Punjab
328 श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लापता सरूपों पर सीएम मान सख्त, कहा– दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा जाँच के लिए गठित की SIT
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिरोमणि कमेटी और अकाली दल को श्री अकाल तख़्त साहिब और पंथ को अपने गलत कामों की ढाल के रूप में इस्तेमाल करने पर आड़े हाथों लिया है। सोमवार को उन्होंने कहा कि ये लोग श्री अकाल तख़्त साहिब और पंथ को अपने कुकर्मों के खिलाफ कार्रवाई से बचने के लिए ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 लापता हुए स्वरूपों के मामले में कोई कार्रवाई न होने से पूरी संगत नाराज़ है। शिरोमणि कमेटी इस पाप में शामिल अपने आकाओं के करीबी धनाढ्यों को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही है।
चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से पंजाबी और सिख समुदाय गहरे सदमे में है क्योंकि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 स्वरूपों के लापता होने के मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि पंथक संगठनों और संत समाज ने लंबे समय से इस संबंध में कार्रवाई की मांग की है और इस उद्देश्य से राज्य सरकार तक भी पहुंच की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अपनी नैतिक जिम्मेदारी के तहत राज्य सरकार ने इस संबंध में एफ.आई.आर. दर्ज की है और मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एफ.आई.आर. दर्ज होते ही अपने आकाओं के निर्देशों पर शिरोमणि कमेटी ने प्रेस के माध्यम से जानकारी देना शुरू कर दी और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार के खिलाफ ज़हर उगलना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी के मुखिया ने स्वीकार किया है कि कमेटी में रोज़ाना 10-12 घोटाले होते हैं, जो यह दर्शाता है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए गोलक के धन का दुरुपयोग हो रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि शिरोमणि कमेटी की अंतरिम कमेटी ने वर्ष 2020 में अपनी बैठक में इस मामले में दोषी कर्मचारियों और प्रकाशकों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई करने का प्रस्ताव पारित किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हैरानी की बात यह है कि इतनी अनियमितताओं के बावजूद इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि शिरोमणि कमेटी ने स्वयं पूर्व मुख्य सचिव डॉ. रूप सिंह जैसे धनाढ्यों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने का प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा कि एस.एस. कोहली एंड एसोसिएट्स (चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म) की सभी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय भी लिया गया था और जिम्मेदारियों में विफल रहने के कारण किए गए 75 प्रतिशत भुगतान की वसूली को भी मंजूरी दी गई थी। भगवंत सिंह मान ने कहा कि चूंकि कोहली अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल के सी.ए. के रूप में भी सेवाएं दे रहा था, इसलिए कार्रवाई आज तक लंबित है।
उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी अपने आकाओं के इशारे पर यह दावा करती है कि राज्य सरकार पंथ के मामलों में हस्तक्षेप कर रही है, जो पूरी तरह गलत है, क्योंकि शिरोमणि कमेटी ने स्वयं दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव पारित किया है, जिस पर कार्रवाई करना राज्य सरकार का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस पाप में शामिल प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने के लिए शिरोमणि कमेटी ने बाद में अपने सभी प्रस्ताव वापस ले लिए। भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकाली शासन के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाशन के सभी अधिकार ‘जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2008 (पंजाब एक्ट)’ के माध्यम से शिरोमणि कमेटी को दिए गए थे, लेकिन अब जब राज्य सरकार इन स्वरूपों की बरामदगी सुनिश्चित करना चाहती है ताकि किसी भी प्रकार की बेअदबी या अन्य घिनौना अपराध न हो, तो ये लोग इसे धार्मिक रंग दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिरोमणि कमेटी हर तरह की ताकत चाहती है, लेकिन जनता के प्रति जवाबदेह नहीं बनना चाहती। उन्होंने कहा कि अब वे श्री अकाल तख़्त साहिब का इस्तेमाल अपने आकाओं के नज़दीकियों को बचाने के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी और उसके अध्यक्ष अकाली लीडरशिप के हाथों की कठपुतलियाँ हैं, जो इसे अपने निजी हितों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे एसआईटी से डरते हैं, क्योंकि शिरोमणि कमेटी और उनके आका जानते हैं कि निष्पक्ष और गहन जांच उनके घिनौने चेहरे बेनकाब कर देगी।