Uttrakhand
मानवता: Uttarakhand का पहला मनोचिकित्सा और नशामुक्ति केंद्र
मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति जैसे संवेदनशील विषयों पर Uttarakhand में एक नई दिशा देने वाला केंद्र है “मानवता”। देहरादून स्थित यह Nasha Mukti Kendra in Dehradun मानसिक स्वास्थ्य और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए एक आशा की किरण है। इसकी स्थापना वर्ष 2000 में प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. विनीत कुमार गुप्ता ने की थी। बाद में इस प्रयास को और मजबूती देने के लिए डॉ. ध्रुव गुप्ता ने भी मानवता के साथ जुड़कर इसे एक नए आयाम तक पहुँचाया।
मानवता का उद्देश्य
यह नशामुक्ति केंद्र मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न समस्याओं और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को सहानुभूतिपूर्ण और विशेषज्ञता से युक्त उपचार प्रदान करता है। मानवता में हर मरीज को व्यक्तिगत देखभाल और उसकी समस्या के अनुसार विशेष उपचार दिया जाता है।
विशेषताएँ जो मानवता को अलग बनाती हैं
मनोचिकित्सकों द्वारा संचालित: यह उत्तराखंड का पहला ऐसा Nasha Mukti Kendra in Dehradun है, जिसे अनुभवी और विशेषज्ञ मनोचिकित्सक चलाते हैं।
व्यक्तिगत और सहानुभूतिपूर्ण उपचार: मानवता का मुख्य उद्देश्य मरीज की संपूर्ण मानसिक और शारीरिक सेहत में सुधार लाना है।
प्रशिक्षित टीम: यहां पर चिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, और अन्य विशेषज्ञों की एक टीम है, जो मरीजों की समस्याओं को गहराई से समझकर उनका उपचार करती है।
इन्होस्पिटल केयर (Inpatient Care): यह केंद्र मरीजों को विशेष देखभाल के तहत रहने की सुविधा प्रदान करता है, जिससे उनकी शीघ्र और स्थायी रूप से सुधार हो सके।
नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य में अग्रणी
मानवता Nasha Mukti Kendra in Dehradun में नशे की लत से जूझ रहे लोगों को नया जीवन देने के लिए विशेष सेवाएं प्रदान की जाती हैं। यह केंद्र मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विकारों जैसे डिप्रेशन, एंग्जायटी, सिज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर और नशे की लत के उपचार में विशेषज्ञता रखता है।
मानवता का संदेश
हमारे लिए हर मरीज एक परिवार का हिस्सा है। हम उनके साथ खड़े हैं और उन्हें एक नई, सकारात्मक दिशा देने के लिए प्रयासरत हैं।
अगर आप या आपका कोई अपना मानसिक स्वास्थ्य या नशे की लत से जूझ रहा है, तो मानवता नशामुक्ति केंद्र की सेवाओं का लाभ उठाएं। यह केंद्र आपको बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने में मदद करेगा।
वेबसाइट: https://maanavta.in
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड
Uttrakhand
Uttarakhand के 4Districts में Landslide का High Alert Issued, भारी बारिश की चेतावनी के बाद Administration Alert पर
उत्तराखंड के चार जिलों—टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली—में भारी बारिश के चलते भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। इसको देखते हुए राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने 7 और 8 जुलाई के लिए इन जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
यह चेतावनी भारतीय मौसम विभाग (IMD) और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की भविष्यवाणी के आधार पर दी गई है, जिसमें इन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके चलते पहाड़ों में ढलानें खिसकने (slope failure) और सड़कें बंद होने की आशंका जताई जा रही है।
इन इलाकों में खतरे की आशंका
चेतावनी में बताया गया है कि चमोली, रुद्रप्रयाग, उखीमठ, घनसाली, नरेंद्रनगर, धनोल्टी, डुंडा और चिन्यालीसौड़ जैसे उपमंडलों में भूस्खलन हो सकता है।
प्रशासन ने उठाए कड़े कदम
SEOC ने सभी जिलाधिकारियों और आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे सतर्कता के सख्त उपाय लागू करें। इनमें शामिल हैं:
- सभी प्रशासनिक स्तर पर हाई अलर्ट की स्थिति बनाए रखना
- वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करना
- तुरंत रेस्क्यू और राहत टीमों को तैनात करना
- सभी इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) के नोडल अधिकारियों को तैयार रहने को कहा गया है
ज़रूरी सेवाओं की व्यवस्था
- राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना या किसी भी सड़क पर यदि मलबा आता है तो तुरंत साफ करने के निर्देश दिए गए हैं
- गांवों और कस्बों के अधिकारी, जैसे पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत सचिव अपने क्षेत्रों में मौजूद रहें
- पुलिस चौकी और थाने आपदा से निपटने के उपकरण और wireless communication systems से लैस रहें
ज़रूरी सामान साथ रखने की सलाह
सभी अधिकारियों को कहा गया है कि वे अपनी गाड़ियों में raincoat, torch, helmet, और emergency kit ज़रूर रखें। इन दिनों में सरकारी कर्मचारी अपने मोबाइल स्विच ऑफ नहीं करेंगे।
स्कूलों और पर्यटकों के लिए निर्देश
- स्कूलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके
- हाई हिमालयन इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है
- तेज़ बारिश के समय, वाहन और पैदल आवाजाही पूरी तरह से बंद रखने को कहा गया है
मीडिया के ज़रिए जागरूकता
सभी जिला सूचना अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रिंट और विज़ुअल मीडिया के ज़रिए आम जनता तक यह चेतावनी पहुंचाएं और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील करें।
इमरजेंसी की तैयारी
जहां भी भूस्खलन की संभावना है, वहां चेतावनी बोर्ड, earthmovers और excavators जैसी भारी मशीनें तैनात रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी आपदा से जुड़ी जानकारी को तुरंत राज्य कंट्रोल रूम तक पहुंचाने को कहा गया है।
सारांश:
उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते चार जिलों में भूस्खलन की आशंका गहराई है। प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट पर है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे सतर्क रहें, अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें।
अगर आप प्रभावित इलाकों में हैं, तो सरकारी अपडेट्स पर ध्यान दें और किसी भी आपातकाल में नज़दीकी अधिकारियों से संपर्क करें।
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Helicopter Crash में 7 लोगों की मौत, Char Dham की सभीHeli Services Suspended, Government ने जांच के दिए Orders
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। केदारनाथ धाम से गुप्तकाशी जा रहा एक हेलिकॉप्टर शनिवार सुबह गौरीकुंड के पास जंगलों में क्रैश हो गया। इस हादसे में पायलट समेत कुल 7 लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों में एक 10 साल की बच्ची भी शामिल है।
हादसे में जान गंवाने वालों के नाम:
- राजवीर – पायलट
- विक्रम रावत
- विनोद
- त्रिश्टि सिंह
- राजकुमा
- श्रद्धा
- राशी – उम्र 10 साल
कैसे हुआ हादसा?
आर्यन एविएशन कंपनी का यह हेलिकॉप्टर सुबह 5:17 बजे गुप्तकाशी के लिए रवाना हुआ था। यह हेलिकॉप्टर केदारनाथ से यात्रियों को लेकर लौट रहा था, लेकिन रास्ते में मौसम बिगड़ गया। तेज़ कोहरा और खराब मौसम की वजह से हेलिकॉप्टर अपना रास्ता भटक गया और गौरीकुंड के पास एक जंगल में गिरकर क्रैश हो गया।
स्थानीय लोगों और प्रशासन ने हादसे की जानकारी मिलते ही राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। मौके पर SDRF और पुलिस की टीम भी पहुंची, लेकिन हेलिकॉप्टर में सवार किसी की जान नहीं बचाई जा सकी।
हेली सेवाएं बंद, जांच शुरू
इस हादसे के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। चारधाम में चल रही सभी हेलिकॉप्टर सेवाओं को अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। यह फैसला UCADA (उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी) और DGCA (डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन) ने मिलकर लिया है।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख, दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर दुख जताते हुए X (पहले ट्विटर) पर लिखा:
“रुद्रप्रयाग में हेलिकॉप्टर क्रैश की दुखद खबर मिली है। SDRF, स्थानीय प्रशासन और अन्य टीमें मौके पर राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं।”
मुख्यमंत्री ने तुरंत मुख्य सचिव को एक तकनीकी समिति बनाने के निर्देश दिए हैं। यह समिति हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा, तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच करेगी और नई SOP (Standard Operating Procedure) तैयार करेगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों।
साथ ही, पहले से बनी हाई-लेवल जांच समिति को इस हादसे की भी जांच सौंप दी गई है। यह कमेटी यह देखेगी कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं हुई और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश करेगी।
क्या है आगे का रास्ता?
चारधाम यात्रा के दौरान हेलिकॉप्टर सेवाओं का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है। लेकिन हर साल मौसम की मार और तकनीकी खामियों के कारण इस तरह के हादसे चिंता का विषय बन चुके हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस बार कितनी पारदर्शिता और सख्ती से जांच को अंजाम देती हैं और यात्रियों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी, 4 मई को खुलेंगे Badrinath धाम के कपाट
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित Badrinath धाम के पवित्र द्वार 4 मई को सुबह 6 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलेंगे। बसंत पंचमी पर नरेंद्र नगर स्थित पूर्वी टिहरी राज दरबार में विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट खुलने का समय तय किया गया। गणेश पंचांग और चौकी पूजा के बाद राज पुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उन्याल ने Badrinath धाम के कपाट खोलने की तिथि तय की।
इस दौरान टिहरी के पूर्व महाराजा मानवेंद्र शाह, लोकसभा सांसद माला राज लक्ष्मी शाह, Badrinath के मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूदरी, Badrinath केदारनाथ धाम समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय थपलियाल समेत कई अधिकारी मौजूद थे।
17 नवंबर 2024 को पांच पूजाओं के बाद Badrinath के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। पिछले वर्ष उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के दौरान अकेले Badrinath धाम में 14 लाख 25 हजार से अधिक लोगों ने दर्शन किये।
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