Punjab
वीडियो के 1,191 फ्रेम्स के तकनीकी विश्लेषण से साबित हुआ कि CM भगवंत सिंह मान से कोई मेल नहीं है: हरपाल सिंह चीमा
आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने ‘आप’ पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू के साथ गुरुवार को एक फर्जी और मनगढ़ंत वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को बदनाम करने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और पंजाब के सामाजिक सद्भाव को अस्थिर करने की एक घिनौनी राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश किया।
भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दो स्वतंत्र प्रयोगशालाओं (लैब्स) द्वारा की गई फोरेंसिक जांच का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि प्रोपेगेंडा अभियान को वैज्ञानिक सबूतों द्वारा पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। वीडियो के 1,191 फ्रेम्स के तकनीकी विश्लेषण ने निर्णायक तौर पर साबित किया है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति सीएम भगवंत सिंह मान नहीं हैं।
‘आप’ नेताओं ने कहा कि भगवंत मान सरकार द्वारा ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट’ लागू किए जाने से बौखलाई पंथ विरोधी और पंजाब विरोधी ताकतों ने यह साजिश रची है। उन्होंने दावा किया कि इस मनगढ़ंत वीडियो को बनाने और वायरल करने वालों की पहचान करके उनकी बारीकी से जांच की जाएगी और उन्हें सख्त सजा दिलाई जाएगी।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वरिष्ठ ‘आप’ नेता और मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पिछले कई दिनों से अकाली दल के नेता एक फर्जी वीडियो वायरल करके और उसे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से झूठा जोड़कर जनता की भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा, “यह सारा घटनाक्रम एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य एक ऐसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री को बदनाम करना था जो लगातार पंजाब के लोगों के लिए काम कर रहे हैं।”
हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “सच अब पंजाब के लोगों के सामने आ गया है। जिन लोगों ने एक मनगढ़ंत वीडियो का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की थी, वे पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं।”
फोरेंसिक जांच के विवरण साझा करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दो स्वतंत्र लेबोरेट्रीज ने वायरल वीडियो की बारीकी से जांच की और वे एक ही नतीजे पर पहुंचीं। फोरेंसिक विश्लेषण में वीडियो के कुल 1,191 फ्रेम्स की जांच की गई। चेहरे के नैन-नक्श, कद, शारीरिक बनावट, खड़े होने का तरीका, हिलने-डुलने के पैटर्न, साइड प्रोफाइल और बैक प्रोफाइल समेत हर पहलू का गहराई से विश्लेषण किया गया। रिपोर्टों में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला गया है कि वीडियो में दिखाया गया व्यक्ति सीएम भगवंत सिंह मान से बिल्कुल मेल नहीं खाता।
मंत्री ने बताया कि फोरेंसिक रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति का कद लगभग 5 फुट 10 इंच होने का अनुमान है, जबकि सीएम भगवंत सिंह मान का कद 5 फुट 8 इंच है। उन्होंने कहा कि शारीरिक बनावट, कंधों की बनावट, चेहरे की विशेषताओं और समग्र पोस्चर में भी बड़े अंतर पाए गए हैं हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “दोनों लेबोरेट्रीज ने स्वतंत्र तौर पर एक ही निष्कर्ष निकाला और वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति और मुख्यमंत्री के बीच कोई मेल नहीं पाया।”
अकाली दल को करारा जवाब देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पार्टी का राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों का शोषण करने का एक लंबा और दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास रहा है, जबकि वह पंथ की मर्यादा की रक्षा करने में बार-बार नाकाम रही है। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोग 1986 के नकोदर कांड को नहीं भूले, जब अकाली दल की सरकार के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूपों को आग के हवाले कर दिया गया था। वे उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग को भी नहीं भूले, जिसमें इंसाफ की मांग कर रहे चार सिख नौजवान शहीद हो गए थे।”
