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पंजाब में समान विकास सुनिश्चित करने के लिए पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण करवाया जाएगा:CM भगवंत सिंह मान

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पंजाब सरकार की ‘शानदार चार साल भगवंत मान दे नाल’ श्रृंखला के हिस्से के रूप में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का चार साल का व्यापक रिपोर्ट कार्ड पेश किया, जिसमें यह दिखाया गया कि निरंतर नीतिगत हस्तक्षेप ने गांवों के बुनियादी ढांचे को कैसे बदला है, जमीनी स्तर पर प्रशासन को मजबूत किया है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।

ग्रामीण विकास को समग्र विकास के केंद्रीय स्तंभ के रूप में बताते हुए मुख्यमंत्री ने पंजाब के पहले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की शुरुआत से लेकर बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निर्माण, पारदर्शी भूमि प्रबंधन के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करने और युवा-केंद्रित विकास कार्यक्रमों सहित प्रमुख पहलों की रूपरेखा पेश की।

पहली अप्रैल से शुरू होने वाले जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को समानता और नीति निर्माण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य कार्रवाई को गोपनीय रखते हुए सभी समुदायों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास रिपोर्ट कार्ड एक व्यापक शासन ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत ‘आप’ सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सिंचाई, कृषि और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सेक्टर-वार प्रदर्शन के साथ-साथ जवाबदेही, पारदर्शिता और परिणामों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।

ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग का रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पिछले चार वर्षों में गांवों का पूर्ण विकास हुआ है, जिसमें बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य, तालाबों की सफाई शामिल है क्योंकि राज्य ने सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाकर और अन्य तरीकों से पैसा कमाया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य के सख्त प्रयासों के कारण पंचायत चुनावों में सर्वसम्मति में वृद्धि हुई है। पंजाब में 13,236 पंचायतों के लिए चुनाव 2024 में हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या में पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं। 2018 में लगभग 1,870 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गई थीं, लेकिन 2024 में 2,970 पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं थी।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “1,100 से अधिक पंचायतें सर्वसम्मति से चुनी गईं, जिससे गांवों में सामुदायिक सौहार्द मजबूत होता है और गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होता है।”

उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने सरपंचों का मानभत्ता 1,200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह कर दिया है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ग्रामीण विकास के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2025-26 में ग्रामीण विकास पर 2,367.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जो 2024-25 के मुकाबले दोगुने थे। वर्ष 2017-22 के दौरान पांच वर्षों में गांवों के विकास पर 1,883 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि राज्य सरकार ने इस नेक कार्य के लिए पिछले चार वर्षों में 3,847 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “पंचायत इमारतों, लाइब्रेरियों, आंगनवाड़ी केंद्रों, खेल मैदानों, गलियों, नालियों और अन्य विकास कार्यों पर 1,030.94 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पीने के पानी, स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य जरूरी सेवाओं पर 1,336.70 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और यह फंड जिला परिषदों, पंचायत समितियों और पंचायतों के माध्यम से जारी किए गए थे।”

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में शामलात जमीनों को लीज पर देकर आय में वृद्धि की है। पंचायती जमीनों से अवैध कब्जे हटाए गए हैं, जिससे राज्य का राजस्व बढ़ा है। चार वर्षों में राज्य सरकार ने शामलात जमीन को लीज पर देकर 1,842.78 करोड़ रुपये कमाए हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “वर्ष 2025-26 में पिछले साल के मुकाबले राजस्व 50.75 करोड़ रुपये बढ़ा है। लगभग 1.35 लाख एकड़ जमीन लीज पर दी गई, जिससे 520.54 करोड़ रुपये का राजस्व आया, जबकि 2024-25 में 469.79 करोड़ रुपये आए थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “नौजवानों की असीम ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए लगभग 3,000 ग्रामीण खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं और इस पर 1,166 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ये मैदान 6,500 एकड़ क्षेत्र में फैले होंगे, जिनके लिए 3,148 स्थानों की पहचान की गई है।”

