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अंतरराज्यीय सहयोग से अपराधियों और गैंगस्टरों के ख़िलाफ Punjab की लड़ाई हो रही मज़बूत

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राज्य के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पंजाब पुलिस अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर न केवल पड़ोसी राज्यों की पुलिस, बल्कि देशभर की कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है और आपसी सहयोग को मज़बूत बना रही है। गैंगस्टरों के नेटवर्क का अन्य राज्यों तक पीछा करने से लेकर संयुक्त अभियानों के निर्माण तक, पंजाब पुलिस ने गिरोहों और उनके नेटवर्क की कमर तोड़ने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। खुफ़िया जानकारी साझा करने के नेटवर्क विकसित करने और संयुक्त कार्रवाई शुरू करने के साथ-साथ पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि अपराधी भौगोलिक सीमाओं का फ़ायदा न उठा सकें।

पंजाब पुलिस के डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “हम अपने उद्देश्य को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं—अपराधी यहाँ अपराध करके बच नहीं सकते। पंजाब पुलिस उनका कहीं भी पीछा करेगी और पीड़ितों को न्याय दिलाना सुनिश्चित करेगी। ‘गैंगस्टरां ते वार’ अभियान कार्रवाई के निर्णायक 148वें दिन में प्रवेश कर चुका है और हम किसी भी हालत में अपराधियों को नहीं छोड़ेंगे। अभियान शुरू होने के बाद से 37,757 असामाजिक तत्त्वों की पहचान और गिरफ़्तारी राज्य पुलिस की अपराध से निपटने की प्रतिबद्धता और कार्यशैली को दर्शाती है। मैं अन्य राज्यों के पुलिसकर्मियों का भी आभार व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने सूचना साझा करने में हमारा सहयोग किया।”

गैंगस्टर अक्सर एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य में अपराधों को अंजाम देते हैं, जबकि नशा तस्कर भी विभिन्न राज्यों के रास्ते मादक पदार्थों की तस्करी करते हैं। अब तक कुल 68,682 नशा तस्करों की गिरफ़्तारी के साथ पंजाब पुलिस ने अपने सबसे प्रभावी हथियारों में से एक—अंतरराज्यीय सहयोग—को और मज़बूत बनाया है।

यह रणनीति राज्य के चल रहे ‘गैंगस्टरां ते वार’ अभियान का प्रमुख स्तंभ बन चुकी है, जिसके तहत पंजाब पुलिस केवल व्यक्तिगत अपराधियों को ही नहीं बल्कि संगठित अपराध को समर्थन देने वाले पूरे तंत्र को निशाना बना रही है।

अंतरराज्यीय सहयोग के तहत प्रमुख सफलताएँ

  • इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) समर्थित जासूसी एवं आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़:

सबसे महत्त्वपूर्ण सफलताओं में से एक आईएसआई समर्थित जासूसी और आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करना रहा, जिसका संबंध बब्बर खालसा इंटरनेशनल से बताया गया। पंजाब और दिल्ली में संयुक्त रूप से चलाए गए इस अभियान में 11 आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया। जाँच में एक ऐसे संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ, जो सुरक्षित संचार माध्यमों और रिमोट संचालित कैमरों के ज़रिए संवेदनशील सूचनाएँ जुटाकर सीमा पार अपने संचालकों तक पहुँचाता था।

  • गैंगस्टर सिंडिकेट्स के ख़िलाफ कार्रवाई:

इसी रणनीति के तहत पंजाब पुलिस ‘गैंगस्टरां ते वार’ अभियान में गैंगस्टर नेटवर्कों के ख़िलाफ लगातार कार्रवाई कर रही है। विशेष रूप से लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से जुड़े गिरोह विभिन्न राज्यों में सक्रिय नेटवर्क बनाए रखते हैं और गिरफ़्तारी से बचने के लिए अंतरराज्यीय आवाजाही का सहारा लेते हैं।

  • दिल्ली में कार्रवाई:

इस वर्ष की शुरुआत में विभिन्न राज्य पुलिस-बलों के संयुक्त प्रयासों से दिल्ली में लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े कई गैंगस्टरों को गिरफ़्तार किया गया।

  • गोल्डी बराड़ के वसूली मॉड्यूल का पर्दाफ़ाश:

इसी अवधि में पंजाब पुलिस ने गोल्डी बराड़ से जुड़े एक फिरौती वसूली नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ़्तार किया और पंजाब से बाहर तक फैले नेटवर्क को ध्वस्त किया।

  • अंतरराज्यीय लूटपाट गिरोह का भंडाफोड़:

हाल ही में खन्ना पुलिस ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में चोरी, लूट और स्नैचिंग की घटनाओं में शामिल एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया। पुलिस के बीच बेहतर तालमेल और सहयोग के बाद आरोपियों को उत्तर प्रदेश से गिरफ़्तार किया गया।

