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‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के 500 दिन पूरे, पंजाब को नशा-मुक्त बनाने का संकल्प हुआ और मजबूत: डॉ. बलबीर सिंह

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पंजाब को पूरी तरह नशा-मुक्त बनाने के लिए भगवंत मान सरकार की अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने आज कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा शुरू किया गया ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है। यह अभियान सख्त कानूनी कार्रवाई, उपचार एवं पुनर्वास के साथ-साथ सतत जागरूकता और रोकथाम की त्रिस्तरीय रणनीति के माध्यम से उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है।

अभियान के 500 दिन पूरे होने के अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की दूरदर्शी सोच के अनुरूप इस पहल की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य पंजाब के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना और राज्य के भविष्य को सुरक्षित बनाना है। उन्होंने कहा, “हमारे अभियान का मूल मंत्र ‘प्रोटेक्ट, हील एंड प्रिवेंट’ (सुरक्षा, उपचार और रोकथाम) है। यह केवल नशों के खिलाफ अभियान नहीं, बल्कि पंजाब की आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करने का मिशन है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और अरविंद केजरीवाल ने पंजाब को नशे के अभिशाप से मुक्त करने का जो वादा किया था, उसे हमारी सरकार पूरी ईमानदारी, दृढ़ इच्छाशक्ति और सुनियोजित रणनीति के साथ पूरा कर रही है।”

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, जेल और सामाजिक सुरक्षा विभागों को एक मंच पर लाकर समन्वित दृष्टिकोण अपनाया है। यह अभियान एक साथ तीन स्तरों पर कार्य कर रहा है—नशा तस्करों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, नशे की लत से जूझ रहे लोगों का उपचार एवं पुनर्वास तथा आने वाली पीढ़ियों को नशे से दूर रखने के लिए व्यापक रोकथाम।

अभियान की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि 1 मार्च 2025 को अभियान शुरू होने के बाद से अब तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 52,432 एफआईआर दर्ज की गई हैं। पूरे पंजाब में 73,300 से अधिक नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें बड़े नेटवर्क संचालित करने वाले 621 प्रमुख तस्कर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि भगवंत मान सरकार नशा नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि अभियान की सबसे बड़ी सफलता जनता का बढ़ता विश्वास और सक्रिय भागीदारी है। पिछले 500 दिनों में ‘सेफ पंजाब हेल्पलाइन’ (97791-00200) पर 46,342 सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनके आधार पर 22,960 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया। इससे स्पष्ट है कि लोगों का सरकार और कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

पिछली सरकारों की तुलना करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अकाली सरकार के 10 वर्षों के दौरान 2,817 किलोग्राम हेरोइन तथा कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों में 2,412 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी। इस प्रकार 15 वर्षों में कुल 5,229 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई, जबकि भगवंत सिंह मान सरकार ने मात्र चार वर्षों में 6,608 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है।

उन्होंने कहा कि ये आंकड़े साबित करते हैं कि ईमानदार नीयत और स्पष्ट नीति से ही ऐसे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। पंजाब ने एंटी-ड्रोन निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है और नशा तस्करी के विरुद्ध कार्रवाई को और तेज किया है।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार की कार्रवाई केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने किसी बड़े नशा तस्कर की संपत्ति जब्त नहीं की थी, जबकि वर्तमान सरकार ने 847 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर नशे के कारोबार से अर्जित अवैध संपत्तियों को ध्वस्त किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पंजाब में अपराध करके कोई भी बच नहीं सकेगा।

उन्होंने बताया कि पंजाब ने एनडीपीएस मामलों में 89 प्रतिशत की दोषसिद्धि दर हासिल की है, जो देश में सर्वाधिक दोषसिद्धि दरों में से एक है। यह सरकार द्वारा की गई जांच और कानूनी कार्रवाई की गुणवत्ता को दर्शाता है।

सरकार के पुनर्वास प्रयासों का उल्लेख करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि पंजाब ने नशा मुक्ति उपचार व्यवस्था का बड़े स्तर पर विस्तार किया है। वर्तमान में राज्य में 213 सरकारी एवं निजी नशा मुक्ति केंद्र, 90 पुनर्वास केंद्र तथा 547 आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओओएटी) क्लीनिक संचालित हैं। सभी सरकारी केंद्रों में उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि ओओएटी कार्यक्रम के तहत 10 लाख से अधिक लोगों का पंजीकरण किया गया है तथा अभियान शुरू होने के बाद 38,000 से अधिक मरीजों का सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में भर्ती कर उपचार किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम की धारा 64ए के अंतर्गत 10,917 लोगों को कानूनी कार्रवाई से छूट देकर उन्हें सजा के बजाय उपचार का अवसर प्रदान किया है, ताकि वे अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकें।

