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भाजपा ने किसान विरोधी कानून थोपे, अकालियों ने धर्म का दुरुपयोग किया, कांग्रेस पंजाब में नाकाम साबित हुई, पंजाबियों ने ईमानदार सरकार चुनी- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज रोपड़ जिले के गांव बड़वा में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों के बीच पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पंजाब के लोगों ने साल 2022 में 7 पूर्व मुख्यमंत्रियों और उनके परिवारों को सत्ता से बाहर करके ईमानदार सरकार में अपना विश्वास जताते हुए लूट, विशेषाधिकार और धोखे की राजनीति को पूरी तरह से नकार दिया। कांग्रेस, भाजपा और अकालियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इन पार्टियों के पास पंजाब के विकास का कोई एजेंडा नहीं है और इनकी दिलचस्पी सिर्फ सत्ता हथियाने और निजी हितों में है। उन्होंने दावा किया कि जहां विपक्षी नेता आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के अधीन पंजाब की तरक्की को हजम नहीं कर पा रहे, वहीं अब करदाताओं के पैसे का एक-एक रुपया सत्ताधारियों की ऐशो-आराम की बजाय लोक भलाई पर खर्च किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा ने किसान विरोधी कानून थोपे और अकालियों ने सियासी फायदे के लिए धर्म का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि नया अकाली-भाजपा गठबंधन सिर्फ सत्ता हासिल करने की मौकापरस्त चाल खेलने की कोशिश में है, जिसे पंजाब के लोग बुरी तरह नकार देंगे।

इकठ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आम आदमी पार्टी उन पारंपरिक सियासी पार्टियों के नेताओं में डर पैदा कर रही है जिन्होंने दशकों तक अपने निजी हितों के लिए सत्ता का दुरुपयोग किया। भाजपा द्वारा थोपे गए किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ आंदोलन के दौरान 700 से अधिक किसान शहीद हुए थे। यह एक हकीकत है कि भाजपा ने हमेशा पंजाब के साथ नाइंसाफी की है और आज ये पार्टियां सियासी फायदे के लिए धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रही हैं।”

शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के नए गठबंधन पर तीखा तंज कसते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह गठबंधन दोनों पार्टियों के लिए सियासी तौर पर विनाशकारी साबित होगा क्योंकि यह न तो किसी विचारधारा पर आधारित है और न ही लोक भलाई के प्रति किसी प्रतिबद्धता पर टिका है। उन्होंने कहा, “इस गठबंधन का एकमात्र उद्देश्य पंजाब में सत्ता हथियाना है। दोनों पार्टियों के नेताओं ने बार-बार एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी की है और आरोप लगाए हैं। पंजाब के लोग पूछ रहे हैं कि वे अब कौन सा मुंह लेकर साथ वोट मांगेंगे। लोग ऐसे सियासी ड्रामों के झांसे में नहीं आएंगे और आने वाले दिनों में उन्हें करारा सबक सिखाएंगे।”

अपनी सरकार के कामों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने पंजाब के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए अपना खून-पसीना बहाया है और हर दिन नागरिकों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के उद्देश्य से नई लोक-पक्षीय पहलें देखने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा, “मुझसे पहले रहे मुख्यमंत्रियों के विपरीत, मैंने सरकारी खजाने से कभी एक पैसा भी नहीं लिया। इसके बजाय मैंने यह सुनिश्चित किया है कि टैक्सदाताओं का एक-एक रुपया लोक भलाई के लिए समझदारी से खर्च किया जाए। पंजाब के लोगों के बेटे और भाई होने के नाते, मेरा ध्यान ऐशो-आराम की जिंदगी जीने की बजाय उनके दुख-दर्द बांटने और उनकी मुश्किलों को हल करने पर रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी पिछले शासक ने लोगों की मुश्किलों को समझने और उन्हें तनदेही से हल करने के लिए इस तरह लोगों तक सीधी पहुंच नहीं बनाई थी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें शानदार महलों की दीवारों तक ही सीमित रहीं और आम नागरिकों से शायद ही कभी संपर्क किया। उन्होंने कहा, “वे घमंडी सियासतदां लोगों से टूटे रहे और आज वे पंजाब सरकार के हर कदम से हैरान-परेशान हैं। दूसरी तरफ मैं लोगों के बीच रहता हूं, उनकी फीडबैक लेता हूं और विकास-मुखी व लोक-पक्षीय नीतियां बनाता हूं जो पंजाब की तरक्की व विकास में तेजी ला रही हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के विकास के लिए उनकी सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों ने विपक्षी नेताओं को निराश कर दिया है। उन्होंने कहा, “वे इस बात को हजम नहीं कर पा रहे कि आम लोगों की भलाई और पंजाब की तरक्की अब सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उनकी तरफ से सिर्फ आलोचना करना उनकी निराशा को दर्शाता है। मुझे भले ही लोगों की दौलत लूटने का अनुभव न हो, लेकिन मैं आम लोगों के दर्द को बांटना और उनके मसलों को हल करना अच्छी तरह जानता हूं। मैं पंजाब और इसके लोगों की खुशहाली के लिए पूरी तनदेही से काम कर रहा हूं और यही बात विपक्षियों को परेशान कर रही है।”

