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CM मान बोले- अकाली दल छिपकलियों की पार्टी बन गया:साहिबजादों के कार्टून पर BJP पर कार्रवाई क्यों नहीं; पावन स्वरूपों के मामले में एक्शन होगा

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पंजाब के CM भगवंत मान ने सोमवार को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SGPC और अकाली दल को जमकर घेरा। CM मान ने कहा कि 1920 में अकाली दल बना था। आज 105 साल हो गए। तब यह शेरों की पार्टी थी। आज इसे छिपकलियों की पार्टी बनाकर रख दिया। आज डायनासोर में हवा भरकर घूम रहे हैं। आज ये सिख कौम को कहां लेकर जा रहे हैं।

सीएम ने 328 पावन स्वरूपों के गायब होने के मामले में कहा कि उनके पास संस्थाओं की शिकायत आई थी। इसलिए FIR दर्ज की। पहले SGPC ने ही कानूनी कार्रवाई के प्रस्ताव पास किए। अब केस दर्ज होने के बाद फंसने लगे तो अब कह रहे हैं कि यह अंदरूनी मामला है। सरकार दखल न दे। सरकार कानूनी कार्रवाई करेगी।

सीएम ने कहा- भाजपा ने अपने आफिशियल पेज पर चारों साहिबजादों के कार्टून बनाकर बनाकर डाल दिए। लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने मीडिया से सवाल किया कि इसकी वजह पता क्या है। फिर सीएम ने कहा इन्हें 2027 का नजर आ रहा है। बीजेपी को सब माफी है।

सीएम मान सिंगर जसबीर जस्सी के धार्मिक गीत गाने के भी समर्थन में उतरे। मान ने कहा कि सभी सिंगर प्रोग्राम शुरू करते वक्त धार्मिक गीत गाते हैं। जस्सी के धार्मिक गीत पर अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने एतराज जताया था। सीएम ने अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज को कहा कि किसी ने आपकी अपॉइंटमेंट कर दी। नामिनेट हो। अब तो सिख पंथ के फैसले लो।

CM भगवंत मान की अहम बातें…

SGPC मेंबर आकाओं के इशारे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे

CM मान ने कहा- लगभग पिछले 6-7 सालों में एक बहुत बड़ी दुखदायक घटना को लेकर लोगों में रोष है। जिसमें गुरु साहिब के 328 स्वरूप चोरी हुए थे। इस बारे में बहुत सी संस्थाओं ने मांग की, मेमोरंडम दिए। फिर भी कुछ नहीं हुआ तो धरना दिया। कुछ संस्थाओं ने सरकार तक पहुंच की। उन्होंने मांग की कि इसकी जांच कराई जाए। सिख संगत को पता लगना चाहिए कि वह स्वरूप कहां है।

इसके बाद इस मामले में सरकार ने FIR दर्ज की। SIT बनाई ताकि पूरी पड़ताल हो सके। तब अचानक एसजीपीसी मेंबर अपने आकाओं के इशारों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लगे। वह कहते हैं कि ये पैसों का घोटाला है। प्रधान कहते हैं कि एसजीपीसी में रोजाना 10-20 घोटाले होते हैं।

पहले खुद ही कानूनी कार्रवाई के अधिकार दिए

सीएम ने कहा- हमारे पास शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अंतरिम कमेटी के प्रस्तावों की कापियां हैं। 12 जुलाई 2020, प्रस्ताव नंबर 368 की नकल है। इसमें लिखा गया कि कमेटी की मीटिंग 19 -5-2016 में हुई। इसमें पब्लिकेशन विभाग में लगी आग पर गंभीरता से चर्चा की गई। सिख संगत में इस घटना को लेकर कई तरह के शंकाएं पैदा हो रही हैं।

जरूरत है कि शंकाओं को दूर किया जाए। कोई जांच प्रभावित न हो, तुरंत विभाग से जुडे़ अधिकारी बदले जाएं। कुलवंत सिंह जिल्दसाज का पब्लिकेशन में काम में कोताही के कारण ठेका रद्द किया जाता। वहीं, गोइंदवाल साहिब गुरु साहिब के वृद्ध स्वरूप को अग्नि भेंट करने की सेवा भी बदली जाती है। पावन स्वरूप के ओरिजिनल स्वरूपों रिकवरी व उपयुक्त अधिकारी व कर्मचारियों कानूनी कार्रवाई करने के अधिकार सेवादार के महासचिव को दिए गए।

