Punjab
वीडियो के 1,191 फ्रेम्स के तकनीकी विश्लेषण से साबित हुआ कि CM भगवंत सिंह मान से कोई मेल नहीं है: हरपाल सिंह चीमा
आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने ‘आप’ पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू के साथ गुरुवार को एक फर्जी और मनगढ़ंत वीडियो के जरिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को बदनाम करने, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और पंजाब के सामाजिक सद्भाव को अस्थिर करने की एक घिनौनी राजनीतिक साजिश का पर्दाफाश किया।
भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दो स्वतंत्र प्रयोगशालाओं (लैब्स) द्वारा की गई फोरेंसिक जांच का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि प्रोपेगेंडा अभियान को वैज्ञानिक सबूतों द्वारा पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है। वीडियो के 1,191 फ्रेम्स के तकनीकी विश्लेषण ने निर्णायक तौर पर साबित किया है कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति सीएम भगवंत सिंह मान नहीं हैं।
‘आप’ नेताओं ने कहा कि भगवंत मान सरकार द्वारा ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट’ लागू किए जाने से बौखलाई पंथ विरोधी और पंजाब विरोधी ताकतों ने यह साजिश रची है। उन्होंने दावा किया कि इस मनगढ़ंत वीडियो को बनाने और वायरल करने वालों की पहचान करके उनकी बारीकी से जांच की जाएगी और उन्हें सख्त सजा दिलाई जाएगी।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वरिष्ठ ‘आप’ नेता और मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पिछले कई दिनों से अकाली दल के नेता एक फर्जी वीडियो वायरल करके और उसे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से झूठा जोड़कर जनता की भावनाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा, “यह सारा घटनाक्रम एक बड़ी राजनीतिक साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य एक ऐसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री को बदनाम करना था जो लगातार पंजाब के लोगों के लिए काम कर रहे हैं।”
हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “सच अब पंजाब के लोगों के सामने आ गया है। जिन लोगों ने एक मनगढ़ंत वीडियो का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की कोशिश की थी, वे पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं।”
फोरेंसिक जांच के विवरण साझा करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दो स्वतंत्र लेबोरेट्रीज ने वायरल वीडियो की बारीकी से जांच की और वे एक ही नतीजे पर पहुंचीं। फोरेंसिक विश्लेषण में वीडियो के कुल 1,191 फ्रेम्स की जांच की गई। चेहरे के नैन-नक्श, कद, शारीरिक बनावट, खड़े होने का तरीका, हिलने-डुलने के पैटर्न, साइड प्रोफाइल और बैक प्रोफाइल समेत हर पहलू का गहराई से विश्लेषण किया गया। रिपोर्टों में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला गया है कि वीडियो में दिखाया गया व्यक्ति सीएम भगवंत सिंह मान से बिल्कुल मेल नहीं खाता।
मंत्री ने बताया कि फोरेंसिक रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो में नजर आ रहे व्यक्ति का कद लगभग 5 फुट 10 इंच होने का अनुमान है, जबकि सीएम भगवंत सिंह मान का कद 5 फुट 8 इंच है। उन्होंने कहा कि शारीरिक बनावट, कंधों की बनावट, चेहरे की विशेषताओं और समग्र पोस्चर में भी बड़े अंतर पाए गए हैं हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “दोनों लेबोरेट्रीज ने स्वतंत्र तौर पर एक ही निष्कर्ष निकाला और वीडियो में दिखाई देने वाले व्यक्ति और मुख्यमंत्री के बीच कोई मेल नहीं पाया।”