पिछली सरकारों की सख्त निंदा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बेहद प्राकृतिक खूबसूरती और अनमोल संसाधनों से नवाजे इलाकों को सालों तक अनदेखा किया गया क्योंकि पिछली सरकारें इनकी क्षमता का फायदा उठाने में नाकाम रहीं। उन्होंने कहा कि दशकों तक सिर्फ दो सियासी धड़े बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं, जिन्होंने लोगों की भावनाओं का शोषण किया और सूबे के साधनों को लूटा।

उन्होंने कहा, “पंजाब के लोगों के पास अब ‘झाड़ू’ (आप का चुनाव निशान) के रूप में विकल्प है, जिसने सूबे की सियासी व्यवस्था को साफ कर दिया है। साल 2022 के विधान सभा चुनावों में लोगों ने 7 पूर्व मुख्यमंत्रियों और उनके परिवारों को नकार कर ईमानदार सरकार को सत्ता सौंपी थी। उस ऐतिहासिक फैसले ने पंजाब को बदलने और इसे भारतीय राज्यों में अग्रणी बनाने में अहम भूमिका निभाई है।”

सिंचाई क्षेत्र में ‘आप’ सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने इस साल बेहतर सिंचाई प्रणाली के जरिए उपलब्ध नहरी पानी का 96 फीसदी उपयोग किया है, जिससे किसानों को बड़ा फायदा हुआ है। उन्होंने कहा कि जो पानी पहले बर्बाद हो जाता था, अब उसकी कृषि क्षेत्रों में लाभप्रद उपयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, “आप सरकार ने सूबे भर में 14,000 किलोमीटर पाइपलाइनों और नहरें बिछाई हैं ताकि पंजाब के हर कोने तक सिंचाई सुविधाएं पहुंच सकें। इन पाइपलाइनों और नहरों के जरिए लगभग 21,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे किसानों को अपनी सिंचाई की जरूरतें पूरी करने में मदद मिली है। पानी की यह मात्रा दो भाखड़ा नहरों की सप्लाई के बराबर है और इससे किसानों को बहुत बड़ा लाभ होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि नहरों और नदियों में रिचार्ज प्वाइंट विकसित किए गए हैं ताकि भूजल स्तर में सुधार लाया जा सके। इसके नतीजे के तौर पर कई इलाकों में भूजल स्तर दो से चार मीटर तक बढ़ा है। यह दर्शाता है कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल कैसे जिम्मेदारी से किया जा रहा है और विकास परियोजनाओं, स्कूलों, अस्पतालों, सड़कों और अन्य भलाई पहलों के जरिए लोगों तक यह पैसा वापस पहुंच रहा है।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘आप’ सरकार ने मियाद पूरी कर चुके टोल प्लाजा भी बंद कर दिए हैं, जिससे लोगों के हर रोज लगभग 70 लाख रुपए बच रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि लोगों का पैसा सिर्फ जनता की भलाई पर ही खर्च हो रहा है, न कि पुरानी सरकारों की तरह कुछ चुनिंदा लोगों के फायदे के लिए।