उन्होंने कहा, “2,400 मैदानों पर काम पहले ही शुरू हो चुका है और इनमें से अधिकांश इस वर्ष जून तक पूरे हो जाएंगे, जिनमें वॉलीबॉल कोर्ट, फुटबॉल मैदान, बच्चों के खेलने का सामान और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं होंगी।”

उन्होंने कहा, “राज्य के इतिहास में पहली बार पंचायत घरों का निर्माण किया गया है। दूसरे चरण में 125 करोड़ रुपये के बजट से 500 आधुनिक पंचायत घर बनाए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “प्रति इमारत 25 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं और पहले चरण में 373 इमारतें पहले ही पूरी हो चुकी हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने गांवों में 251 लाइब्रेरियां बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिनमें से 231 पहले ही पूरी हो चुकी हैं। इसका उद्देश्य गांवों के लोगों को साहित्य से जोड़ना और नौजवानों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मनरेगा योजना के बारे में बात करते हुए कहा, “2017-2022 तक केवल 4,708 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, जबकि 2022 से अब तक 5,146 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। 8.96 लाख लोगों को रोजगार मिला है और 2.40 करोड़ दिहाड़ियों का रोजगार सृजित हुआ है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “2025-26 में लगभग 63,357 नए जॉब कार्ड जारी किए गए थे, जिनमें से 2,480 दिव्यांग व्यक्तियों के लिए थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब मनरेगा योजना में तर्कहीन संशोधनों का सख्त विरोध करता है। पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार द्वारा किए गए परिवर्तनों का विरोध किया था, जो ग्रामीण रोजगार को कम कर सकते हैं। ऐसी प्रतिबंध-आधारित संशोधन गैर-वाजिब हैं क्योंकि ये संशोधन ऐसी योजनाओं के मकसद पर गंभीर सवालिया निशान लगाते हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब सरकार ने ग्रामीण परिवारों के लिए आवासीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए अनुकरणीय पहल की हैं। इस वर्ष 76 हजार घरों के लिए मंजूरी दी गई थी, जिनमें 30 हजार बाढ़ प्रभावित परिवार शामिल थे।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “2016-2022 तक राज्य में केवल 39 हजार घर बनाए गए थे, जबकि इस वर्ष राज्य सरकार ने समाज के गरीब वर्ग के लिए एक लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा है।”

उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार ने 17,080 गांवों के तालाबों की सफाई के लिए बड़ी योजना शुरू की है। 13,414 तालाबों से पानी निकाला गया है और 4,706 तालाबों से गाद निकालने का काम पूरा हो गया है, जिसके लिए 235 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार जाति आधारित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सभी जातियों और उप-जातियों के जीवन स्तर का मूल्यांकन करना है ताकि उनकी भलाई के लिए नीतियां बनाई जा सकें। इस उद्देश्य के लिए 250 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें 28,000 गणनाकार तैनात किए जाएंगे और प्रत्येक को 62,500 रुपये मानभत्ता मिलेगा।”

उन्होंने कहा, “नशों के विरुद्ध जंग में राज्य के सभी गांवों ने अपना समर्थन दिया है। मैं पंचायतों और वॉलंटियरों का नशा विरोधी प्रयासों में सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं क्योंकि पहले ही 1.25 लाख सदस्य इस मुहिम में शामिल हो चुके हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “12 हजार विलेज डिफेंस कमेटियां बनाई गई हैं और वॉलंटियर ‘गांव के सरपरस्त’ के रूप में काम कर रहे हैं। कई नशा तस्करों को इन कमेटियों की रिपोर्टों के आधार पर गिरफ्तार किया जाता है।”

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 23 जिलों की 100 अग्रणी महिला उद्यमियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्हों से सम्मानित किया गया। उन्हें 25,000 रुपये प्रति व्यक्ति भी दिए गए।”