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि भले ही शिरोमणि कमेटी लापता स्वरूपों को ढूंढने में अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रही है, लेकिन राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस घिनौने अपराध के दोषियों को कानून के अनुसार सज़ा दी जाए। उन्होंने कहा कि पिछले 14 वर्षों से इस प्रतिष्ठित संस्था के चुनाव नहीं हुए हैं और इन नेताओं ने केंद्र सरकार से इसकी मांग तक नहीं की है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 स्वरूपों के लापता होने से हर सिख की भावना को गहरी ठेस पहुंची है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर महान सिख गुरुओं के कार्टून पोस्ट किए थे, लेकिन शिरोमणि कमेटी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, क्योंकि राज्य में चुनाव आने वाले हैं। उन्होंने कहा कि अकाली नेता केवल सत्ता हथियाना चाहते हैं और उन्हें न तो राज्य की चिंता है और न ही जनता की।
उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अकालियों ने पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा देने, एस.वाई.एल., काले कानूनों और अन्य राज्य-विरोधी फैसलों पर केवल अपने परिवार के लाभ के लिए सहमति दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1920 में जब अकाली दल की स्थापना हुई थी, तब उसे शेरों की पार्टी के रूप में जाना जाता था, लेकिन मौजूदा नेताओं ने उसे डायनासोरों की पार्टी में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान अकाली लीडरशिप केंद्र सरकार के सामने राज्य के मुद्दे उठाने से कतराती है, जबकि राज्य सरकार ने इसमें कोई कमी नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इसके पीछे एकमात्र कारण सत्ता की लालसा है, जिसके चलते अकाली लीडरशिप हर राज्य-विरोधी रुख अपनाने से भी नहीं झिझकते।
Punjab
भाजपा विरोधी सरकारों को कुचलने के लिए ED, CBI और चुनाव आयोग का उपयोग कर रही है: हरपाल सिंह चीमा
आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए, देशभर में विरोधी पार्टियों को कुचलने के लिए लोकतंत्र को योजनाबद्ध तरीके से खत्म करने और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब को निशाना बनाने के लिए 3 करोड़ पंजाबी भाजपा को मुंहतोड़ जवाब देंगे और उन्होंने ‘आप’ कार्यकर्ताओं द्वारा भाजपा की बदलाखोरी और डराने-धमकाने की राजनीति को बेनकाब करने के लिए भाजपा कार्यालयों का घेराव करने का ऐलान भी किया।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और लाला लाजपत राय जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों की बदौलत स्थापित हुआ लोकतंत्र आज भाजपा से गंभीर खतरे में है। देश की आजादी और लोकतंत्र की स्थापना के लिए पंजाबियों ने सबसे ज्यादा कुर्बानियां दीं, लेकिन अब भाजपा की तानाशाही राजनीति के कारण बाबा साहिब डॉ. बीआर अंबेडकर द्वारा तैयार किया गया संविधान खतरे में है।
केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि विरोधी पार्टियों के शासन वाले राज्यों में जहां भी चुनाव होने वाले होते हैं, भाजपा पहले ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी एजेंसियां भेजती है, और डर तथा दहशत का माहौल पैदा करने के लिए चुनाव आयोग का भी उपयोग करती है। ये एजेंसियां कभी भी भाजपा शासित राज्यों में नहीं भेजी जातीं क्योंकि भाजपा का एकमात्र उद्देश्य विरोधी सरकारों को अस्थिर करना और असहमति की आवाजों को दबाना है।
पंजाब में हाल ही में हुई ईडी की कार्रवाई को लेकर भाजपा को निशाना बनाते हुए मंत्री ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल चुनावों के तुरंत बाद ईडी ने अपना ध्यान पंजाब की ओर मोड़ लिया। भाजपा पंजाब में भी डराने-धमकाने और राजनीतिक हेराफेरी के उसी मॉडल को दोहराने की कोशिश कर रही है। ईडी ने पहले कारोबारी और संसद सदस्य अशोक मित्तल को निशाना बनाया और उन पर भाजपा में शामिल होने के लिए दबाव डाला। इसके तुरंत बाद ईडी कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के घर पहुंची। संजीव अरोड़ा ने भाजपा में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया, और इसके बाद जो हुआ वह पूरे देश ने देखा, पूरा दिन छापेमारी और फिर गिरफ्तारी।