अकाली दल को करारा जवाब देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पार्टी का राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों का शोषण करने का एक लंबा और दुर्भाग्यपूर्ण इतिहास रहा है, जबकि वह पंथ की मर्यादा की रक्षा करने में बार-बार नाकाम रही है। उन्होंने कहा, “पंजाब के लोग 1986 के नकोदर कांड को नहीं भूले, जब अकाली दल की सरकार के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूपों को आग के हवाले कर दिया गया था। वे उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग को भी नहीं भूले, जिसमें इंसाफ की मांग कर रहे चार सिख नौजवान शहीद हो गए थे।”
हरपाल सिंह चीमा ने आगे अकाली-भाजपा गठबंधन के शासनकाल में 2015 की बेअदबी की घटनाओं और बहबल कलां तथा कोटकपूरा में हुई पुलिस फायरिंग की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “तरीका वही है। जब भी अकाली दल और भाजपा सत्ता में थे, बेअदबी की घटनाएं हुईं और इंसाफ नहीं दिया गया। पंजाब के लोग इन दर्दनाक अध्यायों को नहीं भूले हैं।” मंत्री ने कहा कि 2015 की बेअदबी की घटनाओं के बाद सत्ता में दो साल रहने के बावजूद अकाली दल की सरकार जस्टिस जोरा सिंह कमीशन की सिफारिशों पर भी कार्रवाई करने में असफल रही। उन्होंने आगे कहा, “बाद में आई कांग्रेस सरकारों ने कई विशेष जांच टीमें (एसआईटी) बनाईं, फिर भी ‘आप’ सरकार के सत्ता में आने तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हो सकी।”
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अकाली दल ने बार-बार पंथ के नाम पर वोट मांगे हैं और खुद को पंथक हितों का रक्षक बताया है, लेकिन सरकार में उसका रिकॉर्ड अलग ही कहानी बयान करता है। उन्होंने कहा कि जब भी अकाली दल सत्ता में आया, उसकी देख-रेख में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मर्यादा को ठेस पहुंचाने वाली घटनाएं हुईं, जबकि जिम्मेदार लोगों को सुरक्षा मिलती रही। हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “अकाली दल का राजनीतिक फायदे के लिए पंथक भावनाओं का शोषण करने का इतिहास रहा है। यह पंथ के नाम पर वोट मांगता है लेकिन उन मूल्यों और सिद्धांतों को कायम रखने में बार-बार नाकाम रहता है, जिनका प्रतिनिधित्व करने का यह दावा करता है।”
भगवंत मान सरकार द्वारा की गई पहलों पर रोशनी डालते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भगवंत मान सरकार ने ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2026’ बनाया है, जिसमें बेअदबी की घटनाओं के लिए उम्रकैद और भारी आर्थिक जुर्माने समेत सख्त सजाओं का प्रावधान है। उन्होंने कहा, “जब से इस ऐतिहासिक कानून के आसपास चर्चा शुरू हुई है, कुछ ताकतें मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को निशाना बनाने और बदनाम करने की नाकाम कोशिशें कर रही हैं। यह फर्जी वीडियो उसी बड़ी साजिश का हिस्सा है।”
जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार मनगढ़ंत सामग्री तैयार करने या वायरल करने में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। उन्होंने कहा, “पंथ के खिलाफ साजिश रचना एक गंभीर अपराध है। इस फर्जी वीडियो को बनाने और वायरल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्हें ढूंढकर इंसाफ के कटघरे में लाया जाएगा, चाहे वे कहीं भी हों। इस गंदी साजिश में शामिल हर व्यक्ति को कानून के सामने जवाबदेह बनाया जाएगा।”
इस मौके पर बोलते हुए ‘आप’ पंजाब के मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने फर्जी वीडियो अभियान को भारतीय राजनीतिक इतिहास में किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को बदनाम करने की सबसे शर्मनाक कोशिशों में से एक करार दिया। उन्होंने आगे कहा, “मनगढ़ंत वीडियो को सबसे पहले पत्रकारों में इस इरादे से वायरल किया गया था कि इसे असली सामग्री के रूप में प्रसारित किया जा सके। हालांकि, जिम्मेदार पत्रकारों ने इसकी संदिग्ध प्रकृति को पहचानते हुए इस सामग्री को प्रसारित करने से इनकार कर दिया।”
