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CM मान बोले- अकाली दल छिपकलियों की पार्टी बन गया:साहिबजादों के कार्टून पर BJP पर कार्रवाई क्यों नहीं; पावन स्वरूपों के मामले में एक्शन होगा

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पंजाब के CM भगवंत मान ने सोमवार को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SGPC और अकाली दल को जमकर घेरा। CM मान ने कहा कि 1920 में अकाली दल बना था। आज 105 साल हो गए। तब यह शेरों की पार्टी थी। आज इसे छिपकलियों की पार्टी बनाकर रख दिया। आज डायनासोर में हवा भरकर घूम रहे हैं। आज ये सिख कौम को कहां लेकर जा रहे हैं।

सीएम ने 328 पावन स्वरूपों के गायब होने के मामले में कहा कि उनके पास संस्थाओं की शिकायत आई थी। इसलिए FIR दर्ज की। पहले SGPC ने ही कानूनी कार्रवाई के प्रस्ताव पास किए। अब केस दर्ज होने के बाद फंसने लगे तो अब कह रहे हैं कि यह अंदरूनी मामला है। सरकार दखल न दे। सरकार कानूनी कार्रवाई करेगी।

सीएम ने कहा- भाजपा ने अपने आफिशियल पेज पर चारों साहिबजादों के कार्टून बनाकर बनाकर डाल दिए। लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने मीडिया से सवाल किया कि इसकी वजह पता क्या है। फिर सीएम ने कहा इन्हें 2027 का नजर आ रहा है। बीजेपी को सब माफी है।

सीएम मान सिंगर जसबीर जस्सी के धार्मिक गीत गाने के भी समर्थन में उतरे। मान ने कहा कि सभी सिंगर प्रोग्राम शुरू करते वक्त धार्मिक गीत गाते हैं। जस्सी के धार्मिक गीत पर अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने एतराज जताया था। सीएम ने अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज को कहा कि किसी ने आपकी अपॉइंटमेंट कर दी। नामिनेट हो। अब तो सिख पंथ के फैसले लो।

CM भगवंत मान की अहम बातें…

SGPC मेंबर आकाओं के इशारे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे

CM मान ने कहा- लगभग पिछले 6-7 सालों में एक बहुत बड़ी दुखदायक घटना को लेकर लोगों में रोष है। जिसमें गुरु साहिब के 328 स्वरूप चोरी हुए थे। इस बारे में बहुत सी संस्थाओं ने मांग की, मेमोरंडम दिए। फिर भी कुछ नहीं हुआ तो धरना दिया। कुछ संस्थाओं ने सरकार तक पहुंच की। उन्होंने मांग की कि इसकी जांच कराई जाए। सिख संगत को पता लगना चाहिए कि वह स्वरूप कहां है।

इसके बाद इस मामले में सरकार ने FIR दर्ज की। SIT बनाई ताकि पूरी पड़ताल हो सके। तब अचानक एसजीपीसी मेंबर अपने आकाओं के इशारों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लगे। वह कहते हैं कि ये पैसों का घोटाला है। प्रधान कहते हैं कि एसजीपीसी में रोजाना 10-20 घोटाले होते हैं।

पहले खुद ही कानूनी कार्रवाई के अधिकार दिए

सीएम ने कहा- हमारे पास शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अंतरिम कमेटी के प्रस्तावों की कापियां हैं। 12 जुलाई 2020, प्रस्ताव नंबर 368 की नकल है। इसमें लिखा गया कि कमेटी की मीटिंग 19 -5-2016 में हुई। इसमें पब्लिकेशन विभाग में लगी आग पर गंभीरता से चर्चा की गई। सिख संगत में इस घटना को लेकर कई तरह के शंकाएं पैदा हो रही हैं।