हरपाल सिंह चीमा ने आगे अकाली-भाजपा गठबंधन के शासनकाल में 2015 की बेअदबी की घटनाओं और बहबल कलां तथा कोटकपूरा में हुई पुलिस फायरिंग की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “तरीका वही है। जब भी अकाली दल और भाजपा सत्ता में थे, बेअदबी की घटनाएं हुईं और इंसाफ नहीं दिया गया। पंजाब के लोग इन दर्दनाक अध्यायों को नहीं भूले हैं।” मंत्री ने कहा कि 2015 की बेअदबी की घटनाओं के बाद सत्ता में दो साल रहने के बावजूद अकाली दल की सरकार जस्टिस जोरा सिंह कमीशन की सिफारिशों पर भी कार्रवाई करने में असफल रही। उन्होंने आगे कहा, “बाद में आई कांग्रेस सरकारों ने कई विशेष जांच टीमें (एसआईटी) बनाईं, फिर भी ‘आप’ सरकार के सत्ता में आने तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हो सकी।”
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अकाली दल ने बार-बार पंथ के नाम पर वोट मांगे हैं और खुद को पंथक हितों का रक्षक बताया है, लेकिन सरकार में उसका रिकॉर्ड अलग ही कहानी बयान करता है। उन्होंने कहा कि जब भी अकाली दल सत्ता में आया, उसकी देख-रेख में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाली घटनाएं हुईं, जबकि जिम्मेदार लोगों को सुरक्षा मिलती रही। हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “अकाली दल का राजनीतिक फायदे के लिए पंथक भावनाओं का शोषण करने का इतिहास रहा है। यह पंथ के नाम पर वोट मांगता है लेकिन उन मूल्यों और सिद्धांतों को कायम रखने में बार-बार नाकाम रहता है, जिनका प्रतिनिधित्व करने का यह दावा करता है।”
भगवंत मान सरकार द्वारा की गई पहलों पर रोशनी डालते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2026’ बनाया है, जिसमें बेअदबी की घटनाओं के लिए उम्रकैद और भारी आर्थिक जुर्माने समेत सख्त सजाओं का प्रावधान है। उन्होंने कहा, “जब से इस ऐतिहासिक कानून के आसपास चर्चा शुरू हुई है, कुछ ताकतें मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को निशाना बनाने और बदनाम करने की नाकाम कोशिशें कर रही हैं। यह फर्जी वीडियो उसी बड़ी साजिश का हिस्सा है।”
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार मनगढ़ंत सामग्री तैयार करने या वायरल करने में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। उन्होंने कहा, “पंथ के खिलाफ साजिश रचना एक गंभीर अपराध है। इस फर्जी वीडियो को बनाने और वायरल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्हें ढूंढकर इंसाफ के कटघरे में लाया जाएगा, चाहे वे कहीं भी हों। इस गंदी साजिश में शामिल हर व्यक्ति को कानून के सामने जवाबदेह बनाया जाएगा।”
इस मौके पर बोलते हुए ‘आप’ पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने फर्जी वीडियो अभियान को भारतीय राजनीतिक इतिहास में किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को बदनाम करने की सबसे शर्मनाक कोशिशों में से एक करार दिया। उन्होंने आगे कहा, “मनगढ़ंत वीडियो को सबसे पहले पत्रकारों में इस इरादे से वायरल किया गया था कि इसे असली सामग्री के रूप में प्रसारित किया जा सके। हालांकि, जिम्मेदार पत्रकारों ने इसकी संदिग्ध प्रकृति को पहचानते हुए इस सामग्री को प्रसारित करने से इनकार कर दिया।”
बलतेज पन्नू ने कहा, “जब वे भरोसेमंद मीडिया चैनलों के जरिए फर्जी वीडियो को प्रसारित करवाने में असफल रहे, तो उन्होंने अन्य साधनों के जरिए सीएम भगवंत सिंह मान को बदनाम करने की अपनी साजिश को तेज कर दिया। भारत के राजनीतिक इतिहास में शायद यह पहली बार है कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसी घटिया और दुर्भाग्यपूर्ण कोशिश की गई है।” बलतेज पन्नू ने कहा कि भगवंत मान सरकार सभी क्षेत्रों में नतीजे दे रही है और उसका शासन रिकॉर्ड अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने कहा, “भगवंत मान सरकार ने धर्म, जाति या क्षेत्र के आधार पर बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग के लिए लगातार काम किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब ने निर्णायक शासन और सार्थक सुधार देखे हैं।”
