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पजाब सरकार जेन-ज़ी के साथ चट्टान की तरह खड़ी है; विधानसभा में नौजवानों पर हो रहे अत्याचारों का मुद्दा उठाया

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पंजाब विधानसभा ने आज जेन-ज़ी (नौजवान पीढ़ी) के साथ दृढ़ता से खड़े होते हुए और देश के नौजवानों पर हो रहे जुल्मों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए देश भर में एक के बाद एक पेपर लीक के मामलों के खिलाफ जुबानी वोट से निंदा प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव पर बहस को समेटते हुए और फिर मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के राज में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों ने करोड़ों छात्रों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है, जबकि इंसाफ मांगने वालों को जवाबदेही की बजाय अश्रु गैस के गोलों, पैलेट गनों और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि पंजाब सरकार यह निंदा प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी, जिसमें केंद्र को पेपर लीक के मामलों को रोकने और देश की शिक्षा प्रणाली की मजबूती के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस ने सदन से वाकआउट कर दिया।

देश में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “देश को विश्वगुरु बनाने का दावा करने वालों ने देश भर में एक के बाद एक हो रहे पेपर लीक के मामलों को रोकने में अपनी नाकामी से शिक्षा प्रणाली का मजाक बना दिया है। पेपर लीक यानी परीक्षा पत्र की बिक्री, परीक्षार्थियों के सपनों को तोड़ देती है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि नीट परीक्षा के 22 उम्मीदवारों ने निराशा में खुदकुशी तक कर ली। उन्होंने कहा कि जब से (साल 2014) भाजपा सरकार ने सत्ता संभाली है, देश में 93 पेपर लीक हो चुके हैं।”

पेपर लीक से संबंधित आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “2019 से 2024 के बीच पेपर लीक के ऐसे मामलों की संख्या 65 थी और सबसे ज्यादा पेपर लीक भाजपा के नेतृत्व वाली राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की सरकारों में हुए। प्रधानमंत्री, जो छात्रों को परीक्षाओं में बैठने के नुस्खे बताते रहते हैं, पेपर लीक रोकने में नाकाम रहे हैं। उस प्रधानमंत्री से और क्या उम्मीद की जा सकती है जिसकी अपनी डिग्री का ही कोई पता नहीं है।”

छात्रों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “ये नेता अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए स्कूल पाठ्यक्रम को बदल रहे हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश के छात्रों ने प्रधानमंत्री को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर कर दिया, जो देश में पेपर लीक रोकने में पूरी तरह असफल रहे। छात्रों के खिलाफ अश्रु गैस, जोरदार पुलिस बल, पैलेट गनों और अन्य पैतरों के इस्तेमाल के दौरान केंद्र सरकार की धौंसशाही बेहद निंदनीय है।”

इस मुद्दे पर बात जारी रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पूरी दुनिया में पैलेट गनों पर पाबंदी है, लेकिन केंद्र सरकार ने निर्दोष छात्रों के खिलाफ बेरहमी से इनका इस्तेमाल किया है। परीक्षाओं को निष्पक्षता से करवाने का वादा करने की बजाय, प्रधानमंत्री लोगों को गुमराह करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का वादा कर रहे हैं। यह सिस्टम का मजाक बनाना नहीं तो और क्या है कि केंद्र सरकार परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए रक्षा सेवाओं का सहयोग ले रही है।”

छात्रों और उनके परिवारों पर पेपर लीक के पड़ने वाले प्रभावों को उजागर करते हुए उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पेपर लीक होने के कारण छात्रों को घोर संताप झेलना पड़ता है। ऐसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र अपने परिवारों की उम्मीद होते हैं। हालांकि, जब ऐसे पेपर लीक के नाम पर अमीर लोगों को बेचे जाते हैं, तो आम छात्रों/परीक्षार्थियों के सपने चकनाचूर हो जाते हैं। ये नेता देश के नौजवानों के भविष्य से खेल रहे हैं, जिसके कारण जेन-ज़ी को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा और उन पर बहुत अत्याचार हुए।”

