियमित दिनचर्या जैसे जीवनशैली संबंधी कारक उच्च रक्तचाप के प्रमुख कारण हैं, हालाँकि कुछ चिकित्सीय स्थितियाँ भी इसका कारण बन सकती हैं।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अब यह जटिलताएँ पहले की तुलना में कम उम्र में सामने आने लगी हैं।

अब केवल हाई ब्लड प्रेशर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी जटिलताएँ जैसे स्ट्रोक,हार्ट फेलियर और किडनी रोग भी पहले की तुलना में जल्दी सामने आ रहे हैं।

डॉ. शर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी योजनाएँ इसलिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि वे मरीज़ों को आर्थिक डर के कारण इलाज टालने से रोकती हैं। उन्होंने कहा,“उच्च रक्तचाप आपातकालीन स्थिति (हाइपरटेंसिव इमरजेंसी) में इलाज में देरी कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित होती है।”

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता केवल इलाज उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि इलाज समय पर सुनिश्चित करना है। पहले कई परिवार आर्थिक डर के कारण मरीज़ को अस्पताल में भर्ती करवाने में देरी कर देते थे, जो कई बार घातक साबित होती थी। अब सेहत योजना के तहत मरीज़ समय रहते चिकित्सा सहायता लेने लगे हैं, जिससे उनके स्वस्थ होने की संभावनाएँ बढ़ रही हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों, पेंशनभोगियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह योजना भारी चिकित्सा खर्चों के ख़िलाफ एक सुरक्षा कवच बनकर उभरी है।

इस विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर, सेहत कार्ड की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल निपटाए गए मामलों की संख्या नहीं, बल्कि वह सम्मान और आत्मविश्वास भी है जो इसने मरीज़ों को दिया है, ताकि वे आर्थिक कठिनाई के भय के बिना इलाज करवा सकें।

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