पंजाब के मीडिया प्रभारी ने कहा कि 2015 के बेअदबी के मामलों और उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग की घटनाओं से संबंधित जांच में जिन लोगों के नाम आए हैं, वे इन मामलों में हो रही प्रगति से असहज थे और इसलिए झूठे प्रचार के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कोटकपूरा गोलीकांड मामले में चल रही कानूनी कार्रवाई का भी हवाला दिया और दावा किया कि कुछ राजनीतिक नेता सीएम भगवंत सिंह मान के खिलाफ बदनामी की मुहिम चलाकर खुद को जवाबदेही से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “पंजाब के लोग स्पष्ट तौर पर देख सकते हैं कि कौन दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहा है और कौन इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है। सच अब वैज्ञानिक फोरेंसिक सबूतों के जरिए सामने आ गया है।”
अगली कार्रवाई की घोषणा करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि आम आदमी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) से मिलेगा और इस साजिश की व्यापक जांच की औपचारिक मांग करेगा। उन्होंने आगे कहा, “हम इस मनगढ़ंत वीडियो के पीछे मौजूद व्यक्तियों और संगठनों की गहराई से जांच की मांग करेंगे। जिन लोगों ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने, झूठी अफवाह फैलाने और पंजाब के सामाजिक सद्भाव को अस्थिर करने की कोशिश की है, उन्हें सख्त कानूनी परिणामों का सामना करना होगा।”
बलतेज पन्नू ने घोषणा की कि ‘आप’ का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) से मिलेगा और मनगढ़ंत वीडियो के पीछे की पूरी साजिश की व्यापक जांच की औपचारिक मांग करेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी धार्मिक भावनाओं को भड़काने और सीएम भगवंत सिंह मान को बदनाम करने के उद्देश्य से इस फर्जी सामग्री को तैयार करने, वायरल करने और बढ़ावा देने में शामिल हर व्यक्ति, संगठन और नेटवर्क की पहचान करने की मांग करेगी। बलतेज पन्नू ने कहा, “इस साजिश के पीछे वालों की पहचान होनी चाहिए, उन्हें बेनकाब किया जाना चाहिए और इंसाफ के कटघरे में लाया जाना चाहिए। पंजाब मनगढ़ंत प्रोपेगेंडा के जरिए सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने और जनता को गुमराह करने की ऐसी जानबूझकर की गई कोशिशों को बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
दोनों नेताओं ने दोहराया कि फोरेंसिक जांच के निष्कर्षों ने वायरल वीडियो के आसपास बनाए गए झूठे आख्यान को पूरी तरह नष्ट कर दिया है और इसे बनाने तथा फैलाने वालों की पंथ विरोधी और पंजाब विरोधी राजनीति को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “सच की जीत हुई है। फर्जी वीडियो बेनकाब हो चुका है। साजिश बेनकाब हो चुकी है। पंजाब के लोग उन लोगों को कभी माफ नहीं करेंगे जिन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का शोषण करने और लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री को बदनाम करने की कोशिश की।”
Punjab
आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी की पढ़ाई जारी रहेगी, संस्कृत लागू करने का फैसला वापस
आर्मी पब्लिक स्कूलों में पंजाबी भाषा की पढ़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी (AWES), जालंधर ने अपने उस पहले के फैसले को वापस ले लिया है, जिसमें स्कूलों में संस्कृत को अनिवार्य रूप से लागू करने की बात कही गई थी। अब छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी पहले की तरह अपनी मातृभाषा पंजाबी की पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
इस फैसले का स्वागत करते हुए पंजाब चेतना मंच के अध्यक्ष डॉ. लखविंदर सिंह जौहल, महासचिव सतनाम सिंह मानक और संगठन सचिव प्रिंसिपल गुरमीत सिंह पलाही ने कहा कि नए नियमों के तहत छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पंजाबी या संस्कृत में से किसी एक भाषा का चयन करने की स्वतंत्रता होगी। इसके साथ ही वे अंग्रेजी और हिंदी से जुड़े निर्धारित विषयों का भी चयन कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि नौवीं कक्षा में अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत के विकल्प उपलब्ध रहेंगे, जबकि दसवीं कक्षा की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