भाजपा की कार्यप्रणाली के बारे में बताते हुए उन्होंने खुलासा किया कि भाजपा का मॉडल सरल है। जो डर जाते हैं वे भाजपा में शामिल हो जाते हैं, और जो इनकार करते हैं उन्हें जेल भेज दिया जाता है। भाजपा जानबूझकर विरोधी शासित राज्यों में डर का माहौल पैदा कर रही है ताकि या तो नेताओं को झुकने के लिए मजबूर किया जा सके या केंद्रीय एजेंसियों के जरिए उन्हें फंसाया जा सके। पश्चिम बंगाल चुनावों के दौरान भाजपा ने सत्ता हथियाने के लिए मतदाता सूची से 90 लाख मतदाता काट दिए थे। भाजपा अब पंजाब में भी ऐसी चालें दोहराने के सपने देख रही है, लेकिन पंजाबी ऐसी राजनीति के आगे कभी नहीं झुकेंगे।
पंजाब की क्रांतिकारी विरासत का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि पंजाबियों की रगों में क्रांतिकारियों और शहीदों का खून बहता है। शहीद-ए-आजम भगत सिंह और देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने वाले शहीदों का जज्बा हर पंजाबी के अंदर बसता है। यदि भाजपा पंजाब में ऐसी कार्रवाइयां जारी रखती है तो 3 करोड़ पंजाबी मुंहतोड़ जवाब देंगे।
उन्होंने संजीव अरोड़ा के खिलाफ ईडी की कार्रवाई की सख्त निंदा की और ऐलान किया कि ‘आप’ कार्यकर्ता और स्वयंसेवक रविवार को पंजाब भर में भाजपा के मुख्य कार्यालयों और दफ्तरों के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
राज्यव्यापी प्रदर्शनों का ऐलान करते हुए ‘आप’ नेता ने कहा कि ‘आप’ कार्यकर्ता प्रदेश भर में भाजपा कार्यालयों का घेराव करेंगे ताकि यह बेनकाब किया जा सके कि कैसे भाजपा राजनीतिक बदलाखोरी के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करके लोकतंत्र और संविधान के लिए खतरा बन रही है।
Punjab
Punjab न कभी झुका और न कभी झुकेगा- मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रधानमंत्री मोदी को स्पष्ट संदेश दिया
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज आम आदमी पार्टी के नेताओं पर इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) द्वारा बार-बार छापेमारी के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए डराने-धमकाने और बदले की राजनीति के हथकंडों के आगे पंजाब कभी नहीं झुकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर एक साल में तीसरी बार और एक महीने में दूसरी बार ईडी की रेड के दौरान कुछ भी हाथ नहीं लगा। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि ऐसी छापेमारी सिर्फ उन राज्यों में क्यों की जा रही है जहां भाजपा सत्ता में नहीं है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मोदी सरकार का असली इरादा काला धन की वसूली नहीं, बल्कि विपक्षी नेताओं पर दबाव डालकर उन्हें भाजपा में शामिल करवाना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहां जांच एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर रहे नेता बाद में भाजपा में शामिल हो गए और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कर लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुओं और शहीदों की धरती वाला राज्य पंजाब, औरंगजेब के जुल्मों के आगे भी नहीं झुका। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगे भी नहीं झुकेगा और यह भी कहा कि भाजपा-ईडी गठजोड़ का पतन पंजाब से ही शुरू होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), इनकम टैक्स विभाग और यहां तक कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाएं अब निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रही हैं, बल्कि गैर-भाजपा शासित राज्यों, खासकर पंजाब को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए निशाना बनाया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने इन संस्थाओं को नेताओं, कारोबारियों और जनप्रतिनिधियों को धमकाने के लिए राजनीतिक दमन के साधनों में बदल दिया है। उन्होंने कहा, “अपनी ड्यूटी निष्पक्षता से निभाने की बजाय इन संस्थाओं का इस्तेमाल अब राजनीतिक हिसाब-किताब तय करने और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने पूरे देश में यही तरीका अपनाया है जहां छापेमारी भ्रष्टाचार उजागर करने या काला धन वापस लाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए की जाती है। उन्होंने कहा, “भाजपा का संदेश साफ है- या तो भाजपा में शामिल हो जाओ या छापेमारी और जांच के जरिए परेशानी का सामना करो।”
राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल के हालिया मामले का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनके आवास, यूनिवर्सिटी और व्यावसायिक संस्थानों पर दो दिनों तक छापेमारी की गई। उन्होंने सवाल किया, “जिस पल वे भाजपा में शामिल हुए, छापेमारी बंद हो गई और इसके बजाय उन्हें केंद्र से सुरक्षा प्रदान की गई। क्या यह एजेंसियों की राजनीतिक दुरुपयोग की ज्वलंत मिसाल नहीं है?”