धामी साहिब ने 5 साल में कौन सी कार्रवाई की

सीएम ने कहा- अब धामी साहब (SGPC प्रधान) बताएं कि साढ़े 5 साल में कौन सी कार्रवाई की?। सीएम ने 27 अगस्त 2020 का 466 का प्रस्ताव पढ़ा। सीएम ने कहा- इसमें लिखा है कि अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपनी डयूटी में कोताही ही नहीं की, बल्कि अमानत व ख्यानत भी की। डॉ. रूप सिंह मुख्य सचिव, मनजीत सिंह, गुरबचन सिंह प्रेस और पब्लिकेशन पर पर्चा दर्ज करवाया। जुझार सिंह अकाउंटेंट को डिसमिस कर पर्चा कराया। इसके अलावा कई प्रस्ताव उन्होंने पढ़े।

पहले पर्चे डाले, फिर रद्द किए, सरकार से एक्ट पास क्यों कराया

सीएम ने कहा- पहले इतने पर्चे डाल दिए और बाद में इन्होंने कैंसिल कर लिए। 5 सितंबर 2020 को सारे पर्चे कैंसिल किए। इन्होंने उस समय जागद ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2008 पास करवाया। यह राइट लिया कि स्वरूप छापने का काम एसजीपीसी करेगी। फिर उस समय यह एक्ट सरकार से क्यों पास कराया।

उस समय भी अकाल तख्त से प्रस्ताव पास करवा देते है। जब यह छापने का एक्ट सरकार से पास करवा लिया तो सरकार जवाब भी मांगेगी। फिर कहते हैं कि यह धार्मिक मामलों में दखल है। जब बेदअबी होती है तो कहते हैं कि सरकार क्या कर रही है। धामी साहब को जब राजनीतिक कामों से फुर्सत मिले तो उन्हें अन्य जिम्मेदारी का एहसास होगा।

SGPC प्रधान कठपुतली, अकाल तख्त से नहीं टकरा सकते

CM ने कहा- एसजीपीसी प्रधान को कठपुतली की तरह प्रयोग किया जाता है। हम अकाल तख्त से नहीं टकरा सकते है। श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350 साल में हमने तो सारे इंतजाम किए। हम अपना फर्ज निभा रहे है। यह कहते हैं, यहां न आया करो। मैं एसजीपीसी को कहना चाहता हूं कि आपकी वोटें तो मोदी डलवाते है। चौदह साल से वोटें नहीं पड़ी। वोट डलवाने के लिए प्रस्ताव डाल दो। हर साल कह देते हैं कि अकाली को बहुत बड़ी जीत है। प्रधान साहिब कहते है कि पैसे लेन-देन का मामला है, इसमें बेदअबी है।

अकाली दल ने पंजाब का कुछ नहीं किया

सीएम ने कहा- कुर्सी के लिए यह बांग्लादेश, भूटान कही जाना पड़ जाए, यह जाएंगे। मगर, पंजाब के लिए कुछ नहीं किया। सिख कौम का कोई मुद्दा दिल्ली में नहीं उठाया। जब सरकार में भागीदार थे, उस समय भी नहीं उठाया। सबको मंजूरी देते रहे। सेंट्रल यूनिवर्सिटी को बादल साहब ने मंजूरी दी।

एसवाईएल के सर्वे को बादल साहब ने मंजूरी दी। किसानों से जुड़े कृषि सुधार बिल आए तो 3 महीने पूरा बादल परिवार कहता रहा कि ये बिल्कुल सही हैं। बाद में कहा कि बहुत खराब बिल हैं। आज भी कह दें कि गठबंधन करना तो यह कह देंगे सारी गलतियां माफ हैं। सिर्फ और सिर्फ सत्ता प्राप्ति के लिए पावर का प्रयोग हुआ है।

