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CM भगवंत सिंह मान के प्रयासों को मिली सफलता, Punjab में लंबे समय से लटके ओवरब्रिजों और राजमार्गों के कार्यों को पूरा करने का रास्ता हुआ आसान
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से एक महत्वपूर्ण मुलाकात के बाद केंद्र ने पंजाब में लंबे समय से लटके हाइवे और फ्लाईओवर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का भरोसा दिया, जिससे मक्खू, आदमपुर और भवानीगढ़ में रुके बुनियादी ढांचे के कार्यों में तेजी आएगी और प्रदेश भर के प्रमुख सड़क मार्गों के बड़े पैमाने पर विस्तार और चार-मार्गीकरण की संभावना है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़कों, जिनमें अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट फिरोजपुर-फाजिल्का कॉरिडोर भी शामिल है, को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की पंजाब की मांग भी उठाई। उन्होंने देरी और रुकावटों के कारण वर्षों से अटके प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र ने सुनाम, चीमा मंडी, भीखी, मानसा और मौड़ से होते हुए भवानीगढ़-कोटशमीर सड़क को चार-मार्गी करने का भी भरोसा दिया है। इसके अलावा बरनाला-बाजाखाना और मालेरकोटला-बरनाला कॉरिडोर का विस्तार भी किया गया है, जिसे पंजाब के सड़क संपर्क, आर्थिक आवागमन और जन सुरक्षा के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पंजाब सरकार द्वारा प्रदेश भर में जानों की रक्षा और सुरक्षित हाइवे सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई ‘सड़क सुरक्षा फोर्स’ के कामकाज की भरपूर सराहना की।
मुख्यमंत्री ने श्री नितिन गडकरी से आज मुलाकात कर सार्वजनिक हित में अमृतसर के वल्ला फ्लाईओवर के काम में तेजी लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट एनएचएआई द्वारा अवार्ड किया गया था, जो 15 सितंबर, 2023 तक पूरा होना था। उन्होंने कहा कि इसके पूरा होने की अवधि में बार-बार वृद्धि होने के बावजूद यह कार्य अभी भी अधूरा है और इसे पूरा करने की तिथि बढ़ाकर 30 अप्रैल, 2026 तक तय की गई थी, लेकिन अभी तक केवल 76 प्रतिशत काम ही हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस लिंक रोड की बहुत अधिक अहमियत है क्योंकि यह अमृतसर एयरपोर्ट और श्री हरिमंदिर साहिब को जोड़ता है और वीआईपी की निरंतर आवाजाही सहित भारी ट्रैफिक को भी संभालता है। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में लगातार देरी होने से भीड़-भाड़ बढ़ती है और सुरक्षा के लिहाज से लोगों को मुश्किलें पेश आती हैं।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह समय की आवश्यकता है कि एनएचएआई को वल्ला फ्लाईओवर के बचे हुए कार्य को जल्द पूरा करने के लिए तुरंत उचित कदम उठाने चाहिए, ताकि निर्धारित समय में प्रोजेक्ट पूरा किया जा सके।
जालंधर-होशियारपुर-मनाली रोड एनएच-70 के चार-मार्गीकरण का एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जालंधर-होशियारपुर रोड धार्मिक, पर्यटन, आर्थिक और रणनीतिक नजरिए से बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि यह रोड माता चिंतपुरनी जी मंदिर, माता ज्वाला जी मंदिर, माता चामुंडा देवी जी मंदिर, धर्मशाला, मनाली और पालमपुर सहित हिमाचल प्रदेश में प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों और पर्यटन स्थलों को पंजाब के विभिन्न जिलों से जोड़ता है।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस रोड से लगते आदमपुर एयरपोर्ट के कारण रणनीतिक पक्ष से यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एयरपोर्ट दोआबा क्षेत्र और इस क्षेत्र में वीवीआईपी के दौरों के लिए उपयोग किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जालंधर-होशियारपुर रोड को चार-मार्गी करने के प्रोजेक्ट को वर्ष 2016 में मंजूरी मिली थी, जिसके बाद ठेकेदार ने इसे रद्द कर दिया था। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि इस प्रोजेक्ट के बचे हुए कार्य की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) राज्य सरकार ने मंत्रालय को जमा करवा दी है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट पंजाब के लिए बहुत अहमियत रखता है। भगवंत सिंह मान ने केंद्रीय मंत्री से अपील की कि मंत्रालय से मंजूरी देने में तेजी लाई जाए, ताकि इस प्रोजेक्ट का काम शुरू किया जा सके।