मौजूदा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “ऐसे पेपर लीक देश की शिक्षा प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करते हैं और इसीलिए हमारे देश की डिग्रियों की विदेशों में कोई कदर नहीं है। इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बजाय केंद्र सरकार उनका बचाव कर रही है। प्रधानमंत्री छात्रों को परीक्षाओं की तैयारी करना सिखाते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार अधीन आने वाली संस्थाओं को कभी यह नहीं सिखाया कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा के साथ परीक्षाएं कैसे करवाई जाती हैं।”

केंद्र के समूचे कार्यकाल के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार की विदेश नीति देश के हितों और अखंडता की रक्षा में बुरी तरह असफल रही है। वाशिंगटन में व्हाइट हाउस में बैठे लोग देश की नीतियों में दखल दे रहे हैं। यह देश में बन रहे बेहद घिनौने और बुरे हालातों की झलक है क्योंकि केंद्र सरकार अपनी ड्यूटी निभाने में पूरी तरह फेल हो चुकी है।”

बहस के बाद अपनी सरकार की ओर से की गई कार्रवाई के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब सरकार आज विधानसभा में यह निंदा प्रस्ताव लेकर आई है। पारित किया गया यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा ताकि देश की शिक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही दखलंदाजी और नीट जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मुद्दा उनके ध्यान में लाया जा सके।”

जांच के बावजूद बार-बार होते पेपर लीक का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इन पेपरों के लीक होने के कारण करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। हर बार सीबीआई जांच के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन किसी को सजा नहीं मिलती। यह महज एक रस्म बनकर रह गया है। अब भी प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि मामले का फैसला फास्ट-ट्रैक अदालतों में किया जाएगा। इसका मतलब है कि पेपर लीक होते रहेंगे और केवल केसों के फैसले बाद में होते रहेंगे।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आज परीक्षाएं करवाने के लिए फौज की मदद ली जा रही है। इससे बड़ी त्रासदी और क्या हो सकती है? हम विश्वगुरु बनने के दावे करते हैं, लेकिन हम अपनी परीक्षाएं भी सही ढंग से नहीं करवा पा रहे। बार-बार पेपर लीक होने से जिन छात्रों ने भारत से ईमानदारी से एमबीबीएस, वेटरनरी, इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर डिग्रियां हासिल भी की हैं, जब वे विदेश जाते हैं तो उन्हें दोबारा पढ़ने या नए टेस्ट पास करने के लिए कहा जाता है। विदेशी संस्थानों और कंपनियों का कहना है कि उन्हें हमारी परीक्षा प्रणाली पर भरोसा नहीं है। फिर भी ये लोग भारत को विश्वगुरु बनाने की बातें करते हैं।”

पीड़ित छात्रों के लिए इंसाफ की मांग करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हम इस पूरे घटनाक्रम की पुरजोर निंदा करते हैं। अपने हकों के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज किए गए केस तुरंत वापस लिए जाएं। केंद्र सरकार के वादे मुताबिक खुदकुशी करने वाले छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया जाए। भारत सरकार को यह भी यकीनी बनाना चाहिए कि ऐसी घटनाएं भविष्य में कभी न दोहराई जाएं।”

बहस के दौरान कांग्रेस के रवैये पर निराशा जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “कांग्रेस को छोड़कर सदन के लगभग हर सदस्य ने निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया। कांग्रेस ने बहस का बहिष्कार करने का रास्ता चुना। यह बहुत अफसोसजनक है कि जब देश भर के छात्र अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं तो कांग्रेस बार-बार होते पेपर लीक जैसे अहम मुद्दे पर भी उनके साथ नहीं खड़ी हुई। उन्हें राजनीति से ऊपर उठकर नौजवानों के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ बोलने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने वाकआउट करना मुनासिब समझा।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “आज जब मैं विधानसभा में बोल रहा था तो विरोधी दल की सीटें खाली पड़ी थी। यह 2027 की एक झलक है। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस में हिस्सा लेने की बजाय उन्होंने कार्रवाई का बहिष्कार किया। एक तरफ उनके नेता शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर प्रधानमंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन करते हैं और दूसरी तरफ जब उन्हें सदन में उसी मुद्दे पर बहस करने का मौका मिलता है तो वे वाकआउट कर जाते हैं।”

परीक्षाओं के मामले में पंजाब के रिकॉर्ड को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार के पिछले चार सालों से ज्यादा के कार्यकाल के दौरान पंजाब में पेपर लीक की एक भी घटना नहीं हुई। कुछ परीक्षाओं के दौरान नकल के मामले सामने आए थे, लेकिन वे मामले सरकार द्वारा खुद ही पकड़े गए थे। चाहे किसी ने नकल करने के लिए डिजिटल उपकरणों, स्कैनिंग पेन या किसी अन्य तरीके का इस्तेमाल किया हो, सख्त कार्रवाई की गई, एफआईआर दर्ज की गईं और दोषियों को जेल भेजा गया। नकल करना और पेपर लीक होना, दो अलग-अलग बातें हैं और विरोधी दल जानबूझकर इन दोनों को उलझाने की कोशिश कर रहा है।”

परीक्षा से संबंधित अपराधों में शामिल गिरोहों पर की गई कार्रवाई का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “ऐसे मामलों में शामिल गिरोहों की पहचान करके कार्रवाई की गई है। इससे पहले भी भर्ती परीक्षाओं के दौरान हरियाणा से चल रहे गिरोहों को गिरफ्तार किया गया था। मेरे पास पूरी सूची है जो दर्शाती है कि सबसे ज्यादा पेपर लीक भाजपा शासित राज्यों में हुए हैं।”

पंजाब की पारदर्शी भर्ती नीति पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब में सरकारी नौकरियां पाने के लिए सिर्फ योग्यता (मेरिट) ही एकमात्र मापदंड है। कोई सिफारिश नहीं, कोई रिश्वत नहीं, पारदर्शी तरीके से केवल मेरिट के आधार पर ही सरकारी नौकरियां दी जाती हैं। अब तक नौजवानों को 68,000 से ज्यादा सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं।”

शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदेश सरकार के अथक प्रयासों के कारण पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में पहला स्थान हासिल किया है। प्रदेश सरकार ने प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाया है और व्यवस्था को मजबूत किया है, स्मार्ट क्लासरूम शुरू किए हैं और शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण दिया है।”

शिक्षा क्षेत्र में आए बदलाव पर रोशनी डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “इन प्रयासों के परिणामस्वरूप स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब अग्रणी बनकर उभर रहा है। भारत सरकार की मुख्य संस्थाओं में से एक, नीति आयोग ने नए आंकड़े जारी किए हैं जो दर्शाते हैं कि पंजाब ने केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा में पहला स्थान हासिल किया है। पिछले चार सालों से प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के प्रशिक्षण, पढ़ाने के आधुनिक तरीकों और स्मार्ट क्लासरूमों पर ध्यान केंद्रित किया है, और आज पंजाब शिखर पर खड़ा है। पहले केरल पहले नंबर पर था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से पहला स्थान हासिल कर लिया है। आने वाले समय में भी ऐसे और प्रयास किए जाएंगे।”

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रदेश सरकार का दृढ़ विश्वास है कि हर बच्चे को, चाहे उसका आर्थिक पिछड़ापन कोई भी हो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और सरकार के उपक्रमों का उद्देश्य यह यकीनी बनाना है कि आम परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने के वही मौके मिलें जो बाकियों को मिलते हैं। आने वाली पीढ़ियों को शक्तिशाली बनाने और खुशहाल पंजाब के निर्माण के लिए शिक्षा सबसे बड़ा साधन है और प्रदेश सरकार इसे मजबूत करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी।”

पंजाब के शिक्षा क्षेत्र के सफर को याद करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “जब मैंने पद संभाला था तो स्कूली शिक्षा में प्रदेश 27वें नंबर पर था। आज यह बहुत गर्व और संतुष्टि की बात है कि पंजाब पहले नंबर पर खड़ा है। जहां 2021 में सरकारी स्कूलों के सिर्फ 80 छात्रों ने नीट परीक्षा पास की थी, वहीं 2026 में यह संख्या बढ़कर 881 छात्र हो गई है, जो कि पंजाब के सरकारी स्कूलों की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। प्रदेश सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है और लोगों के जीवन को बदलने के लिए शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाए हैं।”

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पंजाब देश में सबसे अधिक वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल, कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी आगे: हरपाल सिंह चीमा

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यह रेखांकित करते हुए कि पंजाब पहले से ही देश में सबसे अधिक सरकारी वेतनमान देने वाले राज्यों में शामिल है तथा कई श्रेणियों में केंद्र सरकार से भी अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, पंजाब के वित्त मंत्री एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा ने आज यहां कहा कि पूर्ववर्ती शिरोमणि अकाली दल-भाजपा तथा कांग्रेस सरकारों की नीतियों के कारण राज्य को कर्मचारियों के वेतन आयोग के बकायों के रूप में 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी विरासत में मिली है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार हाईकोर्ट द्वारा स्वीकृत निपटान योजना के तहत पहले ही 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये का भुगतान कर चुकी है तथा हाईकोर्ट के ताजा फैसले और उपलब्ध कानूनी उपायों का परीक्षण करते हुए सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पंजाब भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री चीमा ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन आयोग की रिपोर्ट वास्तव में वर्ष 2016 में तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान तैयार की गई थी, लेकिन इसे कई वर्षों तक लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट केवल जुलाई 2021 में लागू की गई। परिणामस्वरूप 1 जनवरी 2016 से जुलाई 2021 तक के महंगाई भत्ते (डीए) के बकाये को स्थगित कर दिया गया, जिससे 14,191 करोड़ रुपये की देनदारी उत्पन्न हो गई।”

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि हालांकि तत्कालीन शासनकाल के दौरान वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इन बकाया राशियों में से एक रुपया भी जारी किए बिना अपना कार्यकाल पूरा कर लिया, जिससे पूरा वित्तीय बोझ वर्तमान सरकार पर आ गया।

‘आप’ सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि विभिन्न कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद पंजाब सरकार ने एक सुनियोजित निपटान योजना तैयार की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, “14,191 करोड़ रुपये की कुल देनदारी में से ‘आप’ सरकार पहले ही कर्मचारियों को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान कर चुकी है। हाईकोर्ट ने इस निपटान योजना को स्वीकार कर लिया था और इसे लागू करने का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है।”

वर्तमान महंगाई भत्ते (डीए) के वितरण संबंधी हाईकोर्ट के ताजा फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि एकल पीठ की व्याख्या में कुछ संवैधानिक मानदंडों तथा न्यायिक नज़ीरों की अनदेखी की गई प्रतीत होती है।

महाराष्ट्र राज्य के मामले में वर्ष 2005 के संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय देश में सबसे अधिक वेतनमान प्रदान कर रहा है, जो कई श्रेणियों में केंद्र सरकार के वेतन ढांचे से भी अधिक हैं।

विभिन्न पदों के लिए पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के वेतनमानों की तुलना प्रस्तुत करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “राज्य सरकार का कानूनी तर्क यह था कि जब राज्य का वेतन ढांचा पहले से ही काफी अधिक हो, तो कोई भी राज्य सरकार एक ही समय में सबसे अधिक मूल वेतनमान और केंद्र की सबसे अधिक डीए दरों—दोनों को बनाए नहीं रख सकती।”

उन्होंने आगे कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने स्वयं यह निर्णय लिया था कि नए भर्ती किए गए कर्मचारियों को केंद्रीय वेतन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत शामिल किया जाएगा।

कर्मचारियों के प्रति पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सभी संवैधानिक एवं कानूनी रूप से वैध बकायों का भुगतान किया जाएगा। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “हमारी कानूनी टीम ताजा फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है, न्यायिक नज़ीरों की समीक्षा कर रही है तथा उपयुक्त कानूनी रास्ता तय करने के लिए विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करने की संभावना भी शामिल है।”

प्रेस वार्ता का समापन करते हुए मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पूर्ववर्ती अकाली दल-भाजपा और कांग्रेस सरकारों से भारी वित्तीय बोझ विरासत में मिलने के बावजूद पंजाब सरकार सभी बकाया वित्तीय देनदारियों का योजनाबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से समाधान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से खराब हुई गाड़ियों की मरम्मत में ₹25,000 से ₹50,000 का खर्च आता है: हरपाल सिंह चीमा

