Punjab
Punjab में बारिश और आंधी से गर्मी से राहत, कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी
पंजाब में बीते कुछ दिनों से लोगों को तेज गर्मी से राहत मिल रही है। राज्य के कई इलाकों में लगातार तेज हवाओं और बारिश का दौर जारी है, जिससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।
रविवार को भी राज्य के कई जिलों में बारिश हुई। मौसम विभाग ने आज (5 मई) के लिए भी आंधी और बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। जानकारी के अनुसार, रोपड़ में 16 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं, अमृतसर में 5.0 मिमी, लुधियाना में 1.0 मिमी और पठानकोट में 4.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बारिश की वजह से औसत तापमान में 3.1 डिग्री की गिरावट आई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, पंजाब में सबसे ज्यादा तापमान बठिंडा में 38.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण देखा जा रहा है।
रविवार को दिनभर बादल छाए रहे। दिन के तापमान की बात करें तो अमृतसर में अधिकतम तापमान 32.9 डिग्री, लुधियाना में 32.3 डिग्री, पटियाला में 36.4 डिग्री, फरीदकोट में 32.2 डिग्री, होशियारपुर में 35.7 डिग्री, नूरमहल (जालंधर) में 35.6 डिग्री और मोहाली में 35.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, चंडीगढ़ की चेतावनी के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों में पंजाब के कई जिलों में तेज हवाएं (40 से 60 किमी प्रति घंटा), आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।
5 मई को हिमाचल से सटे पंजाब के जिलों — पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर, मोहाली, संगरूर और मानसा — में बारिश और आंधी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि बाकी जिलों में येलो अलर्ट लागू है। इसके अलावा, 8 मई तक भी कई जिलों में बारिश और तूफान के लिए येलो अलर्ट जारी रहेगा।
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मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली कैबिनेट की ओर से लैंड पूलिंग के लाभों में वृद्धि
ज़मीन मालिकों की चिंताओं को दूर करने और ज़मीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को अधिक लाभ देने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने ज़मीन मालिकों के लाभों से संबंधित मौजूदा नीति में संशोधनों को मंजूरी दे दी है तथा राहत के लिए कई अन्य कदमों की भी शुरुआत की है।
यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान लिया गया।
ज़मीन अधिग्रहण के दौरान ज़मीन मालिकों के लिए बढ़े हुए लाभों के बारे में विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि कैबिनेट ने ज़मीन मालिकों के लिए आवासीय और व्यावसायिक प्लॉटों का क्षेत्र बढ़ाने के लिए संशोधनों को मंजूरी दी है, जबकि हितधारकों के सामने आने वाली चिंताओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को हल करने के लिए ‘आउस्टी पॉलिसी’ में भी कई बदलाव किए गए हैं।
संशोधित नियमों के अनुसार लैंड पूलिंग के तहत आवासीय और व्यावसायिक श्रेणी चुनने वाले ज़मीन मालिकों को प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट मिलते रहेंगे, जबकि कमर्शियल जगह को 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दिया गया है। जो लोग केवल आवासीय श्रेणी चुनते हैं, उन्हें अब 1,600 वर्ग गज की जगह 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ मिलेगा, जबकि व्यावसायिक श्रेणी के प्रोजेक्ट्स के लिए व्यावसायिक जगह 800 वर्ग गज से बढ़ाकर 840 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है।
कैबिनेट ने आउस्टी पॉलिसी में संशोधनों को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत वह ज़मीन मालिक जिनकी 1 एकड़ ज़मीन अधिग्रहित की जाती है, वे 200 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे; जिनकी अधिग्रहित ज़मीन 1 एकड़ से अधिक और 2.5 एकड़ तक है, उन्हें 300 वर्ग गज का प्लॉट मिलेगा; जबकि जिनकी अधिग्रहित ज़मीन 2.5 एकड़ से अधिक है, वे 500 वर्ग गज के प्लॉट के हकदार होंगे।
कैबिनेट ने छोटे किसानों के लिए विशेष लेटर ऑफ इंटेंट की व्यवस्था को भी मंजूरी दी है और ‘सुविधा सर्टिफिकेट’ की अवधि दो साल से बढ़ाकर चार साल कर दी है। इसके अलावा इस नीति के तहत विकसित प्लॉट लेने वाले असली ज़मीन मालिकों को रजिस्ट्रेशन या कन्वेयंस डीड के समय स्टांप ड्यूटी या अन्य खर्च नहीं देने पड़ेंगे। वैकल्पिक रूप से वे अधिग्रहित ज़मीन के कलेक्टर रेट पर गणना किए गए मूल्य तक पंजाब में कहीं भी ज़मीन खरीदते समय स्टांप ड्यूटी की छूट का लाभ ले सकते हैं।
योग्य ज़मीन मालिकों को एक तरजीही ट्यूबवेल कनेक्शन भी मिलेगा, जबकि इस नीति में भाग लेने वाले किसान प्राथमिक स्थानों पर प्लॉटों की आबंटन के योग्य होंगे।
इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि पंजाब सरकार ने मौजूदा नीति संबंधी ज़मीन मालिकों और अन्य हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया था और उनके सुझावों तथा चिंताओं को मुख्य रखते हुए इन संशोधनों को स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा, “आवासीय और व्यावसायिक विकल्प के तहत आवासीय जगह प्रति एकड़ 1,000 वर्ग गज ही रहेगी, जबकि व्यावसायिक जगह 200 वर्ग गज से बढ़ाकर 210 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है। यदि कोई ज़मीन मालिक व्यावसायिक जगह की बजाय केवल आवासीय प्लॉट चुनता है तो आवासीय जगह 1,600 वर्ग गज से बढ़ाकर 1,630 वर्ग गज प्रति एकड़ कर दी गई है।”
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प्रधानमंत्री राम मंदिर में चंदा चोरी के असली गुनहगारों को बचा रहे हैं?- केजरीवाल
भगवान श्री राम के मंदिर में चंदा चोरी मामले को लेकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री प्रभु श्री राम के मंदिर में चंदा चोरी के असली गुनहगारों को बचा रहे हैं? क्योंकि मोदी जी ने खुद ट्रस्ट बनाया, एक-एक व्यक्ति को खुद चुना और अपने खास चंपत राय को मंदिर का सर्वेसर्वा भी बनाया। ऐसे में क्या देश के लोगों को भरोसा है कि मोदी जी असली चोरों को सजा दिलवा पाएंगे? क्योंकि पूरा घटनाक्रम तो यही दिखाता है कि मोदी जी मामले को रफ़ा-दफ़ा करने और दोषियों को बचाने में लगे हुए हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि श्री राम मंदिर की जमीन खरीद, निर्माण और चढ़ावा में इतने बड़े-बड़े घोटाले हो गए, मोदी जी को पता कैसे नहीं चला? सच तो ये है कि उनको सब पता था, लेकिन वह धृतराष्ट्र बने रहे। जब देश के सामने सच आने लगा तो लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए फर्जी एसआईटी बना दी। उन्होंने कहा कि जब हमारे सांसद संजय सिंह जमीन घोटाले के सबूत दिए, तब एसआईटी ने कहा कि वह जमीन घोटाले की जांच नहीं कर रही है। आखिर एसआईटी क्या कर रही है? पहले भी एसआईटी बनी, कुछ नहीं हुआ, इस बार भी एसआईटी बनी है, कुछ नहीं होगा।
गुरुवार को “आप” के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के साथ पार्टी मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि श्री राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी हुई है, अब यह सब लोग मान रहे हैं। पर क्या असली दोषियों को, जो बड़े-बड़े प्रभावशाली और ताकतवर लोग इसमें शामिल हैं, उनको सजा मिल पाएगी? उनकी गिरफ्तारियां होंगी? क्या उनके खिलाफ एक्शन होगा? हर जगह खूब हल्ला मचाया गया है कि मोदी जी हैं, मोदी जी किसी को छोड़ेंगे नहीं, मोदी जी किसी को बख्शेंगे नहीं। मैं लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या उन्हें भी भरोसा है कि मोदी जी असली चोरों को सजा दिलवा पाएंगे? मैं यह नहीं कह सकता और मेरे पास इस बात का कोई सबूत भी नहीं है कि पैसा मोदी जी तक पहुंचा। इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। लेकिन पूरा घटनाक्रम यह जरूर दिखाता है कि मोदी जी ने पूरे मामले को रफा-दफा करने, उसको ढकने और दोषियों को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने खुद पर्सनली एक ट्रस्ट बनाया। इस ट्रस्ट के अंदर का एक-एक व्यक्ति प्रधानमंत्री जी ने खुद चुना है। इस ट्रस्ट में प्रधानमंत्री जी के अपने लोग हैं। चंपत राय प्रधानमंत्री जी के बहुत खास माने जाते हैं। मोदी जी ने चंपत राय को श्री राम मंदिर का जनरल सेक्रेटरी और सर्वेसर्वा बनाया। चंपत राय उनके अपने आदमी माने जाते हैं। 2021 में वहां जमीनों के खूब घोटाले हुए। एक पाठक परिवार ने 2 करोड़ की जमीन इनकी पार्टी के एक व्यक्ति को बेची और 10 मिनट के अंदर उस व्यक्ति ने वही जमीन 18 करोड़ रुपए में मंदिर ट्रस्ट को बेच दी। 10 मिनट के अंदर 2 करोड़ की जमीन 18 करोड़ की हो गई। क्या प्रधानमंत्री को इसका पता नहीं चला? पूरी दुनिया को पता था, मीडिया में भी आया था। इसी तरह से 3 करोड़ की जमीन 24 करोड़ में ट्रस्ट को बेच दी गई। 9 करोड़ की जमीन 55 करोड़ में बेच दी गई। 14 करोड़ की जमीन 95 करोड़ में मंदिर ट्रस्ट ने खरीदी। क्या प्रधानमंत्री इसका पता नहीं चला? यह सब सार्वजनिक डोमेन में हैं, फिर भी क्या प्रधानमंत्री पता नहीं चला?
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि मंदिर निर्माण में इंजीनियर्स का आरोप है कि उनसे टेंडरों पर 40-40 फीसद कमीशन मांगा जाता था। क्या प्रधानमंत्री जी को इसका पता नहीं चला? 40 दिन में 70 बार सीसीटीवी कैमरों के अंदर चोरी पकड़ी गई, क्या उन्हें पता नहीं चला? 8 महीने की सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दी गई, क्या प्रधानमंत्री जी को पता नहीं चला? इतनी चोरी इतने लंबे समय तक चली और क्या उन्हें इसका पता नहीं चला? उस ट्रस्ट के अंदर केंद्र सरकार के होम डिपार्टमेंट का एक अधिकारी भी मौजूद था, उसके बावजूद भी क्या उन्हें पता नहीं चला? प्रधानमंत्री जी को इस देश के हर बूथ के बारे में पता है कि कौन वोटर किस पार्टी का है, किसका नाम एसआईआर में कटवाना है और किसका नाम जुड़वाना है, यहां तक उन्हें पता है। और अगर वे कहें कि उन्हें इस चोरी का पता नहीं चला, तो ये हम मानने को तैयार नहीं हैं। प्रधानमंत्री को इस चोरी का पता था।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सूत्रों से मुझे पता चला है कि आईबी ने कम से कम 12 रिपोर्ट प्रधानमंत्री को सौंपी हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह से कंस्ट्रक्शन में, जमीनों में और चढ़ावे के अंदर बहुत बड़े स्तर पर राम मंदिर में चोरी हो रही है। उन्हें सब कुछ पता था, लेकिन वे धृतराष्ट्र की तरह चुप रहे, आंखों पर पट्टी बांधे रहे। और जब पानी सिर से ऊपर चला गया, जब मजबूरी हो गई और बहुत ज्यादा मुद्दा उठने लग गया, तो उन्होंने लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक एसआईटी बना दी। बिना एफआईआर के एसआईटी बन कैसे सकती है? तब तक एफआईआर ही नहीं हुई थी। बिना एफआईआर के एसआईटी बन ही नहीं सकती। उन्होंने लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक एसआईटी बना दी। उसी दिन देश के लोगों को पता चल गया था कि प्रधानमंत्री जी लीपापोती कर रहे हैं और असली गुनहगारों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इसके बाद उन्होंने एक फर्जी एफआईआर की। फर्जी एफआईआर में आठ छोटे-छोटे लोगों को पकड़ के जेल में डाल दिया। उसमें भी उन आठ छोटे-छोटे लोगों को पुलिस कस्टडी नहीं दिलवाई गई। पुलिस ने कस्टडी मांगी ही नहीं और उन्हें सीधे ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया गया। किसी भी चोरी के मामले में पुलिस कहती है कि हमें पूछताछ करनी है, हमें चोर से पूछना है कि माल कहां है, किसके कहने से चोरी की, कोई मास्टरमाइंड तो नहीं है, कुल कितनी चोरी की? लेकिन यहां पुलिस ने उन आठ लोगों से कोई पूछताछ नहीं की, उनकी पुलिस कस्टडी नहीं ली गई। उनको आश्वासन दिया गया कि चिंता ना करो, दो-चार दिन में बेल करा देंगे। ये चल क्या रहा है प्रधानमंत्री जी?
अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि हमारे सांसद संजय सिंह जब जमीनों के घोटाले के कागज लेकर एसआईटी के पास गए, तो एसआईटी ने जो कहा वह चौंकाने वाला था। एसआईटी ने कहा कि वे जमीनों के घोटाले की तो जांच ही नहीं कर रहे हैं, वे तो केवल चढ़ावे की जांच कर रहे हैं। तो यह एसआईटी कर क्या रही है? यह कंस्ट्रक्शन और जमीनों के घोटाले की जांच नहीं कर रही है, तो फिर वह जांच कौन करेगा? 2021 में यूपी सरकार ने जमीनों के घोटाले पर एक एसआईटी बनाई थी, जो रफा-दफा हो गई। किसी को पता भी नहीं चला कि उसकी रिपोर्ट कब आई और कब गई, उस एसआईटी का क्या हुआ। ऐसे ही इन लोगों ने दोबारा एसआईटी बना दी है। 2021 में कोई जेल नहीं गया, कोई एफआईआर नहीं हुई और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। इस एसआईटी का भी यही हाल होगा, सबको बचाने की कोशिश की जा रही है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जिन लोगों ने इस्तीफे दिए हैं, उनके बारे में कहा जा रहा है कि आज भी मंदिर वही चला रहे हैं। कागजों में इस्तीफा दे दिया गया है, लेकिन मंदिर आज भी उन्हीं लोगों के हाथ में है और वही लोग इसे चला रहे हैं। इनके एक बड़े नेता बृजभूषण हैं, जिनका बयान मैं सोशल मीडिया पर देख रहा था। बृजभूषण का कहना है कि अगर उन्होंने मुंह खोला तो बहुत बड़े-बड़े नाम आएंगे और उन्हें खतरा है। ऐसे कौन से नाम हैं जिनसे बृजभूषण को भी बोलने में डर लग रहा है? बाबा बागेश्वर धाम ने कहा कि इसमें बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं और अगर उन्होंने मुंह खोला तो उन पर भी आंच आ सकती है। जब देश के इतने ताकतवर और बड़े लोग नाम लेने से डर रहे हैं, तो इसका मतलब यह है कि जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे तो सिर्फ आंखों में धूल झोंकने के लिए हैं। असली लोग कोई और हैं और जिन्हें पकड़ा गया है, वे सिर्फ प्यादे हैं।
अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी जी से कहा कि देश की जनता यह जानना चाहती है कि वे किसको बचा रहे हैं, क्यों बचा रहे हैं और उनकी क्या मजबूरी है? देश के करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंची है।
प्रधानमंत्री देश को बताएं, क्या आपको इन घोटालों की जानकारी नहीं थीं?
- भाजपा के एक व्यक्ति ने 2 करोड़ में जमीन खरीदी और 10 मिनट में 18 करोड़ में ट्रस्ट को बेच दी
- 3 करोड़ की जमीन 24 करोड में ट्रस्ट ने खरीदी़
- 9 करोड़ की जमीन 55 करोड में ट्रस्ट ने खरीदी
- 14 करोड़ की जमीन 95 करोड़ में ट्रस्ट ने खरीदी
- म्ंदिर निर्माण में टेंडरों पर 40 फीसद कमीशन मांगा गया
- 40 दिन में सीसीटीवी कैमरे में 70 बार चोरी पकड़ी गई
- आठ महीने की सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दी गई
- इतने लंबे समय तक चढ़ावे की चोरी चली
- ट्रस्ट में गृहमंत्रालय का एक अधिकारी भी था, फिर भी आपको कैसे पता नहीं चला?
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जमीन मालिकों के लिए खुशखबरी, नई लैंड पूलिंग नीति को मंजूरी
मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में संशोधित भूमि पूलिंग नीति (तीसरा संस्करण) को मंजूरी दे दी गई है। सरकार के अनुसार यह नई नीति 1 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में लागू होगी। नई नीति का उद्देश्य किसानों और भूमि मालिकों को पहले की तुलना में अधिक लाभ देना तथा योजनाबद्ध शहरी विकास को बढ़ावा देना है।
नई नीति के तहत अब भूमि देने वाले किसानों और भू-स्वामियों को पहले से बड़े आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट दिए जाएंगे। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विकास कार्य गांवों के समानांतर किए जाएंगे ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सरकार के अनुसार, मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड यूज़) और आवासीय परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित प्रत्येक एकड़ भूमि के बदले अब 210 वर्ग गज का व्यावसायिक प्लॉट मिलेगा, जबकि पहले यह 200 वर्ग गज था। इसके अलावा 1000 वर्ग गज का आवासीय प्लॉट देने का प्रावधान पहले की तरह बरकरार रखा गया है।
संशोधित नीति के दूसरे प्रावधान के तहत, आवासीय परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि पर अब 1600 वर्ग गज की जगह 1630 वर्ग गज का आवासीय प्लॉट मिलेगा। वहीं वाणिज्यिक परियोजनाओं के लिए भूमि देने वाले किसानों को अब 800 वर्ग गज की बजाय 840 वर्ग गज का व्यावसायिक प्लॉट दिया जाएगा। इन सभी लाभों के लिए भूमि का स्वामित्व कम से कम एक एकड़ होना आवश्यक होगा।
सरकार ने यह भी फैसला किया है कि योजना के तहत पात्र भूमि मालिकों को विशेष आशय पत्र (Letter of Intent) जारी किए जाएंगे। इसके अलावा विकसित प्लॉट के रजिस्ट्रेशन के समय मूल भू-स्वामियों से किसी प्रकार का स्टांप शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक राहत मिलेगी।
नई नीति में सड़कों और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले भी प्लॉट देने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत एक एकड़ भूमि के बदले 200 वर्ग गज, एक से डेढ़ एकड़ तक 300 वर्ग गज और ढाई एकड़ या उससे अधिक भूमि के बदले 500 वर्ग गज का प्लॉट दिया जाएगा।
गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने 14 मई 2025 को भूमि पूलिंग नीति लागू की थी, जिसका कई किसान संगठनों ने विरोध किया था और मामला उच्च न्यायालय तक भी पहुंचा था। किसानों की आपत्तियों के बाद सरकार ने नीति में दो बार संशोधन किया और अब तीसरे संशोधित संस्करण को कैबिनेट की मंजूरी दी गई है।
सरकार का दावा है कि नई भूमि पूलिंग नीति से किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा होगी, उन्हें पहले से अधिक लाभ मिलेगा और राज्य में योजनाबद्ध शहरी विकास को नई गति मिलेगी।
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