चंडीगढ़-लांडरां-चुन्नी-सरहिंद रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सड़क एसएएस नगर जिले को फतेहगढ़ साहिब जिले से जोड़ने वाली प्रदेश की महत्वपूर्ण सड़क है, जिसकी अधिक ऐतिहासिक महत्ता है। “यह सड़क सोहाना में गुरुद्वारा सिंह शहीदां साहिब के निकट से शुरू होती है और लखनौर, लांडरां, झंझेड़ी और चुन्नी में से होकर गुजरती हुई फतेहगढ़ साहिब पर समाप्त होती है। वर्तमान समय में यह मुख्य रूप से 10-मीटर कैरेजवे चौड़ाई के साथ दो-मार्गी है, हालांकि कुछ हिस्सों को पहले ही चार-मार्गी कर दिया गया है।”
उन्होंने आगे कहा कि “भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत अंबाला-चंडीगढ़ ग्रीनफील्ड हाइवे प्रोजेक्ट भी गांव झंझेड़ी में इस सड़क को पार करता है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हर साल दिसंबर के महीने के दौरान, लाखों श्रद्धालु साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह जी और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह जी को श्रद्धांजलि देने के लिए शहीदी सभा के दौरान फतेहगढ़ साहिब आते हैं। इस दौरान 37.26 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर भारी ट्रैफिक रहता है। इस सड़क की रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए यह आवश्यक है कि इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जाए।”
एक अन्य एजेंडे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने नितिन गडकरी से धर्मकोट-जीरा-फिरोजपुर-फाजिल्का रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के लिए जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह रोड प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ता है और यह रोड पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के भी निकट है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह लिंक रोड रक्षा एवं सुरक्षा की दृष्टि से बहुत अहम है। उन्होंने कहा कि फिरोजपुर में स्थित सेना की अथॉरिटी भी इस रोड को चौड़ा कर चार-मार्गी बनाने के लिए लगातार जोर दे रही है, ताकि सेना के वाहनों की तेज एवं सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने नितिन गडकरी को बताया कि सड़क की कुल लंबाई 144.555 किलोमीटर है और इस सड़क पर दुर्घटनाओं में मरने वालों की औसत संख्या राष्ट्रीय राजमार्गों के मुकाबले अधिक है। उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर में पहचाने गए 11 ब्लैक स्पॉट हैं और फिरोजपुर-फाजिल्का सेक्शन में 2020 से 2022 के दौरान 162 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें से 138 दुर्घटनाएं काफी घातक थीं, जो इसकी क्षमता बढ़ाने और सुरक्षा में सुधार की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।
भगवंत सिंह मान ने केंद्रीय मंत्री से धर्मकोट-जीरा-फिरोजपुर-फाजिल्का सड़क के अंतर-राष्ट्रीय मार्ग संपर्क, रणनीतिक एवं सुरक्षा महत्ता, अधिक आवाजाही और सड़क सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पंजाब राज्य में इस सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में ‘बलाचौर-होशियारपुर-दसूहा’ सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि इसकी कुल लंबाई 104.96 किलोमीटर है और यह फगवाड़ा-रूपनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को पठानकोट-जालंधर राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ती है और चंडीगढ़/मोहाली और पठानकोट/जम्मू एवं कश्मीर के बीच अहम लिंक के रूप में काम करती है।