जिन पर केस दर्ज, कानूनी कार्रवाई होगी

सीएम मान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि 328 पावन स्वरूप गायब होने के मामले में जिन लोगों के नाम केस में दर्ज हैं। उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीएम ने धार्मिक मामलों में सरकार के दखल पर कहा- 2008 में उसी सरकार से एक्ट पास करवाते थे, उस समय दखल नहीं था। अपने घर पर जत्थेदार बुलाकर कागजों पर साइन करवा लिए।

उस समय सरकार का दखल नहीं था। 2 दिसंबर को सुखबीर बादल सारे अपराध कबूल कर गया, हांजी मैंने करवाए थे। मुक्तसर साहिब में जाकर कहा कि वैसे ही मुंह से निकल गया। वल्टोहा किस स्तर पर जत्थेदारों के खिलाफ बयानबाजी कर गया। उसे 2 दिन की सेवा लगा दी। ज्ञानी गुरबचन सिंह को माफी दे दी। कहा कि पुराने फैसले रद्द कर दिए।

सहजधारी धार्मिक गीत नहीं गा सकते तो गोलक में पैसा मत डलवाओ

सीएम ने कहा- पंजाब में जितने भी कलाकार है, वह कोई भी प्रोग्राम करते है, वह पहला गाना धार्मिक गाते थे। जसबीर जस्सी ने शबद नहीं, 2 गीत गाए है। वह शबद गायन नहीं था। पता नहीं इस तरह के फरमान किसी तरह जारी किए जा रहे हैं। इससे प्रचार बिल्कुल ही बंद हो जाएंगे। सीएम ने निहंग के बयान का हवाला देते हुए कहा कि अगर सहजधारी धार्मिक गीत नहीं गा सकता है तो उनसे गोलक में पैसा क्यों डलवाते है।

यह भी पाबंदी लगा दो कि पतित माथा टेक नहीं सकते है। पता नहीं कहा से यह चीजें लेकर आए। एसजीपीसी को धर्म का प्रचार करना चाहिए। गुरुराम दास मेडिकल कॉलेज सिखों के बच्चों डॉक्टर बनाने के लिए बनाया था। लेकिन आज वह सबसे ज्यादा महंगा है। सुखबीर बादल के कहने से वहां एमबीबीएस की सीटें मिलती है। सराय में कमरे के लिए सिफारिश करनी पड़ती है।

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आप सांसद मालविंदर कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी साइनबोर्ड फिर से लगाने के फैसले का किया स्वागत

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आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद मालविंदर सिंह कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अपने कैंपस में पंजाबी साइनबोर्ड और नेमप्लेट फिर से लगाने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे पंजाब की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम बताया।

कंग ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में साइनबोर्ड और नेमप्लेट से पंजाबी (गुरुमुखी) हटाने पर कड़ा एतराज़ जताया था। उन्होंने इस कदम को पंजाब के इतिहास, संस्कृति और पहचान को दिखाने वाली भाषा का अपमान बताया।

इस मामले को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, सीपी राधाकृष्णन के सामने उठाते हुए, कंग ने उनसे तुरंत दखल देने की मांग की ताकि पंजाबी को उसकी सही जगह और सम्मान मिले, खासकर एक ऐसे संस्थान में जो पंजाब के नाम और विरासत को बनाए रखता है।

इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए, कंग ने कहा कि उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से एक ऑफिशियल लेटर मिला है, जिसमें कन्फर्म किया गया है कि पंजाबी साइनबोर्ड लगाने का प्रोसेस शुरू हो चुका है। लेटर के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने पंजाबी साइनबोर्ड के लिए ऑर्डर दे दिया है और उन्हें लगाने का काम जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

इस फैसले का स्वागत करते हुए, कंग ने कहा कि इससे एक मजबूत संदेस जाता है कि पंजाब के वजूद और पंजाबी भाषा की इज्ज़त को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि पंजाबी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि पंजाब की रिच कल्चरल विरासत और सामूहिक पहचान की निशानी है, जिसका हर लेवल पर सम्मान किया जाना चाहिए और उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

कंग ने इस मामले पर तुरंत ध्यान देने के लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति और पंजाब यूनिवर्सिटी के चांसलर, श्री सी. पी. राधाकृष्णन का धन्यवाद किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन की भी तारीफ़ की कि उन्होंने सुधार के कदम उठाए और पंजाब के लोगों की चिंताओं पर पॉज़िटिव जवाब दिया।