स्वास्थ्य सेवा सुधारों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब भर में लगभग 1,000 आम आदमी क्लीनिक स्थापित किए गए हैं, जहां 107 दवाएं और 47 डायग्नोस्टिक टेस्ट मुफ्त प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 75 वर्षों में किसी भी सरकार ने आम नागरिकों को ऐसी स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की कोशिश नहीं की। “इन क्लीनिकों ने सरकारी स्वास्थ्य सेवा संस्थानों में लोगों का विश्वास मजबूत किया है। लगभग 75,000 लोग हर रोज इलाज के लिए इन क्लीनिकों में आते हैं, जो इस पहल में लोगों के विश्वास को दर्शाता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी खजाने का एक-एक पैसा पंजाब के लोगों की भलाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सूबे के 90 फीसदी से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है और किसानों को अब दिन के समय बिजली सप्लाई मिल रही है, जिससे किसान समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। ऐसे समय जब देश की बहुमूल्य संपत्तियां चुनिंदा कारपोरेटों को मामूली कीमतों पर सौंपी जा रही हैं, पंजाब ने एक निजी थर्मल प्लांट खरीदकर इतिहास रच दिया है, जिसका नाम श्री गुरु अमरदास जी के नाम पर रखा गया है। यह सरकारी संपत्तियों को कमजोर करने की बजाय उन्हें मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

महिलाओं की भलाई पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने मांवां-धीयां सत्कार योजना शुरू की है, जिसके तहत सामान्य श्रेणी से संबंधित 18 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को प्रति माह 1,000 रुपए जबकि अनुसूचित जाति श्रेणी से संबंधित महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपए मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम परिवारों, खासकर गरीब परिवारों के लिए, 1,000 से 1,500 रुपए की रकम भी काफी मायने रखती है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह सहायता हमारी मांवां-धीयां के प्रति हमारे सम्मान और गर्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि इस योजना से लाभ ले रही महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान देखकर बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती है। शैक्षिक सुधारों को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्रिंसिपलों के पेशेवर हुनर को निखारने और क्लासरूम शिक्षा के मानकों को बेहतर बनाने के लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब ने भारत सरकार द्वारा करवाए गए राष्ट्रीय प्राप्ति सर्वेक्षण में केरल को भी पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्कूलों के छात्र अब हथियारबंद सेनाओं की परीक्षा की तैयारी, नीट, जेईई, क्लैट और एनआईएफटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यह बताते हुए अत्यधिक खुशी हो रही है कि स्कूल ऑफ एमिनेंस और अन्य सरकारी स्कूलों के लगभग 300 छात्रों ने जेईई मेन्स, जेईई एडवांस्ड और नीट परीक्षाओं के लिए क्वालीफाई किया है। ये उपलब्धियां पंजाब के शिक्षा क्षेत्र में हो रहे क्रांतिकारी सुधारों को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब के इतिहास में पहली बार, किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय बिजली मिल रही है, जिससे कृषि कार्यों में सहूलियत के साथ-साथ किसानों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

दिल्ली की भाजपा सरकार से तुलना करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब आम लोगों के लिए भलाई की पहलों का लगातार विस्तार कर रहा है, जबकि सरकारें बदलने के बाद इस तरह के प्रोग्राम दूसरी जगहों पर बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “इन पार्टियों ने हमेशा आम नागरिकों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों का विरोध किया है और लोगों-केंद्रित प्रोग्रामों को लागू करने से दरकिनार करती रही हैं।” स्वास्थ्य सेवा कवरेज पर बोलते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत बीमा योजना शुरू की है, जो देश में अपनी तरह की पहली योजना है, जिसके तहत पंजाब के हर निवासी, हर परिवार को ₹10 लाख तक का कैशलेस चिकित्सा इलाज प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा, “यह बहुत गर्व की बात है कि पंजाब भारत का पहला सूबा है जिसने इतनी व्यापक स्वास्थ्य सेवा कवरेज की पेशकश की है। इस योजना ने परिवारों पर वित्तीय बोझ को काफी हद तक कम करने के साथ-साथ मानक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित की है। लाभार्थियों द्वारा ₹650 करोड़ से अधिक का मुफ्त इलाज पहले ही प्राप्त किया जा चुका है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के इतिहास में पहली बार, किसानों को धान के सीजन के दौरान कृषि ट्यूबवेलों को आठ घंटे से अधिक निर्बाध बिजली सप्लाई दी गई है। उन्होंने दोहराया कि सरकारी खजाने का एक-एक रुपया लोक भलाई और विकास के लिए खर्च किया जा रहा है।

बुनियादी ढांचे के विकास के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार ने राज्य भर में लिंक सड़कों की मरम्मत और अपग्रेडेशन के लिए एक विशाल प्रोग्राम शुरू किया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में लगभग 43,000 किलोमीटर लिंक सड़कें हैं और उनकी मरम्मत और आधुनिकीकरण के लिए एक व्यापक प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। उन्होंने कहा, “आप सरकार ने एक और ऐतिहासिक फैसला लिया है। इन सड़कों की मरम्मत के साथ-साथ, अगले पांच सालों के लिए उनकी देखभाल भी सुनिश्चित की जाएगी। यह ग्रामीण और शहरी निवासियों के लिए बेहतर संपर्क की गारंटी देगा और यातायात सुविधाओं में सुधार करेगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आप’ सरकार ने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर कीमती जानें बचाने के लिए देश की पहली समर्पित सड़क सुरक्षा फोर्स भी शुरू की है। “इस फोर्स के हिस्से के तौर पर विशेष रूप से प्रशिक्षित और नए भर्ती कर्मचारियों, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, को तैनात किया गया है। पंजाब के राजमार्गों पर कुल 1,597 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिन्हें 144 पूरी तरह सुसज्जित वाहनों की सहायता से चलाया जा रहा है। पिछले साल फरवरी में फोर्स की शुरुआत के बाद से, सड़क हादसों में होने वाली मौतों में 48.10% की कमी आई है,” उन्होंने कहा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह फोर्स 4,200 किलोमीटर दुर्घटना-प्रभावित हाईवे पर तैनात रहती है और एक त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र और ट्रैफिक उल्लंघनों के खिलाफ निवारक के तौर पर काम करती है। उन्होंने कहा, “केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी संसद के फ्लोर पर इस पहल की सराहना की है।” जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन अधिनियम 2026 पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि परमात्मा ने उन्हें इस ऐतिहासिक कानून के जरिए मानवता की सेवा करने का मौका दिया है। उन्होंने कहा, “इस कानून के तहत, बेअदबी’ का दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और 50 लाख रुपए के जुर्माने की सजा हो सकती है। अगर दोषी जुर्माना अदा करने में विफल रहता है, तो उसकी जायदाद बेची जा सकती है।

इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाली पीढ़ियां श्री गुरु साहिब जी का अनादर करके लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के गंभीर नतीजों को समझ सकें।”

उम्मीद जताते हुए कि यह कानून बेअदबी के खिलाफ एक मजबूत निवारक के तौर पर काम करेगा, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिखों के दिलों में एक पवित्र स्थान रखते हैं और उनकी पवित्रता की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हर सिख के पिता के समान हैं। इसके सम्मान और पवित्रता को सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है। अगर सरकार इस संबंध में जिम्मेदारी नहीं लेती, तो कोई और नहीं लेगा। अकालियों ने अपने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग किया और लोग यह नहीं भूले हैं। हम खुशकिस्मत हैं कि हमें यह ऐतिहासिक कानून पारित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद करेगा।”

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मान कैबिनेट के बड़े फैसले, डिजिटल यूनिवर्सिटी से लेकर प्राइवेट स्कूल फीस तक कई प्रस्तावों को मंजूरी

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पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी।

हरपाल चीमा ने बताया कि कैबिनेट ने ‘द पंजाब प्राइवेट डिजिटल ओपन यूनिवर्सिटी पॉलिसी’ को मंजूरी दे दी है। इसके तहत राज्य में तीन नई डिजिटल यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएंगी। इनमें एक होशियारपुर और दो पटियाला में बनाई जाएंगी। पटियाला के गांव फतेहपुर में एक यूनिवर्सिटी स्थापित होगी, जबकि विश्व प्रसिद्ध एजुकेशन ब्रांड फिजिक्स वाला पटियाला के गांव आनंदपुर केशव में डिजिटल यूनिवर्सिटी खोलेगा। वहीं, होशियारपुर में क्लाउड यूनिवर्सिटी स्थापित की जाएगी, जहां आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से पढ़ाई कराई जाएगी।