जेल सुधारों का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य की सभी 19 जेलों में ओओएटी सुविधा शुरू की गई है, जबकि 10 केंद्रीय जेलों में समर्पित नशा मुक्ति एवं वेलबीइंग क्लीनिक स्थापित किए गए हैं, ताकि नशे की समस्या से जूझ रहे कैदियों को उचित उपचार और पुनर्वास मिल सके।

नई पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ‘सूरमा–एंबेसडर ऑफ रिकवरी’ कार्यक्रम के अंतर्गत नशे से पूरी तरह उबर चुके लोग अब दूसरों को उपचार और नई जिंदगी की ओर प्रेरित कर रहे हैं। उनकी जीवन यात्रा हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम’ भी शुरू किया है, जो देश का पहला सरकारी फेलोशिप कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य प्रशिक्षित युवा पेशेवरों की भागीदारी के माध्यम से नशा रोकथाम के प्रयासों को और प्रभावी बनाना है।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार बच्चों और किशोरों में नशे की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दे रही है। शिक्षकों को ‘मेंटल हेल्थ फर्स्ट एड’ का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे नशे के शुरुआती संकेत पहचान सकें, विद्यार्थियों को उचित परामर्श दे सकें और उन्हें समय पर सहायता उपलब्ध करा सकें। स्कूलों में माइंडफुलनेस सत्र और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, क्योंकि रोकथाम की शुरुआत कक्षा से होती है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने नशा मुक्ति केंद्रों की क्षमता 1,500 बिस्तरों से बढ़ाकर 5,000 बिस्तर कर दी है। मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में काउंसलर तथा क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट नियुक्त किए गए हैं। इंजेक्शन के माध्यम से नशा करने वाले लोगों के लिए छह सरकारी अस्पतालों में लिक्विड मेथाडोन थेरेपी शुरू की गई है तथा दोबारा नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए सामुदायिक फॉलो-अप कार्यक्रम भी आरंभ किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल मरीज का उपचार करना नहीं, बल्कि उसे सम्मानपूर्वक समाज में पुनर्स्थापित करना भी है। ‘कम्युनिटी ब्रिज प्रोग्राम’ के माध्यम से जब मरीज अपने गांव लौटते हैं तो काउंसलर लगातार उनका मार्गदर्शन और सहयोग करते रहते हैं।

जनभागीदारी का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि 12,000 से अधिक ग्राम रक्षा समितियां, जिनमें 1.25 लाख से अधिक सदस्य शामिल हैं, जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं तथा नशा तस्करी की सूचना देकर कानून लागू करने वाली एजेंसियों की सहायता कर रही हैं। ‘पिंडां दा हाल एक्शन प्लान’ तथा राज्यव्यापी ई-रिक्शा जागरूकता अभियान ने भी लोगों की भागीदारी को और मजबूत किया है।

सीमा पार से हो रही नशा तस्करी पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी व्यवस्था और मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से लगती सीमा के कारण पंजाब को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। पंजाब सरकार ने एंटी-ड्रोन प्रणाली और कानून लागू करने की व्यवस्था को मजबूत किया है, लेकिन सीमा सुरक्षा केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। यदि आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जाए तो नशीले पदार्थ लेकर आने वाले ड्रोन निश्चित रूप से रोके जा सकते हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट तथा पंजाब के बाहर की जेलों से संचालित कथित आपराधिक नेटवर्क के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पंजाब पूरे देश की ओर से यह लड़ाई लड़ रहा है और उसे केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग की आवश्यकता है।

मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि नशों के खिलाफ लड़ाई केवल कानून लागू करने से नहीं जीती जा सकती। इसके लिए जनभागीदारी, संवेदनशीलता, पुनर्वास और युवाओं की सुरक्षा के प्रति सामूहिक संकल्प आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भगवंत सिंह मान सरकार पंजाब को पूर्णतः नशा-मुक्त बनाने तक इस मिशन को निरंतर जारी रखेगी।

