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भगवंत मान सरकार ने 35.5 लाख महिलाओं के खातों में मासिक वित्तीय सहायता राशि डाली

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भगवंत सिंह मान सरकार ने आज ‘मावां-धियां सत्कार योजना’ के तहत 35.5 लाख महिलाओं के खातों में मासिक वित्तीय सहायता राशि स्थानांतरित की, जिससे अब तक लाभार्थियों की कुल संख्या 68.5 लाख हो गई है। पठानकोट में इस योजना के तहत आयोजित वित्तीय सहायता वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि पंजाब भर की महिलाओं को इस योजना के तहत 3000 रुपये और 4,500 रुपये के रूप में तीन महीने की संयुक्त किस्तें मिल रही हैं, जबकि विधवा, दिव्यांग और वृद्धावस्था पेंशन लेने वाली महिलाओं को राज्य में पहली बार अलग से 1000 या 1500 रुपये की यह सम्मान राशि दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सात दिनों के दौरान अन्य 5 लाख महिलाओं ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है, जिससे कुल पंजीकरण 73.5 लाख हो गया है और राज्य भर में पात्र लाभार्थियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया अभी भी जारी है।

सभा की कुछ झलकियाँ साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर लिखा: ”पंजाब की माताओं-बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमने आज एक और महत्वपूर्ण वादा पूरा कर दिया है।” उन्होंने कहा कि 1 जुलाई को 33 लाख महिलाओं को मानदेय स्थानांतरित करने के बाद हमने आज अन्य 35.5 लाख महिलाओं के खातों में पैसे डाल दिए हैं। उन्होंने आगे कहा कि जिन बहनों ने बाद में फॉर्म जमा कराए हैं, उन्हें भी तीन महीने की किस्तें एक साथ मिलेंगी।

मुख्यमंत्री ने पोस्ट के अंत में लिखा, ”यह आपका वैध अधिकार है। अब से आपको अपनी या अपने बच्चों की जरूरतें पूरी करने के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। आम आदमी पार्टी जो वादा करती है, उसे पूरा करती है और अपनी गारंटियों को हकीकत में बदलती है। इंकलाब जिंदाबाद।”

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने राज्य के लोगों से किए गए सभी वादे और गारंटियाँ पूरी कर दी हैं। उन्होंने कहा, ”अब मैंने राज्य की माताओं-बहनों से किया अपना वादा पूरा कर दिया है। यह आपका पैसा है और इसे खर्च करने या उपयोग करने से पहले आपको किसी से पूछने की जरूरत नहीं है। पिछले जुलाई महीने में मैंने 33 लाख माताओं-बहनों को यह तोहफा दिया था और आज 35.5 लाख और माताओं-बहनों को ये पैसे उनके खातों में स्थानांतरित कर दिए गए हैं।” उन्होंने बताया कि पिछले सात दिनों में ही पाँच लाख और महिलाओं ने इस योजना के तहत पंजीकरण कराया है।