  • ड्रोन तस्करी नेटवर्क का पर्दाफ़ाश:

उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और पंजाब पुलिस के संयुक्त अभियान में पंजाब के एक फरार आरोपी को गिरफ़्तार किया गया, जो पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से अवैध हथियार और मादक पदार्थ भारत में पहुँचाने वाले सीमा-पार नेटवर्क से जुड़ा था।

  • जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ संयुक्त अभियान:

हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस और पंजाब पुलिस के संयुक्त अभियान में अमृतसर के एक फ्लैट से एक AK-47 राइफल, एक पिस्तौल और लगभग 500 ग्राम नशीला पदार्थ बरामद किया गया। एक वांछित फरार आरोपी के संबंध में जम्मू पुलिस को मिली विशेष खुफ़िया सूचना के आधार पर यह अभियान शुरू किया गया। सूचना पर कार्रवाई करते हुए जम्मू पुलिस और पंजाब पुलिस की संयुक्त टीमों ने फ्लैट पर छापेमारी की और हथियारों तथा नशीले पदार्थों को बरामद किया।

डीजीपी गौरव यादव ने कहा, “अपराधी और राष्ट्रविरोधी तत्त्व अक्सर राज्य की सीमाओं से परे काम करते हैं, इसलिए पुलिसिंग को भी सीमाओं से ऊपर उठकर कार्य करना होगा। ‘गैंगस्टरां ते वार’ अभियान के तहत पंजाब पुलिस ने देशभर की सहयोगी एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल की रणनीति अपनाई है। हमारा संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—पंजाब की शांति और सौहार्द को चुनौती देने वालों को कहीं भी सुरक्षित ठिकाना नहीं मिलेगा, चाहे वे कहीं भी छिपे हों।”

पंजाब पुलिस के लिए यह सहयोगात्मक दृष्टिकोण संगठित अपराध के ख़िलाफ उसकी लड़ाई की एक महत्त्वपूर्ण पहचान बनकर उभर रहा है और राज्य में जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

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नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा; शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया

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प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने आज कहा कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे, वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है और पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था।

विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री स. हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया।

बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे।

किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, “अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं।”

अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए स. बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है, जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है।

स. हरजोत बैंस ने कहा, “जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं।” उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में स. हरजोत बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।

उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार की शिक्षा क्रांति ने विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है।” स. बैंस ने आगे कहा कि मजीठा में सरकारी स्कूलों के छह विद्यार्थियों और दीनानगर में 17 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। ये कोई प्राइवेट कोचिंग के आंकड़े नहीं, बल्कि हमारे सरकारी स्कूलों की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने एक साधारण परिवार से संबंधित लड़की हरनूरप्रीत कौर का विशेष जिक्र किया, जिसने अपनी श्रेणी में ऑल इंडिया रैंक 3140 हासिल की, जो आज के सरकारी स्कूलों की काबिलियत को दर्शाता है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने पलटवार किया, “अगर आप चाहते हैं तो मुझे व्यक्तिगत तौर पर निशाना बनाएं। सरकारी स्कूलों को क्यों निशाना बना रहे हो? कुछ नकारात्मक सोच वाले लोगों द्वारा गढ़े गए झूठे प्रचार ने लोगों को पहले ही सरकारी स्कूलों से दूर कर दिया है।”

सरकारी स्कूलों में घटती दाखिला दर से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए स. बैंस ने कहा कि यह रुझान सिर्फ पंजाब तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कोविड के बाद देश भर में देखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ऑल इंडिया आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले की संख्या 1.76 करोड़ तक घटी है। कोविड के दौरान, सरकारी स्कूलों में दाखिला वास्तव में बढ़ा था। परंतु उसके बाद, हर जगह यह संख्या घटी है।”

उदाहरण देते हुए स. बैंस ने कहा कि बिहार में 2.49 करोड़ विद्यार्थी थे, जो पहले घटकर 2.13 करोड़ रह गए और इस साल यह और घटकर 1.95 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में, यह संख्या पहले 4.44 करोड़ से घटकर 4.16 करोड़ हो गई है, जो इस साल 4.1 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके अलावा महाराष्ट्र में यह संख्या 2.32 करोड़ से घटकर 2.13 करोड़ रह गई।

स. बैंस ने कहा, “उन्होंने भारत सरकार की 2023 में शुरू की गई अपार आई.डी. पहल का भी हवाला दिया। ‘अब हर विद्यार्थी के पास एक अनोखी आई.डी. है। पहले एक बच्चा छह स्कूलों में दाखिल होता था परंतु किसी में भी नहीं पढ़ रहा था। इसी कारण अब ये आंकड़े सही हो रहे हैं।’”

शिक्षा मंत्री ने विस्तार से बताया कि 19,125 सरकारी स्कूलों में 2,638 करोड़ रुपये के बुनियादी ढांचे के काम किए गए हैं। इस साल विश्व बैंक से और सुधारों के लिए 1,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मंजूरी ली गई है।

स. हरजोत बैंस ने कई ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ की सूची दी, जिनका पूरी तरह कायाकल्प किया गया है। उन्होंने लुधियाना के शहीद सुखदेव थापर के नाम पर बने स्कूल ऑफ एमिनेंस का हवाला दिया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि कभी इसे पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “आज इस स्कूल को विश्व स्तरीय बनाने के लिए 18 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस साल स्कूल के 17 विद्यार्थी नीट परीक्षा भी पास कर चुके हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार सरकारी स्कूलों को आखिरी विकल्प से पहली पसंद में बदल रही है। हम यहीं नहीं रुक रहे। हम हर साल और ऊंचे लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं।

स. बैंस ने कहा, “शिक्षकों को अब सरकारी स्कूल चलाने के लिए फंड मांगने की जरूरत नहीं। हमने स्कूलों के लिए आवश्यक फंड मुहैया करवाए हैं, पिछली सरकारों की तरह नहीं जब शिक्षकों को फंड मांगने जाना पड़ता था। अपमान का दौर अब खत्म हो गया है।”

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केजरीवाल की मोदी सरकार को चुनौती, E-20 पर कोई रिसर्च रिपोर्ट है तो सार्वजनिक करे

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल मोदी सरकार से ई-20 लागू करने से पहले की कोई वैज्ञानिक रिसर्च रिपोर्ट है तो उसे सार्वजनिक करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ई-20 बिना वैज्ञानिक अध्ययन के ही लागू किया, अब वैसे ही ये लोग ई-50 भी लागू कर देंगे। इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले को धमका कर चुप करा दिया जा रहा है। इसकी असल वजह ये है कि मोदी जी ट्रम्प के दबाव में हैं और इसी कारण तमाम वैज्ञानिक सबूतों के खिलाफ जाकर जबरदस्ती देश पर एथेनॉल थोप रहे हैं। मोदी जी ने कभी साइंस, इंजीनियरिंग या रिसर्च का सम्मान नहीं किया। वे सिर्फ अपना हिडन एजेंडा पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार डीजल में भी मिलावट करने वाली है। इसलिए लोग अभी कुछ वर्ष पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियां खरीदने से बचें।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-20 से आगे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। भविष्य में यदि कभी ऐसा प्रस्ताव आता भी है, तो वह व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन, तकनीकी परीक्षण और वाहन निर्माताओं, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों तथा अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद ही होगा। ई-20 कोई जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला नहीं है। भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम दो दशकों से अधिक समय से चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा है। ई-20 लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण और सभी संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा किया गया।

अरविंद केजरीवाल ने भाजपा नेता अमित मालवीय पर पलटवार करते हुए कहा कि आप ख़ुद ही कह रहे हैं कि ई-20 से आगे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का “अभी” कोई निर्णय नहीं लिया गया है। आप माहौल ठंडा होने का इंतज़ार कर रहे हैं। जैसे ही माहौल ठंडा होगा, आप उसे लागू कर देंगे। मुझे खुशी है कि आपने स्वीकार किया कि निर्णय “अभी” नहीं लिया गया।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जैसे ई-20 बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के लागू किया गया, किसी की नहीं सुनी गई, धमकियां देकर सबको चुप करवा दिया गया, वैसे ही आप ई-50 भी लागू कर देंगे। यही आपका काम करने का स्टाइल है। आप कहां विज्ञान, साइंस और इंजीनियरिंग को मानते हैं। अगर आपने ई-20 लागू करने के पहले कोई अध्ययन करवाया है तो उनकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं करते? छुपा क्यो रहे हैं?

अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि मोदी सरकार का क्या प्लान है? पता चल रहा है कि पेट्रोल में 50 फीसद से ज्यादा की मिलावट करेंगे। अभी बस माहौल शांत होने का इंतज़ार कर रहे हैं। पहले आपकी ई-0 और ई-10 गाड़ियों में ज़बरदस्ती ई-20 पेट्रोल डालकर कबाड़ा किया। आज अगर आप ई-20 नई गाड़ी खरीदते हैं तो सरकार कुछ दिन बाद उसमे ज़बरदस्ती ई-50 पेट्रोल डालकर उसका कबाड़ा कर देगी। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही डीजल में भी मिलावट करने वाली है। इसलिए अभी कुछ वर्ष आप पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियां खरीदने से बचें।

एक अन्य पोस्ट में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने सियाम को अपनी रिपोर्ट वापस लेने के लिए मजबूर किया। यह मोदी जी का टिपिकल गुंडागर्दी वाला स्टाइल है। मोदी जी ने कभी साइंस, इंजीनियरिंग या रिसर्च का सम्मान नहीं किया, वे केवल अपना हिडन एजेंडा पूरा करते हैं। मोदी जी अमेरिका से एथेनॉल खरीदने के लिए ट्रंप के दबाव में हैं। उस दबाव को बर्दाश्त न कर पाने की वजह से वे तमाम वैज्ञानिक सबूतों के खिलाफ जाकर पूरे देश पर जबरदस्ती एथेनॉल थोप रहे हैं।

मोदी सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल में भी इथेनॉल मिलाने की बना रही योजना- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सूत्रों से पता चला है कि मोदी सरकार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) में भी एथेनॉल मिलाने की योजना बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उड़ानों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।

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मोदी सरकार के दबाव में पेपर लीक और E-20 के खिलाफ उठ रही आवाज को दबा रहा मेटा- केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मेटा इंडिया की ओर से उनके इंस्टाग्राम अकाउंट को भारत में सीमित करने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के दबाव में मेटा पेपर लीक और ई-20 पेट्रोल के खिलाफ उठ रही हर आवाज को दबा रहा है। मेरी तरह ही मोदी सरकार के खिलाफ बोलने वाले बहुत सारे लोगों के अकाउंट को सीमित कर दिया गया है। उन्होंने देश भर के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिनका अकाउंट सीमित किया गया है, वे मुझे डीएम करें या कमेंट में लिखकर भेजे, ताकि हम सब मिलकर मेटा और इंस्टाग्राम पर दबाव डाल सकें कि वह ऐसी बदमाशी न करें और मोदी जी के सामने इस तरह से घुटने न टेकें।

अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर एक वीडियो जारी कर कहा कि इंस्टाग्राम वालों ने मुझे नोटिस भेजा है कि मेरे अकाउंट को भारत में सप्रेस और सीमित कर दिया गया है। मैंने वहां फोन करके पता करने की कोशिश की कि ऐसा क्यों किया गया, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया। मैंने पूछा कि इसे कैसे ठीक कराएं, लेकिन किसी ने कुछ नहीं बताया। मैंने ईमेल भेजा, लेकिन उसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर ये लोग मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं, तो आम लोगों के साथ पता नहीं क्या कर रहे होंगे। जैसे ही मैंने इस बात को उठाया, बहुत सारे लोगों के मैसेज और फोन आ रहे हैं कि उनका अकाउंट भी सप्रेस कर दिया गया है। पता चला है कि केंद्र सरकार मेटा और इंस्टाग्राम पर दबाव डाल रही है कि जो भी मोदी जी के खिलाफ कुछ बोले, जो एथेनॉल पर कुछ बोले या जो पेपर लीक पर कुछ बोले, उनके अकाउंट को सप्रेस कर दिया जाए।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मेरी सब लोगों से गुजारिश है कि अगर किसी का अकाउंट भी इस तरह से सप्रेस किया जा रहा है या ऐसा लग रहा है, तो मुझे डीएम करके या कमेंट में लिखकर भेजें। मैं एक साथ मिलकर लोगों के मुद्दे को भी उठाऊंगा। सब एक साथ मिलकर मेटा और इंस्टाग्राम को फोर्स करेंगे कि वे इस तरह की बदमाशी न करें और मोदी जी के सामने इस तरह से घुटने न टेकें।

अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर मेटा और मेटा इंडिया को टैग करते हुए पूछा कि आपने मेरा अकाउंट क्यों रिस्ट्रिक्ट कर दिया है? भारत स्थित मेटा के दफ्तर में मौखिक पूछताछ से पता चला है कि मेरा अकाउंट भारत में रिस्ट्रिक्ट कर दिया गया है और भारत में उपलब्ध नहीं है। आखिर ऐसा क्यों किया गया है? मेटा के दफ्तर में कोई भी इसका कारण नहीं बता रहा है और न ही कोई यह बता रहा है कि यह रिस्ट्रिक्शन कैसे हटाया जा सकता है। भेजे गए सभी ईमेल का रूटीन एकनॉलेजमेंट के अलावा कोई जवाब नहीं मिला है। यह बहुत ही खराब सर्विस है। उन्होंने मेटा से कहा कि मेटा, हमारे प्रधानमंत्री के सामने इतना न झुके, वरना वे भारत में मेटा को केवल अपना ही अकाउंट चलाने की अनुमति देंगे।

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