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Politics

CM भगवंत सिंह मान द्वारा पराली जलाने को रोकने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज राज्य में पराली जलाने की प्रवृत्ति को और रोकने के लिए व्यापक सूचना और जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया, क्योंकि पंजाब सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण 2023 से 2025 तक ऐसी घटनाओं में पहले ही 86 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। अधिकारियों को इस अभियान को गांवों और ब्लॉकों तक और अधिक प्रभावी ढंग से ले जाने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि इन उपलब्धियों को मजबूत करने और पंजाब के पर्यावरण को बचाने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओज़.), समाजसेवियों, पंचायतों और किसानों की सक्रिय भागीदारी, बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया की पहुंच और मजबूत इन-सीटू तथा एक्स-सीटू (खेत में और खेत से बाहर) पराली प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।

पराली प्रबंधन की रणनीति से संबंधित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि इस वर्ष पंजाब में लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई है, जिससे 18.81 मिलियन टन पराली उत्पन्न होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार के भरपूर प्रयासों के कारण पंजाब में 2023 से 2025 तक पराली जलाने की घटनाओं में 86 प्रतिशत की कमी आई है। ये घटनाएं 2023 में 36,663 से घटकर 2024 में 10,909 और 2025 में और घटकर 5,114 रह गई हैं। हमें इसे और आगे बढ़ाना है और यह सुनिश्चित करना है कि इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में और भी कमी आए।”

जमीनी स्तर पर तीव्र अभियान की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “किसानों को पराली जलाने के नुकसानों के प्रति जागरूक करने के लिए गांव और ब्लॉक स्तर पर व्यापक सूचना और जागरूकता अभियान चलाया जाना चाहिए। प्रत्येक हितधारक को किसानों को पराली जलाने के स्थायी विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु मिलकर काम करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि किसानों को प्रेरित करने के प्रयासों को और मजबूत करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओज़.) और समाजसेवियों को इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “गैर-सरकारी संगठनों और समाजसेवियों को किसानों को प्रेरित करने के लिए साथ जोड़ा जाए। मशीनरी के प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक, सरपंचों के साथ बैठकें, शपथ ग्रहण समारोह और अन्य जागरूकता कार्यक्रम व्यापक स्तर पर करवाए जाएं ताकि यह संदेश जमीनी स्तर तक किसानों तक पहुंच सके।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जमीनी स्तर की गतिविधियों के पूरक के रूप में एक व्यापक डिजिटल और मल्टीमीडिया रणनीति अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, “रेडियो जिंगल्स, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, मोबाइल एस.एम.एस. और आउटडोर मीडिया को शामिल करते हुए विस्तृत डिजिटल योजना लागू की जानी चाहिए। पराली जलाने के दुष्प्रभावों और उपलब्ध प्रबंधन विकल्पों के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए सोशल मीडिया जागरूकता अभियान भी बड़े पैमाने पर चलाया जाना चाहिए।”

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों और ग्रामीण संस्थानों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रगतिशील किसानों, उत्कृष्ट प्रदर्शन वाली पंचायतों, पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसायटियों) और अन्य हितधारकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए। ऐसा सम्मान दूसरों को अच्छी प्रथाओं को अपनाने और पराली प्रबंधन को एक सामूहिक आंदोलन बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।”

उन्होंने इस रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी हितधारकों और जिलों के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “सभी हितधारकों और जिलों के बीच बेहतरीन समन्वय सुनिश्चित किया जाए ताकि पूरी योजना को सुचारू और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रत्येक विभाग और हितधारक को समन्वय में काम करना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने पराली के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन दोनों तरीकों के महत्व को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, “धान की पराली के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ मिल सके और पर्यावरण की भी सुरक्षा हो सके। हमारा उद्देश्य किसानों को पराली जलाने के व्यावहारिक और स्थायी विकल्प प्रदान करना होना चाहिए।”

बैठक में कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और हरदीप सिंह मुंडियां, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा, सचिव विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के.के. यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत, सचिव कृषि विभाग अर्शदीप सिंह थिंद और अन्य उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे।

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बिक्रम मजीठिया अपने रिकॉर्ड और कथित नशा तस्करी संबंधों पर सवालों के जवाब दें: कुलदीप सिंह धालीवाल