मुख्यमंत्री ने समारोह से पहले के पलों को याद करते हुए कहा, ”यहाँ आते समय एक बहन ने मुझे राखी बाँधी और कहा कि मेरा भाई आज मुझे शगुन देगा। हमारी पार्टी के सभी नेता आम लोग थे, लेकिन राज्य के लोगों ने मुझे मुख्यमंत्री बनाया।” उन्होंने कहा कि यहाँ मैं आपसे बात कर रहा हूँ और वहाँ लाभार्थियों के खातों में पैसे जमा भी हो चुके होंगे।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पैसे ट्रांसफर करने संबंधी सूचना लाभार्थियों को पहले ही उनके मोबाइल फोन पर प्राप्त हो रही थी। उन्होंने कहा, ”मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पैसे लाभार्थियों के खातों में जमा हों। मैंने लोगों से किए गए सभी वादे और गारंटियाँ पूरी की हैं। मैं सिर्फ वही कहता हूँ, जो किया जा सकता है, और कुछ नहीं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि लाभार्थी अपनी जरूरत के अनुसार वित्तीय सहायता का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ”आप इस पैसे का उपयोग किसी भी जरूरत के लिए कर सकते हैं, चाहे आपके पोते-पोतियों के लिए खिलौने खरीदने के लिए, शगुन देने के लिए या फिर फीस अदा करने के लिए हो। आप इस पैसे को किसी भी तरीके से खर्च कर सकते हैं। आज 35.5 लाख और माताओं को वही राशि मिल रही है, जो पहली जुलाई को प्राप्त हुई थी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज से 73 लाख से अधिक माताओं और बहनों को इस योजना के तहत लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, ”यह मेरी सभी माताओं और बहनों का सम्मान करने का महज एक तरीका है और कुछ नहीं। पंजाब की हर माँ और बहन को तीन महीने की किस्तों के रूप में 3000 रुपये एक साथ प्राप्त हुए हैं, जबकि अनुसूचित जाति श्रेणी से संबंधित माताओं और बहनों को जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए तीन महीने की किस्तों के रूप में 4500 रुपये एक साथ प्राप्त हुए हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर पात्र लाभार्थी महिला को इस योजना के तहत लाभ मिलेगा, भले ही उसने अपना पंजीकरण कब पूरा किया हो। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ”जो भी अब भी फॉर्म भरता है, उसे 1 जुलाई, 2026 से पैसे मिल जाएंगे, इसलिए इस बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आपके हितों की रक्षा के लिए आपका भाई डटकर खड़ा है। फंड सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर किए जा रहे हैं और पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रही महिलाएं भी इस योजना के लिए पात्र होंगी। पंजाब में लगभग 97 फीसदी महिलाओं को इस योजना के तहत लाभ मिलने की उम्मीद है और हमारी सरकार ने बजट में 9300 करोड़ आवंटित किए हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं के लिए उचित सम्मान और स्वाभिमान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, ”यह योजना भले ही महिलाओं को अमीर न बनाए, लेकिन यह उन्हें सम्मान और स्वाभिमान जरूर देगी। महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं क्योंकि वे जीवन की शुरुआत हैं और माताओं और बहनों का आशीर्वाद दुनिया की हर चुनौती को जीतने में मदद कर सकता है। घरेलू कल्याण को बेहतर बनाने, लिंग समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक और आर्थिक फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए महिलाओं की वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत करना बहुत जरूरी है।”

वरिष्ठ ‘आप’ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने कहा, ”मुख्यमंत्री पहले ही राज्य के लोगों से किए गए हर वादे को पूरा कर चुके हैं और यह कोई अपवाद नहीं है। भगवंत सिंह मान सबसे अधिक स्वीकार्य मुख्यमंत्री हैं और समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।”

वरिष्ठ ‘आप’ नेता मनीष सिसोदिया, कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा, डॉ. बलजीत कौर और लाल चंद कटारूचक ने इस अवसर पर महिलाओं के लिए सम्मान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किए गए इस प्रयास के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की।

मावां-धियां सत्कार योजना के बारे में:

मावां-धियां सत्कार योजना पंजाब भर की महिलाओं को बैंक खातों में सीधे भुगतान के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना के तहत पंजाब की हर महिला को प्रति माह 1000 रुपये प्राप्त होते हैं, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को प्रति माह 1500 रुपये प्राप्त होते हैं। मौजूदा वितरण में प्रत्येक लाभार्थी को जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए तीन महीने की किस्तों के रूप में 3000 रुपये और अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को 4500 रुपये प्राप्त हो रहे हैं।

सहायता सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से पैसे सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा किए जाते हैं ताकि मध्यस्थों के बिना पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जा सके। विधवा, दिव्यांग या वृद्धावस्था पेंशन लेने वाली महिलाओं को अलग से ये पैसे मिल रहे हैं क्योंकि यह योजना सामाजिक सुरक्षा की एक अतिरिक्त सहायता के रूप में काम करती है। राज्य भर के आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकरण खुले हैं और नए प्रमाणित आवेदकों को अगले चरण में शामिल किया जाएगा।

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कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब विधानसभा में भाजपा सरकार द्वारा विद्यार्थियों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ प्रस्ताव किया पेश

