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गुरु नगरी में Corona का कहर, अब सरकारी मेडिकल कॉलेज का वरिष्ठ अधिकारी Positive

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अमृतसरः कोरोना वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही इस बार अमृतसर के लोगों पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि लंदन से आई एक महिला का टेस्ट पॉजिटिव आने की जानकारी विभाग को नहीं मिली, लेकिन अब एक वरिष्ठ नागरिक सरकारी मेडिकल कॉलेज के अधिकारी का टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद यह मामला भी स्वास्थ्य विभाग के ध्यान में भी नहीं है। महिला का जहां निजी प्रयोगशाला से आर.टी.पी.सी. आर. कराया गया, वहीं अधिकारी का रैपिड टेस्ट कराया गया, जिसमें वह पॉजिटिव आए हैं। ये दोनों मामले विभाग के ध्यान में नहीं हैं। यही नहीं सरकारी अस्पतालों में वायरस से संबंधित लक्षण वाले मरीज बड़ी संख्या में आने के बाद से ही विभाग इस वायरस की जांच शुरू नहीं कर पाया है।

जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना वायरस को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर सावधानियां बरतने को कहा है, लेकिन विभाग द्वारा ये सावधानियां सिर्फ दस्तावेजों में ही लागू की जा रही हैं, जबकि हकीकत यह है कि जिले में इस वायरस की रोकथाम के लिए जहां कोई तैयारी नहीं है, वहां वायरस के मामले सामने आने के बाद विभाग के पास कोई पॉजिटिव केस नहीं आया है।

एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने वाला यह वायरस अधिकारियों की लापरवाही के कारण आसानी से दूसरों में फैल जाएगा और इसी तरह यह वायरस अपना घिनौना रूप धारण कर बड़ी संख्या में लोगों को अपनी चपेट में ले लेगा। लंदन की एक महिला जिसका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था, जब उसका निजी तौर पर परीक्षण किया गया तो वह भी संक्रमित पाई गई।

तब भी पंजाब केसरी ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, लेकिन दुर्भाग्यवश आधिकारिक तौर पर न तो महिला का सैंपल लिया गया और न ही उसके संपर्क में आए लोगों का सैंपल लिया गया। महिला ठीक हो गई है और उसे छुट्टी दे दी गई है, लेकिन उसके संपर्क में आए किसी भी व्यक्ति का कोई सैंपल नहीं लिया गया है।

अब राजकीय मेडिकल कॉलेज के एक वरिष्ठ अधिकारी कोरोना पॉजिटिव आए हैं। खांसी, जुकाम, बुखार की शिकायत थी, जब अधिकारी ने खुद अपना रैपिड टेस्ट कराया तो वह पॉजिटिव आया। पंजाब के स्वास्थ्य विभाग ने इस वायरस के प्रभाव से बचने के लिए सरकारी अस्पतालों में कर्मचारियों और डॉक्टरों के लिए मास्क पहनना बेहद जरूरी कर दिया है और आम लोगों में फैल रहे इस वायरस को रोकने के लिए विभाग गंभीरता नहीं दिखा रहा है। जिले में विभाग की कार्यशैली पर दो नए मामले सामने आने से कई सवाल उठने लगे हैं कि क्या विभाग के अधिकारी काम करना नहीं, बल्कि मोटी तनख्वाह लेना जानते हैं? अगर वायरस तेजी से फैला तो स्वास्थ्य विभाग को इसे संभालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

सरकारी मेडिकल कॉलेज में एक वरिष्ठ अधिकारी के रैपिड टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने बायोमेट्रिक अटेंडेंस बंद नहीं की। डॉक्टर क्लास में शामिल होने के लिए बायोमेट्रिक पर एक के बाद एक अंगुलियों के जरिए हाजिरी लगा रहे हैं और कई बार अटेंडेंस के दौरान वहां भीड़ जमा हो जाती है। अधिकांश डॉक्टर इलाज के बाद हाथ साफ नहीं करते। डॉक्टर इस वायरस से लड़ने में अग्रिम पंक्ति में हैं और उनके पास अधिक लक्षण वाले मामले आ रहे हैं।

सरकारी अस्पतालों में कोरोना वायरस के लक्षण वाले मरीज बड़ी संख्या में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गाइडलाइन जारी करने के बाद सरकारी डॉक्टर यह जानने का इंतजार कर रहे हैं कि आर.टी.पी.सी.आर. सैंपल कब लिए जाएंगे। ओ.पी.डी. ज्यादातर सरकारी डॉक्टरों ने इस बात की पुष्टि की है कि राज्य में बड़ी संख्या में लक्षण वाले मरीज आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर विभाग समय पर सैंपल लेने की प्रक्रिया शुरू कर दे तो वायरस को आगे फैलने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि परीक्षण की कमी के कारण, वायरस के लक्षण वाले मरीज, जिनके सकारात्मक होने की संभावना है, एक-दूसरे को वायरस उपहार में देते हैं और समुदाय में वायरस फैलाएंगे।

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25 लाख का जुर्माना और उम्र कैद की सजा… क्या है जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन विधेयक?