जरूरत है कि शंकाओं को दूर किया जाए। कोई जांच प्रभावित न हो, तुरंत विभाग से जुडे़ अधिकारी बदले जाएं। कुलवंत सिंह जिल्दसाज का पब्लिकेशन में काम में कोताही के कारण ठेका रद्द किया जाता। वहीं, गोइंदवाल साहिब गुरु साहिब के वृद्ध स्वरूप को अग्नि भेंट करने की सेवा भी बदली जाती है। पावन स्वरूप के ओरिजिनल स्वरूपों रिकवरी व उपयुक्त अधिकारी व कर्मचारियों कानूनी कार्रवाई करने के अधिकार सेवादार के महासचिव को दिए गए।

धामी साहिब ने 5 साल में कौन सी कार्रवाई की

सीएम ने कहा- अब धामी साहब (SGPC प्रधान) बताएं कि साढ़े 5 साल में कौन सी कार्रवाई की?। सीएम ने 27 अगस्त 2020 का 466 का प्रस्ताव पढ़ा। सीएम ने कहा- इसमें लिखा है कि अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी डयूटी में कोताही ही नहीं की, बल्कि अमानत व ख्यानत भी की। डॉ. रूप सिंह मुख्य सचिव, मनजीत सिंह, गुरबचन सिंह प्रेस और पब्लिकेशन पर पर्चा दर्ज करवाया। जुझार सिंह अकाउंटेंट को डिसमिस कर पर्चा कराया। इसके अलावा कई प्रस्ताव उन्होंने पढ़े।

पहले पर्चे डाले, फिर रद्द किए, सरकार से एक्ट पास क्यों कराया

सीएम ने कहा- पहले इतने पर्चे डाल दिए और बाद में इन्होंने कैंसिल कर लिए। 5 सितंबर 2020 को सारे पर्चे कैंसिल किए। इन्होंने उस समय जागद ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008 पास करवाया। यह राइट लिया कि स्वरूप छापने का काम एसजीपीसी करेगी। फिर उस समय यह एक्ट सरकार से क्यों पास कराया।

उस समय भी अकाल तख्त से प्रस्ताव पास करवा देते है। जब यह छापने का एक्ट सरकार से पास करवा लिया तो सरकार जवाब भी मांगेगी। फिर कहते हैं कि यह धार्मिक मामलों में दखल है। जब बेदअबी होती है तो कहते हैं कि सरकार क्या कर रही है। धामी साहब को जब राजनीतिक कामों से फुर्सत मिले तो उन्हें अन्य जिम्मेदारी का एहसास होगा।

SGPC प्रधान कठपुतली, अकाल तख्त से नहीं टकरा सकते

CM ने कहा- एसजीपीसी प्रधान को कठपुतली की तरह प्रयोग किया जाता है। हम अकाल तख्त से नहीं टकरा सकते है। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350 साल में हमने तो सारे इंतजाम किए। हम अपना फर्ज निभा रहे है। यह कहते हैं, यहां न आया करो। मैं एसजीपीसी को कहना चाहता हूं कि आपकी वोटें तो मोदी डलवाते है। चौदह साल से वोटें नहीं पड़ी। वोट डलवाने के लिए प्रस्ताव डाल दो। हर साल कह देते हैं कि अकाली को बहुत बड़ी जीत है। प्रधान साहिब कहते है कि पैसे लेन-देन का मामला है, इसमें बेदअबी है।

अकाली दल ने पंजाब का कुछ नहीं किया

सीएम ने कहा- कुर्सी के लिए यह बांग्लादेश, भूटान कही जाना पड़ जाए, यह जाएंगे। मगर, पंजाब के लिए कुछ नहीं किया। सिख कौम का कोई मुद्दा दिल्ली में नहीं उठाया। जब सरकार में भागीदार थे, उस समय भी नहीं उठाया। सबको मंजूरी देते रहे। सेंट्रल यूनिवर्सिटी को बादल साहब ने मंजूरी दी।

एसवाईएल के सर्वे को बादल साहब ने मंजूरी दी। किसानों से जुड़े कृषि सुधार बिल आए तो 3 महीने पूरा बादल परिवार कहता रहा कि ये बिल्कुल सही हैं। बाद में कहा कि बहुत खराब बिल हैं। आज भी कह दें कि गठबंधन करना तो यह कह देंगे सारी गलतियां माफ हैं। सिर्फ और सिर्फ सत्ता प्राप्ति के लिए पावर का प्रयोग हुआ है।