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भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए, पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मंगलवार को अप्रैल 2026 से 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंड (ई-20 पेट्रोल) को ज़बरदस्ती लागू करने की आलोचना की, जबकि असल में डेडलाइन 2030 से आगे बढ़ा दी गई थी। वह अपने पेश किए गए प्रस्ताव के समर्थन में सदन में बोल रहे थे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यूएस दुनिया का 60 परसेंट इथेनॉल बनाता है जबकि भारत सिर्फ़ 5 परसेंट बनाता है। चीमा ने भाजपा की केंद्र सरकार पर भारतीय उपभोक्ताओं और गाड़ी मालिकों की कीमत पर यीएस और डोनाल्ड ट्रंप के सामने सरेंडर करने का आरोप लगाया।

राज्य में इस मुद्दे की गंभीरता पर ध्यान देते हुए, कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग के पास अभी 1,25,88,851 रजिस्टर्ड टू-व्हीलर, फोर-व्हीलर और कमर्शियल गाड़ियां हैं, जबकि पड़ोसी राज्यों से खरीदी गई कुछ दूसरी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन प्रोसेस अभी भी चल रहा है। इतनी ज़्यादा पुरानी गाड़ियों वाले राज्यों पर ज़बरदस्ती ई-20 फ्यूल थोपना बहुत भारी पड़ रहा है।”

लोकल मैकेनिकों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया, “इथेनॉल ब्लेंड से खराब हुई कार को ठीक करने का खर्च ₹25,000 से ₹50,000 के बीच है।”

उन्होंने पुरानी गाड़ियों वाले लोगों के लिए दूसरा इंतज़ाम न करने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय की भी आलोचना की और चेतावनी दी कि अगर डिलीवरी बॉय और छोटे व्यापारियों की गाड़ियां हर कुछ महीनों में खराब होती रहीं, तो उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ जाएगी।

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया, “केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी संसद में माना था कि फ्यूल माइलेज में 6% की कमी आई है, जबकि असल में एफिशिएंसी का नुकसान बहुत ज़्यादा है। घरेलू वैज्ञानिकों, मैन्युफैक्चरर्स, सांसदों या आम जनता से सलाह किए बिना देश पर ऐसी पॉलिसी थोपना निंदनीय है। यह पॉलिसी देश को कॉर्पोरेट हितों के लिए बेच रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “इथेनॉल बनाने में बहुत पानी लगता है, जो पंजाब के पहले से ही गिरते भुमिगत पानी लेवल के लिए एक गंभीर खतरा है।”

भारी जन विरोध को हाईलाइट करते हुए, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने हाल ही में आप के नेशनल कन्वीनर अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में ऑर्गनाइज़ किए गए एक डायलॉग का ज़िक्र किया, जिसमें 4,000 से 5,000 लोग शामिल हुए थे और 7 लाख लोगों ने इसे ऑनलाइन देखा था। उन्होंने बताया, “उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब और राजस्थान के मैकेनिक और एक्सपर्ट्स ने हिस्सा लिया और इस बात पर अपनी आवाज़ उठाई कि यह पॉलिसी कंज्यूमर्स के लिए कितनी नुकसानदायक है, जिससे यह साबित होता है कि यह एक ज़रूरी और ज़रूरी नेशनल मुद्दा है जिस पर तुरंत दोबारा विचार करने की ज़रूरत है।”

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पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

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पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। आज सदन में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों को निपटाए जाने की संभावना है। सरकार की ओर से पंजाब रेगुलेशन एंड मेंटेनेंस (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया जाएगा। इसके अलावा छह अलग-अलग विभागों की वार्षिक और प्रगति रिपोर्ट भी सदन के पटल पर रखी जाएंगी।

वहीं, विपक्षी दलों ने भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। ऐसे में आज भी विधानसभा में तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं।

मानसून सत्र के पहले दिन फार्मेसी परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर सदन का माहौल गर्म रहा। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और सदन से वॉकआउट किया था।

हालांकि, पंजाब सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह पेपर लीक का नहीं, बल्कि हाईटेक नकल का मामला था। सरकार का दावा है कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महज 15 मिनट के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था और मामले की जांच जारी है।

उल्लेखनीय है कि पंजाब विधानसभा का यह मानसून सत्र 10 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव सदन में पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष विभिन्न जनहित और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।

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