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पंजाब सरकार ने बैसाखी के पावन अवसर पर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ को विधानसभा में पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़े मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना और इसकी पवित्रता की रक्षा के लिए मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान, जो गृह विभाग भी संभाल रहे हैं, ने यह विधेयक सदन में पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए यह कानून बेहद जरूरी है और इसमें पहले से कहीं अधिक सख्त प्रावधान किए गए हैं। 

प्रस्तावित कानून के अनुसार, बेअदबी के मामलों में न्यूनतम सात साल की सजा का प्रावधान रखा गया है, जिसे 20 साल तक बढ़ाया भी जा सकता है। इसके साथ ही दोषियों पर दो लाख रुपए से लेकर दस लाख रुपए तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साजिश के तहत सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से इस तरह का अपराध करता है, तो उसके लिए और भी कड़ी सजा तय की गई है। ऐसे मामलों में दोषी को दस साल से लेकर उम्रकैद (मृत्यु तक) जेल में रहना होगा। इसके अलावा 5 लाख से 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध में सहयोग करने या प्रयास करने वालों को भी सख्त सजा दी जाएगी। प्रयास करने पर तीन से पांच साल की सजा और एक से तीन लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

इस विधेयक में बेअदबी के अपराध को गैर-जमानती और संज्ञेय (कॉग्निज़ेबल ऑफेंस) बनाया गया है, जिससे पुलिस बिना वारंट के कार्रवाई कर सकेगी। ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी और जांच केवल डीएसपी या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारियों द्वारा ही की जाएगी।

जानें क्या खास है इस विधेयक में-

परंपराओं के अनुरूप शब्दावली: 

संशोधन के तहत कानून की भाषा में भी बदलाव किया गया है। पहले जहां “बीड़” शब्द का उपयोग होता था, उसे बदलकर “स्वरूप” किया गया है, ताकि धार्मिक परंपराओं के अनुरूप शब्दावली का इस्तेमाल किया जा सके।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई, प्रकाशन, भंडारण और वितरण केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी या उसके अधिकृत संस्थानों द्वारा ही किया जाएगा।

संरक्षक करेंगे स्वरूप की सुरक्षा:

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस कानून में “संरक्षक” की परिभाषा भी जोड़ी गई है, जिसमें उन व्यक्तियों या संस्थाओं को शामिल किया गया है जो सरूप की देखभाल और मर्यादा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनके लिए यह अनिवार्य होगा कि वे सरूप की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की क्षति या बेअदबी की आशंका होने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

हर स्वरूप का रखा जाएगा रिकॉर्ड: 

विधेयक के तहत एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि सभी सरूपों का एक केंद्रीय रजिस्टर तैयार किया जाएगा। इसमें हर सरूप को एक विशेष पहचान संख्या दी जाएगी और उसकी छपाई, स्थान, भंडारण और संरक्षक की जानकारी दर्ज की जाएगी। यह रजिस्टर भौतिक और डिजिटल दोनों रूपों में रखा जाएगा और इसे निर्धारित समय के भीतर सार्वजनिक भी किया जाएगा।

बेअदबी की परिभाषा में बदलाव:

बेअदबी की परिभाषा को भी इस कानून में विस्तारित किया गया है। इसमें न केवल भौतिक नुकसान जैसे जलाना, फाड़ना या चोरी करना शामिल है, बल्कि किसी भी प्रकार के मौखिक, लिखित, प्रतीकात्मक या डिजिटल माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य को भी इसमें शामिल किया गया है।

जानें क्यों नहीं राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विधानभा में बताया कि यह कानून 2008 के मौजूदा अधिनियम में संशोधन के रूप में लाया गया है और इसे लागू करने की तिथि राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर तय की जाएगी।

पहले भी इस तरह के विधेयक लाए गए थे, लेकिन उन्हें मंजूरी नहीं मिल सकी। इस बार सरकार ने इसे और अधिक स्पष्ट, सख्त और प्रभावी बनाकर पेश किया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि यह एक राज्य का कानून है और इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक नहीं है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद इसे लागू किया जा सकेगा। 

सरकार का मानना है कि यह विधेयक न केवल धार्मिक पवित्रता की रक्षा करेगा, बल्कि पंजाब में शांति, कानून व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जानें पहले कब बेअदबी कानून पर हुए प्रयास