जिन पर केस दर्ज, कानूनी कार्रवाई होगी

सीएम मान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि 328 पावन स्वरूप गायब होने के मामले में जिन लोगों के नाम केस में दर्ज हैं। उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीएम ने धार्मिक मामलों में सरकार के दखल पर कहा- 2008 में उसी सरकार से एक्ट पास करवाते थे, उस समय दखल नहीं था। अपने घर पर जत्थेदार बुलाकर कागजों पर साइन करवा लिए।

उस समय सरकार का दखल नहीं था। 2 दिसंबर को सुखबीर बादल सारे अपराध कबूल कर गया, हांजी मैंने करवाए थे। मुक्तसर साहिब में जाकर कहा कि वैसे ही मुंह से निकल गया। वल्टोहा किस स्तर पर जत्थेदारों के खिलाफ बयानबाजी कर गया। उसे 2 दिन की सेवा लगा दी। ज्ञानी गुरबचन सिंह को माफी दे दी। कहा कि पुराने फैसले रद्द कर दिए।

सहजधारी धार्मिक गीत नहीं गा सकते तो गोलक में पैसा मत डलवाओ

सीएम ने कहा- पंजाब में जितने भी कलाकार है, वह कोई भी प्रोग्राम करते है, वह पहला गाना धार्मिक गाते थे। जसबीर जस्सी ने शबद नहीं, 2 गीत गाए है। वह शबद गायन नहीं था। पता नहीं इस तरह के फरमान किसी तरह जारी किए जा रहे हैं। इससे प्रचार बिल्कुल ही बंद हो जाएंगे। सीएम ने निहंग के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अगर सहजधारी धार्मिक गीत नहीं गा सकता है तो उनसे गोलक में पैसा क्यों डलवाते है।

यह भी पाबंदी लगा दो कि पतित माथा टेक नहीं सकते है। पता नहीं कहा से यह चीजें लेकर आए। एसजीपीसी को धर्म का प्रचार करना चाहिए। गुरुराम दास मेडिकल कॉलेज सिखों के बच्चों डॉक्टर बनाने के लिए बनाया था। लेकिन आज वह सबसे ज्यादा महंगा है। सुखबीर बादल के कहने से वहां एमबीबीएस की सीटें मिलती है। सराय में कमरे के लिए सिफारिश करनी पड़ती है।

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जहां भी भाजपा का शासन है, वहां अपराध, गैंगस्टर और गुंडागर्दी आम हो गई है: हरपाल सिंह चीमा

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भाजपा की केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता और पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा शासन वाले राज्यों में क्राइम, गैंगस्टर और लॉ एंड ऑर्डर की हालत लंबे समय से खराब हो गई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के डेटा का हवाला देते हुए, मंत्री ने कहा कि ये आंकड़े भाजपा राज का “असली चेहरा” दिखाते हैं, जहाँ नफरत, डर और हिंसा का इस्तेमाल सत्ता पाने और बनाए रखने के लिए राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जा रहा है।

गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि दिल्ली, जहाँ भाजपा ने हाल ही में एजेंसियों और दिल्ली पुलिस का गलत इस्तेमाल करके सत्ता हथिया ली है, 1602 प्रति लाख आबादी के क्राइम रेट के साथ देश के क्राइम चार्ट में सबसे ऊपर है। गुजरात, जहाँ भाजपा ने लगभग 30 साल तक राज किया है, वहाँ क्राइम रेट 806, हरियाणा में 739.2, मणिपुर में 627.8, मध्य प्रदेश में 570.3, महाराष्ट्र में 470.4, ओडिशा में 431.2, राजस्थान में 390.4 और चंडीगढ़ में 338.9 है। इसके उलट, पंजाब का क्राइम रेट 227.1 बहुत कम है, जो साफ तौर पर साबित करता है कि भगवंत मान की पंजाब सरकार ने क्राइम और गैंगस्टर नेटवर्क को कामयाबी से कंट्रोल किया है।

कैबिनेट मंत्री ने कहा कि भाजपा जहां भी जाती है, वहां लॉ एंड ऑर्डर सिस्टम खत्म हो जाता है। भाजपा राजनीतिक सत्ता पाने के लिए नफरत फैलाती है, लोगों को बांटती है और डर का माहौल बनाती है। यही वजह है कि पूरे देश में क्राइम तेजी से बढ़ रहा है।

हाल ही में चंडीगढ़ में एक 18 साल के नौजवान की दिनदहाड़े हुई हत्या का जिक्र करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यह घटना भाजपा के कंट्रोल वाले प्रशासन की पूरी नाकामी दिखाती है। चंडीगढ़ कभी ‘सिटी ब्यूटीफुल’ के नाम से जाना जाता था, लेकिन आज यह क्राइम के लिए जाना जाने लगा है क्योंकि भाजपा ने वहां लॉ एंड ऑर्डर को खत्म कर दिया है। चूंकि चंडीगढ़ सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंडर आता है, इसलिए भाजपा बिगड़ते हालात की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

गैंगस्टर नेटवर्क का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकारें पूरे देश में गैंगस्टरवाद और देश विरोधी तत्वों को बढ़ावा दे रही हैं। बदनाम गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की जेल में बंद है, जो दशकों से भाजपा का राज वाला राज्य रहा है। कई राज्यों की पुलिस को जांच के लिए वॉन्टेड होने के बावजूद, उसकी कस्टडी ट्रांसफर पर रोक लगा दी गई है। गैंगस्टर गुजरात की जेलों से नेटवर्क चला रहे हैं, धमकियां दे रहे हैं और जबरन वसूली के रैकेट चला रहे हैं, जबकि भाजपा सरकार दूसरी तरफ देख रही है।

भगवंत मान सरकार की कोशिशों की तारीफ करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक खास ‘एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स’ बनाकर और बड़े गैंगस्टरों को सलाखों के पीछे भेजकर संगठित अपराध पर नकेल कसने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। पिछली अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकारों के राज में पंजाब को बहुत नुकसान हुआ है, जहां टारगेट किलिंग, गैंगस्टरों का महिमामंडन और राजनीतिक हिंसा की घटनाएं आम हो गई थीं।

भाजपा पंजाब और देश की प्रभावशाली शख्सियतों को पार्टी में शामिल होने के लिए डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है: हरपाल सिंह चीमा

चीमा ने कहा कि भाजपा पंजाबी आवाजों और प्रभावशाली हस्तियों को डरा-धमकाकर उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए मजबूर कर रही है। दिलजीत दोसांझ के राजनीति में आने से मना करने के बाद, उनसे जुड़े लोगों को निशाना बनाकर उनके आसपास डर का माहौल बनाने की कोशिश की गई। भाजपा हर मजबूत पंजाबी आवाज को डरा-धमकाकर चुप कराना और कंट्रोल करना चाहती है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर निशाना साधते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा नेता हमेशा पंजाब के मामलों में दखल देने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन अपने राज्यों में क्राइम कंट्रोल करने में पूरी तरह असफल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा न सिर्फ विपक्ष शासित राज्यों के खिलाफ बल्कि उन सभी के खिलाफ भी एजेंसियों और हिंसा का इस्तेमाल कर रही है जो उनके आगे झुकने से मना करते हैं। भाजपा का पंजाब विरोधी और लोकतंत्र विरोधी चेहरा अब देश के सामने पूरी तरह से बेनकाब हो चुका है।

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केजरीवाल की बड़ी जीत, आबकारी केस से हटीं जज स्वर्ण कांता शर्मा

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तथाकथित आबकारी केस से अंततः जज स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को अलग कर लिया। आम आदमी पार्टी ने जज स्वर्ण कांता शर्मा के आबकारी केस से अलग हटने के फैसले को अरविंद केजरीवाल की बड़ी जीत बताया है। “आप” के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जज स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी केस से हटने के फैसले पर कहा कि सत्य की जीत हुई। गांधी जी के सत्याग्रह की एक बार फिर जीत हुई।