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शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा लगाए गए आरोपों का पलटवार करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि बिक्रम सिंह मजीठिया को राजनीतिक कीचड़ उछालना बंद करना चाहिए और पहले अपने रिकॉर्ड तथा नशा विवाद से जुड़े कथित संबंधों के बारे में उठ रहे गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए।

एक बयान में ‘आप’ पंजाब के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि जिस व्यक्ति पर बिक्रम सिंह मजीठिया आरोप लगा रहे हैं, उसने खुद एक वीडियो में साफ कहा है कि कोई वित्तीय लेन-देन नहीं हुआ। उसने न तो किसी को पैसे दिए हैं और न ही किसी से पैसे लिए हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपके पास कोई सबूत है तो महज आरोप लगाने की बजाय उसे पंजाब के लोगों के सामने रखो।”

‘आप’ पंजाब के मुख्य प्रवक्ता ने बिक्रम सिंह मजीठिया को मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी वाहनों के कथित इस्तेमाल के बारे में सवालों के जवाब देने के लिए कहा। उन्होंने कहा, “जब आप मंत्री थे, क्या आपकी सरकारी गाड़ियों के जरिए कथित नशे का लेन-देन होता था? पंजाब के लोगों को इस बारे में स्पष्ट जवाब दो।”

उन्होंने बिक्रम सिंह मजीठिया के उन व्यक्तियों के साथ कथित संबंधों पर भी सवाल उठाए, जिनके नाम नशा तस्करी की जांच के दौरान सामने आए थे। उन्होंने कहा, “जांच में नशा तस्करी से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। क्या ऐसे कथित नशा तस्कर आपके साथ नहीं जुड़े हुए थे या आपके निवास पर नहीं ठहरते थे? अगर आप दूसरों से जवाब मांग रहे हैं, तो आपको खुद भी इन सवालों का जवाब देना होगा।”

दोषी नशा तस्कर जगदीश भोला का हवाला देते हुए कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा, “नशा तस्करी के मामले में जेल में बंद जगदीश भोला ने सार्वजनिक तौर पर आपका नाम लिया था और आप पर गंभीर आरोप लगाए थे। क्या उसने आपका नाम लिया था या नहीं? उन आरोपों पर आपकी क्या प्रतिक्रिया थी, और आज आपका स्पष्ट जवाब क्या है?”

कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा, “नशे की लानत ने पंजाब की जवानी को तबाह कर दिया है। जिन्होंने पंजाब की नौजवान पीढ़ी के भविष्य को बर्बाद करने में योगदान दिया, वे महज दूसरों पर उंगलियां उठाकर जवाबदेही से नहीं बच सकते। नशे से जुड़े गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हर व्यक्ति को जवाब देना होगा, चाहे उसकी पार्टी या पद कोई भी हो।”

उन्होंने बिक्रम सिंह मजीठिया से उनकी वित्तीय स्थिति और पंजाब के बढ़ रहे कर्ज के बारे में सवाल करते हुए कहा कि वह सार्वजनिक जीवन में आने के बाद की अपनी निजी संपत्ति और देनदारियों का पारदर्शी हिसाब-किताब दें। “जब आप सत्ता में आए थे, तब आपका निजी कर्ज और संपत्ति कितनी थी? आज वह कहां खड़ी है? और उसी अवधि के दौरान पंजाब का कर्ज कितना बढ़ा? ये जायज सवाल हैं और पंजाब के लोगों को तथ्य जानने का पूरा हक है।”

कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा, “पंजाब बिना सबूतों के राजनीतिक आरोप नहीं चाहता। पंजाब तथ्य, दस्तावेज और हिसाब-किताब चाहता है। अगर बिक्रम सिंह मजीठिया दूसरों से जवाब चाहते हैं, तो उन्हें पहले अपने रिकॉर्ड के बारे में उठाए जा रहे सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

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1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने वाले भाजपा नेताओं के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने पूरे पंजाब में किया विरोध प्रदर्शन

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब ने मंगलवार को लुधियाना, जालंधर, अमृतसर और बठिंडा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन सांसद रामवीर बिधूड़ी, योगेंद्र चंदोलिया और कमलजीत सेहरावत के 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार की याद में श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा सांसदों के शामिल होने की कड़ी निंदा करते हुए आप नेताओं ने कहा कि 1984 का नरसंहार सिख परिवारों के लिए एक ऐसा ज़ख्म है जो भरा नहीं है और सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने से सिख समुदाय की भावनाओं को गहरा ठेस पहुंची है।

आप ने मांग की कि भाजपा अपने तीनों सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करे। पार्टी ने सवाल किया कि जिम्मेदार सरकारी पदों पर बैठे चुने हुए प्रतिनिधि 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी व्यक्ति के घर जाकर उसे श्रद्धांजलि कैसे दे सकते हैं?