बलतेज पन्नू ने कहा, “जब वे भरोसेमंद मीडिया चैनलों के जरिए फर्जी वीडियो को प्रसारित करवाने में असफल रहे, तो उन्होंने अन्य साधनों के जरिए सीएम भगवंत सिंह मान को बदनाम करने की अपनी साजिश को तेज कर दिया। भारत के राजनीतिक इतिहास में शायद यह पहली बार है कि किसी मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसी घटिया और दुर्भाग्यपूर्ण कोशिश की गई है।” बलतेज पन्नू ने कहा कि भगवंत मान सरकार सभी क्षेत्रों में नतीजे दे रही है और उसका शासन रिकॉर्ड अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने कहा, “भगवंत मान सरकार ने धर्म, जाति या क्षेत्र के आधार पर बिना किसी भेदभाव के समाज के हर वर्ग के लिए लगातार काम किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब ने निर्णायक शासन और सार्थक सुधार देखे हैं।”
पंजाब के मीडिया प्रभारी ने कहा कि 2015 के बेअदबी के मामलों और उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग की घटनाओं से संबंधित जांच में जिन लोगों के नाम आए हैं, वे इन मामलों में हो रही प्रगति से असहज थे और इसलिए झूठे प्रचार के जरिए ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कोटकपूरा गोलीकांड मामले में चल रही कानूनी कार्रवाई का भी हवाला दिया और दावा किया कि कुछ राजनीतिक नेता सीएम भगवंत सिंह मान के खिलाफ बदनामी की मुहिम चलाकर खुद को जवाबदेही से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, “पंजाब के लोग स्पष्ट तौर पर देख सकते हैं कि कौन दोषियों को बचाने की कोशिश कर रहा है और कौन इंसाफ की लड़ाई लड़ रहा है। सच अब वैज्ञानिक फोरेंसिक सबूतों के जरिए सामने आ गया है।”
अगली कार्रवाई की घोषणा करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा कि आम आदमी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) से मिलेगा और इस साजिश की व्यापक जांच की औपचारिक मांग करेगा। उन्होंने आगे कहा, “हम इस मनगढ़ंत वीडियो के पीछे मौजूद व्यक्तियों और संगठनों की गहराई से जांच की मांग करेंगे। जिन लोगों ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने, झूठी अफवाह फैलाने और पंजाब के सामाजिक सद्भाव को अस्थिर करने की कोशिश की है, उन्हें सख्त कानूनी परिणामों का सामना करना होगा।”
बलतेज पन्नू ने घोषणा की कि ‘आप’ का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही पंजाब के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) से मिलेगा और मनगढ़ंत वीडियो के पीछे की पूरी साजिश की व्यापक जांच की औपचारिक मांग करेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी धार्मिक भावनाओं को भड़काने और सीएम भगवंत सिंह मान को बदनाम करने के उद्देश्य से इस फर्जी सामग्री को तैयार करने, वायरल करने और बढ़ावा देने में शामिल हर व्यक्ति, संगठन और नेटवर्क की पहचान करने की मांग करेगी। बलतेज पन्नू ने कहा, “इस साजिश के पीछे वालों की पहचान होनी चाहिए, उन्हें बेनकाब किया जाना चाहिए और इंसाफ के कटघरे में लाया जाना चाहिए। पंजाब मनगढ़ंत प्रोपेगेंडा के जरिए सांप्रदायिक सद्भाव को भंग करने और जनता को गुमराह करने की ऐसी जानबूझकर की गई कोशिशों को बर्दाश्त नहीं कर सकता।”
दोनों नेताओं ने दोहराया कि फोरेंसिक जांच के निष्कर्षों ने वायरल वीडियो के आसपास बनाए गए झूठे आख्यान को पूरी तरह नष्ट कर दिया है और इसे बनाने तथा फैलाने वालों की पंथ विरोधी और पंजाब विरोधी राजनीति को बेनकाब कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “सच की जीत हुई है। फर्जी वीडियो बेनकाब हो चुका है। साजिश बेनकाब हो चुकी है। पंजाब के लोग उन लोगों को कभी माफ नहीं करेंगे जिन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का शोषण करने और लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री को बदनाम करने की कोशिश की।”
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‘बेअदबी’ पार्टी (अकाली दल) अपनी प्रतिष्ठा खो चुकी है, अब वह राजनीति में वापसी के लिए भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रही है: बलतेज पन्नू
आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शनिवार को कहा कि बेअदबी पार्टी (अकाली दल) और उसके प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने राजनीतिक फायदे के लिए बार-बार अपने राजनीतिक स्टैंड से समझौता किया है और अब वे भाजपा से समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं।
सुखबीर बादल पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “आज सुखबीर सिंह बादल कह रहे हैं कि वह केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा लाए जा रहे कुछ बिलों से पूरी तरह सहमत हैं। लेकिन पंजाब के लोगों को अच्छी तरह याद है कि जब कृषि कानून लाए गए थे, तो पूरा बादल परिवार उन कानूनों के पक्ष में वीडियो बनाता हुआ नजर आया था।”
बलतेज पन्नू ने कहा कि बड़े स्तर पर लोगों के गुस्से का सामना करने के बाद ही बादलों ने अपना रुख बदला और खुद को किसानों का हमदर्द दिखाने की कोशिश में कृषि कानूनों के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया।
अकाली दल की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर निशाना साधते हुए आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “‘बेअदबी’ अकाली दल पंजाब के लोगों के दिलों से पूरी तरह गायब हो चुका है। अब वह भाजपा के साथ समझौता करके अपनी राजनीति को फिर से ज़िंदा करने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।”
सुखबीर बादल के भाजपा में शामिल होने वाले नेताओं के बारे में पहले दिए गए बयान को याद करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “मैं सुखबीर सिंह बादल को उनकी ही बातें याद दिलाना चाहता हूं। उन्होंने कहा था कि जो लोग भाजपा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि किसी को अपना डीएनए टेस्ट करवाना चाहिए, लेकिन जब सुखबीर बादल ने खुद यह बयान दिया, तो आज इसका जिक्र करना बनता है।”
उन्होंने कहा कि बादल परिवार के बार-बार लिए गए यू-टर्न ने अकाली दल की राजनीति का असली चेहरा सामने ला दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग उन लोगों के बीच साफ फर्क समझ सकते हैं जो अपने उसूलों पर अड़े रहते हैं और जो राजनीतिक सुविधा के हिसाब से अपना रुख बदलते हैं।
बलतेज पन्नू ने दावा किया कि पंजाब के लोग पहले ही अकाली दल की राजनीति को नकार चुके हैं और भाजपा के साथ राजनीतिक समझौता करने की उसकी नई कोशिशों से गुमराह नहीं होंगे।
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मुक्तसर की तियां में पहुंचीं डॉ. गुरप्रीत कौर मान, महिलाओं ने चुनाव की तारीख पूछनी शुरू कर दी
मुक्तसर विधानसभा में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं के उत्साह से सराबोर तियां का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान जी की धर्मपत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुक्तसर की बड़ी संख्या में माताओं और बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. गुरप्रीत कौर मान ने महिलाओं से बातचीत की और उनके अनुभव जाने। बातचीत में मावा दीया योजना को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने बताया कि उनके खातों में ₹4,500 और ₹3,000 की राशि पहुंचने से उन्हें काफी राहत और खुशी मिली है।
महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान सरकार की योजनाओं को लेकर उनका उत्साह इतना स्पष्ट था कि बात सिर्फ योजना के लाभ तक सीमित नहीं रही—महिलाएं चुनाव की तारीख और अगला चुनाव कब होगा, यह पूछने लगीं।
माहौल ऐसा था कि मान साहब से ज्यादा अब पंजाब की इन माताओं-बहनों को चुनाव की जल्दी दिखाई दी, क्योंकि उनका कहना था कि वे जल्द से जल्द चुनाव चाहती हैं, ताकि उन्हें एक बार फिर भगवंत मान जी को अपना समर्थन देकर पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने और उनकी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने का मौका मिले।
मुक्तसर की तियां में आज पंजाबी संस्कृति और महिलाओं की खुशियों के साथ-साथ महिलाओं के मन की राजनीतिक इच्छा भी खुलकर सामने आई—उन्हें अब चुनाव का इंतजार है।
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‘गैंगस्टरां ते वार’ ने ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता सिद्ध की; गैंगस्टरों के लिए कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं : DGP गौरव यादव
पंजाब पुलिस का प्रमुख एंटी-गैंगस्टर अभियान ‘गैंगस्टरां ते वार’ संगठित अपराध के विरुद्ध राज्य में चलाए जा रहे सबसे व्यापक और निरंतर अभियानों में से एक के रूप में उभरते हुए अपने 200 दिन पूरे कर चुका है। इस अभियान के दौरान पुलिस ने पूरे पंजाब में 1,09,087 छापेमारियाँ कीं, 1,532 घोषित अपराधियों (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर्स) को गिरफ़्तार किया, 58,212 अपराधियों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई की, भारी मात्रा में अवैध हथियार और मादक पदार्थ बरामद किए तथा संगठित आपराधिक गिरोहों के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार के मार्गदर्शन में शुरू किया गया ‘गैंगस्टरां ते वार’ एक ख़ुफ़िया सूचना-आधारित अभियान है, जिसका उद्देश्य लक्षित कार्रवाई, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वय, वित्तीय जाँच तथा तकनीक-आधारित पुलिसिंग के माध्यम से संगठित अपराध गिरोहों का पूरी तरह सफाया करना है।
इस अवसर पर, डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि यह अभियान अब बहुआयामी कार्रवाई का रूप ले चुका है, जो केवल गैंगस्टरों ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध को बढ़ावा देने वाले पूरे तंत्र को भी निशाना बना रहा है। उन्होंने कहा, “‘गैंगस्टरां ते वार’ के पहले 200 दिनों ने निरंतर और ख़ुफ़िया-आधारित पुलिसिंग की प्रभावशीलता को सिद्ध किया है। हमारी रणनीति केवल गिरफ़्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित अपराध को सक्षम बनाने वाले पूरे नेटवर्क—सहयोगियों, वित्तीय स्रोतों, रसद व्यवस्था, संचार माध्यमों और विदेशों में मौजूद संपर्कों—को ध्वस्त करने पर केंद्रित है। पंजाब पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि देश के भीतर या बाहर कहीं भी संचालित होने वाले गैंगस्टरों के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना न बचे।”
इन 200 दिनों के दौरान 1,532 घोषित अपराधियों (पीओ) को गिरफ़्तार किया गया, जबकि 58,212 व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई, जिनमें 853 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 57,359 वांछित अपराधी शामिल हैं।
निवारक पुलिसिंग के तहत 28,201 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 577 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 27,624 वांछित अपराधी शामिल थे; वहीं 18,514 व्यक्तियों का वेरिफिकेशन कर उन्हें बाद में रिहा किया गया, जिनमें 1,529 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 16,985 वांछित अपराधी शामिल थे। कुल मिलाकर अभियान के दौरान 1,04,927 व्यक्ति अभियान के दौरान पुलिस कार्रवाई के दायरे में आए जिनमें 2,959 गैंगस्टर एवं उनके सहयोगी तथा 1,01,968 वांछित अपराधी शामिल हैं।
गिरफ़्तारियों के अतिरिक्त अभियान का मुख्य उद्देश्य संगठित गिरोहों की हथियारों, मादक पदार्थों, वित्तीय संसाधनों और रसद व्यवस्था तक पहुँच को समाप्त कर उनकी अपराध करने की क्षमता को कमज़ोर करना भी रहा।
इस अभियान ने संगठित अपराध गिरोहों की मारक क्षमता को भी बड़ा झटका दिया।अभियान के दौरान पंजाब पुलिस ने 990 अवैध हथियार, 242 धारदार हथियार, 2,739 कारतूस, 315 मैगज़ीन, 2.5 किलोग्राम विस्फोटक और 15 हैंड ग्रेनेड बरामद किए, जिससे आपराधिक गिरोहों की मारक क्षमता को गंभीर रूप से कमज़ोर किया गया।
साथ ही, पंजाब पुलिस ने संगठित अपराध और नशा तस्करी के गठजोड़ के विरुद्ध कार्रवाई तेज़ करते हुए 774.38 किलोग्राम हेरोइन, 480.23 किलोग्राम अफीम, 7,266.26 किलोग्राम पोस्त भूसी तथा 26,91,455 नशीली गोलियाँ बरामद कीं। पुलिस ने 1,73,41,965 रुपये की ड्रग मनी, 1,80,54,446 रुपये नकद तथा 413.85 ग्राम सोना भी ज़ब्त किया, जिससे संगठित अपराध और मादक पदार्थों के कारोबार को वित्तीय सहायता देने वाले स्रोतों पर प्रभावी प्रहार हुआ।
एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) के एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस प्रमोद बान ने कहा कि अब अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल अपराधियों की गिरफ़्तारी नहीं, बल्कि संगठित अपराध के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है। उन्होंने कहा, “आज का संगठित अपराध वित्तीय नेटवर्क, डिजिटल संचार और विदेशों में बैठे संचालकों के माध्यम से संचालित होता है। इसी कारण हमारी जाँच में फील्ड ऑपरेशन के साथ-साथ वित्तीय ट्रैकिंग, डिजिटल इंटेलिजेंस तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय शामिल है। इसी रणनीति के कारण पंजाब पुलिस रंगदारी गिरोहों का पर्दाफाश करने, विदेशों में बैठे संचालकों की पहचान करने तथा वांछित अपराधियों के निर्वासन (डीपोर्टेशन) और प्रत्यर्पण (एक्सट्राडिशन) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सफल रही है। साथ ही यह अभियान युवाओं को यह संदेश भी देता है कि गैंगस्टर संस्कृति का तथाकथित आकर्षण केवल एक भ्रम है, जिसका अंत अपराध और विनाश में होता है।”
अभियान को पड़ोसी राज्यों तथा केंद्रीय जाँच एवं ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ नियमित समन्वय का भी भरपूर सहयोग मिला, जिससे सूचनाओं के तुरंत आदान-प्रदान और संगठित अपराध के विरुद्ध संयुक्त अभियानों को गति मिली।
अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में से एक फरार गैंगस्टर भुवनेश चोपड़ा उर्फ आशीष चोपड़ा, पुत्र हीरा लाल, निवासी मकान नंबर 15, अंदरूनी दिल्ली गेट, फिरोज़पुर, को मध्य एशिया से तथा गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ जोबन बिल्ला को जकार्ता (इंडोनेशिया) से सफलतापूर्वक भारत वापस लाना रहा। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने ओएफटीईसी पंजाब तथा केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर इस अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इससे यह सिद्ध हुआ कि पंजाब पुलिस अब राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर भी वांछित अपराधियों को कानून के कटघरे में लाने में सक्षम है।
गैंगस्टरों एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई के अतिरिक्त अभियान के दौरान 64,402.77 लीटर अवैध शराब, 34,840 बोतलें तथा 926 पेटियाँ बरामद कर नष्ट की गईं। इसके अलावा अपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे 4,978 मोबाइल फोन, 1,781 वाहन और 61 ड्रोन भी ज़ब्त किए गए। इन कार्रवाइयों ने आपराधिक ढाँचे को कमज़ोर करने, संगठित अपराध के नेटवर्क को बाधित करने और पूरे पंजाब में सार्वजनिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (एजीटीएफ) ने नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 93946-93946 नंबर पर एक समर्पित टिपलाइन भी शुरू की है, जिसके माध्यम से लोग वांछित अपराधियों, गैंगस्टरों और उनसे संबंधित आपराधिक गतिविधियों की जानकारी गोपनीय और गुमनाम रूप से साझा कर सकते हैं। इस पहल के ज़रिए लोग अपनी पहचान उजागर होने के डर के बिना गोपनीय रूप से महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा कर सकते हैं, जिससे एजीटीएफ को गैंगस्टरों और अन्य अपराधियों का जल्द पता लगाकर उन्हें गिरफ़्तार करने में मदद मिलेगी।
जनसहभागिता को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से एजीटीएफ ने एक इनाम नीति भी लागू की है, जिसके तहत वांछित गैंगस्टरों और अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई में सहायक विश्वसनीय सूचना देने वालों को नकद पुरस्कार दिया जाएगा तथा उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इस पहल से पंजाब में संगठित अपराध के विरुद्ध ख़ुफ़िया-आधारित अभियानों को और अधिक मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
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