उन्होंने कहा, “117 विधानसभा क्षेत्रों में 11,700 महिलाओं को सम्मानित किया गया है और 2,300 महिलाओं को जिला स्तर के कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया है। मिशन के तहत 58,303 स्व-सहायता समूह बनाए गए हैं और 5.89 लाख परिवारों को जोड़ा गया है, जिन्हें 147 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “महिला सशक्तिकरण पहल के हिस्से के रूप में महिलाओं को डेयरी फार्मिंग से जोड़ने के लिए नई योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत 1,100 दूध सहकारी समितियां रजिस्टर्ड की गई हैं और महिलाओं को 18 करोड़ रुपये के ब्याज मुक्त ऋण दिए गए हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ये समितियां मिल्कफेड को रोजाना एक लाख लीटर दूध सप्लाई कर रही हैं। पूरे पंजाब में सखी शक्ति मेले लगाए गए थे, जिनमें 1,500 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और उनके द्वारा तैयार किए गए नौ करोड़ रुपये के उत्पाद बेचे गए।”

उन्होंने कहा, “समन्वय को बेहतर बनाने के लिए पहली बार विधानसभा क्षेत्रों के अनुसार ब्लॉकों का पुनर्गठन किया गया है। ग्रामीण विकास अधिकारियों और पंचायत सचिवों को राज्य कैडर में शामिल कर दिया गया है। कार्य कुशलता में सुधार लाने के लिए राज्य में 3,327 पंचायत विकास सचिवों के लिए प्रांतीय कैडर बनाया गया है।”

एक प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “केंद्र सरकार पंजाब के साथ सौतेली मां वाला सलूक कर रही है। आरडीएफ, जीएसटी, एनएचएम और अन्य ग्रांट्स को केंद्र ने रोक रखा है। इसका एकमात्र कारण यह है कि पंजाब में भाजपा को वोट नहीं मिलते, जिस कारण केंद्र सरकार पंजाब के साथ अन्याय कर रही है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “केंद्र द्वारा आवंटित आपदा प्रबंधन फंड बहुत कम है और जनता के बड़े हित में इसमें संशोधन की आवश्यकता है। राज्य इस भेदभाव का सख्त विरोध करेगा और राज्य का जायज हिस्सा प्राप्त करने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी। इस मुद्दे को कानूनी और प्रशासनिक रूप से हर प्लेटफॉर्म पर उठाया जाएगा।”

एक और सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह हैरान करने वाली बात है कि पंजाब कांग्रेस के नेता अपनी पार्टी की अगुवाई वाली हिमाचल सरकार द्वारा एंट्री टैक्स लगाए जाने पर चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि यह मुद्दा पंजाबियों के एक बड़े हिस्से से संबंधित है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “एक तरफ राज्य सरकार टोल टैक्स खत्म कर रही है और आम आदमी को राहत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य लोगों पर बिना जरूरी टैक्स लगा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “राज्य सरकार गेहूं की फसल की सुचारू और परेशानी मुक्त खरीद तथा लिफ्टिंग के लिए वचनबद्ध है और इसके लिए व्यापक प्रबंध पहले ही कर लिए गए हैं। सुचारू खरीद को खतरे में डालने के लिए अपनाई जा रही ब्लैकमेलिंग की रणनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसी ताकतों के विरुद्ध अनुकरणीय कार्रवाई की जाएगी।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के इतिहास में पहली बार एक अच्छी सरकार काम कर रही है, जबकि पहले वाली सरकारें लोगों को लूटने तक सीमित थीं।”

उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार किसानों की जमीन से गुजरने वाली हाई टेंशन तारों को जमीनदोज करने की संभावना की पड़ताल कर रही है और रणनीति बनाई जा रही है। यह किसानों के लिए राहत होगी क्योंकि ये तारें फसलों के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा करती हैं।”

इस मौके पर ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद तथा अन्य भी मौजूद थे।

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पंजाब में बेअदबी पर उम्रकैद का बनेगा कानून:जैतो की जनसभा में CM मान ने दिए संकेत, 31 करोड़ की विकास परियोजनाओं का किया शुभारंभ

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फरीदकोट जिले के जैतो शहर में रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने करीब 31 करोड़ रुपए की विभिन्न विकास परियोजनाओं की शुरुआत करवाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि पंजाब में बेअदबी पर उम्रकैद का कानून बनेगा।