उन्होंने बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधे सरकार के अधीन कॉन्ट्रैक्ट पर लाने के लिए सरकार एक विशेष मनी बिल ला रही है। इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा में पेश कर पारित कराया जाएगा।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि निजी स्कूलों में मनमाने फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए लाए गए अध्यादेश को विधेयक में बदलने की मंजूरी दे दी गई है। विधानसभा और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। इसके तहत कोई भी निजी स्कूल 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। यदि कोई स्कूल इससे अधिक फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे नियामक (रेगुलेटरी) संस्था से अनुमति लेनी होगी।

कैबिनेट ने ‘पंजाब प्रोटेक्शन ऑफ ट्रीज़ बिल’ को भी मंजूरी दी है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति एक पेड़ काटता है तो उसे 10 नए पेड़ लगाने होंगे। ऐसा नहीं करने पर पहली बार प्रति पेड़ 10 हजार रुपये, दूसरी बार 35 हजार रुपये और तीसरी बार 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

इसके अलावा कैबिनेट ने पंजाब लोक निर्माण विभाग (PWD) में सिविल पदों पर सीधी भर्ती को भी मंजूरी दे दी है, जिससे विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का रास्ता साफ हो गया है।

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पंजाब विधानसभा में रोजगार और औद्योगिक निवेश पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित

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पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन ने रोजगार सृजन और औद्योगिक निवेश को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। इस दौरान सरकार की रोजगार नीतियों, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और राज्य में आए बड़े औद्योगिक निवेश की सराहना की गई।

प्रस्ताव पेश करते हुए विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि 1 अप्रैल 2022 से अब तक योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर 68,228 सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने बताया कि 16 मार्च 2022 से 31 जुलाई 2026 तक पंजाब को 1,83,837 करोड़ रुपये के 9,899 औद्योगिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके जरिए राज्य में 6,16,436 नए रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में 16,316, गृह विभाग में 14,723, बिजली विभाग में 8,706, स्थानीय निकाय विभाग में 5,681 और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 4,758 नियुक्तियां की गई हैं।

धालीवाल ने कहा कि पहले पंजाब में सरकारी नौकरियां सिफारिश, राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार का शिकार थीं, जिससे योग्य युवाओं का भरोसा व्यवस्था से उठ चुका था। लेकिन मौजूदा सरकार ने पारदर्शी परीक्षाओं और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के जरिए इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।

उन्होंने कहा कि अब युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए किसी सिफारिश की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि उन्हें उनकी योग्यता और मेहनत के आधार पर अवसर मिल रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि केवल सरकारी नौकरियों से बेरोजगारी की समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसलिए राज्य सरकार ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और नीतिगत स्थिरता के माध्यम से औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने पर भी विशेष ध्यान दिया है।

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स्वास्थ्य योजना की सफलता तभी है, जब ज़रूरत के समय लोगों तक उपचार पहुँच सके : डॉ. बलबीर सिंह

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किसी भी स्वास्थ्य योजना की वास्तविक सफलता केवल इस बात से नहीं आँकी जा सकती कि उस पर कितना ख़र्च हुआ या कितने मामलों का निपटारा हुआ, बल्कि इस बात से तय होती है कि ज़रूरत के समय लोगों को समय पर उपचार मिल पाया या नहीं। भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत 8 जनवरी 2026 से अब तक 2,91,417 लाभार्थियों को उपचार का लाभ मिल चुका है, जो कि एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत अब तक लगभग ₹1,044 करोड़ मूल्य की कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जा चुकी हैं। इन आंकड़ों के पीछे हज़ारों ऐसे परिवार हैं, जिन्हें चिकित्सा आपात स्थिति के दौरान इलाज के ख़र्च की चिंता किए बिना अपने प्रियजनों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला।

इस उपलब्धि पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “किसी भी स्वास्थ्य योजना की सफलता तभी मानी जाती है, जब वह ज़रूरत के समय लोगों तक पहुँचे। मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल आंकड़ों की योजना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि किसी भी मरीज़ को इलाज और आर्थिक बोझ के बीच चुनाव न करना पड़े। प्रत्येक लाभार्थी उस परिवार का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे कठिन समय में इस योजना का सहारा मिला।”

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने आगे कहा, “हम जानते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताएँ लगातार बदल रही हैं और हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम स्वास्थ्य व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाते रहें। मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से हम कैशलेस उपचार को अधिक सुलभ बना रहे हैं, स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत कर रहे हैं तथा यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रत्येक पात्र नागरिक तक इस योजना का लाभ पहुँचे।”

मुख्यमंत्री सेहत योजना से लाभान्वित अनेक लोगों ने इस योजना के प्रति संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की है। सुरेशपाल कौर ने बताया कि कठिन गर्भावस्था के दौरान मुख्यमंत्री सेहत योजना उनके परिवार के लिए संबल बनी। उन्होंने कहा, “गर्भावस्था के दौरान मुझे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो गई थी और सीज़ेरियन डिलीवरी करवाने की ज़रूरत थी। ऐसे समय में सेहत कार्ड हमारे लिए बहुत बड़ी मदद साबित हुआ। जन्म के बाद मेरे बच्चे को विशेष नवजात चिकित्सा (नीओनेटल केयर) की आवश्यकता थी, जिसका पूरा उपचार भी मुख्यमंत्री सेहत योजना के पैकेज के तहत उपलब्ध करवाया गया। इस योजना ने कठिन समय में हमारा साथ दिया और मेरे बच्चे को जीवन की स्वस्थ शुरुआत मिली।”

सुनाम की रूपिंदर कौर ने बताया कि कई वर्षों से घुटनों के असहनीय दर्द के कारण उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो गया था। उन्होंने कहा, “मैं लंबे समय से घुटनों के गंभीर दर्द से पीड़ित थी, लेकिन ख़र्च की चिंता के कारण ऑपरेशन के बारे में सोच पाना भी मुश्किल था। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत मेरा घुटना प्रत्यारोपण (नी रिप्लेसमेंट) नि:शुल्क हुआ। इस उपचार ने मुझे फिर से सामान्य और बेहतर जीवन जीने का अवसर दिया है।”

इसी प्रकार तरनतारन के बीर सिंह को हृदय संबंधी बीमारी का पता चलने पर मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत समय पर उपचार मिला। उनका एंजियोग्राफी के साथ पीटीसीए (परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी) किया गया।

बीर सिंह ने कहा, “डॉक्टरों ने बताया कि हृदय रोग के उपचार में देरी नहीं की जा सकती और इसका ख़र्च परिवार के लिए बहुत बड़ा बोझ बन सकता है। मुख्यमंत्री सेहत योजना के कारण मुझे समय पर आवश्यक उपचार मिल गया।”

मुख्यमंत्री सेहत योजना का प्रभाव अब पूरे पंजाब में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। राज्य के प्रत्येक ज़िले के लाभार्थी इस योजना के तहत उपचार प्राप्त कर रहे हैं। स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के ज़िला-वार आंकड़ों के अनुसार अब तक 2,91,417 लोगों को योजना का लाभ मिल चुका है। ज़िलों में पटियाला 27,892 लाभार्थियों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद बठिंडा में 22,584 तथा लुधियाना में 21,729 लाभार्थियों ने योजना का लाभ प्राप्त किया है। यह दर्शाता है कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पंजाब में इसकी व्यापक माँग है।

योजना के अंतर्गत जालंधर (19,312), होशियारपुर (19,075), अमृतसर (16,550), संगरूर (16,549), श्री मुक्तसर साहिब (14,800), फिरोज़पुर (13,344) तथा गुरदासपुर (12,037) में भी बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त मोगा (11,669), फाज़िल्का (11,516), मानसा (10,539), फरीदकोट (10,309), बरनाला (8,773), तरनतारन (8,714), रूपनगर (8,574), एस.ए.एस. नगर (8,085), फतेहगढ़ साहिब (7,933), शहीद भगत सिंह नगर (6,999), कपूरथला (5,928), पठानकोट (5,844) तथा मालेरकोटला (2,472) के लाभार्थियों ने भी कैशलेस उपचार प्राप्त किया है। यह व्यापक पहुँच इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री सेहत योजना केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों सहित प्रदेश के सभी ज़िलों में परिवारों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुँचा रही है।

मुख्यमंत्री सेहत योजना का लगातार बढ़ता दायरा स्वास्थ्य सेवाओं में एक सरल लेकिन महत्त्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। अब लोगों को उपचार शुरू करवाने से पहले यह चिंता नहीं सताती कि वे इसका ख़र्च कैसे उठाएँगे। योजना का विस्तार लगातार जारी है और इसका उद्देश्य स्पष्ट है—पंजाब के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करवाना।

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