Punjab
पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 6 महीनों में 914 मरीज़ों को ₹4.15 करोड़ का कैशलेस स्ट्रोक उपचार प्रदान किया गया
स्ट्रोक किसी परिवार के जीवन में आने से पहले दस्तक नहीं देता। एक पल पहले व्यक्ति सामान्य रूप से चल-फिर रहा होता है, बात कर रहा होता है और अपना काम कर रहा होता है; लेकिन अगले ही पल किसी धमनी में रुकावट या मस्तिष्क के ब्लड वेसल फटने से, सामान्य दिन एक गंभीर चिकित्सीय आपातकाल में बदल सकता है। पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के अंतर्गत स्ट्रोक उपचार से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि राज्य की स्वास्थ्य योजना सामान्य स्ट्रोक प्रबंधन से लेकर एडवांस्ड इमेजिंग , इंटेंसिव केयर और लंबे समय तक चलने वाले उपचार तक मस्तिष्क संबंधी आपात स्थितियों में मरीज़ों की सहायता कर रही है।
स्ट्रोक, जिसे अक्सर ‘ब्रेन अटैक’ कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति रुक जाती है या कोई ब्लड वेसल फट जाता है। ऑक्सीजन की कमी होने पर मस्तिष्क की कोशिकाएँ मरने लगती हैं। हाई ब्लड प्रेशर , डायबिटीज , हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली इसकी प्रमुख ज़ोखिम कारकों में शामिल हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, स्ट्रोक आज भी दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है, जिनमें से बड़ी संख्या ऐसे ज़ोखिम कारकों से जुड़ी है जिन्हें रोका जा सकता है। वहीं, अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का भी कहना है कि समय पर उपचार से मरीज़ की रिकवरी बेहतर हो सकती है, जबकि ब्लड प्रेशर ,डायबिटीज और जीवनशैली से जुड़े ज़ोखिमों पर बेहतर नियंत्रण से स्ट्रोक की संभावना को कम किया जा सकता है।
स्ट्रोक का इलाज काफी महँगा हो सकता है, जिससे अनेक परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब के हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह महीनों में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 914 स्ट्रोक मरीज़ों का ₹4.15 करोड़ की लागत से उपचार किया गया। इनमें एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मामले दर्ज किए गए, जिन पर ₹14.27 लाख का सबसे अधिक ख़र्च आया।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए) के रिकॉर्ड के अनुसार, एक्यूट स्ट्रोक और एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक श्रेणियों में सबसे अधिक मरीज़ों का इलाज हुआ, जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक के मामले अपेक्षाकृत कम थे, लेकिन प्रति मरीज़ उपचार लागत अधिक रही। कुल ख़र्च का बड़ा हिस्सा सीटी/एमआरआई जाँच तथा ट्रेकियोस्टॉमी और रक्त चढ़ाने जैसी अतिरिक्त चिकित्सा प्रक्रियाओं वाले मामलों पर हुआ।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाने का अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार आर्थिक चिंता के कारण इलाज में देरी न करे। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज़ों को आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपचार मिले। स्ट्रोक जैसी आपात स्थितियों में हर मिनट महत्त्वपूर्ण होता है और आर्थिक सहायता इलाज में होने वाली देरी और जीवन बचाने के बीच का अंतर साबित हो सकती है।”
सोबती न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल तथा मोहंदाई ओसवाल हॉस्पिटल, लुधियाना के सीनियर कंसलटेंट न्यूरोसर्जन एवं स्पाइन सर्जन डॉ. हरमन सोबती ने कहा, “स्ट्रोक एक चिकित्सीय आपात स्थिति है, जिसमें समय पर जाँच और उपचार मरीज़ के भविष्य का फैसला कर सकते हैं। आधुनिक इमेजिंग, गहन निगरानी और समय पर इलाज से उपचार के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।” उन्होंने कहा कि जागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। डॉ. सोबती ने आगे कहा, “लोगों को अचानक शरीर के किसी हिस्से में कमज़ोरी, चेहरे का एक ओर झुक जाना, बोलने में कठिनाई जैसे चेतावनी संकेतों को पहचानकर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।”
डॉ. हरमन सोबती के अनुसार, उपचार किए गए मामलों में इस्कीमिक स्ट्रोक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है और सीटी स्कैन तथा एमआरआई जैसी उन्नत जाँच तकनीकें स्ट्रोक मैनेजमेंट का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। उन्होंने कहा, “जटिल स्ट्रोक के मामलों में परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ सकता है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री सेहत योजना एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षा कवच का काम करती है।” हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है और ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण, डायबिटीज मैनेजमेंट तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्ट्रोक के ज़ोख़िम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्ट्रोक के आंकड़ों से सामने आई अहम बातें-
स्ट्रोक तेज़ी से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है, जिसके लिए तुरंत आपातकालीन उपचार की आवश्यकता है।