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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आज पंजाब विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सदन से अपील की कि वह देशभर में लाखों विद्यार्थियों और नौकरी के अभ्यर्थियों के भविष्य को गंभीर क्षति पहुंचाने वाले बार-बार सामने आए परीक्षा घोटालों, पेपर लीक की घटनाओं तथा संस्थागत विफलताओं के लिए केंद्र सरकार को जवाबदेह ठहराए। पंजाब विधानसभा ने इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

विधानसभा को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “तानाशाही भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के अहंकारी शासन में देश का हर महत्वपूर्ण क्षेत्र, विशेषकर लाखों मेहनती युवाओं का भविष्य, बिकाऊ बना दिया गया है।”

वित्त मंत्री ने कहा, “नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में प्रणालीगत भ्रष्टाचार तथा बार-बार होने वाले पेपर लीक ने युवाओं का मनोबल तोड़ दिया है। जब विद्यार्थियों को यह महसूस हुआ कि मेरिट को धन और राजनीतिक संरक्षण के बदले बेच दिया गया है, तब निराशा के कारण ढाई लाख से अधिक विद्यार्थी पुनर्परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए।”

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “जहां प्रधानमंत्री अक्सर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से लोगों तक पहुंचने का प्रदर्शन करते हैं, वहीं उनकी सरकार की मशीनरी विद्यार्थियों की शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक अपीलों का जवाब पैलेट गन, आंसू गैस और ए.के.-47 राइफलों से देती है। यहां तक कि नाबालिगों, दबाव में माफी मांगने वाली स्कूली छात्राओं तथा प्रसिद्ध समाज सुधारक सोनम वांगचुक के विरुद्ध भी न्याय देने के बजाय भारतीय न्याय संहिता की कठोर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए।”

उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव पिछले एक दशक के दौरान देश में सामने आए 70 से अधिक बड़े परीक्षा घोटालों, डिजिटल रिमोट-एक्सेस हैक तथा भर्ती घोटालों की कड़ी निंदा करता है। साथ ही यह राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) जैसी परीक्षा संस्थाओं के पूर्ण पुनर्गठन एवं विकेंद्रीकरण, पेपर लीक सिंडिकेटों के विरुद्ध उदाहरणात्मक कार्रवाई तथा शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज गैर-जरूरी आपराधिक मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग करता है।”

वित्त मंत्री ने कहा, “भाजपा शासित कई राज्यों और पंजाब की स्थिति में स्पष्ट अंतर है। जहां केंद्र सरकार भ्रष्ट सिंडिकेटों की रक्षा कर विद्यार्थियों का शोषण कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पूरी तरह मेरिट के आधार पर लगभग 70,000 सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं। साथ ही अनुसूचित जाति (एस.सी.) छात्रवृत्ति योजना को पुनः शुरू किया गया, जिससे 50 हजार से अधिक वंचित वर्ग के विद्यार्थी बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई जारी रख सके।”
अपने संबोधन के अंत में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “भारत के युवाओं की अटूट शक्ति और जागरूकता ने अंततः अहंकारी भाजपा नेतृत्व को जनदबाव के आगे झुकने के लिए मजबूर कर दिया है। इस सदन को चाहिए कि वह इस प्रस्ताव को केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय तथा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे, ताकि जनता की चिंताओं और देश के युवाओं की आकांक्षाओं से उन्हें औपचारिक रूप से अवगत कराया जा सके।”

कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलबीर सिंह, विधायक गुरप्रीत सिंह बनांवाली, नरेंद्र कौर भाराज, डॉ. नछत्तर पाल, गुरिंदर सिंह गैरी वड़िंग, अमृतपाल सिंह तथा सुखनंद ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सदन को संबोधित किया।

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पंजाब से सीखे भाजपा सरकार, बिना शर्त सभी महिलाओं को लक्ष्मी योजना का लाभ दे- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली लक्ष्मी योजना मंे कड़ी शर्तें लगाने पर भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार से सीखना चाहिए। ‘‘आप’’ सरकार ने पंजाब में कोई शर्त नहीं लगाई है। अगर घर में चार महिलाएं हैं तो सभी को मावां-धीयां सत्कार योजना का लाभ मिल रहा है। जबकि दिल्ली सरकार ने 10 साल से रहने का प्रमाण और एमपी-एमएलए की मंजूरी की कड़ी शर्त लगा रखा है। इससे साफ है कि ये बहुत कम महिलाओं को योजना का लाभ देना चाहते हैं। अगर भाजपा सरकार की नीयत साफ होती तो योजना में इतनी शर्तें नहीं लगाती और सारी महिलाओं को लाभ देती।

लक्ष्मी योजना में कड़ी शर्तों और सांसद-विधायक की मंजूरी अनिवार्य होने के सवाल पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इससे साफ जाहिर है कि वे केवल भाजपा के लोगों को यह लाभ देना चाहते हैं, दूसरे लोगों को देना ही नहीं चाहते। जो यह शर्त लगाई गई है कि 10 साल रहने वाला होना चाहिए और सांसद-विधायक की मंजूरी चाहिए, इससे पता चलता है कि इन्हें यह लाभ देना ही नहीं है, केवल राजनीति करनी है। जितनी शर्तें इन्होंने लगाई हैं, उसके हिसाब से दिल्ली की 10 फीसद महिलाओं को भी इसका लाभ नहीं मिलेगा। पंजाब में हमने कोई शर्त नहीं लगाई, एक घर में अगर चार महिलाएं हैं तो चारों को मिलेगी। हमने अमीर, गरीब, जात-पात का कोई भेदभाव नहीं किया। जैसे पंजाब में साफ नीयत से सबको लाभ दे रहे हैं, वैसे ही अगर नीयत साफ है तो दिल्ली में भी दें।

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’मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 708 फेफड़ा (लंग) कैंसर मरीज़ों को ₹3.43 करोड़ का कैशलेस उपचार मिला

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विश्व फेफड़ा (लंग) कैंसर दिवस के अवसर पर भगवंत मान सरकार ने एक सरल लेकिन महत्त्वपूर्ण संदेश दिया है कि कोई भी व्यक्ति केवल इसलिए फेफड़ा कैंसर से अपनी जंग न हारे क्योंकि वह उपचार का ख़र्च वहन करने में सक्षम नहीं है। मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के माध्यम से राज्य सरकार न केवल जीवनरक्षक उपचार का ख़र्च उठा रही है, बल्कि बीमारी होने से पहले ही उसकी रोकथाम के लिए भी निवेश कर रही है।

योजना के आँकड़े इस प्रतिबद्धता को वास्तविकता में बदलते हुए दिखाई देते हैं। अब तक, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 708 फेफड़ा (लंग) कैंसर मरीज़ों को कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया गया है, जिस पर ₹3.43 करोड़ के दावे स्वीकृत किए जा चुके हैं। इससे सैकड़ों परिवारों को अस्पताल के बिलों की चिंता करने के बजाय मरीज़ के स्वस्थ होने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिली है।

इस अवसर पर पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि फेफड़ा (लंग) कैंसर दुनिया के सबसे घातक कैंसरों में से एक है, लेकिन यह ऐसा कैंसर भी है जिसमें रोकथाम और समय पर पहचान से उपचार के परिणाम बेहतर बनाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लोगों को उपचार की लागत की चिंता किए बिना समय पर इलाज मिल सके। हमारी ज़िम्मेदारी केवल उपचार उपलब्ध करवाने तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास है कि लोग समय पर अस्पताल पहुँचें और किसी भी मरीज़ तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के बीच आर्थिक तंगी कभी बाधा न बने।”

तंबाकू नियंत्रण में पंजाब की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य ने पूरे देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा, “हाल ही में, नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस-6) द्वारा भारत में सबसे कम तंबाकू सेवन वाले राज्य के रूप में पंजाब की पहचान निरंतर जन-जागरूकता मुहिमों, प्रभावी तंबाकू नियंत्रण उपायों और लोगों की सक्रिय भागीदारी की सफलता का प्रमाण है। यह उपलब्धि हमारे इस विश्वास को और मज़बूत करती है कि फेफड़ा कैंसर के विरुद्ध रोकथाम ही सबसे प्रभावी हथियार है। मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूँ कि वे तंबाकू से दूर रहें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ और कैंसर-मुक्त, स्वस्थ पंजाब के निर्माण में अपना योगदान दें।”