पंजाब में पवित्र ग्रंथों के सम्मान और बेअदबी के मामलों पर सख्त कानून बनाने को लेकर पिछले डेढ़ दशक में लगातार प्रयास होते रहे हैं। अलग-अलग सरकारों ने समय-समय पर कानून बनाए या संशोधन लाने की कोशिश की, लेकिन कई बार इन्हें अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी।

2008 अकाली-भाजपा सरकार का मूल कानून: 

साल 2008 में अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम’ लागू किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रुर ग्रंथ साहिब की गरिमा और सम्मान को बनाए रखना था। 

इस कानून के तहत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को गुरु ग्रंथ साहिब के सरूपों की छपाई और वितरण का विशेष अधिकार दिया गया। उल्लंघन पर अधिकतम 2 साल की सजा या 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान था। हालांकि, इसमें बेअदबी के लिए कड़ी सजा का प्रावधान नहीं था।

2016 में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने किए प्रयास:

 साल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की अगुआई में सरकार ने नए संशोधन विधेयक पेश किए। इनका उद्देश्य बेअदबी के दोषियों को उम्रकैद तक की सजा देना था।

लेकिन केंद्र सरकार ने इन्हें यह कहते हुए लौटा दिया कि प्रस्ताव में केवल एक धर्म के पवित्र ग्रंथ को ही विशेष संरक्षण देने की बात है, जो संवैधानिक संतुलन के अनुरूप नहीं है।

2018 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के समय भी हुए प्रयास: 

साल 2018 में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की सरकार ने संशोधित विधेयक पेश किया। इसमें भगवत गीता, कुरान और बाइबल को भी शामिल किया गया। पंजाब विधानसभा ने इसे पारित कर दिया, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी न मिलने के कारण यह कानून लागू नहीं हो सका।

2023-24 में नए आपराधिक कानून से बदलाव के कारण देश में पुराने आपराधिक कानून इंडियन पीनल कोड की जगह भारतीय न्याय संहिता लागू हो गई। चूंकि 2018 का विधेयक पुराने कानून पर आधारित था, इसलिए वह अप्रासंगिक हो गया और आगे नहीं बढ़ पाया।

2025 में आम आदमी पार्टी का नया विधेयक पेश:

 साल 2025 में आम आदमी पार्टी सरकार ने ‘पंजाब पवित्र ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक’ पेश किया। इसमें सभी प्रमुख धर्मों के ग्रंथों को शामिल करते हुए सजा 10 साल से लेकर उम्रकैद तक रखने का प्रस्ताव दिया गया। इस विधेयक को आगे विचार के लिए चयन समिति को भेज दिया गया।

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CM मान ने पंजाब विधानसभा में पेश किया बेअदबी पर देश का सबसे सख्त कानून, उम्रकैद की सजा तक का है प्रावधान

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 पंजाब विधानसभा के सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए अहम विधेयक सदन में पेश किया गया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष से अपील की कि वह वॉक आउट न करे और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा में भाग ले। बिल पेश होने के बाद सदन में इस पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है।

विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने सरकार से मांग की कि पिछले वर्ष गठित सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट पहले सदन में पेश की जाए। उन्होंने कहा कि कमेटी को बने नौ महीने हो चुके हैं, इसलिए उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने सत्र की अवधि एक दिन बढ़ाने का सुझाव भी दिया। इस पर स्पीकर ने जवाब देते हुए कहा कि कमेटी अपना कार्य कर रही है और उचित समय पर रिपोर्ट सदन के समक्ष रखी जाएगी।

वहीं मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह एक व्यापक और पवित्र कानून है, जिसमें बेअदबी के मामलों की जांच तय समय सीमा में पूरी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच किसी भी स्थिति में उच्च स्तर से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाएगी और इसमें किसी तरह का समझौता नहीं होगा।

कैबिनेट द्वारा पहले ही मंजूर किए जा चुके इस संशोधन विधेयक में ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार अधिनियम-2008’ को और मजबूत बनाने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित संशोधन के तहत बेअदबी के दोषियों के लिए उम्रकैद जैसी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।

session

सदन में उपस्थित सभापति कुलतार सिंह संधवां।

उद्देश्य: धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा करना

इस सत्र में सबसे अहम मुद्दा रहा श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी से जुड़ा प्रस्तावित नया कानून। कैबिनेट द्वारा पहले ही मंजूरी दिए गए इस विधेयक को अब विधानसभा में पेश किया गया है। इसका नाम ‘जागत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक 2026′ रखा गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता की रक्षा करना और बेअदबी जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना है।

संशोधन समय की जरूरत 

सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे समाज में गहरी नाराजगी और तनाव की स्थिति पैदा हुई है। इन घटनाओं ने न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित किया है। सरकार ने यह भी कहा कि मौजूदा कानूनों में ऐसे मामलों के लिए सज़ा पर्याप्त कठोर नहीं है, इसलिए सख्त संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई।

inside

ये तस्वीर AI द्वारा तैयार की गई है।

कई कठोर दंडात्मक प्रावधान भी हैं शामिल

प्रस्तावित संशोधन के तहत बेअदबी के मामलों में दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा अन्य कठोर दंडात्मक प्रावधान भी शामिल किए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। सरकार का दावा है कि यह कानून समाज में शांति, भाईचारे और धार्मिक सम्मान को मजबूत करेगा।

मंत्रिमंडल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी भी समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि धार्मिक पवित्रता और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है। विधेयक के अनुसार, जानबूझकर धार्मिक ग्रंथों की अवमानना करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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CM भगवंत सिंह मान के प्रयास रंग लाए, केंद्र द्वारा कंटीली तार को अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक लगाने का आदेश, लाखों किसानों को होगा लाभ

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Punjab News: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप केंद्र सरकार ने सीमावर्ती कंटीली तार को अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया है। इस फैसले से उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, जो लंबे समय से सीमा सुरक्षा बल की सख्त पाबंदियों के तहत खेती करने को मजबूर थे।

फसल चुनने की स्वतंत्रता और सीमित समय व बार-बार होने वाली सुरक्षा जांच से राहत मिलेगी

सीमावर्ती जिलों में सर्वेक्षण के आदेश दिए गए हैं। इस कदम से लाखों एकड़ भूमि तार के अंदर आ जाएगी, जिससे किसानों को अधिक पहुंच, अपनी पसंद की फसल चुनने की स्वतंत्रता और सीमित समय व बार-बार होने वाली सुरक्षा जांच से राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमने यह मुद्दा कई बार केंद्रीय गृह मंत्री के समक्ष उठाया कि सीमा के पास रहने वाले किसानों के लिए पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ बाड़ भारतीय क्षेत्र में तीन से चार किलोमीटर अंदर लगाई गई है, जिसके कारण उनके खेत बाड़ के पार रह जाते हैं।”

किसानों को आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “किसानों को बीएसएफ द्वारा निर्धारित समय के दौरान ही बाड़ पार कर खेती करने की अनुमति दी जाती है। वे सुबह 9 बजे से पहले नहीं जा सकते। उनकी तलाशी ली जाती है और उनके साथ सुरक्षा बल तैनात रहते हैं ताकि कोई तस्करी या अवैध सामग्री वापस न लाई जा सके। शाम 4 बजे के बाद उन्हें खेतों में रहने की अनुमति नहीं होती और लौटते समय फिर से उनकी जांच होती है। इस प्रक्रिया में सुरक्षा बलों का काफी समय अपने ही नागरिकों की जांच में व्यतीत हो जाता है।”

केंद्रीय गृह मंत्री ने आश्वासन दिया था कि इसका जल्द समाधान किया जाएगा

उन्होंने आगे कहा, “हमने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था और केंद्रीय गृह मंत्री ने आश्वासन दिया था कि इसका जल्द समाधान किया जाएगा। किसानों को लंबे समय से अपने खेतों तक पहुंचने के लिए पहचान पत्रों और बीएसएफ की निगरानी में बाड़ पार करनी पड़ रही है, जिससे उन्हें 532 किलोमीटर लंबी भारत-पाकिस्तान सीमा पर रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।”

उन्होंने आगे जानकारी दी कि “अब पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फाजिल्का और फिरोजपुर सहित सीमावर्ती जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को सर्वेक्षण करने और यह आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं कि नियमों के अनुसार बाड़ को अंतरराष्ट्रीय सीमा के कितने नजदीक लाया जा सकता है। एसडीएम को भी सर्वेक्षण के लिए कहा गया है, ताकि 300 मीटर क्षेत्र की स्पष्ट पहचान कर इस निर्णय को समयबद्ध तरीके से लागू किया जा सके।”

इस निर्णय के लाभों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “लाखों एकड़ भूमि बाड़ के अंदर आ जाएगी, जिससे किसान स्वतंत्र रूप से खेती कर सकेंगे।”

सुरक्षा और राहत के पहलुओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “इससे बीएसएफ के लिए भी कार्य आसान होगा, क्योंकि सीमा के अधिक निकट होने से निगरानी मजबूत होगी और समाज विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। मैं इस पावन अवसर पर घोषणा करता हूं कि इस निर्णय से लाखों किसानों को लाभ होगा।”

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