सुखबीर को नीतियों पर आत्ममंथन करने की सलाह

मुख्यमंत्री ने बरगाड़ी बेअदबी मामले और उससे जुड़ी गोलीकांड की घटनाओं के लिए बादल परिवार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पंजाब में बेअदबी के आरोपियों को सख्त सजाओ के कानून के लिए 13 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। उन्होंने संकेत दिए कि सरकार द्वारा ऐसा कानून बनाया जाएगा, जिसमें आरोपी को एक साल तक जमानत नहीं मिलेगी। साथ ही उसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने शिअद नेता सुखबीर सिंह बादल को अपनी नीतियों पर आत्ममंथन करने की सलाह दी। सीएम ने आरोप लगाया कि पूर्व सरकारों के दौरान पंजाब के व्यापार पर कब्जा किया गया और जनता को नुकसान पहुंचाया गया।

कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों की जानकारी दी

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के चार साल के कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 2022 में लोगों ने पारंपरिक पार्टियों के बजाय आम आदमी पार्टी को मौका दिया और उनकी सरकार ने कम समय में ही बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए हैं। चुनाव से पहले की गई गारंटियां पूरी की जा चुकी हैं और पंजाब को रंगला पंजाब की ओर आगे बढ़ाया जा रहा है।

लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आया हूं :

मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि वह राजनीति में पैसा कमाने नहीं, बल्कि लोगों की सेवा और शहीद भगत सिंह के सपनों को साकार करने के लिए आए हैं। उन्होंने दावा किया कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने न तो कोई भ्रष्टाचार किया है और न ही किसी को करने देंगे।

कार्यक्रम में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह, सामाजिक सुरक्षा मंत्री डॉ. बलजीत कौर, विधायक अमोलक सिंह, डिप्टी कमिश्नर पूनमदीप कौर समेत आसपास के क्षेत्रों के कई विधायक मौजूद रहे।

मंच पर सीएम मान को किया गया सम्मानित।

मंच पर सीएम मान को किया गया सम्मानित।

जनसभा के दौरान उमड़ी भीड़।

जनसभा के दौरान उमड़ी भीड़।

 

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया।

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया

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मोगा में CM भगवंत मान ने बहु-करोड़ी प्रोजेक्ट्स का किया उद्घाटन, विपक्ष पर साधा निशाना

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने  आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के विकास एजेंडे की पुष्टि करते हुए मोगा में बहु-करोड़ी प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और नींव पत्थर रखा। साथ ही उन्होंने बुनियादी ढांचे के विस्तार, किसान सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों पर केंद्रित शासन मॉडल की रूपरेखा भी पेश की।

प्रदेश स्तरीय समागम में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लोगों का भारी हुंकार और जन भागीदारी सरकार की ईमानदार और साफ-सुथरी राजनीति में बढ़ते विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि 47 किलोमीटर से अधिक मुख्य सड़क नेटवर्क को अपग्रेड करने, शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, 18.80 करोड़ रुपए के बिजली प्रोजेक्ट शुरू करने और 13 अप्रैल से विभाजन अभियान शुरू करने तक सरकार जमीन पर ठोस बदलाव ला रही है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘आप’ सरकार किसानों की गेहूं के दाने-दाने को खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई भी किसान आढ़तियों के रहमो-करम पर न रहे। इस तरह प्रदेश सरकार हर गांव और शहर को जोड़ने वाले विकास मॉडल के माध्यम से पंजाब को देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है।

मोगा में कई विकास प्रोजेक्ट्स का नींव पत्थर रखने के बाद समागम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पारंपरिक पार्टियों ने पंजाब के लोगों के साथ बार-बार विश्वासघात किया है।

उन्होंने कहा, “पंजाब के लोग अकालियों को कभी माफ नहीं करेंगे क्योंकि उन्होंने न सिर्फ पंजाब और यहां के लोगों को बर्बाद किया, बल्कि गुरुओं और गुरबाणी का भी घोर निरादर किया है।”