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार फेफड़ा कैंसर विश्वभर में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है और तंबाकू का सेवन इसका सबसे प्रमुख ज़ोख़िम कारक है। भारत में भी तंबाकू सेवन में वृद्धि और बीमारी की देर से पहचान के कारण इसका बोझ लगातार बढ़ रहा है; ऐसे में रोकथाम, जन-जागरूकता और समय पर जाँच पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है।

राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब, से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत लाभान्वित 708 मरीज़ों में 413 पुरुष शामिल हैं, जिनके उपचार पर ₹1,89,68,865 ख़र्च किए गए, जबकि 295 महिलाओं को ₹1,53,19,215 की लागत वाला कैशलेस उपचार उपलब्ध करवाया गया।

आयु वर्ग के अनुसार विश्लेषण से पता चलता है कि सबसे अधिक 286 लाभार्थी 61 से 75 वर्ष आयु वर्ग के हैं, जिनके उपचार पर ₹1,34,56,310 ख़र्च किए गए। इसके बाद 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 247 मरीज़ों को ₹1,24,83,240 की लागत वाला उपचार मिला। योजना के तहत 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 100 मरीज़ों , 19 से 30 वर्ष आयु वर्ग के 9 मरीज़ों तथा 13 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 2 किशोर मरीज़ों को भी सहायता मिली, जो दर्शाता है कि फेफड़ा कैंसर विभिन्न आयु वर्गों के लोगों को प्रभावित कर सकता है।

ज़िलेवार आँकड़ों के अनुसार बठिंडा में सबसे अधिक 179 मरीज़ों को ₹1,46,02,300 की लागत वाला उपचार मिला। इसके बाद संगरूर में 163 मरीज़ों को ₹56,62,600 तथा फरीदकोट में 149 मरीज़ों को ₹37,85,760 की लागत वाला उपचार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त अमृतसर (55 मरीज़), जालंधर (42), पटियाला (20), एस.ए.एस. नगर (19), लुधियाना (11), फतेहगढ़ साहिब (1) तथा पठानकोट (1) के मरीज़ों ने भी योजना का लाभ उठाया। इन ज़िलों में कुल 640 लाभार्थियों को ₹3,17,04,235 की लागत का उपचार उपलब्ध करवाया गया।

डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों से सभी प्रकार के तंबाकू से दूर रहने, लगातार खाँसी, सीने में दर्द, बिना कारण वज़न कम होना तथा साँस लेने में तकलीफ़ जैसे चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि समय पर रोग की पहचान होने से मरीज़ के जीवित रहने की संभावना और उपचार की सफलता दोनों में उल्लेखनीय सुधार होता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भगवंत मान सरकार कैंसर की समय पर स्क्रीनिंग को मज़बूत करने, गुणवत्तापूर्ण उपचार तक पहुँच का विस्तार करने तथा मुख्यमंत्री सेहत योजना का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “योजना के तहत स्वीकृत प्रत्येक दावे के पीछे एक ऐसा मरीज़ है, जिसे जीवन का दूसरा अवसर मिला है; और एक ऐसा परिवार है, जिसे इलाज पर होने वाले भारी-भरकम ख़र्च से सुरक्षा मिली है।”

इसके अलावा, पंजाब सरकार मरीज़ों के बेहतर स्वास्थ्य लाभ और कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समग्र (होलिस्टिक) उपायों को भी बढ़ावा दे रही है।कैंसर नर्सिंग (पबमेड) पत्रिका में वर्ष 2023 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि योग में किए जाने वाले साँस संबंधी अभ्यास फेफड़ा कैंसर की सर्जरी के बाद मरीज़ों में लक्षणों को कम करने और स्वास्थ्य लाभ की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। पंजाब सरकार की ‘सीएम दी योगशाला’ (CMDY) पहल का उद्देश्य नियमित योग और ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर लोगों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है

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