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसी चालें पंजाब में कभी सफल नहीं होंगी। उन्होंने कहा, “हम अपनी शुरुआत से ही विरोधी हालातों का सामना कर रहे हैं। पंजाब ने कभी धमकियों के आगे नहीं झुका है और न कभी झुकेगा।” कैबिनेट मंत्री और कारोबारी संजीव अरोड़ा के आवास पर ईडी की कार्रवाई का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बार-बार छापों से कुछ नहीं मिला। उन्होंने कहा, “यह राजनीतिक रूप से प्रेरित छापेमारी सिर्फ डर पैदा करने, दबाव बनाने और राजनीतिक विरोधियों की बाजू मरोड़ने के लिए है, लेकिन पंजाब ऐसी चालों के आगे नहीं झुकेगा।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब गुरुओं, संतों-महापुरुषों और महान शहीदों की पवित्र धरती है। यह धरती औरंगजेब के जाबर के आगे नहीं झुकी और न ही मोदी के आगे झुकेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि ईडी और भाजपा के बीच “अनैतिक गठजोड़” का अंत पंजाब से ही शुरू होगा। मुख्यमंत्री ने आगे सवाल किया कि ईडी के छापे मुख्य रूप से विपक्षी सरकार वाले राज्यों में ही क्यों किए जाते हैं जबकि भाजपा शासित राज्य इससे बाहर रहते हैं। उन्होंने बताया कि जब से ‘आप’ सरकार ने बेअदबी विरोधी सख्त कानून पास किया है, भाजपा भड़क गई है और राज्य की नेतृत्व को डराने की अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। उन्होंने कहा, “एक साल में तीसरी बार संजीव अरोड़ा के घर छापेमारी की गई है। पहले भी कुछ नहीं मिला था और अब भी कुछ नहीं मिलेगा।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाबियों ने मोदी सरकार को तीन काले कृषि कानून रद्द करने के लिए मजबूर किया था और अब केंद्र पंजाबियों को तंग-परेशान, बदनाम और निशाना बनाकर बदला लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, “इन ईडी छापों का उद्देश्य वसूली नहीं, बल्कि नेताओं को भाजपा में शामिल करने के लिए राजनीतिक दबाव है।” मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि पंजाब के पास जुल्म का विरोध करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की शानदार विरासत है। उन्होंने आगे कहा कि दबाव की राजनीति कहीं और काम कर सकती है, लेकिन पंजाब कभी धमकियों या जबरदस्ती के आगे नहीं झुकेगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने जालिम ताकतों को हमेशा मुंह तोड़ जवाब दिया है और यहां के लोग जानते हैं कि चुनौतीपूर्ण हालात में भी अपने अधिकारों और मान-सम्मान की रक्षा कैसे करनी है।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र ने चंडीगढ़, भाखड़ा, नदियों के पानी और पंजाब यूनिवर्सिटी सहित महत्वपूर्ण मुद्दों पर पंजाब के साथ लगातार भेदभाव किया है। उन्होंने कहा, “केंद्र ने पंजाब का आरडीएफ फंड सहित हजारों करोड़ रुपए के फंड रोके हुए हैं ताकि पंजाब के विकास की रफ्तार को प्रभावित किया जा सके।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और सीमाओं की सुरक्षा में पंजाब के बेमिसाल योगदान के बावजूद राज्य को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “पंजाब राष्ट्रीय पूल में गेहूं और चावल की बड़ी मात्रा में योगदान देकर देश का पेट भरता है, जबकि पंजाबी युवा बेमिसाल हिम्मत और कुर्बानी के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।”
फूट डालो राजनीति का सख्त विरोध करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब का सामाजिक ताना-बाना साम्प्रदायिक सद्भावना, भाईचारे की साझ और आपसी सम्मान पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा, “पंजाब की उपजाऊ मिट्टी में नफरत के अलावा कुछ भी नहीं उग सकता। यहां राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू और सिखों को बांटने की कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी।” बेअदबी विरोधी कानून पर दृढ़ स्टैंड लेते हुए मुख्यमंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी और सभी धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता व सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू किया गया बेअदबी विरोधी कानून केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और शांति भंग करने की कोशिश करने वालों के लिए सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बेअदबी विरोधी कानून को दुनिया भर की संगतों से भारी समर्थन मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ “एक खास परिवार” बेअदबी की पिछली घटनाओं में अपनी संलिप्तता के कारण इस कानून का विरोध कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा, “जो लोग दावा कर रहे हैं कि पंथ ने इस कानून को रद्द कर दिया है, उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि लाखों लोग इसका समर्थन क्यों कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ लोग संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए आम लोगों को गुमराह कर रहे हैं और कानून के आस पास अनावश्यक उलझन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।
अपनी सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि बेअदबी विरोधी कानून पहले ही संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा, “राज्यपाल ने एक्ट को मंजूरी दे दी है। इस कानून को वापस लेने का सवाल ही पैदा नहीं होता।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह कानून लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद बनाया गया था और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्रता की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि सख्त बेअदबी विरोधी कानून की मांग करते हुए लगभग डेढ़ साल से विरोध प्रदर्शन और धरने जारी थे।
उन्होंने कहा कि आज कानून का विरोध करने वाले कई सिख बुद्धिजीवियों और विद्वानों ने पहले भी बेअदबी की घटनाओं के खिलाफ सख्त कानून की मांग की थी उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जुलाई 2007 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने खुद एक प्रस्ताव पास करके सरकार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की रक्षा और सम्मान के लिए कानून बनाने का अधिकार दिया था। विरोधी पक्ष के बदलते स्टैंड पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पूछा कि जिन लोगों ने पहले विधायी हस्तक्षेप का समर्थन किया था, वे अब यह कैसे दावा कर रहे हैं कि सरकार ऐसा कानून नहीं बना सकती।उन्होंने कहा कि ऐसे नेता ‘बराबर अथॉरिटी’ चलाने की कोशिश कर रहे हैं और संवेदनशील धार्मिक मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं।
*दबाव के तहत बेअदबी विरोधी कानून रद्द नहीं करेगा पंजाब; “शुक्राना यात्रा” को बड़े स्तर पर मिले हुंकारे से ध्यान हटाने की कोशिशें की जा रही हैं: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान*बेअदबी विरोधी कानून के खिलाफ मीटिंगों और विरोध प्रदर्शनों की धमकी देने वाले बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हर लोकतांत्रिक समूह को मीटिंग करने का अधिकार है, लेकिन उन्होंने दृढ़ता से कहा कि किसी भी दबाव के तहत कानून को रद्द नहीं किया जाएगा।
अपनी चल रही “शुक्राना यात्रा” पर सवालों के जवाब में, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आरोप लगाया कि ईडी के छापे, नोटिस और विवाद जानबूझकर यात्रा के साथ-साथ किए जा रहे हैं ताकि मीडिया का ध्यान पूरे पंजाब में मिल रहे भारी जनसमर्थन से हटाया जा सके।मुख्यमंत्री ने भाजपा की “तानाशाही मानसिकता” की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा जनजीवन के हर क्षेत्र, संस्थाओं से लेकर संस्कृति और सार्वजनिक भाषण तक को नियंत्रित करना चाहती है।
उन्होंने पंजाब को डर या अस्थिरता की ओर धकेलने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाबी ऐसी राजनीति का एकजुट होकर जवाब देंगे। ‘एक्स’ पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश के संवैधानिक ढांचे को कमजोर कर रही है। भाजपा अपने राजनीतिक हितों के लिए सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स विभाग और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का लगातार दुरुपयोग कर रही है।”
“ईडी के छापे सिर्फ उन राज्यों में ही क्यों मारे जा रहे हैं जहां भाजपा सत्ता में नहीं है? यह सीधा लोकतंत्र का कत्ल है। पंजाबियों के खिलाफ नफरत और भेदभाव की राजनीति की जा रही है। हमें डराने और धमकाने के लिए हर रोज नए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।
मैं एक बात बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं: पंजाब गुरुओं और संतों-महापुरुषों की धरती है। इस उपजाऊ मिट्टी में हर बीज उग सकता है, लेकिन नफरत का बीज यहां कभी जड़ नहीं पकड़ सकता।” एक्स पोस्ट पर उन्होंने कहा, “असल में बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून पास होने के बाद भाजपा बुरी तरह बौखलाई हुई है। पंजाब के लोगों के साथ ऐसी खेलें खेलना बंद करो। यह तानाशाही रवैया यहां काम नहीं करेगा। हम पूरी ईमानदारी से लोगों की सेवा करते रहेंगे। न तो हम झुकेंगे, न ही रुकेंगे।”
Punjab
‘HAMPTON SKY REALTY LIMITED’ ने आरोपों पर जारी किया विस्तृत बयान
नई दिल्ली में 9 मई 2026 को जारी एक प्रेस बयान में हैंपटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने अपने खिलाफ चल रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर अपना पक्ष रखा है। कंपनी ने कहा है कि उसे देश के कानूनी और संवैधानिक ढांचे, सरकारी रिकॉर्ड और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
कंपनी के मुताबिक भारत में मोबाइल फोन निर्माण और एक्सपोर्ट सेक्टर को “मेक इन इंडिया” और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया है। बयान में कहा गया कि भारत का मोबाइल एक्सपोर्ट टर्नओवर वर्ष 2014-15 में करीब 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कंपनी ने बताया कि उसने मई 2023 में मोबाइल एक्सपोर्ट कारोबार में प्रवेश किया था।
बयान के अनुसार एक्सपोर्ट अवधि के दौरान कंपनी ने 44,471 ब्रांडेड मोबाइल हैंडसेट और एक्सेसरीज का निर्यात किया, जिनमें बड़ी संख्या में एप्पल आईफोन और एयरपॉड्स शामिल थे। कंपनी का दावा है कि हर एक्सपोर्ट की कस्टम अधिकारियों और अन्य स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा कई चरणों में जांच की गई। इसमें IMEI स्कैनिंग, OEM कंपनियों द्वारा वेरिफिकेशन और यूएई कस्टम द्वारा जांच शामिल थी।
कंपनी ने यह भी कहा कि हर मोबाइल फोन का एक विशिष्ट 15 अंकों वाला IMEI नंबर होता है, जिसकी जांच एप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियों के ग्लोबल डेटाबेस के जरिए की गई। कंपनी के अनुसार 16,391 IMEI नंबरों का स्वतंत्र सत्यापन हुआ, जिससे यह साबित होता है कि ये डिवाइस भारत से बाहर एक्टिवेट किए गए थे।
हैंपटन स्काई रियल्टी लिमिटेड ने अपने बयान में कहा कि एक्सपोर्ट से प्राप्त हुई पूरी राशि बैंकिंग चैनलों के माध्यम से मिली और उसका पूरा भुगतान सप्लायर्स को किया गया। कंपनी ने “राउंड ट्रिपिंग” और “फर्जी एक्सपोर्ट” जैसे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी रकम विदेश में नहीं रखी गई और न ही किसी व्यक्ति या संस्था को गैरकानूनी तरीके से वापस भेजी गई।
जीएसटी से जुड़ी चिंताओं को लेकर कंपनी ने कहा कि यह मामला कुछ घरेलू सप्लायर्स से संबंधित है और कुल कारोबार का केवल एक छोटा हिस्सा है। कंपनी का दावा है कि उसने सभी भुगतान बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए और नियमित रूप से जीएसटी रिटर्न दाखिल की। बयान में यह भी कहा गया कि जब कंपनी को सप्लायर स्तर पर गड़बड़ी की जानकारी मिली, तो उसने खुद लुधियाना के फोकल प्वाइंट थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी।
कंपनी ने यह भी दावा किया कि सरकार के खजाने को इस मामले में कोई मौजूदा नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि संबंधित जीएसटी राशि पहले ही जमा करवाई जा चुकी है और मामला फिलहाल अपील के अधीन है। बयान के अंत में कंपनी ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और अदालत की प्रक्रिया पर पूरा भरोसा रखती है।
-
Religious2 years agoकब है तुलसी विवाह? इस दिन तुलसी माता का विवाह करने से मिलेगा लाभ
-
Religious2 years agoजानिए गोवर्धन पूजा का महत्व, कौनसा समय रहेगा पूजा के लिए सही
-
Religious2 years agoआखिर क्यों लिखा जाता है घर के बाहर शुभ लाभ, जानिए क्या है इन चिह्न का मतलब
-
Religious2 years agoपैरों के निशान, बनावट, रंग, साइज से पता लागए की आप कितने है भागयशाली
-
Punjab2 years agoपंजाब में अमरूद के बगीचे के मुआवजे के घोटाले में ED ने 26 स्थानों पर छापे मारे
-
Chandigarh2 years agoChandigarh: Top 10 Restaurants. ये लोकप्रिय क्यों हैं ?
-
Punjab2 years agoLudhiana में पुलिस स्टेशन के पास शव मिला। एक आदमी सड़क के बीच में पड़ा था; पास में कपड़ों से भरा एक बोरे भी मिला था, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी
-
Religious3 years agoजानिए दीपावली में वाले दिन आखिर कितने जलाने चाहिए दीये ? और क्यों जलाने चाहिए दिये |