उन्होंने आगे कहा, “अकालियों ने नशे के व्यापार को सरपरस्ती देकर पंजाब की पीढ़ियों का कत्लेआम किया है। इन नेताओं ने न सिर्फ नशे के व्यापार को बढ़ावा दिया, बल्कि नशे को बेचने या सप्लाई करने के लिए सरकारी वाहनों का भी इस्तेमाल किया।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अकाली नेता सुखबीर बादल दावा करते हैं कि प्रदेश का सारा विकास उनके शासनकाल में हुआ, लेकिन वे बरगाड़ी और बहिबल कला की बेअदबी की घटनाओं को आंखों से ओझल कर बैठे हैं। उन्होंने अपने निजी हितों के लिए धर्म का इस्तेमाल किया और हर आम आदमी की मानसिकता को ठेस पहुंचाई, जो एक न माफ करने योग्य गुनाह है। वे पंथ और पंजाब की विरोधी ताकतों के समर्थक हैं।”

अकाली दल की कथित ‘पंजाब बचाओ यात्रा’ पर तंज कसते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “अकाली दल की इस चाल का असली नाम ‘परिवार बचाओ यात्रा’ है। 15 साल राज्य को लूटने के बाद अब वे पंजाब को किससे बचाने की कोशिश कर रहे हैं?”

उन्होंने आगे कहा, “लोगों ने अकालियों को चुना लेकिन वे गद्दार साबित हुए और हमेशा राज्य व यहां के लोगों की पीठ में छुरा मारा। जब किसान भाईचारा अपने हकों के लिए लड़ रहा था, तब अकालियों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपनी जगह बचाने के लिए काले कृषि कानूनों पर मोदी सरकार का समर्थन किया।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अकाली-भाजपा और कांग्रेस सरकारों ने राज्य की कई पीढ़ियों को तबाह कर दिया है। ये पंजाब विरोधी ताकतें एक-दूसरे से हाथ मिलाकर चल रही हैं और राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ये नेता केंद्र और नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुप हैं, जो पंजाब को बर्बाद कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, “ये नेता मुझ पर बोलने में कोई कसर नहीं छोड़ते क्योंकि वे पंजाब की तरक्की से नाखुश हैं। लोगों को एकजुट होकर इन्हें राज्य से बाहर करके सबक सिखाना चाहिए। सुखबीर बादल, राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा और अन्य पंजाब के लिए बेगाने हैं क्योंकि इनका लोगों से कोई मेल नहीं है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अपनी स्कूली पढ़ाई से लेकर कपड़ों और आदतों तक इन लोगों का आम पंजाबियों से कुछ भी मेल नहीं खाता। ये नेता लोगों के सामने आने वाली समस्याओं से अनजान हैं क्योंकि वे पंजाब की असली स्थिति से कोसों दूर हैं। उन्होंने कभी खेतों का चक्कर तक नहीं मारा, तो किसानों की मुश्किलों के बारे में क्या जान सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “लोगों ने इन पारंपरिक पार्टियों को बड़े पैमाने पर वोट दिए, लेकिन उन्होंने पंजाब को लूटा। इन नेताओं ने परजीवियों की तरह पंजाब के संसाधनों का खून चूसा और आज भी उनके पास सत्ता की भूख के अलावा कोई एजेंडा नहीं है। वे मुझे गालियां निकालने और अपनी हाई कमांड को वीडियो भेजने में एक-दूसरे से आगे हैं।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन नेताओं के पास पंजाब के लिए कोई लक्ष्य या उद्देश्य नहीं है और वे निजी हितों में उलझे हुए हैं जबकि हमारी सरकार पंजाब को अग्रणी राज्य बनाने के लिए हर प्रयास कर रही है। वह दिन दूर नहीं जब पंजाब देश का अग्रणी राज्य बनेगा।”

सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमने पंजाब के सर्वांगीण विकास के लिए अनूठी पहल की हैं। हमने लोगों से किए सारे वादे पूरे किए हैं। सरकार बिना किसी पक्षपात के हर घर को 600 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि जब से हमारी सरकार ने सत्ता संभाली है, 90 प्रतिशत परिवारों को बिजली का बिल नहीं आ रहा है। पंजाब के इतिहास में पहली बार किसानों को सिंचाई के लिए दिन में 8 घंटे निर्बाध बिजली मिल रही है। सरकार ने नहर प्रणाली को सुधारने पर 6500 करोड़ रुपए खर्च किए हैं और पहली बार 1365 गांवों के खेतों तक नहरी पानी पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सिंचाई के लिए सिर्फ 21 प्रतिशत नहरी पानी का उपयोग होता था, जो अब बढ़कर 68 प्रतिशत हो गया है और आने वाले धान के सीजन तक यह 85 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। 6900 किलोमीटर लंबे 18,349 जल मार्गों को सुधारकर पानी को टेल तक पहुंचाया गया है, जिससे किसानों को बड़ा फायदा हो रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि जिन नेताओं के खेतों तक जाकर नहरें बंद हो जाती थी, उन्होंने कभी आम लोगों के इस मुद्दे पर कोई चिंता नहीं की। ऐसे फैसले सिर्फ वे नेता ले सकते हैं जो जमीन की हकीकत समझते हैं, न कि वे जो पहाड़ियों के कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़े हैं।

रोजगार पर मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने बिना किसी सिफारिश या रिश्वत के सिर्फ योग्यता के आधार पर 65,000 से अधिक सरकारी नौकरियां देकर रोजगार क्रांति लाई है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड निजी निवेशों के कारण पिछले चार सालों में 7 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पंजाब में 43,000 किलोमीटर लिंक सड़कें हैं और हमने अगले पांच सालों के लिए रखरखाव, मरम्मत और अपग्रेडेशन के लिए बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया है। सरकार किसानों की सुविधा के लिए हाई टेंशन तारों को जमीनदोज करने की संभावनाओं की भी पड़ताल कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसानों को बड़ी राहत देगा क्योंकि हाई टेंशन तारें उनके और उनकी फसलों के लिए बड़ा खतरा पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना उनके गांव से शुरू होगी, जहां काम जल्द ही शुरू हो जाएगा।

जनकल्याण पहलों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नई तक्सीम योजना 30 दिनों के अंदर जमीन का बंटवारा सुनिश्चित करेगी, जिसे 13 अप्रैल 2026 से पूरे पंजाब में लागू किया जाएगा। उन्होंने अपील की कि लोग जितना हो सके आपसी समझ से विवाद सुलझाएं।

उन्होंने अपील की कि लोग मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत 10 लाख रुपए तक के नकद रहित इलाज के लिए अधिक से अधिक रजिस्ट्रेशन करवाएं। यह योजना सरकारी और निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज प्रदान करती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मावां धीयां सत्कार योजना के तहत अनुसूचित जाति की महिलाओं को प्रति महीना 1500 रुपए और अन्य सभी श्रेणियों की महिलाओं को 1000 रुपए दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह महिलाओं के सम्मान को सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने कहा कि करदाताओं का पैसा लोगों का है, जिसे विकास, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों पर खर्च किया जा रहा है। पहले यही पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता था, लेकिन अब सारी चोर रास्ते बंद कर दिए गए हैं।

शिक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बेहतर शिक्षा गरीबी का इलाज है। कोई भी मुफ्त चीज गरीबी खत्म नहीं कर सकती, शिक्षा ही तरक्की और खुशहाली के दरवाजे खोल सकती है। हम शिक्षा को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जहां हम शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और कृषि की बात करते हैं, वहीं दूसरी पार्टियां सिर्फ सत्ता हथियाने की बात करती हैं। लोगों ने इन मौकापरस्त नेताओं को नकार दिया है, जो सिर्फ अपने परिवारों की भलाई के लिए काम करते रहे हैं।

गेहूं की खरीद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आढ़ती सरकार पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम नहीं झुकेंगे। सरकार सुचारू खरीद सुनिश्चित करने के लिए सहकारी कमेटियों का खरीद कोटा बढ़ाएगी।

इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मोगा में कई विकास प्रोजेक्ट्स का नींव पत्थर रखा, जिसमें बिजली प्रोजेक्ट, नगर निगम सड़कों की मरम्मत और प्रमुख सड़कों का अपग्रेडेशन शामिल है। उन्होंने रंगला और जीवंत पंजाब बनाने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

इससे पहले ‘आप’ पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा कि भगवंत सिंह मान देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं। आप सरकार ने समाज के हर वर्ग के लिए मार्गदर्शक पहल की हैं। अगर कोई दूसरी पार्टी सत्ता में आई तो वे दिल्ली में भाजपा की तरह इन जनकल्याण योजनाओं को बंद कर देंगे।