डॉ. जौहल ने पंजाबी भाषा को बचाने के लिए चलाए गए अभियान का समर्थन करने वाले सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों और अभिभावकों का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत सरकार के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष तरलोचन सिंह और राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखे गए उनके पत्र ने इस मामले के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा पंजाबी भाषा से जुड़े विभिन्न संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी लगातार इस मुद्दे को उठाया। कानूनी और सामाजिक स्तर पर किए गए प्रयासों के साथ-साथ केंद्रीय पंजाबी लेखक संघ के नेतृत्व में चंडीगढ़ में प्रदर्शन भी किए गए। पंजाब चेतना मंच ने पंजाब के मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भी पत्र लिखकर स्कूलों में पंजाबी भाषा को बनाए रखने की मांग की थी। अब इस फैसले को पंजाबी भाषा के संरक्षण और उसके अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Punjab
श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्री हरिमंदिर साहिब में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व के अवसर पर सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है। पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरबाणी कीर्तन का आनंद लिया और गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्री हरिमंदिर साहिब के मैनेजर गुरिंदर सिंह देवीदासपुरा ने समस्त संगत को प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्री गुरु हरिकृष्ण साहिब जी ने बहुत कम आयु में ही मानवता की सेवा, दया, विनम्रता और परोपकार का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी पूरी मानवता को सेवा, प्रेम और करुणा का संदेश देती हैं। उन्होंने संगत से गुरु साहिब के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने और जरूरतमंदों की सेवा के लिए सदैव आगे आने की अपील की।
प्रकाश पर्व के विशेष अवसर पर रात्रि के समय सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब में विशेष रोशनी और आतिशबाजी का आयोजन किया जाएगा। रोशनी से जगमगाता श्री हरिमंदिर साहिब श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और इस पावन पर्व की रौनक को और भी भव्य बना देगा।
Punjab
नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया
प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।
विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।
बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।
किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”
अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।
उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।
स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।
सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।
उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।
उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”
सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।
उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”
उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।
स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”
शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।
स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।
स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”
-
Religious3 years agoकब है तुलसी विवाह? इस दिन तुलसी माता का विवाह करने से मिलेगा लाभ
-
Religious3 years agoजानिए गोवर्धन पूजा का महत्व, कौनसा समय रहेगा पूजा के लिए सही
-
Religious3 years agoआखिर क्यों लिखा जाता है घर के बाहर शुभ लाभ, जानिए क्या है इन चिह्न का मतलब
-
Religious3 years agoपैरों के निशान, बनावट, रंग, साइज से पता लागए की आप कितने है भागयशाली
-
Religious3 years agoजानिए दीपावली में वाले दिन आखिर कितने जलाने चाहिए दीये ? और क्यों जलाने चाहिए दिये |
-
Chandigarh2 years agoChandigarh: Top 10 Restaurants. ये लोकप्रिय क्यों हैं ?
-
Punjab2 years agoपंजाब में अमरूद के बगीचे के मुआवजे के घोटाले में ED ने 26 स्थानों पर छापे मारे
-
Punjab2 years agoLudhiana में पुलिस स्टेशन के पास शव मिला। एक आदमी सड़क के बीच में पड़ा था; पास में कपड़ों से भरा एक बोरे भी मिला था, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी