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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा 2,800 नए राशन डिपो धारकों को लाइसेंस सौंपेने से अब पूरे पंजाब में घरों के नजदीक मिलेगा राशन

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पंजाब की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करने और आवश्यक खाद्य आपूर्ति को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज 2,800 नए राशन डिपो धारकों को लाइसेंस सौंपे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य भर के लोगों को राशन उनके घरों के नजदीक उपलब्ध कराया जा सके। इस कदम से लगभग 5.5 लाख राशन कार्ड धारकों को लाभ होगा, जिन्हें अब अपना मासिक राशन लेने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी या काम छोड़ना नहीं पड़ेगा।

आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा साक्षात्कार-आधारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नए डिपो आवंटित किए गए हैं, जिससे समाज के सभी वर्गों, जिनमें अनुसूचित जाति (एस.सी.), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओ.बी.सी.), पूर्व सैनिक, स्वतंत्रता सेनानी, दिव्यांग व्यक्ति और दंगा पीड़ित परिवार शामिल हैं, के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। मोहाली के विकास भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में नवनियुक्त डिपो धारकों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने इन लाइसेंसों को ईमानदारी, निष्पक्षता और सहानुभूति के साथ लोगों की सेवा करने की एक बड़ी जिम्मेदारी बताया।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नए राशन डिपो खुलने से लगभग 5.5 लाख राशन कार्ड धारकों को अपने मासिक राशन के लिए लंबी दूरी तय करने या काम छोड़कर लंबी कतारों में खड़े होने से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने नए राशन डिपो धारकों को लाइसेंस जारी करते समय समाज के सभी वर्गों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा, “आवंटन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया गया है, जबकि समाज के हर वर्ग के लिए प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है। 2,800 नए लाइसेंसों में से, 633 अनुसूचित जाति वर्ग के परिवारों को, 199 अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित परिवारों को, 181 पूर्व सैनिकों को, 39 स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को, 156 दिव्यांग व्यक्तियों को और 17 दंगा पीड़ित परिवारों को आवंटित किए गए हैं।”

खाद्य सुरक्षा के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि स्मार्ट राशन कार्ड योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा पंजाब भर के 40 लाख परिवारों को मुफ्त गेहूं और मेरी रसोई राशन किट प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों ने राजनीतिक सिफारिशों के आधार पर राशन डिपो लाइसेंस वितरित किए थे। हमने पक्षपात को खत्म करने और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए साक्षात्कार-आधारित चयन प्रणाली शुरू करके इस परंपरा को खत्म कर दिया है।”

नए चुने गए डिपो धारकों और उनके परिवारों को बधाई देते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लाइसेंसों ने हजारों परिवारों के लिए रोजी-रोटी का एक नया रास्ता खोला है और साथ ही उन्हें समाज की सेवा करने का अवसर भी दिया है। उन्होंने कहा, “आज, 2,800 डिपो धारकों को नई डिपो आवंटन नीति के तहत लाइसेंस दिए जा रहे हैं। यह सिर्फ एक लाइसेंस नहीं है, बल्कि लोगों की सेवा करते हुए रोजी-रोटी कमाने का अवसर है। आप सरकार और लोगों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे और मैं इसे ईश्वर का आशीर्वाद मानता हूं कि आपको यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।”

इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से पंजाब के लोगों को अत्यधिक लाभ होगा और साथ ही जमीनी स्तर पर आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार की नीतियां सिर्फ लोगों की भलाई के लिए लागू की जा रही हैं। आज, 40 लाख परिवारों को हल्दी से लेकर दालों तक आवश्यक घरेलू सामान वाली मुफ्त मेरी रसोई किट मिल रही हैं। यह हर सरकार का कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी परिवार भूखा न सोए और हम सिर्फ लोगों के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सोच है कि हर गांव और हर शहर में राशन डिपो स्थापित किए जाएं ताकि लोगों को उनके घरों के नजदीक ही सेवाएं मिल सकें।

नवनियुक्त डिपो धारकों को अपनी जिम्मेदारियां पूरी लगन से निभाने की अपील करते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वे हर लाभार्थी के साथ निष्पक्षता, ईमानदारी और सहानुभूति से पेश आएं। उन्होंने कहा, “मैं आप सभी से अनुरोध करता हूं कि इसे सिर्फ एक व्यवसाय न समझें, बल्कि एक पवित्र जिम्मेदारी समझें। बुजुर्गों, विकलांगों और गरीब परिवारों की विशेष देखभाल करें। जहां भी जरूरत हो, यह सुनिश्चित करें कि विकलांगों को उनके घरों में राशन मिले। यह आवंटन एक पारदर्शी साक्षात्कार प्रक्रिया के माध्यम से योग्यता के आधार पर किया गया है, ताकि योग्य लोगों को ये लाइसेंस मिल सकें। समाज की सेवा करने के साथ-साथ, यह पहल हजारों परिवारों को एक सम्मानजनक रोजी-रोटी कमाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने में भी मदद करेगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों के कार्यकाल के दौरान ऐसे लोक कल्याणकारी प्रयास रुक गए थे, जिनका एकमात्र उद्देश्य लोगों की सेवा करने के बजाय उनका शोषण करना था। उन्होंने कहा, “पिछली सरकारों के पास पंजाब के लिए कोई दृष्टिकोण नहीं था। उनका एकमात्र उद्देश्य लोगों को लूटना और गुमराह करना था।”

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी आंतरिक संघर्षों में डूबी रहती है। उन्होंने कहा, “एक दिन वे एक नेता को महत्व देते हैं, अगले दिन दूसरे को। उनकी राजनीति सिर्फ कुर्सी के इर्द-गिर्द घूमती है। उनके अपने ही एक नेता ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उनकी पार्टी में मुख्यमंत्री बनने के लिए 500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने पूछा कि इतना पैसा कहां से आएगा?”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ऐसा पैसा आखिरकार आम लोगों की जेब से आता है, जो लोक कल्याण पर केंद्रित प्रशासन पर बुरा प्रभाव डालता है। उन्होंने कहा, “यह पैसा लोगों से वसूला जाएगा। जब राजनीति इतनी महंगी हो जाती है, तो लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।”

राज्य सरकार की पहलों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और राज्य तथा राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनमोल जानें बचाने के लिए देश की पहली समर्पित सड़क सुरक्षा बल (एस.एस.एफ.) की शुरुआत की है। उन्होंने कहा, “दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने और पूरे पंजाब में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 1,597 नव-भर्ती कर्मियों के विशेष रूप से प्रशिक्षित बल को 144 पूर्णतः सुसज्जित वाहनों के साथ तैनात किया गया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष फरवरी में अपनी शुरुआत के बाद से सड़क सुरक्षा बल ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 48 प्रतिशत की कमी लाई है। उन्होंने आगे कहा कि जानें बचाने के अलावा इस बल ने दुर्घटना पीड़ितों से संबंधित कीमती सामान और नकदी की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित की है।

सिंचाई क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब में नहरी पानी के उपयोग में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा, “वर्ष 2022 में पंजाब अपने नहरी पानी का केवल 22 प्रतिशत उपयोग कर रहा था। आज यह आंकड़ा 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। अनेक क्षेत्रों में लोगों ने लगभग 80 वर्षों में पहली बार अपने गांवों तक नहरी पानी पहुंचते देखा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले किसानों के पास सिंचाई के लिए बोरवेलों पर निर्भर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, लेकिन राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों ने भूजल पर निर्भरता को काफी कम कर दिया है। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार की अपनी रिपोर्ट के अनुसार हमारे निरंतर प्रयासों के कारण पंजाब के भूजल स्तर में लगभग चार मीटर का सुधार हुआ है। हम नहरी पानी का अधिक और भूजल का कम उपयोग कर रहे हैं तथा वह दिन दूर नहीं जब पंजाब अपने उपलब्ध नहरी पानी का 100 प्रतिशत उपयोग करेगा।”

नदी जल पर राज्य के दृढ़ रुख को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब अपने वैध हिस्से की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा, “पंजाब का पानी पंजाब का है। हम अपना पानी किसी को भी नहीं लेने देंगे, चाहे वह हरियाणा हो या राजस्थान। पहले पंजाब का शोषण किया जाता था, लेकिन वे दिन अब बीत चुके हैं।”

अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वह पंजाब की वास्तविकताओं से अनभिज्ञ हैं। उन्होंने कहा, “सुखबीर सिंह बादल ने अपना पूरा जीवन विशेषाधिकारों और ऐशो-आराम में बिताया है। वह पंजाब की जमीनी वास्तविकताओं से अनजान हैं, फिर भी राज्य का नेतृत्व करने का प्रयास करते हैं। वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद पूर्व उपमुख्यमंत्री को पंजाब के भूगोल और कृषि की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। वह राज्य की प्रमुख फसलों में भी अंतर नहीं कर सकते। इसके बावजूद उनकी पार्टी हम पर एक के बाद एक निराधार आरोप लगा रही है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित अभियानों के माध्यम से बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “अब शिरोमणि समिति ने गुरुद्वारों के बाहर मेरे बहिष्कार वाले पोस्टर लगाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन मैं पूछना चाहता हूं कि अकाली दल या सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ ऐसे पोस्टर क्यों नहीं लगाए गए, जब उन्होंने स्वयं बेअदबी की घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार की थी?”

2 दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष हुई कार्रवाई को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से अपनी गलतियां स्वीकार की थीं। उन्होंने कहा, “उन्होंने अपनी गलती मानी, गोलीबारी की घटनाओं की जिम्मेदारी ली और स्वीकार किया कि संगत के विरुद्ध आदेश जारी किए गए थे। जब उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष यह स्वीकार किया था, तब क्या किसी ने गुरुद्वारों के बाहर उनके बहिष्कार की अपील करने वाले पोस्टर लगाए थे? संगत समझदार है और जनता सर्वोच्च है। ऐसी कार्रवाइयां केवल इसलिए की जा रही हैं क्योंकि उनके पास मेरे खिलाफ उठाने के लिए कोई वास्तविक मुद्दा नहीं बचा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि अकाली नेतृत्व ने नशे को संरक्षण देकर पंजाब को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। उन्होंने कहा, “उन्होंने नशे के कारोबार को बढ़ावा देकर और उसे संरक्षण देकर पंजाब की पीढ़ियों को बर्बाद कर दिया। रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि सरकारी वाहनों का उपयोग नशे की तस्करी के लिए किया जाता था। उन्होंने अपने संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए धर्म का दुरुपयोग कर प्रत्येक पंजाबी की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जो एक अक्षम्य पाप है।”

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे नेताओं ने पंजाब और सिख पंथ विरोधी शक्तियों के हितों में काम किया है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस, भाजपा और अकाली दल मेरे खिलाफ साजिश रचने के लिए एकजुट हो गए हैं क्योंकि वे हमारी सरकार द्वारा किए जा रहे जनहितैषी कार्यों को पचा नहीं पा रहे हैं।”

जनकल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के खजाने का एक-एक रुपया जनता के हित में सोच-समझकर खर्च किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के 90 प्रतिशत से अधिक घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। पहली बार किसानों को खेती के लिए दिन के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल रही है। हमारी सरकार का प्रत्येक निर्णय केवल और केवल जनता के कल्याण से प्रेरित होता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां केंद्र सरकार देशभर में सार्वजनिक संपत्तियों को कौड़ियों के भाव बेच रही है, वहीं पंजाब ने सार्वजनिक स्वामित्व को मजबूत कर एक अलग रास्ता चुना है। उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब देश की मूल्यवान सार्वजनिक संपत्तियां कुछ चुनिंदा लोगों के हवाले की जा रही हैं, पंजाब ने व्यापक जनहित में एक निजी ताप विद्युत संयंत्र खरीदकर इतिहास रच दिया है।”

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक तथा कई अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

इस समारोह की कुछ झलकियां साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज मोहाली में हमने 2,800 नए डिपो धारकों को लाइसेंस सौंपे हैं, जिससे हजारों परिवारों को आजीविका का नया साधन मिला है। यह केवल एक लाइसेंस नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करने की एक पवित्र जिम्मेदारी है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “मैं आप सभी से अपील करता हूं कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी के साथ निष्पक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करें। बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों और गरीब परिवारों की विशेष देखभाल और सहायता करना अपना कर्तव्य समझें।”

पोस्ट के अंत में लिखा था, “हमारी सरकार का प्रत्येक निर्णय जनता के कल्याण से प्रेरित होता है और करदाताओं से एकत्र किया गया एक-एक रुपया जनता के हित में खर्च किया जा रहा है। आइए, सेवा, ईमानदारी और विश्वास के साथ मिलकर एक ‘रंगला पंजाब’ का निर्माण करें।”

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Politics

जहाँ भी चुनाव आते हैं, भाजपा विपक्षी सरकारों को निशाना बनाने के लिए सीबीआई, ईडी और दूसरी एजेंसियों का इस्तेमाल करती है: बलतेज पन्नू

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आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने बुधवार को भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर राज्य के फंड रोक कर राजनीतिक मकसद के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार को बदनाम करने के लिए लगातार मुहिम चला कर पंजाब सरकार को जानबूझ कर कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले, भाजपा और उसके समर्थकों ने यह कहकर लोगों में डर पैदा करने की कोशिश की थी कि आप सरकार के पास अनुभव की कमी है और वह ठीक से काम नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोगों ने उस बात को नकार दिया और आप को साफ़ जनादेश दिया। विरोधियों ने कहा था कि इस सरकार के पास कोई अनुभव नहीं है, यह काम नहीं कर पाएगी और मुख्यमंत्री तीन महीने भी नहीं टिक पाएंगे। लेकिन पंजाब के लोगों ने मन बना लिया था कि वे 2017 की गलती नहीं दोहराएंगे और उन्होंने भगवंत मान को भारी बहुमत दिया।”

आप के मीडिया इंचार्ज ने कहा कि आप सरकार के सत्ता में आने के बाद, केंद्र ने एक-एक करके पंजाब का फंड रोकना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, “आरडीएफ का हज़ारों करोड़ का पैसा अभी भी केंद्र के पास पेंडिंग है। यहां तक ​​कि मनरेगा का स्ट्रक्चर और नाम बदलकर उसे कमज़ोर कर दिया गया, जिसका असर पंजाब पर भी पड़ा।”

पंजाब में आई बाढ़ का ज़िक्र करते हुए, बलतेज पन्नू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य के दौरे और बाढ़ से हुए भारी नुकसान की जानकारी देने के बावजूद, पंजाब को सिर्फ़ 1,600 करोड़ रुपये मिले, जो मदद के लिए बहुत कम रकम थी। उन्होंने आगे कहा, “वादा की गई एक्स्ट्रा मदद भी नहीं मिली। केंद्र की लगाई गई वित्तीय पाबंदियों के बावजूद, भगवंत सिंह मान सरकार ने अपने विकास और भलाई के काम जारी रखे।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने सोचा कि अगर पंजाब का फंड रोक दिया गया, तो सरकार स्कूल नहीं बना पाएगी, हेल्थकेयर सिस्टम को मज़बूत नहीं कर पाएगी, मोहल्ला क्लीनिक नहीं बना पाएगी, हॉस्पिटल नहीं सुधार पाएगी या सड़कें नहीं बना पाएगी। लेकिन सरकार काम करती रही क्योंकि उसमें ईमानदारी और काम करने का पक्का इरादा था।”

शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार के काम पर ज़ोर देते हुए, बलतेज पन्नू ने कहा कि इस क्षेत्र में केरल को पीछे छोड़कर पंजाब एक प्रोग्रेसिव राज्य के तौर पर उभरा है। उन्होंने आगे कहा, “रोड सेफ्टी फोर्स बनाई गई, जो पंजाब की सड़कों पर कीमती जानें बचाने का काम कर रही है, साथ ही जनता की भागीदारी से ड्रग्स के खिलाफ ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम भी जारी है।”

आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “भाजपा बार-बार पुराने वीडियो और चुनिंदा बातों का इस्तेमाल करके पंजाब को नेगेटिव दिखा रही है। चुनी हुई सरकारों को गिराने के मकसद से चुनावों के आसपास केंद्रीय जांच एजेंसियों को लगाया जाता है। जब भी किसी राज्य में चुनाव पास आते हैं, भाजपा सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों को लगा देती है। उनका एकमात्र मकसद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के काम में रुकावट डालने के तरीके ढूंढना और यह माहौल बनाना है कि उनकी सरकार फेल हो गई है।”

बलतेज पन्नू ने कहा कि ‘मावां-धीया सत्कार योजना’ जैसी भलाई की पहल के खिलाफ भी ऐसी ही कोशिशें की गईं, लेकिन भगवंत मान सरकार ने विरोध के बावजूद ऐसी योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया।

ईडी से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर, बलतेज पन्नू ने एजेंसी पर आप नेताओं के खिलाफ मीडिया में नेगेटिव नैरेटिव बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। आप मंत्री संजीव अरोड़ा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “वह अभी भी जेल में हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है, जबकि एक के बाद एक मंत्री पर आरोप लग रहे हैं।”

बलतेज पन्नू ने पंजाब पुलिस के साथ ईडी की बातचीत पर भी सवाल उठाया, उन्होंने कहा कि ईडी द्वारा डीजीपी को कथित तौर पर भेजे गए पत्र के बारे में मीडिया रिपोर्ट्स को बार-बार हाईलाइट किया जा रहा है, जबकि पंजाब पुलिस द्वारा एजेंसी से मांगे गए जवाब को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। “पंजाब पुलिस ने ईडी से केस के साफ सबूत और पूरी डिटेल्स देने को कहा है। अगर जो कंटेंट दिखाया जा रहा है वह सिर्फ चैट के धुंधले स्क्रीनशॉट हैं, तो उसके आधार पर एफआईआर कैसे दर्ज की जा सकती है? ईडी को दस्तावेज और डिटेल्स देने चाहिए ताकि केस को आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन कोई जवाब नहीं आ रहा है।”

बलतेज पन्नू ने कहा कि बार-बार लीक और चुनिंदा मीडिया रिपोर्ट्स का मकसद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को बदनाम करना है क्योंकि भाजपा उनके खिलाफ कुछ भी नहीं ढूंढ पाई है। “पंजाब के लोग सच जानते हैं। उन्होंने भगवंत मान सरकार का काम देखा है, चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों। भाजपा भले ही मुख्यमंत्री को बदनाम करने की कोशिश करती रहे, लेकिन लोगों ने पहले ही अपना मन बना लिया है। आने वाले विधानसभा चुनावों में, पंजाब एक बार फिर भगवंत सिंह मान को राज्य की सेवा करते रहने के लिए चुनेगा।”

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पंजाब में भाजपा का कोई जनाधार नहीं है, ईडी को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है: कुलदीप धालीवाल

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप धालीवाल ने केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पंजाब में भाजपा का कोई जनाधार नहीं बचा है, इसलिए वह ईडी की मदद ले रही है। ईडी अब एक निष्पक्ष एजेंसी होने के बजाय भाजपा की पूरी तरह से सहयोगी बन गई है। केंद्र सरकार पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार को बदनाम करने और हमारे मुख्यमंत्री भगवंत मान और दूसरे सीनियर नेताओं को झूठे केस में फंसाने के लिए लगातार गंदी राजनीतिक साजिशें कर रही है। पंजाब सरकार की इमेज खराब करने के मकसद से बार-बार चिट्ठियां भेजने का ड्रामा किया जा रहा है।

बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कुलदीप धालीवाल ने हाल के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि 28 तारीख को पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) ने ईडी को स्पष्ट रूप से चिट्ठी लिखकर बताया था कि उनके भेजे गए दस्तावेज पढ़ने लायक नहीं हैं। पुलिस प्रशासन ने ईडी से निवेदन किया था कि 1 तारीख को पुलिस हेडक्वार्टर में एक जिम्मेदार ऑफिसर को भेजकर इन दस्तावेजों के बारे में सही जानकारी दी जाए। लेकिन तय तारीख पर ईडी का कोई भी ऑफिसर डॉक्यूमेंट्स लेकर पुलिस के पास नहीं पहुंचा। इससे साफ पता चलता है कि ईडी का मकसद जांच करना नहीं, बल्कि सिर्फ पंजाब सरकार और हमारे नेताओं को मीडिया में बदनाम करना है।

आप नेता ने कहा कि ईडी और भाजपा का एकमात्र मुख्य मकसद पंजाब में हो रहे अभूतपूर्व विकास कार्यों को रोकना और मुख्यमंत्री भगवंत मान जी और उनके परिवार को मानसिक रूप से परेशान करके बदनाम करना है। धालीवाल ने चेतावनी दी कि भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि उसने हमारे वरिष्ठ नेताओं को जेलों में बंद देखा है, लेकिन आम आदमी पार्टी चट्टान की तरह एकजुट रही। ईडी और सीबीआई कितनी भी कोशिश कर लें, पंजाब के लोग 2027 के चुनाव में फिर से आम आदमी पार्टी की सरकार बनाएंगे। हमारे नेताओं ने जेल जाना स्वीकार किया, लेकिन भाजपा की तानाशाही के आगे झुकना पसंद नहीं किया।

भाजपा को पंजाब का “दुश्मन नंबर 1” बताते हुए कुलदीप धालीवाल ने कहा कि इस पार्टी ने किसान आंदोलन के दौरान पंजाब के 750 से ज़्यादा किसानों को शहीद किया, पंजाब के विकास के फंड को रोका और राज्य के विकास में हर कदम पर रुकावटें डालीं। उन्होंने साफ किया कि भाजपा, ईडी की बैसाखी के सहारे आम आदमी पार्टी के योद्धाओं को डरा नहीं सकती। हम इन झूठे केस से डरने वाले नहीं हैं। जैसे दिल्ली में सच की जीत हुई और फर्जी केस सामने आए, वैसे ही पंजाब में भी सच की जीत होगी और भाजपा की साज़िशें पूरी तरह से सामने आएंगी।

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सबूत पेश करने के बजाय, ईडी पत्र, लीक और मीडिया रिपोर्ट के ज़रिए आप लीडरशिप को बदनाम कर रही है: अमन अरोड़ा

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रेसिडेंट और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बुधवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) पर निशाना साधते हुए कहा कि पक्के सबूत पेश करने के बजाय, सेंट्रल जांच एजेंसी बार-बार पत्र, मीडिया लीक और अस्पष्ट आरोपों के ज़रिए आप लीडरशिप को बदनाम कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस पहले ही एजेंसी से पूरे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा मांग चुकी है, लेकिन ईडी साफ और काम के सबूत देने में नाकाम रही है।

आप पंजाब के प्रदेश प्रधान अरोड़ा ने जोर देकर कहा कि भाजपा का मुख्य मकसद अराजकता पैदा करना, राजनीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई पंजाब सरकार ठीक से काम न कर सके। अमन अरोड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले सीबीआई की जो बुराई की थी, वह सही थी, और आज ईडी और सीबीआई “भाजपा के तोते” बन गए हैं।

मीडिया से बात करते हुए, आप पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, “ईडी की तरफ से पंजाब डीजीपी को बार-बार भेजे गए पत्र, जिसमें सेक्शन 66(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग वाला ताजा पत्र भी शामिल है, भाजपा की लीडरशिप वाली केंद्र सरकार की ‘बदतमीज़ी और हताशा’ दिखाते हैं। पंजाब पुलिस ने आरोपो के समर्थन में पूरे दस्तावेजी और इलेक्ट्रोनिक सबूत मांगने के लिए 28 अगस्त को ही ईडी को पत्र लिखा था।

आप प्रधान ने बताया कि पंजाब पुलिस ने ईडी को स्पष्ट तौर पर कहा है कि अब तक दी गई सामग्री अस्पष्ट है और रेड के दौरान ज़ब्त किए गए पूरे सबूत, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा दिया जाए ताकि सही जांच की जा सके। ईडी को 1 सितंबर को ज़रूरी सामग्री के साथ एक ऑफिसर भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन ऐसा कोई ऑफिसर पेश नहीं हुआ।”

सेंट्रल एजेंसियों के कामकाज पर तंज कसते हुए, अमन अरोड़ा ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को याद किया जिसमें उन्होंने सीबीआई को केंद्र सरकार का “तोता” कहा था। उन्होंने कहा, “आज मैं नरेंद्र मोदी की उस बात से 100% सहमत हूं। चाहे ईडी हो, सीबीआई हो या दूसरी सेंट्रल एजेंसियां, ये सभी भाजपा सरकार के तोतों की तरह काम कर रही हैं।”

अमन अरोड़ा ने कहा कि ईडी बिना किसी गड़बड़ी के साबित किए मीडिया में संजीव अरोड़ा, लाल चंद कटारूचक और आप नेताओं के नाम बिना कोई गलत काम साबित किए उछाल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुराने दोस्त गौरव धीर के ज़रिए उन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

मामले के फैक्ट्स बताते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि ऑल्ट प्रोजेक्ट से जुड़े चेंज ऑफ़ लैंड यूज़ (सीएलयू) के लिए छह बार मंज़ूरी दी गई, लेकिन आप सरकार के समय में एक भी सीएलयू नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “17 नवंबर 2000, 14 मई 2012, 25 जून 2013, 17 फरवरी 2018, 7 मार्च 2018 और 7 मार्च 2022 की मंज़ूरी पिछली कांग्रेस या अकाली-भाजपा सरकारों के समय दी गई थी।”

कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि लेआउट प्लान 2011 से 2025 के बीच में कई बार बदले गए, जिनमें से ज़्यादातर पिछली सरकारों के समय में किए गए। अमन अरोड़ा ने कहा, “अगर ईडी ​​को लगता है कि ये मंज़ूरी और बदलाव गैर-कानूनी थे, तो उसे पूरे घटनाक्रम की जांच करनी चाहिए, न कि सिर्फ़ आप सरकार को टारगेट करना चाहिए।”

अमन अरोड़ा ने डेवलपर्स के लिए 25% लैंड ओनरशिप पॉलिसी पर ईडी के फोकस पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी 2012 में अकाली-भाजपा सरकार के समय शुरू हुई थी और 2025 में आप सरकार ने इसमें सुधार किया। उन्होंने दावा किया, “आप सरकार ने पॉलिसी में बदलाव किया है और डेवलपर्स के लिए लाइसेंस और सीएलयू लेने के लिए 100% ज़मीन का मालिकाना हक होना ज़रूरी कर दिया है, जिससे पहले की गलत पॉलिसी ठीक हो गई है।”

अमन अरोड़ा ने मामले से जुड़ी एफआईआर पर ईडी के भरोसे पर भी सवाल उठाया और कहा कि संबंधित एफआईआर को हाई कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। उन्होंने पूछा, “अगर एफआईआर ही रद्द कर दी गई है, तो ईसीआईआर का क्या आधार है?”

पूरी और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि ईडी को मौजूदा सरकार को चुनकर निशाना बनाने के बजाय उस पूरे समय की जांच करनी चाहिए, जब ये मंज़ूरियां और पॉलिसी से जुड़े फ़ैसले लिए गए थे। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री सुखबीर सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह सरकारिया का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, “अगर आपकी जांच सच्ची है, तो सबकी जांच करें। 2012 के बाद जो भी जिम्मेदार रहे हैं, उन्हें बुलाएं, तभी सच्चाई सामने आएगी।”

गौरव धीर का नाम अपने साथ जोड़कर पॉलिटिकल नैरेटिव बनाने की कोशिशों को खारिज करते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि उनकी दोस्ती का किसी भी कथित गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “गौरव कल भी मेरा दोस्त था, आज भी मेरा दोस्त है और कल भी मेरा दोस्त रहेगा। अगर ईडी ​​के पास अमन अरोड़ा के खिलाफ कोई सबूत है, तो मुझ तक पहुंचने के लिए किसी और का नाम इस्तेमाल करने के बजाय, उन्हें सीधे अमन अरोड़ा से बात करनी चाहिए।”

अमन अरोड़ा ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से भी अपील की कि वे खबर छापने से पहले ईडी के लगाए गए आरोपों को खुद से वेरिफाई करें और संबंधित आप नेताओं का पक्ष लें। उन्होंने कहा कि बेबुनियाद आरोपों को बार-बार छापने से इमेज खराब हो रही है और इससे प्रभावित लोग बदनामी के लिए कानूनी कार्रवाई करने पर मजबूर हो सकते हैं। अमन अरोड़ा ने कहा, “यह जांच से भागने का मामला नहीं है। हम फैक्ट्स और सबूतों के आधार पर बिना किसी भेदभाव के जांच का स्वागत करते हैं। लेकिन सेलेक्टिव टारगेटिंग, मीडिया लीक और कैरेक्टर एसेसिनेशन की कोशिशें सबूत का विकल्प नहीं हो सकतीं।”

उन्होंने कहा कि भाजपा की बड़ी रणनीति भ्रम पैदा करना, राजनीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई सरकार ठीक से काम न कर सके। “पंजाब के लोग समझते हैं कि क्या हो रहा है। भाजपा के पास गवर्नेंस और डेवलपमेंट पर कोई जवाब नहीं है, इसलिए वह डर और अफरा-तफरी का माहौल बनाना चाहती है।”

अमन अरोड़ा ने दोहराया कि अगर ईडी ​​के पास पक्के सबूत हैं, तो उसे मांग के मुताबिक पंजाब पुलिस को सौंप देना चाहिए और कानून को अपना काम करने देना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर सबूत हैं, तो पेश करें। जांच ठीक से होने दें। लेकिन सेलेक्टिव नोटिस और अखबारों की हेडलाइन की यह पॉलिटिक्स नहीं चलेगी।”

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