- उपचार किए गए मामलों में इस्कीमिक स्ट्रोक की हिस्सेदारी सबसे अधिक है।
- सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी उन्नत जाँच तकनीकें स्ट्रोक मैनेजमेंट का प्रमुख आधार बन रही हैं।
- जटिल स्ट्रोक के मामलों से परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
- स्वास्थ्य योजनाएँ अचानक आने वाली चिकित्सीय आपात स्थितियों में परिवारों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य कर सकती हैं।
- ब्लड प्रेशर नियंत्रण, डायबिटीज का उचित प्रबंधन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना स्ट्रोक से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
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सबूत पेश करने के बजाय, ईडी पत्र, लीक और मीडिया रिपोर्ट के ज़रिए आप लीडरशिप को बदनाम कर रही है: अमन अरोड़ा
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के प्रेसिडेंट और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बुधवार को एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) पर निशाना साधते हुए कहा कि पक्के सबूत पेश करने के बजाय, सेंट्रल जांच एजेंसी बार-बार पत्र, मीडिया लीक और अस्पष्ट आरोपों के ज़रिए आप लीडरशिप को बदनाम कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस पहले ही एजेंसी से पूरे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा मांग चुकी है, लेकिन ईडी साफ और काम के सबूत देने में नाकाम रही है।
आप पंजाब के प्रदेश प्रधान अरोड़ा ने जोर देकर कहा कि भाजपा का मुख्य मकसद अराजकता पैदा करना, राजनीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई पंजाब सरकार ठीक से काम न कर सके। अमन अरोड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले सीबीआई की जो बुराई की थी, वह सही थी, और आज ईडी और सीबीआई “भाजपा के तोते” बन गए हैं।
मीडिया से बात करते हुए, आप पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, “ईडी की तरफ से पंजाब डीजीपी को बार-बार भेजे गए पत्र, जिसमें सेक्शन 66(2) के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग वाला ताजा पत्र भी शामिल है, भाजपा की लीडरशिप वाली केंद्र सरकार की ‘बदतमीज़ी और हताशा’ दिखाते हैं। पंजाब पुलिस ने आरोपो के समर्थन में पूरे दस्तावेजी और इलेक्ट्रोनिक सबूत मांगने के लिए 28 अगस्त को ही ईडी को पत्र लिखा था।
आप प्रधान ने बताया कि पंजाब पुलिस ने ईडी को स्पष्ट तौर पर कहा है कि अब तक दी गई सामग्री अस्पष्ट है और रेड के दौरान ज़ब्त किए गए पूरे सबूत, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा दिया जाए ताकि सही जांच की जा सके। ईडी को 1 सितंबर को ज़रूरी सामग्री के साथ एक ऑफिसर भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन ऐसा कोई ऑफिसर पेश नहीं हुआ।”
सेंट्रल एजेंसियों के कामकाज पर तंज कसते हुए, अमन अरोड़ा ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को याद किया जिसमें उन्होंने सीबीआई को केंद्र सरकार का “तोता” कहा था। उन्होंने कहा, “आज मैं नरेंद्र मोदी की उस बात से 100% सहमत हूं। चाहे ईडी हो, सीबीआई हो या दूसरी सेंट्रल एजेंसियां, ये सभी भाजपा सरकार के तोतों की तरह काम कर रही हैं।”
अमन अरोड़ा ने कहा कि ईडी बिना किसी गड़बड़ी के साबित किए मीडिया में संजीव अरोड़ा, लाल चंद कटारूचक और आप नेताओं के नाम बिना कोई गलत काम साबित किए उछाल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पुराने दोस्त गौरव धीर के ज़रिए उन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
मामले के फैक्ट्स बताते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि ऑल्ट प्रोजेक्ट से जुड़े चेंज ऑफ़ लैंड यूज़ (सीएलयू) के लिए छह बार मंज़ूरी दी गई, लेकिन आप सरकार के समय में एक भी सीएलयू नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, “17 नवंबर 2000, 14 मई 2012, 25 जून 2013, 17 फरवरी 2018, 7 मार्च 2018 और 7 मार्च 2022 की मंज़ूरी पिछली कांग्रेस या अकाली-भाजपा सरकारों के समय दी गई थी।”
कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि लेआउट प्लान 2011 से 2025 के बीच में कई बार बदले गए, जिनमें से ज़्यादातर पिछली सरकारों के समय में किए गए। अमन अरोड़ा ने कहा, “अगर ईडी को लगता है कि ये मंज़ूरी और बदलाव गैर-कानूनी थे, तो उसे पूरे घटनाक्रम की जांच करनी चाहिए, न कि सिर्फ़ आप सरकार को टारगेट करना चाहिए।”
अमन अरोड़ा ने डेवलपर्स के लिए 25% लैंड ओनरशिप पॉलिसी पर ईडी के फोकस पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी 2012 में अकाली-भाजपा सरकार के समय शुरू हुई थी और 2025 में आप सरकार ने इसमें सुधार किया। उन्होंने दावा किया, “आप सरकार ने पॉलिसी में बदलाव किया है और डेवलपर्स के लिए लाइसेंस और सीएलयू लेने के लिए 100% ज़मीन का मालिकाना हक होना ज़रूरी कर दिया है, जिससे पहले की गलत पॉलिसी ठीक हो गई है।”
अमन अरोड़ा ने मामले से जुड़ी एफआईआर पर ईडी के भरोसे पर भी सवाल उठाया और कहा कि संबंधित एफआईआर को हाई कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। उन्होंने पूछा, “अगर एफआईआर ही रद्द कर दी गई है, तो ईसीआईआर का क्या आधार है?”
पूरी और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि ईडी को मौजूदा सरकार को चुनकर निशाना बनाने के बजाय उस पूरे समय की जांच करनी चाहिए, जब ये मंज़ूरियां और पॉलिसी से जुड़े फ़ैसले लिए गए थे। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्री सुखबीर सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह सरकारिया का नाम लेते हुए उन्होंने कहा, “अगर आपकी जांच सच्ची है, तो सबकी जांच करें। 2012 के बाद जो भी जिम्मेदार रहे हैं, उन्हें बुलाएं, तभी सच्चाई सामने आएगी।”
गौरव धीर का नाम अपने साथ जोड़कर पॉलिटिकल नैरेटिव बनाने की कोशिशों को खारिज करते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि उनकी दोस्ती का किसी भी कथित गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, “गौरव कल भी मेरा दोस्त था, आज भी मेरा दोस्त है और कल भी मेरा दोस्त रहेगा। अगर ईडी के पास अमन अरोड़ा के खिलाफ कोई सबूत है, तो मुझ तक पहुंचने के लिए किसी और का नाम इस्तेमाल करने के बजाय, उन्हें सीधे अमन अरोड़ा से बात करनी चाहिए।”
अमन अरोड़ा ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से भी अपील की कि वे खबर छापने से पहले ईडी के लगाए गए आरोपों को खुद से वेरिफाई करें और संबंधित आप नेताओं का पक्ष लें। उन्होंने कहा कि बेबुनियाद आरोपों को बार-बार छापने से इमेज खराब हो रही है और इससे प्रभावित लोग बदनामी के लिए कानूनी कार्रवाई करने पर मजबूर हो सकते हैं। अमन अरोड़ा ने कहा, “यह जांच से भागने का मामला नहीं है। हम फैक्ट्स और सबूतों के आधार पर बिना किसी भेदभाव के जांच का स्वागत करते हैं। लेकिन सेलेक्टिव टारगेटिंग, मीडिया लीक और कैरेक्टर एसेसिनेशन की कोशिशें सबूत का विकल्प नहीं हो सकतीं।”
उन्होंने कहा कि भाजपा की बड़ी रणनीति भ्रम पैदा करना, राजनीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई सरकार ठीक से काम न कर सके। “पंजाब के लोग समझते हैं कि क्या हो रहा है। भाजपा के पास गवर्नेंस और डेवलपमेंट पर कोई जवाब नहीं है, इसलिए वह डर और अफरा-तफरी का माहौल बनाना चाहती है।”
अमन अरोड़ा ने दोहराया कि अगर ईडी के पास पक्के सबूत हैं, तो उसे मांग के मुताबिक पंजाब पुलिस को सौंप देना चाहिए और कानून को अपना काम करने देना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर सबूत हैं, तो पेश करें। जांच ठीक से होने दें। लेकिन सेलेक्टिव नोटिस और अखबारों की हेडलाइन की यह पॉलिटिक्स नहीं चलेगी।”
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DA-DR पर पंजाब सरकार का बड़ा कदम, हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
पंजाब सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) से जुड़े मामले में बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के 3 अगस्त के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सरकार की ओर से इस मामले में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में पंजाब सरकार ने कहा है कि वह राज्य के कर्मचारियों को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर टेक-होम सैलरी सुनिश्चित करने के लिए जरूरत के मुताबिक DA बढ़ाने को तैयार है। हालांकि, सरकार ने केंद्र सरकार के बराबर उसी प्रतिशत की DA दर लागू करने पर आपत्ति जताई है।
पंजाब सरकार का तर्क है कि राज्य में कई पदों पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में पहले ही अधिक है। ऐसे में सिर्फ DA का प्रतिशत एक जैसा कर देने से दोनों वर्गों के कर्मचारियों के बीच वास्तविक समानता नहीं होगी।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सात अलग-अलग कर्मचारी श्रेणियों से जुड़े आंकड़े भी पेश किए हैं। सरकार के मुताबिक, इनमें से पांच श्रेणियों में 42 प्रतिशत DA दिए जाने के बावजूद पंजाब के कर्मचारियों की कुल सैलरी केंद्रीय कर्मचारियों से ज्यादा बनती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह कर्मचारियों के बकाया भुगतान से पीछे नहीं हट रही है। पंजाब सरकार के अनुसार, 13 फरवरी 2025 को मंजूर की गई लिक्विडेशन योजना के तहत कर्मचारियों की बकाया राशि का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।