उन्होंने कहा कि इसके रणनीतिक संपर्क और क्षेत्रीय महत्ता के कारण इस सड़क पर यात्री एवं ट्रांसपोर्ट वाहनों और व्यावसायिक आवाजाही काफी रहती है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस सड़क का अधिकांश हिस्सा बिना डिवाइडर वाला है, जिसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर ट्रैफिक अधिक हो जाता है, अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं और राहगीरों को काफी देरी होती है, जिस कारण इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जाना चाहिए।
एक और मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने बठिंडा-मलोट रोड पर हुसनर चौक, गिद्दड़बाहा में फ्लाईओवर पर व्यू कटर (सुरक्षा बैरियर) की आवश्यकता पर जोर दिया, जो एनएचएआई के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर के दोनों ओर सघन आबादी वाले आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं, जिस कारण हुसनर चौक, गिद्दड़बाहा में व्यू कटर लगाना आवश्यक है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि लोगों की सुविधा के साथ-साथ राहगीरों की सुरक्षा और ट्रैफिक के सुगम एवं मुश्किल रहित आवागमन के लिए यह समय की मुख्य आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने 53.76 किलोमीटर लंबी भवानीगढ़-सुनाम-भीखी-कोटशमीर रोड को चार-मार्गी करने और इसकी रणनीतिक महत्ता के मद्देनजर इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि यह सड़क पटियाला और संगरूर जिलों को बठिंडा, मानसा, तलवंडी साबो, सिरसा और पंजाब के साथ-साथ हरियाणा से लगते अन्य प्रमुख स्थानों से जोड़ती है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस सड़क पर दैनिक आवाजाही काफी रहती है और यह यात्रियों एवं माल, दोनों की आवाजाही के लिए अहम कड़ी के रूप में कार्य करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के पटियाला-भवानीगढ़ हिस्से को पहले ही चार-मार्गी हाइवे के रूप में विकसित किया जा चुका है, जो भवानीगढ़ तक सुगम और उच्च-क्षमता कनेक्टिविटी सुनिश्चित करता है। भवानीगढ़-सुनाम-भीखी-कोटशमीर सड़क कोटशमीर तक दो-मार्गी हो जाती है।
उन्होंने बताया कि चार-मार्गी राष्ट्रीय राजमार्ग से दो-मार्गी राजमार्ग में यह अचानक बदलाव न केवल आवाजाही के लिए गंभीर बाधाएं पैदा करता है, बल्कि भीड़-भाड़ बढ़ने से दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ाता है।
उन्होंने कहा कि सड़क की काफी लंबाई के साथ-साथ उपयुक्त राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) पहले से ही उपलब्ध है और सुनाम, चीमा और भीखी सहित कुछ हिस्सों को चार-मार्गी बनाने के लिए पहले ही चौड़ा किया जा चुका है। इस सड़क को चार-मार्गी बनाने और राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह न केवल एकसमान कॉरिडोर क्षमता, सुचारू आवाजाही, भीड़-भाड़ कम करना सुनिश्चित करेगा, बल्कि सड़क सुरक्षा को बढ़ाने और क्षेत्रीय आर्थिक विकास में भी सहयोग देगा।
मुख्यमंत्री ने नितिन गडकरी से बंगा-गढ़शंकर-श्री आनंदपुर साहिब सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि यह सड़क श्री आनंदपुर साहिब और श्री कीरतपुर साहिब सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ती है और आर्थिक, पर्यटन एवं धार्मिक उद्देश्यों के लिए हिमाचल प्रदेश से आगे जोड़ती है। घरेलू और विदेशी पर्यटक नियमित रूप से इन धार्मिक स्थलों पर आते हैं और हिमाचल प्रदेश में माता नैना देवी जी मंदिर की यात्रा करते हैं, जिस कारण इस सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा दिया जाना चाहिए।
एक और अहम मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने बरनाला-बाजाखाना सड़क को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि यह सड़क बरनाला, मानसा और बठिंडा जिलों के लिए आवाजाही की सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है, जो मालवा क्षेत्र और लगते राजस्थान के प्रमुख व्यापारिक, कृषि और औद्योगिक केंद्रों को संपर्क प्रदान करती है। मौजूदा दो-मार्गी सड़क वर्तमान और भावी आवाजाही आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नाकाफी है, जिस कारण इसे राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करना और चार-मार्गी करना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने बरनाला-मालेरकोटला वाया शेरपुर सड़क को चार-मार्गी करने और राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की मांग की। उन्होंने आगे कहा, “यह सड़क बरनाला, संगरूर और मालेरकोटला जिलों के लिए आवाजाही की सुविधा देती है और मालवा क्षेत्र के प्रमुख कृषि, औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों को भी जोड़ती है। यह प्रोजेक्ट बरनाला, संगरूर और मालेरकोटला के बीच संपर्क में अहम सुधार करेगा और भीड़-भाड़, समय, वाहनों के परिचालन खर्च और दुर्घटना के जोखिमों को कम करेगा।”
एक और मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री ने भवानीगढ़ में भारी ट्रैफिक और भीड़-भाड़ जैसी समस्याओं के कारण एलिवेटेड कॉरिडोर/फ्लाईओवर के निर्माण की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि भवानीगढ़ अधिक आबादी वाला शहर है, जिसके राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों ओर सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान और दुकानें मौजूद हैं और शहर के दोनों ओर फ्लाईओवर होने के कारण इसमें तेजी से आवाजाही प्रवेश करती है, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने एनएचएआई से लोगों की सुरक्षा, भीड़-भाड़ कम करने और सुचारू आवाजाही के हितों के लिए भवानीगढ़ शहर में एक एलिवेटेड कॉरिडोर/फ्लाईओवर के निर्माण की जांच करने और काम शुरू करने का अनुरोध किया है।
इस दौरान एक और अहम मुद्दे का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने नितिन गडकरी से सेंट्रल रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (सीआरआईएफ) स्कीम के सेतु बंधन कार्यक्रम के तहत बकाया भुगतान जारी करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही काम शुरू कर दिए हैं और अब चल रहे कार्यों के लिए बकाया देनदारियों/ठेकेदार के भुगतान को पूरा करने के लिए धन की आवश्यकता है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि मंत्रालय द्वारा धन जारी न किए जाने के कारण विभिन्न निर्माण कार्यों की प्रगति प्रभावित हो रही है, जिस कारण धन तुरंत जारी करना समय की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एनएच-54 पर मक्खू कस्बे में रेलवे ओवर ब्रिज को जल्द पूरा करने की मांग भी की।
अपने एक्स हैंडल पर इस बैठक के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज दिल्ली में मैंने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से मुलाकात की। बैठक के दौरान, हमने एनएचएआई से संबंधित कई अहम प्रोजेक्ट्स और पंजाब से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से, ‘सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ)’ के बारे में बातचीत की गई। गडकरी जी ने हमारी सरकार द्वारा लोगों के जान-माल की रक्षा के लिए शुरू किए गए इस अनूठे प्रयास की भरपूर सराहना की।”
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गुरुग्राम में किसने खरीदा ₹271 करोड़ का देश का सबसे महंगा पेंटहाउस!
भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में गुरुग्राम ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। डीएलएफ के सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट ‘द डहलियास’ में करीब ₹271 करोड़ का पेंटहाउस बिकने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महंगी प्रॉपर्टी को कारोबारी मानव सरदाना ने खरीदा है, जो ‘इंपीरियल ऑटो’ से जुड़े रहे हैं। इस डील ने गुरुग्राम की प्रीमियम रियल एस्टेट मार्केट में नई चर्चा छेड़ दी है।
‘द डहलियास’ को डीएलएफ का सबसे महत्वाकांक्षी सुपर-लग्जरी प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट 29 मंजिलों वाले 8 टावरों में फैला है, जिसमें कुल 420 अपार्टमेंट्स हैं। इसकी कुल प्रोजेक्ट वैल्यू करीब ₹40,000 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। प्रोजेक्ट को खास तौर पर बेहद हाई-नेट-वर्थ ग्राहकों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ₹271 करोड़ में खरीदे गए इस पेंटहाउस का सुपर एरिया करीब 17,200 वर्ग फीट है, जबकि इसका कारपेट एरिया लगभग 10,500 वर्ग फीट बताया गया है। इस हिसाब से सुपर एरिया के आधार पर इसकी कीमत करीब ₹1.58 लाख प्रति वर्ग फीट और कारपेट एरिया के हिसाब से लगभग ₹2.6 लाख प्रति वर्ग फीट बैठती है।
इतनी बड़ी कीमत के साथ यह सौदा भारत के सबसे महंगे आवासीय संपत्ति लेनदेन में शामिल हो गया है। खास बात यह है कि कारपेट एरिया के हिसाब से कीमत गुरुग्राम को देश के सबसे महंगे रिहायशी बाजारों में शामिल मुंबई की प्रीमियम लोकेशनों के काफी करीब ले आती है।
मुंबई के वर्ली और अन्य प्रमुख इलाकों में भी लग्जरी घरों की कीमतें कई बार ₹2 लाख प्रति वर्ग फीट से ऊपर पहुंच जाती हैं। ऐसे में गुरुग्राम में ₹2.6 लाख प्रति वर्ग फीट के करीब की यह डील शहर में बढ़ती लग्जरी हाउसिंग डिमांड और प्रीमियम प्रॉपर्टी की कीमतों को दर्शाती है।
गुरुग्राम पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रमुख लग्जरी रियल एस्टेट बाजारों में तेजी से उभरा है। बड़े कॉरपोरेट हाउस, उद्योगपति और हाई-नेट-वर्थ खरीदार यहां बड़े आकार के अपार्टमेंट, पेंटहाउस और अल्ट्रा-लक्जरी घरों में निवेश कर रहे हैं। ₹271 करोड़ की यह डील इस बात का संकेत मानी जा रही है कि गुरुग्राम में प्रीमियम प्रॉपर्टी का बाजार अब देश के सबसे महंगे रियल एस्टेट बाजारों को टक्कर देने लगा है।
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देश में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ, सिर्फ ‘‘आप’’ लड़ रही आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई- केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने विश्व आदिवासी दिवस पर देश भर के आदिवासी समाज को बधाई देते हुए कहा कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा अन्याय आदिवासी समाज के साथ हुआ है। दूसरी सभी पार्टियों ने आदिवासी समाज के जल, जंगल और ज़मीन पर डाका डाला और उनसे छीन कर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया। केवल आम आदमी पार्टी ही आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लड़ रही है। आज आदिवासी नेता चैतर वसावा एक झूठे केस में जेल में हैं, क्योंकि वे आदिवासी समाज की आवाज़ उठा रहे थे। हम सभी उनके जल्द बाहर आने के लिए प्रार्थना करते हैं।
अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो संदेश जारी कर आदिवासी समाज के लोगों से कहा कि पिछले 75 साल में आदिवासी समाज के साथ सबसे ज्यादा अन्याय हुआ है। 