आप सांसद ने कहा कि पंजाब से जुड़े हर संस्थान में पंजाबी के सम्मान, अहमियत और हक की हमेशा रक्षा होनी चाहिए।

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मोहाली को मिला नया मेयर, विधायक कुलवंत सिंह के बेटे सरबजीत समाना ने संभाली कमान

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मोहाली नगर निगम को नया मेयर मिल गया है। मंगलवार को हुए मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता और विधायक कुलवंत सिंह के पुत्र सरबजीत सिंह समाना को मेयर चुना गया। वहीं आर.पी. शर्मा को सीनियर डिप्टी मेयर और हरपाल चन्नी को डिप्टी मेयर की जिम्मेदारी सौंपी गई।

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पंजाब आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष अमन अरोड़ा, विधायक कुलवंत सिंह और पार्टी नेता डॉ. सन्नी आहलूवालिया ने सरबजीत समाना को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं।

मेयर पद को लेकर पिछले कई दिनों से राजनीतिक चर्चाएं चल रही थीं। शुरुआत में डॉ. सन्नी आहलूवालिया को इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी नेतृत्व से करीबी संबंधों के चलते उनका नाम चर्चा में था, लेकिन अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदले और सरबजीत समाना को उम्मीदवार बनाया गया।

बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले विधायक कुलवंत सिंह ने पार्टी पार्षदों के साथ लगातार बैठकें कीं। नगर निगम चुनाव जीतने वाले कई पार्षद उनके करीबी सहयोगी माने जाते हैं, जिससे मेयर पद की दौड़ में उनके बेटे का पलड़ा भारी रहा।

पार्टी में एकजुटता बनाए रखने और किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए पंजाब आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा खुद नगर निगम कार्यालय पहुंचे और उनकी मौजूदगी में पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई।

दूसरी ओर, मेयर चुनाव से पहले कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया, जबकि शिरोमणि अकाली दल के पार्षद बैठक के दौरान वॉकआउट कर गए। इसके चलते चुनावी माहौल काफी गर्म रहा।

चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। गोपनीयता बनाए रखने के लिए सभी पार्षदों के मोबाइल फोन नगर निगम कार्यालय के बाहर जमा कराए गए और रिकॉर्ड दर्ज होने के बाद ही उन्हें बैठक कक्ष में प्रवेश दिया गया।

सरबजीत सिंह समाना के मेयर बनने के साथ ही मोहाली नगर निगम में आम आदमी पार्टी की पकड़ और मजबूत हो गई है। अब शहर के विकास कार्यों और नगर निगम की आगामी योजनाओं पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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अकाली दल को बड़ा झटका! मनप्रीत इयाली ‘वारिस पंजाब दे’ में हुए शामिल

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पंजाब की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। दाखा से शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनप्रीत सिंह इयाली मंगलवार को औपचारिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन में शामिल हो गए। उनके इस फैसले को पंजाब की पंथक राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

संगठन में शामिल होने के बाद मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा कि उन्होंने बिना किसी शर्त और पद की अपेक्षा के इस मंच का साथ चुना है। उनका उद्देश्य पंजाब की पंथक और क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट करना तथा राज्य से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाना है।

इयाली ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी और तकनीकी रूप से वह अभी भी शिरोमणि अकाली दल के विधायक हैं। उन्होंने बताया कि ‘वारिस पंजाब दे’ फिलहाल एक सामाजिक और संगठनात्मक मंच है, न कि चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल, इसलिए विधायक पद छोड़ने का कोई सवाल नहीं उठता।

उन्होंने कहा कि पंजाब के कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं, जिनमें राज्य के पानी का मुद्दा, पंजाबी भाषी क्षेत्रों का मामला, चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार और अन्य क्षेत्रीय हित शामिल हैं। इन मुद्दों को नई ऊर्जा और मजबूती के साथ उठाया जाएगा।

मनप्रीत इयाली ने कहा कि पंजाब, पंजाबी पहचान और पंथक विचारधारा को मजबूत करने के लिए समान सोच रखने वाली सभी ताकतों को एक मंच पर आने की जरूरत है। उनके इस कदम के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में इसके राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।

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