“आप” का कहना है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत अन्य लोगों ने हितों का टकराव बताते हुए जज स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी केस से खुद को अलग करने का अनुरोध किया था। इस बाबत अरविंद केजरीवाल ने एक पत्र लिख कर 10 वाजिब वजहें बताई थीं और उम्मीद जताई थी कि जज खुद को इस केस से अलग कर लेंगी। लेकिन जज स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए इस केस से अलग नहीं होने का फैसला सुनाया था। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने राजघाट जाकर गांधी समाधि पर नतमस्तक हुए और उनके सत्याग्रह के मार्ग पर चलते हुए इस केस में उनकी कोर्ट में पेश न होने का फैसला लिया था।

आम आदमी पार्टी का कहना है कि अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि उनकी कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह स्वीकार होगा और उस पर वह अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। अरविंद केजरीवाल ने जज स्वर्ण कांता शर्मा को आबकारी केस से हटने के लिए दस कारण बताए थे। इनमें से एक प्रमुख कारण यह है कि न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में हैं और आबकारी केस में सीबीआई की तरफ से वकील सॉलिसिटर जनरल हैं जो जज के दोनों बच्चों बाॅस के तौर पर केस आवंटित करते हैं और उसके बदले में मोटी फीस भी सरकार की तरफ से दी जाती है। पिछले कुछ सालों में उनके बच्चों को सबसे ज्यादा केस आवंटित किया गया। अरविंद केजरीवाल ने आशंका जताई थी कि जब जज के बच्चों के करियर सॉलिसिटर जनरल के हाथ में है तो वह उनके खिलाफ फैसला क्या दे सकती है?

आम आदमी पार्टी ने कहा कि दूसरा प्रमुख कारण जज स्वर्ण कांता शर्मा का आरएसएस के अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में जाना है। अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में कई बार जज स्वर्ण कांता शर्मा के जाने की वजह से अरविंद केजरीवाल ने न्याय न मिलने आशंका जताई थी। इन प्रमुख वाजिब कारण बताने के बाद भी जज स्वर्ण कांता शर्मा ने केस से नहीं हटने का फैसला सुनाया।

इसके बाद अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया राजघाट पहुंच कर महात्मा गांधी की समाधि पर नतमस्तक हुए और सत्याग्रह की राह दिखाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को नमन करते हुए सत्याग्रह के मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि हम न्यायपालिका का बहुत सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं कि हमें यह सत्याग्रह करना पड़ रहा है। मेरा अटूट विश्वास है कि बापू के आशीर्वाद से सत्याग्रह के इस कठिन पथ पर हम पूर्ण निष्ठा के साथ अडिग रहेंगे।


उधर, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने अवमानना नोटिस पर कहा कि खबर आ रही है कि हाई कोर्ट की माननीय जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और मेरे खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी है। अपने फैसले के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने बार-बार दो बातें दोहराईं। पहली बात जो वे बार-बार कहती रहीं कि वे यह अपनी किसी नाराजगी की वजह से नहीं कर रही हैं, बल्कि न्यायपालिका की साख और प्रतिष्ठा बचाने के लिए कर रही हैं। यह बात उन्होंने बार-बार दोहराई कि वे यह खुद के लिए नहीं कर रही हैं। दूसरी बात उन्होंने यह कही कि उनके पास दो रास्ते थे। एक आसान रास्ता और एक मुश्किल रास्ता और उन्होंने हर बार मुश्किल रास्ता चुना। इस विषय में मैं एक-दो बातें कहना चाहता हूं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पहली बात तो यह है कि फैसले के दौरान जस्टिस शर्मा ने मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस और मेरे एक्स हैंडल का जिक्र किया। मुझे खुशी हुई कि वे मेरी प्रेस वार्ता देखती हैं। मैं पिछले एक हफ्ते से तीन साल की बच्ची के रेप का मामला उठा रहा हूं, जिसमें निचली अदालत के जज ने 57 साल के आरोपी को जमानत दे दी है। मुझे खुशी होती कि उन प्रेस वार्ताओं या मीडिया में चलती हुई क्लिपिंग से वे इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर कोई कार्रवाई करतीं, क्योंकि यह बहुत संजीदा मामला था।

सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि मैंने प्रेस वार्ता करके बताया था कि कैसे दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रेखा गुप्ता ने एक मीडिया पर ऑन रिकॉर्ड बोला कि राउस एवेन्यू के स्पेशल सीबीआई जज ने अरविंद केजरीवाल और अन्य को आबकारी मामले में जो दोषमुक्त किया, वह मामला सेट करके हुआ है। इसका साफ मतलब है कि उन्होंने एक मौजूदा जज को भ्रष्टाचारी कह दिया। हमने इसके ऊपर प्रेस वार्ता में और वीडियो बनाकर भी कई बार बात रखी। मुझे खुशी होती अगर न्यायपालिका को बचाने के लिए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इस मामले में भाजपा की मुख्यमंत्री के ऊपर अवमानना की कार्यवाही शुरू करतीं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि इसके अलावा मैंने 31 मार्च को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार को बाकायदा सबूतों के साथ लिखा था कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने न्यायपालिका के एक जज को सेट बताया है, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैं सिर्फ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को यह बताना चाहता हूं कि कानून यह नहीं कहता कि आसान या मुश्किल में से आसान रास्ते को छोड़कर मुश्किल को चुनना है। कानून की किताब में ऐसा कहीं नहीं है। जज को सिर्फ न्याय का रास्ता चुनना होता है। वे बार-बार कहती हैं कि उनके पास दो रास्ते थे, लेकिन न्याय की मंजिल में सिर्फ एक ही रास्ता होता है और वह सत्य व न्याय का रास्ता है। उसमें आसान या मुश्किल रास्ते नहीं होते।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर मुश्किल रास्ता चुनना ही है, तो भाजपा की मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्यवाही की होती तो माना जाता कि यह मुश्किल रास्ता है। आम आदमी पार्टी या विपक्षी दल के नेताओं के ऊपर अवमानना का मामला चलाना मुश्किल रास्ता है, यह मैं नहीं मानता। न्यायपालिका की साख को बचाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के ऊपर कार्यवाही होनी चाहिए थी। यह बात एक्स, यूट्यूब सहित पूरे सोशल मीडिया व मीडिया में बार-बार हम लोगों ने उठाई है। मुझे अच्छा लगता अगर वे इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेतीं और उस पर कार्रवाई करतीं, क्योंकि हम लोग अगर उसकी शिकायत करेंगे तो हमें उसके लिए केंद्र सरकार की इजाजत लेनी पड़ेगी और वह सरकार इजाजत देगी नहीं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के ऊपर अवमानना की कार्यवाही तभी चल सकती है जब हाई कोर्ट या स्वयं सुप्रीम कोर्ट इसमें स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करे। लेकिन अफसोस की बात है कि इस मुश्किल रास्ते पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अब तक चलती हुई नहीं दिखी हैं।

वहीं, वहीं, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के लिए यह एक बड़ी जीत है, क्योंकि अंततः जस्टिस स्वर्ण कांता ने आबकारी नीति मामले से खुद को अलग कर लिया है!

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चुनाव आयोग की निष्पक्षता खतरे में, भाजपा चुनावों को प्रभावित करने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं का गलत इस्तेमाल कर रही है: अमन अरोड़ा

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भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) की आजादी और निष्पक्षता पर गंभीर चिंता जताते हुए, आम आदमी पार्टी (आप) के सीनियर नेताओं और पंजाब के मंत्रियों अमन अरोड़ा और हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा के राज में देश की संवैधानिक संस्थाएं तेजी से अपनी निष्पक्षता खो रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र में सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में चुनाव नतीजों को प्रभावित करने के लिए इन संस्थाओं का लगातार गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

मीडिया से बात करते हुए, आप पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने कहा कि चुनाव आयोग कार्यप्रणाली ने हाल ही में हुए चुनाव की मिसाल देते हुए पूरे देश में गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अमन अरोड़ा ने कहा कि हमने दिल्ली विधानसभा चुनावों में देखा कि कैसे हजारों वोट भाजपा के पक्ष में डाले गए और ‘आप’ के असली वोट काट दिए गए।

पश्चिम बंगाल के घटनाक्रम का हवाला देते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि पूरी दुनिया ने देखा कि कैसे पहले 91 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए और बाद में 60 लाख लोगों को गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया। चुनावों के बाद भी, टीएमसी के अनुसार, 31 निर्वाचन क्षेत्र ऐसे थे जहाँ भाजपा की जीत का अंतर हटाए गए वोटों की संख्या से कम था।

अमन अरोड़ा ने जोर देकर कहा कि पक्षपातपूर्ण मानसिकता और गलत इरादों के साथ किया गया कोई भी चुनाव प्रक्रिया अपना लोकतांत्रिक अर्थ खो देती है। उन्होंने कहा कि कोई भी मुश्किल या बाधा हमें पंजाब के लिए काम करने से नहीं रोक सकती। लेकिन प्रक्रिया साफ, पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की पंजाब सरकार के कामों पर रोशनी डालते हुए, आप पंजाब के प्रधान ने कहा कि सरकार ने ईमानदार प्रशासन और लोगों के लिए अच्छी पॉलिसी से लोगों का भरोसा और प्यार जीता है। उन्होंने कहा कि हमें एसआईआर से कोई दिक्कत नहीं है। हम लोगों की भलाई के लिए काम कर रहे हैं और पंजाब के लोगों ने मान सरकार को अपना दिल दे दिया है। लेकिन चुनाव साफ, ईमानदार और ट्रांसपेरेंट तरीके से होने चाहिए। लोगों के वोट लूटे नहीं जाने चाहिए, चाहे वह एसआईआर के ज़रिए हो या किसी अथॉरिटी के नाम पर। एसआईआर और आने वाले सभी चुनावों में बराबर मौके और पूरी पारर्दशिता की मांग दोहराते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि अगर इलेक्शन पैनल भेदभाव से काम करता रहा तो लोकतंत्र जिंदा नहीं रह सकता।

इस बीच, आप के सीनियर लीडर और पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा उन राज्यों में चुनाव आयोग को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है, जहां वह अपने दम पर लोकतांत्रिक तरीके से नहीं जीत सकती।

उन्होंने कहा कि भाजपा पहले वोटर लिस्ट ठीक करने के बहाने एसआईआर जैसी प्रक्रियाओं पर ज़ोर देती है और बाद में चुनावी फायदे के लिए बड़े पैमाने पर वोटरों को काटने के लिए उनका इस्तेमाल करती है।

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब के लोग एकजुट होकर भाजपा की पंजाब विरोधी सोच को सामने लाएंगे और राज्य को राजनीतिक और संवैधानिक रूप से कमजोर करने की हर कोशिश का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा वोटर लिस्ट में हेरफेर करके पंजाब में सत्ता हासिल करना चाहती है और पंजाब के अधिकारों और संस्थाओं को भी कमजोर करना चाहती है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा वोटरों को बांटने और पंजाब में सत्ता हथियाने के लिए चुनाव आयोग और एसआईआर अभ्यास का इस्तेमाल करना चाहती है। उनका बड़ा एजेंडा पंजाब का नदियों का पानी छीनना, बीबीएमबी पर कब्जा करना, पंजाब के फेडरल अधिकारों को कमजोर करना और पंजाबियों से चंडीगढ़ और पंजाब यूनिवर्सिटी भी छीनना है।

उन्होंने आगे कहा कि तीन करोड़ पंजाबी भाजपा की साजिशों के खिलाफ एकजुट होंगे और पार्टी को ऐतिहासिक सबक सिखाएंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग भाजपा की पंजाब विरोधी राजनीति को पूरी तरह से नकार देंगे और इस बार पंजाबी यह पक्का करेंगे कि भाजपा का राज्य से राजनीतिक रूप से सफाया हो जाए।

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