अमृतसर में आप कार्यकर्ताओं ने राज्यसभा सांसद तरुण चुघ के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और उनके घर को घेरने की कोशिश की। पुलिस ने भारी बैरिकेड्स और सुरक्षा बल तैनात किए थे, ताकि प्रदर्शन करने वाले घर तक न पहुंच सकें।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आप विधायक जीवन जोत कौर ने कहा, “1984 का नरसंहार सिख परिवारों के लिए एक गहरा और कभी न भरने वाला घाव है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने बार-बार पंजाब और सिख समुदाय के हितों के खिलाफ काम किया है। भाजपा नेता ऐसे व्यक्ति को कैसे सम्मान दे सकते हैं जिसका नाम 1984 के नरसंहार से जुड़ा हो?”

जीवन जोत कौर ने आगे कहा, “सज्जन कुमार की याद में भाजपा नेताओं की मौजूदगी पीड़ितों के परिवारों के लिए बहुत दुखदायी है जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, वे आज भी उस दुखद घटना के दर्द से पीड़ित हैं और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।”

जालंधर में आप विधायक बलकार सिंह ने कहा, “1984 के घल्लूघारा नरसंहार ने सिख समुदाय के मन में बहुत दर्दनाक यादें छोड़ी हैं। बेगुनाह सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी गई और उनके परिवार दशकों से पीड़ित हैं। ऐसे समय में, सज्जन कुमार की याद में भाजपा के सीनियर नेताओं की मौजूदगी दिखाती है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के मुद्दे पर भाजपा का क्या स्टैंड है।”

आप विधायक ने कहा, “भाजपा और शिरोमणि अकाली दल को पंजाब के ज़ख्मों पर राजनीति करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के परिवारों के दर्द का इस्तेमाल राजनीतिक फ़ायदे के लिए नहीं किया जा सकता।”

लुधियाना में आप नेताओं, विधायक, पार्षदों, चेयरमैन, डायरेक्टरों और पार्टी के पदाधिकारियों ने सज्जन कुमार के अंतिम संस्कार/श्रद्धांजलि समारोह में भाजपा के तीन सांसदs के शामिल होने का विरोध किया।

लुधियाना ईस्ट से विधायक दलजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा, “पंजाब गुरुओं, संतों और शहीदों की धरती है। पंजाबी 1984 के नरसंहार से प्रभावित सिख परिवारों के दर्द को चोट पहुंचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

दलजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा, “सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने में भाजपा सांसदों के शामिल होने से पीड़ित परिवारों का दिल और टूट गया है। भाजपा और कांग्रेस ने पंजाब के खिलाफ राजनीतिक रूप से हाथ मिला लिया है, लेकिन पंजाब के लोग ऐसी राजनीति कभी स्वीकार नहीं करेंगे।”

बठिंडा में, आप कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और भाजपा के खिलाफ जोरदार नारे लगाए, पार्टी पर 1984 के नरसंहार से जुड़े लोगों के करीब होने का आरोप लगाया।

आप कार्यकर्ताओं ने मांग की कि भाजपा रामवीर बिधूड़ी, योगेंद्र चंदोलिया और कमलजीत सेहरावत के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करे।

आप नेताओं ने कहा, “1984 के सिख विरोधी दंगे हजारों परिवारों के लिए अब भी ऐसे घाव हैं जो भरे नहीं हैं।” “आम आदमी पार्टी पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय और सम्मान के लिए अपनी आवाज़ उठाती रहेगी। उनके दर्द और भावनाओं को नज़रअंदाज़ करने की किसी भी कोशिश का पूरी तरह से विरोध किया जाएगा।”

आप पंजाब के नेताओं ने दोहराया कि पार्टी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहेगी और न्याय, दया और जवाबदेही के लिए लड़ती रहेगी।

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