भगवंत मान सरकार की विकासोन्मुखी सोच से रंगला पंजाब की ओर बढ़ रहा है राज्य

मोगा में चल रहे बुनियादी ढांचा कार्य एक निर्णायक और काम-आधारित शासन मॉडल को दर्शाते हैं, जहां सड़कों, शहरी बुनियादी ढांचे और बिजली व्यवस्था में बड़े निवेश किए जा रहे हैं।

47.70 किलोमीटर लंबी मोगा-बाघापुराना-कोटकपूरा सड़क को 46.98 करोड़ रुपए की लागत से अपग्रेड किया जा रहा है। 22.72 किलोमीटर मोगा-धर्मकोट सड़क का नवीनीकरण 9.98 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है, जिससे मुख्य कस्बों व गांवों में संपर्क मजबूत होगा।

नगर निगम द्वारा 88.62 करोड़ रुपए के शहरी विकास कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें 11.60 करोड़ रुपए के अतिरिक्त टेंडर प्रगति अधीन हैं। इनमें मुख्य सड़कों के नवीनीकरण के लिए 7.58 करोड़ रुपए, अन्य सड़कों के लिए 7.66 करोड़ रुपए, बहुमंजिला सामुदायिक हॉल के लिए 4.16 करोड़ रुपए, पुरानी अनाज मंडी में स्ट्रीट वेंडिंग जोन के लिए 2.19 करोड़ रुपए तथा गुरु नानक कॉलेज चौक पर एक घड़ी टावर के निर्माण के साथ-साथ गीता भवन, रेलवे अंडरब्रिज, जूती मार्केट, प्रताप रोड और मुख्य बाजार समेत शहर की प्रमुख जगहों के सौंदर्यीकरण के लिए 97 लाख रुपए शामिल हैं।

बिजली बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाले प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनमें रसूंगावाला में 9.82 करोड़ रुपए की लागत वाला 220 केवी ट्रांसफार्मर, 2.62 करोड़ रुपए की लागत वाला 20 एमवीए ट्रांसफार्मर और 4.22 करोड़ रुपए की लागत वाला सोसण में 132 केवी ट्रांसफार्मर शामिल हैं। इसके अलावा मोगा शहर की बिजली वितरण व्यवस्था को अपग्रेड करने पर 3.74 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। ये पहल पूरे शहर में बिजली आपूर्ति में सुधार कर रही हैं और आसपास के लगभग नौ गांवों को लाभ पहुंचा रही हैं। साथ ही 1 करोड़ रुपए की लागत से डगरू में एक नया सब-डिवीजन कार्यालय तैयार किया जा रहा है।

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AAP नेताओं ने संसद में पंजाब के ज़रूरी मुद्दों को नज़रअंदाज़ करने के लिए राघव चड्ढा की आलोचना की

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आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, आप पंजाब प्रधान अमन अरोड़ा और आप पंजाब के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने राज्यसभा मेंबर राघव चड्ढा पर संसद में पंजाब के ज़रूरी मुद्दे उठाने में असफल रहने पर जमकर निशाना साधा है।

नेताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि बार-बार बातचीत के बावजूद, 8,500 करोड़ रुपये का आरडीएफ बकाया, 60,000 करोड़ रुपये का जीएसटी नुकसान और 1,600 करोड़ रुपये की बाढ़ राहत जैसे गंभीर मुद्दे नहीं उठाए गए। इस चुप्पी को पंजाब के लोगों और फतवे के साथ धोखा बताते हुए, नेताओं ने कहा कि किसानों की चिंताओं और बाढ़ पीड़ितों की बुरी हालत को न उठाना ज़मीनी हकीकत से पूरी तरह अलग होना दिखाता है।

संसद में रिप्रेजेंटेशन पर चिंता जताते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राघव चड्ढा को पंजाब के विधायकों ने इस उम्मीद से राज्यसभा के लिए चुना था कि वह नेशनल लेवल पर राज्य की चिंताओं को मज़बूती से प्रतिनिधित्व करेंगे। हालांकि, उन्होंने पंजाब से जुड़ा एक भी संवेदनशील मुद्दा उठाने से पूरी तरह परहेज किया।