पंजाब सरकार ने अपनी याचिका में आर्थिक बोझ का भी हवाला दिया है। सरकार का कहना है कि अगर केंद्र सरकार की DA दर को उसी प्रतिशत के आधार पर पंजाब में लागू किया जाता है तो राज्य के खजाने पर हर साल करीब 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
सरकार के मुताबिक, पंजाब में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन पर पहले ही राज्य की राजस्व प्राप्तियों का लगभग 51 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो रहा है। ऐसे में DA को लेकर लिया गया कोई भी फैसला राज्य की वित्तीय स्थिति पर सीधा असर डाल सकता है।
अब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही सरकार ने मौजूदा भुगतान योजना को जारी रखने की अनुमति देने की भी अपील की है।
अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर कर्मचारियों और पंजाब सरकार, दोनों की नजरें टिकी हैं। फैसला आने के बाद राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के DA-DR से जुड़े भुगतान पर इसका असर पड़ सकता है।
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‘Digi Punjab’ पोर्टल लॉन्च, अब एक ही जगह मिलेंगी 300+ सरकारी सेवाएं
पंजाब के लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत देने के लिए पंजाब सरकार ने डिजिटल क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने आज ‘Digi.Punjab.gov.in’ पोर्टल लॉन्च किया। इस पोर्टल के जरिए अब अलग-अलग सरकारी विभागों की सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।
सरकार के मुताबिक, पहले चरण में इस पोर्टल पर 12 अलग-अलग विभागों की 300 से ज्यादा सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसका मकसद सरकारी सेवाओं की प्रक्रिया को आसान, तेज और पारदर्शी बनाना है। अब लोगों को हर सेवा के लिए अलग-अलग सरकारी वेबसाइट पर जाने या बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
‘Digi Punjab’ पोर्टल पर लोग जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, विवाह पंजीकरण, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसी जरूरी सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा पुलिस वेरिफिकेशन, संपत्ति हस्तांतरण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और पानी के कनेक्शन से जुड़ी सेवाएं भी ऑनलाइन उपलब्ध होंगी।
इसके साथ ही लेबर वेलफेयर स्कीमों और कुछ अन्य जरूरी सरकारी सेवाओं का लाभ भी इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से लिया जा सकेगा। सरकार की योजना आने वाले समय में इस पोर्टल पर 800 से ज्यादा सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की है।
इस पोर्टल की एक खास सुविधा यह होगी कि आवेदन करने के बाद लोग उसकी स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे। सरकार के मुताबिक, प्रत्येक सेवा के लिए एक निर्धारित समय-सीमा तय की जाएगी। अगर आवेदन में अनावश्यक देरी होती है तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि इस डिजिटल व्यवस्था से लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। खास तौर पर दिहाड़ी मजदूरों को किसी प्रमाण पत्र या सरकारी सेवा के लिए अपनी मजदूरी छोड़कर कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी।
सरकार का कहना है कि पंजाब के दूर-दराज और सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों को भी डिजिटल माध्यम से वही सुविधाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है, जो शहरों में रहने वाले लोगों को मिलती हैं।
हालांकि, जहां लोगों के पास तकनीक या इंटरनेट की पर्याप्त सुविधा नहीं है, वहां सेवा केंद्र और डोरस्टेप डिलीवरी सेवा 1076 के जरिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच बनाए रखने की व्यवस्था जारी रहेगी।
सरकार के मुताबिक, ‘Digi Punjab’ के जरिए पुरानी कागजी और लंबी प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की गई है। इससे सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ने के साथ-साथ बिचौलियों पर निर्भरता कम करने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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