75 साल में देश ने तरक्की की, बाकी सभी समाज के लोगों ने तरक्की की, लेकिन आदिवासी समाज पीछे रह गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आदिवासी समाज को जानबूझकर पीछे रखा गया। उनके जितने भी संसाधन थे, उन पर डाका डाला गया। जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज का पैदाइशी अधिकार है, लेकिन इन्हें समाज से छीनकर बड़ी-बड़ी कंपनियों को दे दिया गया क्योंकि बाकी पार्टियों के नेता चोर और भ्रष्टाचारी थे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी आपके अधिकारों के लिए लड़ रही है और इसके लिए कितनी ही बार हमारे नेता जेल गए हैं। चैतर वसावा आदिवासी समाज का बेटा और भाई है। वह आदिवासी समाज को हक दिलवाने के लिए न जाने कितनी बार जेल गए हैं। ये लोग पेसा कानून तो ले आए, लेकिन उसे लागू नहीं किया। समाज और ग्राम सभा से पूछे बिना ही ये सारे निर्णय ले लेते हैं। आज चैतर वसावा जेल में है क्योंकि वह आदिवासी समाज के लिए लड़ रहा है। वह जल्दी बाहर आए, इसके लिए प्रार्थना करना।
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बेंगलुरु के 3-Star और 5-Star होटलों में बड़ी फूड सेफ्टी जांच, Expired दूध-मांस और खराब सब्जियां मिलने से मचा हड़कंप
बेंगलुरु के बड़े और लग्जरी होटलों की रसोइयों में फूड सेफ्टी को लेकर बड़ी कार्रवाई की गई है। फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन और एफएसएसएआई की टीमों ने शहर के 26 होटलों में अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री, खराब मांस और मछली, सड़ी हुई सब्जियां, फंगस लगी सब्जियां और एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद पाए गए।
इस कार्रवाई के लिए 30 निरीक्षण टीमें तैनात की गई थीं। अधिकारियों ने अलग-अलग खाद्य पदार्थों के 35 सैंपल लिए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया है। वहीं, जो खाद्य सामग्री एक्सपायर्ड या इस्तेमाल के लायक नहीं पाई गई, उसे जब्त कर नष्ट कर दिया गया।
जांच के दौरान द ललित अशोक से करीब 76 किलो मांस, 200 किलो सब्जियां और 32 लीटर एक्सपायर्ड दूध बरामद किया गया। ताज यशवंतपुर से करीब 72 किलो मांस और मछली, जबकि फोर सीजन्स होटल से लगभग 19 किलो मांस मिला। शांगरी-ला होटल से करीब 15 किलो मांस और विवांता बेंगलुरु व्हाइटफील्ड से लगभग 3 किलो एक्सपायर्ड बेकरी उत्पाद हटाए गए।
सबसे बड़ी बरामदगी में से एक रेडिसन ब्लू एट्रिया से हुई, जहां करीब 105 किलो एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिली। इसमें लगभग 50 किलो चिकन, 25 किलो मांस, 23 किलो मछली और 7 किलो सब्जियां शामिल थीं। इसके अलावा कुछ होटलों की रसोई और स्टोरेज एरिया में साफ-सफाई से जुड़ी गंभीर कमियां भी सामने आईं।
अधिकारियों को कुछ सब्जियों पर फंगस मिली, जबकि कई जगह खाद्य सामग्री को सही तरीके से स्टोर नहीं किया गया था। शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने में भी लापरवाही सामने आई। कुछ उत्पादों पर जरूरी लेबलिंग नियमों का पालन नहीं किया गया था।
निरीक्षण के दौरान चिकन, मटन, मछली, दूध, खाना पकाने के तेल, मसाले, चीज और सॉस समेत कई खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए हैं। इनकी प्रयोगशाला जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ फूड सेफ्टी मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।
जहां नियमों का उल्लंघन पाया गया है, वहां होटल प्रबंधन को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रयोगशाला रिपोर्ट और निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने कहा कि इस अभियान की शुरुआत बड़े और लग्जरी होटलों से इसलिए की गई है, ताकि यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि होटल चाहे कितना भी बड़ा या महंगा हो, फूड सेफ्टी के नियम सभी के लिए समान हैं।
अब अधिकारियों की नजर उन फूड स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सेंटरों पर भी है, जहां से होटलों और कैटरिंग संस्थानों को खाद्य सामग्री की सप्लाई होती है। बेंगलुरु में हुई इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, साफ-सफाई और सुरक्षित भंडारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, पूरे मामले की अंतिम तस्वीर प्रयोगशाला रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई के बाद ही साफ होगी।
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