मुख्य वित्तीय मुद्दों की सूचि देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि वे लगभग 8,500 करोड़ रुपये का बकाया ग्रामीण विकास फंड, जीएसटी लागू होने के बाद पंजाब को लगभग 60,000 करोड़ रुपये का भारी जीएसटी नुकसान और जीएसटी मुआवजे में बदलाव के कारण 5,000-6,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय नुकसान सहित कई ज़रूरी मुद्दे उठाने में असफल रहे। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत फंड का मुद्दा भी ठीक से नहीं उठाया गया।

बाढ़ राहत का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भयानक बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री द्वारा पंजाब के लिए 1,600 करोड़ रुपये की राहत की घोषणा के बावजूद, उस रकम का एक भी हिस्सा पंजाब के खजाने में नहीं पहुंचा। ये सभी मुद्दे बार-बार राघव चड्ढा के ध्यान में लाए गए, फिर भी उन्होंने संसद में इनमें से एक भी मुद्दा नहीं उठाया।

निराशा जताते हुए पंजाब के कैबिनेट मंत्री ने कहा कि हमने उन्हें उम्मीद के साथ राज्यसभा भेजा था, लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने इन मुद्दों पर एक बार भी मुंह नहीं खोला। यह साफ तौर पर समझौते को दिखाता है। आम आदमी पार्टी एक ऐसी पार्टी है जो आम लोगों को मौके देती है, लेकिन ऐसे ज़रूरी मुद्दों पर चुप रहना पंजाब और उसके लोगों के साथ विश्वासघात है।

इस बीच, आप पंजाब के प्रधान अमन अरोड़ा ने कहा कि राघव चड्ढा को अरविंद केजरीवाल और पार्टी का रोल याद रखना चाहिए कि उन्होंने उन्हें राजनीतिक तौर पर ऊपर उठाया है। उन्हें पंजाब के ज्वलंत मुद्दे जैसे बकाया आरडीएफ और फंड और बाढ़ राहत पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, उन्होंने ऐसे मुद्दे उठाए जो पूरे देश ने देखे हैं।

पार्टी के सिद्धातों को दोहराते हुए, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आम आदमी पार्टी की स्थापना लोगों के हक के लिए बिना डरे लड़ने के सिद्धों की गई थी और उस रास्ते से कोई भी भटकाव सोचा भी नहीं जा सकता और मंज़ूर नहीं है। राघव चड्ढा को खुद आत्म मंथन करना चाहिए और अन्याय के विरुद्ध खड़े हों और लोगों के हकों की वकालत करने के पार्टी कि मुख्य सिद्धांत को याद रखना चाहिए।

दूसरी ओर, आप के प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि पंजाब में बाढ़ से प्रभावित लोगों की बुरी हालत पर राघव चड्ढा की चुप्पी से बहुत निराशा हुई है। पार्टी नेताओं और प्रभावित लोगों ने उनसे बार-बार संसद में मुआवज़े का मुद्दा उठाने की रिक्वेस्ट की थी, खासकर प्रधानमंत्री द्वारा अनाउंस किए गए 1,600 करोड़ रुपये की राहत, जो अभी तक नहीं मिली है।

एक बाढ़ प्रभावित गांव में खड़े होकर उन्होंने कहा कि यह साफ़ है कि लोगों को अपने घरों, फसलों और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी नुकसान हुआ है, फिर भी उनकी आवाज़ कभी राष्ट्रीय स्तर पर नहीं उठाई गई। हमें उम्मीद थी कि वे पंजाब के बाढ़ पीड़ितों के लिए इंसाफ़ और राहत की ज़ोरदार मांग करेंगे, लेकिन उनकी चुप्पी बहुत निराशाजनक रही है। पंजाब के लोग इस अनदेखी को नहीं भूलेंगे।

आप नेताओं ने मिलकर कहा कि पंजाब के मुद्दों को हर मंच पर ज़ोरदार तरीके से उठाया जाना चाहिए, और ऐसा न करना लोगों और आप को मिले जनादेश के साथ धोखा होगा।

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